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  1. Release of funds under MPs’/MLAs’ Local Area Development Scheme - General Elections to the Legislative Assemblies of Assam, Kerala, Tamil Nadu, West Bengal and Puducherry, 2021

    General Elections to the Legislative Assemblies of Assam, Kerala, Tamil Nadu, West Bengal and Puducherry, 2021 and Bye elections to the Parliamentary Constituencies of Malappuram, Kerala State and Kanniyakumari, Tamil Nadu State - Release of funds under MPs’/MLAs’ Local Area Development Scheme.

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  2. Immediate action to be taken for enforcement of Model Code of Conduct

    Immediate action to be taken for enforcement of Model Code of Conduct after announcement of General Elections to the Legislative Assemblies of Assam, Kerala, Tamil Nadu, West Bengal and Puducherry, 2021 and Bye elections to the Parliamentary Constituencies of Malappuram, Kerala State and Kanniyakumari, Tamil Nadu State - regarding.

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  3. आदर्श आचार संहिता लागू होना

    सं. 437/6/1/ईसीआई/अनुदेश/प्रकार्या./एमसीसी/2021         
    दिनांक: 26 फरवरी, 2021
     
    सेवा में 
    मंत्रिमंडल सचिव,भारत सरकार,राष्ट्रपति भवन,नई दिल्ली।  मुख्य सचिव, असम सरकार, दिसपुर; केरल सरकार, तिरुवनन्तपुरम; तमिलनाडु सरकार, चेन्नई; पश्चिम बंगाल सरकार, कोलकाता; पुडुचेरी सरकार, पुडुचेरी मुख्य निर्वाचन अधिकारी, असम, दिसपुर; केरल, तिरुवनन्तपुरम; तमिलनाडु, चेन्नई; पश्चिम बंगाल, कोलकाता; पुडुचेरी, पुडुचेरी विषय : आदर्श आचार संहिता लागू होना-असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी  की विधान सभाओं के लिए साधारण निर्वाचन और मलप्पुरम, केरल राज्य तथा कन्याकुमारी, तमिलनाडु राज्य के संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के लिए उप निर्वाचन-तत्संबंधी।
    महोदय/महोदया, 
    मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि आयोग ने असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी की विधान सभाओं के लिए तथा मलप्पुरम, केरल राज्य और कन्याकुमारी, तमिलनाडु राज्य के लिए उप-निर्वाचनों को आयोजित करने के लिए कार्यक्रम की घोषणा की है (प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे. नो./16/2021 और सं. ईसीआई/प्रे. नो./17/2021, दोनों दिनांक 26 फरवरी, 2021 जो आयोग की वेबसाइट https://eci.gov.in/ पर उपलब्ध है)। 
    2.     इस घोषणा के साथ ही राजनैतिक दलों और अभ्‍यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के उपबंध तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं और तब तक लागू रहेंगे जब तक कि उपर्युक्त राज्यों में साधारण निर्वाचन सम्पन्न न हो जाएं। इसे केन्द्र और राज्य सरकार, और केन्‍द्र सरकार/राज्‍य सरकार के सभी मंत्रालयों/विभागों/कार्यालयों के ध्‍यान में लाया जाए। आपके द्वारा इस आशय के निमित्त जारी किए गए अनुदेशों की एक प्रति सूचना एवं रिकार्ड हेतु भारत निर्वाचन आयोग को भेजी जाए। 
    3.     आपका ध्‍यान ‘सत्‍तासीन दल’ से संबंधित आदर्श आचार संहिता के विशेष उपबंधों की ओर आकृष्‍ट किया जाता है जिसमें, अन्‍य बातों के साथ-साथ, यह कहा गया है कि सत्तासीन दल, चाहे केन्‍द्र में या संबंधित राज्‍य में, यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी ऐसी शिकायत के लिए कोई कारण न दिया जाए कि उसने अपने निर्वाचन अभियान के प्रयोजनों के लिए और विशेष रूप से निम्नलिखित के लिए अपनी आधिकारिक हैसियत का प्रयोग किया है
     (i)    (क) मंत्री अपने अधिकारिक दौरे को निर्वाचन प्रचार अभियान संबंधी कार्य से नहीं मिलाएंगे और निर्वाचन प्रचार अभियान संबंधी कार्य के दौरान अधिकारिक तंत्र या कार्मिक का उपयोग भी नहीं करेंगे;
           (ख) सरकारी हवाई-जहाज, वाहनों सहित सरकारी परिवहन, तंत्र एवं कार्मिक का उपयोग सत्तासीन दल के हित को आगे बढ़ाने के लिए नहीं किया जाएगा;
    (ii)    निर्वाचन सभाओं को आयोजित करने के लिए सार्वजनिक स्‍थानों जैसे मैदानों आदि के उपयोग और निर्वाचनों के संबंध में एयर-फ्लाइट के लिए हैलीपैड के प्रयोग पर इसके द्वारा एकाधिकार नहीं जमाया जाएगा। अन्‍य दलों और अभ्‍यर्थियों को उन्‍हीं शर्तों एवं निबंधनों पर ऐसे स्‍थानों एवं सुविधाओं का उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी जिन पर सत्तासीन दल द्वारा उनका उपयोग किया जाता है;
    (iii)    जहां के लिए निर्वाचनों की घोषणा हुई है या जहां निर्वाचन हो रहे हैं, वहां के विश्राम गृह, डाक बंगला या अन्‍य सरकारी आवास उन राजनैतिक पदाधिकारियों को, समयपूर्ण आधार पर दिए जा सकते हैं जिन्हें विभिन्न राज्य सरकारों या केन्द्र सरकार द्वारा अपने कानूनों के उपबंधों के तहत राज्य द्वारा जेड स्केल या उससे ऊपर या समकक्ष स्तर की सुरक्षा प्रदान की गई है। यह इस शर्त के अध्यधीन होगा कि ऐसा आवास पहले से ही निर्वाचन सम्बन्धी अधिकारियों या प्रेक्षकों को आबंटित न हो या उनके द्वारा धारित न हो। सरकारी आवास गृह/विश्राम गृह या अन्य सरकारी आवास इत्यादि में ठहरने के समय ऐसे राजनैतिक पदाधिकारी कोई राजनैतिक गतिविधि नहीं करेंगे।
    (iv)   समाचार पत्रों और अन्‍य मीडिया में सरकारी राजकोष की लागत से विज्ञापन जारी करने और सत्तासीन दल की प्रत्‍याशाओं को आगे बढ़ाने की दृष्टि से उपलब्धियों के बारे में राजनैतिक समाचारों के पक्षपाती कवरेज और प्रचार के लिए निर्वाचन अवधि के दौरान आधिकारिक जन संचार माध्यमों के दुरुपयोग से अति सतर्कतापूर्वक बचा जाना चाहिए;
    (v)    मंत्री और अन्य प्राधिकारी, आयोग द्वारा निर्वाचनों की घोषणा किए जाने के समय से विवेकाधीन निधियों में से अनुदानों/भुगतानों को स्‍वीकृति प्रदान नहीं करेंगे; और
    (vi)    आयोग द्वारा निर्वाचनों की घोषणा के समय से, मंत्री और अन्‍य प्राधिकारी –
    (क) किसी रूप में कोई वित्तीय अनुदानों की घोषणा नहीं करेंगे या उनके लिए वचन नहीं देंगे; या
    (ख) किसी प्रकार की परियोजनाओं या योजनाओं की आधारशिला आदि नहीं रखेंगे (सिविल सेवकों के सिवाय); या
    (ग) सड़कों के निर्माण, पेयजल सुविधाओं की व्‍यवस्‍था आदि के बारे में कोई वचन नहीं देंगे; या
    (घ) सरकार, सार्वजनिक उपक्रमों आदि में ऐसी कोई तदर्थ नियुक्तियां नहीं करेंगे, जिनका सत्तासीन दल के पक्ष में मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रभाव हो। 
    4.     जैसा कि उपर्युक्‍त पैरा 3{खंड IV} से देखा जा सकता है, सरकारी राजकोष की लागत पर सरकार की उपलब्धियों को उजागर करते हुए इलेक्‍ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में कोई विज्ञापन जारी नहीं किया जाएगा। यदि कोई विज्ञापन पहले ही प्रसारण हेतु जारी किया जा चुका है या प्रिंट मीडिया में प्रकाशित हो चुका है, तो यह अवश्य सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया में ऐसे विज्ञापनों के प्रसारण को तत्काल रोक दिया जाए और यह कि आज से ही ऐसा कोई विज्ञापन किसी समाचारपत्र, पत्रिका आदि अर्थात प्रिंट मीडिया में प्रकाशित न किया जाए और उन्हें तत्काल वापस ले लिया जाए। 
    5.      आयोग के दिनांक 5 मार्च, 2009 के पत्र सं. 437/6/2009-सीसीबीई में अंतर्विष्ट अनुदेश आपकी सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु आयोग की वेबसाइट “https://eci.gov.in/” पर ‘महत्वपूर्ण अनुदेश’ नामक शीर्षक के अन्तर्गत उपलब्‍ध हैं। इस लिंक पर आपके मार्गदर्शन के लिए आयोग के अन्‍य सभी अनुदेश भी उपलब्‍ध हैं। 
    6.     आयोग यह भी निदेश देता है कि निर्वाचन के संचालन से संबंधित सभी अधिकारियों/कर्मचारियों के स्‍थानान्‍तरण पर पूरी रोक रहेगी। इनमें निम्‍नलिखित सम्मिलित हैं किंतु ये वहीं तक सीमित नहीं हैं:-
    (i)       मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी और अपर/संयुक्‍त/उप मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी;
    (ii)       प्रभागीय आयुक्‍त;
    (iii)      जिला निर्वाचन अधिकारी, रिटर्निंग अधिकारी, सहायक रिटर्निंग अधिकारी एवं निर्वाचनों के संचालन से जुड़े अन्य राजस्‍व अधिकारी;
    (iv)      निर्वाचनों के प्रबंधन से जुड़े पुलिस विभाग के अधिकारी यथा, रेंज महानिरीक्षक एवं उप महानिरीक्षक, वरिष्‍ठ पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक, सब डिवीजनल पुलिस अधिकारी यथा, पुलिस उपाधीक्षक एवं अन्‍य पुलिस अधिकारी, जिन्हें लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम, 1951 की धारा 28क के अधीन आयोग में प्रतिनियुक्‍त किया गया है;
    (v)       निर्वाचन की घोषणा की तारीख से पूर्व उपर्युक्‍त श्रेणियों के अधिकारियों की बाबत निर्गत किंतु आज की तारीख तक कार्यान्वित नहीं किए गए स्‍थानान्‍तरण आदेशों को इस संबंध में आयोग से विशिष्‍ट अनुमति लिए बिना लागू नहीं किया जाना चाहिए;
    (vi)      यह रोक निर्वाचन के पूरा होने तक प्रभावी रहेगी। आयोग यह भी निदेश देता है कि राज्‍य सरकारों को ऐसे वरिष्‍ठ अधिकारियों का स्‍थानान्‍तरण करने से बचना चाहिए जिनकी राज्‍य में निर्वाचन के प्रबंधन में भूमिका है।
    (vii)      ऐसे मामलों में, जिनमें प्रशासनिक अत्‍यावश्‍यकताओं के कारण किसी अधिकारी का स्‍थानान्‍तरण आवश्‍यक है, संबंधित राज्‍य सरकार को पूर्व अनुमोदन के लिए पूर्ण औचित्‍य के साथ आयोग से संपर्क कर सकती है। 
    7.    कृपया इस पत्र की पावती भेजी जाए। 

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  4. राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में कार्यरत निर्वाचन अधिकारियों की सुरक्षा के संबंध में आयोग के निदेश–तत्संबंधी। 

    सं. 154/2020
    दिनांकः 15.01.2021
     
    सेवा में,
    मंत्रिमंडल सचिव, भारत सरकार सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के मुख्य सचिव कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार के सचिव सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी।  
    विषयः राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में कार्यरत निर्वाचन अधिकारियों की सुरक्षा के संबंध में आयोग के निदेश–तत्संबंधी। 
    महोदय/महोदया, 
          देश में संसद और प्रत्येक राज्य की विधान सभा के सभी निर्वाचनों तथा राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों के संचालन की तथा निर्वाचक नामावलियों को तैयार करने के अधीक्षण, निदेश और नियंत्रण की शक्ति संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग में निहित है। 
    2.    आयोग लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 13क के अंतर्गत राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के परामर्श से, राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी नामित करता है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) आयोग के निर्वाचन संबंधी विविध कार्यों को करने के लिए राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में आयोग के अनिवार्य रूप से एक विस्तार की भांति है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नियुक्त हो जाने पर, वह निर्वाचन आयोग के सीधे नियंत्रण, अधीक्षण और अनुशासन के अंतर्गत आ जाता है और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13ग ग के अधीन तथा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 13क के अंतर्गत निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्ति पर रहता है। 
    3.    आयोग उपरोक्त उद्देश्यों के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में अपर/संयुक्त/उप/सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी और अन्य पदाधिकारियों सहित सहायक पदाधिकारियों को भी नियुक्त करता है जो उपरोक्त प्रावधानों के तहत आयोग में प्रतिनियुक्ति पर होते हैं। 
    4.    आयोग ने निर्वाचनोत्तर अवधि में मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, अतिरिक्त/संयुक्त/उप/सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी के उत्पीड़न की कुछ घटनाओं को नोट किया है। कई बार राज्य सरकार में उनके पूर्ववर्ती कार्यकाल के लिए उनका कार्यकाल पूरा होने के बाद सारहीन आधारों पर अनुशासनात्मक मामलों के आरोप लगाकर उन्हें राजनैतिक प्रतिशोध के लिए निशाना बनाया जाता है। यह जताने के लिए डर का माहौल बनाया जाता है कि ईमानदार, दृढ़ और सत्यनिष्ठ अधिकारियों से किसी भी समय आधारहीन आरोप लगाकर बदला लिया जा सकता है। 
    5.    ऐसे परिदृश्य में ये अधिकारी न केवल हतोत्साहित हो जाते हैं, बल्कि उनका मनोबल भी बहुत गिर जाता है, जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वाचन सुनिश्चित करने के उनके प्रयास बुरी तरह प्रभावित होते हैं। यदि इस स्थिति पर ध्यान नहीं दिया जाएगा तो एक ऐसी स्थिति बन जाएगी, जहां अधिकारीगण मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के रूप में कार्यभार ग्रहण करने के लिए अनिच्छुक होंगे और जिन लोगों को नियुक्त किया जाएगा, वे निर्वाचन के बाद के चरण में निष्पक्ष व्यवहार की अनिश्चितता का सामना करेंगे। 
    6.    निर्वाचन ड्यूटी पर किसी भी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने के मामले की भारत का माननीय उच्चतम न्यायालय लंबे अरसे से संवीक्षा कर रहा था। माननीय न्यायालय ने दिनांक 21.09.2000 के अपने आदेश द्वारा वर्ष 1993 की रिट याचिका (सि) सं. 606 (भारत निर्वाचन आयोग बनाम भारत संघ और अन्य) में यह अभिनिर्धारित किया कि निर्वाचन ड्यूटी पर अधिकारियों के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा न तो कोई कार्रवाई शुरू की जा सकती है और न ही सरकार चूककर्ता अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के लिए इसकी सलाह पर कार्रवाई से इंकार कर सकती है। शीर्ष न्यायालय के निर्णय के परिणामस्वरूप, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने भी अपने दिनांक 07 नवंबर, 2000 के का. ज्ञा. सं. 11012/7/98-स्था.(क) के तहत निर्वाचन ड्यूटी हेतु प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों पर निर्वाचन आयोग का अनुशासनात्मक नियंत्रण स्थापित करने के लिए तदनुसार अनुदेश जारी किए हैं। इसे  डीओपीटी के दिनांक 20 मार्च, 2008 के का.ज्ञा.सं. 11012(4)/2008-स्था.(क) और दिनांक 28 जुलाई, 2008 के का.ज्ञा. सं. 11012(4)/2008-स्था.(क) के तहत दोहराया और स्पष्ट किया गया है। 
    7.    उपर्युक्त को ध्यान में रखते हुए, निर्वाचन आयोग का यह सुविचारित मत है कि प्रेरित उत्पीड़न से निर्वाचन अधिकारियों को सकारात्मक संरक्षण आवश्यक है, ताकि निर्वाचन अधिकारियों को स्वतंत्र, निष्पक्ष, तटस्थ और निर्भीक तरीके से निर्वाचकीय कार्यों को निष्पादित करने में सक्षम बनाया जा सके। तदनुसार, आयोग ने निम्नानुसार निदेशित किया हैः- 
    (i) राज्य/संघ राज्य क्षेत्र की सरकारें मुख्य निर्वाचन अधिकारियों और संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी तक के अन्य अधिकारियों के खिलाफ उनके कार्यकाल के दौरान और कार्यकाल की समाप्ति से एक वर्ष की अवधि तक किसी भी अनुशासनात्मक कार्रवाई को शुरू करने से पहले निरपवाद रूप से आयोग का पूर्व-अनुमोदन लेंगी। 
    (ii) राज्य/संघ राज्य क्षेत्र की सरकारें अपने कर्तव्यों के उचित निर्वहन के लिए सीईओ के कार्यालय को प्रदान की जाने वाली अन्य सुविधाएं जैसे वाहन; सुरक्षा और अन्य सुविधाएं/सहूलियतें कम नहीं करेंगी। 
    8.    आयोग को पूरी उम्मीद है कि सभी संबंधित इस नियम का कड़ाईपूर्वक पालन करेंगे।

