मतदाता हेल्पलाइन ऐप (एंड्राइड के लिए)
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  • FAQs

    Frequently Asked Questions
    • ECI
      मतदान के लिए पंजीकरण कैसे करें
      भारत निर्वाचन आयोग उन भारतीय नागरिकों के लिए ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण सुविधा प्रदान करता है जिन्‍होंने अर्हक तारीख (निर्वाचक नामावली के पुनरीक्षण वर्ष के जनवरी माह की पहली तारीख)  को 18 वर्ष की आयु प्राप्‍त कर ली हो। नागरिक, स्‍वयं को साधारण मतदाता के रूप में नामांकित करवा सकता है और राष्‍ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल पर प्ररूप 6 ऑनलाइन भर सकता है। पंजीकृत मतदाताओं को उनके नामांकन की स्थिति की भी जाँच करनी चाहिए।
      मतदाता पंजीकरण स्थिति
      https://electoralsearch.in/  पर यह देखने के लिए जाएं कि क्‍या आप मत डालने के लिए पंजीकृत हैं। यदि आपका नाम सूची में शामिल है, तो आप मत डालने के लिए पात्र हैं, अन्‍यथा आपको मतदान के लिए पंजीकरण कराने की आवश्‍यकता है। मतदाता पंजीकरण के लिए https://www.nvsp.in/ पर जाएं।
      मतदान के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराएं
      साधारण मतदाताओं को प्ररूप 6 (ऑनलाईन प्ररूप के लिए लिंक) भरने की जरूरत है। यह प्ररूप ‘पहली बार मतदाता’ के लिए भी और ‘ वे मतदाता जो दूसरे निर्वाचन-क्षेत्र में स्‍थानातंरित हो गए हैं,’ उनके लिए हैं।
      एनआरआई मतदाता को प्ररूप 6क भरने की आवश्‍यकता है (ऑनलाईन प्ररूप के लिए लिंक) निर्वाचक नामावली से हटाने अथवा आपत्ति करने के लिए प्ररूप 7 भरें (ऑनलाईन प्ररूप के लिए लिंक)
      (नाम, फोटो, आयु, एपिक संख्‍या, पता, जन्‍म तिथि, उम्र, रिश्‍तेदार का नाम, रिश्‍ते का प्रकार, लिंग) आदि में किसी भी प्रकार के बदलाव के लिए प्ररूप 8 भरें।
      एक ही निर्वाचन-क्षेत्र में निवास के एक स्‍थान से निवास के दूसरे स्‍थान में परिवर्तन करने के लिए प्ररूप 8क भरें (ऑनलाईन प्ररूप के लिए लिंक)।
      कृपया ध्‍यान दें: यदि मतदाता एक निर्वाचन-क्षेत्र से दूसरे निर्वाचन-क्षेत्र में परिवर्तन कर रहा है तो उसे प्ररूप 6 भरने की जरूरत है (ऑनलाइन प्ररूप के लिए लिंक)। अधिक जानकारी के लिए, कृपया http://ecisveep.nic.in/ पर मतदाता गाइड देखें।
      समय-सीमा और महत्‍वपूर्ण तिथियां
      मतदाता सूची अभ्‍यर्थियों द्वारा नाम-निर्देशन भरने की आखिरी तारीख तक निरंतर अद्यतनीकृत होती रहती है। यह मतदान तारीख के लगभग 3 सप्‍ताह पहले तक होता है। वास्‍तविक मतदान तिथियां, घोषणा के बाद (Election Commission of India).gov.in. पर उपलब्‍ध होंगी।
      मतदान के लिए पंजीकरण हेतु अपेक्षाएं
      भारतीय नागरिक हैं। अर्हक तारीख पर, यानि निर्वाचक नामावली के पुनरीक्षण वर्ष के जनवरी माह की पहली तारीख को 18 वर्ष की आयु प्राप्‍त कर ली हो। जहां आप नामांकित होना चाहते हैं उस निर्वाचन-क्षेत्र के भाग/मतदान क्षेत्र के मामूली रूप से निवासी हों। निर्वाचक के रूप में नामांकित होने से निरर्हित न हों। यदि आप उपर्युक्‍त मापदंडों को पूरा करते हैं तो nvsp.in  पर ऑनलाइन पंजीकरण करें।

    • प्रश्न 1. भारत में 543 संसदीय निर्वाचन क्षेत्र हैं जिसमें से प्रत्येक से एक सदस्य चुना जाता है। इन निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का सीमांकन कौन करता है?
      उत्तर. परिसीमन आयोग
      संविधान के अनुच्छेद 82 के अनुसार, प्रत्येक जनगणना के पश्चात संसद विधि द्वारा परिसीमन अधिनियम को अधिनियमित करती है। अधिनियम के प्रवृत्त् होने के पश्चात केन्द्र सरकार परिसीमन आयोग का गठन करती है। यह परिसीमन आयोग परिसीमन अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का सीमांकन करता है। निर्वाचन क्षेत्रों का वर्तमान परिसीमन, परिसीमन अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत वर्ष 2001 के जनगणना आंकड़ों के आधार पर किया गया है। उपर्युक्त के होते हुए भी, वर्ष 2002 में भारत के संविधान में विशेष रूप से संशोधन किया गया था कि वर्ष 2026 के उपरान्त होने वाली प्रथम जनगणना तक निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन नहीं किया जाएगा। इस प्रकार, वर्ष 2001 के जनगणना आंकड़ों के आधार पर बनाए गए वर्तमान निर्वाचन क्षेत्र वर्ष 2026 के उपरान्त तक होने वाली प्रथम जनगणना तक यथावत बने रहेंगे। 
      प्रश्न 2. लोक सभा में विभिन्न राज्यों को सीटों के आबंटन का मुख्य आधार क्या् है?
      उत्तर.राज्य की जनसंख्या
      लोक सभा की सीटों के आबंटन का आधार जनसंख्या है। जहां तक सम्भव है, प्रत्येेक राज्य अपने जनगणना आंकड़ों के अनुसार अपनी जनसंख्या के अनुपात में लोक सभा प्रतिनिधित्व प्राप्त करता है। 
      प्रश्न 3. क्या‍ लोक सभा में किसी विशेष श्रेणी के लिए सीटों का किसी प्रकार का आरक्षण है?
