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  1. श्री कमलनाथ, पूर्व सीएम, मध्य प्रदेश को आदेश

    सं.100/म.प्र.-वि.स./2020(उप.नि.)                      
    दिनांक: 26 अक्‍तूबर, 2020
    आदेश
          यत:, आयोग ने मध्‍यप्रदेश विधान सभा के चल रहे उप-निर्वाचनों के दौरान ‘राजनीतिक दलों और अभ्‍यर्थियों के मार्गदर्शन की आदर्श आचार संहिता के साधारण संचालन’ भाग-I के पैरा (2) में विनिर्दिष्‍ट उपबंधों का उल्‍लंघन करने और आयोग के पत्र सं. 437/6/अनुदेश/भा.नि.आ./ प्रकार्य/आआसं./2019, दिनांक 29 अप्रैल, 2019 द्वारा जारी परामर्शिका की अवमानना करने के लिए श्री कमल नाथ, पूर्व मुख्‍यमंत्री, मध्‍य प्रदेश को नोटिस सं. 100/म.प्र.-वि.स./2020(उप.नि.) दिनांक 21 अक्‍तूबर, 2020 जारी किया था; और
     
    2.    यत:, आयोग को उपर्युक्‍त नोटिस के लिए श्री कमलनाथ का उत्‍तर 22 अक्‍तूबर, 2020 को मिला है; और
     
    3.    यत:, श्री कमल नाथ ने अपने उपर्युक्‍त उत्‍तर में, अन्‍य बातों के साथ-साथ, निम्‍नलिखित निवेदन किया है:-
     
    (क)   मेरे लिए और मेरी पार्टी के लिए - महिलाओं का सम्‍मान करना और उनकी गरिमा बनाए रखना सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण है। कहने की आवश्‍यकता नहीं है कि मध्‍य प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री के रूप में महिलाओं के सम्‍मान का संरक्षण, उनकी सुरक्षा और गरिमा बनाए रखना मेरे प्रशासन के महत्‍वपूर्ण आधारों में से एक   था ।
    (ख)   भारत के उच्‍चतम न्‍यायालय ने अपने उल्‍लेखनीय निर्णयों में कई बार कहा है कि निर्वाचनों की गहमागहमी तत्‍क्षण कई बयान दे दिए जाते हैं। इस मामले में भी किसी महिला अथवा महिला जाति के प्रति कोई पूर्वाग्रह नहीं था और न ही उनका अनादर करने की मंशा थी। यह केवल राजनीतिक परिदृश्‍य का एक उदाहरण था, जो अत्‍यंत नाटकीय होता है।
    (ग)    किसी महिला के प्रति न तो कोई दुर्भावना थी और न ही अपमान करने की कोई मंशा। वास्‍तव में, इस घटना के अगले दिन अर्थात 19.10.2020 को मेरे द्वारा खेद व्‍यक्‍त करना और अपने कथन के बारे में स्‍पष्‍टकीकरण देना यह दर्शाता है कि आयोग की दिनांक 29.04.2019 को जारी परामर्शिका की उपेक्षा करने की मेरी कोई मंशा नहीं थी।
    (घ)    अंत में, मैं आयोग को स्‍मरण कराना चाहता हूं कि महिलाओं की गरिमा बनाए रखना, मेरे सार्वजनिक जीवन की आधारशिला है और यह मेरे 40 वर्ष से अधिक के सार्वजनिक जीवन में किए गए मेरे कार्यों और शासन में प्रतिबिंबित होता है।
    (ङ)    मैंने वर्ष 1980 से विभिन्‍न क्षमताओं में कार्य किए हैं – लोक सभा के सदस्‍य के रूप में, एक केंद्रीय मंत्री के रूप में और एक मुख्‍यमंत्री के रूप में। मुझ पर कभी भी महिलाओं या किसी के प्रति कदाचार अथवा क्रोधवश टिप्‍पणी करने का आरोप नहीं लगा है – चाहे संसद के भीतर हो अथवा संसद से बाहर।
    (च)    मुझे आशा और विश्‍वास है कि मेरे सार्वजनिक जीवन के रिकार्ड को देखते हुए निर्वाचन आयोग मेरे इस उत्‍तर से संतुष्‍ट होगा। निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान दिए गए अनर्गल बयान की वजह से किसी व्‍यक्ति के सार्व‍जनिक जिन्‍दगी के रिकार्ड को नजरांदाज नहीं किया जा सकता और न ही करना चाहिए।
    (छ)   मैं अनुरोध करता हूं कि मेरे मौजूदा उत्‍तर को ध्‍यान में रखते हुए उतराधीन नोटिस के तहत मेरे विरूद्ध आरंभ की गई कार्रवाई को कृपया समाप्‍त किया जाए।
    4.    यत:, आयोग ने इस मामले पर गंभीरता से विचार किया है और उसका मानना है कि श्री कमलनाथ ने एक महिला के लिए ‘आइटम’ शब्‍द का प्रयोग किया है और यह आयोग के पत्र सं. 437/6/अनुदेश/भा.नि.आ./प्रकार्य/आआसं./2019, दिनांक 29 अप्रैल, 2019 के तहत जारी परामर्शिका का उल्‍लंघन है।
     
    5.    अत:, अब, आयोग श्री कमलनाथ, पूर्व मुख्‍यमंत्री, मध्‍य प्रदेश को एतद्द्वारा परामर्श देता है कि सार्वजनिक बयान देते समय उन्‍हें आदर्श आचार संहिता की अवधि में इस प्रकार के शब्‍दों अथवा कथनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
     
    आदेश से, 
    (स्‍टैंडहोप युहलुंग)
    वरिष्‍ठ प्रधान सचिव
    सेवा में,
    श्री कमलनाथ,
    पूर्व मुख्‍यमंत्री, मध्‍य प्रदेश,
    शिकारपुर, तहसील मोहखेड़,
    जिला – छिंदवाड़ा, मध्‍य प्रदेश     

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  2. श्री विसाहुलाल सिंह, 87- अनूपपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी के अभ्यर्थी को नोटिस

    सं. 100/मध्य प्रदेश-वि. स./2020 (उप)/
    दिनांक:-24 अक्तूबर, 2020
     
    सेवा में
          मुख्य निर्वाचन अधिकारी,
          मध्य प्रदेश,
          भोपाल।
     
    विषय:- मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए उप-निर्वाचन, 2020- श्री विसाहुलाल सिंह, मध्य प्रदेश में बीजेपी के अभ्यर्थी को नोटिस-तत्संबंधी।
     
    महोदय,     
          मुझे श्री विसाहुलाल सिंह, 87- अनूपपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र, मध्य प्रदेश से बीजेपी के अभ्यर्थी को संबोधित नोटिस सं. 100/मध्य प्रदेश-वि. स./2020(उप), दिनांक 24.10.2020 की एक प्रति इसके साथ अग्रेषित करने का निदेश हुआ है। उपर्युक्त नोटिस केवल एक विशेष दूत या प्रोसेसर के माध्यम से श्री विसाहुलाल सिंह को तत्काल दिया जाए। संबंधित व्यक्ति से नोटिस की प्राप्ति के टोकन के रूप में एक पावती प्राप्त करके आयोग को प्रस्तुत की जाए।
     
    भवदीय
     
    हस्ता/-
    (अमित कुमार)
    अवर सचिव
         
    ******************************************** 
     
    भारत निर्वाचन आयोग
    निर्वाचन सदन, अशोक रोड, नई दिल्ली-110001
     
    सं. 100/मध्य प्रदेश – वि.स./2020-(उप)                    दिनांकः 24 अक्तूबर, 2020
     
    नोटिस
     
    यतः, आयोग द्वारा दिनांक 29 सितम्बर, 2020 को प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे.नो./67/2020 के तहत मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए उप-निर्वाचनों की घोषणा कर दी गई है और उक्त प्रेस नोट के पैरा 4 के अनुसार आदर्श आचार संहिता के प्रावधान उक्त तारीख से लागू हो गए हैं; और 
    2.    यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप-पैरा (2) में अन्य बातों के साथ-साथ, यह प्रावधान है कि दलों और अभ्यर्थियों को निजी जीवन के ऐसे सभी पहलुओं की आलोचना से बचना चाहिए, जिनका दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक कार्यकलापों से सरोकार न हो; और  
    3. यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप पैरा (5) में अन्य बातों के साथ-साथ  यह प्रावधान है कि ‘प्रत्येक व्यक्ति के शांतिपूर्ण और विघ्नरहित घरेलू जीवन के अधिकार का आदर करना चाहिए चाहे राजनैतिक दल एवं अभ्यर्थी उसके राजनैतिक विचारों या कार्यों के कितने ही विरूद्ध क्यों न हों,’ और   
    4.    यतः, आयोग ने सभी मान्यताप्राप्त राजनैतिक दलों को अपने पत्र सं. 437/6/अनु./ईसीआई/प्रका./एमसीसी/2019, दिनांक 29 अप्रैल, 2019 को परामर्शिका जारी की है कि ‘राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों को ऐसे किसी भी कार्य/कार्रवाई/कथनों से बचना चाहिए जो महिलाओं के सम्मान और गरिमा के विरूद्ध माना जाता हो; और 
    5.    यतः, आयोग ने अन्य बातों के साथ-साथ मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश से एक रिपोर्ट प्राप्त की है, जिसमें दिनांक 19 अक्तूबर, 2020 को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को संबोधित करते समय श्री विसाहुलाल सिंह 87-अनूपपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी के अभ्यर्थी ने श्री विश्वनाथ सिंह, कांग्रेस के अभ्यर्थी की पत्नी को ‘रखैल’ के रूप में संबोधित किया; और 
    6.    यतः, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश से एक रिपोर्ट मांगी गई थी जो अब तथाकथित संबोधन (अनुलग्नक-1) के अधिकृत प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) के साथ निम्नानुसार प्राप्त हुई हैः 
           "...विधानसभा के निर्वाचन का फॉर्म भरा जाता है तो पूरे सम्पति का ब्यौरा दिया जाता है, सबका ब्यौरा दिया जाता है। परन्तु विश्वनाथ सिंह (कांग्रेस प्रत्याशी) ने अपनी पहली औरत जो वर्तमान में उसका ब्यौरा नहीं दिया है कि मेरा एक ठे औरत और है जिससे शादीशुदा है, रखैल औरत का ब्यौरा दिया तो उससे पता लगाओ, तुम्हारा पुराण वाला औरत कहाँ ठे है, वोहू बताओ न मेरा दो ठो औरत है कह दे दो ठो औरत है..." 
          "जय प्रकाश अग्रवाल मेरे चलते 13 साल तक अध्यक्ष बना और 3 तारीख के बाद जो दुर्दशा मैं जय प्रकाश का करूँगा, कोई नहीं करेगा, रास्ता में लाऊंगा उसको, ऑफिस में बोल दीजियेगा, रास्ता में लाऊंगा, अपना औकात उसको समझाऊंगा.."         
    7.    यतः, श्री विसाहुलाल सिंह द्वारा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सामने दिनांक 19 अक्तूबर, 2020 को दिए गए भाषण की वीडियो क्लिप और प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) की आयोग में जांच की गई है और उनके बयान को ‘राजनैतिक दलों एवं अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन हेतु आदर्श आचार संहिता के साधारण संचालन’ के भाग I के पैरा (2) और पैरा (5) में निहित प्रावधानों का उल्लंघन करते और आयोग द्वारा अपने पत्र सं. 437/6/अनु./ईसीआई/प्रका./एमसीसी/2019, दिनांक 29 अप्रैल, 2019 के तहत जारी की गई परामर्शिका की अवहेलना करते हुए पाया गया है; और  
    8.    अब, इसलिए, आयोग आपको अवसर देता है कि आप इस नोटिस की प्राप्ति के 48 घंटों के भीतर दिए गए उपर्युक्त बयान के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करें, ऐसा न करने पर भारत निर्वाचन आयोग आपको आगे संदर्भ दिए बिना निर्णय लेगा।                                                                          
     
     आदेश से
    अनु.: उपर्युक्त अनुसार
    हस्ता/-
    (मधुसूदन गुप्ता)
    सचिव
     
     
     
     
    सेवा में
    श्री विसाहुलाल सिंह
    87-अनूपपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी अभ्यर्थी,
    मध्य प्रदेश
     

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  3. श्री मोहन यादव, मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस

    सं. 100/मध्य प्रदेश-वि. स./2020 (उप)/ 
    दिनांक:-24 अक्तूबर, 2020
     
    सेवा में
          मुख्य निर्वाचन अधिकारी,
          मध्य प्रदेश,
          भोपाल।
     
    विषय:- मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए उप-निर्वाचन, 2020- श्री मोहन यादव, मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस-तत्संबंधी।
     
    महोदय,     
          मुझे श्री मोहन यादव, मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश सरकार को संबोधित नोटिस सं. 100/मध्य प्रदेश-वि. स./2020(उप), दिनांक 24.10.2020 की एक प्रति इसके साथ अग्रेषित करने का निदेश हुआ है। उपर्युक्त नोटिस केवल एक विशेष दूत या प्रोसेसर के माध्यम से श्री मोहन यादव को तत्काल दिया जाए। संबंधित व्यक्ति से नोटिस की प्राप्ति के टोकन के रूप में एक पावती प्राप्त करके आयोग को प्रस्तुत किया जाए। 
     
