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  1. Bye-elections-Instruction on enforcement of Model Code of Conduct

    सं.: 437/6/1/ईसीआई/अनुदेश/प्रकार्या/एमसीसी/2020
    दिनांक: 29 सितम्बर, 2020
     
    सेवा में
     1.       मत्रिमंडल सचिव, भारत सरकार, राष्‍ट्रपति भवन, नई दिल्‍ली।
    निम्‍नलिखित सरकारों के मुख्‍य सचिव:-
    क) बिहार, पटना;    छ) मध्य प्रदेश, भोपाल;
    ख) छत्तीसगढ़, रायपुर;   ज) मणिपुर, इम्फाल;
    ग) गुजरात, गांधीनगर;   झ) नागालैंड, कोहिमा;
    घ) हरियाणा, चंडीगढ़;   ञ) ओडिशा, भुवनेश्वर;
    ङ) झारखंड, रांची;    ट) तेलंगाना, हैदराबाद;
    च) कर्नाटक, बेंगलूरू;   ठ) उत्तर प्रदेश, लखनऊ    
    3.   मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी:-
    क) बिहार, पटना;      छ) मध्य प्रदेश, भोपाल;
    ख) छत्तीसगढ़, रायपुर;    ज) मणिपुर, इम्फाल;
    ग) गुजरात, गांधीनगर;     झ) नागालैंड, कोहिमा;
    घ) हरियाणा, चंडीगढ़;     ञ) ओडिशा, भुवनेश्वर;
    ङ) झारखंड, रांची;      ट) तेलंगाना, हैदराबाद;
     च) कर्नाटक, बेंगलूरू;    ठ) उत्तर प्रदेश, लखनऊ
       
    विषयः बिहार के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र और भिन्न राज्यों की राज्य विधान सभाओं में आकस्मिक
    रिक्तियों को भरने के लिए उप-निर्वाचन - आदर्श आचार संहिता के प्रवर्तन के संबंध में अनुदेश - तत्संबंधी।
    महोदय,
    मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि आयोग ने प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रेस नोट/67/2020, दिनांक 29 सितम्बर, 2020 के तहत विभिन्न राज्यों के निम्नलिखित संसदीय/विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में आकस्मिक रिक्तियों को भरने हेतु उप-निर्वाचनों की अनुसूची की घोषणा की हैः- 
    राज्य का नाम
    निर्वाचन क्षेत्र का नाम एवं संख्या
    बिहार
    1-वाल्मीकिनगर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र
    छत्तीसगढ़
    24-मरवाही (अ.ज.जा.) विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र
    गुजरात
    01-अबडासा विधान निर्वाचन क्षेत्र
    61-लींबडी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    65-मोरबी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    94-धारी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    106-गढडा (अ.जा.) विधान निर्वाचन क्षेत्र
    147-करजण विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    173-डांग (अ.ज.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    181-कपराडा (अ.ज.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    हरियाणा
    33-बरोदा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    झारखंड
    10-दुमका (अ.ज.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    35-बेरमो विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    कर्नाटक
    136-सिरा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    154-राजाराजेश्वरीनगर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    मध्य प्रदेश
    04-जौरा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    05-सुमावली विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    06-मुरैना विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    07-दिमनी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    08-अम्बाह (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    12-मेहगांव विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    13-गोहद (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    15-ग्वालियर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    16-ग्वालियर (पूर्व) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    19-डबरा (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    21-भाण्डेर (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    23-करेरा (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    24-पोहरी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    28-बामोरी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    32-अशोकनगर (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    34-मुंगावली विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    37-सुरखी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    53-मलहरा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    87-अनूपपुर (अ.ज.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    142-सांची (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    161-ब्यावरा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    166-आगर (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    172-हाटपिपल्या विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    175-मांधाता विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    179-नेपानगर (अ.ज.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    202-बदनावर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    211-सांवेर (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    226-सुवासरा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    मणिपुर
    30-लिलोंग विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    34-वाँग्जिंग टेन्‍था विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    नागालैंड
    14-दक्षिणी अंगामी-I (अ.ज.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    60-पुंगरो-किफिरे (अ.ज.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    ओडिशा
    38-बालासौर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    102-तिरतोल (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    तेलंगाना
    41-डुब्बक विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    उत्तर प्रदेश
    40-नौगावां सादात विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    65-बुलंदशहर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    95-टूण्डला (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    162-बांगरमऊ विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    218-घाटमपुर (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    337-देवरिया विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    367-मल्हनी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    2.     आदर्श आचार सहिंता के उपबंध, आयोग द्वारा जारी पत्र सं. 437/6/अनुदेश/2016-सीसीएस दिनांक 29 जून, 2017 और सं. 437/6/विविध/ईसीआई/पत्र/प्रकार्य/एमसीसी/2017 दिनांक 18 जनवरी, 2018 (प्रतियां संलग्न) के आंशिक आशोधन के अध्यधीन, उस जिले (जिलों) में तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं जिनमें उप निर्वाचन होने वाले संसदीय/विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र का संपूर्ण अथवा कोई भाग सम्मिलित है।
    3.     इसे कृपया सभी संबंधितों के ध्यान में लाएं।

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  2. उप निर्वाचन - सांसद/विधायक स्‍थानीय क्षेत्र विकास योजना के अधीन निधियाँ जारी करना।

    सं.: 437/6/1/ईसीआई/अनुदेश/प्रकार्या/एमसीसी/2020                                    दिनांक: 29 सितम्बर, 2020
     
    सेवा में
     
    1. मत्रिमंडल सचिव, भारत सरकार, राष्‍ट्रपति भवन, नई दिल्‍ली।
    2.  सचिव, भारत सरकार, कार्यक्रम कार्यान्‍वयन विभाग, सरदार पटेल भवन, नई दिल्‍ली।
    3.  निम्‍नलिखित सरकारों के मुख्‍य सचिव:-
    क) बिहार, पटना;    छ) मध्य प्रदेश, भोपाल;
    ख) छत्तीसगढ़, रायपुर;   ज) मणिपुर, इम्फाल;
    ग) गुजरात, गांधीनगर;    झ) नागालैंड, कोहिमा;
    घ) हरियाणा, चंडीगढ़;  ञ) ओडिशा, भुवनेश्वर;
    ङ) झारखंड, रांची;      ट) तेलंगाना, हैदराबाद;
    च) कर्नाटक, बेंगलूरू;     ठ) उत्तर प्रदेश, लखनऊ    
    4.   मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी
    क) बिहार, पटना;   छ) मध्य प्रदेश, भोपाल;
    ख) छत्तीसगढ़, रायपुर;    ज) मणिपुर, इम्फाल;
    ग) गुजरात, गांधीनगर;  झ) नागालैंड, कोहिमा;
    घ) हरियाणा, चंडीगढ़; ञ) ओडिशा, भुवनेश्वर;
    ङ) झारखंड, रांची;   ट) तेलंगाना, हैदराबाद;
    च) कर्नाटक, बेंगलूरू;   ठ) उत्तर प्रदेश, लखनऊ          
    विषय:       उप निर्वाचन - सांसद/विधायक स्‍थानीय क्षेत्र विकास योजना के अधीन निधियाँ जारी करना।
    महोदय,
    मुझे, आयोग के दिनांक 29 सितम्बर, 2020 के प्रेस नोट (आयोग की वेबसाइट “http://eci.gov.in/” पर उपलब्‍ध), जिसके द्वारा बिहार के संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र में तथा विभिन्न राज्‍यों की विधान सभाओं में आकस्मिक रिक्तियों को भरने हेतु उप-निर्वाचनों की अनुसूची की घोषणा की गई है, के संदर्भ में यह कहने का निदेश हुआ है कि उप निर्वाचनों की इस घोषणा के परिणामस्‍वरूप राजनीतिक दलों तथा अभ्‍यर्थियों के मार्ग-दर्शन के लिए आर्दश आचार संहिता के प्रावधान तत्‍काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।   
    2.     संसद सदस्‍य स्‍थानीय क्षेत्र विकास योजना के अधीन निधियों को जारी किए जाने संबंधी मामले पर कार्रवाई उप-निर्वाचन के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू करने के संबंध में आयोग के  दिनांक 29 जून, 2017 के पत्र सं.437/6/अनुदेश/2016-सीसीएस के अनुसरण में की जाएगी, जो अन्‍य बातों के साथ-साथ यह उप‍बन्धित करता है कि-      
    (क)  संसद सदस्‍य (राज्‍य सभा सदस्‍यों सहित) स्‍थानीय क्षेत्र विकास योजना निधि के अधीन जिले (जिलों) के किसी भी भाग में जहां पर वह विधान सभा/संसदीय निर्वाचन क्षेत्र स्थित है, जहाँ निर्वाचन चल रहे हैं, में निर्वाचन प्रक्रिया के समाप्‍त होने तक कोई भी नई निधि जारी नहीं की जाएगी। यदि संबंधित निर्वाचन क्षेत्र राज्‍य की राजधानी/महानगरों/नगर निगमों के अधीन आता है तो उपरोक्‍त अनुदेश केवल संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में ही लागू होंगे। इसी प्रकार से, विधान सभा सदस्‍य/विधान परिषद सदस्‍य स्‍थानीय क्षेत्र विकास योजना निधि के अंतर्गत, यदि कोई ऐसी योजना संचालन में है तो निर्वाचन प्रक्रिया के समाप्‍त होने तक कोई भी नई निधि जारी नहीं की जाएगी।
    (ख)  इस पत्र के जारी होने से पूर्व, जिन कार्यों के संबंध में कार्य आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं परंतु वास्तव में उस क्षेत्र में उन पर कार्य शुरू नहीं किया गया है, ऐसा कोई कार्य शुरू नहीं किया जाएगा। ये कार्य केवल निर्वाचन प्रक्रिया की समाप्ति पर ही शुरू किए जा सकते हैं। हालांकि, यदि कोई कार्य वास्‍तव में शुरू कर दिया गया है तो उसे जारी रखा जा सकता है।
    (ग)  संबंधित अधिकारियों की पूर्ण संतुष्टि के अध्‍यधीन पूरे किए गए कार्य(र्यों) के लिए भुगतान करने पर कोई प्रतिबन्‍ध नहीं होगा।
    (घ)  जहां योजनाओं को स्‍वीकृति दी जा चुकी है एवं निधियाँ उपलब्‍ध करवा दी गई हों या जारी कर दी गई हों और जहां सामग्री प्राप्‍त कर ली गई हो और उसे कार्यस्‍थल पर पहुंचा दिया गया हो, तो ऐसी योजनाओं को कार्यक्रम के अनुसार निष्‍पादित किया जा सकता है।        

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  3. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 60 (ग) के अंतर्गत निर्वाचन आयोग की अधिसूचना–80 वर्ष से अधिक आयु के निर्वाचकों, शारीरिक रूप से नि:शक्त निर्वाचकों और कोविड-19 के कारण संगरोध में रह रहे निर्वाचकों को डाक मतपत्र जारी करना।

    सं. 52/2020/एसडीआर/खंड ।
    दिनांक: 28 सितम्बर, 2020
    सेवा में
     मुख्य निर्वाचन अधिकारी,
    असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, नागालैंड, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मणिपुर, और तेलंगाना
     
    विषय: लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 60 (ग) के अंतर्गत निर्वाचन आयोग की अधिसूचना–80 वर्ष से अधिक आयु के निर्वाचकों, शारीरिक रूप से नि:शक्त निर्वाचकों और कोविड-19 के कारण संगरोध में रह रहे निर्वाचकों को डाक मतपत्र जारी करना।
     