      उत्तर.हां। 
      लोक सभा में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों का आरक्षण है। यहां भी जनगणना के आंकड़ों को ध्यान में रखा जाता है। 
      प्रश्न 4. यह आरक्षण किस आधार पर किया गया है?
      उत्तर. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 3 के साथ पठित, भारत के संविधान के अनुच्छेतद 330 में निहित प्रावधान द्वारा लोक सभा में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों का आबंटन, संबंधित राज्य में, उनकी कुल जनसंख्या के अनुपात के आधार पर किया जाता है।
      प्रश्न 5. लोक सभा में अनुसूचित जातियों के लिए कितनी सीटें आरक्षित हैं?
      उत्तर. 84
      अनुसूचित जातियों के लिए, लोक सभा में 84 सीटें आरक्षित हैं। लोक प्रतिनिधित्वध (संशोधन) अधिनियम, 2008 द्वारा यथासंशोधित लोक प्रतिनिधित्वत अधिनियम, 1950 की प्रथम अनुसूची में राज्यवार विवरण दिया गया है। 
      प्रश्न 6. लोक सभा में अनुसूचित जनजातियों के लिए कितनी सीटें आरक्षित हैं?
      उत्तर. 47
      लोकसभा में अनुसूचित जनजातियों के लिए 47 सीटें आरक्षित हैं। लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) अधिनियम, 2008 द्वारा यथासंशोधित लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की प्रथम अनुसूची में राज्यवार विवरण दिया गया है। 
      प्रश्न 7. लोक सभा में सीटों की न्यू्नतम संख्या कौन-कौन से राज्यों में है?
      उत्तर. लोक सभा में निम्न लिखित राज्यों तथा संघ शासित क्षेत्रों में प्रत्येक में एक सीट है :- 
      मिज़ोरम  नागालैण्ड सिक्किम  अंडमान और निकोबार द्वीप समूह  चंडीगढ़  दादरा और नागर हवेली  दमन और दीव  लक्षद्वीप  पुडुचेरी प्रश्न 8    . भारत में कितने राज्य हैं?
      उत्तर. 29
      भारत में 29 राज्य हैं नामत: आंध्र प्रदेश , अरूणाचल प्रदेश, असम, बिहार, झारखण्ड, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू् - कश्मीर, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड , ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड और पश्चिम बंगाल ।
      प्रश्न 9. भारत में कितने संघ शासित क्षेत्र हैं?
      उत्तर. सात
      भारत में 7 संघ शासित क्षेत्र हैं-अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, चंडीगढ़, दादरा और नागर हवेली, दमन और दीव, दिल्ली , लक्षद्वीप और पुडुचेरी।
      प्रश्न 10. प्रत्येक राज्यो के लिए एक विधान सभा होती है परन्तु सभी संघ शासित क्षेत्रों के मामले में ऐसा नहीं है। किन संघ शासित क्षेत्रों में विधान सभा है?
      उत्तर.दो 
      सात संघ शासित क्षेत्रों में से केवल दिल्ली और पुडुचेरी में विधान सभाएं हैं।

       

    • प्रश्न 1- क्या किसी संघ के लिए यह आवश्यक है कि वह निर्वाचन आयोग द्वारा पंजीकृत हो?
      उत्तर- नहीं।
      प्रत्येक संघ के लिए यह आवश्यवक नहीं है कि वह स्वयं को निर्वाचन आयोग द्वारा पंजीकृत करवाए। केवल संघ या भारत के व्यक्तिगत नागरिकों का निकाय जो कि स्वयं को राजनैतिक दल कहता है और लोक प्रतिनधित्वय अधिनियम, 1951 (राजनैतिक दलों के पंजीकरण के संबंध में) के भाग IV-क के उपबंधों का लाभ उठाने का इच्छुक है, से अपेक्षा की जाती है कि वह स्वयं को भारत निर्वाचन आयोग के साथ पंजीकृत कराए। 
      प्रश्न 2- भारत निर्वाचन आयोग के साथ पंजीकरण कराने के क्या लाभ है?
      उत्तर- भारत निर्वाचन आयोग के साथ पंजीकृत राजनैतिक दलों द्वारा खडे़ किए गए अभ्यंर्थियों को निर्दलीय अभ्यर्थियों की तुलना में मुक्त प्रतीकों के आबंटन के मामले में प्राथमिकता मिलेगी। इसके अतिरिक्त , समय बीतने के साथ राजनैतिक दल 'राज्यीय दल' या 'राष्ट्रीय दल' के रूप में मान्यिता प्राप्तं कर सकते हैं परंतु यह समय-समय पर यथासंशोधित, निर्वाचन प्रतीक (आरक्षण और आबंटन) आदेश, 1968 में आयोग द्वारा निर्धारित शर्तों को पूरा करने के अध्यआधीन होगा। यदि पार्टी को 'राज्यीय पार्टी' की मान्य्ता मिली हुई है तो यह उन राज्यों , जिसमें उसे इस प्रकार की मान्यता मिली हुई है, के राज्य' में इसके द्वारा खडे़ किए गए अभ्यर्थियों को इसके आरक्षित प्रतीक के विशिष्टु आबंटन की पात्र है और यदि पार्टी को 'राष्ट्रीय पार्टी' के रूप में मान्यता प्राप्त है तो यह पूरे देश में इसके द्वारा खड़े किए गए अभ्यर्थियों को पार्टी द्वारा आरक्षित प्रतीक के विशिष्ट आंबटन की पात्र होगी। मान्यूता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्यीय दलों को नामांकन पत्रों को भरने हेतु केवल एक ही प्रस्तावक की आवश्य्कता है और वे साधारण निर्वाचनों के दौरान आकाशवाणी/दूरदर्शन पर रेडियो/टेली प्रसारण तथा निर्वाचक नामावलियों के नि:शुल्क दो सेटों को लेने के लिए अधिकृत होंगी। 
      प्रश्न 3- पंजीकरण के लिए क्या प्रक्रिया है?