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  5. असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुड्डुचेरी राज्‍य विधान सभाओं का साधारण निर्वाचन-निर्वाचनों के संचालन से संबंधित अधिकारियों का स्‍थानांतरण/तैनाती के लिए एडवाइजरी–तत्‍संबंधी। 

    सं.437/6/1/अनुदेश/ईसीआई/प्रका./एमसीसी/2020                     दिनांक: 18 दिसम्बर, 2020
    सेवा में,
    1.   मुख्‍य सचिवः-
    असम सरकार, दिसपुर; केरल सरकार, तिरुवनन्तपुरम; तमिलनाडु सरकार, चेन्नई; पश्चिम बंगाल सरकार, कोलकाता; और पुड्डुचेरी सरकार, पुड्डुचेरी। 2.   मुख्य निर्वाचन अधिकारीः-
    असम सरकार, दिसपुर; केरल सरकार, तिरुवनन्तपुरम; तमिलनाडु सरकार, चेन्नई; पश्चिम बंगाल सरकार, कोलकाता; और पुड्डुचेरी सरकार, पुड्डुचेरी।  विषय: असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुड्डुचेरी राज्‍य विधान सभाओं का साधारण निर्वाचन-निर्वाचनों के संचालन से संबंधित अधिकारियों का स्‍थानांतरण/तैनाती के लिए एडवाइजरी–तत्‍संबंधी।   
    महोदय/महोदया,
    असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुड्डुचेरी की मौजूदा विधान सभाओं का कार्यकाल निम्नानुसार समाप्त होने जा रहा हैः-
    क्र. सं.
    राज्य/संघ राज्य क्षेत्र का नाम
    अवधि
    1.
    तमिलनाडु
    24.05.2021
    2.
    केरल
    01.06.2021
    3.
    पश्चिम बंगाल
    30.05.2021
    4.
    पुड्डुचेरी
    08.06.2021
    5.
    असम
    31.05.2021
     2.    स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वाचन सुनिश्चित करने के लिए, आयोग इस आशय की एक सुसंगत नीति का अनुसरण करता रहा है कि निर्वाचनरत राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों के निर्वाचन से सीधे जुड़े अधिकारियों को उनके गृह जिलों या उन स्थानों पर तैनात नहीं किया जाए, जहाँ उन्होंने अत्यधिक लंबे समय तक सेवा की है। इसे ध्यान में रखते हुए, लोकसभा, 2019 और आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम की राज्य विधान सभाओं के साधारण निर्वाचन के संबंध में दिनांक 16 जनवरी, 2019 के सम संख्यक पत्र के तहत स्‍थानांतरण/तैनाती संबंधी विस्तृत निदेश जारी किए गए थे (प्रतिलिपि संलग्न)।
    3.    तद्नुसार, एतद्दवारा यह सुझाव दिया जाता है कि निर्वाचनों के संचालन से सीधे जुड़े सभी सरकारी अधिकारियों के संबंध में निम्नलिखित सुनिश्चित किया जाएः-
    कि उसकी तैनाती उसके गृह जिले में न की जाए। कि उसने पिछले चार (4) वर्षों के दौरान उस जिले में 3 वर्ष पूरे नहीं किए हों या 31 मई, 2021 को या उससे पहले वह तीन वर्ष पूरे कर लेगा/लेगी। कि ऐसे अधिकारियों/प्राधिकारियों को निर्वाचन संबंधी कोई भी ड्यूटी नहीं सौंपी जाए, जिनके विरूद्ध आयोग ने विगत में अनुशासनात्‍मक कार्रवाई की सिफारिश की थी और जो लंबित हों या जिसकी परिणति में दंड दिया गया हो अथवा जिन्‍हें विगत में निर्वाचन या निर्वाचन संबंधी किसी कार्य में कोई चूक के लिए आरोपित किया गया हो। इसके अतिरिक्त, आगामी छह महीनों के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले किसी भी अधिकारी को निर्वाचन संबंधी किसी भी कार्य में नहीं लगाया जाएगा।  कि लोक सभा निर्वाचन, 2019 के दौरान आयोग की सिफारिश पर तैनात किए गए अधिकारियों को उपर्युक्त स्थानांतरण नीति से शिथिलता दी जा सकती है।  4.    आयोग की उपर्युक्त एडवाइजरी को कड़े तथा समयपूर्वक अनुपालन के लिए सभी संबंधितों के ध्यान में लाया जाए।
    5.    कृपया इस पत्र की पावती दें।
    भवदीय, 
    (नरेन्द्र एन. बुटोलिया)
    प्रधान सचिव
     
    भारत निर्वाचन आयोग
    निर्वाचन सदन, अशोक रोड, नई दिल्‍ली-110001
    सं.437/6/1/अनुदेश/ईसीआई/प्रका./एमसीसी/2019
    दिनांक: 16 जनवरी, 2019
    सेवा में,
    1.   सभी राज्यों एवं संघ शासित क्षेत्रों केमुख्‍य सचिव।
    2.   सभी राज्यों एवं संघ शासित क्षेत्रों के मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी। 
    विषय:      लोकसभा और आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम की राज्य विधान सभाओं के साधारण निर्वाचन, 2019-अधिकारियों का स्‍थानांतरण/तैनाती– तत्‍संबंधी।
    महोदय/महोदया,
    मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि मौजूदा लोक सभा एवं आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम की विधान सभाओं का कार्यकाल क्रमश: 03 जून, 2019, 18 जून, 2019, 01 जून, 2019, 11 जून, 2019 तथा 27 मई, 2019 तक है।  
    2.    आयोग एक ऐसी सुसंगत नीति का अनुसरण कर रहा है जिसमें निर्वाचन वाले राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों में निर्वाचनों के संचालन से प्रत्‍यक्ष रूप से जुड़े अधिकारियों को उनके गृह जिलों या ऐसे स्‍थानों जहां उन्‍होंने काफी लंबी अवधि तक कार्य किया है,  में तैनात नहीं किया जाता है।
    3.    अत: आयोग ने निर्णय लिया है कि निर्वाचनों से प्रत्‍यक्ष रूप से जुड़े किसी भी अधिकारी को तैनाती के वर्तमान जिले में उस परिस्थिति में बने रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी जब:-
                                    v.                   यदि वह अपने गृह जिले में तैनात है।
                                  vi.                   यदि पिछले चार (4) वर्षों के दौरान उस जिले में उसने तीन वर्ष पूर्ण कर लिए हैं या 31 मई, 2019 को या उससे पहले तीन वर्ष पूर्ण कर लेंगे।
     
    4.    उपर्युक्‍त अनुदेशों को कार्यान्वित करते हुए/अधिकारियों को स्‍थानां‍तरित करते हुए, राज्‍य सरकार के संबंधित विभागों को ध्‍यान रखना चाहिए कि उन्‍हें उनके गृह जिले में तैनात न किया जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी डीईओ/आरओ/एआरओ/पुलिस इंस्‍पेक्‍टर/सब-इंस्‍पेक्‍टर या उनसे उच्‍चतर अधिकारियों को ऐसे विधान सभा निर्वाचन-क्षेत्र/जिले में वापस तैनात न किया जाए या न बने रहने दिया जाए जहां वे 31 मई, 2017 से पूर्व के विधान सभा निर्वाचन में आयोजित साधारण/उप-निर्वाचन के दौरान तैनात थे।
    5.    यदि कुछेक जिलों वाले छोटे राज्‍य/संघ राज्‍य क्षेत्र को इसके अनुपालन में किसी कठिनाई का सामना करना पड़ता है तो वे इससे छूट दिए जाने हेतु विशिष्‍ट मामले, उनके कारण सहित, सीईओ के माध्‍यम से छूट प्राप्त करने हेतु आयोग को भेज सकते हैं और आयोग ऐसे मामले पर, यदि  आवश्‍यक समझे, निदेश जारी करेगा। 
    6.    अनुप्रयोज्‍यता-
    6.1   ये अनुदेश केवल विनिर्दिष्‍ट निर्वाचन कर्तव्‍यों के लिए नियुक्‍त अधिकारियों यथा डीईओ, डिप्‍टी डीईओ, आरओ/एआरओ, ईआरओ/एईआरओ, किसी विशेष निर्वाचन के नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्‍त अधिकारियों को ही कवर नहीं करते अपितु जिले के अधिकारियों यथा एडीएम, एसडीएम डिप्‍टी क्‍लेक्‍टर/ज्‍वाइंट क्‍लेक्‍टर, तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी या निर्वाचन कार्यों के लिए सीधे तैनात समतुल्‍य रैंक के किन्‍हीं अन्‍य अधिकारियों को भी कवर करते हैं।
    6.2   ये अनुदेश उन पुलिस विभाग के अधिकारियों जैसे रेंज आई जी, डी आई जी, राज्‍य सशस्‍त्र पुलिस के कमांडेंट्स, एसएसपी, एसपी, अपर एस पी, उप-प्रभागीय पुलिस प्रमुख, एस एच ओ, इंस्‍पेक्‍टर, सब-इंस्‍पेक्‍टर, आर आई/सार्जेंट मेजर अथवा ऐसे समतुल्‍य रैंक के अधिकारियों पर भी लागू होंगे जो निर्वाचन समय में जिले में सुरक्षा प्रबंधन अथवा पुलिस बल की तैनाती के लिए जिम्‍मेदार हैं।
    7.    आयोग द्वारा समय-समय पर जारी किए गए निम्‍नलिखित स्‍पष्‍टीकरण/शिथिलताएं सभी संबंधितों की सूचना/दिशा-निर्देश के लिए हैं:-
    (i)      कार्यात्‍मक विभागों यथा कंप्‍यूटरीकरण, विशेष शाखा, प्रशिक्षण इत्‍यादि में तैनात पुलिस अधिकारी इन अनुदेशों के अंतर्गत कवर नहीं होते हैं।
    (ii)     पुलिस सब-इंस्‍पेक्‍टर और उनसे उच्‍च पदीय अधिकारियों को उनके गृह जिलों में तैनात नहीं किया जाना चाहिए।
    (iii)    यदि पुलिस सब-इंस्‍पेक्‍टर ने पुलिस सब-डिवीजन में अंतिम तारीख के दिन या उससे पहले चार वर्षों में से 3 वर्षों का कार्यकाल पूरा कर लिया है या पूरा करेगा तो उसका ऐसे पुलिस सब-डिवीज़न में स्‍थानांतरण कर देना चाहिए जो उस विधान सभा निर्वाचन-क्षेत्र में न पड़ती हो। यदि जिले के छोटे आकार के कारण यह संभव न हो तो उसे जिले से बाहर स्‍थानांतरित कर देना चाहिए।
    (iv)    किसी भी निर्वाचन में विभिन्‍न प्रकार की निर्वाचन ड्यूटियों के लिए बड़ी संख्‍या में कर्मचारियों को तैनात किया जाता है और आयोग की ऐसी कोई मंशा नहीं होती है कि बड़ी संख्‍या में स्‍थानांतरण करके राज्‍य मशीनरी को अत्‍यंत पंगु कर दे। अत: उपर्युक्‍त स्‍थानांतरण नीति सामान्‍यत: उन अधिकारियों/पदाधिकारियों पर लागू नहीं होती जो निर्वाचनों से प्रत्‍यक्ष रूप से नहीं जुड़े हैं जैसे डाक्‍टर, इंजीनियर, शिक्षक/प्रधानाचार्य इत्‍यादि। तथापि, यदि ऐसे किसी भी सरकारी अधिकारी के विरूद्ध राजनीतिक पक्षपात या पूर्वाग्रह की विशिष्‍ट शिकायतें मिलती हैं और जो जांच करने पर सत्‍य पाई जाती हैं तो सीईओ/ईसीआई न केवल ऐसे अधिकारियों के स्‍थानांतरण के आदेश देगा अपितु उसके विरूद्ध समुचित विभागीय कार्रवाई भी करेगा।
    (v)     निर्वाचन ड्यूटी में शामिल सेक्‍टर अधिकारी/ज़ोनल मजिस्‍ट्रेट के रूप में नियुक्‍त अधिकारी इन अनुदेशों के अधीन कवर नहीं होते हैं। तथापि, प्रेक्षकों, सीईओ/डीईओ तथा आरओ को उनके आचरण पर सतर्क निगरानी रखनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे अपने कर्तव्‍यों के निष्‍पादन में गैर-पक्षपातपूर्ण व निष्‍पक्ष रहें।
    (vi)    तीन वर्षों की अवधि की गणना करते समय जिले के अंदर किसी पद पर हुई प्रोन्‍नति की भी गणना की जाएगी।
    (vii)    ये अनुदेश संबंधित विभाग के राज्‍य मुख्‍यालयों में तैनात अधिकारियों पर लागू नहीं होते।
    (viii)   इसके अतिरिक्‍त यह निदेश दिया जाता है कि ऐसे अधिकारियों/कर्मचारियों जिनके विरूद्ध आयोग ने विगत में अनुशासनात्‍मक कार्रवाई की सिफारिश की थी और जो लंबित है या जिसकी परिणति में दंड दिया गया था अथवा जिन्‍हें विगत में निर्वाचन या निर्वाचन संबंधी किसी कार्य में कोई चूक के लिए आरोपित किया गया है, उन्‍हें निर्वाचन संबंधी कोई भी ड्यूटी नहीं सौंपी जाएगी। तथापि, ऐसा अधिकारी, जो आयोग के आदेशों के अधीन किसी विगत निर्वाचन के दौरान अनुशासनात्‍मक कार्रवाई की किसी सिफारिश के बिना स्‍थानां‍तरित किया गया था, को केवल इसी आधार पर तब तक स्‍थानांतरित करने पर विचार नहीं किया जाएगा बशर्ते ऐसे किसी अधिकारी के बारे में आयोग द्वारा विशेष रूप से निदेश न दिए जाएं। दागी अधिकारियों के नामों का पता-ठिकाना रखने के संबंध में आयोग के दिनांक    23 दिसम्‍बर, 2008 के अनुदेश सं. 464/अनुदेश/2008-ईपीएस की एक प्रति संलग्‍न है। मुख्‍य निर्वाचन अधिकारियों को इसका अनुपालन अवश्य सुनिश्चित करना चाहिए।
    (ix)    इसके अतिरिक्‍त आयोग ने यह इच्‍छा भी व्‍यक्‍त की है कि ऐसे किसी अधिकारी/कर्मचारी को, जिनके विरूद्ध किसी न्‍यायालय में आपराधिक मामला लंबित है, निर्वाचन कार्य या निर्वाचन संबंधी ड्यूटी से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
    (x)     इसके अतिरिक्‍त, आयोग की उपर्युक्‍त नीति के अनुसार स्‍थानांतरित हो चुके वर्तमान पदधारियों के स्‍थान पर अलग-अलग व्यक्तियों की तैनाती करते समय राज्‍य/संघ राज्‍य क्षेत्र के मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी से निरपवाद रूप से परामर्श किया जाएगा। इन निदेशों के अधीन जारी स्‍थानांतरण आदेशों की प्रतियां मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी को अवश्‍य ही दे दी जाएं।
    (xi)    ऐसे अधिकारियों/कर्मचारियों जो निर्वाचक नामावली पुनरीक्षण कार्य में लगे हुए है, यदि कोई हो तो, के संबंध में स्‍थानांतरण आदेश का कार्यान्‍वयन संबंधित मुख्‍य निर्वाचन अधिकरी के परामर्श से निर्वाचक नामावलियों के अंतिम रूप से प्रकाशन के बाद ही किया जाएगा। किन्‍हीं असाधारण कारणों की वजह से स्‍थानांतरण की कोई आवश्‍यकता के मामले में आयोग का पूर्व-अनुमोदन लिया जाएगा।
    (xii)    कोई भी अधिकारी जो आने वाले छह महीनों के भीतर सेवानिवृत्त होने वाला है, आयोग के पैरा-3 में उल्लिखित निदेशों की परिधि से बाहर रहेगा। इसके अतिरिक्‍त, श्रेणी (गृह नगर/3+मानदंड तथा वह 6 महीनों के अंदर सेवानिवृत्त होने वाले हैं) में आने वाले अधिकारियों यदि पैरा 6.1 एवं 6.2 में उल्लिखित निर्वाचन संबंधित पद पर है तो उसे उस प्रभार से मुक्त किया जाएगा तथा किसी भी प्रकार की निर्वाचन ड्यूटी प्रदान नहीं की जाएगी। हांलाकि, यह भी दोहराया जाता है कि ऐसे सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी को जिले से बाहर स्थानांनतरित करने की आवश्यकता नहीं है।
    (xiii)   यह भी स्‍पष्‍ट किया जाता है कि राज्‍य के ऐसे सभी अधिकारियों (मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में तैनात अधिकारी इसके अपवाद होंगे), जिनकी सेवा-अवधि बढ़ाई गई है या जिन्‍हें विभिन्‍न हैसियतों से पुन: नियोजित किया गया है, निर्वाचन संबंधी किसी भी कार्य से नहीं जोड़े जाएंगे।
    (xiv)   निर्वाचन संबंधी सभी अधिकारियों से अपेक्षा की जाएगी कि वे संबंधित डीईओ को नीचे दिए गए फार्मेट में घोषणापत्र दें जो तद्नुसार मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी को सूचित करेंगे। 
     