    भवदीय
     
    हस्ता/-
    (अमित कुमार)
    अवर सचिव
         
         
    **********************************
     
    भारत निर्वाचन आयोग
    निर्वाचन सदन, अशोक रोड, नई दिल्ली-110001 
    सं. 100/मध्य प्रदेश–वि.स./2020-(उप)
    दिनांकः 24 अक्तूबर, 2020
     
    नोटिस 
    यतः, आयोग द्वारा दिनांक 29 सितम्बर, 2020 को प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे.नो./67/2020 के तहत मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए उप-निर्वाचनों की घोषणा कर दी गई है और उक्त प्रेस नोट के पैरा 4 के अनुसार आदर्श आचार संहिता के प्रावधान उक्त तारीख से लागू हो गए हैं; और 
    2.    यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप पैरा (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान है कि ‘किसी भी दल अथवा अभ्यर्थी को ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होना चाहिए जो विभिन्न जातियों एवं समुदायों-धार्मिक या भाषायी-के बीच मौजूदा मतभेदों को बढ़ाए या परस्पर घृणा उत्पन्न करे या तनाव पैदा करे,’ और 
    3. यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप-पैरा (2) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान है कि दलों और अभ्यर्थियों को निजी जीवन के ऐसे सभी पहलुओं की आलोचना से बचना चाहिए, जिनका दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक कार्यकलापों से सरोकार न हो; और 
    4.    यतः, आयोग ने अन्य बातों के साथ-साथ मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश से तथाकथित संबोधन (अनुलग्नक-I) के अधिकृत प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) के साथ एक रिपोर्ट प्राप्त की है जिसमें श्री मोहन यादव, मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश सरकार ने दिनांक 11 अक्तूबर, 2020 को रैली को संबोधित करने के दौरान यह कहा कि: 
           "भैया इस गांव के सरपंच को बचाओ, पूछा क्या हुआ, बोले कांग्रेस वाले निपटाने पर तूल रहे हैं। एक हों, दो हों, तीन हों, चार हों, अभी तक तो ये विधायक बने ही नहीं थे, विधायक अपने में से कई लोग बने, इसलिए होते हैं विधायक कि शिकार करें, सरपंचों का, अगर शिकार करने के लिए तुमको जरूरत हो आगर में हाट में जाओ, या जंगल में जाओ, जानवर मारो आप अपने मनुष्यों के बीच चुनावी जनप्रतिनिधियों को मारने का अगर पाप करते हो तो आपको जीने का अधिकार नहीं है ये आप रह कैसे रहे हो, हम सब प्रकार से निपटना जानते हैं, राजनीति करते हैं तो स्वाभिमान से करते हैं अच्छे के साथ अच्छा में कदम मिलाकर चलना जानते हैं। लेकिन कोई बुरा करने जायेगा तो घर से निकाल लायेंगे और जमीन में गाड़ने वाले लोग हैं"         
    5.    यतः, आपके द्वारा रैली में दिनांक 11 अक्तूबर, 2020 को दिए गए भाषण की वीडियो क्लिप के प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) की आयोग में जांच की गई है और इस बयान को ‘राजनैतिक दलों एवं अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन हेतु आदर्श आचार संहिता के साधारण संचालन’ के पैरा (1) और भाग I के पैरा (2) में निहित प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए पाया गया है; और  
    6.    अब, इसलिए, आयोग आपको अवसर देता है कि आप इस नोटिस की प्राप्ति के 48 घंटों के भीतर दिए गए उपर्युक्त बयान के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करें, ऐसा न करने पर भारत निर्वाचन आयोग आपको आगे संदर्भ दिए बिना निर्णय लेगा।
                                                                              
     
     आदेश से
    अनु.: उपर्युक्त अनुसार
    हस्ता/-
    (मधुसूदन गुप्ता)
    सचिव 
     
     
    सेवा में
    श्री मोहन यादव,
    मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग,
    मध्य प्रदेश सरकार
    मध्य प्रदेश

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  4. श्री कमल नाथ, पूर्व सीएम, मध्य प्रदेश को नोटिस

    सं. 100/मध्य प्रदेश – वि.स./2020-(उप)
    दिनांकः 21 अक्तूबर, 2020
     
    नोटिस 
    यतः, आयोग द्वारा दिनांक 29 सितम्बर, 2020 को प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे.नो./67/2020 के तहत मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए उप-निर्वाचनों की घोषणा कर दी गई है और उक्त प्रेस नोट के पैरा 4 के अनुसार आदर्श आचार संहिता के उपबंध उक्त तारीख से लागू हो गए हैं; और 
    2.     यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप पैरा (1) में यह प्रावधान है कि ‘किसी भी दल अथवा अभ्यर्थी को ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होना चाहिए जो विभिन्न जातियों एवं समुदायों-धार्मिक या भाषायी-के बीच मौजूदा मतभेदों को बढ़ाए या परस्पर घृणा उत्पन्न करे या तनाव पैदा करे,’ और 
    3.     यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप-पैरा (2) में यह अन्य बातों के साथ-साथ, यह प्रावधान है कि दलों और अभ्यर्थियों को निजी जीवन के ऐसे सभी पहलुओं की आलोचना से बचना चाहिए, जिनका दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक कार्यकलापों से सरोकार न हो; और 
    4.     यतः, आयोग ने सभी मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों को अपने पत्र सं. 437/6/अनु./ईसीआई/प्रका./एमसीसी/2019, दिनांक 29 अप्रैल, 2019 को परामर्शिका जारी की है कि ‘राजनीतिक दलों और अभ्यर्थियों को ऐसे किसी भी कार्य/कार्रवाई/कथनों से बचना चाहिए जो महिलाओं के सम्मान और गरिमा के विरूद्ध माना जाता हो; और 
    5.     यतः, आयोग ने अन्य बातों के साथ-साथ, भारतीय जनता पार्टी (एम.पी.) से दिनांक 18.10.2020 की एक शिकायत की प्रति सहित एक रिपोर्ट प्राप्त की है, जिसमें दिनांक 18 अक्तूबर, 2020 को डबरा, ग्वालियर में जन सभा को संबोधित करते समय आपने श्रीमती ईमरती देवी, बीजेपी की अभ्यर्थी को ‘आइटम’ के रूप में संबोधित किया; और 
    6.     यतः, आयोग ने अध्यक्ष, राष्ट्रीय महिला आयोग से भी शिकायत प्राप्त की है कि श्री कमल नाथ, मध्य प्रदेश विधान सभा में विपक्ष के नेता ने एक महिला मंत्री के खिलाफ “आइटम” शब्द का प्रयोग किया........ और जिम्मेदार पद पर बैठे एक व्यक्ति द्वारा ऐसे गैर-जिम्मेदाराना और अपमानजनक बयान की कड़ी निंदा की”; और 
    7.     यतः, दिनांक 18 अक्तूबर, 2020 की भारतीय जनता पार्टी की शिकायत पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश से एक रिपोर्ट मांगी गई थी, तथा उक्त को अब तथाकथित संबोधन (अनुलग्नक-1) के अधिकृत प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) के साथ निम्नानुसार प्राप्त किया गया हैः 
    “....ये उसके जैसे नहीं है। क्या है उसका नाम? मैं क्या उसका नाम लूं, आप तो उसे मुझसे ज्यादा जानते है। आपको तो मुझे पहले ही सावधान कर देना चाहिए था, यह क्या आइटम है? यह क्या आइटम है?....”  
    8.     यतः, श्री कमल नाथ द्वारा डबरा, ग्वालियर में दिनांक 18 अक्तूबर, 2020 को दिए गए भाषण की वीडियो क्लिप और प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) की आयोग में जांच की गई है और उनके बयान को ‘राजनीतिक दलों एवं अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन हेतु आदर्श आचार संहिता के साधारण संचालन’ के पैरा (2) अथवा भाग (I)  में निहित प्रावधानों का उल्लंघन करते और आयोग द्वारा अपने पत्र सं. 437/6/अनु./ईसीआई/प्रका./एमसीसी/2019, दिनांक 29 अप्रैल, 2019 के तहत जारी की गई परामर्शिका की अवहेलना करते हुए पाया गया है; और  
    9.     अब, इसलिए, आयोग आपको अवसर देता है कि आप इस नोटिस की प्राप्ति के 48 घंटों के भीतर दिए गए उपर्युक्त बयान के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करें, ऐसा न करने पर भारत निर्वाचन आयोग आपको आगे संदर्भ दिए बिना निर्णय लेगा।
                                                                                     आदेश
    अनु.: उपर्युक्त अनुसार
     
    (मधुसूदन गुप्ता)
    सचिव
    सेवा में
          श्री कमल नाथ
           पूर्व-मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश
           शिकारपुर, तहसील मोहखेड़,
           जिला-छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश

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  5. मतदाता शिक्षा और जागरूकता पर सर्वोत्तम प्रचार अभियान हेतु राष्ट्रीय मीडिया पुरस्कार-2020

    सं. 491/मीडिया पुरस्कार/2020(संचार)
    दिनांक: 20 अक्तूबर, 2020
     
    ज्ञापन 
    मतदाता शिक्षा और जागरूकता पर सर्वोत्तम प्रचार अभियान हेतु राष्ट्रीय मीडिया पुरस्कार-2020 
           भारत निर्वाचन आयोग वर्ष-2020 के दौरान मतदाता शिक्षा और जागरूकता पर सर्वोत्तम प्रचार अभियान हेतु राष्ट्रीय मीडिया पुरस्कार के लिए मीडिया घरानों से प्रविष्टियां आमंत्रित करता है। इसके लिए चार पुरस्कार होंगे- प्रिंट मीडिया, टेलीविजन, (इलेक्ट्रॉनिक) रेडियो (इलेक्ट्रॉनिक) तथा ऑनलाइन (इंटरनेट) सोशल मीडिया में से प्रत्‍येक के लिए एक।
          ये पुरस्कार सुगम निर्वाचनों के बारे में लोगों को जागरूक करके, निर्वाचन प्रक्रिया के बारे में लोगों को शिक्षित करके तथा मतदान और पंजीकरण के महत्व और उनकी संगतता के बारे में जन-साधारण के बीच जागरूकता बढ़ा करके निर्वाचक सहभागिता को बढ़ावा देने में मीडिया घरानों के उत्कृष्ट योगदान की पहचान करने के लिए हैं।
          ये पुरस्कार प्रशस्ति-पत्र और फलक के रूप में होंगे और राष्ट्रीय मतदाता दिवस (25 जनवरी, 2021) पर समारोह में प्रदान किए जाएंगे।
    मानदंड
    जूरी निम्नलिखित मानदंडों को अपने मूल्यांकन का आधार बनाएगीः
    मतदाता जागरूकता अभियान की गुणवत्ता कवरेज/मात्रा का विस्तार आम जनता पर प्रभाव के साक्ष्य कोई अन्य सुसंगत कारक प्रविष्टि की शर्तें
          सुसंगत अवधि के दौरान प्रविष्टियों को अवश्य ही प्रकाशित या प्रसारित किया गया हो।
    प्रिंट प्रविष्टियों में निम्नलिखित अवश्य शामिल होने चाहिएः
    सुसंगत अवधि के दौरान किए गए कार्य का सार-विवरण जिसमें निम्न शामिल होने चाहिएः समाचार मदों/लेखों की संख्या वर्ग से.मी. में कुल मुद्रित स्थान पी डी एफ सॉफ्ट कॉपी अथवा संबंधित वेब एड्रेस का लिंक या समाचार पत्र/लेख की पूर्ण आकार फोटो प्रति/मुद्रित प्रति प्रत्यक्ष सार्वजनिक सम्बद्धता इत्यादि जैसे किसी अन्य क्रियाकलापों के ब्योरे अन्य कोई सूचना रेडियो (इलेक्ट्रॉनिक) या टेलीविजन प्रसारण (इलेक्ट्रॉनिक) संबंधी प्रविष्टियों में निम्नलिखित अवश्य शामिल होने चाहिएः
    1.       सुसंगत अवधि के दौरान किए गए प्रचार अभियान/कार्य पर विवरण जिसमें निम्नलिखित शामिल होने चाहिएः
    (i)             रेडियो प्रसारण/टेली प्रसारण की आवृत्ति और कालावधि सहित सामग्री (सी डी या डी वी डी या पेन ड्राइव में) तथा कालावधि के दौरान प्रत्येक स्पॉट के ऐसे प्रसारण का कुल समय
    (ii)           सभी स्पॉटस समाचार हेतु कुल प्रसारण समय का योग
    (iii)         कालावधि, रेडियो प्रसारण/टेली प्रसारण तारीख तथा समय और आवृत्ति सहित सी डी या डी वी डी या पेन ड्राइव अथवा अन्य डिजीटल मीडिया में मतदाता जागरूकता पर कार्यक्रम या समाचार लेख
    2.       प्रत्यक्ष सार्वजनिक सम्बद्धता इत्यादि जैसे अन्य क्रिया कलाप
    3.       अन्य कोई सूचना
    ऑनलाइन (इंटरनेट) सोशल मीडिया प्रविष्टियों में निम्नलिखित अवश्‍य शामिल होने चाहिए :
    1.      सुसंगत अवधि के दौरान किए गए कार्य का सार-विवरण जिसमें पोस्‍ट/ब्‍लाग/प्रचार/ट्वीट/लेख आदि की संख्‍या शामिल होनी चाहिए
    2.      संबंधित लेख की पीडीएफ सॉफ्ट कॉपी या संबंधित वेब एड्रेस का लिंक
    3.      प्रत्यक्ष सार्वजनिक सम्बद्धता इत्यादि जैसे किसी अन्य क्रियाकलाप के ब्योरे
    4.      अन्‍य कोई सूचना
    महत्वपूर्ण
    अंग्रेजी/हिन्दी से इतर अन्य किसी भाषा में प्रस्तुत प्रविष्टियों के साथ अंग्रेजी अनुवाद संलग्न करना अपेक्षित होगा। प्रसारण सामग्री प्रस्तुत करने वाले प्रतिस्पर्धी को इस बात से अवगत होना चाहिए कि जूरी फीचर/कार्यक्रम के केवल प्रथम 10 मिनट का ही उपयोग कर सकती है। आयोग का निर्णय अंतिम होगा तथा कोई भी पत्र-व्यवहार नहीं किया जाएगा। इस संबंध में सभी अधिकार आयोग के पास सुरक्षित रहेंगे। प्रविष्टियों में मीडिया घराने का नाम, पता, टेलीफोन और फैक्स नंबर तथा ई-मेल होने चाहिए। अन्तिम तिथिः प्रविष्टियां निम्नलिखित पते पर 20 नवंबर, 2020 को या उससे पहले अवश्य पहुंच जानी चाहिए।
      श्री पवन दीवान,
    अवर सचिव (संचार)
    भारत निर्वाचन आयोग,
    निर्वाचन सदन, अशोक रोड,
    नई दिल्ली – 110001
    ई मेल- media.election.eci.@gmail.com
               Pawandiwan@eci.gov.in
    दूरभाषः 011-23052133