      उत्तर- पंजीकरण के लिए आवेदन को आयोग द्वारा निर्धारित प्रपत्र में सचिव, भारत निर्वाचन आयोग, निर्वान सदन, अशोक रोड, नई दिल्ली -110001 को जमा कराया जाएगा। यह प्रपत्र अनुरोध करके डाक द्वारा मंगाया जा सकता है या आयोग के कार्यालय के काउंटर से लिया जा सकता है।. प्रपत्र और आवश्यिक दिशा-निर्देश मुख्य शीर्ष 'न्यारयिक संदर्भ', उप शीर्ष 'राजनैतिक दल', उप-उप शीर्ष 'राजनैतिक दलों का पंजीकरण' (यहां क्लिक करें) के अंतर्गत आयोग की वेबसाइट पर भी उपलबध हैं। उन्हें वहां से डाउनलोड भी किया जा सकता है। आवेदन को सुस्पंष्ट रूप से पार्टी के पत्र शीर्ष, यदि कोई है, पर टंकित किया जाना चाहिए और इसे पंजीकृत डाक से भेजा जाना चाहिए अथवा पार्टी के संगठन की तारीख से 30 दिनों के अंदर सचिव, निर्वाचन आयोग को व्यिक्तिगत रूप से देना चाहिए।
      2. आवेदन के साथ निम्नतलिखित दस्तावेज/सूचना संलग्न की जानी चाहिए:-
      (i) प्रोसेसिंग शुल्कभ के कारण 10,000/- रू. (दस हजार रूपये केवल) का डिमांड ड्राफ्ट अवर सचिव, भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्लीष के पक्ष में तैयार करवाना। प्रो‍सेसिंग शुल्कक अप्रतिदेय है। 
      (ii) लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29 क की उप-धारा (5) के अधीन यथापेक्षित विशेष उपबंधों वाले ज्ञापन/नियमों तथा विनियमों/पार्टी के संविधान की स्वच्छ रूप से टंकित/मुद्रित प्रति ठीक उसी भाषा में होगी जो यह व्याख्या करती है कि ------------------- (पार्टी का नाम) विधि द्वारा स्थाेपित भारत के संविधान के प्रति तथा समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के सिद्धान्तों के प्रति सच्चीी श्रद्धा और निष्ठा रखेगी और भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता को अक्षुण्णन रखेगी। उपर्युक्तच अनिवार्य उपबंध को किसी एक अनुच्छेरद/खंड के रूप में पार्टी संविधान नियमों तथा विनियमों/ज्ञापन की विषय-वस्तु में शामिल किया जाना चाहिए। 
      (iii) पार्टी संविधान की प्रति पर पार्टी के महासचिव/अध्यक्ष/सभापति द्वारा प्रत्येक पृष्ठ पर विधिवत रूप से प्रमाणीकरण किया जाना चाहिए और उस पर हस्ताक्षरकर्ता की मुहर होनी चाहिए। 
      (iv) पार्टी के संविधान/नियमों तथा विनियमों/ज्ञापन में विभिन्न स्तरों पर संगठनात्माक निर्वाचनों और ऐसे निर्वाचनों की आवधिकता और पार्टी के कार्यालय धारकों की पदावधि का विशेष उपबंध होना चाहिए। 
      (v) संविधान/नियमों तथा विनियमों/ज्ञापन में विलयन/विघटन के मामले में अंगीकार की जाने वाली प्रक्रिया का विशेष रूप से उपबंध होना चाहिए। 
      (vi) पार्टी के कम से कम 100 सदस्यो (सभी कार्यालय धारकों/मुख्यव निर्णय लेने वाले घटकों यथा कार्यकारिणी समिति/कार्यकारिणी परिषद सहित) के संबंध में नवीनतम निर्वाचक नामावलियों से प्रमाणित उद्धरण होने चाहिएं ताकि यह दिखाया जा सके कि वे पंजीकृत निर्वाचक हैं। 
      (vii) पार्टी के अध्यरक्ष/महासचिव द्वारा विधिवत रूप से हस्ताैक्षरित शपथपत्र और प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रे ट/शपथ आयुक्ता/नोटेरी पब्लिक के समक्ष इस संबंध में शपथ ली जाए कि पार्टी का कोई भी सदस्‍य आयोग के साथ पंजीकृत किसी अन्ये राजनैतिक दल का सदस्यं नहीं है। 
      (viii) पार्टी के कम से कम 100 सदस्यों से इस संबंध में व्यक्तिगत शपथपत्र लिया जाए कि कथित सदस्यी पंजीकृत निर्वाचक है और वह आयोग के साथ पंजीकृत किसी अन्य् राजनैतिक दल का सदस्य नहीं है और इस हेतु वह प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेनट/शपथ आयुक्त/नोटेरी पब्लिक के समक्ष विधिवत रूप से शपथ लेगा। ये शपथपत्र उपर्युक्तप (vi) पर उल्लिखित पार्टी आवेदक के 100 सदस्यो के संबंध में निर्वाचक नामावलियों के प्रमाणित उद्धरण प्रस्तुेत करने के अलावा होंगे। 
      (ix)पार्टी के नाम पर यदि कोई बैंक एकाउंट है या उसकी स्थायी एकांउट संख्या है तो उसके ब्योरे। 
      3. उपरोलिखित अपेक्षित सभी दस्तांवेजों सहित आवेदन पार्टी के गठन के पश्चांत 30 दिनों के अंदर आयोग के सचिव के पास पहुंच जाने चाहिए। 
      4. उक्त अवधि के पश्चाुत दिया गया कोई भी आवेदन समयवर्जित हो जाएगा। 
      प्रश्न 4. दल की मान्याता के लिए क्या मापदण्ड है? 