    महोदय,      
          मुझे उपर्युक्त विषय पर निर्वाचन आयोग के दिनांक 17 सितंबर, 2020 के समसंख्यक पत्र के क्रम में यह कहने का निदेश हुआ है कि इसके साथ संलग्न दिशा-निर्देशों के पैरा 2.3 के अंतर्गत, यह उल्लिखित है कि "कोविड-19" संदिग्ध या प्रभावित व्यक्ति की श्रेणी के तहत अनुपस्थित मतदाताओं द्वारा डाक मतपत्र की सुविधा का लाभ उठाने के लिए, इस संबंध में राज्य सरकार/संघ शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा यथाअधिसूचित, सक्षम स्वास्थ्य प्राधिकारी द्वारा जारी संबंधित संसदीय/विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के सहायक रिटर्निंग ऑफिसर को संबोधित एक प्रमाण पत्र, फॉर्म 12 घ के साथ प्रस्तुत करना होगा। 
    2.    तदनुसार, कोविड-19 संदिग्ध/प्रभावित व्यक्ति के लिए सक्षम स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा जारी किए जाने वाले प्रमाण पत्र का एक प्रोफार्मा तैयार किया गया है और यह इसके साथ संलग्न है। इसे तत्काल सभी संबंधित निर्वाचन अधिकारियों को परिचालित किया जाए।     
    3.    डाक मतपत्र की सुविधा प्राप्त करने के इच्छुक कोविड-19 की संदिग्ध/प्रभावित श्रेणी में आने वाले कोई भी अनुपस्थित मतदाता प्ररूप 12घ में आवेदन करेगा और सक्षम स्वास्थ्य प्राधिकारी द्वारा विधिवत रूप से इस संलग्न प्रोफार्मा में जारी किए गए प्रमाण पत्र के साथ इसे जमा करवाएगा। 
    4.    चूंकि डाक मतपत्र की सुविधा के लिए आवेदन, संबंधित निर्वाचन की अधिसूचना की तारीख के बाद 5 दिनों के भीतर आरओ को मिल जाना चाहिए, अत: सक्षम स्वास्थ्य प्राधिकारी को राज्य सरकार/संघ शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा तत्काल अधिसूचित किया जाएगा। 
    5.    आयोग के उपर्युक्त अनुदेश, उनके अनुपालन हेतु सभी संबंधितों के ध्यान में लाए जाएंगें।

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  4. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 60 (सी) के अंतर्गत आयोग की अधिसूचना – 80 वर्ष से अधिक आयु के निर्वाचकों, शारीरिक रूप से नि:शक्त निर्वाचकों और कोविड-19 के कारण संगरोध में रह रहे निर्वाचकों को डाक मतपत्र जारी करना।

    सं. 52/2020/एसडीआर/खंड ।
    दिनांक: 17 सितंबर, 2020
    सेवा में
           मुख्य निर्वाचन अधिकारी,
    1.   बिहार
    2.   असम
    3.   छत्तीसगढ़
    4.   गुजरात
    5.   हरियाणा
    6.   झारखंड
    7.   कर्नाटक
    8.   केरल
    9.   मध्य प्रदेश
    10. नागालैंड
    11. तमिलनाडु
    12. उत्तर प्रदेश
    13. पश्चिम बंगाल
    14. ओडिशा
    15. मणिपुर, और
    16. तेलंगाना
     
    विषय:  लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 60 (सी) के अंतर्गत आयोग की अधिसूचना – 80 वर्ष से अधिक आयु के निर्वाचकों, शारीरिक रूप से नि:शक्त निर्वाचकों और कोविड-19 के कारण संगरोध में रह रहे निर्वाचकों को डाक मतपत्र जारी करना।
     
    महोदय,
           मुझे उद्धृत विषय पर आयोग की दिनांक 17 सितंबर, 2020 की दो अधिसूचनाएं सं. 52/2020/एसडीआर/खंड-। इसके साथ अग्रेषित करने का निदेश हुआ है। इसे राज्य के राजपत्र में तत्काल प्रकाशित किया जाए और उसकी प्रतियां आयोग को भी अग्रेषित की जाएं।  
           वरिष्ठ नागरिक (एवीएससी), पीडब्ल्यूडी (एवीपीडी) और कोविड-19 (एडीसीओ) की श्रेणी में अनुपस्थित मतदाताओं द्वारा डाक मतपत्र के माध्यम से मतदान हेतु अपनाई जाने वाली प्रक्रिया की एक प्रति भी इसके साथ संलग्न है।
          
    कृपया पावती दें।  
     
    आपका
     
    (एन.टी. भूटिया)
    सचिव  
     
    Secretary

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  5. बिहार राज्य की विधान सभा के साधारण निर्वाचन, 2020 की घोषणा के पश्चात आदर्श आचार संहिता लागू करने के लिए की जाने वाली तत्काल कार्रवाई-तत्संबंधी।

    ­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­सं. 437/6/1/ईसीआई/अनु/प्रकार्या./एमसीसी/2020
    दिनांक : 25 सितम्बर, 2020
     
    सेवा में,
          मंत्रिमंडल सचिव,
          भारत सरकार,
          राष्ट्रपति भवन,
          नई दिल्ली।       मुख्‍य सचिव
          बिहार सरकार,
          पटना, और         मुख्य निर्वाचन अधिकारी,
          बिहार,   पटना।         
    विषय : बिहार राज्य की विधान सभा के साधारण निर्वाचन, 2020 की घोषणा के पश्चात आदर्श आचार संहिता लागू करने के लिए की जाने वाली तत्काल कार्रवाई-तत्संबंधी। 
    महोदय,
           मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि आयोग ने बिहार विधान सभा के साधारण निर्वाचन आयोजित कराने के लिए अनुसूची की घोषणा की है। अतः आयोग द्वारा निर्वाचनों की घोषणा के साथ ही ‘आदर्श आचार संहिता’ तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। उपर्युक्त को ध्यान में रखते हुए, आयोग ने आदर्श आचार संहिता के उपबंधों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए निम्नलिखित निदेश दिए हैं:-
    1.        सम्पत्ति का विरूपण- पत्र सं. 437/6/अनुदेश/2015-सीसीएस, दिनांक 29 दिसम्बर, 2015; सं. 437/6/अनुदेश/2012-सीसीएण्डबीई दिनांक 18 जनवरी, 2012 तथा सं. 3/7/2008/जेएस-II दिनांक 7 अक्तूबर, 2008 में निहित ईसीआई अनुदेशों में सम्पत्ति के विरूपण के रोकथाम का प्रावधान है। आयोग ने अपने अनुदेशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने तथा समयबद्ध रूप से कार्रवाई करने के लिए निम्नलिखित यथानिर्धारित निदेश दिए हैं-
    (क) सरकारी सम्पत्ति का विरूपण- इस प्रयोजन के लिए सरकारी परिसर में ऐसा कोई भी सरकारी कार्यालय तथा कैम्पस शामिल होगा, जिसमें कार्यालय भवन स्थित है। सरकारी सम्पत्ति पर मौजूद सभी प्रकार के भित्ति लेखन (वॉल राइटिंग), पोस्टर्स/पेपर्स या किसी अन्य रूप में विरूपण, कटआउट/होर्डिंग, बैनर, फ्लैग आदि निर्वाचनों की घोषणा से 24 घंटे के भीतर हटा दिए जाएंगे।
    (ख) सार्वजनिक सम्पत्ति का विरूपण तथा सार्वजनिक स्थान का दुरूपयोग- सार्वजनिक सम्पत्ति में तथा सार्वजनिक स्थान जैसे रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, हवाई अड्डों, रेलवे पुलों, रोडवेजों, सरकारी बसों, बिजली/टेलीफोन खंभों, नगर निगम/ नगर पालिका/स्थानीय निकाय के भवनों आदि में भित्ति लेखन/पोस्टरों/ किसी अन्य रूप में विरूपण के पर्चे के रूप में सभी अप्राधिकृत राजनीतिक विज्ञापन या, कट आउट/ होर्डिंग, बैनर, फ्लैग इत्यादि को आयोग द्वारा निर्वाचनों की घोषणा से 48 घंटों के भीतर हटा दिया जाएगा।
    (ग) सम्पत्ति का विरूपण- निजी सम्पत्ति पर प्रदर्शित तथा स्थानीय विधि एवं न्यायालय के निदेशों, यदि कोई हो, के अध्यधीन सभी अप्राधिकृत राजनीतिक विज्ञापनों को आयोग द्वारा निर्वाचनों की घोषणा से 72 घंटो के भीतर हटा दिया जाएगा।
    2.        सरकारी वाहनों का दुरूपयोग- आयोग के दिनांक 10 अप्रैल, 2014 के पत्र सं. 464/अनुदेश/2014/ईपीएस में निहित समेकित अनुदेशों में अन्य बातों के साथ-साथ यह उपबंधित है कि किसी राजनीतिक दल, अभ्यर्थी या निर्वाचन से जुड़े किसी अन्य व्यक्ति द्वारा (निर्वाचन से संबंधित किसी सरकारी ड्यूटी का निष्‍पादन करने वाले पदाधिकारियों को छोड़कर) निर्वाचन के दौरान प्रचार करने, निर्वाचन प्रचार संबंधी कार्य या निर्वाचन से संबंधित यात्रा करने के लिए सरकारी वाहन के प्रयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध होगा (उसमें उल्लिखित कुछ अपवादों के अध्‍यधीन)। ‘सरकारी वाहन’ शब्द का अर्थ ऐसे वाहनों से है और इसमें ऐसे वाहन शामिल होंगे जो परिवहन के प्रयोजनार्थ प्रयुक्त हों या प्रयुक्त किए जाने योग्य हों, चाहे वे यांत्रिक शक्ति या अन्यथा द्वारा चालित हों, और इनमें केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन, केन्द्र/राज्य सरकार के सार्वजनिक उपक्रम, केन्द्र/राज्य सरकार के संयुक्त क्षेत्र के उपक्रम, स्थानीय निकाय, नगर निगम, विपणन बोर्ड, सहकारी समितियां या ऐसे कोई अन्य निकाय शामिल होंगे जिसमें सार्वजनिक निधियां निवेशित की गई हों, भले ही कुल निधियों में से एक छोटा सा हिस्सा ही हों, । मुख्य निर्वाचन अधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी उपर्युक्त अनुदेशों के अनुपालन के लिए निर्वाचनों की घोषणा के 24 घंटे के भीतर आवश्यक कार्रवाई करेंगे।
    3.        सार्वजनिक-राजकोष की लागत पर विज्ञापन- दिनांक 5 मार्च, 2014 के पत्र सं. 437/6/1/2014-सीसी एंड बीई में आयोग के अनुदेशों में यह प्रावधान है कि निर्वाचन अवधि के दौरान सत्तारूढ़ दल की संभावनाओं को बढ़ाने के उद्देश्य से उपलब्धियों के बारे में सार्वजनिक राजकोष की लागत पर समाचार पत्रों एवं अन्य संचार माध्यमों में विज्ञापन दिए जाने और राजनीतिक समाचार एवं प्रचार-प्रसार के पक्षपातपूर्ण कवरेज के लिए आधिकारिक जनसंचार के दुरूपयोग से निरपवाद रूप से बचा जाना चाहिए। सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डालने के लिए सार्वजनिक राजकोष की लागत पर इलेक्ट्रॉनिक तथा प्रिन्ट मीडिया में कोई भी विज्ञापन जारी नहीं किया जाएगा। यदि किसी विज्ञापन को दूरदर्शन प्रसारण या प्रिन्ट मीडिया में प्रकाशन के लिए पहले ही जारी किया जा चुका है, तो यह अवश्य सुनिश्चित किया जाए कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर ऐसे विज्ञापनों का दूरदर्शन प्रसारण/प्रकाशन तत्काल रोक दिया जाए तथा घोषणा की तारीख से किन्हीं भी समाचार पत्रों, पत्रिकाओं आदि अर्थात् प्रिन्ट मीडिया में ऐसा कोई भी विज्ञापन प्रकाशित न हो, तथा इसे तत्काल वापिस ले लिया जाना चाहिए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी निर्वाचनों की घोषणा के तुरन्त पश्चात् सरकार की उपलब्धियों को दर्शाने वाले प्रिन्ट/इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में किसी भी विज्ञापन को हटाने/रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई करेंगे। 
    4.        आधिकारिक वेबसाइट पर राजनीतिक पदाधिकारी का फोटो- दिनांक 20 मार्च, 2014 के पत्र सं. 437/6/अनुदेश/2014- सीसी एंड बीई में निहित ईसीआई अनुदेश में यह प्रावधान है कि केन्द्र/राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध मंत्रियों, राजनीतिज्ञों या राजनीतिक दलों के सभी संदर्भों को हटा दिया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी राज्यीय विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से किसी भी राजनीतिक पदाधिकारी के फोटो को हटाने/छिपाने के लिए तत्काल कार्रवाई करेंगे। 
    5.        विकास/निर्माण संबंधी कार्यकलाप-मुख्य निर्वाचन अधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी निर्वाचनों की घोषणा के 72 घंटे के भीतर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन पर किसी शिकायत को विधिमान्य बनाने की स्थिति में संदर्भ हेतु कार्य की निम्नलिखित सूची प्राप्त करेंगेः
                  i.     ऐसे कार्य, जिसे स्थल पर पहले ही आरंभ किया जा चुका है।
                 ii.      ऐसे नए कार्य, जिसे स्थल पर आरंभ नहीं किया गया है।
    6.        व्यय अनुवीक्षण तथा आदर्श आचार संहिता के प्रवर्तन के लिए कार्यकलाप-घोषणा के बाद उड़न दस्ता, एफ एस टी, वीडियो टीम, शराब/नकदी/निषिद्ध नशीले पदार्थों के लिए गहन जांच,ड्रग/स्वापक के अवैध व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए आबकारी विभाग के उड़न दस्तों को तत्काल सक्रिय किया जाना चाहिए।
    7.        शिकायत निगरानी प्रणाली- निर्वाचन कराए जाने वाले राज्य में वेबसाइट तथा कॉल सेन्टर पर आधारित एक शिकायत निवारण प्रणाली होगी। कॉल सेन्टर का टोल फ्री नंबर 1950 है। टोल फ्री कॉल सेन्टर नंबर पर कॉल करके या वेबसाइट पर शिकायतें दर्ज करके की जा सकती है। शिकायतकर्ताओं को एसएमएस द्वारा या कॉल सेन्टर द्वारा भी की गई कार्रवाई की सूचना दी जाएगी। शिकायतकर्ता अपनी शिकायतों पर की गई कार्रवाई के विवरण भी देख सकते हैं। यह प्रणाली घोषणा के 24 घंटे के भीतर क्रियाशील होनी चाहिए। सभी शिकायतों को यथासमय एवं उचित रूप से निपटाया जाना चाहिए। जिला स्तर पर 24x7 नियंत्रण कक्ष को अवश्य सक्रिय किया जाए तथा विशेष रूप से पर्याप्त कार्मिक शक्ति तैनात की जाए एवं अन्य लाजिस्टिक्स सुनिश्चित किया जाए, नियंत्रण कक्ष में चौबीस घंटे लोगों की तैनाती की जाए तथा किसी टाल-मटोल या शंका से बचने के लिए उनका ड्यूटी रोस्टर अवश्य बनाया जाए।
    8.        आईटी एप्लीकेशन-आधिकारिक वेबसाइट तथा सोशल मीडिया सहित सभी आई टी एप्लीकेशन घोषणा किए जाने के साथ ही चालू हो जाएंगी।
    9.        मतदाताओं तथा राजनीतिक दलों की जागरूकता के लिए सूचना का प्रचार-प्रसार करना- निर्वाचन संबंधी प्रमुख गतिविधियों का प्रचार मुख्य निर्वाचन अधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी/रिटर्निंग अधिकारी के माध्यम से किया जाएगा। इस उद्देश्य के लिए, सभी आवश्यक सूचना का प्रचार-प्रसार रेडियो, टेलीविजन, सिनेमा के माध्यम से किया जाएगा सरकारी चैनल में मतदाता शिक्षा संबंधी सामग्री प्रदर्शित की जाएगी।
    10.      शैक्षणिक संस्थान तथा सिविल सोसाइटी से सक्रिय सहयोग- आम जनता तथा अन्य हितधारकों में निर्वाचन संबंधी सूचना का व्यापक प्रचार करने के लिए शैक्षणिक  संस्थानों तथा सिविल सोसाइटी से सहयोग लिया जा सकता है।
    11.      मीडिया सेन्टर- मीडिया के माध्यम से ईवीएम/वीवीपीएटी के प्रयोग सहित निर्वाचन प्रणाली के बारे में मतदाताओं, राजनीतिक दलों तथा अन्य स्टेकहोल्डरों के मध्य जागरूकता फैलाने के लिए प्रयास किया जाना चाहिए।
    12.      एमसीएमसी/डीईएमसी- दिनांक 24 मार्च, 2014 के पत्र सं. 491/एमसीएमसी/2014/संचार में निहित ईसीआई अनुदेश में यह प्रावधान है कि सभी पंजीकृत राजनीतिक दल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर जारी किए जाने वाले उनके प्रस्तावित राजनीतिक विज्ञापनों के पूर्व प्रमाणन के लिए जिला तथा राज्य स्तर, जैसी भी स्थिति हो, पर मीडिया प्रमाणन एवं अनुवीक्षण समिति (एमसीएमसी) से सम्पर्क करेंगे। आयोग ने उपर्युक्त पत्र में निहित अपने अनुदेशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निदेश दिए हैं।
    13.      नियंत्रण कक्ष- जिला स्तर पर 24x7 नियंत्रण कक्ष तत्काल अवश्य चालू किया जाए तथा जिला निर्वाचन अधिकारी/मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा पर्याप्त कार्मिक शक्ति की तैनाती तथा अन्य लाजिस्टिक्स सुनिश्चित किया जाए। सम्पूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान ईसीआई सचिवालय में शिकायत निवारण केन्द्र सहित एक नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया जाएगा।