    घोषणा-पत्र
    (नाम निर्देशन-पत्रों की अंतिम तारीख के पश्‍चात 2 (दो) दिनों के अन्‍दर प्रस्‍तुत किए जाने हेत
      मैं................(नाम)...................वर्तमान में....................तारीख से .......................के रूप में पदस्‍थापित एतद्द्वारा लोकसभा/.......................विधान सभा के वर्तमान साधारण/उप निर्वाचन के सबंध में सत्‍यनिष्‍ठापूर्वक घोषणा करता/करती हूँ कि
    (क)   मैं वर्तमान निर्वाचन में निर्वाचन लड़ने वाले किसी भी अभ्‍यर्थी/उपर्युक्‍त निर्वाचन में राज्‍य/जिले के प्रमुख राजनीतिक पदाधिकारी का/की करीबी रिश्‍तेदार नहीं हूँ।
    (ख)  मेरे विरूद्ध किसी भी न्‍यायालय में कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है।
    टिप्‍पणी – यदि उपर्युक्‍त (क) और (ख) का जवाब ‘हां’ है तो पूरा विवरण अलग पन्‍ने पर दें।
     
     दिनांक.........................                                               (नाम)
                                                                    पदनाम
     
       
     
    टिप्‍पणी- किसी भी अधिकारी द्वारा की गई मिथ्‍या घोषणा उसे उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई का भागी बनाएगी। 
    8.    आयोग के उपर्युक्‍त अनुदेश उनका सख्‍ती से अनुपालन किए जाने के लिए संबंधित विभागों/अधिकारियों या राज्‍य सरकार के संज्ञान में लाए जाएं। जिला निर्वाचन अधिकारी या जिले के संबंधित अधिकारीगण सुनिश्चित करेंगे कि जिन अधिकारियों/कर्मचारियों का स्‍थानान्‍तरण किया जाता है वे अपने एवज़ी की प्रतीक्षा किए बिना अपना चार्ज तुरंत सौंप दें। 
    9.    आयोग ने इसके अतिरिक्त निदेश दिया है कि उपर्युक्‍त अनुदेश के अधीन कवर सभी अधिकारियों के स्‍थानांतरण/तैनाती दिनांक 28 फरवरी, 2019 तक कर दिए जाएं तथा राज्‍य सरकार के संबंधित विभागों/अधिकारियों से प्राप्त कार्रवाई के विवरण सहित अनुपालन रिपोर्ट आयोग मार्च, 2019 के पहले सप्ताह में प्रस्तुत की जाए।
    10.   कृपया इस पत्र की पावती दें।
    भवदीय,
     
    (नरेन्द्र एन. बुटोलिया)
    प्रधान सचिव
    भारत निर्वाचन आयोग
    निर्वाचन सदन, अशोक रोड, नई दिल्‍ली-110001
    464/अनुदेश/2008/ईपीएस                                          दिनांक: 23 दिसम्बर, 2008
     
    सेवा में,
    सभी राज्यों/संघ राज्य-क्षेत्रों के
    मुख्य निर्वाचन अधिकारियों। 
               
    विषयः-    भारत निर्वाचन आयोग के आदेश द्वारा कार्य की अवहेलना आदि के आरोप में स्थानांतरित अधिकारियों के नामों का पता-ठिकाना रखना।
     
    संदर्भः-    सभी राज्यों तथा संघ राज्य-क्षेत्रों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को सम्बोधित पत्र सं. 437/6/2006-पीएलएन.III दिनांक 06 नवम्बर, 2006 तथा ईसीआई संदेश सं. 100/1994-पीएलएन-I दिनांक 28.03.1994।
     
    महोदय/महोदया,
          भारत निर्वाचन आयोग ने ऊपर संदर्भित अनुदेश द्वारा निदेश दिया था कि प्रत्येक निर्वाचन से पहले सभी जिलों में एक विस्तृत समीक्षा की जाएगी तथा ऐसे सभी अधिकारियों को उनके गृह जिले या उस जिलों से बाहर स्थानांतरित किया जाना चाहिए जहां उन्होंने 4 वर्षों के कार्यकाल में से 3 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया हो, और यह भी निदेश दिया था कि ऐसे अधिकारीगण/कर्मचारीगण जिनके विरुद्ध आयोग ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की है या जिन्हें निर्वाचन या निर्वाचन संबंधी कार्य में किसी त्रुटि के लिए आरोपित किया गया है या जिन्हें इस मामले में आयोग के आदेशों के अधीन स्थानांतरित किया गया है, उन्हें निर्वाचन संबंधी कोई भी ड्यूटी न सौंपी जाए।
          तथापि, हाल ही में हुए निर्वाचनों के दौरान यह देखा गया कि मुख्य निर्वाचन अधिकारियों तथा जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा आयोग के उपर्युक्त अनुदेश का अनुपालन करने के लिए किए गए प्रयासों के बावजूद अभी भी ऐसे अधिकारियों के कुछ उदाहरण हैं, जो उपर्युक्त मानदण्ड के अंतर्गत आते हैं तथा जिले से बाहर गैर-निर्वाचन संबंधी कार्य के लिए स्थानांतरित किए जाने के भागी हैं, परन्तु वे वहीं जमे रहने का इंतजाम कर लेते है और आयोग को उसके बारे में विभिन्न राजनैतिक दलों तथा जनसामान्य द्वारा की गई शिकायतों के माध्यम से देर से पता चलता है। ये घटनाएं, जिनकी संख्या, हालांकि, काफी कम होती है, फील्ड स्तर पर गलत संकेत भेजती हैं और उपर्युक्त मानदण्ड पर स्थानांतरित किए जाने के भागी बनने वाले अधिकारियों के बारे में समुचित सूचना के बनाए न रखने को गैर-अनुपालन की कुछ इक्का-दुक्का घटनाओं के कारण के रूप में अभिचिह्नित किया गया है। भविष्य में ऐसी घटनाओं के घटने की संभावना दूर करने के लिए आयोग ने मौजूदा अनुदेश को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए निम्नलिखित निदेश जारी किए हैं:-
            I.            राज्य के मुख्य  निर्वाचन अधिकारी एक रजिस्टर बनाए रखेंगे जिसमें निर्वाचन आयोग के आदेश द्वारा स्थानांतरित भा.प्र.से./भा.पु.से. अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों, रिटर्निंग अधिकारियों तथा निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों तथा ऐसे अधिकारियों के बारे में सूचना बनाए रखी जाएगी जिनके विरूद्ध आयोग ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की है अथवा जिन्हें निर्वाचन या निर्वाचन संबंधी कार्य में कोई गलती करने के लिए आरोपित किया गया है।
          II.            इसी प्रकार, जिला निर्वाचन अधिकारी एक रजिस्टर बनाए रखेंगे जिसमें अन्य कनिष्ठ अधिकारियों तथा अन्य स्टॉफ के बारे में सूचना रखी जाएगी।
        III.            भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्वाचनों की घोषणा के 7 दिनों के भीतर, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी यह सुनिश्चित करते हुए कि उपर्युक्त मानदण्ड के अंतर्गत आने वाले सभी अधिकारियों को स्थानांतरित कर दिया गया है, जोनल सेक्रेटरी को एक अनुपालन-पत्र भेजेंगे। इसी प

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  6. मतदाता शिक्षा और जागरूकता पर सर्वोत्तम प्रचार अभियान हेतु राष्ट्रीय मीडिया पुरस्कार -2020  

    सं.491/मीडिया पुरस्कार/2020/संचार
    दिनांक: 23 नवंबर, 2020
    ज्ञापन
          मतदाता शिक्षा और जागरूकता पर सर्वोत्तम प्रचार अभियान हेतु राष्ट्रीय मीडिया पुरस्कार -2020  
          भारत निर्वाचन आयोग के अपने ज्ञापन दिनांक 20 अक्टूबर, 2020 के तहत वर्ष 2020 के दौरान मतदाता शिक्षा और जागरूकता पर सर्वोत्तम प्रचार अभियान हेतु राष्ट्रीय मीडिया पुरस्कार के लिए मीडिया घरानों से प्रविष्टियां आमंत्रित की थी।  
    2.    अब, आयोग ने नामांकन प्राप्त करने की अंतिम तिथि बढाने का निर्णय लिया है और 10 दिसंबर, 2020 को बढ़ाई गई अंतिम तिथि के रूप में नियत किया हैं।  
    3.     प्रविष्टियां 10 दिसंबर, 2020 या उससे पहले निम्मलिखित पते पर अवश्य पहुंच जानी चाहिए।  
     
          श्री प्रमोद कुमार शर्मा, सचिव (मीडिया और संचार)
          भारत निर्वाचन आयोग, निर्वाचन सदन
          अशोक रोड, नई दिल्ली  - 110001
          ई-मेल: media.election.eci.@gmail.com
          दूरभाष : 011-23052057

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  7. कांग्रेस नेता श्री आचार्य प्रमोद कृष्णन को नोटिस

    सं. 100/एमपी-एलए/2020-(बाय.)
    दिनांक: 31 अक्तूबर,  2020
    नोटिस
    यत:, आयोग द्वारा,  मध्यप्रदेश की विधान सभा के लिए उप-निर्वाचनों की घोषणा दिनांक 29 सितंबर, 2020 के प्रेस नोट सं. ईसीआई/पीएन/67/2020 के माध्यम से कर दी गई है और उक्त प्रेस नोट के पैरा 4 के अनुसार, आदर्श आचार संहिता के उपबंध उस तारीख से लागू कर दिए गए हैं; और    
    2.    यत:, आदर्श आचार संहिता के भाग 1 के पैरा (2) में उल्लेख है कि, अन्य बातों के साथ-साथ, ‘सभी दल और सभी अभ्यर्थी दलों के नेताओं अथवा कार्यकर्ताओं की निजी जिंदगी के सभी पहलुओं की आलोचना करने से बचेंगे’ यदि वे सार्वजनिक गतिविधियों से सम्बद्ध न हों,; और  
    3.    यत:, आयोग को मुख्य निर्वाचन अधिकारी,  मध्य प्रदेश से एक रिपोर्ट प्राप्त हुई है, जिसमें यह कहा गया है कि 27 अक्तूबर, 2020 को जौरा, मुरैना में एक रैली को संबोधित करने के दौरान, कांग्रेस नेता श्री आचार्य प्रमोद कृष्णन ने श्री शिवराज सिंह चौहान के लिए अपमानजनक  भाषा का प्रयोग किया है; और       
    4.    यत:, आयोग को कथित संबोधन की प्राधिकृत प्रतिलिपि (अनुबंध-I) प्राप्त हुई, जो निम्नानुसार है:
          " द्वापर में मारीच मामा, द्वापर के अंत में कंस जिसने अपनी बहन के सभी बच्चों को कुर्सी सलामत रखने के लिए मर दिया, तीसरा सकुनि मामा, जिसने छल कपट कर कौरवों का नाश कराया, तीनों प्रपंची मामाओं को मिला दिया जाये तो एक मामा बनता है शिवराज, इन तीनों का घोटाला, इन तीनों के कमीनापन एक जगह निचोड़ दिया जाये तो यह आदमी बनता है" और  
    5.   यत:,  श्री आचार्य प्रमोद कृष्णन द्वारा 27 अक्तूबर, 2020 को रैली को संबोधित करते हुए दिए गए भाषण की प्रतिलिपि की जांच आयोग में की गई है और उक्त वक्तव्य को राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के ‘सामान्य आचरण’ के भाग I के पैरा (2) में उल्लिखित उपबंधों का उल्लंघन पाया गया है।  
    6.   अत:, अब आयोग श्री आचार्य प्रमोद कृष्णन को उक्त वक्तव्य देने के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए इस नोटिस की प्राप्ति के 48 घंटों के अन्दर उत्तर देने का एक अवसर देता है और ऐसा न करने पर भारत निर्वाचन आयोग उन्हें कोई और सूचना दिए बिना निर्णय लेगा।  
     