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  6. मणिपुर विधान सभा के लिए उप-निर्वाचन में मतदान दिवस को और मतदान दिवस से एक दिन पहले प्रिंट मीडिया में राजनैतिक विज्ञापनों का पूर्व-प्रमाणन-तत्संबंधी।

    सं. 491/एमसीएमसी/2020/संचार
    दिनांकः 19 अक्तूबर, 2020
     
    सेवा में
    मुख्य निर्वाचन अधिकारी
    मणिपुर, इम्फाल
     
    विषयः       मणिपुर विधान सभा के लिए उप-निर्वाचन में मतदान दिवस को और मतदान दिवस से एक दिन पहले प्रिंट मीडिया में राजनैतिक विज्ञापनों का पूर्व-प्रमाणन-तत्संबंधी। 
    महोदय, 
    मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि विगत में प्रिंट मीडिया में प्रकाशित अपमानजनक और भ्रामक प्रकृति के विज्ञापनों संबंधी घटनाएं आयोग के ध्यान में लाई गई हैं। निर्वाचनों के अंतिम चरण में ऐसे विज्ञापन, सम्पूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया को दूषित करते हैं। ऐसे मामलों में प्रभावित अभ्यर्थियों और दलों के पास स्पष्टीकरण देने/खंडन करने संबंधी कोई भी अवसर नहीं होता है। 
    2.    यह सुनिश्चित करने कि ऐसे उत्तेजक, भ्रामक और घृणापूर्ण विज्ञापनों के कारण कोई अप्रिय घटना न घटित हो और ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं, के लिए आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के अधीन अपनी शक्तियों और इस प्रयोजनार्थ इसे सक्षम बनाने वाली अन्य सभी शक्तियों का प्रयोग करते हुए एतद्द्वारा निदेश देता है कि प्रिंट मीडिया में राजनैतिक दलों या अभ्यर्थियों या किसी अन्य संगठन या व्यक्ति द्वारा मतदान दिवस पर और सभी चरणों में मतदान दिवस से एक दिन पूर्व अर्थात दिनांक 6 एवं 7 नवम्बर, 2020 को तब तक कोई भी विज्ञापन प्रकाशित नहीं करवाया जाएगा, जब तक कि राजनैतिक दलों, अभ्यर्थियों आदि द्वारा प्रकाशन के लिए प्रस्तावित विज्ञापन की सामग्री को आपके राज्य में राज्य/जिला स्तर पर, जैसा भी मामला हो, एमसीएमसी समिति से पूर्व प्रमाणित न कराया गया हो। 
    3.    इसके अतिरिक्त यह भी निदेश दिया जाता है कि उपर्युक्त निदेशानुसार और समाचार पत्र में विज्ञापनों के पूर्व प्रमाणन की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए, राज्य/जिला स्तर पर एमसीएमसी को तत्काल सचेत (एलर्ट) और क्रियाशील कर दिया जाए ताकि राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों तथा अन्य से प्राप्त ऐसे सभी विज्ञापनों का पूर्व-प्रमाणन और जांच की जा सके। यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि एमसीएमसी द्वारा अविलम्ब निर्णय लिया जाए। 
    4.    आयोग के उपर्युक्त निदेशों को राज्य के सभी राजनैतिक दलों के अध्यक्षों, निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों तथा समाचार पत्रों के ध्यान में लाया जाए तथा सामान्य सूचनार्थ और कड़े अनुपालन हेतु जन-संचार की सभी प्रकार की मीडिया में इसका व्यापक प्रचार भी किया जाए। 
    5.    ये निदेश तत्काल प्रभावी होंगे। 
    6.    इस संबंध में जारी किए गए अनुदेशों की एक प्रति तत्काल आयोग को भी पृष्ठांकित की जाए। 
     
    भवदीय 
    (प्रमोद कुमार शर्मा)
    सचिव

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  7. Pre-certification of Political Advertisements in Print Media on the day of poll & one day prior to poll in Bye-elections - regarding.

    Pre-certification of Political Advertisements in Print Media on the day of poll & one day prior to poll in Bye-elections - regarding.
    Letter to the CEOs of Chhattisgarh, Gujarat, Haryana, Jharkhand, Karnataka, Madhya Pradesh, Nagaland, Odisha, Telangana and Uttar Pradesh.

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  8. बिहार राज्य के विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचन एवं राज्य के 1-वाल्मीकिनगर संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र के लिए उप-निर्वाचन, 2020 मतदान दिवस को और मतदान दिवस से एक दिन पहले प्रिंट मीडिया में राजनैतिक विज्ञापनों का पूर्व-प्रमाणन-तत्संबंधी।

    सं. 491/एमसीएमसी/2020/संचार                                
    दिनांकः 19 अक्तूबर, 2020
     
    सेवा में
    मुख्य निर्वाचन अधिकारी, 
    बिहार, पटना।
     
    विषयः        बिहार राज्य के विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचन एवं राज्य के 1-वाल्मीकिनगर संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र के लिए उप-निर्वाचन, 2020 मतदान दिवस को और मतदान दिवस से एक दिन पहले प्रिंट मीडिया में राजनैतिक विज्ञापनों का पूर्व-प्रमाणन-तत्संबंधी।
     
    महोदय, 
    मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि प्रिंट मीडिया में प्रकाशित अपमानजनक और भ्रामक प्रकृति के विज्ञापनों संबंधी घटनाएं विगत में आयोग के ध्यान में लाई गई हैं। निर्वाचनों के अंतिम चरण में ऐसे विज्ञापन, सम्पूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया को दूषित करते हैं। ऐसे मामलों में प्रभावित अभ्यर्थियों और दलों के पास स्पष्टीकरण देने/खंडन करने संबंधी कोई भी अवसर नहीं होता है। 
    2.     ऐसे उत्तेजक, भ्रामक और घृणापूर्ण विज्ञापनों के कारण कोई अप्रिय घटना न घटित हो और ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं, इसके लिए आयोग, संविधान के अनुच्छेद 324 के अधीन इसकी शक्तियों और इस हेतु इसे सक्षम बनाने वाली अन्य सभी शक्तियों का प्रयोग करते हुए एतद्द्वारा निदेश देता है कि प्रिंट मीडिया में राजनैतिक दलों या अभ्यर्थियों या किसी अन्य संगठन या व्यक्ति द्वारा मतदान दिवस पर और सभी चरणों में मतदान दिवस से एक दिन पूर्व, तब तक कोई भी विज्ञापन प्रकाशित नहीं किया जाएगा जब तक कि प्रकाशन के लिए प्रस्तावित विज्ञापन की सामग्री को राज्य/जिला स्तर पर, जैसा भी मामला हो, एमसीएमसी समिति से राजनैतिक दलों, अभ्यर्थियों आदि द्वारा पूर्व प्रमाणित न कराया गया हो। यह नीचे दिए गए चरणों में राज्य में प्रचलन में प्रिंट मीडिया में प्रकाशित होने वाले राजनैतिक विज्ञापनों के मामले में लागू होगाः
    चरण तथा मतदान की तारीख
    प्रतिबंधित दिवस (मतदान दिवस एवं मतदान दिवस से एक दिन पूर्व)
    प्रथम चरण - 28 अक्तूबर, 2020
    27 एवं 28 अक्तूबर, 2020
    द्वितीय चरण – 3 नवम्बर, 2020
    2 एवं 3 नवम्बर, 2020
    साधारण निर्वाचन का तीसरा चरण एवं 1-वाल्मीकिनगर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के लिए उप-निर्वाचन–7 नवम्बर, 2020
    6 एवं 7 नवम्बर, 2020 
     
     
    3.     इसके अतिरिक्त यह भी निदेश दिया जाता है कि उपर्युक्त निदेशानुसार और समाचार पत्र विज्ञापनों के पूर्व प्रमाणन की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए, राज्य/जिला स्तर पर एमसीएमसी को तत्काल एलर्ट और क्रियाशील कर दिया जाए ताकि राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों तथा अन्य से प्राप्त ऐसे सभी विज्ञापनों का पूर्व-प्रमाणन और जांच की जा सके। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि एमसीएमसी द्वारा अविलम्ब निर्णय दिया जाए। 
    4.     आयोग के उपर्युक्त निदेशों को राज्य के सभी राजनैतिक दलों के अध्यक्षों, निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों तथा समाचार पत्रों के ध्यान में लाया जाए तथा सामान्य सूचनार्थ और कड़े अनुपालन हेतु जन-संचार की सभी प्रकार की मीडिया में इसका व्यापक प्रचार भी किया जाए। 
    5.     ये निदेश तत्काल प्रभावी होंगे। 
    6.     इस संबंध में जारी किए गए अनुदेशों की एक प्रति तत्काल आयोग को भी पृष्ठांकित की जाए। 
     
    भवदीय
     
    (प्रमोद कुमार शर्मा)
    सचिव

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  9. Media Coverage during the period referred to in Section 126A of RP Act, 1951 – violations – regarding.

    Media Coverage during the period referred to in Section 126A of RP Act, 1951 – violations – regarding.
     

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  10. वैश्विक महामारी की अवधि के दौरान आयोजित निर्वाचनों के लिए स्टार प्रचारकों हेतु संशोधित दिशानिर्देश–तत्संबंधी।  

    सं. 464/एसओपी/2020/ईपीएस
    दिनांकः 07.10.2020
                
    सेवा में
          सभी राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों के
          मुख्य निर्वाचन अधिकारी
     