      उत्तर- एक राजनीतिक दल को राज्य में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में तभी माना जाएगा, यदि वह दल या तो खण्ड (क) में विनिर्दिष्ट शर्तों या खण्ड (ख) में विनिर्दिष्ट शर्त को पूरा करता हो, अन्यथा नहीं, यानि 
      (क) कि ऐसे दल - 
      निरन्तर पांच वर्ष की अवधि के लिए राजनीतिक क्रियाकलाप में लगे हों; तथा उस राज्य की लोक सभा के पिछले साधारण निर्वाचन में, या जैसी स्थििति हो, राज्य की विधान सभा में या तो (i) उस सदन के प्रत्येेक पच्चीस सदस्यों के लिए कम से कम लोक सभा के एक सदस्य या उस राज्य से उस संख्या के किसी भी भाग से; 
      या उस विधान सभा के प्रत्येखक तीस सदस्योंभ के लिए उस राज्य की विधान सभा के कम से कम एक सदस्यि या उस संख्यात के किसी भी भाग से निर्वाचित हुआ हो;
      या तो (i) उस सदन के प्रत्येक पच्चीस सदस्यों के लिए कम से कम लोक सभा के एक सदस्य या उस राज्यो से उस संख्या के किसी भी भाग से; 
      या (ii) उस विधान सभा के प्रत्येक तीस सदस्यों के लिए उस राज्य की विधान सभा के कम से कम एक सदस्य या उस संख्या के किसी भी भाग से निर्वाचित हुआ हो;
      (ख) यह कि राज्य में लोक सभा के लिए विगत साधारण निर्वाचन या राज्या की विधान सभा जैसी भी स्थिेति हो, में ऐसे दल द्वारा खड़े किए गए निर्वाचन लड़ने वाले सभी अभ्यार्थियों के द्वारा डाले गए मान्य मतों की कुल संख्या राज्य में ऐसे साधारण निर्वाचन में सभी निर्वाचन लड़ने वाले अभ्य्र्थियों द्वारा डाले गए मान्यन मतों की कुल संख्या के छ: प्रतिशत से कम न हो।
      2. ऊपर खण्ड (क) या खण्डन (ख) में दी गई शर्तें राजनैतिक दल द्वारा, उस परि‍स्थिति में पूरी हो गई नहीं मानी जाएंगी जब लोक सभा या राज्य की विधान सभा का एक सदस्य उस सदन में या उस विधान सभा में, जैसा भी मामला हो, अपने निर्वाचन के बाद उस राजनीतिक दल का सदस्य बन जाता है।
      3. ‘राज्य’ में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली तथा संघ शासित क्षेत्र, पुडुचेरी शामिल हैं। 

      4. यदि किसी राजनीतिक दल को चार या इससे अधिक राज्यों में एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में माना जाता है, तो इसे पूरे भारत में एक ‘राष्ट्रीय दल’ के रूप में जाना जाएगा परन्तुा केवल तब तक, जब तक कि राजनीतिक दल या तो लोक सभा या किसी राज्य की विधान सभा के अनुवर्ती साधारण निर्वाचन की परिणामों के आधार पर चार या इससे अधिक राज्यों में मान्यनता के लिए शर्तों को इसके पश्चात पूरी करता रहे।
      5.यदि किसी राजनीतिक दल को चार से कम राज्योंे में मान्य ता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में माना जाता है, तो इसे उस राज्य या उन राज्यों में जहां इसे मान्यता प्राप्त है, एक ‘राज्यीय दल’ के रूप में जाना जाएगा, परन्तु केवल तब‍ तक जब तक कि उक्त राज्य या राज्यों में लोक सभा या जैसी भी ‍स्थिति हो, राज्यं की विधान सभा के किसी भी अनुवर्ती साधारण निर्वाचन के परिणामों के आधार पर मान्यता के लिए शर्तों को पूरी करता रहे।

    • प्रश्न 1.  क्या एक गैर नागरिक, अभ्य‍र्थी हो सकता है?
      उत्तर-नहीं। 
      एक गैर नागरिक, निर्वाचनों में निर्वाचन लड़ने वाला अभ्यर्थी नहीं हो सकता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 84(क) में यह परिकल्पित है कि कोई व्यक्ति संसद में सीट को भरने के लिए चुने जाने हेतु तब तक पात्र नहीं होगा जब तक कि वह भारत का नागरिक न हो। संविधान के अनुच्छेद 173(क) में राज्य विधान सभाओं के लिए इसी प्रकार का प्रावधान है। 
      प्रश्न 2. लोक सभा या विधान सभा का अभ्यर्थी होने के लिए न्यूनतम आयु क्या है? 
      उत्तर-पच्चीस वर्ष। 
      भारतीय संविधान के अनुच्छे।द 84(ख) में यह प्रावधान है कि लोक सभा निर्वाचन हेतु अभ्य‍र्थी होने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष होगी। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 36(2) के साथ पठित संविधान के अनुच्छेद 173(ख) के द्वारा विधान सभाओं के अभ्य‍र्थी होने के लिए यही प्रावधान है। 
      प्रश्न 3. यदि मैं किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं हूं, तो क्या मैं निर्वाचन लड़ सकता हूं?
      उत्तर- नहीं।
      अभ्यर्थी के रूप में निर्वाचन लड़ने के लिए व्यक्ति को मतदाता के रूप में अवश्य पंजीकृत होना चाहिए। लोक प्रतिनिधित्वय अधिनियम, 1951 की धारा 4(घ) व्यक्ति को निर्वाचन लड़ने से प्रतिबाधित करता है जब तक वह किसी संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में एक निर्वाचक न हो। लोक प्रतिनिधित्वत अधिनियम, 1951 की धारा 5(ग) में विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों के लिए यही प्रावधान है। 
      प्रश्न 4. मैं दिल्ली में एक मतदाता के रूप में पंजीकृत हूं। क्या मैं हरियाणा या महाराष्ट्र्, या उड़ीसा से लोक सभा का निर्वाचन लड़ सकता हूं?
      उत्तर- हां।
      यदि आप दिल्ली में एक पंजीकृत मतदाता हैं, तो आप लोक प्रतिनिधित्वत अधिनियम, 1951 की धारा 4(सी), 4(सी सी) तथा 4(सी सी सी) के अनुसार असम, लक्षद्वीप तथा सिक्किम को छोड़कर देश में किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से लोक सभा का निर्वाचन लड़ सकते हैं। 
      प्रश्न 5. यदि कोई व्यक्ति किसी अपराध का दोषी है और उसे 3 वर्ष की सजा दी जाती है, तो क्या वह निर्वाचन लड़ सकता है?
      उत्तर-नहीं 
      लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी अपराध का दोषी है तथा 2 वर्ष या इससे अधिक की सजा दी गई है, तो वह निर्वाचनों को लड़ने के लिए अपात्र होगा। 
      प्रश्न 6. यदि वह जमानत पर है, उसके अपील का निपटान लंबित है, तो क्या‍ वह निर्वाचन लड़ सकता है?