    संलग्नक: यथोक्त।                                                
     
    अनुबंध-1
    दिनांक 27.10.2020 को विधान सभा क्षेत्र 04 जौरा में सचिन पायलट की
    आमसभा में श्री प्रमोद कृष्णन द्वारा दिए गए वक्तव्य की स्क्रिप्ट
    “मारीच, द्वापर के प्रारम्भ में हुआ कंस मामा, जिसने अपनी सगी बहन देवकी के तमाम बच्चों का वध इसलिए किया कि उसकी कुर्सी सलामत रहे। तीसरा मामा हुआ महाभारत के दौर में  शकुनि, जिसने छल और प्रपंच से पांडवों को बर्बाद करने का षड़यंत्र रचा था। लेकिन आज जौरा की पवित्र भूमि को नमन करते हुए, पवित्र मंच को प्रणाम करते हुए, चम्बल की माटी को माथे पर लगाते हुए मैं ऐलान के साथ कहना चाहता हूँ अगर इन तीनों प्रपंची मामाओं को मिला दिया जाये तो एक मामा बनता है शिवराज मामा। इन तीनों का घोटाला, इन तीनों का कमीनापन अगर एक जगह निचोड़ दिया जाये तो ये आदमी बनता है”

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  8. Order to Ms. Imarti Devi, Candidate from 19-Dabra (SC) Constituency

    Order to Ms. Imarti Devi, Candidate from 19-Dabra (SC) Constituency
     

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  9. श्री विसाहुलाल सिंह, बीजेपी अभ्यर्थी को आदेश

    सं.100/मध्य प्रदेश-वि.स./2020-(उप) 
    दिनांक: 31 अक्‍तूबर, 2020
    आदेश
          यत:, आयोग ने मध्‍यप्रदेश विधान सभा के चल रहे उप-निर्वाचनों के दौरान राजनीतिक दलों और अभ्‍यर्थियों के मार्गदर्शन की आदर्श आचार संहिता के ‘साधारण संचालन’ के भाग-I के पैरा (2) और पैरा (5) में विनिर्दिष्‍ट उपबंधों का उल्‍लंघन करने और आयोग के पत्र सं. 437/6/अनुदेश/भा.नि.आ./ प्रका./आ.आ.सं./2019, दिनांक 29 अप्रैल, 2019 द्वारा जारी परामर्शिका की अवमानना करने के लिए श्री विसाहुलाल सिंह, 87-अनूपपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी अभ्यर्थी को नोटिस सं. 100/मध्य प्रदेश-वि.स./2020(उप) दिनांक 24 अक्‍तूबर, 2020 जारी किया था; और 
    2.    यत:, आयोग को उपर्युक्‍त नोटिस के संबंध में श्री विसाहुलाल सिंह का उत्‍तर 27 अक्‍तूबर, 2020 को मिला है; और  
    3.    यत:, श्री विसाहुलाल सिंह ने अपने उपर्युक्‍त उत्‍तर में, अन्‍य बातों के साथ-साथ, निम्‍नलिखित निवेदन किया है:- 
    (क)  उनका संदर्भित कथन कांग्रेस प्रत्याशी श्री विश्वनाथ सिंह द्वारा विधानसभा निर्वाचन के संबंध में भरे गये निर्वाचन फार्म के बारे में सम्पति तथा अन्य तथ्यों को लेकर ब्योरा दिए जाने के बारे में था।
    (ख)  यह विधि का यह सर्वमान्य सिद्धांत है कि पहली/एक पत्नी के जीवित रहते हुए कोई भी व्यक्ति दूसरा विवाह नहीं कर सकता और यदि करता भी है अथवा किसी और को पत्नी के रूप या किसी भी रूप में अपने साथ रखता है तो वह अवैध है तथा ऐसी दूसरी महिला को कानून की भाषा में रखैल शब्द से संबोधित किया गया है। इस संबंध में दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 125 की उपधारा 3 का स्पष्टीकरण अवलोकनीय है।
    (ग)   यह कि प्रार्थी वरिष्ठ व्यक्ति है। इस तरह वृद्ध होने के कारण बोलने में कभी शब्दों में अस्पष्टता मालूम पड़ती है। श्री जयप्रकाश अग्रवाल के बारे में जो शब्द दुर्दशा होना बताया जा रहा है उसका उपयोग प्रार्थी द्वारा नहीं दिया गया था बल्कि वह वास्तविक शब्द सुधार था। श्री जयप्रकाश अग्रवाल के बारे में कहे गये पूरे शब्दों को यदि पूर्णतया एक साथ पढ़ा जाएगा तो उससे यह स्पष्ट है कि उसे सुधारने और रास्ते में लाने की बात कही गई प्रकट होती है। कोई भी व्यक्ति अपने करीबी और दोस्त शुभचिंतक के बारे में ही ऐसा कह सकता है।
    (घ)   श्री जयप्रकाश अग्रवाल के बारे में प्रार्थी न तो कोई दुर्भावना रखता है और न ही उसके बारे में कोई आपत्तिजनक बात कही गई है।  
    4.    यत:, आयोग ने इस मामले पर सावधानीपूर्वक विचार किया है और आयोग का यह सुविचारित मत है कि श्री विसाहुलाल सिंह ने राजनैतिक दलों और अभ्‍यर्थियों के मार्गदर्शन की आदर्श आचार संहिता के ‘साधारण संचालन’ के भाग-I के पैरा (2) और पैरा (5) और आयोग के पत्र सं. 437/6/अनुदेश/भा.नि.आ./प्रका./आ.आ.सं./2019, दिनांक 29 अप्रैल, 2019 के तहत जारी परामर्शिका का उल्‍लंघन किया है।  
    5.    अत:, अब, आयोग श्री विसाहुलाल सिंह, 87- अनूपपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी अभ्यर्थी के विवादित बयान की एतद्द्वारा निंदा करता है और उन्हें पुनः परामर्श देता है कि वे आदर्श आचार संहिता की अवधि के दौरान सार्वजनिक बयान देते समय ऐसे शब्द अथवा कथन से बाज आएं।  
     
    आदेश से 
    हस्ता/-
    (मधुसूदन गुप्ता)
     सचिव
     
    सेवा में
    श्री विसाहुलाल सिंह,
    87-अनूपपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी अभ्यर्थी,
    मध्‍य प्रदेश     

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  10. Notice to Ms. Usha Thakur, BJP Minister

    Notice to Ms. Usha Thakur, BJP Minister
     

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  11. श्री मोहन यादव, मंत्री भारतीय जनता पार्टी को आदेश

    सं. 100/एमपी-एलए/2020-(उप)
    दिनांक: 30 अक्तूबर,  2020
    आदेश
    यत:, आयोग ने राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के ‘सामान्य आचरण’ के भाग I के पैरा (2) के उपबंधों का उल्लंघन करने के लिए श्री मोहन यादव, मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश सरकार को 24 अक्तूबर, 2020  को एक नोटिस संख्या 100/एमपी-एलए/2020-(उप) जारी किया था; और    
    2.     यत:, आयोग को उक्त नोटिस के संबंध में आपका उत्तर दिनांक 25 अक्तूबर, 2020 को मिल   गया है;  और   
    3.     यत: आपने उसके उपर्युक्त उत्तर में, अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित कहा है;  
    आयोग द्वारा प्रेषित नोटिस असत्य एवं भ्रामक जानकारी के आधारों पर प्रेषित है तथा प्रथम दृष्ट्या निरस्त किए जाने योग्य है। उचित ट्रांसक्रिप्ट की मूल वीडियो क्लिप उपलब्ध नहीं कराई गई है। तथापि, मैंने आदर्श आचार संहिता के किसी भी प्रावधानों का अथवा किसी भी कानून के वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन नहीं किया है। मेरा संपूर्ण जीवन निष्कलंक रहा है और मेरे द्वारा सदैव भारतीय संविधान एवं कानून का पालन किया गया है। मेरे द्वारा कथित घटना के उद्बोधन में किसी भी जाति अथवा धर्म अथवा वर्ग विशेष अथवा व्यक्ति विशेष के बीच वैमनस्य पैदा करने विषयक कोई वक्तव्य नहीं है। ट्रांसक्रिप्ट में घटना का स्थान कार्यालय, भारतीय जनता पार्टी आगर दर्शित किया गया है, इससे यह स्पष्ट प्रमाणित होता है कि यह सभा किसी सार्वजनिक चौराहे अथवा स्थान पर आयोजित नहीं की गई थी। यह सभा भारतीय जनता पार्टी के जिला आगर स्थित कार्यालय में केवल आमंत्रित भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ताओं तथा पदाधिकारियों का मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। अत: अयोग द्वारा जारी नोटिस/ सूचना पत्र को निरस्त कर दिया जाए।   
    4.    यत: निर्वाचन आयोग ने दिनांक 25.10.2020 के आपके उत्तर पर सावधानीपूर्वक विचार किया है। शिकायत में संदर्भित भाषण के अंश पर विचार करने पर, आयोग संतुष्ट है कि उसके  वक्तव्यों में शिष्टाचार का अतिक्रमण करते हुए असंयमित भाषा का प्रयोग है। शिकायत और आपके उत्तर पर यथोचित विचार करने पर, आयोग ने आपके उत्तर को संतोषजनक नहीं पाया है।
    5.   अब,  इसलिए, निर्वाचन आयोग, एतद्द्वारा “आदर्श आचार संहिता के सामान्य आचरण” के भाग I के पैरा (1) एवं पैरा (2) के उपबंधों के अननुपालन और शिष्टाचार की सीमा का अतिक्रमण करते हुए असंयमित भाषा का प्रयोग करने के लिए आपकी भर्त्सना करता है और अपेक्षा करता है कि आप, एक जिम्मेदार राजनीतिज्ञ होने के नाते, निर्वाचन काल के दौरान ऐसे अशोभनीय कथनों को नहीं दोहराएंगे।
    6.   आयोग, भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 और इसके अधीन मिली अन्य सभी शक्तियों के तहत, चल रहे निर्वाचन के संबंध में श्री मोहन यादव, मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश सरकार पर, मध्य प्रदेश में कहीं भी कोई भी जनसभा करने, जलूस निकालने, जनता की रैली करने, रोड शो करने और साक्षात्कार, मीडिया (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट, सोशल मेडिया) में सार्वजनिक बयान देने इत्यादि पर 31 अक्तूबर, 2020 को एक दिन (1) के लिए प्रतिबंध भी लगाता है।

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  12. श्री गिर्राज दण्डोतिया, बीजेपी अभ्यर्थी को नोटिस

    सं. 100/मध्य प्रदेश–वि.स./2020-(उप)
    दिनांकः 30 अक्तूबर, 2020
     
    नोटिस 
    यतः, आयोग द्वारा दिनांक 29 सितम्बर, 2020 को प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे.नो./67/2020 के तहत मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए उप-निर्वाचनों की घोषणा की गई थी और उक्त प्रेस नोट के पैरा 4 के अनुसार आदर्श आचार संहिता के उपबंध उक्त तारीख से लागू हो गए हैं; और 
    2.    यतः, आदर्श आचार संहिता के भाग I के उप पैरा (1) में यह प्रावधान है कि ‘किसी भी दल अथवा अभ्यर्थी को ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होना चाहिए जो विभिन्न जातियों एवं समुदायों, विभिन्न धर्मों या अन्य भाषा भाषियों के बीच मौजूदा मतभेदों को बढ़ाए या परस्पर घृणा उत्पन्न करे या तनाव पैदा करे’; और 
    3.    यतः, मध्य प्रदेश, मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा श्री गिर्राज दण्डोतिया, 07-दिमनी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी अभ्यर्थी द्वारा दिनांक 22/10/2020 को स्वराज एक्सप्रेस को दिए गए साक्षात्कार पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है तथा उक्त को वीडियो क्लिप और अधिकृत प्रतिलेख अनुलग्नक-I के साथ निम्नानुसार प्राप्त किया गया है: 
    "जब आयटम कहोगे किसी की पत्नी को, यहाँ आयटम कह दिया जाएगा, यहाँ मान्समर जाएगो, यहाँ गोलियाँ चल जाएंगी। किसी की बहन को आयटम कह देखोगे, यहाँ खून की नदियाँ बह जाएंगी। कमलनाथ जिंदा निकल गये, अपने आपको बहुत समझे, अगर जेबात यहाँ पर कह देते तो मैं कहता हूँ कि जिंदा नहीं जा पाते, कमलनाथ यहाँ से, चम्बल से।" 
    4.    यतः, श्री गिर्राज दण्डोतिया द्वारा दिए गए भाषण के प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) की आयोग में जांच की गई है और उनके बयान को राजनैतिक दलों एवं अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन हेतु आदर्श आचार संहिता के ‘साधारण संचालन’ के भाग I के उप पैरा (1) में निहित प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए पाया गया है; और  
    5.    अब, इसलिए, आयोग श्री गिर्राज दण्डोतिया को एक अवसर देता है कि वह इस नोटिस की प्राप्ति के 48 घंटों के भीतर दिए गए उपर्युक्त बयान के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करें, ऐसा न करने पर भारत निर्वाचन आयोग इनका आगे संदर्भ दिए बिना निर्णय लेगा।

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  13. श्री कमल नाथ, पूर्व सीएम, मध्य प्रदेश को आदेश