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  6. बिहार विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचन 2020- सांसद/विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के अधीन निधियों को जारी करना।

    सं. 437/6/1/ईसीआई/अनुदेश/प्रकार्या./एमसीसी/2020
    दिनांक: 25 सितम्बर, 2020
     
    सेवा में 
    मत्रिमंडल सचिव,
    भारत सरकार,
    राष्‍ट्रपति भवन,नई दिल्‍ली। सचिव,
    भारत सरकार,कार्यक्रम कार्यान्‍वयन विभाग,
    सरदार पटेल भवन,
    नई दिल्‍ली।   मुख्‍य सचिव,बिहार सरकारपटना, और मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी,
    बिहार
    पटना।  
    विषय: बिहार विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचन 2020- सांसद/विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के अधीन निधियों को जारी करना।
    महोदय,
           मुझे, निर्वाचन आयोग के प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रेस नोट/64/2020, दिनांक 25 सितम्बर, 2020 (प्रेस नोट ईसीआई की वेबसाइट – www.eci.gov.in पर उपलब्‍ध है) का संदर्भ देने का निदेश हुआ है जिसके अनुसार आयोग ने बिहार विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचन की घोषणा के परिणामस्‍वरूप राजनैतिक दलों एवं अभ्‍यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के प्रवर्तन की घोषणा की है।
    2. आयोग ने अनुदेश दिया है कि सांसद स्‍थानीय क्षेत्र विकास योजनाओं के अंतर्गत निधियों को अवमुक्‍त करना निम्‍नलिखित निर्बंधनों के अधीन होगा:- 
    क) देश के ऐसे किसी भी भाग में, जहां निर्वाचन प्रक्रियाधीन है, सांसद (राज्‍य सभा सदस्‍य सहित) स्‍थानीय क्षेत्र विकास निधि के अधीन कोई भी नई निधियां जारी नहीं की जाएगी। इसी प्रकार, निर्वाचन प्रक्रिया पूर्ण होने तक विधान सभा सदस्‍य/विधान परिषद सदस्‍य स्‍थानीय क्षेत्र विकास निधि के अधीन, यदि कोई ऐसी योजना प्रचालन में है, नई निधियां जारी नहीं की जाएंगी।
    ख) ऐसे कार्य के संदर्भ में कोई कार्य शुरू नहीं किया जाएगा जिसमें इस पत्र के जारी होने से पहले कार्य आदेश तो जारी कर दिए गए है परन्‍तु फील्‍ड में वास्‍तव में काम शुरू नही हुआ है। ये कार्य निर्वाचन प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही शुरू किए जा सकते हैं। हालांकि, यदि कोई कार्य वास्‍तव में शुरू हो चुका है तो उसे जारी रखा जा सकता है।
    ग) पूरे हो गए कार्य(र्यों) के लिए भुगतानों को जारी करने पर कोई रोक नहीं होगी बशर्ते संबंधित अधिकारी पूर्ण रूप से संतुष्‍ट हों।
    घ) जहां योजनाएं अनुमोदित कर दी गई है तथा निधियां उपलब्‍ध करा या जारी कर दी गई हैं और सामग्रियों का प्रापण कर लिया गया है एवं कार्यस्‍थल पर पहुच गई हैं ऐसी योजनाएं कार्यक्रम के अनुसार कार्यान्वित की जा सकती हैं।   

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  7. आदर्श आचार संहिता लागू होना-बिहार की विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचन 2020- तत्संबंधी।

    सं.437/6/1/ईसीआई/अनुदेश/प्रकार्या./एमसीसी/2020                     दिनांक: 25 सितम्बर, 2020
     