      उत्तर- नहीं
      यद्यपि कोई व्यक्ति दोष सिद्ध‍ होने के पश्चात जमानत पर है, तथा उसकी अपील निपटान के लिए लंबित है, तो वह भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्वाचन लड़ने से निरर्हित किया जाता है। 
      प्रश्न 7. क्या कोई व्यक्ति जेल में बंद रहकर निर्वाचन में मत डाल सकता हैै? 
      उत्तर-नहीं 
      लोक प्रतिनिधित्व, अधिनियम, 1951 की धारा 62(5) के अनुसार, जेल में बंद कोई भी व्यक्ति निर्वाचन में मत नहीं डालेगा, चाहे वह कारावास की सजा के अधीन हो या देश निकाला हो या अन्थानुस, या पुलिस की कानूनी हिरासत में हो। 
      प्रश्न 8. प्रत्येक अभ्यर्थी को प्रतिभूति राशि जमा कराना अपेक्षित है। लोक सभा निर्वाचन के लिए प्रतिभूति जमा राशि कितनी है? 
      उत्तर-पच्ची्स हजार रुपए। 
      लोक प्रतिनिधित्वह अधिनियम, 1951 की धारा 341(क) के अनुसार, प्रत्येतक व्यक्ति को लोक सभा निर्वाचनों के लिए 25000/- रु. (मात्र पच्ची्स हजार रुपए) की प्रतिभूति राशि जमा कराना अपेक्षित है। 
      प्रश्न 9. क्या अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थी के लिए कोई छूट है?
      उत्तर- हां
      लोक प्रतिनिधित्व‍ अधिनियम, 1951 की उसी धारा 34 में यह प्रावधान है कि अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के अभ्य्र्थी के लिए 12,500 रु. (मात्र बारह हजार पांच सौ रुपए) की प्रतिभूति राशि जमा कराना अपेक्षित है। 
      प्रश्न 10 . विधान सभा के लिए प्रतिभूति जमा राशि कितनी है?
      उत्तर- दस हजार रुपए।
      लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 34(1)(ख) के अनुसार विधान सभा का निर्वाचन लड़ने वाले सामान्यय अभ्यर्थी को 10,000/- रुपए की प्रतिभूति राशि जमा करानी होगी। अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थी को 5000/- (मात्र पांच हजार रुपए) की प्रतिभूति राशि जमा करनी होगी। 
      प्रश्न 11. इससे पूर्व लोक सभा निर्वाचन के लिए प्रतिभूति जमा राशि कितनी थी?
      उत्तर- 1996 एवं इससे पूर्व में आयोजित लोक सभा निर्वाचन के दौरान सामान्य तथा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थी के लिए प्रतिभूति जमा राशि क्रमश: 500/- रुपए (मात्र पांच सौ रुपये) तथा 250/-रुपए (मात्र दो सौ पचास रुपए) थी।
      प्रश्न 12 . पूर्व में विधान सभा के निर्वाचनों के लिए प्रतिभूति जमा राशि कितनी थी?
      उत्तर- 1996 तथा इससे पूर्व में आयोजित विधान सभा निर्वाचनों के दौरान सामान्यत तथा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए प्रतिभूति जमा राशि क्रमश: 250/- (मात्र दो सौ पचास रुपए) तथा 125/- (मात्र एक सौ पच्चीस रुपए) थी। 
      प्रश्न 13. प्रतिभूति जमा राशि में कब बदलाव किया गया?
      उत्तर- 2009 की अधिनियम 41 द्वारा लगभग 1-2-2010 से प्रतिभूति जमा राशि की वृद्धि में परिवर्तन किया गया।
      प्रश्न 14. यदि आप एक मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय या राज्यीय दल के अभ्यर्थी हैं, तो आपको अपने नामांकन के लिए कितने प्रस्तावकों की आवश्यकता है?
      उत्तर- केवल एक 
      यदि आप एक मान्यता प्राप्त राष्ट्री्य/राज्यीय दल के अभ्यर्थी हैं, तो लोक प्रतिनिधित्व् अधिनियम, 1951 की धारा 33 के द्वारा निर्वाचन क्षेत्र के प्रस्ता्वक के रूप में केवल एक निर्वाचक की आवश्यकता होगी। 
      प्रश्न 15. यदि आप एक निर्दलीय अभ्यर्थी हैं या गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के एक अभ्यर्थी हैं तो आपको कितने प्रस्तावकों की आवश्यकता है?
      उत्तर- दस 
      लोक प्रतिनिधित्वत अधिनियम, 1951 की धारा 33 में यह प्रावधान है कि एक निर्दलीय अभ्यर्थी या गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के एक अभ्यर्थी के रूप में निर्वाचन क्षेत्र से दस निर्वाचकों को प्रस्तावकों आपके नामंकन पत्र पर हस्तािक्षर करने चाहिएं। 
      प्रश्न 16. क्या कोई व्यक्ति अपनी इच्छानुसार कितने भी निर्वाचन क्षेत्रों से लोक सभा/ विधान सभा का निर्वाचन लड़ सकता है?
      उत्तर- नहीं
      लोक प्रतिनिधित्वन अधिनियम, 1951 की धारा 33(7) के अनुसार, एक व्यक्ति दो से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों से लोक सभा/विधान सभा का निर्वाचन नहीं लड़ सकता है। 
      प्रश्न 17. किस अभ्यर्थी को प्रतिभूति जमा राशि को गंवाना पड़ता है?
      उत्तर- 3354 । एक हारा हुआ अभ्यर्थी, जो निर्वाचन क्षेत्र में डाले गए मान्यै मतों का छठा भाग प्राप्त करने में असफल रहता है, उसे प्रतिभूति जमा राशि गंवानी पड़ती है।
      प्रश्न 18. अब तक भारत में किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में किसी भी ‍निर्वाचन में अभ्यर्थियों की अधिकतम संख्या कितनी रही है?