    सं. 100/एमपी-एलए/2020-(बाय.)
    दिनांक: 30 अक्तूबर,  2020
    आदेश  
    यत:, आयोग द्वारा  मध्यप्रदेश की विधान सभा के लिए उप-निर्वाचन प्रेस नोट सं. ईसीआई/पीएन/67/2020 के माध्यम से दिनांक 29 सितंबर, 2020 को घोषित कर दिए गए थे और उक्त प्रेस नोट के पैरा 4 के अनुसार आदर्श आचार संहिता के उपबंध उसी तारीख से लागू कर दिए गए थे; और   
    2.    यत:, आदर्श आचार संहिता के भाग 1 के उप पैरा (1) में उल्लेख है कि ‘कोई भी दल या अभ्यर्थी किसी भी ऐसी गतिविधि में शामिल नहीं होगा, जो वर्तमान मतभेदों को बढ़ाए या आपसी घृणा पैदा करे या विभिन्न जातियों और समुदायों के बीच धार्मिक या भाषायी तनाव पैदा करे; और        
    3.    यत:, आदर्श आचार संहिता के भाग 1 के उप पैरा (2) में उल्लेख है कि, अन्य बातों के साथ-साथ, ‘सभी दल और सभी अभ्यर्थी दलों के नेताओं अथवा कार्यकर्ताओं की निजी जिंदगी के उन सभी पहलुओं की आलोचना करने से बचेंगे जो उनकी सार्वजनिक गतिविधियों से संबद्ध न हों’; और    
    4.    यत:, आयोग को भारतीय जनता पार्टी (म.प्र.) से और राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष से भी शिकायतें मिली हैं कि श्री कमल नाथ, नेता प्रतिपक्ष, मध्य प्रदेश विधान सभा ने एक महिला अभ्यर्थी के लिए “आइटम” शब्द का प्रयोग किया है।         
    5.    यत:, आयोग ने श्री कमलनाथ को उक्त कथन के कहे जाने के बारे में अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए एक अवसर प्रदान करते हुए दिनांक 21.10.2020 के नोटिस के माध्यम से एक नोटिस जारी किया। इस मामले में उनके द्वारा दिनांक 22.10.2020 को एक उत्तर प्रस्तुत किया गया था।     
    6.           यत:,  श्री कमल नाथ का उक्त उत्तर संतोषजनक नहीं पाया गया था और इसलिए  आयोग ने, ‘राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के सामान्य आचरण’ के भाग I  के पैरा (2) में अंतर्विष्ट उपबंधों का उल्लंघन करने और मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए चल रहे उप-निर्वाचनों के दौरान आयोग द्वारा दिनांक 29 अप्रैल, 2019 के  अपने पत्र सं. 437/6/आईएनएसटी/ईसीआई/एफएनसीटी/एमसीसी/2019 के माध्यम से जारी की गई परामर्शिका (एडवायजरी) का सम्मान न करने के लिए श्री कमल नाथ को दिनांक 26.10.2020 का एक परामर्शिका आदेश जारी किया।  
    “आयोग का सुविचारित मत है कि श्री कमल नाथ ने एक महिला के लिए “आइटम” शब्द का प्रयोग किया है और यह आयोग द्वारा जारी परामर्शिका का उल्लंघन है--------- 
    अब, इसलिए, आयोग, श्री कमल नाथ, पूर्व मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश को एतद्द्वारा सलाह देता है कि सार्वजनिक रूप से बोलते समय उन्हें आदर्श आचार संहिता की अवधि के दौरान ऐसे शब्द या कथन का प्रयोग नहीं करना चाहिए ”; और       
    7.    यत:, भारतीय जनता पार्टी (मध्य प्रदेश) से एक और शिकायत आयोग के ध्यान में लाई गई है कि श्री कमल नाथ ने 13.10.2020 को कहा है कि “शिवराज नौटंकी के कलाकार, मुम्बई जाकर एक्टिंग करें”; और   
    8.    यत:, आयोग ने इस संबंध में मुख्य निर्वाचक अधिकारी, मध्य प्रदेश से एक रिपोर्ट मांगी। इस संबंध में मुख्य निर्वाचक अधिकारी, मध्य प्रदेश ने श्री कमल नाथ के दिनांक 13.10.2020 के भाषण का प्रतिलेख, जिसमें श्री कमल नाथ ने कहा है कि “आपके भगवान तो वो माफिया हैं जिससे आपने मध्य प्रदेश की पहचान बनाई आपके भगवान तो मिलावट खोर हैं।” के साथ एक रिपोर्ट भेजी है। मुख्य निर्वाचक अधिकारी, मध्य प्रदेश की रिपोर्ट भी आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की पुष्टि करती है; और        
    9.    यत:, निर्वाचनों से पहले प्रचार के दौरान सबको समान अवसर प्रदान करने के साथ-साथ नैतिक और गरिमापूर्ण व्यवहार बनाए रखने के लिए सभी राजनैतिक दलों की सहमति से आदर्श आचार संहिता अनेक दशकों में विकसित हुआ है; और    
    10.   यत:, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से राजनैतिक दल के नेताओं (स्टार प्रचारकों) की एक सूची  दिनांक 19.10.2020 के पत्र के माध्यम से प्राप्त हुई थी, जिसमें मध्य प्रदेश विधान सभा, 2020 के उप-निर्वाचन के लिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 77(1) के तहत श्री कमल नाथ का नाम क्रम संख्या-3 पर रखा गया था; और
    11.   यत:, आयोग ने इस मामले पर सावधानीपूर्वक विचार किया है और यह अवलोकन करके नाराजगी व्यक्त की है कि श्री कमल नाथ एक राजनैतिक दल के नेता होने के बावजूद आदर्श आचार संहिता के उपबंधों का बार-बार उल्लंघन कर रहे हैं तथा नैतिक और गरिमापूर्ण व्यवहार का अतिक्रमण कर रहे हैं; और  
    12. अत:, अब, आदर्श आचार संहिता का बार-बार उल्लंघन करने और उन्हें जारी की गई परामर्शिका का पूरी तरह से निरादर करने के लिए आयोग, एतद्द्वारा मध्य प्रदेश विधान सभा, 2020 के लिए चल रहे उप-निर्वाचनों के लिए श्री कमल नाथ, पूर्व मुख्य मंत्री, मध्य प्रदेश को प्राप्त राजनैतिक दल के नेता (स्टार प्रचारक) के दर्जे को तत्काल प्रभाव से वापस लेता है।  
    13.   फलस्वरूप, जिला निर्वाचन अधिकारी/रिटर्निंग अधिकारी द्वारा श्री कमल नाथ को स्टार प्रचारक के रूप में कोई भी अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, श्री कमल नाथ द्वारा यदि अब आगे कोई प्रचार अभियान चलाया जाता है तो, यात्रा करने, ठहरने, दौरे इत्यादि से संबंधित संपूर्ण खर्च पूरी तरह से उस अभ्यर्थी के द्वारा वहन किया जाएगा जिसके निर्वाचन क्षेत्र में प्रचार अभियान चलाया जाता है।                       

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  14. श्री कैलाश विजयवर्गीय को आदेश

    सं. 100/एमपी-एलए/2020-(उप)
    दिनांक: 30 अक्तूबर,  2020
    आदेश
    यत:, आयोग ने, मध्यप्रदेश की विधान सभा के लिए चल रहे उप-निर्वाचनों के दौरान राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के ‘सामान्य आचरण’ के भाग I के पैरा(2) के उपबंधों का उल्लंघन करने के लिए श्री कैलाश विजयवर्गीय, भाजपा नेता को 26 अक्तूबर, 2020  को एक नोटिस, संख्या 100/एमपी-एलए/2020-(उप) जारी किया था; और    
    2.     यत:, आयोग को,  श्री कैलाश विजयवर्गीय से उक्त नोटिस का उत्तर 27 अक्तूबर, 2020 को मिल गया है; और   
    3.     यत:, श्री कैलाश विजय वर्गीय ने, उक्त उत्तर में,  अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित कहा है:
    क)    उन्होंने अनेक निर्वाचन लड़े हैं और हमेशा निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देश का पालन किया है और वे आयोग के दिशा-निर्देश और आदर्श आचार संहिता का पूरा सम्मान करते है।        ख)    यह कि, प्रारम्भ में ही, शिकायत या नोटिस में लगाए गए सभी विपरीत आरोप पूरी तरह से अस्वीकार किए जाते हैं और इनमें से किसी भी आरोप को तब तक स्वीकार किया हुआ न समझा जाय, जब तक कि यहां इस उत्तर में विशेष रूप से ऐसा उल्लेख न किया गया हो। अधोहस्ताक्षरी शुरूआत में ही यहां पुन: अनुरोध करता है कि नोटिस में उद्धृत टिप्पणियों में इसके संदर्भ को पूर्णरूपेण गलत समझ लिया गया है। यह शिकायत निर्वाचन के रुख को बदलने के लिए निर्वाचन के माहौल में कांग्रेस पार्टी द्वारा की गई व्याख्या है।  
    ग)    संपूर्ण भाषण और कथित आपत्तिजनक शब्दों का ध्यान से अवलोकन करने से यह स्पष्ट है कि कांग्रेस पार्टी के दोनों नेताओं के आरोपों को निजी जिंदगी के सभी पहलुओं के बारे में की गई आलोचना नहीं माना जा सकता, जो कि दलों के नेताओं अथवा कार्यकर्ताओं की सार्वजनिक  गतिविधियों से सम्बद्ध नहीं हैं, जैसा कि आदर्श आचार संहिता के पैरा 1(2) में परिभाषित है।
    घ)    यह कि, यह प्रस्तुत किया गया है कि निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों और आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों का पालन करना उनके और बीजेपी के प्रत्येक पार्टी कार्यकर्ता के लिए सर्वोपरि है तथा वह इनका सर्वाधिक सम्मान करते हैं।     
    4.    यत:, निर्वाचन आयोग ने इस मामले पर सावधानीपूर्वक विचार किया है और यह उसका सुविचारित मत है कि श्री कैलाश विजयवर्गीय ने ‘राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के सामान्य आचरण’ के भाग I  के पैरा (2) का उल्लंघन किया है।                
    5.           अब, इसलिए, आयोग श्री कैलाश विजयवर्गीय को एतद्द्वारा सलाह देता है कि आदर्श आचार संहिता लागू रहने की अवधि के दौरान, अपने सार्वजनिक वक्तव्य देते समय उन्हें ऐसे शब्द या कथन का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

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  15. बिहार विधानसभा के लिए साधारण निर्वाचन, 2020 - तीसरा चरण - वीडियो कॉन्फ्रेंस के लिए व्यय प्रेक्षकों द्वारा "स्टेटस नोट/फीडबैक" - तत्संबंधी।

    सं. 116/बिहार-वि. स./ईओ/2020/सीईएमएस-III
    दिनांक: 29 अक्तूबर, 2020
     
    सेवा में
          मुख्य निर्वाचन अधिकारी
          बिहार
          पटना।
     
    विषय:-बिहार विधानसभा के लिए साधारण निर्वाचन, 2020 - तीसरा चरण - वीडियो कॉन्फ्रेंस के लिए व्यय प्रेक्षकों द्वारा "स्टेटस नोट/फीडबैक" - तत्संबंधी।
     
    महोदय 
          मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि आयोग दिनांक 4 नवम्बर, 2020 को अपराह्न 4.00 बजे बिहार राज्य में तीसरे चरण में तैनात सभी व्यय प्रेक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से फील्ड मशीनरी की मतदान तैयारियों का व्यापक अवलोकन करने और निर्वाचन संबंधी सभी नियमों, दिशा-निर्देशों और अनुदेशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक समीक्षा बैठक का आयोजन करेगा।      
    इस संबंध में, आपसे अनुरोध है कि तृतीय चरण के निर्वाचन के सभी व्यय प्रेक्षकों के लिए अनुलग्नक "क" पर "स्टेटस नोट/फीडबैक" परिचालित करें। 
    "स्टेटस नोट/फीडबैक" व्यय प्रेक्षकों द्वारा निम्नलिखित ईमेल पर दिनांक 2 नवंबर, 2020 को अपराह्न 2.00 बजे तक अवश्य भेज दी जाए।
    nk.gautam@eci.gov.in, traogharu@eci.gov.in
    उक्त को व्यय प्रेक्षक पोर्टल पर भी (कोई अन्य रिपोर्ट) शीर्षक के अंतर्गत अपलोड किया जाए। 
    व्यय पर्यवेक्षकों के इस "स्टेटस नोट/फीडबैक" को संक्षिप्त, आकर्षक और क्रिस्प और केंद्रित होना चाहिए और यह टाइप किए हुए ए-4 के 2 पृष्ठों से अधिक नहीं होना चाहिए। "स्टेटस नोट/फीडबैक" में शामिल किए जाने वाले मुद्दों/बिंदुओं की एक सांकेतिक सूची अनुलग्नक 'क' में संलग्न है। 
          सभी व्यय प्रेक्षकों को अनुसूची के अनुसार, जिला निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय/जिला मुख्यालय पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान, आयोग के ध्यान में लाने के लिए महत्वपूर्ण अंतराल, तत्काल कार्य करने योग्य बिंदुओं, महत्वपूर्ण मुद्दों या अन्य महत्वपूर्ण सूचनाओं पर व्यक्तिगत प्रतिक्रिया, यदि कोई हो, देने के लिए उपस्थित रहना चाहिए। 
          स्टेटस नोट/फीडबैक का उपर्युक्त प्रोफार्मा आयोग की वेबसाइट www.eci.gov.in पर भी उपलब्ध है और "प्रेक्षक पोर्टल (केवल प्रेक्षक के लिए)"-"व्यय प्रेक्षक हेतु महत्वपूर्ण अनुदेश" शीर्षक के अंतर्गत देखा जा सकता है।
         
    इस अनुदेश को अनुपालन हेतु सभी व्यय प्रेक्षकों के ध्यान में तत्काल लाया जाए।
     
    अनु.: उपर्युक्त अनुसार  
    भवदीय 
    (टीटव राव)
    अवर सचिव
     
    ********************** 
    अनुलग्नक-'क'
     
    व्यय प्रेक्षकों से फीडबैक/स्टेटस रिपोर्ट का प्रोफार्मा
     
    ईओ का नामः-            एसी सं.:-          जिला/राज्य का नाम-
     
    क्र. सं.
    मद
    टिप्पणी
    1.
    (क) क्या वीएसटी, वीवीटी, एसएसटी और अकाउंट टीम ठीक जगह पर हैं और ठीक से काम कर रहे हैं?
     
    (ख) क्या एसओआर और एफओई को ठीक से बनाए रखा जा रहा है?
     
    2.
    प्रति निर्वाचन क्षेत्र में तैनात एफएस, एसएसटी और वीएसटी की संख्या। इन दलों की दक्षता में सुधार के लिए सुझाव।
     
    3.
    शिकायत अनुवीक्षण सेल - नकद/शराब/नशा/उपहार इत्यादि के वितरण से संबंधित प्राप्त शिकायतों की संख्या
     
    4.
    आज की तारीख तक एफएस, एसएसटी और पुलिस द्वारा की गई जब्ती।
    (मात्रा एवं रुपए में मूल्य दोनों)।
     
    नकद
     
    शराब
     
    डी डब्ल्यू और
     
    उपहार
     
    अन्य
     
    5.
    (क) अभ्यर्थी के खातों के निरीक्षण की यथानिर्धारित तिथि।
     
    (ख) क्या सभी अभ्यर्थी अपने खातों का निरीक्षण करवा रहे हैं?
     
    (ग) अभ्यर्थी (यों) (राजनीतिक दल के नाम के साथ) द्वारा किए गए अधिकतम व्यय का उल्लेख करें।
     
    6.
    कितने अभ्यर्थियों ने पृथक बैंक खाते नहीं खोले?
     