    सेवा में
    मंत्रिमंडल सचिव,
    भारत सरकार,राष्ट्रपति भवन,नई दिल्ली।  मुख्य सचिव,
    बिहार सरकार,पटना, और  मुख्य निर्वाचन अधिकारी,
    बिहार,पटना।  
    विषय : आदर्श आचार संहिता लागू होना-बिहार की विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचन 2020- तत्संबंधी।
    महोदय,
    मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि निर्वाचन आयोग ने बिहार की विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचन आयोजित करने के लिए अनुसूची की उद्घोषणा की है। (प्रेस नोट सं.ईसीआई/प्रे.नो./64/2020, दिनांक 25 सितम्बर, 2020 जो आयोग की वेबसाइटwww.eci.gov.in पर उपलब्ध है)।
    2.     इस उद्घोषणा के साथ ही राजनैतिक दलों और अभ्‍यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के उपबंध तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं और तब तक लागू रहेंगे जब तक बिहार की विधान सभा में साधारण निर्वाचन सम्पन्न  न हो जाएं। इसे केन्द्र और राज्य सरकार, सभी मंत्रालयों/विभागों और केन्‍द्र सरकार / राज्‍य सरकार के सभी कार्यालयों के ध्‍यान में लाया जाए। आपके द्वारा जारी किए गए अनुदेशों की एक प्रति सूचना एवं रिकार्ड हेतु भारत निर्वाचन आयोग को भेजी जाए।
    3.     आपका ध्‍यान ‘सत्‍तासीन दल’ से संबंधित आदर्श आचार संहिता के उपबंधों की ओर आकृष्‍ट किया जाता है जिसमें अन्‍य बातों के साथ-साथ यह कहा गया है कि सत्तासीन दल, चाहे केन्‍द्र में या  संबंधित राज्‍य में यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी ऐसी शिकायत के लिए कोई कारण न दिया जाए कि उसने अपने निर्वाचन अभियान के प्रयोजनों के लिए शासकीय हैसियत का प्रयोग किया है और विशेष रूप से :-
     (i)    (क) मंत्री अपने शासकीय दौरे को निर्वाचन प्रचार अभियान संबंधी कार्य से नहीं मिलाएंगे और निर्वाचन प्रचार अभियान संबंधी कार्य के दौरान शासकीय क्षेत्र या कार्मिकों का उपयोग भी नहीं करेंगे;
           (ख) सरकारी हवाई-जहाज, वाहनों सहित सरकारी परिवहन, तंत्र एवं कार्मिकों का उपयोग सत्तासीन दल के हित को प्रोत्‍साहित करने के लिए नहीं किया जाएगा;
    (ii)    निर्वाचन सभाओं को आयोजित करने के लिए सार्वजनिक स्‍थानों जैसे मैदानों आदि का उपयोग और निर्वाचनों के संबंध में एयरक्राफ्ट के लिए हैलीपैड का प्रयोग अपने द्वारा एकाधिकार रूप से नहीं किया जाएगा। अन्‍य दलों और अभ्‍यर्थियों को उन्‍हीं शर्तों एवं निबंधनों के आधार पर ऐसे स्‍थानों एवं सुविधाओं का उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी जिन शर्तों एवं निबंधनों पर सत्तासीन दल द्वारा उनका उपयोग किया जाता है;
    (iii)    जहां के लिए निर्वाचनों की घोषणा हुई है या जहां निर्वाचन हो रहे हैं, वहां के विश्राम गृह, डाक बंगला या अन्‍य सरकारी आवास को उपयोग करने के लिए किसी राज्य द्वारा जैड स्केल सुरक्षा प्रदान किए गए राजनीतिक पदाधिकारियों को या जिन्हें विभिन्न राज्यों में या केन्द्र सरकार में इससे ऊपर या इसके समकक्ष स्तर की सुरक्षा प्रदान की गई है, को एक समान आधार पर उपयोग करने के लिए प्रदान किए जाएंगे।यह इस शर्त के अध्यधीन होगा कि ऐसा आवास पहले से ही निर्वाचन सम्बन्धी अधिकारियों या प्रेक्षकों को आबंटित न हो या उनके द्वारा धारित न हो। सरकारी आवास गृह/विश्राम गृह या अन्य सरकारी आवास इत्यादि में ठहरने के समय ऐसे राजनीतिक पदाधिकारी कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं करेंगे।
    यर्थ
    (iv)    समाचार पत्रों और अन्‍य मीडिया में सरकारी खजाने की लागत से विज्ञापन जारी करने और राजनैतिक समाचारों के दलगत कवरेज के लिए निर्वाचन अवधि के दौरान शासकीय मास मीडिया के दुरुपयोग तथा सत्तासीन दल की प्रत्‍याशाओं को आगे बढ़ाने की दृष्टि से उपलब्धियों के बारे में प्रचार से निष्‍ठापूर्वक बचा जाना चाहिए;
    (v)    मंत्री और अन्य प्राधिकारी, आयोग द्वारा निर्वाचनों की उद्घोषणा किए जाने के समय से विवेकाधीन निधियों में से अनुदानों/भुगतानों को स्‍वीकृति प्रदान नहीं करेंगे; और
    (vi)    आयोग द्वारा निर्वाचनों की उद्घोषणा के समय से, मंत्री और अन्‍य प्राधिकारी –
    (क) किसी रूप में कोई वित्तीय अनुदानों की उद्घोषणा नहीं करेंगे या उनके लिए वचन नहीं देंगे; या
    (ख) किसी प्रकार की परियोजनाओं या योजनाओं की आधारशीला नहीं रखेंगे (लोक सेवकों के सिवाय); या
    (ग) सड़कों के निर्माण, पेयजल सुविधाओं की व्‍यवस्‍था आदि के बारे में कोई वचन नहीं देंगे; या
    (घ) सरकार, सार्वजनिक उपक्रमों आदि में ऐसी कोई तदर्थ नियुक्तियां नहीं करेंगे, जिनमें सत्तासीन दल के पक्ष में मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रभाव हो।
    4.     जैसा कि उपर्युक्‍त पैरा 3 {खंड IV} से ज्ञातव्य है, सरकारी खजाने की लागत से सरकार की उपलब्धियों को उजागर करते हुए इलेक्‍ट्रानिक एवं प्रिंट मीडिया में कोई विज्ञापन जारी नहीं किया जाएगा। यदि कोई विज्ञापन, प्रसारण या प्रिंट मीडिया में प्रकाशन के लिए पहले ही जारी हो चुका है, तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इलेक्‍ट्रानिक मीडिया में ऐसे विज्ञापनों के प्रसारण को तत्‍क्षण रोक दिया जाए और यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आज से ही ऐसा कोई विज्ञापन किन्‍हीं भी समाचारपत्रों, पत्रिकाओं आदि अर्थात् प्रिंट मीडिया में प्रकाशित न किया जाए और इसे शीघ्र वापस ले लिया जाए।
    5.     इस संबंध में आयोग के दिनांक 5 मार्च, 2009 के पत्र सं. 437/6/2009-सीसीबीई के तहत जारी अनुदेश, आयोग की वेबसाइट “http://eci.gov.in/” पर उपलब्‍ध हैं जो आपकी सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु ‘महत्वपूर्ण अनुदेश’ नामक शीर्षक के अन्तर्गत है।आपके मार्गदर्शन के लिए इस लिंक पर आयोग के अन्‍य सभी अनुदेश भी उपलब्‍ध हैं।
    6.     आयोग इसके अतिरिक्‍त यह निदेश देता है कि निर्वाचन के संचालन से संबंधित सभी अधिकारियों/कर्मचारियों के स्‍थानान्‍तरण पर पूरी रोक होगी। इनमें निम्‍नलिखित सम्मिलित होंगे किंतु वहीं तक सीमित नहीं होंगे:-
    (i)        मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी और अपर/संयुक्‍त/उप मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी;
    (ii)       मंडल आयुक्‍त;
    (iii)      जिला निर्वाचन अधिकारी, रिटर्निंग आफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर एवं निर्वाचनों के संचालन से संबंधित राजस्‍व अधिकारी;
    (iv)      निर्वाचनों के प्रबंधन से जुड़े पुलिस विभाग के अधिकारी यथा, रेंज महानिरीक्षक एवं उप महानिरीक्षक, वरिष्‍ठ पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक, सब डिवीजनल पुलिस अधिकारी यथा, पुलिस उपाधीक्षक एवं अन्‍य पुलिस अधिकारी, जो लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम, 1951 की धारा 28क के अधीन आयोग में प्रतिनियुक्‍त हैं;
    7.     निर्वाचन की उद्घोषणा की तारीख से पूर्व उपर्युक्‍त श्रेणियों के अधिकारियों की बाबत जारी किंतु आज की तारीख तक कार्यान्वित नहीं किए गए स्‍थानान्‍तरण आदेशों को इस संबंध में आयोग से विशिष्‍ट अनुमति लिए बिना लागू नहीं किया जाना चाहिए;
    8.     यह रोक निर्वाचन के पूरा होने तक प्रभावी रहेगी। आयोग आगे यह और निदेश देता है कि राज्‍य सरकार को राज्‍य में निर्वाचन के प्रबंधन में भूमिका वाले वरिष्‍ठ अधिकारियों का स्‍थानान्‍तरण करने से बचना चाहिए।
    9.     ऐसे मामलों में, जहां प्रशासनिक अत्‍यावश्‍यकताओं के कारण किसी अधिकारी का स्‍थानान्‍तरण आवश्‍यक है, वहां संबंध राज्‍य सरकार को पूर्व स्‍वीकृति के लिए पूर्ण औचित्‍य के साथ आयोग से संपर्क करना चाहिए।
    10.    कृपया इस पत्र की पावती भेजी जाए। 

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  8. प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए निमंत्रण

    दिनांक: 25.09.2020
    प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए निमंत्रण
    महोदय/महोदया
    आपको निम्नलिखित आयोजन को कवर करने के लिए आमंत्रित किया जाता है:
    मीडिया आयोजन
    :
    भारत निर्वाचन आयोग द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस
    दिन एवं दिनांक
    :
    शुक्रवार, 25 सितम्बर, 2020
    समय
    :
    12.30 बजे अपराह्न
    स्थान
    :
    हॉल नं. 5, विज्ञान भवन, नई दिल्ली
     
    सामाजिक दूरी संबंधी मानदंडों को ध्यान में रखते हुए, केवल डीडी और एएनआई के कैमरामैन को हॉल के अंदर आने की अनुमति है। प्रवेश केवल पीटीआई और फोटो डिवीजन स्टिल कैमरा वाले  फोटोग्राफर के लिए अनुमत्य है।

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  9. निर्वाचन लड़ने वाले आपराधिक पूर्ववृत्त वाले व्यक्तियों के संबंध में विवरण प्रकाशित करने की अपेक्षा से संबंधित याचिका पर उच्चतम न्यायालय का निर्णय

    संख्या 3/4/2019/एसडीआर/खंड IV
    दिनांक: 16 सितंबर, 2019
     
    सेवा में,
    सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों
    के मुख्य निर्वाचन अधिकारी  
    विषय:  निर्वाचन लड़ने वाले आपराधिक पूर्ववृत्त वाले व्यक्तियों के संबंध में विवरण प्रकाशित करने की अपेक्षा से संबंधित याचिका पर उच्चतम न्यायालय का निर्णय;
          