      उत्तर- 1996 में तमिलनाडु विधान सभा के साधारण निर्वाचन के दौरान तमिलनाडु के मोडाक्कुुरिचि विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र में 1033 निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थी थे। मतपत्र पुस्तिका के रूप में थी। 
      प्रश्न 19. निर्वाचन आयोग ने कुछ राजनैतिक दलों को राष्ट्रीय दलों के रूप में और कुछ अन्य‍ को राज्यीय दलों के रूप में मान्यता प्रदान की है। कितने राष्ट्रीय और कितने राज्यी‍य दल हैं?
      उत्तर- वर्ष 2004 में साधारण निर्वाचनों के समय भारत निर्वाचन आयोग ने 6 राजनैतिक दलों को राष्ट्रीय दलों के रूप में तथा 36 राजनैतिक दलों को भिन्न-भिन्न राज्यों् में राज्यीय दल के रूप में मान्यता प्रदान की है। 
      प्रश्न 20. मतदान के दिन प्रत्ये क मतदाता को मतदान करने के लिए मतदान केन्द्र तक जाना पड़ता है। प्राय: निर्वाचन आयोग के मानकों के अधीन एक मतदान केन्द्र पर कितने मतदाताओं को नियत किया जाता है?
      उत्तर- रिटर्निंग अधिकारी के लिए हस्त पुस्तिका के अध्यााय –II के पैरा 2 में यथा निहित निर्वाचन आयोग के अनुदेशों के अनुसार, एक मतदान केन्द्र , लगभग 800-1000 निर्वाचकों को प्राय: कवर करते हुए, सु-निर्धारित मतदान क्षेत्र के लिए उपलब्ध करवाया जाना चाहिए। यद्यपि, अपवादी मामलों में, बड़े गावों या शहरी क्षेत्र में किसी मतदान क्षेत्र को तोड़ने से बचाने के लिए ऐसी संख्याए 1000 से अधिक हो सकती है। जब संख्या 1200 से अधिक हो जाती है तो अतिरिक्त मतदान केन्द्र् स्थापित किये जाने चाहिए। समाज के कमजोर हिस्से द्वारा बसाए गए इलाकों में मतदान केन्द्र स्थापित करने का प्रावधान है यद्यपि संख्या‍ 500 से कम हो सकती है। यदि वहां कुष्ट आरोग्य, निवास है तो केवल संबंधियों के लिए एक अलग मतदान केन्द्रय स्थाापित किया जा सकता है। देश में मतदान केन्द्रों के युक्तिकरण के लिए आयोग ने आदेश जारी किए है और निर्वाचकों की सीमा प्रति मतदान केन्द्र 1500 तक बढ़ा दी गई है क्योंकि अब इलेक्ट्रॉ निक वोटिंग मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। 
      प्रश्न 21. प्राय: आयोग के मानकों के अधीन, आपके घर से मतदान केन्द्र कितनी दूर हो सकता है?
      उत्तर- 2 कि. मीटर से अधिक नहीं 
      रिटर्निंग अधिकरी के लिए हस्तपुस्तिका के अध्याय–II के पैरा 3 के अनुसार, मतदान केन्द्र इस प्रकार स्थापित किए जाने चाहिएं कि साधारणत: किसी मतदाता को अपने मतदान केन्द्र तक पंहुचने के लिए 2 कि.मी. से अधिक यात्रा न करनी पडे़। 
      प्रश्न् 22. जब आप अपने मतदान केन्द्र की तरफ जा रहे हों और कोई अभ्यर्थी या उसके एजेंट आपको मतदान केन्द्र तक नि:शुल्क् लिफ्ट की पेशकश करते हैं। क्या् आप उस लिफ्ट की पेशकश को स्वी्कार कर सकते हैं?
      उत्तर- नहीं 
      लोक प्रतिनिधित्व/ अधिनियम, 1951 की धारा 123(5) के अधीन यह एक भ्रष्ट आचरण है। यह अपराध उक्ति अधिनियम की धारा 133 के अधीन कारावास से जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकती है और/या जुर्माने से दंडनीय है। 
      प्रश्न 23. अपना मत डालने के बाद जब आप वापिस अपने घर जा रहे हों क्या उस समय आप ऐसी लिफ्ट की पेशकश स्वीकार कर सकते हैं?
      उत्तर-नहीं
      उपर्युक्त् अनुसार धारा 123(5) के अधीन भ्रष्ट आचरण का प्रावधान किसी निर्वाचक को किसी मतदान केन्द्र तक या से ले जाने को कवर करेगा। 
      प्रश्न 24. कोई आपको किसी अभ्यर्थी के लिए मतदान करने हेतु कुछ धन की पेशकश करता है। क्या आप ऐसे धन को स्वीकार कर सकते हैं?
      उत्तर- नहीं
      किसी अभ्यर्थी के लिए मतदान करने हेतु धन को स्वीकार करना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123(1) के अधीन ''रिश्वत'' का भ्रष्ट आचरण है। यह भारतीय दण्ड संहिता की धारा 171-ख के अधीन कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है या जुर्माने या दोनों से दंडनीय है।
      प्रश्न 25. कोई आपको किसी विशिष्ट अभ्यर्थी के लिए मतदान नहीं करने हेतु धन की पेशकश करता है क्यान आप ऐसे धन को स्वीीकार कर सकते हैं?
      उत्तर- नहीं
      यदि कोई व्यक्ति किसी विशिष्ट अभ्यर्थी के लिए मतदान नहीं करने हेतु धन स्वीीकार करता है तो यह रिश्वत का भ्रष्ट आचरण होगा। 
      प्रश्न26. कोई आपको किसी विशिष्ट अभ्यर्थी के लिए मतदान करने या मतदान न करने के लिए आपको व्हिस्की, मदिरा या अन्य मादक वस्तुओं की पेशकश करता है या आपको रात्रि भोज देता है। क्या आप ऐसी पेशकश को स्वीकार कर सकते हैं?
      उत्तर- नहीं
      किसी विशिष्ट‍ अभ्यर्थी के लिए मतदान करने या मतदान न करने के लिए मदिरा या अन्य मादक वस्तु्ओं या रात्रि भोज की किसी पेशकश को स्वीकार करना रिश्वत है। 
      प्रश्न 27. क्या कोई धार्मिक या आध्यात्मिक पथ प्रदर्शक अपने अनुनायियों को किसी विशिष्टं अभ्यर्थी के लिए मतदान करने हेतु यह कहते हुए निदेश दे सकता है कि अन्यथा वे दैवीय प्रकोप के भागी होंगे?