    विषयः वैश्विक महामारी की अवधि के दौरान आयोजित निर्वाचनों के लिए स्टार प्रचारकों हेतु संशोधित दिशानिर्देश–तत्संबंधी।  
    महोदय/महोदया,
                भारत निर्वाचन आयोग ने दिनांक 25.09.2020 को बिहार राज्य की विधान सभा के साधारण निर्वाचनों (प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रेस नोट/64/2020) और दिनांक 29.09.2020 और 05.10.2020 को विभिन्न राज्यों के उप-निर्वाचनों के संचालन हेतु कार्यक्रम की घोषणा की है।                              
    2. पुन: सूचित किया जाता है कि निर्वाचन आयोग ने दिनांक 21.08.2020 को राजनैतिक दलों और राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से जानकारी प्राप्‍त करने के उपरांत कोविड-19 की अवधि के दौरान निर्वाचनों के संचालन के लिए मानक नियत करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए थे। इन दिशा-निर्देशों को व्यापक स्तर पर परिचलित किया गया था और ये https://eci.gov.in/files/file/12167-broad-guidelines-for-conduct-of-general-electionbye-election-during-covid-19/ पर उपलब्ध हैं। 
    3. बिहार राज्य के साधारण निर्वाचनों के लिए तैयारियों की समीक्षा करने हेतु, दिनांक 29.09.2020 से 01.10.2020 तक अपने बिहार दौरों के दौरान आयोग ने, राष्ट्रीय एवं राज्यीय राजनैतिक दलों के साथ आरंभ करते हुए (दिनांक 30.09.2020 पूर्वाह्न 10:00 बजे से अपराह्न 12:00 बजे तक); मुख्य सचिव, एसीएस (गृह), डीजीपी; मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारियों तथा पुलिस अधीक्षकों (एसपी) इत्यादि सहित राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत परामर्श किया। आयोग को सूचित किया गया था कि जिला प्राधिकारियों ने निर्वाचन अभियान के लिए स्थान की पहचान करने के कार्य को पूरा कर लिया है एवं इसे जन-सभा के लिए इंगित करने की प्रक्रिया चल रही है, कोविड संबंधी सुरक्षात्मक मानदंडों को ध्यान में रखते हुए, प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में एवं आयोग द्वारा यथानिदेशित, अब इन सारी सूचनाओं को मुख्य निर्वाचन अधिकारी, बिहार द्वारा इन निर्वाचनों के दौरान अभियान के प्रयोजन से मीडिया के माध्यम से उपलब्ध कराया गया है। जिन निर्वाचन क्षेत्रों में उप-निर्वाचन आयोजित होने हैं, वहां भी निर्वाचन प्राधिकारियों द्वारा निर्वाचन क्षेत्रों में, ऐसी ही कवायद की गई है। पूर्व में, आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बिहार का दौरा किया और पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर एवं गया में दिनांक 14.09.2020 और 15.09.2020 को निर्वाचन संबंधी तैयारियों की समीक्षा की। इसके अलावा, आयोग और इसके अधिकारियों ने राज्य का दौरा करने से पहले मुख्य निर्वाचन अधिकारी, बिहार एवं जिला निर्वाचन अधिकारियों तथा पुलिस अधीक्षकों के साथ अनेक वर्चुअल बैठकें की।
    4. बिहार का दौरा करने के दौरान आयोग को स्टार प्रचारकों के आने पर भारी जनसमूह उमड़ने के संबंध में भी सूचित किया गया था। दिनांक 01.10.2020 को अपराह्न 5 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, इस प्रकार के दौरों के दौरान, विशेषतः हेलीकॉप्टरों, इत्यादि की लैंडिंग के दौरान भारी भीड़ जुटने के कारण संभावित स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बारे में स्पष्टीकरण मांगा गया था। इस मामले पर आयोग में आज और विचार-विमर्श किया गया। सभी तथ्यों और वैश्विक महामारी के कारण पैदा हो रहीं परिस्थितियों पर विचार करने के बाद और राजनैतिक दलों द्वारा प्रचार अभियान की आवश्यकता के बीच संतुलन बनाए रखते हुए आयोग ने स्टार प्रचारकों के मानदंडों को संशोधित करने का निर्णय लिया है। 
    5. उपर्युक्त को देखते हुए, कोविड-19 के दौरान स्वतंत्र, निष्पक्ष, शांतिपूर्ण, पारदर्शी, नैतिक और सुरक्षित निर्वाचनों का संचालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोग ने एतद्द्वारा वैश्विक महामारी कोविड-19 की अवधि के दौरान सभी प्रगतिरत और भावी निर्वाचनों के लिए स्टार प्रचारकों से संबंधित मानदंडों में निम्नलिखित तरीके से संशोधन किए हैं:  
    1) वैश्विक महामारी की अवधि के दौरान मान्यताप्राप्त राष्ट्रीय/राज्यीय राजनैतिक दलों के लिए स्टार प्रचारकों की अधिकतम सीमा संख्या 40 के स्थान पर 30 होगी और गैर-मान्यताप्राप्त पंजीकृत राजनैतिक दलों के लिए यह संख्या 20 के स्थान पर 15 होगी।
    2) तद्नुसार, स्टार प्रचारकों की सूची जमा कराने की अवधि अधिसूचना की तारीख से 7 दिन से बढ़ाकर 10 दिन कर दी गई है। जिन राजनैतिक दलों, ने स्टार प्रचारकों की सूची पहले ही जमा करा दी है, वे निर्धारित अवधि के भीतर फिर से संशोधित सूची जमा कराएंगे।
    3) स्टार प्रचारकों द्वारा प्रचार करने की अनुमति लेने का अनुरोध, प्रचार शुरू करने से कम से कम 48 घंटे पहले जिला निर्वाचन प्राधिकारियों को भेजा जाएगा ताकि सभी संबंधित स्टेकहोल्डरों द्वारा समयपूर्वक सभी प्रकार के आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जा सकें। 
    6. आपको निदेश दिया जाता है कि मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करें और सभी राष्‍ट्रीय/राज्‍यीय/अन्‍य पंजीकृत राजनैतिक दलों को सूचित करें। 
    ये संशोधित मानदंड तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।

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  11. Postal Ballot facility for Sr. Citizen (above 80 years) and PwD electors- regarding.

    सं. 52/2020/एसडीआर/खंड-।/.
    दिनांक: 03 अक्तूबर, 2020
     
    सेवा में
          सभी राज्‍यों/संघ शासित प्रदेशों के
          मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी 
    विषय: वरिष्‍ठ नागरिक (80 वर्ष से अधिक) एवं दिव्यांग (पी.डब्‍ल्‍यूडी.) निर्वाचकों के लिए डाक मतपत्र की सुविधा-तत्‍संबंधी।  
    संदर्भ: भारत निर्वाचन आयोग का दिनांक 17/09/2020 का पत्र सं. 52/2020/एसडीआर/खंड-।/278
     
    महोदय/महोदया, 
          दिनांक 29 सितंबर, 2020 से 01 अक्‍टूबर, 2020 तक निर्वाचन संबंधी तैयारियों की समीक्षा करने के लिए बिहार का दौरा करने के दौरान, उपर्युक्‍त विषय पर सिविल सोसाइटियों और मीडिया से फीडबैक मिलने के उपरांत आयोग ने निम्नानुसार अनुदेशों को जारी करने का निदेश दिया है:  
    (1.)   मतदान केंद्र क्षेत्र में आरओ द्वारा यथा उपलब्‍ध कराए गए बीएलओ, संबंधित निर्वाचकों के घरों का दौरा करेंगे और संबंधित निर्वाचकों को प्रपत्र-12-घ देंगे। यदि कोई निर्वाचक उपलब्ध नहीं है, तो वह अपना संपर्क विवरण साझा करेगा और अधिसूचना के पांच दिनों के अंदर उसे लेने के लिए दोबारा जाएगा।
    (2.)   निर्वाचक प्रपत्र 12-घ के साथ संलग्‍न पावती में डाक मतपत्र का विकल्‍प देगा या नहीं देगा।
    (3.)   यदि निर्वाचक डाक मतपत्र का विकल्‍प देता है, तो बीएलओ अधिसूचना के पांच दिनों के अंदर पूर्णत: भरे हुए प्रपत्र 12-घ को निर्वाचक के घर से प्राप्‍त करेगा और उसे तत्काल आरओ के पास जमा करेगा।
    (4.)   बीएलओ प्रपत्र 12-घ के साथ संलग्‍न सभी पावती प्रपत्रों को आरओ के पास जमा कराएगा।
    (5.)   आरओ के संपूर्ण पर्यवेक्षण में सेक्‍टर अधिकारी इसकी देखरेख करेंगे।
    (6.)   भारत निर्वाचन आयोग के दिनांक 17.09.2020 के दिशा-निर्देश सं. 52/2020/एसडीआर/खंड-।/278, में यथा-विहित आरओ मतदान दल (दलों) तैनात करेंगे, जो पूर्व नियत तिथि के अनुसार डाक मतपत्र वितरित एवं संग्रहित करेंगे तथा तत्पश्चात इन्हें आरओ के पास जमा कराएंगे।  
    2. तदनुसार, मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी, बिहार ने पत्र सं. बी1-3-82/2020-3780 दिनांक 02 अक्‍टूबर, 2020 के तहत वरिष्‍ठ नागरिक (80 वर्ष से अधिक) एवं दिव्यांगजन (पीडब्‍ल्‍यूडी) की श्रेणियों में निर्वाचकों, जो बिहार में डाक मतपत्र के लिए विकल्‍प का चयन कर सकते हैं, से बूथ स्‍तरीय अधिकारियों द्वारा, प्रपत्र 12-घ के वितरण तथा संग्रहण हेतु अनुदेश जारी किए हैं। संदर्भ हेतु एक प्रति इसके साथ संलग्‍न है।  
    3.  आयोग ने निदेश दिया है कि अब से सभी निर्वाचनों/उप-निर्वाचनों, जिसमें आयोग द्वारा दिनांक 29/09/2020 को पूर्व में घोषित उप-निर्वाचन भी शामिल हैं, में पूरे भारत में निर्वाचकों के घर तक डाक मतपत्र के विकल्‍प से संबंधित सभी गतिविधियों की सुविधा पहुंचाने के लिए इन अनुदेशों का पालन किया जाएगा। तदनुसार, आपसे अनुरोध है कि अनुपालन हेतु सभी आवश्‍यक उपाय करें।

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  12. Bye-elections-Instruction on enforcement of Model Code of Conduct

    सं.: 437/6/1/ईसीआई/अनुदेश/प्रकार्या/एमसीसी/2020
    दिनांक: 29 सितम्बर, 2020
     
    सेवा में
     1.       मत्रिमंडल सचिव, भारत सरकार, राष्‍ट्रपति भवन, नई दिल्‍ली।
    निम्‍नलिखित सरकारों के मुख्‍य सचिव:-
    क) बिहार, पटना;    छ) मध्य प्रदेश, भोपाल;
    ख) छत्तीसगढ़, रायपुर;   ज) मणिपुर, इम्फाल;
    ग) गुजरात, गांधीनगर;   झ) नागालैंड, कोहिमा;
    घ) हरियाणा, चंडीगढ़;   ञ) ओडिशा, भुवनेश्वर;
    ङ) झारखंड, रांची;    ट) तेलंगाना, हैदराबाद;
    च) कर्नाटक, बेंगलूरू;   ठ) उत्तर प्रदेश, लखनऊ    
    3.   मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी:-
    क) बिहार, पटना;      छ) मध्य प्रदेश, भोपाल;
    ख) छत्तीसगढ़, रायपुर;    ज) मणिपुर, इम्फाल;
    ग) गुजरात, गांधीनगर;     झ) नागालैंड, कोहिमा;
    घ) हरियाणा, चंडीगढ़;     ञ) ओडिशा, भुवनेश्वर;
    ङ) झारखंड, रांची;      ट) तेलंगाना, हैदराबाद;
     च) कर्नाटक, बेंगलूरू;    ठ) उत्तर प्रदेश, लखनऊ
       
    विषयः बिहार के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र और भिन्न राज्यों की राज्य विधान सभाओं में आकस्मिक
    रिक्तियों को भरने के लिए उप-निर्वाचन - आदर्श आचार संहिता के प्रवर्तन के संबंध में अनुदेश - तत्संबंधी।
    महोदय,
    मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि आयोग ने प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रेस नोट/67/2020, दिनांक 29 सितम्बर, 2020 के तहत विभिन्न राज्यों के निम्नलिखित संसदीय/विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में आकस्मिक रिक्तियों को भरने हेतु उप-निर्वाचनों की अनुसूची की घोषणा की हैः- 
    राज्य का नाम
    निर्वाचन क्षेत्र का नाम एवं संख्या
    बिहार
    1-वाल्मीकिनगर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र
    छत्तीसगढ़
    24-मरवाही (अ.ज.जा.) विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र
    गुजरात
    01-अबडासा विधान निर्वाचन क्षेत्र
    61-लींबडी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    65-मोरबी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    94-धारी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    106-गढडा (अ.जा.) विधान निर्वाचन क्षेत्र
    147-करजण विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    173-डांग (अ.ज.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    181-कपराडा (अ.ज.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    हरियाणा
    33-बरोदा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    झारखंड
    10-दुमका (अ.ज.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    35-बेरमो विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    कर्नाटक
    136-सिरा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    154-राजाराजेश्वरीनगर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    मध्य प्रदेश
    04-जौरा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    05-सुमावली विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    06-मुरैना विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    07-दिमनी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    08-अम्बाह (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    12-मेहगांव विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    13-गोहद (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    15-ग्वालियर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    16-ग्वालियर (पूर्व) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    19-डबरा (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    21-भाण्डेर (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    23-करेरा (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    24-पोहरी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    28-बामोरी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    32-अशोकनगर (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    34-मुंगावली विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    37-सुरखी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    53-मलहरा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    87-अनूपपुर (अ.ज.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    142-सांची (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    161-ब्यावरा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    166-आगर (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    172-हाटपिपल्या विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    175-मांधाता विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    179-नेपानगर (अ.ज.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    202-बदनावर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    211-सांवेर (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    226-सुवासरा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    मणिपुर
    30-लिलोंग विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    34-वाँग्जिंग टेन्‍था विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    नागालैंड
    14-दक्षिणी अंगामी-I (अ.ज.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    60-पुंगरो-किफिरे (अ.ज.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    ओडिशा
    38-बालासौर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    102-तिरतोल (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    तेलंगाना
    41-डुब्बक विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    उत्तर प्रदेश
    40-नौगावां सादात विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    65-बुलंदशहर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    95-टूण्डला (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    162-बांगरमऊ विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    218-घाटमपुर (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    337-देवरिया विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    367-मल्हनी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    2.     आदर्श आचार सहिंता के उपबंध, आयोग द्वारा जारी पत्र सं. 437/6/अनुदेश/2016-सीसीएस दिनांक 29 जून, 2017 और सं. 437/6/विविध/ईसीआई/पत्र/प्रकार्य/एमसीसी/2017 दिनांक 18 जनवरी, 2018 (प्रतियां संलग्न) के आंशिक आशोधन के अध्यधीन, उस जिले (जिलों) में तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं जिनमें उप निर्वाचन होने वाले संसदीय/विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र का संपूर्ण अथवा कोई भाग सम्मिलित है।
    3.     इसे कृपया सभी संबंधितों के ध्यान में लाएं।