    महोदय/महोदया, 
           मुझे आपका ध्यान आयोग की पत्र संख्या 3/4/2017/एसडीआर/खंड।।, दिनांक 10.10.2018 तथा दिनांक 19.03.2019 के पत्र की ओर आकृष्ट कराने का निदेश हुआ है जिसे माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा 2015 की रिट याचिका संख्या 784 (लोक प्रहरी बनाम भारत संघ और अन्य) और 2011 की रिट याचिका (सिविल) संख्या 536 (पब्लिक इंट्रेस्ट फाउंडेशन और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य) में निर्णय के अनुसरण में आयोग द्वारा जारी किया गया था। उक्त पत्र में आयोग ने निदेश दिया था कि अभ्यर्थी जिनके विरूद्ध आपराधिक मामले, चाहे ऐसे मामले लंबित हो या विगत में दोषसिद्धि के मामले हों, और राजनीतिक दल जिन्होनें ऐसे अभ्यर्थियों को खड़ा किया है, उपर्युक्त पत्र में विहित तरीके से समाचार पत्र और टीवी चैनलों पर एक घोषणा प्रस्तुत करेगा।  
    2.     तत्पश्चात, वर्ष 2011 की रिट याचिका (सी) सं. 536 में वर्ष 2018 की अवमानना याचिका (सी) सं. 2192 में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिनांक 13.02.2020 को पारित अपने आदेश में दिए गए निर्देशों के अनुसरण में और आयोग के उपर्युक्त दो पत्रों में दिए गए निर्देशों के अलावा, आयोग ने 6 मार्च, 2020 को अपने पत्र सं. 3/4/2020/एसडीआर/खंड ।।। के जरिए भी यह निदेश दिया है कि सभी राजनैतिक दल जो आपराधिक पूर्ववृत्त वाले अभ्यर्थी को खड़ा करते हैं, चाहे उस पर मामले लंबित हों या विगत में वह दोषसिद्ध हुआ हो, वे लोक सभा और राज्य मंडलों के सभी भावी निर्वाचनों में उपर्युक्त सभी निर्देशों का निरपवाद रूप से पालन करेंगे। राजनैतिक दल द्वारा अभ्यर्थी के रूप में चुने गए आपराधिक मामलों वाले व्यक्ति से संबंधित सूचना के साथ-साथ ऐसे चयन के कारण सहित बिना आपराधिक पूर्ववृत्त वाले अन्य व्यक्तियों को अभ्यर्थी के रूप में क्यों नहीं चुना गया, इससे संबंधित विवरण अभ्यर्थी का चयन किए जाने के 48 घंटों के भीतर या नामनिर्देशन दायर करने की पहली तिथि से पहले कम से कम दो सप्ताह पहले, जो भी पहले हो, समाचार पत्र, सोशल मीडिया प्लेटफार्म और दल की वेबसाइट पर प्रकाशित किए जाएंगे। 
    3.     आयोग ने निर्वाचन न लड़े निर्वाचित अभ्यर्थियों द्वारा प्रचार से संबंधित मुद्दों पर भी विचार किया है और निदेश दिया है कि माननीय उच्चतम न्यायालय के उपर्युक्त दिशानिर्देशों के आलोक में ऐसे अभ्यर्थियों को अन्य निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों के लिए भी यथा विहित रीति से अपने आपराधिक पृर्ववृत्त का प्रचार करना आवश्यक होगा। 
    4.     आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार ऐसे विवरण प्रकाशित करने के प्रयोजन से प्रचार अभियान के दौरान आपराधिक मामलों के संबंध में विवरण तीन अवसरों पर प्रकाशित किया जाना है। अब आयोग ने मामले पर विचार किया है और निदेश दिया है कि निर्दिष्ट अवधि को निम्नलिखित तरीके से तीन खंडों में रखा जाएगा ताकि निर्वाचकों को अभ्यर्थियों के बारे में जानने का पर्याप्त समय मिले:  
    क.     प्रथम प्रचार:     अभ्यर्थिता वापसी के प्रथम चार दिनों के भीतर
    ख.     दूसरा प्रचार:     अगले 5 से 8 दिनों के बीच
    ग.     तीसरा प्रचार:    9वें दिन से प्रचार अभियान के अंतिम दिन तक (मतदान के दिन से पहले दो दिन तक)  
    (व्याख्या: यदि अभ्यर्थिता वापस लेने की अंतिम तिथि महीने का 10वां दिन है और मतदान महीने के 24वें दिन है तो घोषणा प्रकाशन के लिए पहला खंड महीने के 11वें से 14वें दिन के बीच किया जाएगा, दूसरा और तीसरा क्रमश: महीने के 15वें और 18वें दिन के बीच और 19वें और 22वें दिन के बीच किया जाएगा।)  
    5.     आयोग के पत्र में उल्लिखित पैरा 1 और 2 में यथा प्रदत्त अन्य दिशानिर्देशो का अनुपालन किया जाना जारी रहेगा।  
    6.     निर्वाचन व्यय का लेखा दायर करते समय आपराधिक पूर्ववृत्त, यदि कोई हो, संबंधी अनुदेशों का प्रचार करने से संबंधित विवरण विहित प्रारूप (सी-4) में प्रदान किया जाएगा। राज्य सभा या राज्य विधान परिषद के निर्वाचन के मामले में निर्वाचन के लिए आरओ को ये विवरण प्रस्तुत किए जाएंगे।  
    7.     यहां यह उल्लेखनीय है कि जहां तक राजनैतिक दलों का संबंध है, दिनांक 6 मार्च, 2020 के आयोग के पत्र संख्या 3/4/2020/एसडीआर/खंड ।।। के तहत प्रेषित माननीय उच्चतम न्यायालय के दिनांक 13.02.2020 के आदेश के संदर्भ में उनके द्वारा चयनित अभ्यर्थी के संबंध में विवरणों का प्रकटन किया जाना बाध्यकारी होगा, भले ही संवीक्षा के दौरान और/या उसके अभ्यर्थन वापस लेने के कारण उसका अभ्यर्थन अस्वीकृत हो जाता है, का भी अनुपालन इस संबंध में किया जाए।  
    8.     यह पुन: दोहराया जा सकता है कि उक्त आपराधिक पूर्ववृत्त के प्रकाशन से संबद्ध अभ्यर्थी या राजनैतिक दल द्वारा व्यय किए गए सभी खर्चे निर्वाचन के लिए किए गए व्यय माने जाएंगे। इस संबंध में आयोग के 19 मार्च, 2019 के पत्र सं. 3/4/3029/एसडीआर/खंड-। का अवलोकन किया जा सकता है। 
    9.     आयोग द्वारा यथा विहित विद्यमान प्रारूपों को सुसंगत बनाने के लिए और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में प्रारूप सी1, सी2, और सी3 को उपयुक्त दिशानिर्देशों को जोड़कर संशोधित किया गया है (प्रति संलग्न)।  
    10.    इस पत्र को सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के जिला निर्वाचन अधिकारियों/रिटर्निंग अधिकारियों को उनकी ओर से की जाने वाली कार्रवाई के लिए परिचालित किया जा सकता है। इसे राज्य अर्थात रजिस्टर्ड दल की राज्य ईकाई तथा अन्य राज्यों के रजिस्टर्ड राज्यीय दलों तथा आपके राज्य /संघ राज्य क्षेत्र में स्थित मुख्यालय वाले सभी रजिस्टर्ड गैर-मान्यताप्राप्त राजनैतिक दलों को भी इस अनुदेश के साथ परिचालित किया जाएगा कि सभी भावी निर्वाचनों में दलों और उनके अभ्यर्थियों दोनों द्वारा उक्त निदेशों का सख्ती से अनुपालन किया जाए।  
    11.    कृपया इसकी पावती दें और की गई कार्रवाई की पुष्टि करें।  

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  10. अर्हक तारीख के रूप में दिनांक 01.01.2021 के संदर्भ में फोटो निर्वाचक नामावलियों का विशेष सार पुनरीक्षण-कार्यक्रम-यौक्तिकीकरण के दौरान किसी मतदान केन्द्र के लिए नियत किए जाने हेतु निर्वाचकों की अधिकतम संख्या के संबंध में स्पष्टीकरण-तत्‍संबंधी।

    सं.23/2020-ईआरएस
    दिनांक: 04 सितंबर, 2020
     
    सेवा में
          सभी राज्यों एवं संघ राज्यों क्षेत्रों के मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी (बिहार और जम्मू-कश्मीर, लद्दाख संघ राज्य क्षेत्रों को छोड़कर)
     
    विषय:-अर्हक तारीख के रूप में दिनांक 01.01.2021 के संदर्भ में फोटो निर्वाचक नामावलियों का विशेष सार पुनरीक्षण-कार्यक्रम-यौक्तिकीकरण के दौरान किसी मतदान केन्द्र के लिए नियत किए जाने हेतु निर्वाचकों की अधिकतम संख्या के संबंध में स्पष्टीकरण-तत्‍संबंधी।
    संदर्भः-
    ईसीआई पत्र सं.23/2019-ईआरएस (खंड-III), दिनांक 25 जुलाई, 2019, ईसीआई पत्र सं.23/एसईसी/2020-ईआरएस, दिनांक 23 जुलाई, 2020, ईसीआई पत्र सं. 23/2020-ईआरएस, दिनांक 07 अगस्त, 2020, और ईसीआई पत्र सं.23/2020-ईआरएस, दिनांक 24 अगस्त, 2020।  
    महोदय/महोदया 
          मुझे अर्हक तारीख के रूप में 01.01.2021 के संदर्भ में निर्वाचक नामावलियों के विशेष सार पुनरीक्षण के लिए अनुसूची एवं दिशा-निर्देश के संबंध में आयोग के दिनांक 07 अगस्त, 2020 और 24 अगस्त, 2020 (हरियाणा एवं महाराष्ट्र के लिए) के समसंख्यक पत्र का संदर्भ लेने और यह कहने का निदेश हुआ है कि मौजूदा अनुदेशों के अनुसार, सार पुनरीक्षण के संबंध में निर्वाचक नामावलियों के प्रारूप प्रकाशन से पहले 1,500 से अधिक निर्वाचकों वाले सभी मतदान केन्द्रों का यौक्तिकीकरण किया जाएगा।
          कोविड-19 वैश्विक महामारी के एहतियाती उपायों में से एक के रूप में बिहार राज्य और अन्य राज्यों के कुछ निर्वाचन क्षेत्रों, जहां निकट भविष्य में साधारण और उप-निर्वाचन होने वाले हैं, में किसी मतदान केंद्र के लिए नियत किए जाने वाले निर्वाचकों की संख्या की सीमा 1,000 तक सीमित कर दी गई है। इस प्रयोजन के लिए, इन राज्यों को 1,000 से अधिक निर्वाचकों वाले सभी मुख्य मतदान केंद्रों के सहायक मतदान केंद्र बनाने के लिए कहा गया है, क्योंकि इन राज्यों में सार पुनरीक्षण, 2020 के पूरा होने के कारण ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान केंद्र का यौक्तिकीकरण नहीं किया जा सका, जहां अर्हक तिथि के रूप में 01.01.2020 के संदर्भ में अंतिम रूप से तैयार निर्वाचक नामावली के आधार पर साधारण निर्वाचन/उप-निर्वाचनों का आयोजन किया जाना है।
    आयोग ने सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया है कि मतदान केंद्रों का यौक्तिकीकरण/पुनर्गठन, जैसा भी मामला हो, सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में किसी मतदान केंद्र के लिए अधिकतम 1500 निर्वाचकों के आधार पर किया जाएगा।
    आयोग के उपरोक्त अनुदेशों का कड़ाई से अनुपालन करने के लिए सभी संबंधितों को तदनुसार सूचित किया जाए।

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  11. Broad Guidelines for Conduct of General Election/Bye election during COVID-19

    Broad Guidelines for Conduct of General Election/Bye election during COVID-19
     

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  12. अर्हक तारीख के रूप में 01.01.2021 के संदर्भ में फोटो निर्वाचक नामावलियों का विशेष सार पुनरीक्षण-कार्यक्रम-तत्‍संबंधी।

    सं.23/2020-ईआरएस
    दिनांक: 7 अगस्त, 2020
     
    सेवा में
     
           सभी राज्‍यों और संघ राज्‍य क्षेत्रों के मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी
    (बिहार, हरियाणा, महाराष्‍ट्र और जम्मू व कश्मीर, लद्दाख केन्द्र शासित प्रदेशों को छोड़कर)    
     
    विषय:  अर्हक तारीख के रूप में 01.01.2021 के संदर्भ में फोटो निर्वाचक नामावलियों का विशेष सार पुनरीक्षण-कार्यक्रम-तत्‍संबंधी।
     
    महोदय/महोदया
    मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि मौजूदा नीति के अनुसार, अर्हक तारीख के रूप में आगामी वर्ष की 1 जनवरी के संदर्भ में निर्वाचन नामावलियों का पुनरीक्षण सभी राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों में प्रत्येक वर्ष की उत्‍तरवर्ती अवधि (सामान्‍य रूप से वर्ष की अंतिम तिमाही में) में किया जाता है ताकि निर्वाचक नामावलियों का अंतिम प्रकाशन अनुवर्ती वर्ष के जनवरी माह के प्रथम सप्ताह में किया जा सके। पुनरीक्षण कार्यक्रम इस ढंग से तैयार किया जाता है कि निर्वाचक नामावलियां राष्ट्रीय मतदाता दिवस (प्रतिवर्ष की 25 जनवरी) से काफी पहले अंतिम रूप से प्रकाशित कर दी जाएं ताकि नव निर्वाचकों, विशेषतौर पर युवा मतदाताओं (18-19 वर्ष) के लिए तैयार किए गए एपिक राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर उन्हें औपचारिक ढंग से वितरित किए जा सकें। आयोग ने सभी पक्षों पर विचार करते हुए सभी राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों (बिहार, हरियाणा, महाराष्ट्र और जम्मू व कश्मीर, लद्दाख केन्द्र शासित प्रदेशों को छोड़कर) में अर्हक तारीख के रूप में दिनांक 01-01-2021 से निम्नलिखित तालिका के अनुसार फोटो निर्वाचक नामावलियों का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण आरंभ करने का निदेश दिया है:-
    क्र. सं.
    कार्यकलाप
    अवधि
    पूर्व पुनरीक्षण कार्यकलाप:
    1.
    (क)   मतदान केंद्रों का युक्तिकरण/पुनर्व्यवस्था करना।
    (ख)   डीएसई और एपिक, की त्रुटियों का निराकरण (भाग के अंदर डीएसई को 31.08.2020 तक हटाना है)।
    (ग)    अनुभाग/भागों का पुनर्विकास और मतदान केंद्रों के अनुभाग/भाग की सीमाओं के प्रस्तावित पुनर्गठन को अंतिम रूप देना और मतदान केन्द्रों की सूची का अनुमोदन प्राप्त करना।
    10.08.2020 (सोमवार) से 31.10.2020 (शनिवार) तक
    2.
    (क)   प्रारूप 1 से 8 तक तैयार करना
    (ख)  पूरक और समेकित प्रारूप नामावली की तैयारी
    01.11.2020 (रविवार) से 15.11.2020 (रविवार) तक
    पुनरीक्षण कार्यकलाप
     
    3.
    समेकित प्रारूप निर्वाचक नामावली का प्रकाशन
    16.11.2020 (सोमवार)
    4.
    दावों और आपत्तियों को दायर करने की अवधि
    16.11.2020 (सेमवार) से 15.12.2020 (मंगलवार) तक
    5.
    विशेष अभियान की तारीखें
    सीईओ द्वारा निर्धारित किए जाने वाले दावों और आपत्तियों की अवधि के भीतर दो शनिवार और रविवार
    6.
    दावों एवं आपत्तियों का निपटान
    05.01.2021 (मंगलवार) तक
    7.
    (क) दुरूस्‍तता संबंधी मानदंडों की जांच करना और अंतिम प्रकाशन के लिए आयोग की अनुमति लेना
    (ख) डाटाबेस का अद्यतनीकरण और अनुपूरकों का मुद्रण
    14.01.2021 (गुरुवार) तक
    8.
    निर्वाचक नामावली का अंतिम प्रकाशन
    15.01.2021 (शुक्रवार)
     