    7.
    (क) आपराधिक पूर्ववृत्त वाले अभ्यर्थियों की संख्या।
     
    (ख) क्या ऐसे अभ्यर्थियों ने प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अपने आपराधिक पूर्ववृत्त प्रकाशित किए हैं।
    (ग) आपराधिक पूर्ववृत्त के प्रकाशन पर संबंधित अभ्यर्थियों द्वारा किए गए व्यय।
     
    8.
    एमसीएमसी को मिली संदिग्ध पेड न्यूज की शिकायतें और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट।
     
    9.
    शराब उत्पादन इकाइयों, गोदामों और बिक्री आउटलेट्स का अनुवीक्षण।
     
    10.
    व्यय संवेदनशील पॉकेट्स की पहचान और अनुवीक्षण। क्या सीपीएफ कर्मियों को एफएस के साथ मिलाया गया है?
     
    11.
    क्या उड़न दस्तों के वाहन जीपीएस सक्षम हैं?
     
    12.
    सी-विजिल के माध्यम से प्राप्त नकदी, शराब, अभद्रता के उपयोग से संबंधित शिकायतों की संख्या और सही पाए गए मामलों की संख्या।
     
     
    13.
    मतदान से पहले अंतिम 72 घंटों के लिए आपकी क्या रणनीति है?
     
     
    14.
    कोई और मुद्दा
     
     
     
    तिथि सहित हस्ताक्षर
    व्यय प्रेक्षक का नाम
    पीसी/एसी की सं. एवं नाम
    जिला का नाम
    राज्य का नाम

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  16. सुश्री इमरती देवी, 19-डबरा (अ.जा.) से बीजेपी की अभ्यर्थी को नोटिस

    सं. 100/मध्य प्रदेश–वि.स./2020-(उप)                     
    दिनांकः 27 अक्तूबर, 2020
     
    नोटिस
     
    यतः, आयोग द्वारा दिनांक 29 सितम्बर, 2020 को प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे.नो./67/2020 के तहत मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए उप-निर्वाचनों की घोषणा कर दी गई है और उक्त प्रेस नोट के पैरा 4 के अनुसार आदर्श आचार संहिता के उपबंध उक्त तारीख से लागू हो गए हैं; और 
    2.    यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप पैरा (1) में यह प्रावधान है कि ‘किसी भी दल अथवा अभ्यर्थी को ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होना चाहिए जो विभिन्न जातियों एवं समुदायों-धार्मिक या भाषायी-के बीच मौजूदा मतभेदों को बढ़ाए या परस्पर घृणा उत्पन्न करे या तनाव पैदा करे,’ और 
    3.    यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप-पैरा (2) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान है कि दलों और अभ्यर्थियों को निजी जीवन के ऐसे सभी पहलुओं की आलोचना से बचना चाहिए, जिनका दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक कार्यकलापों से सरोकार न हो; और 
    4.    यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप पैरा (5) में यह प्रावधान है कि ‘प्रत्येक व्यक्ति के शांतिपूर्ण और विघ्नरहित घरेलू जीवन के अधिकार का आदर करना चाहिए चाहे राजनैतिक दल एवं अभ्यर्थी उसके राजनैतिक विचारों या कार्यों के कितने ही विरूद्ध क्यों न हों। व्यक्तियों के विचारों या कार्यों का विरोध करने के लिए उनके घरों के सामने प्रदर्शन करने या धरना देने के तरीकों का सहारा किसी भी परिस्थति में नहीं लेना चाहिए’; और  
    5.    यतः, आयोग ने सभी मान्यताप्राप्त राजनैतिक दलों को अपने पत्र सं. 437/6/अनु./ईसीआई/प्रका./एमसीसी/2019, दिनांक 29 अप्रैल, 2019 को परामर्शिका जारी की है कि ‘राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों को ऐसे किसी भी कार्य/कार्रवाई/कथनों से बचना चाहिए जो महिलाओं के सम्मान और गरिमा के विरूद्ध माना जाता हो; और 
    6.    यतः, सोशल मीडिया पर प्रसारित शिकायत के आधार पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश से एक रिपोर्ट मांगी गई थी तथा उक्त को अब तथाकथित संबोधन (अनुलग्नक-I) के अधिकृत प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) के साथ निम्नानुसार प्राप्त किया गया हैः 
    “वह बंगाली आदमी है वह मध्य प्रदेश आया केवल मुख्यमंत्री के लिए। उसको बोलने की सभ्यता नहीं है। इसे क्या कहा जाए। वह मुख्यमंत्री के पद से हटा तो पागल हो गया है। पागल बनकर पूरे मध्य प्रदेश में घूम रहा है तो उसे क्या कह सकते है, उसकी माँ बहन आइटम होगी बंगाल की। हमें पता थोड़ी है।”  
    7.    यतः, सुश्री इमरती देवी द्वारा दिए गए भाषण की वीडियो क्लिप और प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) की आयोग में जांच की गई है और उनके बयान को ‘राजनैतिक दलों एवं अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन हेतु आदर्श आचार संहिता के साधारण संचालन’ के पैरा (1), (2) और भाग (I) के (5) में निहित प्रावधानों का उल्लंघन करते और आयोग द्वारा अपने पत्र सं. 437/6/अनु./ईसीआई/प्रका./एमसीसी/2019, दिनांक 29 अप्रैल, 2019 के तहत जारी की गई परामर्शिका की अवहेलना करते हुए पाया गया है; और 
    8.    अब, इसलिए, आयोग आपको अवसर देता है कि आप इस नोटिस की प्राप्ति के 48 घंटों के भीतर दिए गए उपर्युक्त बयान के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करें, ऐसा न करने पर भारत निर्वाचन आयोग आपको आगे संदर्भ दिए बिना निर्णय लेगा।
         
    आदेश से
    अनु.: उपर्युक्त अनुसार
     
    (स्टेण्डहोप युहलूंग)
    वरिष्ठ प्रधान सचिव
     
     
     
    सेवा में
    सुश्री इमरती देवी,
    19-डबरा (अ. जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से अभ्यर्थी,
    मध्य प्रदेश
     
     

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  17. Notice to Shri Sajjan Singh Verma, Congress leader

    सं. 100/मध्य प्रदेश – वि.स./2020-(उप)               
     दिनांकः 26 अक्तूबर, 2020
     
    नोटिस 
    यतः, आयोग द्वारा दिनांक 29 सितम्बर, 2020 को प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे.नो./67/2020 के तहत मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए उप-निर्वाचनों की घोषणा कर दी गई है और उक्त प्रेस नोट के पैरा 4 के अनुसार आदर्श आचार संहिता के उपबंध उक्त तारीख से लागू हो गए हैं; और 
    2.    यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप पैरा (1) में यह प्रावधान है कि ‘किसी भी दल अथवा अभ्यर्थी को ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होना चाहिए जो विभिन्न जातियों एवं समुदायों-धार्मिक या भाषायी-के बीच मौजूदा मतभेदों को बढ़ाए या परस्पर घृणा उत्पन्न करे या तनाव पैदा करे’; और 
    3.    यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप-पैरा (2) में, अन्य बातों के साथ-साथ, यह प्रावधान है कि दलों और अभ्यर्थियों को निजी जीवन के ऐसे सभी पहलुओं की आलोचना से बचना चाहिए, जिनका दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक कार्यकलापों से सरोकार न हो; और 
    4.    यतः, आयोग ने अन्य बातों के साथ-साथ, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश से एक रिपोर्ट प्राप्त की है, जिसमें दिनांक 15 अक्तूबर, 2020 को सानवेर, इंदौर में रैली को संबोधित करते समय श्री सज्जन सिंह वर्मा, कांग्रेस के नेता ने बीजेपी के नेता कैलाश विजयवर्गीय सिंह को “रावण” के रूप में संबोधित किया; और 
    5.    यतः, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश से एक रिपोर्ट मांगी गई थी, तथा उक्त को अब तथाकथित संबोधन (अनुलग्नक-1) के अधिकृत प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) के साथ निम्नानुसार प्राप्त किया गया हैः 
    “....सुन रे भैया कैलाशिया की तेरी औकात कितनी है...... तू भूल गया वो दिन साड़ी पहनकर, बाल बड़े-बड़े करके नाक में नत्थी पहनकर पंडितजी हाथ चूड़ी पहनकर तंत्र-मंत्र करता था....... नाक पकोड़े जैसी हो गयी,..... दशहरा जैसे जैसे पास में आता है उसका चेहरा रावण जैसा हो जाता है....... मेरा कहना है कितनी बार जला चुके हैं, अब भारतीय जनता पार्टी अभी उनकी सरकार है वो ही इस रावण को जलायें....”  
    6.    यतः, श्री सज्जन सिंह वर्मा द्वारा दिनांक 15 अक्तूबर, 2020 को रैली को संबोधित करने के भाषण के प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) की आयोग में जांच की गई है और उनके बयान को ‘राजनीतिक दलों एवं अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन हेतु आदर्श आचार संहिता के साधारण संचालन’ के भाग I के पैरा (1) और पैरा (2) में निहित प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए पाया गया है; और  
    7.    अब, इसलिए, आयोग आपको अवसर देता है कि आप इस नोटिस की प्राप्ति के 48 घंटों के भीतर दिए गए उपर्युक्त बयान के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करें, ऐसा न करने पर भारत निर्वाचन आयोग आपको आगे संदर्भ दिए बिना निर्णय लेगा।
    अनुलग्नक: उपर्युक्त अनुसार  
                                                                               आदेश से, 
    (स्टैण्डहोप युहलुंग)
    वरिष्ठ प्रधान सचिव
    सेवा में
    श्री सज्जन सिंह वर्मा,
    कांग्रेस के नेता,
    मध्य प्रदेश

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  18. Notice to Shri Kailash Vijayvargiya, BJP

    सं. 100/मध्य प्रदेश – वि.स./2020-(उप)                 दिनांकः 26 अक्तूबर, 2020
     
    नोटिस
     
    यतः, आयोग द्वारा दिनांक 29 सितम्बर, 2020 को प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे.नो./67/2020 के तहत मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए उप-निर्वाचनों की घोषणा कर दी गई है और उक्त प्रेस नोट के पैरा 4 के अनुसार आदर्श आचार संहिता के उपबंध उक्त तारीख से लागू हो गए हैं; और 
    2.    यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप-पैरा (2) में, अन्य बातों के साथ-साथ, यह प्रावधान है कि दलों और अभ्यर्थियों को निजी जीवन के ऐसे सभी पहलुओं की आलोचना से बचना चाहिए, जिनका दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक कार्यकलापों से सरोकार न हो; और 
    3.    यतः, आयोग ने अन्य बातों के साथ-साथ, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश की एक रिपोर्ट प्राप्त की है, जिसमें दिनांक 14 अक्तूबर, 2020 को सानवेर, इंदौर में रैली को संबोधित करते समय श्री कैलाश विजयवर्गीय, भारतीय जनता पार्टी के नेता ने कांग्रेस के नेताओं श्री कमलनाथ और श्री दिग्विजय सिंह को “चुन्नू-मुन्नू” के रूप में संबोधित किया; और 
    4.    यतः, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश से एक रिपोर्ट मांगी गई थी, तथा उक्त को अब तथाकथित संबोधन (अनुलग्नक-1) के अधिकृत प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) के साथ निम्नानुसार प्राप्त किया गया हैः 
    “....ये दोनों सुनो चून्नू-मून्नू दिग्विजय जी और कमलनाथ जी ये दोनों चून्नू-मुन्नू इतने कलाकार हैं....... ये दोनों चुन्नू-मुन्नू एक मुख्यमंत्री बन गया और एक ट्रांसफर उद्योग ले कर अपने बंगले पर बैठ गया....... चुन्नू-मुन्नू गद्दार है और यहाँ लोगों को बोलते हैं शिवराज जी जैसे संत नेता के बारे में क्या बोलते हैं वे नालायक हैं....”  
    5.    यतः, श्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा दिनांक 14 अक्तूबर, 2020 को रैली को संबोधित करने के भाषण के प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) की आयोग में जांच की गई है और उनके बयान को ‘राजनीतिक दलों एवं अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन हेतु आदर्श आचार संहिता के साधारण संचालन’ के भाग I के पैरा (2) में निहित प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए पाया गया है; और  
    6.    अब, इसलिए, आयोग आपको अवसर देता है कि आप इस नोटिस की प्राप्ति के 48 घंटों के भीतर दिए गए उपर्युक्त बयान के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करें, ऐसा न करने पर भारत निर्वाचन आयोग आपको आगे संदर्भ दिए बिना निर्णय लेगा।
    अनुलग्नक: उपर्युक्त अनुसार  
                                                                               आदेश से, 
                                   (स्टैण्डहोप युहलुंग)
    वरिष्ठ प्रधान सचिव
    सेवा में
    श्री कैलाश विजयवर्गीय,
    नेता, भारतीय जनता पार्टी
    मध्य प्रदेश
         

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  19. श्री कमलनाथ, पूर्व सीएम, मध्य प्रदेश को आदेश

    सं.100/म.प्र.-वि.स./2020(उप.नि.)                      
    दिनांक: 26 अक्‍तूबर, 2020
    आदेश
          यत:, आयोग ने मध्‍यप्रदेश विधान सभा के चल रहे उप-निर्वाचनों के दौरान ‘राजनीतिक दलों और अभ्‍यर्थियों के मार्गदर्शन की आदर्श आचार संहिता के साधारण संचालन’ भाग-I के पैरा (2) में विनिर्दिष्‍ट उपबंधों का उल्‍लंघन करने और आयोग के पत्र सं. 437/6/अनुदेश/भा.नि.आ./ प्रकार्य/आआसं./2019, दिनांक 29 अप्रैल, 2019 द्वारा जारी परामर्शिका की अवमानना करने के लिए श्री कमल नाथ, पूर्व मुख्‍यमंत्री, मध्‍य प्रदेश को नोटिस सं. 100/म.प्र.-वि.स./2020(उप.नि.) दिनांक 21 अक्‍तूबर, 2020 जारी किया था; और
     
    2.    यत:, आयोग को उपर्युक्‍त नोटिस के लिए श्री कमलनाथ का उत्‍तर 22 अक्‍तूबर, 2020 को मिला है; और
     
    3.    यत:, श्री कमल नाथ ने अपने उपर्युक्‍त उत्‍तर में, अन्‍य बातों के साथ-साथ, निम्‍नलिखित निवेदन किया है:-
     