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  13. उप निर्वाचन - सांसद/विधायक स्‍थानीय क्षेत्र विकास योजना के अधीन निधियाँ जारी करना।

    सं.: 437/6/1/ईसीआई/अनुदेश/प्रकार्या/एमसीसी/2020                                    दिनांक: 29 सितम्बर, 2020
     
    सेवा में
     
    1. मत्रिमंडल सचिव, भारत सरकार, राष्‍ट्रपति भवन, नई दिल्‍ली।
    2.  सचिव, भारत सरकार, कार्यक्रम कार्यान्‍वयन विभाग, सरदार पटेल भवन, नई दिल्‍ली।
    3.  निम्‍नलिखित सरकारों के मुख्‍य सचिव:-
    क) बिहार, पटना;    छ) मध्य प्रदेश, भोपाल;
    ख) छत्तीसगढ़, रायपुर;   ज) मणिपुर, इम्फाल;
    ग) गुजरात, गांधीनगर;    झ) नागालैंड, कोहिमा;
    घ) हरियाणा, चंडीगढ़;  ञ) ओडिशा, भुवनेश्वर;
    ङ) झारखंड, रांची;      ट) तेलंगाना, हैदराबाद;
    च) कर्नाटक, बेंगलूरू;     ठ) उत्तर प्रदेश, लखनऊ    
    4.   मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी
    क) बिहार, पटना;   छ) मध्य प्रदेश, भोपाल;
    ख) छत्तीसगढ़, रायपुर;    ज) मणिपुर, इम्फाल;
    ग) गुजरात, गांधीनगर;  झ) नागालैंड, कोहिमा;
    घ) हरियाणा, चंडीगढ़; ञ) ओडिशा, भुवनेश्वर;
    ङ) झारखंड, रांची;   ट) तेलंगाना, हैदराबाद;
    च) कर्नाटक, बेंगलूरू;   ठ) उत्तर प्रदेश, लखनऊ          
    विषय:       उप निर्वाचन - सांसद/विधायक स्‍थानीय क्षेत्र विकास योजना के अधीन निधियाँ जारी करना।
    महोदय,
    मुझे, आयोग के दिनांक 29 सितम्बर, 2020 के प्रेस नोट (आयोग की वेबसाइट “http://eci.gov.in/” पर उपलब्‍ध), जिसके द्वारा बिहार के संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र में तथा विभिन्न राज्‍यों की विधान सभाओं में आकस्मिक रिक्तियों को भरने हेतु उप-निर्वाचनों की अनुसूची की घोषणा की गई है, के संदर्भ में यह कहने का निदेश हुआ है कि उप निर्वाचनों की इस घोषणा के परिणामस्‍वरूप राजनीतिक दलों तथा अभ्‍यर्थियों के मार्ग-दर्शन के लिए आर्दश आचार संहिता के प्रावधान तत्‍काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।   
    2.     संसद सदस्‍य स्‍थानीय क्षेत्र विकास योजना के अधीन निधियों को जारी किए जाने संबंधी मामले पर कार्रवाई उप-निर्वाचन के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू करने के संबंध में आयोग के  दिनांक 29 जून, 2017 के पत्र सं.437/6/अनुदेश/2016-सीसीएस के अनुसरण में की जाएगी, जो अन्‍य बातों के साथ-साथ यह उप‍बन्धित करता है कि-      
    (क)  संसद सदस्‍य (राज्‍य सभा सदस्‍यों सहित) स्‍थानीय क्षेत्र विकास योजना निधि के अधीन जिले (जिलों) के किसी भी भाग में जहां पर वह विधान सभा/संसदीय निर्वाचन क्षेत्र स्थित है, जहाँ निर्वाचन चल रहे हैं, में निर्वाचन प्रक्रिया के समाप्‍त होने तक कोई भी नई निधि जारी नहीं की जाएगी। यदि संबंधित निर्वाचन क्षेत्र राज्‍य की राजधानी/महानगरों/नगर निगमों के अधीन आता है तो उपरोक्‍त अनुदेश केवल संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में ही लागू होंगे। इसी प्रकार से, विधान सभा सदस्‍य/विधान परिषद सदस्‍य स्‍थानीय क्षेत्र विकास योजना निधि के अंतर्गत, यदि कोई ऐसी योजना संचालन में है तो निर्वाचन प्रक्रिया के समाप्‍त होने तक कोई भी नई निधि जारी नहीं की जाएगी।
    (ख)  इस पत्र के जारी होने से पूर्व, जिन कार्यों के संबंध में कार्य आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं परंतु वास्तव में उस क्षेत्र में उन पर कार्य शुरू नहीं किया गया है, ऐसा कोई कार्य शुरू नहीं किया जाएगा। ये कार्य केवल निर्वाचन प्रक्रिया की समाप्ति पर ही शुरू किए जा सकते हैं। हालांकि, यदि कोई कार्य वास्‍तव में शुरू कर दिया गया है तो उसे जारी रखा जा सकता है।
    (ग)  संबंधित अधिकारियों की पूर्ण संतुष्टि के अध्‍यधीन पूरे किए गए कार्य(र्यों) के लिए भुगतान करने पर कोई प्रतिबन्‍ध नहीं होगा।
    (घ)  जहां योजनाओं को स्‍वीकृति दी जा चुकी है एवं निधियाँ उपलब्‍ध करवा दी गई हों या जारी कर दी गई हों और जहां सामग्री प्राप्‍त कर ली गई हो और उसे कार्यस्‍थल पर पहुंचा दिया गया हो, तो ऐसी योजनाओं को कार्यक्रम के अनुसार निष्‍पादित किया जा सकता है।        

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  14. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 60 (ग) के अंतर्गत निर्वाचन आयोग की अधिसूचना–80 वर्ष से अधिक आयु के निर्वाचकों, शारीरिक रूप से नि:शक्त निर्वाचकों और कोविड-19 के कारण संगरोध में रह रहे निर्वाचकों को डाक मतपत्र जारी करना।

    सं. 52/2020/एसडीआर/खंड ।
    दिनांक: 28 सितम्बर, 2020
    सेवा में
     मुख्य निर्वाचन अधिकारी,
    असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, नागालैंड, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मणिपुर, और तेलंगाना
     
    विषय: लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 60 (ग) के अंतर्गत निर्वाचन आयोग की अधिसूचना–80 वर्ष से अधिक आयु के निर्वाचकों, शारीरिक रूप से नि:शक्त निर्वाचकों और कोविड-19 के कारण संगरोध में रह रहे निर्वाचकों को डाक मतपत्र जारी करना।
     
    महोदय,      
          मुझे उपर्युक्त विषय पर निर्वाचन आयोग के दिनांक 17 सितंबर, 2020 के समसंख्यक पत्र के क्रम में यह कहने का निदेश हुआ है कि इसके साथ संलग्न दिशा-निर्देशों के पैरा 2.3 के अंतर्गत, यह उल्लिखित है कि "कोविड-19" संदिग्ध या प्रभावित व्यक्ति की श्रेणी के तहत अनुपस्थित मतदाताओं द्वारा डाक मतपत्र की सुविधा का लाभ उठाने के लिए, इस संबंध में राज्य सरकार/संघ शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा यथाअधिसूचित, सक्षम स्वास्थ्य प्राधिकारी द्वारा जारी संबंधित संसदीय/विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के सहायक रिटर्निंग ऑफिसर को संबोधित एक प्रमाण पत्र, फॉर्म 12 घ के साथ प्रस्तुत करना होगा। 
    2.    तदनुसार, कोविड-19 संदिग्ध/प्रभावित व्यक्ति के लिए सक्षम स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा जारी किए जाने वाले प्रमाण पत्र का एक प्रोफार्मा तैयार किया गया है और यह इसके साथ संलग्न है। इसे तत्काल सभी संबंधित निर्वाचन अधिकारियों को परिचालित किया जाए।     
    3.    डाक मतपत्र की सुविधा प्राप्त करने के इच्छुक कोविड-19 की संदिग्ध/प्रभावित श्रेणी में आने वाले कोई भी अनुपस्थित मतदाता प्ररूप 12घ में आवेदन करेगा और सक्षम स्वास्थ्य प्राधिकारी द्वारा विधिवत रूप से इस संलग्न प्रोफार्मा में जारी किए गए प्रमाण पत्र के साथ इसे जमा करवाएगा। 
    4.    चूंकि डाक मतपत्र की सुविधा के लिए आवेदन, संबंधित निर्वाचन की अधिसूचना की तारीख के बाद 5 दिनों के भीतर आरओ को मिल जाना चाहिए, अत: सक्षम स्वास्थ्य प्राधिकारी को राज्य सरकार/संघ शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा तत्काल अधिसूचित किया जाएगा। 
    5.    आयोग के उपर्युक्त अनुदेश, उनके अनुपालन हेतु सभी संबंधितों के ध्यान में लाए जाएंगें।

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  15. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 60 (सी) के अंतर्गत आयोग की अधिसूचना – 80 वर्ष से अधिक आयु के निर्वाचकों, शारीरिक रूप से नि:शक्त निर्वाचकों और कोविड-19 के कारण संगरोध में रह रहे निर्वाचकों को डाक मतपत्र जारी करना।

    सं. 52/2020/एसडीआर/खंड ।
    दिनांक: 17 सितंबर, 2020
    सेवा में
           मुख्य निर्वाचन अधिकारी,
    1.   बिहार
    2.   असम
    3.   छत्तीसगढ़
    4.   गुजरात
    5.   हरियाणा
    6.   झारखंड
    7.   कर्नाटक
    8.   केरल
    9.   मध्य प्रदेश
    10. नागालैंड
    11. तमिलनाडु
    12. उत्तर प्रदेश
    13. पश्चिम बंगाल
    14. ओडिशा
    15. मणिपुर, और
    16. तेलंगाना
     
    विषय:  लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 60 (सी) के अंतर्गत आयोग की अधिसूचना – 80 वर्ष से अधिक आयु के निर्वाचकों, शारीरिक रूप से नि:शक्त निर्वाचकों और कोविड-19 के कारण संगरोध में रह रहे निर्वाचकों को डाक मतपत्र जारी करना।
     
    महोदय,
           मुझे उद्धृत विषय पर आयोग की दिनांक 17 सितंबर, 2020 की दो अधिसूचनाएं सं. 52/2020/एसडीआर/खंड-। इसके साथ अग्रेषित करने का निदेश हुआ है। इसे राज्य के राजपत्र में तत्काल प्रकाशित किया जाए और उसकी प्रतियां आयोग को भी अग्रेषित की जाएं।  
           वरिष्ठ नागरिक (एवीएससी), पीडब्ल्यूडी (एवीपीडी) और कोविड-19 (एडीसीओ) की श्रेणी में अनुपस्थित मतदाताओं द्वारा डाक मतपत्र के माध्यम से मतदान हेतु अपनाई जाने वाली प्रक्रिया की एक प्रति भी इसके साथ संलग्न है।
          
    कृपया पावती दें।  
     
    आपका
     
    (एन.टी. भूटिया)
    सचिव  
     
    Secretary

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  16. बिहार राज्य की विधान सभा के साधारण निर्वाचन, 2020 की घोषणा के पश्चात आदर्श आचार संहिता लागू करने के लिए की जाने वाली तत्काल कार्रवाई-तत्संबंधी।

    ­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­सं. 437/6/1/ईसीआई/अनु/प्रकार्या./एमसीसी/2020
    दिनांक : 25 सितम्बर, 2020
     