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  13. श्री सचिन सावंत को आयोग का जवाब

    सं. 39/एमटी/2020/प.अनु.-II                                   
    दिनांक: 07 अगस्त, 2020
     
    सेवा में
                श्री सचिन सावंत           
                महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस समिति
                तिलक भवन,
                काकासाहेब गाँधी मार्ग,
                दादर,
                मुम्बई-400025 
    विषय: महाराष्ट्र राज्य में जुलाई, 2019 में मुख्य निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति-तत्संबंधी।
    महोदय,
    मुझे उपर्युक्‍त विषय पर आपके दिनांक 31.07.2020 के पत्र का संदर्भ लेने और यह कहने का निदेश हुआ है कि आयोग में उपलब्ध सारवान् सूचना के अनुसार, निम्नलिखित तथ्य प्रासंगिक हैं:-
    (i)        मुख्य निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति संबंधित राज्य सरकार/संघ शासित प्रदेश से परामर्श करके की जाती है, जिसमें आयोग को अधिकारियों के एक पैनल के बारे में सूचना दी जाती है।
    (ii)       श्री बलदेव सिंह (आईएएस, एमएच:1989) को आयोग द्वारा नियत प्रक्रिया अपनाकर  नियुक्त किया गया था, जहां राज्य सरकार ने स्पष्ट किया था कि वह सतर्कता की दृष्टि से बेदाग हैं और रिकॉर्ड के अनुसार, मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी, महाराष्‍ट्र के रूप में उनकी नियुक्ति से पहले उनकी सेवा के पिछले पांच वर्षों के दौरान उनकी निष्‍पादन मूल्यांकन रिपोर्ट में उन्हें उत्कृष्ट दर्जा दिया गया था।  
    2.    उपरोक्त को देखते हुए, आयोग ने इस मामले पर विधिवत विचार किया, और उसे इस मामले में कोई भी कार्रवाई करने का कोई कारण नहीं मिला है।

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  14. कोविड-19 वैश्विक महामारी की स्थिति में निर्वाचन अभियान और जनसभाएं-विचार और सुझाव आमंत्रित करना।

    सं. 3/10/2020/एसडीआर 
    दिनांक: 04 अगस्त, 2020
     
    सेवा में
          मान्यताप्राप्त राष्ट्रीय/राज्यीय राजनीतिक दलों के अध्यक्ष/महासचिव
     
    विषय: कोविड-19 वैश्विक महामारी की स्थिति में निर्वाचन अभियान और जनसभाएं-विचार और सुझाव आमंत्रित करना।
    महोदया/महोदय
    मुझे उपर्युक्त विषय पर आयोग के दिनांक 17 जुलाई, 2020 के पत्र का संदर्भ लेने का निदेश हुआ है, जिसमें सभी राजनीतिक दलों से इस संबंध में 31 जुलाई, 2020 तक अपने सुझावों को प्रस्तुत करने का अनुरोध किया गया था। हालांकि कई दलों से अभी जवाब आने बाकी हैं। देश में कोविड-19 की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, आयोग ने निदेश दिया है कि आगामी उप-निर्वाचनों और बिहार विधान सभा के साधारण निर्वाचनों के संचालन के संबंध में जिन राजनीतिक दलों ने निर्वाचन अभियान और जन सभाओं पर अपने इनपुट/विचार/सुझाव नहीं भेजे हैं, उन्हें और समय दिया जाए।
    उपरोक्त को देखते हुए, आपसे अनुरोध है कि इनपुट/विचारों/सुझावों को 11 अगस्त, 2020 तक भेजें।
    विचारों/सुझावों को ntbhutia[@]eci[.]gov[.]in पर ईमेल के जरिए भेजा जा सकता है।

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  15. Reply to Shri Prithviraj Chavan from ECI

    Reply to Shri Prithviraj Chavan from ECI

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  16. ईसीआई द्वारा बयान

    ईसीआई द्वारा बयान
     द ट्रिब्यून में आज अर्थात28.7.2020 को छपी एक रिपोर्ट, जिसका शीर्षक " परिसीमन के बाद जम्मू और कश्मीर में निर्वाचन" है, श्री जी.सी. मुर्मू,माननीय उपराज्यपाल (एलजी), जम्मू और कश्मीर (जेएंडके)से संबंधित है। राज्यपाल (एलजी) के इसी तरह के बयानों को पहले द हिंदू दिनांक 18.11.2019, न्यूज 18 दिनांक 14.11.2019, हिंदुस्तान टाइम्स ने 26.6.2020 और इकोनॉमिक टाइम्स (ई-पेपर) ने दिनांक 28.7.2020 द्वारा रिपोर्ट किया गया था। निर्वाचन आयोग इस तरह के बयानों को अपवाद मानताहै और यह कहना चाहता है कि संवैधानिक योजना में निर्वाचनों का समय आदि का निर्णय एकमात्र भारत निर्वाचन आयोग का होता है। समय निर्धारित करने से पहले,आयोग उस क्षेत्र, जहां निर्वाचन होने हैं,में स्थलाकृति, मौसम,क्षेत्रीय और स्थानीय उत्सवों से उत्पन्न होने वाली संवेदनशीलता सहित सभी प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखता है। उदाहरण के लिए,मौजूदा समय में, कोविड19ने एक नया परिवर्तनला दिया है,जिसे नियत समय पर ध्यान में रखना पड़ता है और रखा जाना चाहिए। मौजूदा मामले में,परिसीमन का परिणाम भी निर्णय के अनुकूल है। इसी प्रकार से, सीपीएफ को लानेऔर ले-जाने के लिए केंद्रीय बल और रेलवे कोच आदि की उपलब्धता महत्वपूर्ण कारक हैं। ये सभी कार्य आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सावधानीपूर्वक होमवर्क और संबंधित प्राधिकारियों के साथ गहन परामर्श करने, विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद किया जाता है। जहां भी आवश्यक हो,आयोग स्वयं संबंधित राज्य की यात्रा का कार्यक्रम तय करता है और सभी स्टेकहोल्डरों के साथ व्यापक विचार-विमर्श करता है। निर्वाचन आयोग के अलावा अन्य प्राधिकारियों कोऐसे बयान देने से बचना हितकर होगा, जो दरअसल निर्वाचन आयोग के संवैधानिक जनादेश में हस्तक्षेप करने के समान लगते हों।
     

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  17. ईवीएम/वीवीपीएटी संबंधी तैयारियों की सभी प्रक्रियाओं के दौरान बीईएल/ईसीआईएल अभियंताओं को निर्वाचन ड्यूटी पर मतदान अधिकारियों के रूप में मानना-तत्संबंधी।

    1. निर्वाचन ड्यूटी पर तैनात सीएपीएफ/एसएपी के लिए कोविड-19 संबंधी मामलों तथा क्वारंटाइन सुविधाओं हेतु कैशलेस उपचार के संबंध में - तत्संबंधी।
    2. कोविड-19 के कारण मृत्‍यु होने की दशा में सीएपीएफ/मतदान कार्मिक के परिवार को अनुग्रह प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान करने के संबंध में। 
    3. ईवीएम/वीवीपीएटी संबंधी तैयारियों की सभी प्रक्रियाओं के दौरान बीईएल/ईसीआईएल अभियंताओं को निर्वाचन ड्यूटी पर मतदान अधिकारियों के रूप में मानना-तत्संबंधी।

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  19. Invitation for Webinar on "Technologies and Equipment for Remote Voting Systems"

    Invitation for Webinar on "Technologies and Equipment for Remote Voting Systems"

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  20. कोविड-19 वैश्विक महामारी की स्थिति में निर्वाचन अभियान और जनसभाएं-विचार और सुझाव आमंत्रित करना।

    सं.3/10/2020/एसडीआर/खंड-I                                    दिनांक: 17 जुलाई, 2020
    सेवा में
    मान्यताप्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्य दलों के अध्यक्ष/महासचिव
    विषय: कोविड-19 वैश्विक महामारी की स्थिति में निर्वाचन अभियान और जनसभाएं-विचार और सुझाव आमंत्रित करना।
    महोदय/महोदया
          मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि निर्वाचन आयोग ने समय-समय पर निर्वाचन अभियान के विभिन्न पहलुओं के संबंध में अनुदेश जारी किए हैं। सभी मौजूदा अनुदेशों को, अनुदेशों के सार-संग्रह में संकलित किया गया है, जो कि आयोग की वेबसाइट https://eci.gov.in/files/file/9725-compendium-of-instructions-2019-volume-iiiiii-iv/ पर उपलब्ध है।
    2.          इस संबंध में, आपका ध्यान देश में कोविड-19 की वर्तमान स्थिति और इसकी रोकथाम के लिए सुरक्षात्मक उपाय निर्धारित करते हुए आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत जारी किए गए कई दिशा-निर्देशों/अनुदेशों की ओर आकर्षित किया जाता है। राज्य सरकारों ने भी संबद्ध संविधियों के तहत कोविड-19 के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए इसी तरह के दिशा-निर्देश/अनुदेश और एहतियाती उपाय जारी किए हैं। निर्धारित किए गए कुछ एहतियाती उपायों में सार्वजनिक स्थानों पर अनिवार्य रूप से फेस मास्क पहनना, सामाजिक दूरी, सार्वजनिक स्थानों पर एक निर्धारित न्यूनतम दूरी बनाए रखना, बड़े सार्वजनिक समारोह/सभाओं पर प्रतिबंध लगाना, सभा स्थल पर थर्मल स्कैनिंग, सैनिटाइजेशन आदि शामिल हैं।
    3.    आप सभी अवगत हैं कि वर्ष 2020 में कुछ उप-निर्वाचन और बिहार विधानसभा के साधारण निर्वाचन होने वाले हैं। आयोग ने उपर्युक्त विषय पर राजनीतिक दलों के विचार जानने की इच्छा जाहिर की है।
    4.    तदनुसार, आपसे अनुरोध है कि आप अपने विचारों और सुझावों को 31 जुलाई, 2020 तक भेजने का कष्ट करें ताकि वैश्विक महामारी की अवधि के दौरान निर्वाचन के संचालन के लिए अभ्यर्थियों अथवा राजनीतिक दलों द्वारा निर्वाचन अभियान के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए जा सकें।

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  21. बिहार राज्‍य विधान सभा का साधारण निर्वाचन - निर्वाचनों के संचालन से संबंधित अधिकारियों का स्‍थानांतरण/तैनाती के लिए परामर्शी – तत्‍संबंधी।

    सं.437/6/1/अनुदेश/ईसीआई/प्रकार्या./एमसीसी/2020                     दिनांक: 30 जून, 2020
    सेवा में,
    1.   मुख्‍य सचिव,
    बिहार सरकार, पटना।
     
    2.   मुख्य निर्वाचन अधिकारी,
    बिहार, पटना।
     
     
    विषय: बिहार राज्‍य विधान सभा का साधारण निर्वाचन - निर्वाचनों के संचालन से संबंधित अधिकारियों का स्‍थानांतरण/तैनाती के लिए परामर्शी – तत्‍संबंधी। 
    महोदय/महोदया,
    बिहार की विद्यमान विधान सभा का कार्यकाल 29 नवंबर, 2020 तक है।
     