      उत्तर- नहीं
      यदि कोई व्यक्ति मतदाता को यह कहते हुए किसी विशिष्ट अभ्यर्थी के लिए मतदान करने हेतु प्रभावित या कोशिश करता है कि अन्य था वे दैविय प्रकोप के भागी होंगे तो वह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123(2) के अधीन मतदाता पर अनुचित प्रभाव डालने के भ्रष्ट आचरण का दोषी होगा। यह भारतीय दण्ड संहिता की धारा 171ग के अधीन एक अपराध भी है और कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक हो सकती है या जुर्माने से, या दोनों से दण्डनीय होगा। 
      प्रश्न 28. क्या कोई मतदाता को धमकी दे सकता है कि यदि वह किसी विशिष्ट अभ्यर्थी के लिए मतदान करता है या किसी अन्य विशिष्ट अभ्यर्थी के लिए मतदान नहीं करता है तो उसे समुदाय से बाहर कर दिया जाएगा? 
      उत्तर- नहीं
      मतदाता को किसी भी प्रकार की धमकी देना कि यदि वह किसी विशिष्ट अभ्यर्थी के लिए मतदान करता है या किसी अन्य विशिष्ट व्यक्ति के लिए मतदान नहीं करता है तो उसे समुदाय से बाहर कर दिया जाएगा, लोक प्रतिनिधित्व‍ अधिनियम, 1951 की धारा 123(2) के अधीन अनुचित प्रभाव डालने का भ्रष्ट आचरण है। यह भारतीय दण्ड संहिता की धारा 171च के अधीन कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष तक हो सकती है या जुर्माने से, या दोनों से दण्डनीय है। 
      प्रश्न 29. क्या कोई किसी व्यिक्ति को यह कह सकता है कि उसे विशिष्ट व्यक्ति के लिए मतदान करना चाहिए या नहीं करना चाहिए क्योंाकि अभ्यर्थी विशेष क्षेत्र, जाति या समुदाय से संबंध रखता है या विशेष भाषा बोलता है?
      उत्तर- नहीं
      कोई किसी व्यक्ति को यह कहता है कि उसे विशिष्ट व्यक्ति के लिए मतदान करना चाहिए या नहीं करना चाहिए क्योंकि वह विशेष क्षेत्र, जाति या समुदाय से संबंध रखता है या विशेष भाषा बोलता है, यह लोक प्रति‍निधित्वक अधिनियम, 1951 की धारा 123(3) के अधीन भ्रष्ट आचरण है। 
      प्रश्न 30. क्याे एक अभ्यर्थी अपने निर्वाचन में जितना वह चाहता है खर्च करने के लिए स्वतंत्र है?
      उत्तर- नहीं
      एक अभ्यर्थी अपने निर्वाचन में जितना वह चाहता है खर्च करने के लिए स्वतंत्र नहीं है। विधि निर्धारित करती है कि कुल निर्वाचन व्यय, निर्वाचनों का संचालन नियम, 1961 के नियम 90 के अधीन निर्धारित अधिकतम सीमा से अधिक नहीं होगा। यह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123(6) के अधीन भ्रष्ट आचरण होगा। 
      प्रश्न 31. बड़े राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में निर्वाचन व्यय के लिए अधिकतम सीमा क्या है?
      उत्तर- निर्वाचन व्ययय के लिए अधिकतम सीमा समय-समय पर पुनरीक्षित होती रहती है। वर्तमान में, बड़े राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, मध्य, प्रदेश में संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में निर्वाचन व्य्य की अधिकतम सीमा 40 लाख रु. है। 
      प्रश्न 32. इन बड़े राज्यों में विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र के लिए ऐसे व्यय की अधिकतम सीमा क्या है?
      उत्तर- उपर्युक्त बड़े राज्यों में विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र के लिए निर्वाचन व्यय की अधिकतम सीमा 16 लाख रु. है। 
      प्रश्न 33. वर्ष 2009 में पिछले साधारण निर्वाचन के समय उपर्युक्त राज्यों में संसदीय एवं विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अधिकतम सीमा क्या थी?
      उत्तर- साधारण निर्वाचन, 2009 के समय उपर्युक्त बड़े राज्यों में संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के लिए निर्वाचन व्यय की अधिकतम सीमा 25 लाख रु. थी और विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र के लिए 10 लाख रु. थी। 
      प्रश्न 34. क्या ये अधिकतम सीमाएं सभी राज्यों के लिए एक समान है? यदि नहीं तो वर्तमान में संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के लिए निम्नतम सीमा क्या है?
      उत्तर-नहीं 
      निर्वाचन व्यय की अधिकतम सीमा राज्य से राज्य बदलती है। वर्तमान में, संसदीय निर्वाचन क्षेत्र दादरा और नागर हवेली, दमन और दीव तथा लक्ष्द्वीप के निर्वाचन क्षेत्र के लिए निम्नतम सीमा 16 लाख रु. है। गोवा, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा एवं पुडुचेरी में विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र के लिए निम्नतम सीमा 8 लाख रु. है। 
      प्रश्न 35. क्या अभ्यर्थियों को निर्वाचन व्यय का कोई लेखा दाखिल करना अपेक्षित है?
      उत्तर-लोक प्रतिनिधित्व3 अधिनियम, 1951 की धारा 77 के अधीन, संसद या राज्य विधान सभाओं के निर्वाचन में प्रत्ये‍क अभ्यर्थी निर्वाचन संबंधी उस सब व्यय का जो उस तारीख जिसको यह नाम निर्दिष्ट किया गया है और उस निर्वाचन के परिणामों की घोषणा की तारीख, जिनके अंतर्गत ये दोनों तारीखें आती हैं, के बीच स्वयं द्वारा या उसके निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा उपगत या प्राधिकृत किया गया है पृथक और सही लेखा या तो स्व‍यं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखना अपेक्षित है। प्रत्येक निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थी को उक्त खाते की सही प्रति निर्वाचन के परिणाम के 30 दिनों के अंदर दाखिल करनी पड़ती है। 
      प्रश्न 36. वह प्राधिकारी कौन है जिसके पास ऐसे लेखे दाखिल किए जाते हैं?