    (क)   मेरे लिए और मेरी पार्टी के लिए - महिलाओं का सम्‍मान करना और उनकी गरिमा बनाए रखना सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण है। कहने की आवश्‍यकता नहीं है कि मध्‍य प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री के रूप में महिलाओं के सम्‍मान का संरक्षण, उनकी सुरक्षा और गरिमा बनाए रखना मेरे प्रशासन के महत्‍वपूर्ण आधारों में से एक   था ।
    (ख)   भारत के उच्‍चतम न्‍यायालय ने अपने उल्‍लेखनीय निर्णयों में कई बार कहा है कि निर्वाचनों की गहमागहमी तत्‍क्षण कई बयान दे दिए जाते हैं। इस मामले में भी किसी महिला अथवा महिला जाति के प्रति कोई पूर्वाग्रह नहीं था और न ही उनका अनादर करने की मंशा थी। यह केवल राजनीतिक परिदृश्‍य का एक उदाहरण था, जो अत्‍यंत नाटकीय होता है।
    (ग)    किसी महिला के प्रति न तो कोई दुर्भावना थी और न ही अपमान करने की कोई मंशा। वास्‍तव में, इस घटना के अगले दिन अर्थात 19.10.2020 को मेरे द्वारा खेद व्‍यक्‍त करना और अपने कथन के बारे में स्‍पष्‍टकीकरण देना यह दर्शाता है कि आयोग की दिनांक 29.04.2019 को जारी परामर्शिका की उपेक्षा करने की मेरी कोई मंशा नहीं थी।
    (घ)    अंत में, मैं आयोग को स्‍मरण कराना चाहता हूं कि महिलाओं की गरिमा बनाए रखना, मेरे सार्वजनिक जीवन की आधारशिला है और यह मेरे 40 वर्ष से अधिक के सार्वजनिक जीवन में किए गए मेरे कार्यों और शासन में प्रतिबिंबित होता है।
    (ङ)    मैंने वर्ष 1980 से विभिन्‍न क्षमताओं में कार्य किए हैं – लोक सभा के सदस्‍य के रूप में, एक केंद्रीय मंत्री के रूप में और एक मुख्‍यमंत्री के रूप में। मुझ पर कभी भी महिलाओं या किसी के प्रति कदाचार अथवा क्रोधवश टिप्‍पणी करने का आरोप नहीं लगा है – चाहे संसद के भीतर हो अथवा संसद से बाहर।
    (च)    मुझे आशा और विश्‍वास है कि मेरे सार्वजनिक जीवन के रिकार्ड को देखते हुए निर्वाचन आयोग मेरे इस उत्‍तर से संतुष्‍ट होगा। निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान दिए गए अनर्गल बयान की वजह से किसी व्‍यक्ति के सार्व‍जनिक जिन्‍दगी के रिकार्ड को नजरांदाज नहीं किया जा सकता और न ही करना चाहिए।
    (छ)   मैं अनुरोध करता हूं कि मेरे मौजूदा उत्‍तर को ध्‍यान में रखते हुए उतराधीन नोटिस के तहत मेरे विरूद्ध आरंभ की गई कार्रवाई को कृपया समाप्‍त किया जाए।
    4.    यत:, आयोग ने इस मामले पर गंभीरता से विचार किया है और उसका मानना है कि श्री कमलनाथ ने एक महिला के लिए ‘आइटम’ शब्‍द का प्रयोग किया है और यह आयोग के पत्र सं. 437/6/अनुदेश/भा.नि.आ./प्रकार्य/आआसं./2019, दिनांक 29 अप्रैल, 2019 के तहत जारी परामर्शिका का उल्‍लंघन है।
     
    5.    अत:, अब, आयोग श्री कमलनाथ, पूर्व मुख्‍यमंत्री, मध्‍य प्रदेश को एतद्द्वारा परामर्श देता है कि सार्वजनिक बयान देते समय उन्‍हें आदर्श आचार संहिता की अवधि में इस प्रकार के शब्‍दों अथवा कथनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
     
    आदेश से, 
    (स्‍टैंडहोप युहलुंग)
    वरिष्‍ठ प्रधान सचिव
    सेवा में,
    श्री कमलनाथ,
    पूर्व मुख्‍यमंत्री, मध्‍य प्रदेश,
    शिकारपुर, तहसील मोहखेड़,
    जिला – छिंदवाड़ा, मध्‍य प्रदेश     

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  20. श्री विसाहुलाल सिंह, 87- अनूपपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी के अभ्यर्थी को नोटिस

    सं. 100/मध्य प्रदेश-वि. स./2020 (उप)/
    दिनांक:-24 अक्तूबर, 2020
     
    सेवा में
          मुख्य निर्वाचन अधिकारी,
          मध्य प्रदेश,
          भोपाल।
     
    विषय:- मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए उप-निर्वाचन, 2020- श्री विसाहुलाल सिंह, मध्य प्रदेश में बीजेपी के अभ्यर्थी को नोटिस-तत्संबंधी।
     
    महोदय,     
          मुझे श्री विसाहुलाल सिंह, 87- अनूपपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र, मध्य प्रदेश से बीजेपी के अभ्यर्थी को संबोधित नोटिस सं. 100/मध्य प्रदेश-वि. स./2020(उप), दिनांक 24.10.2020 की एक प्रति इसके साथ अग्रेषित करने का निदेश हुआ है। उपर्युक्त नोटिस केवल एक विशेष दूत या प्रोसेसर के माध्यम से श्री विसाहुलाल सिंह को तत्काल दिया जाए। संबंधित व्यक्ति से नोटिस की प्राप्ति के टोकन के रूप में एक पावती प्राप्त करके आयोग को प्रस्तुत की जाए।
     
    भवदीय
     
    हस्ता/-
    (अमित कुमार)
    अवर सचिव
         
    ******************************************** 
     
    भारत निर्वाचन आयोग
    निर्वाचन सदन, अशोक रोड, नई दिल्ली-110001
     
    सं. 100/मध्य प्रदेश – वि.स./2020-(उप)                    दिनांकः 24 अक्तूबर, 2020
     
    नोटिस
     
    यतः, आयोग द्वारा दिनांक 29 सितम्बर, 2020 को प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे.नो./67/2020 के तहत मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए उप-निर्वाचनों की घोषणा कर दी गई है और उक्त प्रेस नोट के पैरा 4 के अनुसार आदर्श आचार संहिता के प्रावधान उक्त तारीख से लागू हो गए हैं; और 
    2.    यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप-पैरा (2) में अन्य बातों के साथ-साथ, यह प्रावधान है कि दलों और अभ्यर्थियों को निजी जीवन के ऐसे सभी पहलुओं की आलोचना से बचना चाहिए, जिनका दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक कार्यकलापों से सरोकार न हो; और  
    3. यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप पैरा (5) में अन्य बातों के साथ-साथ  यह प्रावधान है कि ‘प्रत्येक व्यक्ति के शांतिपूर्ण और विघ्नरहित घरेलू जीवन के अधिकार का आदर करना चाहिए चाहे राजनैतिक दल एवं अभ्यर्थी उसके राजनैतिक विचारों या कार्यों के कितने ही विरूद्ध क्यों न हों,’ और   
    4.    यतः, आयोग ने सभी मान्यताप्राप्त राजनैतिक दलों को अपने पत्र सं. 437/6/अनु./ईसीआई/प्रका./एमसीसी/2019, दिनांक 29 अप्रैल, 2019 को परामर्शिका जारी की है कि ‘राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों को ऐसे किसी भी कार्य/कार्रवाई/कथनों से बचना चाहिए जो महिलाओं के सम्मान और गरिमा के विरूद्ध माना जाता हो; और 
    5.    यतः, आयोग ने अन्य बातों के साथ-साथ मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश से एक रिपोर्ट प्राप्त की है, जिसमें दिनांक 19 अक्तूबर, 2020 को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को संबोधित करते समय श्री विसाहुलाल सिंह 87-अनूपपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी के अभ्यर्थी ने श्री विश्वनाथ सिंह, कांग्रेस के अभ्यर्थी की पत्नी को ‘रखैल’ के रूप में संबोधित किया; और 
    6.    यतः, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश से एक रिपोर्ट मांगी गई थी जो अब तथाकथित संबोधन (अनुलग्नक-1) के अधिकृत प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) के साथ निम्नानुसार प्राप्त हुई हैः 
           "...विधानसभा के निर्वाचन का फॉर्म भरा जाता है तो पूरे सम्पति का ब्यौरा दिया जाता है, सबका ब्यौरा दिया जाता है। परन्तु विश्वनाथ सिंह (कांग्रेस प्रत्याशी) ने अपनी पहली औरत जो वर्तमान में उसका ब्यौरा नहीं दिया है कि मेरा एक ठे औरत और है जिससे शादीशुदा है, रखैल औरत का ब्यौरा दिया तो उससे पता लगाओ, तुम्हारा पुराण वाला औरत कहाँ ठे है, वोहू बताओ न मेरा दो ठो औरत है कह दे दो ठो औरत है..." 
          "जय प्रकाश अग्रवाल मेरे चलते 13 साल तक अध्यक्ष बना और 3 तारीख के बाद जो दुर्दशा मैं जय प्रकाश का करूँगा, कोई नहीं करेगा, रास्ता में लाऊंगा उसको, ऑफिस में बोल दीजियेगा, रास्ता में लाऊंगा, अपना औकात उसको समझाऊंगा.."         
    7.    यतः, श्री विसाहुलाल सिंह द्वारा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सामने दिनांक 19 अक्तूबर, 2020 को दिए गए भाषण की वीडियो क्लिप और प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) की आयोग में जांच की गई है और उनके बयान को ‘राजनैतिक दलों एवं अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन हेतु आदर्श आचार संहिता के साधारण संचालन’ के भाग I के पैरा (2) और पैरा (5) में निहित प्रावधानों का उल्लंघन करते और आयोग द्वारा अपने पत्र सं. 437/6/अनु./ईसीआई/प्रका./एमसीसी/2019, दिनांक 29 अप्रैल, 2019 के तहत जारी की गई परामर्शिका की अवहेलना करते हुए पाया गया है; और  
    8.    अब, इसलिए, आयोग आपको अवसर देता है कि आप इस नोटिस की प्राप्ति के 48 घंटों के भीतर दिए गए उपर्युक्त बयान के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करें, ऐसा न करने पर भारत निर्वाचन आयोग आपको आगे संदर्भ दिए बिना निर्णय लेगा।                                                                          
     
     आदेश से
    अनु.: उपर्युक्त अनुसार
    हस्ता/-
    (मधुसूदन गुप्ता)
    सचिव
     
     
     
     
    सेवा में
    श्री विसाहुलाल सिंह
    87-अनूपपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी अभ्यर्थी,
    मध्य प्रदेश
     

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  21. श्री मोहन यादव, मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस

    सं. 100/मध्य प्रदेश-वि. स./2020 (उप)/ 
    दिनांक:-24 अक्तूबर, 2020
     
    सेवा में
          मुख्य निर्वाचन अधिकारी,
          मध्य प्रदेश,
          भोपाल।
     
    विषय:- मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए उप-निर्वाचन, 2020- श्री मोहन यादव, मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस-तत्संबंधी।
     
    महोदय,     
          मुझे श्री मोहन यादव, मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश सरकार को संबोधित नोटिस सं. 100/मध्य प्रदेश-वि. स./2020(उप), दिनांक 24.10.2020 की एक प्रति इसके साथ अग्रेषित करने का निदेश हुआ है। उपर्युक्त नोटिस केवल एक विशेष दूत या प्रोसेसर के माध्यम से श्री मोहन यादव को तत्काल दिया जाए। संबंधित व्यक्ति से नोटिस की प्राप्ति के टोकन के रूप में एक पावती प्राप्त करके आयोग को प्रस्तुत किया जाए। 
     
    भवदीय
     
    हस्ता/-
    (अमित कुमार)
    अवर सचिव
         
         
    **********************************
     
    भारत निर्वाचन आयोग
    निर्वाचन सदन, अशोक रोड, नई दिल्ली-110001 
    सं. 100/मध्य प्रदेश–वि.स./2020-(उप)
    दिनांकः 24 अक्तूबर, 2020
     
    नोटिस 
    यतः, आयोग द्वारा दिनांक 29 सितम्बर, 2020 को प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे.नो./67/2020 के तहत मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए उप-निर्वाचनों की घोषणा कर दी गई है और उक्त प्रेस नोट के पैरा 4 के अनुसार आदर्श आचार संहिता के प्रावधान उक्त तारीख से लागू हो गए हैं; और 
    2.    यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप पैरा (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान है कि ‘किसी भी दल अथवा अभ्यर्थी को ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होना चाहिए जो विभिन्न जातियों एवं समुदायों-धार्मिक या भाषायी-के बीच मौजूदा मतभेदों को बढ़ाए या परस्पर घृणा उत्पन्न करे या तनाव पैदा करे,’ और 
    3. यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप-पैरा (2) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान है कि दलों और अभ्यर्थियों को निजी जीवन के ऐसे सभी पहलुओं की आलोचना से बचना चाहिए, जिनका दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक कार्यकलापों से सरोकार न हो; और 
    4.    यतः, आयोग ने अन्य बातों के साथ-साथ मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश से तथाकथित संबोधन (अनुलग्नक-I) के अधिकृत प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) के साथ एक रिपोर्ट प्राप्त की है जिसमें श्री मोहन यादव, मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश सरकार ने दिनांक 11 अक्तूबर, 2020 को रैली को संबोधित करने के दौरान यह कहा कि: 
           "भैया इस गांव के सरपंच को बचाओ, पूछा क्या हुआ, बोले कांग्रेस वाले निपटाने पर तूल रहे हैं। एक हों, दो हों, तीन हों, चार हों, अभी तक तो ये विधायक बने ही नहीं थे, विधायक अपने में से कई लोग बने, इसलिए होते हैं विधायक कि शिकार करें, सरपंचों का, अगर शिकार करने के लिए तुमको जरूरत हो आगर में हाट में जाओ, या जंगल में जाओ, जानवर मारो आप अपने मनुष्यों के बीच चुनावी जनप्रतिनिधियों को मारने का अगर पाप करते हो तो आपको जीने का अधिकार नहीं है ये आप रह कैसे रहे हो, हम सब प्रकार से निपटना जानते हैं, राजनीति करते हैं तो स्वाभिमान से करते हैं अच्छे के साथ अच्छा में कदम मिलाकर चलना जानते हैं। लेकिन कोई बुरा करने जायेगा तो घर से निकाल लायेंगे और जमीन में गाड़ने वाले लोग हैं"         
    5.    यतः, आपके द्वारा रैली में दिनांक 11 अक्तूबर, 2020 को दिए गए भाषण की वीडियो क्लिप के प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) की आयोग में जांच की गई है और इस बयान को ‘राजनैतिक दलों एवं अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन हेतु आदर्श आचार संहिता के साधारण संचालन’ के पैरा (1) और भाग I के पैरा (2) में निहित प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए पाया गया है; और  
    6.    अब, इसलिए, आयोग आपको अवसर देता है कि आप इस नोटिस की प्राप्ति के 48 घंटों के भीतर दिए गए उपर्युक्त बयान के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करें, ऐसा न करने पर भारत निर्वाचन आयोग आपको आगे संदर्भ दिए बिना निर्णय लेगा।
                                                                              
     
     आदेश से
    अनु.: उपर्युक्त अनुसार
    हस्ता/-
    (मधुसूदन गुप्ता)
    सचिव 
     
     
    सेवा में
    श्री मोहन यादव,
    मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग,
    मध्य प्रदेश सरकार
    मध्य प्रदेश

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  22. श्री कमल नाथ, पूर्व सीएम, मध्य प्रदेश को नोटिस