    2.    स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वाचन सुनिश्चित करने के लिए, आयोग इस आशय की एक सुसंगत नीति का अनुपालन करता रहा है कि निर्वाचनरत राज्य/केन्द्र शासित प्रदेशों के निर्वाचनों से सीधे जुड़े अधिकारियों को उनके गृह जिलों या उन स्थानों पर तैनात नहीं किया जाता जहाँ उन्होंने काफी लंबे समय तक सेवाएं दी हैं। इसे ध्यान में रखते हुए लोकसभा, 2019 और आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम की राज्य विधान सभाओं के साधारण निर्वाचन के संबंध में दिनांक 16 जनवरी, 2019 के सम संख्यक पत्र के तहत स्‍थानांतरण/तैनाती संबंधी विस्तृत अनुदेश जारी किए गए थे (प्रतिलिपि संलग्न)।
    3.    तद्नुसार, एतद् द्वारा यह सुझाव दिया जाता है कि निर्वाचन के संचालन से सीधे जुड़े सभी सरकारी अधिकारियों जैसे कि डीईओ/आरओ/एआरओ/पुलिस इंस्पेक्टर/सब-इंस्पेक्टर अथवा इनसे ऊपर के पदों पर तैनात अधिकारियों के मामले में निम्नलिखित सुनिश्चित किया जाए-
                                      i.                   कि निर्वाचन से संबंधित किसी भी अधिकारी को उनके अपने गृह जिले में तैनात न किया जाए।
                                      ii.         कि निर्वाचन कार्य से संबंधित अधिकारी, जिन्होंने पिछले चार (4) वर्षों के दौरान उस जिले में तीन वर्ष पूरे कर लिए हों या 31 अक्तूबर, 2020 को या उससे पहले तीन वर्ष पूरे कर लेंगे, उनका स्थानांतरण कर दिया जाना चाहिए।
                                    iii.         कि ऐसे अधिकारियों, जिनके विरूद्ध आयोग ने विगत में अनुशासनात्‍मक कार्रवाई की सिफारिश की थी और जो लंबित है या जिसकी परिणति में दंड दिया गया है अथवा जिन्‍हें विगत में निर्वाचन या निर्वाचन संबंधी किसी कार्य में कोई चूक के लिए आरोपित किया गया है, को निर्वाचन संबंधी कोई भी कार्य नहीं सौंपा जाएगा। इसके अतिरिक्त, आगामी छह महीनों के भीतर सेवानिवृत होने वाले किसी भी अधिकारी को निर्वाचन संबंधी किसी भी कार्य में नहीं लगाया जाएगा।
                              iv.               कि लोक सभा निर्वाचन, 2019 के दौरान आयोग की सिफारिश पर तैनात अधिकारियों को उपर्युक्त स्थानांतरण नीति से छूट दी जा सकती है।
     
    4.    आयोग की उपर्युक्त परामर्शी को सख्ती से तथा समय पर अनुपालन के लिए सभी संबंधितों के ध्यान में लाया जाए।
    5.    कृपया इस पत्र की पावती दें।
    भवदीय,
     
    (नरेन्द्र एन. बुटोलिया)
    वरिष्ठ प्रधान सचिव
     
     
     
     
    भारत निर्वाचन आयोग
    निर्वाचन सदन, अशोक रोड, नई दिल्‍ली-110001
    सं.437/6/1/अनुदेश/ईसीआई/प्रकार्या./एमसीसी/2019                     दिनांक: 16 जनवरी, 2019
    सेवा में,
    1.   सभी राज्यों एवं संघ शासित क्षेत्रों के
    मुख्‍य सचिव।
    2.   सभी राज्यों एवं संघ शासित क्षेत्रों के
    मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी।
     
    विषय:      लोकसभा, 2019 और आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम की राज्य विधान सभाओं के साधारण निर्वाचन - अधिकारियों के स्‍थानांतरण/तैनाती – तत्‍संबंधी।     
    महोदय,
    मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि वर्तमान, लोक सभा एवं आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम की राज्य विधान सभाओं के कार्यकाल क्रमश: 03 जून, 2019, 18 जून, 2019, 01 जून, 2019, 11 जून, 2019 तथा 27 मई, 2019 तक हैं।
     
    2.    आयोग एक ऐसी सुसंगत नीति का अनुसरण कर रहा है जिसमें निर्वाचनरत राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों में निर्वाचनों के संचालन से प्रत्‍यक्ष रूप से जुड़े अधिकारियों को उनके गृह जिलों या ऐसे स्‍थानों पर तैनात नहीं किया जाता है जहां उन्‍होंने काफी लंबी अवधि तक कार्य किया है।
    3.    अत: आयोग ने निर्णय लिया है कि निर्वाचनों से प्रत्‍यक्ष रूप से जुड़े किसी भी अधिकारी को तैनाती के वर्तमान जिले में बने रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी:-
                                    v.                   यदि वे अपने गृह जिले में तैनात हैं।
                                  vi.                   यदि उन्होंने पिछले चार (4) वर्षों के दौरान उस जिले में तीन वर्ष पूर्ण कर लिए हैं या 31 मई, 2019 को या उससे पहले तीन वर्ष पूर्ण कर लेंगे।
     
    4.    उपर्युक्‍त अनुदेशों को कार्यान्वित करते हुए/अधिकारियों को स्‍थानां‍तरित करते हुए, राज्‍य सरकार के संबंधित विभागों को ध्‍यान रखना चाहिए कि उन्‍हें उनके गृह जिले में तैनात न किया जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी डीईओ/आरओ/एआरओ/पुलिस इंस्‍पेक्‍टर/सब-इंस्‍पेक्‍टर या उनसे उच्‍चतर अधिकारियों को ऐसे विधान सभा निर्वाचन-क्षेत्र/जिले में वापस तैनात न किया जाए या न बने रहने दिया जाए जहां वे 31 मई, 2017 से पूर्व के विधान सभा निर्वाचन में आयोजित साधारण/उप-निर्वाचन के दौरान तैनात थे।
    5.    यदि कुछेक जिलों वाले छोटे राज्‍य/संघ राज्‍य-क्षेत्र को उपर्युक्त अनुदेशों के अनुपालन में किसी कठिनाई का सामना करना पड़ता है तो वे उस विशिष्‍ट मामले को उनके कारण सहित, सीईओ के माध्‍यम से छूट प्राप्त करने हेतु आयोग को भेज सकते हैं और आयोग ऐसे मामले पर, यदि  आवश्‍यक समझे, निदेश जारी करेगा।
     
    6.    अनुप्रयोज्‍यता-
    6.1   ये अनुदेश केवल विनिर्दिष्‍ट निर्वाचन कर्तव्‍यों के लिए नियुक्‍त अधिकारियों यथा डीईओ, डिप्‍टी डीईओ, आरओ/एआरओ, ईआरओ/एईआरओ, किसी विशेष निर्वाचन के नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्‍त अधिकारियों पर ही लागू नहीं होते अपितु जिले के अधिकारियों यथा एडीएम, एसडीएम डिप्‍टी क्‍लेक्‍टर/ज्‍वाइंट क्‍लेक्‍टर, तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी या निर्वाचन कार्यों के लिए सीधे तैनात समतुल्‍य रैंक के किन्‍हीं अन्‍य अधिकारियों पर भी लागू होते हैं।
    6.2   ये अनुदेश, पुलिस विभाग के अधिकारियों जैसे रेंज आई जी, डी आई जी, राज्‍य सशस्‍त्र पुलिस के कमांडेंट्स, एसएसपी, एसपी, अपर एस पी, उप-प्रभागीय पुलिस प्रमुख, एस एच ओ, इंस्‍पेक्‍टर, सब-इंस्‍पेक्‍टर, आर आई/सार्जेंट मेजर अथवा ऐसे समतुल्‍य रैंक के अधिकारी जो निर्वाचन समय में जिले में सुरक्षा प्रबंधन अथवा पुलिस बल की तैनाती के लिए जिम्‍मेवार हैं, पर भी लागू होंगे।
    7.    आयोग द्वारा समय-समय पर जारी किए गए निम्‍नलिखित स्‍पष्‍टीकरण/शिथिलताएं सभी संबंधितों की सूचना/दिशा-निर्देश के लिए हैं:-
    (i)      कार्यात्‍मक विभागों यथा कंप्‍यूटरीकरण, विशेष शाखा, प्रशिक्षण इत्‍यादि में तैनात पुलिस अधिकारियों पर ये अनुदेश लागू नहीं होते हैं।
    (ii)     पुलिस सब-इंस्‍पेक्‍टर और उनसे उच्‍च पदीय अधिकारियों को उनके गृह जिलों में तैनात नहीं किया जाना चाहिए।
    (iii)    यदि पुलिस सब-इंस्‍पेक्‍टर ने पुलिस सब-डिवीजन में अंतिम तारीख के दिन या उससे पहले चार वर्षों में से 3 वर्षों का कार्यकाल पूरा कर लिया है या पूरा करेगा तो उसका ऐसे पुलिस सब-डिवीज़न में स्‍थानांतरण कर देना चाहिए जो उस विधान सभा निर्वाचन-क्षेत्र में न पड़ती हो। यदि जिले के छोटे आकार के कारण यह संभव न हो तो उसे जिले से बाहर स्‍थानांतरित कर देना चाहिए।
    (iv) किसी भी निर्वाचन में विभिन्‍न प्रकार की निर्वाचन ड्यूटियों के लिए बड़ी संख्‍या में कर्मचारियों को तैनात किया जाता है और आयोग की ऐसी कोई मंशा नहीं होती है कि बड़ी संख्‍या में स्‍थानांतरण करके राज्‍य मशीनरी को अत्‍यंत पंगु कर दे। अत: उपर्युक्‍त स्‍थानांतरण नीति सामान्‍यत: उन अधिकारियों/पदाधिकारियों पर लागू नहीं होती जो निर्वाचनों से प्रत्‍यक्ष रूप से नहीं जुड़े हैं जैसे डाक्‍टर, इंजीनियर, शिक्षक/प्रधानाचार्य इत्‍यादि। तथापि, यदि ऐसे किसी भी सरकारी अधिकारी के विरूद्ध राजनीतिक पक्षपात या पूर्वाग्रह की विशिष्‍ट शिकायतें मिलती हैं और जो जांच करने पर सत्‍य पाई जाती हैं तो सी ई ओ/ई सी आई न केवल ऐसे अधिकारियों के स्‍थानांतरण के आदेश देगा अपितु उसके विरूद्ध समुचित विभागीय कार्रवाई करने के भी आदेश देगा।
    (v)     निर्वाचन ड्यूटी में शामिल सेक्‍टर अधिकारी/ज़ोनल मजिस्‍ट्रेट के रूप में नियुक्‍त अधिकारियों पर ये अनुदेश लागू नहीं होते हैं। तथापि, प्रेक्षकों, सीईओ/डीईओ तथा आर ओ को उनके आचरण पर सतर्क निगरानी रखनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे अपने कर्तव्‍यों के निष्‍पादन में गैर-पक्षपातपूर्ण व निष्‍पक्ष रहें।
    (vi)    तीन वर्षों की अवधि की गणना करते समय जिले के अंदर किसी पद पर हुई प्रोन्‍नति की भी गणना की जाएगी।
    (vii)    ये अनुदेश संबंधित विभाग के राज्‍य मुख्‍यालयों में तैनात अधिकारियों पर लागू नहीं होते।
    (viii)   इसके अतिरिक्‍त यह निदेश दिया जाता है कि ऐसे अधिकारियों/कर्मचारियों जिनके विरूद्ध आयोग ने विगत में अनुशासनात्‍मक कार्रवाई की सिफारिश की थी और जो लंबित है या जिसकी परिणति में दंड दिया गया था अथवा जिन्‍हें विगत में निर्वाचन या निर्वाचन संबंधी किसी कार्य में कोई चूक के लिए आरोपित किया गया है, उन्‍हें निर्वाचन संबंधी कोई भी ड्यूटी नहीं सौंपी जाएगी। तथापि, ऐसा अधिकारी, जो आयोग के आदेशों के अधीन किसी विगत निर्वाचन के दौरान अनुशासनात्‍मक कार्रवाई की किसी सिफारिश के बिना स्‍थानां‍तरित किया गया था, को केवल इसी आधार पर तब तक स्‍थानांतरित करने पर विचार नहीं किया जाएगा जब तक ऐसे किसी अधिकारी के बारे में आयोग द्वारा विशेष रूप से निदेश न दिए जाएं। दागी अधिकारियों के नामों पर नजर रखने के संबंध में आयोग के दिनांक 23 दिसम्‍बर, 2008 के अनुदेश सं. 464/अनुदेश/2008-ईपीएस की एक प्रति संलग्‍न है। मुख्‍य निर्वाचन अधिकारियों को इसका अनुपालन अवश्‍य सुनिश्चित करना चाहिए।
    (ix) इसके अतिरिक्‍त आयोग ने यह इच्‍छा भी व्‍यक्‍त की है कि ऐसे किसी अधिकारी/कर्मचारी को, जिनके विरूद्ध किसी न्‍यायालय में आपराधिक मामला लंबित है, निर्वाचन कार्य या निर्वाचन संबंधी ड्यूटी से संबद्ध / पर तैनात नहीं किया जाना चाहिए।
    (x) इसके अतिरिक्‍त, आयोग की उपर्युक्‍त नीति के अनुसार स्‍थानांतरित हो चुके वर्तमान पदधारियों के स्‍थान पर व्यक्तियों की तैनाती करते समय राज्‍य/संघ राज्‍य-क्षेत्र के मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी से निरपवाद रूप से परामर्श किया जाएगा। इन अनुदेशों के अधीन जारी स्‍थानांतरण आदेशों की प्रतियां मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी को अवश्‍य ही दे दी जाएं।
    (xi) ऐसे अधिकारियों/कर्मचारियों जो किसी निर्वाचन वर्ष के दौरान निर्वाचक नामावली पुनरीक्षण कार्य में लगे हुए है, के संबंध में स्‍थानांतरण आदेश यदि कोई हो तो, का कार्यान्‍वयन संबंधित मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी के परामर्श से निर्वाचक नामावलियों के अंतिम रूप से प्रकाशन के बाद ही किया जाएगा। किन्‍हीं असाधारण कारणों की वजह से स्‍थानांतरण की कोई आवश्‍यकता के मामले में आयोग का पूर्व-अनुमोदन लिया जाएगा।
    (xii)    कोई भी अधिकारी जो आने वाले छह महीनों के भीतर सेवानिवृत होने वाला है, आयोग के पैरा-3 में उल्लिखित अनुदेशों की परिधि से बाहर रहेगा। इसके अतिरिक्‍त, (गृह नगर/3+मानदंड तथा 6 महीनों के अंदर सेवानिवृत होने वाले) इस श्रेणी में आने वाला अधिकारी यदि पैरा 6.1 एवं 6.2 में उल्लिखित निर्वाचन संबंधित पद पर है तो उसे उस प्रभार से मुक्त किया जाएगा तथा किसी भी प्रकार की निर्वाचन ड्यूटी प्रदान नहीं की जाएगी। हांलाकि, यह भी दोहराया जाता है कि ऐसे सेवानिवृत होने वाले अधिकारी को जिले से बाहर स्थानांनतरित करने की आवश्यकता नहीं है।
    (xiii)   यह भी स्‍पष्‍ट किया जाता है कि राज्‍य के ऐसे सभी अधिकारी/कर्मचारी (मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में तैनात अधिकारी/कर्मचारी को छोड़कर) जिनकी सेवा-अवधि बढ़ाई गई है या जिन्‍हें विभिन्‍न पदों पर पुन: नियोजित किया गया है, निर्वाचन संबंधी किसी भी कार्य से नहीं जोड़े जाएंगे।
    (xiv)   निर्वाचन संबंधी सभी अधिकारियों से अपेक्षा की जाएगी कि वे संबंधित डीईओ को नीचे दिए गए फार्मेट में घोषणापत्र भरकर दें जो तद्नुसार मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी को सूचित करेंगे। 
     