    सेवा में,
          मंत्रिमंडल सचिव,
          भारत सरकार,
          राष्ट्रपति भवन,
          नई दिल्ली।       मुख्‍य सचिव
          बिहार सरकार,
          पटना, और         मुख्य निर्वाचन अधिकारी,
          बिहार,   पटना।         
    विषय : बिहार राज्य की विधान सभा के साधारण निर्वाचन, 2020 की घोषणा के पश्चात आदर्श आचार संहिता लागू करने के लिए की जाने वाली तत्काल कार्रवाई-तत्संबंधी। 
    महोदय,
           मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि आयोग ने बिहार विधान सभा के साधारण निर्वाचन आयोजित कराने के लिए अनुसूची की घोषणा की है। अतः आयोग द्वारा निर्वाचनों की घोषणा के साथ ही ‘आदर्श आचार संहिता’ तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। उपर्युक्त को ध्यान में रखते हुए, आयोग ने आदर्श आचार संहिता के उपबंधों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए निम्नलिखित निदेश दिए हैं:-
    1.        सम्पत्ति का विरूपण- पत्र सं. 437/6/अनुदेश/2015-सीसीएस, दिनांक 29 दिसम्बर, 2015; सं. 437/6/अनुदेश/2012-सीसीएण्डबीई दिनांक 18 जनवरी, 2012 तथा सं. 3/7/2008/जेएस-II दिनांक 7 अक्तूबर, 2008 में निहित ईसीआई अनुदेशों में सम्पत्ति के विरूपण के रोकथाम का प्रावधान है। आयोग ने अपने अनुदेशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने तथा समयबद्ध रूप से कार्रवाई करने के लिए निम्नलिखित यथानिर्धारित निदेश दिए हैं-
    (क) सरकारी सम्पत्ति का विरूपण- इस प्रयोजन के लिए सरकारी परिसर में ऐसा कोई भी सरकारी कार्यालय तथा कैम्पस शामिल होगा, जिसमें कार्यालय भवन स्थित है। सरकारी सम्पत्ति पर मौजूद सभी प्रकार के भित्ति लेखन (वॉल राइटिंग), पोस्टर्स/पेपर्स या किसी अन्य रूप में विरूपण, कटआउट/होर्डिंग, बैनर, फ्लैग आदि निर्वाचनों की घोषणा से 24 घंटे के भीतर हटा दिए जाएंगे।
    (ख) सार्वजनिक सम्पत्ति का विरूपण तथा सार्वजनिक स्थान का दुरूपयोग- सार्वजनिक सम्पत्ति में तथा सार्वजनिक स्थान जैसे रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, हवाई अड्डों, रेलवे पुलों, रोडवेजों, सरकारी बसों, बिजली/टेलीफोन खंभों, नगर निगम/ नगर पालिका/स्थानीय निकाय के भवनों आदि में भित्ति लेखन/पोस्टरों/ किसी अन्य रूप में विरूपण के पर्चे के रूप में सभी अप्राधिकृत राजनीतिक विज्ञापन या, कट आउट/ होर्डिंग, बैनर, फ्लैग इत्यादि को आयोग द्वारा निर्वाचनों की घोषणा से 48 घंटों के भीतर हटा दिया जाएगा।
    (ग) सम्पत्ति का विरूपण- निजी सम्पत्ति पर प्रदर्शित तथा स्थानीय विधि एवं न्यायालय के निदेशों, यदि कोई हो, के अध्यधीन सभी अप्राधिकृत राजनीतिक विज्ञापनों को आयोग द्वारा निर्वाचनों की घोषणा से 72 घंटो के भीतर हटा दिया जाएगा।
    2.        सरकारी वाहनों का दुरूपयोग- आयोग के दिनांक 10 अप्रैल, 2014 के पत्र सं. 464/अनुदेश/2014/ईपीएस में निहित समेकित अनुदेशों में अन्य बातों के साथ-साथ यह उपबंधित है कि किसी राजनीतिक दल, अभ्यर्थी या निर्वाचन से जुड़े किसी अन्य व्यक्ति द्वारा (निर्वाचन से संबंधित किसी सरकारी ड्यूटी का निष्‍पादन करने वाले पदाधिकारियों को छोड़कर) निर्वाचन के दौरान प्रचार करने, निर्वाचन प्रचार संबंधी कार्य या निर्वाचन से संबंधित यात्रा करने के लिए सरकारी वाहन के प्रयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध होगा (उसमें उल्लिखित कुछ अपवादों के अध्‍यधीन)। ‘सरकारी वाहन’ शब्द का अर्थ ऐसे वाहनों से है और इसमें ऐसे वाहन शामिल होंगे जो परिवहन के प्रयोजनार्थ प्रयुक्त हों या प्रयुक्त किए जाने योग्य हों, चाहे वे यांत्रिक शक्ति या अन्यथा द्वारा चालित हों, और इनमें केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन, केन्द्र/राज्य सरकार के सार्वजनिक उपक्रम, केन्द्र/राज्य सरकार के संयुक्त क्षेत्र के उपक्रम, स्थानीय निकाय, नगर निगम, विपणन बोर्ड, सहकारी समितियां या ऐसे कोई अन्य निकाय शामिल होंगे जिसमें सार्वजनिक निधियां निवेशित की गई हों, भले ही कुल निधियों में से एक छोटा सा हिस्सा ही हों, । मुख्य निर्वाचन अधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी उपर्युक्त अनुदेशों के अनुपालन के लिए निर्वाचनों की घोषणा के 24 घंटे के भीतर आवश्यक कार्रवाई करेंगे।
    3.        सार्वजनिक-राजकोष की लागत पर विज्ञापन- दिनांक 5 मार्च, 2014 के पत्र सं. 437/6/1/2014-सीसी एंड बीई में आयोग के अनुदेशों में यह प्रावधान है कि निर्वाचन अवधि के दौरान सत्तारूढ़ दल की संभावनाओं को बढ़ाने के उद्देश्य से उपलब्धियों के बारे में सार्वजनिक राजकोष की लागत पर समाचार पत्रों एवं अन्य संचार माध्यमों में विज्ञापन दिए जाने और राजनीतिक समाचार एवं प्रचार-प्रसार के पक्षपातपूर्ण कवरेज के लिए आधिकारिक जनसंचार के दुरूपयोग से निरपवाद रूप से बचा जाना चाहिए। सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डालने के लिए सार्वजनिक राजकोष की लागत पर इलेक्ट्रॉनिक तथा प्रिन्ट मीडिया में कोई भी विज्ञापन जारी नहीं किया जाएगा। यदि किसी विज्ञापन को दूरदर्शन प्रसारण या प्रिन्ट मीडिया में प्रकाशन के लिए पहले ही जारी किया जा चुका है, तो यह अवश्य सुनिश्चित किया जाए कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर ऐसे विज्ञापनों का दूरदर्शन प्रसारण/प्रकाशन तत्काल रोक दिया जाए तथा घोषणा की तारीख से किन्हीं भी समाचार पत्रों, पत्रिकाओं आदि अर्थात् प्रिन्ट मीडिया में ऐसा कोई भी विज्ञापन प्रकाशित न हो, तथा इसे तत्काल वापिस ले लिया जाना चाहिए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी निर्वाचनों की घोषणा के तुरन्त पश्चात् सरकार की उपलब्धियों को दर्शाने वाले प्रिन्ट/इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में किसी भी विज्ञापन को हटाने/रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई करेंगे। 
    4.        आधिकारिक वेबसाइट पर राजनीतिक पदाधिकारी का फोटो- दिनांक 20 मार्च, 2014 के पत्र सं. 437/6/अनुदेश/2014- सीसी एंड बीई में निहित ईसीआई अनुदेश में यह प्रावधान है कि केन्द्र/राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध मंत्रियों, राजनीतिज्ञों या राजनीतिक दलों के सभी संदर्भों को हटा दिया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी राज्यीय विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से किसी भी राजनीतिक पदाधिकारी के फोटो को हटाने/छिपाने के लिए तत्काल कार्रवाई करेंगे। 
    5.        विकास/निर्माण संबंधी कार्यकलाप-मुख्य निर्वाचन अधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी निर्वाचनों की घोषणा के 72 घंटे के भीतर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन पर किसी शिकायत को विधिमान्य बनाने की स्थिति में संदर्भ हेतु कार्य की निम्नलिखित सूची प्राप्त करेंगेः
                  i.     ऐसे कार्य, जिसे स्थल पर पहले ही आरंभ किया जा चुका है।
                 ii.      ऐसे नए कार्य, जिसे स्थल पर आरंभ नहीं किया गया है।
    6.        व्यय अनुवीक्षण तथा आदर्श आचार संहिता के प्रवर्तन के लिए कार्यकलाप-घोषणा के बाद उड़न दस्ता, एफ एस टी, वीडियो टीम, शराब/नकदी/निषिद्ध नशीले पदार्थों के लिए गहन जांच,ड्रग/स्वापक के अवैध व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए आबकारी विभाग के उड़न दस्तों को तत्काल सक्रिय किया जाना चाहिए।
    7.        शिकायत निगरानी प्रणाली- निर्वाचन कराए जाने वाले राज्य में वेबसाइट तथा कॉल सेन्टर पर आधारित एक शिकायत निवारण प्रणाली होगी। कॉल सेन्टर का टोल फ्री नंबर 1950 है। टोल फ्री कॉल सेन्टर नंबर पर कॉल करके या वेबसाइट पर शिकायतें दर्ज करके की जा सकती है। शिकायतकर्ताओं को एसएमएस द्वारा या कॉल सेन्टर द्वारा भी की गई कार्रवाई की सूचना दी जाएगी। शिकायतकर्ता अपनी शिकायतों पर की गई कार्रवाई के विवरण भी देख सकते हैं। यह प्रणाली घोषणा के 24 घंटे के भीतर क्रियाशील होनी चाहिए। सभी शिकायतों को यथासमय एवं उचित रूप से निपटाया जाना चाहिए। जिला स्तर पर 24x7 नियंत्रण कक्ष को अवश्य सक्रिय किया जाए तथा विशेष रूप से पर्याप्त कार्मिक शक्ति तैनात की जाए एवं अन्य लाजिस्टिक्स सुनिश्चित किया जाए, नियंत्रण कक्ष में चौबीस घंटे लोगों की तैनाती की जाए तथा किसी टाल-मटोल या शंका से बचने के लिए उनका ड्यूटी रोस्टर अवश्य बनाया जाए।
    8.        आईटी एप्लीकेशन-आधिकारिक वेबसाइट तथा सोशल मीडिया सहित सभी आई टी एप्लीकेशन घोषणा किए जाने के साथ ही चालू हो जाएंगी।
    9.        मतदाताओं तथा राजनीतिक दलों की जागरूकता के लिए सूचना का प्रचार-प्रसार करना- निर्वाचन संबंधी प्रमुख गतिविधियों का प्रचार मुख्य निर्वाचन अधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी/रिटर्निंग अधिकारी के माध्यम से किया जाएगा। इस उद्देश्य के लिए, सभी आवश्यक सूचना का प्रचार-प्रसार रेडियो, टेलीविजन, सिनेमा के माध्यम से किया जाएगा सरकारी चैनल में मतदाता शिक्षा संबंधी सामग्री प्रदर्शित की जाएगी।
    10.      शैक्षणिक संस्थान तथा सिविल सोसाइटी से सक्रिय सहयोग- आम जनता तथा अन्य हितधारकों में निर्वाचन संबंधी सूचना का व्यापक प्रचार करने के लिए शैक्षणिक  संस्थानों तथा सिविल सोसाइटी से सहयोग लिया जा सकता है।
    11.      मीडिया सेन्टर- मीडिया के माध्यम से ईवीएम/वीवीपीएटी के प्रयोग सहित निर्वाचन प्रणाली के बारे में मतदाताओं, राजनीतिक दलों तथा अन्य स्टेकहोल्डरों के मध्य जागरूकता फैलाने के लिए प्रयास किया जाना चाहिए।
    12.      एमसीएमसी/डीईएमसी- दिनांक 24 मार्च, 2014 के पत्र सं. 491/एमसीएमसी/2014/संचार में निहित ईसीआई अनुदेश में यह प्रावधान है कि सभी पंजीकृत राजनीतिक दल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर जारी किए जाने वाले उनके प्रस्तावित राजनीतिक विज्ञापनों के पूर्व प्रमाणन के लिए जिला तथा राज्य स्तर, जैसी भी स्थिति हो, पर मीडिया प्रमाणन एवं अनुवीक्षण समिति (एमसीएमसी) से सम्पर्क करेंगे। आयोग ने उपर्युक्त पत्र में निहित अपने अनुदेशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निदेश दिए हैं।
    13.      नियंत्रण कक्ष- जिला स्तर पर 24x7 नियंत्रण कक्ष तत्काल अवश्य चालू किया जाए तथा जिला निर्वाचन अधिकारी/मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा पर्याप्त कार्मिक शक्ति की तैनाती तथा अन्य लाजिस्टिक्स सुनिश्चित किया जाए। सम्पूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान ईसीआई सचिवालय में शिकायत निवारण केन्द्र सहित एक नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया जाएगा।

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  17. बिहार विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचन 2020- सांसद/विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के अधीन निधियों को जारी करना।