      उत्तर- प्रत्येक राज्य में, निर्वाचन व्यय का लेखा निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थी द्वारा उस निर्वाचन क्षेत्र, जहां से वह निर्वाचन लड़ रहा है, के जिले के जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल करेगा। केन्द्र् शासित क्षेत्रों के मामले में, ऐसे लेखे संबंधित रिटर्निंग अधिकारी के पास दाखिल किए जाते हैं। 
      प्रश्न 37. यदि एक अभ्यर्थी एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचन लड़ रहा है तो क्या उसे अलग-अलग लेखे या केवल एक समेकित लेखा दाखिल करना अपेक्षित है?
      उत्तर- यदि एक अभ्यर्थी एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचन लड़ रहा है तो उसे प्रत्येक निर्वाचन, जो उसने लड़ा है, के लिए निर्वाचन व्य्य की अलग-अलग विवरणी दाखिल करनी पड़ती है। प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिए निर्वाचन अलग-अलग निर्वाचन है। 
      प्रश्न 38. यदि एक अभ्यर्थी निर्वाचन व्यय का अपना लेखा दाखिल नहीं करता है तो दण्ड क्या है?
      उत्तर- लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 10क के अधीन, यदि निर्वाचन आयोग का समाधान हो जाता है कि कोई व्यिक्ति निर्वाचन व्ययों का लेखा उस समय के भीतर और रीति में जैसी इस अधिनियम के द्वारा या अधीन अपेक्षित है, दाखिल करने में असफल रहा है तथा उस असफलता के लिए कोई अच्छा कारण या औचित्य नहीं रखता है तो आयोग के पास उसे संसद के किसी भी सदन या राज्यअ की विधान सभा अथवा विधान परिषद के लिए सदस्ये चुने जाने या होने के लिए तीन वर्ष की अवधि के लिए निरर्हित करने की शक्ति है। 
      प्रश्न 39. वह क्या समय है जिसके बाद सार्वजनिक सभाएं एवं जुलूस आयोजित नहीं किए जा सकते है?
      उत्तर- लोक प्रतिनिधित्वं अधिनियम, 1951 की धारा 126 के अनुसार, मतदान की समाप्ति के लिए नियत किए गए समय के समाप्त होने वाले 48 घंटों की अवधि के दौरान सार्वजनिक सभाएं एवं जुलूस आयोजित नहीं किए जा सकते। 
      प्रश्न 40. मतदान के दिन उसकी सहमति के बावजूद भी, क्या कोई दूसरे व्यक्ति के नाम पर मतदान कर सकता है?
      उत्तर-नहीं 
      मतदान के दिन उसकी सहमति के बावजूद भी कोई दूसरे व्यक्ति के नाम पर मतदान नहीं कर सकता। यदि वह ऐसा करता है तो यह प्रतिरूपण होगा, जो भारतीय दण्ड संहिता की धारा 171घ के अधीन एक अपराध है। यह अपराध कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष तक हो सकती है या जुर्माने से, या दोनों से दंडनीय है। 
      प्रश्न 41. क्या‍ कोई एक से अधिक बार मतदान कर सकता है, यदि उसका नाम (गलती से) एक से अधिक स्थानों में शामिल हो?
      उत्तर- नहीं 
      कोई भी व्यक्ति एक से अधिक बार मतदान नहीं कर सकता है, चाहे उसका नाम एक से अधिक स्थान में शामिल क्यों नहीं हो। यदि वह ऐसा करता है तो वह प्रतिरूपण का दोषी होगा जो उपर्युक्त के अनुसार दंडनीय होगा। 
      प्रश्न 42. यदि आप अपने मतदान केन्द्र पर जाते हैं और आपको यह पता चलता है कि किसी और व्यक्ति ने आपके लिए प्रतिरूपण कर दिया है और आपके नाम से पहले से ही मतदान कर दिया है तो क्या आप ऐसी परिस्थिति में मतदान कर सकते हैं?
      उत्तर-हां 
      यदि कोई व्यक्ति यह पाता है कि किसी और व्यक्ति ने पहले ही उसके नाम से मतदान कर दिया है तो भी उसे मतदान करने की अनुमति दी जाएगी। लेकिन, उसके मतपत्र को पीठासीन अधिकारी द्वारा निविदत्त मतपत्र के रूप में चिह्नित किया जाएगा। इसे निर्वाचनों का संचालन नियम, 1961 के नियम 42 के अनुसार विहित आवरण में अलग से रखा जाएगा। 

    • प्र.1 मतों की गणना और निर्वाचन के परिणाम की घोषणा के लिए कौन उत्तरदायी है?
      उत्तर : रिटर्निंग ऑफिसर
      लोक प्रतिनिधित्वत अधिनियम, 1951 की धारा 64 के अनुसार, मतों की गणना, निर्वाचन क्षेत्र के रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा या उसके पर्यवेक्षण/निदेशन के अधीन की जाती है। जब गणना पूरी हो जाती है तो रिटर्निंग ऑफिसर लोक प्रतिनिधित्वण अधिनियम, 1951 की धारा 66 के उपबन्धों के अनुसार परिणाम की घोषणा करता है। 
      प्र.2 सभी निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम घोषित हो जाने के बाद, कौन-सा प्राधिकारी नई लोक सभा का गठन करेगा-राष्ट्रषपति या निर्वाचन आयोग?
      उत्तर : भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई)
      लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 73 के अनुसार सभी संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम घोषित हो जाने के बाद भारत निर्वाचन आयोग, चुने गए सदस्ये के नामों को सरकारी राजपत्र में अधिसूचित करके नई लोक सभा का गठन करेगा।

ईसीआई मुख्य वेबसाइट


eci-logo.pngभारत निर्वाचन आयोग एक स्‍वायत्‍त संवैधानिक प्राधिकरण है जो भारत में निर्वाचन प्रक्रियाओं के संचालन के लिए उत्‍तरदायी है। यह निकाय भारत में लोक सभा, राज्‍य सभा, राज्‍य विधान सभाओं और देश में राष्‍ट्रपति एवं उप-राष्‍ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों का संचालन करता है। निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्‍छेद 324 और बाद में अधिनियमित लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम के प्राधिकार के तहत कार्य करता है। 

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