    घोषणा-पत्र
    (नाम निर्देशन-पत्रों की अंतिम तारीख के पश्‍चात दो दिनों के अन्‍दर प्रस्‍तुत किए जाने हेतु)

     टिप्‍पणी- किसी भी अधिकारी द्वारा की गई किसी भी मिथ्‍या घोषणा पर उचित अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी। 
    8.    आयोग के उपर्युक्‍त अनुदेश उनका सख्‍ती से अनुपालन किए जाने के लिए संबंधित विभागों/अधिकारियों या राज्‍य सरकार के संज्ञान में लाए जाएं। जिला निर्वाचन अधिकारी या जिले के संबंधित अधिकारीगण सुनिश्चित करेंगे कि जिन अधिकारियों/कर्मचारियों का स्‍थानान्‍तरण किया जाता है वे अपने एवज़ी की प्रतीक्षा किए बिना अपना कार्यभार तुरंत सौंप दें। 
    9.    आयोग ने इसके अतिरिक्त निदेश दिया है कि उपर्युक्‍त अनुदेश के अधीन आने वाले सभी अधिकारियों के स्‍थानांतरण/तैनाती दिनांक 28 फरवरी, 2019 तक कर दिए जाएं तथा राज्‍य सरकार के संबंधित विभागों/अधिकारियों से प्राप्त कार्रवाई के विवरण सहित अनुपालन रिपोर्ट आयोग को मार्च, 2019 के पहले सप्ताह में प्रस्तुत की जाए।
    10.   कृपया इस पत्र की पावती दें।
    भवदीय,
     
    (नरेन्द्र एन. बुटोलिया)
    प्रधान सचिव
     
     
     
     
    भारत निर्वाचन आयोग
    निर्वाचन सदन, अशोक रोड, नई दिल्‍ली-110001
    464/अनुदेश/2008/ईपीएस                                          दिनांक: 23 दिसम्बर, 2008
     
    सेवा में,
    सभी राज्यों/संघ राज्य-क्षेत्रों के
    मुख्य निर्वाचन अधिकारीगण। 
               
    विषयः-    भारत निर्वाचन आयोग के आदेश द्वारा कार्य की अवहेलना आदि के आरोप में स्थानांतरित अधिकारियों के नामों पर नजर रखना।
     
    संदर्भः-    सभी राज्यों तथा संघ राज्य-क्षेत्रों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को सम्बोधित पत्र सं. 437/6/2006-पीएलएन.III दिनांक 06 नवम्बर, 2006 तथा ईसीआई संदेश सं. 100/1994-पीएलएन-I दिनांक 28.03.1994।
          भारत निर्वाचन आयोग ने ऊपर संदर्भित अनुदेश द्वारा निदेश दिया था कि प्रत्येक निर्वाचन से पहले सभी जिलों में एक विस्तृत समीक्षा की जाएगी तथा ऐसे सभी अधिकारियों को उनके गृह जिले या उस जिलों से बाहर स्थानांतरित किया जाना चाहिए जहां उन्होंने 4 वर्षों के कार्यकाल में से 3 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया हो, और यह भी निदेश दिया था कि ऐसे अधिकारीगण/कर्मचारीगण जिनके विरुद्ध आयोग ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की है या जिन्हें निर्वाचन या निर्वाचन संबंधी कार्य में किसी त्रुटि के लिए आरोपित किया गया है या जिन्हें इस मामले में आयोग के आदेशों के अधीन स्थानांतरित किया गया है, उन्हें निर्वाचन संबंधी कोई भी ड्यूटी न सौंपी जाए।
          तथापि, हाल ही में हुए निर्वाचनों के दौरान यह देखा गया कि मुख्य निर्वाचन अधिकारियों तथा जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा आयोग के उपर्युक्त अनुदेश का अनुपालन करने के लिए किए गए प्रयासों के बावजूद अभी भी ऐसे अधिकारियों के कुछ उदाहरण हैं, जो उपर्युक्त मानदण्ड के अंतर्गत आते हैं तथा जिले से बाहर गैर-निर्वाचन संबंधी कार्य के लिए स्थानांतरित किए जाने के भागी हैं, परन्तु वे वहीं जमे रहने का इंतजाम कर लेते है औंर आयोग को उसके बारे में विभिन्न राजनैतिक दलों तथा जनसामान्य द्वारा की गई शिकायतों के माध्यम से देर से पता चलता है। ये घटनाएं, जिनकी संख्या, हालांकि, काफी कम होती है, फील्ड स्तर पर गलत संकेत भेजती हैं और उपर्युक्त मानदण्ड पर स्थानांतरित किए जाने के पात्र अधिकारियों के बारे में समुचित सूचना का रख-रखाव न करने को गैर-अनुपालन की कुछ इक्का-दुक्का घटनाओं के कारण के रूप में अभिचिह्नित किया गया है। भविष्य में ऐसी घटनाओं के घटने की संभावना दूर करने के लिए आयोग ने मौजूदा अनुदेश को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए निम्नलिखित निदेश जारी किए हैः-
            I.            राज्य के मुख्य  निर्वाचन अधिकारी एक रजिस्टर बनाए रखेंगे जिसमें निर्वाचन आयोग के आदेश द्वारा स्थानांतरित ऐसे भा.प्र.से./भा.पु.से. के अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों, रिटर्निंग अधिकारियों तथा निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के बारे में सूचना बनाए रखी जाएगी जिनके विरूद्ध आयोग ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की है अथवा जिन्हें निर्वाचन या निर्वाचन संबंधी कार्य में कोई गलती करने के लिए आरोपित किया गया है।
          II.            इसी प्रकार, जिला निर्वाचन अधिकारी एक रजिस्टर बनाए रखेंगे जिसमें अन्य कनिष्ठ अधिकारियों तथा अन्य स्टॉफ के बारे में सूचना रखी जाएगी।
        III.            भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्वाचनों की घोषणा के 7 दिन के भीतर, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी यह संपुष्टि करते हुए कि उपर्युक्त मानदण्ड के अंतर्गत आने वाले सभी अधिकारियों को स्थानांतरित कर दिया गया है, जोनल सेक्रेटरी को एक अनुपालन-पत्र भेजेंगे। इसी प्रकार, वह यह संपुष्टि करते हुए कि उपर्युक्त मानदण्ड के अंतर्गत आने वाले सभी अधिकारियों/स्टॉफ को गैर निर्वाचन संबंधी कार्य पर तथा जिले से बाहर स्थानांतरित कर दिया गया है, सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों से इसी प्रकार का अनुपालन प्रमाण-पत्र प्राप्त करेंगे।
        IV.            4 वर्षों में से 3 वर्ष मानदण्ड तथा गृह जिला मानदण्ड के अंतर्गत आने वाले अधिकारियों के स्थानान्तरण के संदर्भ में, जिला निर्वाचन अधिकारी रिटर्निंग अधिकारियों, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों, सहायक रिटर्निंग अधिकारियों तथा सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों एवं निर्वाचन संबंधी अन्य कर्मचारियों के संबंध में अनुपालन सुनिश्चित करेंगे एवं भारत निर्वाचन आयोग या मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा इस प्रयोजन के लिए निर्धारित समय, यदि कोई हो, के भीतर तथा यदि समय निर्धारित नहीं है तो निर्वाचनों की घोषणा वाले प्रेस नोट जारी किए जाने के 7 दिनों के भीतर मुख्य निर्वाचन अधिकारी को एक पत्र भजेंगे। 

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  22. Results of Rajya Sabha elections held on 19 June 2020, as declared by the respective Returning Officers

    Results of Rajya Sabha elections held on 19 June  2020, as declared by the respective Returning Officers
    Andhra Pradesh
    Gujarat
    Jharkhand
    Madhya Pradesh
    Manipur
    Meghalaya
    Mizoram
    Rajasthan

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  23. Deferment of process of Biennial Election to Karnataka Legislative Council by Graduates' and Teachers' Constituency - Commission's Order.

    Deferment of process of Biennial Election to Karnataka Legislative Council by Graduates' and Teachers' Constituency - Commission's Order.

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  24. Biennial Election to the Legislative Councils of UP and Bihar (Teachers' & Graduates' Constituencies)- ECI Order dated 03.04.2020

    Biennial Election to the Legislative Councils of UP and Bihar (Teachers' & Graduates' Constituencies)- ECI Order dated 03.04.2020
     

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  25. Biennial Election to the Legislative Councils of Maharashtra and Bihar (by members of Legislative assembly)- ECI Order dated 03.04.2020

    Biennial Election to the Legislative Councils of Maharashtra and Bihar (by members of Legislative assembly)- ECI Order dated 03.04.2020
     

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