    सं. 437/6/1/ईसीआई/अनुदेश/प्रकार्या./एमसीसी/2020
    दिनांक: 25 सितम्बर, 2020
     
    सेवा में 
    मत्रिमंडल सचिव,
    भारत सरकार,
    राष्‍ट्रपति भवन,नई दिल्‍ली। सचिव,
    भारत सरकार,कार्यक्रम कार्यान्‍वयन विभाग,
    सरदार पटेल भवन,
    नई दिल्‍ली।   मुख्‍य सचिव,बिहार सरकारपटना, और मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी,
    बिहार
    पटना।  
    विषय: बिहार विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचन 2020- सांसद/विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के अधीन निधियों को जारी करना।
    महोदय,
           मुझे, निर्वाचन आयोग के प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रेस नोट/64/2020, दिनांक 25 सितम्बर, 2020 (प्रेस नोट ईसीआई की वेबसाइट – www.eci.gov.in पर उपलब्‍ध है) का संदर्भ देने का निदेश हुआ है जिसके अनुसार आयोग ने बिहार विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचन की घोषणा के परिणामस्‍वरूप राजनैतिक दलों एवं अभ्‍यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के प्रवर्तन की घोषणा की है।
    2. आयोग ने अनुदेश दिया है कि सांसद स्‍थानीय क्षेत्र विकास योजनाओं के अंतर्गत निधियों को अवमुक्‍त करना निम्‍नलिखित निर्बंधनों के अधीन होगा:- 
    क) देश के ऐसे किसी भी भाग में, जहां निर्वाचन प्रक्रियाधीन है, सांसद (राज्‍य सभा सदस्‍य सहित) स्‍थानीय क्षेत्र विकास निधि के अधीन कोई भी नई निधियां जारी नहीं की जाएगी। इसी प्रकार, निर्वाचन प्रक्रिया पूर्ण होने तक विधान सभा सदस्‍य/विधान परिषद सदस्‍य स्‍थानीय क्षेत्र विकास निधि के अधीन, यदि कोई ऐसी योजना प्रचालन में है, नई निधियां जारी नहीं की जाएंगी।
    ख) ऐसे कार्य के संदर्भ में कोई कार्य शुरू नहीं किया जाएगा जिसमें इस पत्र के जारी होने से पहले कार्य आदेश तो जारी कर दिए गए है परन्‍तु फील्‍ड में वास्‍तव में काम शुरू नही हुआ है। ये कार्य निर्वाचन प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही शुरू किए जा सकते हैं। हालांकि, यदि कोई कार्य वास्‍तव में शुरू हो चुका है तो उसे जारी रखा जा सकता है।
    ग) पूरे हो गए कार्य(र्यों) के लिए भुगतानों को जारी करने पर कोई रोक नहीं होगी बशर्ते संबंधित अधिकारी पूर्ण रूप से संतुष्‍ट हों।
    घ) जहां योजनाएं अनुमोदित कर दी गई है तथा निधियां उपलब्‍ध करा या जारी कर दी गई हैं और सामग्रियों का प्रापण कर लिया गया है एवं कार्यस्‍थल पर पहुच गई हैं ऐसी योजनाएं कार्यक्रम के अनुसार कार्यान्वित की जा सकती हैं।   

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  18. आदर्श आचार संहिता लागू होना-बिहार की विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचन 2020- तत्संबंधी।

    सं.437/6/1/ईसीआई/अनुदेश/प्रकार्या./एमसीसी/2020                     दिनांक: 25 सितम्बर, 2020
     
    सेवा में
    मंत्रिमंडल सचिव,
    भारत सरकार,राष्ट्रपति भवन,नई दिल्ली।  मुख्य सचिव,
    बिहार सरकार,पटना, और  मुख्य निर्वाचन अधिकारी,
    बिहार,पटना।  
    विषय : आदर्श आचार संहिता लागू होना-बिहार की विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचन 2020- तत्संबंधी।
    महोदय,
    मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि निर्वाचन आयोग ने बिहार की विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचन आयोजित करने के लिए अनुसूची की उद्घोषणा की है। (प्रेस नोट सं.ईसीआई/प्रे.नो./64/2020, दिनांक 25 सितम्बर, 2020 जो आयोग की वेबसाइटwww.eci.gov.in पर उपलब्ध है)।
    2.     इस उद्घोषणा के साथ ही राजनैतिक दलों और अभ्‍यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के उपबंध तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं और तब तक लागू रहेंगे जब तक बिहार की विधान सभा में साधारण निर्वाचन सम्पन्न  न हो जाएं। इसे केन्द्र और राज्य सरकार, सभी मंत्रालयों/विभागों और केन्‍द्र सरकार / राज्‍य सरकार के सभी कार्यालयों के ध्‍यान में लाया जाए। आपके द्वारा जारी किए गए अनुदेशों की एक प्रति सूचना एवं रिकार्ड हेतु भारत निर्वाचन आयोग को भेजी जाए।
    3.     आपका ध्‍यान ‘सत्‍तासीन दल’ से संबंधित आदर्श आचार संहिता के उपबंधों की ओर आकृष्‍ट किया जाता है जिसमें अन्‍य बातों के साथ-साथ यह कहा गया है कि सत्तासीन दल, चाहे केन्‍द्र में या  संबंधित राज्‍य में यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी ऐसी शिकायत के लिए कोई कारण न दिया जाए कि उसने अपने निर्वाचन अभियान के प्रयोजनों के लिए शासकीय हैसियत का प्रयोग किया है और विशेष रूप से :-
     (i)    (क) मंत्री अपने शासकीय दौरे को निर्वाचन प्रचार अभियान संबंधी कार्य से नहीं मिलाएंगे और निर्वाचन प्रचार अभियान संबंधी कार्य के दौरान शासकीय क्षेत्र या कार्मिकों का उपयोग भी नहीं करेंगे;
           (ख) सरकारी हवाई-जहाज, वाहनों सहित सरकारी परिवहन, तंत्र एवं कार्मिकों का उपयोग सत्तासीन दल के हित को प्रोत्‍साहित करने के लिए नहीं किया जाएगा;
    (ii)    निर्वाचन सभाओं को आयोजित करने के लिए सार्वजनिक स्‍थानों जैसे मैदानों आदि का उपयोग और निर्वाचनों के संबंध में एयरक्राफ्ट के लिए हैलीपैड का प्रयोग अपने द्वारा एकाधिकार रूप से नहीं किया जाएगा। अन्‍य दलों और अभ्‍यर्थियों को उन्‍हीं शर्तों एवं निबंधनों के आधार पर ऐसे स्‍थानों एवं सुविधाओं का उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी जिन शर्तों एवं निबंधनों पर सत्तासीन दल द्वारा उनका उपयोग किया जाता है;
    (iii)    जहां के लिए निर्वाचनों की घोषणा हुई है या जहां निर्वाचन हो रहे हैं, वहां के विश्राम गृह, डाक बंगला या अन्‍य सरकारी आवास को उपयोग करने के लिए किसी राज्य द्वारा जैड स्केल सुरक्षा प्रदान किए गए राजनीतिक पदाधिकारियों को या जिन्हें विभिन्न राज्यों में या केन्द्र सरकार में इससे ऊपर या इसके समकक्ष स्तर की सुरक्षा प्रदान की गई है, को एक समान आधार पर उपयोग करने के लिए प्रदान किए जाएंगे।यह इस शर्त के अध्यधीन होगा कि ऐसा आवास पहले से ही निर्वाचन सम्बन्धी अधिकारियों या प्रेक्षकों को आबंटित न हो या उनके द्वारा धारित न हो। सरकारी आवास गृह/विश्राम गृह या अन्य सरकारी आवास इत्यादि में ठहरने के समय ऐसे राजनीतिक पदाधिकारी कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं करेंगे।
    यर्थ
    (iv)    समाचार पत्रों और अन्‍य मीडिया में सरकारी खजाने की लागत से विज्ञापन जारी करने और राजनैतिक समाचारों के दलगत कवरेज के लिए निर्वाचन अवधि के दौरान शासकीय मास मीडिया के दुरुपयोग तथा सत्तासीन दल की प्रत्‍याशाओं को आगे बढ़ाने की दृष्टि से उपलब्धियों के बारे में प्रचार से निष्‍ठापूर्वक बचा जाना चाहिए;
    (v)    मंत्री और अन्य प्राधिकारी, आयोग द्वारा निर्वाचनों की उद्घोषणा किए जाने के समय से विवेकाधीन निधियों में से अनुदानों/भुगतानों को स्‍वीकृति प्रदान नहीं करेंगे; और
    (vi)    आयोग द्वारा निर्वाचनों की उद्घोषणा के समय से, मंत्री और अन्‍य प्राधिकारी –
    (क) किसी रूप में कोई वित्तीय अनुदानों की उद्घोषणा नहीं करेंगे या उनके लिए वचन नहीं देंगे; या
    (ख) किसी प्रकार की परियोजनाओं या योजनाओं की आधारशीला नहीं रखेंगे (लोक सेवकों के सिवाय); या
    (ग) सड़कों के निर्माण, पेयजल सुविधाओं की व्‍यवस्‍था आदि के बारे में कोई वचन नहीं देंगे; या
    (घ) सरकार, सार्वजनिक उपक्रमों आदि में ऐसी कोई तदर्थ नियुक्तियां नहीं करेंगे, जिनमें सत्तासीन दल के पक्ष में मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रभाव हो।
    4.     जैसा कि उपर्युक्‍त पैरा 3 {खंड IV} से ज्ञातव्य है, सरकारी खजाने की लागत से सरकार की उपलब्धियों को उजागर करते हुए इलेक्‍ट्रानिक एवं प्रिंट मीडिया में कोई विज्ञापन जारी नहीं किया जाएगा। यदि कोई विज्ञापन, प्रसारण या प्रिंट मीडिया में प्रकाशन के लिए पहले ही जारी हो चुका है, तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इलेक्‍ट्रानिक मीडिया में ऐसे विज्ञापनों के प्रसारण को तत्‍क्षण रोक दिया जाए और यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आज से ही ऐसा कोई विज्ञापन किन्‍हीं भी समाचारपत्रों, पत्रिकाओं आदि अर्थात् प्रिंट मीडिया में प्रकाशित न किया जाए और इसे शीघ्र वापस ले लिया जाए।
    5.     इस संबंध में आयोग के दिनांक 5 मार्च, 2009 के पत्र सं. 437/6/2009-सीसीबीई के तहत जारी अनुदेश, आयोग की वेबसाइट “http://eci.gov.in/” पर उपलब्‍ध हैं जो आपकी सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु ‘महत्वपूर्ण अनुदेश’ नामक शीर्षक के अन्तर्गत है।आपके मार्गदर्शन के लिए इस लिंक पर आयोग के अन्‍य सभी अनुदेश भी उपलब्‍ध हैं।
    6.     आयोग इसके अतिरिक्‍त यह निदेश देता है कि निर्वाचन के संचालन से संबंधित सभी अधिकारियों/कर्मचारियों के स्‍थानान्‍तरण पर पूरी रोक होगी। इनमें निम्‍नलिखित सम्मिलित होंगे किंतु वहीं तक सीमित नहीं होंगे:-
    (i)        मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी और अपर/संयुक्‍त/उप मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी;
    (ii)       मंडल आयुक्‍त;
    (iii)      जिला निर्वाचन अधिकारी, रिटर्निंग आफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर एवं निर्वाचनों के संचालन से संबंधित राजस्‍व अधिकारी;
    (iv)      निर्वाचनों के प्रबंधन से जुड़े पुलिस विभाग के अधिकारी यथा, रेंज महानिरीक्षक एवं उप महानिरीक्षक, वरिष्‍ठ पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक, सब डिवीजनल पुलिस अधिकारी यथा, पुलिस उपाधीक्षक एवं अन्‍य पुलिस अधिकारी, जो लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम, 1951 की धारा 28क के अधीन आयोग में प्रतिनियुक्‍त हैं;
    7.     निर्वाचन की उद्घोषणा की तारीख से पूर्व उपर्युक्‍त श्रेणियों के अधिकारियों की बाबत जारी किंतु आज की तारीख तक कार्यान्वित नहीं किए गए स्‍थानान्‍तरण आदेशों को इस संबंध में आयोग से विशिष्‍ट अनुमति लिए बिना लागू नहीं किया जाना चाहिए;
    8.     यह रोक निर्वाचन के पूरा होने तक प्रभावी रहेगी। आयोग आगे यह और निदेश देता है कि राज्‍य सरकार को राज्‍य में निर्वाचन के प्रबंधन में भूमिका वाले वरिष्‍ठ अधिकारियों का स्‍थानान्‍तरण करने से बचना चाहिए।
    9.     ऐसे मामलों में, जहां प्रशासनिक अत्‍यावश्‍यकताओं के कारण किसी अधिकारी का स्‍थानान्‍तरण आवश्‍यक है, वहां संबंध राज्‍य सरकार को पूर्व स्‍वीकृति के लिए पूर्ण औचित्‍य के साथ आयोग से संपर्क करना चाहिए।
    10.    कृपया इस पत्र की पावती भेजी जाए। 

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  19. प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए निमंत्रण

    दिनांक: 25.09.2020
    प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए निमंत्रण
    महोदय/महोदया
    आपको निम्नलिखित आयोजन को कवर करने के लिए आमंत्रित किया जाता है:
    मीडिया आयोजन
    :
    भारत निर्वाचन आयोग द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस
    दिन एवं दिनांक
    :
    शुक्रवार, 25 सितम्बर, 2020
    समय
    :
    12.30 बजे अपराह्न
    स्थान
    :
    हॉल नं. 5, विज्ञान भवन, नई दिल्ली
     