    सं. 100/मध्य प्रदेश – वि.स./2020-(उप)
    दिनांकः 21 अक्तूबर, 2020
     
    नोटिस 
    यतः, आयोग द्वारा दिनांक 29 सितम्बर, 2020 को प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे.नो./67/2020 के तहत मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए उप-निर्वाचनों की घोषणा कर दी गई है और उक्त प्रेस नोट के पैरा 4 के अनुसार आदर्श आचार संहिता के उपबंध उक्त तारीख से लागू हो गए हैं; और 
    2.     यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप पैरा (1) में यह प्रावधान है कि ‘किसी भी दल अथवा अभ्यर्थी को ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होना चाहिए जो विभिन्न जातियों एवं समुदायों-धार्मिक या भाषायी-के बीच मौजूदा मतभेदों को बढ़ाए या परस्पर घृणा उत्पन्न करे या तनाव पैदा करे,’ और 
    3.     यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप-पैरा (2) में यह अन्य बातों के साथ-साथ, यह प्रावधान है कि दलों और अभ्यर्थियों को निजी जीवन के ऐसे सभी पहलुओं की आलोचना से बचना चाहिए, जिनका दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक कार्यकलापों से सरोकार न हो; और 
    4.     यतः, आयोग ने सभी मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों को अपने पत्र सं. 437/6/अनु./ईसीआई/प्रका./एमसीसी/2019, दिनांक 29 अप्रैल, 2019 को परामर्शिका जारी की है कि ‘राजनीतिक दलों और अभ्यर्थियों को ऐसे किसी भी कार्य/कार्रवाई/कथनों से बचना चाहिए जो महिलाओं के सम्मान और गरिमा के विरूद्ध माना जाता हो; और 
    5.     यतः, आयोग ने अन्य बातों के साथ-साथ, भारतीय जनता पार्टी (एम.पी.) से दिनांक 18.10.2020 की एक शिकायत की प्रति सहित एक रिपोर्ट प्राप्त की है, जिसमें दिनांक 18 अक्तूबर, 2020 को डबरा, ग्वालियर में जन सभा को संबोधित करते समय आपने श्रीमती ईमरती देवी, बीजेपी की अभ्यर्थी को ‘आइटम’ के रूप में संबोधित किया; और 
    6.     यतः, आयोग ने अध्यक्ष, राष्ट्रीय महिला आयोग से भी शिकायत प्राप्त की है कि श्री कमल नाथ, मध्य प्रदेश विधान सभा में विपक्ष के नेता ने एक महिला मंत्री के खिलाफ “आइटम” शब्द का प्रयोग किया........ और जिम्मेदार पद पर बैठे एक व्यक्ति द्वारा ऐसे गैर-जिम्मेदाराना और अपमानजनक बयान की कड़ी निंदा की”; और 
    7.     यतः, दिनांक 18 अक्तूबर, 2020 की भारतीय जनता पार्टी की शिकायत पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश से एक रिपोर्ट मांगी गई थी, तथा उक्त को अब तथाकथित संबोधन (अनुलग्नक-1) के अधिकृत प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) के साथ निम्नानुसार प्राप्त किया गया हैः 
    “....ये उसके जैसे नहीं है। क्या है उसका नाम? मैं क्या उसका नाम लूं, आप तो उसे मुझसे ज्यादा जानते है। आपको तो मुझे पहले ही सावधान कर देना चाहिए था, यह क्या आइटम है? यह क्या आइटम है?....”  
    8.     यतः, श्री कमल नाथ द्वारा डबरा, ग्वालियर में दिनांक 18 अक्तूबर, 2020 को दिए गए भाषण की वीडियो क्लिप और प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) की आयोग में जांच की गई है और उनके बयान को ‘राजनीतिक दलों एवं अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन हेतु आदर्श आचार संहिता के साधारण संचालन’ के पैरा (2) अथवा भाग (I)  में निहित प्रावधानों का उल्लंघन करते और आयोग द्वारा अपने पत्र सं. 437/6/अनु./ईसीआई/प्रका./एमसीसी/2019, दिनांक 29 अप्रैल, 2019 के तहत जारी की गई परामर्शिका की अवहेलना करते हुए पाया गया है; और  
    9.     अब, इसलिए, आयोग आपको अवसर देता है कि आप इस नोटिस की प्राप्ति के 48 घंटों के भीतर दिए गए उपर्युक्त बयान के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करें, ऐसा न करने पर भारत निर्वाचन आयोग आपको आगे संदर्भ दिए बिना निर्णय लेगा।
                                                                                     आदेश
    अनु.: उपर्युक्त अनुसार
     
    (मधुसूदन गुप्ता)
    सचिव
    सेवा में
          श्री कमल नाथ
           पूर्व-मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश
           शिकारपुर, तहसील मोहखेड़,
           जिला-छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश

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  23. मतदाता शिक्षा और जागरूकता पर सर्वोत्तम प्रचार अभियान हेतु राष्ट्रीय मीडिया पुरस्कार-2020

    सं. 491/मीडिया पुरस्कार/2020(संचार)
    दिनांक: 20 अक्तूबर, 2020
     
    ज्ञापन 
    मतदाता शिक्षा और जागरूकता पर सर्वोत्तम प्रचार अभियान हेतु राष्ट्रीय मीडिया पुरस्कार-2020 
           भारत निर्वाचन आयोग वर्ष-2020 के दौरान मतदाता शिक्षा और जागरूकता पर सर्वोत्तम प्रचार अभियान हेतु राष्ट्रीय मीडिया पुरस्कार के लिए मीडिया घरानों से प्रविष्टियां आमंत्रित करता है। इसके लिए चार पुरस्कार होंगे- प्रिंट मीडिया, टेलीविजन, (इलेक्ट्रॉनिक) रेडियो (इलेक्ट्रॉनिक) तथा ऑनलाइन (इंटरनेट) सोशल मीडिया में से प्रत्‍येक के लिए एक।
          ये पुरस्कार सुगम निर्वाचनों के बारे में लोगों को जागरूक करके, निर्वाचन प्रक्रिया के बारे में लोगों को शिक्षित करके तथा मतदान और पंजीकरण के महत्व और उनकी संगतता के बारे में जन-साधारण के बीच जागरूकता बढ़ा करके निर्वाचक सहभागिता को बढ़ावा देने में मीडिया घरानों के उत्कृष्ट योगदान की पहचान करने के लिए हैं।
          ये पुरस्कार प्रशस्ति-पत्र और फलक के रूप में होंगे और राष्ट्रीय मतदाता दिवस (25 जनवरी, 2021) पर समारोह में प्रदान किए जाएंगे।
    मानदंड
    जूरी निम्नलिखित मानदंडों को अपने मूल्यांकन का आधार बनाएगीः
    मतदाता जागरूकता अभियान की गुणवत्ता कवरेज/मात्रा का विस्तार आम जनता पर प्रभाव के साक्ष्य कोई अन्य सुसंगत कारक प्रविष्टि की शर्तें
          सुसंगत अवधि के दौरान प्रविष्टियों को अवश्य ही प्रकाशित या प्रसारित किया गया हो।
    प्रिंट प्रविष्टियों में निम्नलिखित अवश्य शामिल होने चाहिएः
    सुसंगत अवधि के दौरान किए गए कार्य का सार-विवरण जिसमें निम्न शामिल होने चाहिएः समाचार मदों/लेखों की संख्या वर्ग से.मी. में कुल मुद्रित स्थान पी डी एफ सॉफ्ट कॉपी अथवा संबंधित वेब एड्रेस का लिंक या समाचार पत्र/लेख की पूर्ण आकार फोटो प्रति/मुद्रित प्रति प्रत्यक्ष सार्वजनिक सम्बद्धता इत्यादि जैसे किसी अन्य क्रियाकलापों के ब्योरे अन्य कोई सूचना रेडियो (इलेक्ट्रॉनिक) या टेलीविजन प्रसारण (इलेक्ट्रॉनिक) संबंधी प्रविष्टियों में निम्नलिखित अवश्य शामिल होने चाहिएः
    1.       सुसंगत अवधि के दौरान किए गए प्रचार अभियान/कार्य पर विवरण जिसमें निम्नलिखित शामिल होने चाहिएः
    (i)             रेडियो प्रसारण/टेली प्रसारण की आवृत्ति और कालावधि सहित सामग्री (सी डी या डी वी डी या पेन ड्राइव में) तथा कालावधि के दौरान प्रत्येक स्पॉट के ऐसे प्रसारण का कुल समय
    (ii)           सभी स्पॉटस समाचार हेतु कुल प्रसारण समय का योग
    (iii)         कालावधि, रेडियो प्रसारण/टेली प्रसारण तारीख तथा समय और आवृत्ति सहित सी डी या डी वी डी या पेन ड्राइव अथवा अन्य डिजीटल मीडिया में मतदाता जागरूकता पर कार्यक्रम या समाचार लेख
    2.       प्रत्यक्ष सार्वजनिक सम्बद्धता इत्यादि जैसे अन्य क्रिया कलाप
    3.       अन्य कोई सूचना
    ऑनलाइन (इंटरनेट) सोशल मीडिया प्रविष्टियों में निम्नलिखित अवश्‍य शामिल होने चाहिए :
    1.      सुसंगत अवधि के दौरान किए गए कार्य का सार-विवरण जिसमें पोस्‍ट/ब्‍लाग/प्रचार/ट्वीट/लेख आदि की संख्‍या शामिल होनी चाहिए
    2.      संबंधित लेख की पीडीएफ सॉफ्ट कॉपी या संबंधित वेब एड्रेस का लिंक
    3.      प्रत्यक्ष सार्वजनिक सम्बद्धता इत्यादि जैसे किसी अन्य क्रियाकलाप के ब्योरे
    4.      अन्‍य कोई सूचना
    महत्वपूर्ण
    अंग्रेजी/हिन्दी से इतर अन्य किसी भाषा में प्रस्तुत प्रविष्टियों के साथ अंग्रेजी अनुवाद संलग्न करना अपेक्षित होगा। प्रसारण सामग्री प्रस्तुत करने वाले प्रतिस्पर्धी को इस बात से अवगत होना चाहिए कि जूरी फीचर/कार्यक्रम के केवल प्रथम 10 मिनट का ही उपयोग कर सकती है। आयोग का निर्णय अंतिम होगा तथा कोई भी पत्र-व्यवहार नहीं किया जाएगा। इस संबंध में सभी अधिकार आयोग के पास सुरक्षित रहेंगे। प्रविष्टियों में मीडिया घराने का नाम, पता, टेलीफोन और फैक्स नंबर तथा ई-मेल होने चाहिए। अन्तिम तिथिः प्रविष्टियां निम्नलिखित पते पर 20 नवंबर, 2020 को या उससे पहले अवश्य पहुंच जानी चाहिए।
      श्री पवन दीवान,
    अवर सचिव (संचार)
    भारत निर्वाचन आयोग,
    निर्वाचन सदन, अशोक रोड,
    नई दिल्ली – 110001
    ई मेल- media.election.eci.@gmail.com
               Pawandiwan@eci.gov.in
    दूरभाषः 011-23052133

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  24. मणिपुर विधान सभा के लिए उप-निर्वाचन में मतदान दिवस को और मतदान दिवस से एक दिन पहले प्रिंट मीडिया में राजनैतिक विज्ञापनों का पूर्व-प्रमाणन-तत्संबंधी।

    सं. 491/एमसीएमसी/2020/संचार
    दिनांकः 19 अक्तूबर, 2020
     
    सेवा में
    मुख्य निर्वाचन अधिकारी
    मणिपुर, इम्फाल
     
    विषयः       मणिपुर विधान सभा के लिए उप-निर्वाचन में मतदान दिवस को और मतदान दिवस से एक दिन पहले प्रिंट मीडिया में राजनैतिक विज्ञापनों का पूर्व-प्रमाणन-तत्संबंधी। 
    महोदय, 
    मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि विगत में प्रिंट मीडिया में प्रकाशित अपमानजनक और भ्रामक प्रकृति के विज्ञापनों संबंधी घटनाएं आयोग के ध्यान में लाई गई हैं। निर्वाचनों के अंतिम चरण में ऐसे विज्ञापन, सम्पूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया को दूषित करते हैं। ऐसे मामलों में प्रभावित अभ्यर्थियों और दलों के पास स्पष्टीकरण देने/खंडन करने संबंधी कोई भी अवसर नहीं होता है। 
    2.    यह सुनिश्चित करने कि ऐसे उत्तेजक, भ्रामक और घृणापूर्ण विज्ञापनों के कारण कोई अप्रिय घटना न घटित हो और ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं, के लिए आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के अधीन अपनी शक्तियों और इस प्रयोजनार्थ इसे सक्षम बनाने वाली अन्य सभी शक्तियों का प्रयोग करते हुए एतद्द्वारा निदेश देता है कि प्रिंट मीडिया में राजनैतिक दलों या अभ्यर्थियों या किसी अन्य संगठन या व्यक्ति द्वारा मतदान दिवस पर और सभी चरणों में मतदान दिवस से एक दिन पूर्व अर्थात दिनांक 6 एवं 7 नवम्बर, 2020 को तब तक कोई भी विज्ञापन प्रकाशित नहीं करवाया जाएगा, जब तक कि राजनैतिक दलों, अभ्यर्थियों आदि द्वारा प्रकाशन के लिए प्रस्तावित विज्ञापन की सामग्री को आपके राज्य में राज्य/जिला स्तर पर, जैसा भी मामला हो, एमसीएमसी समिति से पूर्व प्रमाणित न कराया गया हो। 
    3.    इसके अतिरिक्त यह भी निदेश दिया जाता है कि उपर्युक्त निदेशानुसार और समाचार पत्र में विज्ञापनों के पूर्व प्रमाणन की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए, राज्य/जिला स्तर पर एमसीएमसी को तत्काल सचेत (एलर्ट) और क्रियाशील कर दिया जाए ताकि राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों तथा अन्य से प्राप्त ऐसे सभी विज्ञापनों का पूर्व-प्रमाणन और जांच की जा सके। यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि एमसीएमसी द्वारा अविलम्ब निर्णय लिया जाए। 
    4.    आयोग के उपर्युक्त निदेशों को राज्य के सभी राजनैतिक दलों के अध्यक्षों, निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों तथा समाचार पत्रों के ध्यान में लाया जाए तथा सामान्य सूचनार्थ और कड़े अनुपालन हेतु जन-संचार की सभी प्रकार की मीडिया में इसका व्यापक प्रचार भी किया जाए। 
    5.    ये निदेश तत्काल प्रभावी होंगे। 
    6.    इस संबंध में जारी किए गए अनुदेशों की एक प्रति तत्काल आयोग को भी पृष्ठांकित की जाए। 
     
    भवदीय 
    (प्रमोद कुमार शर्मा)
    सचिव

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  25. Pre-certification of Political Advertisements in Print Media on the day of poll & one day prior to poll in Bye-elections - regarding.

    Pre-certification of Political Advertisements in Print Media on the day of poll & one day prior to poll in Bye-elections - regarding.
    Letter to the CEOs of Chhattisgarh, Gujarat, Haryana, Jharkhand, Karnataka, Madhya Pradesh, Nagaland, Odisha, Telangana and Uttar Pradesh.

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eci-logo.pngभारत निर्वाचन आयोग एक स्‍वायत्‍त संवैधानिक प्राधिकरण है जो भारत में निर्वाचन प्रक्रियाओं के संचालन के लिए उत्‍तरदायी है। यह निकाय भारत में लोक सभा, राज्‍य सभा, राज्‍य विधान सभाओं और देश में राष्‍ट्रपति एवं उप-राष्‍ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों का संचालन करता है। निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्‍छेद 324 और बाद में अधिनियमित लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम के प्राधिकार के तहत कार्य करता है। 

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