    सामाजिक दूरी संबंधी मानदंडों को ध्यान में रखते हुए, केवल डीडी और एएनआई के कैमरामैन को हॉल के अंदर आने की अनुमति है। प्रवेश केवल पीटीआई और फोटो डिवीजन स्टिल कैमरा वाले  फोटोग्राफर के लिए अनुमत्य है।

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  20. निर्वाचन लड़ने वाले आपराधिक पूर्ववृत्त वाले व्यक्तियों के संबंध में विवरण प्रकाशित करने की अपेक्षा से संबंधित याचिका पर उच्चतम न्यायालय का निर्णय

    संख्या 3/4/2019/एसडीआर/खंड IV
    दिनांक: 16 सितंबर, 2019
     
    सेवा में,
    सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों
    के मुख्य निर्वाचन अधिकारी  
    विषय:  निर्वाचन लड़ने वाले आपराधिक पूर्ववृत्त वाले व्यक्तियों के संबंध में विवरण प्रकाशित करने की अपेक्षा से संबंधित याचिका पर उच्चतम न्यायालय का निर्णय;
          
    महोदय/महोदया, 
           मुझे आपका ध्यान आयोग की पत्र संख्या 3/4/2017/एसडीआर/खंड।।, दिनांक 10.10.2018 तथा दिनांक 19.03.2019 के पत्र की ओर आकृष्ट कराने का निदेश हुआ है जिसे माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा 2015 की रिट याचिका संख्या 784 (लोक प्रहरी बनाम भारत संघ और अन्य) और 2011 की रिट याचिका (सिविल) संख्या 536 (पब्लिक इंट्रेस्ट फाउंडेशन और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य) में निर्णय के अनुसरण में आयोग द्वारा जारी किया गया था। उक्त पत्र में आयोग ने निदेश दिया था कि अभ्यर्थी जिनके विरूद्ध आपराधिक मामले, चाहे ऐसे मामले लंबित हो या विगत में दोषसिद्धि के मामले हों, और राजनीतिक दल जिन्होनें ऐसे अभ्यर्थियों को खड़ा किया है, उपर्युक्त पत्र में विहित तरीके से समाचार पत्र और टीवी चैनलों पर एक घोषणा प्रस्तुत करेगा।  
    2.     तत्पश्चात, वर्ष 2011 की रिट याचिका (सी) सं. 536 में वर्ष 2018 की अवमानना याचिका (सी) सं. 2192 में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिनांक 13.02.2020 को पारित अपने आदेश में दिए गए निर्देशों के अनुसरण में और आयोग के उपर्युक्त दो पत्रों में दिए गए निर्देशों के अलावा, आयोग ने 6 मार्च, 2020 को अपने पत्र सं. 3/4/2020/एसडीआर/खंड ।।। के जरिए भी यह निदेश दिया है कि सभी राजनैतिक दल जो आपराधिक पूर्ववृत्त वाले अभ्यर्थी को खड़ा करते हैं, चाहे उस पर मामले लंबित हों या विगत में वह दोषसिद्ध हुआ हो, वे लोक सभा और राज्य मंडलों के सभी भावी निर्वाचनों में उपर्युक्त सभी निर्देशों का निरपवाद रूप से पालन करेंगे। राजनैतिक दल द्वारा अभ्यर्थी के रूप में चुने गए आपराधिक मामलों वाले व्यक्ति से संबंधित सूचना के साथ-साथ ऐसे चयन के कारण सहित बिना आपराधिक पूर्ववृत्त वाले अन्य व्यक्तियों को अभ्यर्थी के रूप में क्यों नहीं चुना गया, इससे संबंधित विवरण अभ्यर्थी का चयन किए जाने के 48 घंटों के भीतर या नामनिर्देशन दायर करने की पहली तिथि से पहले कम से कम दो सप्ताह पहले, जो भी पहले हो, समाचार पत्र, सोशल मीडिया प्लेटफार्म और दल की वेबसाइट पर प्रकाशित किए जाएंगे। 
    3.     आयोग ने निर्वाचन न लड़े निर्वाचित अभ्यर्थियों द्वारा प्रचार से संबंधित मुद्दों पर भी विचार किया है और निदेश दिया है कि माननीय उच्चतम न्यायालय के उपर्युक्त दिशानिर्देशों के आलोक में ऐसे अभ्यर्थियों को अन्य निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों के लिए भी यथा विहित रीति से अपने आपराधिक पृर्ववृत्त का प्रचार करना आवश्यक होगा। 
    4.     आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार ऐसे विवरण प्रकाशित करने के प्रयोजन से प्रचार अभियान के दौरान आपराधिक मामलों के संबंध में विवरण तीन अवसरों पर प्रकाशित किया जाना है। अब आयोग ने मामले पर विचार किया है और निदेश दिया है कि निर्दिष्ट अवधि को निम्नलिखित तरीके से तीन खंडों में रखा जाएगा ताकि निर्वाचकों को अभ्यर्थियों के बारे में जानने का पर्याप्त समय मिले:  
    क.     प्रथम प्रचार:     अभ्यर्थिता वापसी के प्रथम चार दिनों के भीतर
    ख.     दूसरा प्रचार:     अगले 5 से 8 दिनों के बीच
    ग.     तीसरा प्रचार:    9वें दिन से प्रचार अभियान के अंतिम दिन तक (मतदान के दिन से पहले दो दिन तक)  
    (व्याख्या: यदि अभ्यर्थिता वापस लेने की अंतिम तिथि महीने का 10वां दिन है और मतदान महीने के 24वें दिन है तो घोषणा प्रकाशन के लिए पहला खंड महीने के 11वें से 14वें दिन के बीच किया जाएगा, दूसरा और तीसरा क्रमश: महीने के 15वें और 18वें दिन के बीच और 19वें और 22वें दिन के बीच किया जाएगा।)  
    5.     आयोग के पत्र में उल्लिखित पैरा 1 और 2 में यथा प्रदत्त अन्य दिशानिर्देशो का अनुपालन किया जाना जारी रहेगा।  
    6.     निर्वाचन व्यय का लेखा दायर करते समय आपराधिक पूर्ववृत्त, यदि कोई हो, संबंधी अनुदेशों का प्रचार करने से संबंधित विवरण विहित प्रारूप (सी-4) में प्रदान किया जाएगा। राज्य सभा या राज्य विधान परिषद के निर्वाचन के मामले में निर्वाचन के लिए आरओ को ये विवरण प्रस्तुत किए जाएंगे।  
    7.     यहां यह उल्लेखनीय है कि जहां तक राजनैतिक दलों का संबंध है, दिनांक 6 मार्च, 2020 के आयोग के पत्र संख्या 3/4/2020/एसडीआर/खंड ।।। के तहत प्रेषित माननीय उच्चतम न्यायालय के दिनांक 13.02.2020 के आदेश के संदर्भ में उनके द्वारा चयनित अभ्यर्थी के संबंध में विवरणों का प्रकटन किया जाना बाध्यकारी होगा, भले ही संवीक्षा के दौरान और/या उसके अभ्यर्थन वापस लेने के कारण उसका अभ्यर्थन अस्वीकृत हो जाता है, का भी अनुपालन इस संबंध में किया जाए।  
    8.     यह पुन: दोहराया जा सकता है कि उक्त आपराधिक पूर्ववृत्त के प्रकाशन से संबद्ध अभ्यर्थी या राजनैतिक दल द्वारा व्यय किए गए सभी खर्चे निर्वाचन के लिए किए गए व्यय माने जाएंगे। इस संबंध में आयोग के 19 मार्च, 2019 के पत्र सं. 3/4/3029/एसडीआर/खंड-। का अवलोकन किया जा सकता है। 
    9.     आयोग द्वारा यथा विहित विद्यमान प्रारूपों को सुसंगत बनाने के लिए और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में प्रारूप सी1, सी2, और सी3 को उपयुक्त दिशानिर्देशों को जोड़कर संशोधित किया गया है (प्रति संलग्न)।  
    10.    इस पत्र को सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के जिला निर्वाचन अधिकारियों/रिटर्निंग अधिकारियों को उनकी ओर से की जाने वाली कार्रवाई के लिए परिचालित किया जा सकता है। इसे राज्य अर्थात रजिस्टर्ड दल की राज्य ईकाई तथा अन्य राज्यों के रजिस्टर्ड राज्यीय दलों तथा आपके राज्य /संघ राज्य क्षेत्र में स्थित मुख्यालय वाले सभी रजिस्टर्ड गैर-मान्यताप्राप्त राजनैतिक दलों को भी इस अनुदेश के साथ परिचालित किया जाएगा कि सभी भावी निर्वाचनों में दलों और उनके अभ्यर्थियों दोनों द्वारा उक्त निदेशों का सख्ती से अनुपालन किया जाए।  
    11.    कृपया इसकी पावती दें और की गई कार्रवाई की पुष्टि करें।  

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  21. अर्हक तारीख के रूप में दिनांक 01.01.2021 के संदर्भ में फोटो निर्वाचक नामावलियों का विशेष सार पुनरीक्षण-कार्यक्रम-यौक्तिकीकरण के दौरान किसी मतदान केन्द्र के लिए नियत किए जाने हेतु निर्वाचकों की अधिकतम संख्या के संबंध में स्पष्टीकरण-तत्‍संबंधी।

    सं.23/2020-ईआरएस
    दिनांक: 04 सितंबर, 2020
     
    सेवा में
          सभी राज्यों एवं संघ राज्यों क्षेत्रों के मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी (बिहार और जम्मू-कश्मीर, लद्दाख संघ राज्य क्षेत्रों को छोड़कर)
     
    विषय:-अर्हक तारीख के रूप में दिनांक 01.01.2021 के संदर्भ में फोटो निर्वाचक नामावलियों का विशेष सार पुनरीक्षण-कार्यक्रम-यौक्तिकीकरण के दौरान किसी मतदान केन्द्र के लिए नियत किए जाने हेतु निर्वाचकों की अधिकतम संख्या के संबंध में स्पष्टीकरण-तत्‍संबंधी।
    संदर्भः-
    ईसीआई पत्र सं.23/2019-ईआरएस (खंड-III), दिनांक 25 जुलाई, 2019, ईसीआई पत्र सं.23/एसईसी/2020-ईआरएस, दिनांक 23 जुलाई, 2020, ईसीआई पत्र सं. 23/2020-ईआरएस, दिनांक 07 अगस्त, 2020, और ईसीआई पत्र सं.23/2020-ईआरएस, दिनांक 24 अगस्त, 2020।  
    महोदय/महोदया 
          मुझे अर्हक तारीख के रूप में 01.01.2021 के संदर्भ में निर्वाचक नामावलियों के विशेष सार पुनरीक्षण के लिए अनुसूची एवं दिशा-निर्देश के संबंध में आयोग के दिनांक 07 अगस्त, 2020 और 24 अगस्त, 2020 (हरियाणा एवं महाराष्ट्र के लिए) के समसंख्यक पत्र का संदर्भ लेने और यह कहने का निदेश हुआ है कि मौजूदा अनुदेशों के अनुसार, सार पुनरीक्षण के संबंध में निर्वाचक नामावलियों के प्रारूप प्रकाशन से पहले 1,500 से अधिक निर्वाचकों वाले सभी मतदान केन्द्रों का यौक्तिकीकरण किया जाएगा।
          कोविड-19 वैश्विक महामारी के एहतियाती उपायों में से एक के रूप में बिहार राज्य और अन्य राज्यों के कुछ निर्वाचन क्षेत्रों, जहां निकट भविष्य में साधारण और उप-निर्वाचन होने वाले हैं, में किसी मतदान केंद्र के लिए नियत किए जाने वाले निर्वाचकों की संख्या की सीमा 1,000 तक सीमित कर दी गई है। इस प्रयोजन के लिए, इन राज्यों को 1,000 से अधिक निर्वाचकों वाले सभी मुख्य मतदान केंद्रों के सहायक मतदान केंद्र बनाने के लिए कहा गया है, क्योंकि इन राज्यों में सार पुनरीक्षण, 2020 के पूरा होने के कारण ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान केंद्र का यौक्तिकीकरण नहीं किया जा सका, जहां अर्हक तिथि के रूप में 01.01.2020 के संदर्भ में अंतिम रूप से तैयार निर्वाचक नामावली के आधार पर साधारण निर्वाचन/उप-निर्वाचनों का आयोजन किया जाना है।
    आयोग ने सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया है कि मतदान केंद्रों का यौक्तिकीकरण/पुनर्गठन, जैसा भी मामला हो, सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में किसी मतदान केंद्र के लिए अधिकतम 1500 निर्वाचकों के आधार पर किया जाएगा।
    आयोग के उपरोक्त अनुदेशों का कड़ाई से अनुपालन करने के लिए सभी संबंधितों को तदनुसार सूचित किया जाए।

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  22. Broad Guidelines for Conduct of General Election/Bye election during COVID-19

    Broad Guidelines for Conduct of General Election/Bye election during COVID-19
     

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  23. अर्हक तारीख के रूप में 01.01.2021 के संदर्भ में फोटो निर्वाचक नामावलियों का विशेष सार पुनरीक्षण-कार्यक्रम-तत्‍संबंधी।

    सं.23/2020-ईआरएस
    दिनांक: 7 अगस्त, 2020
     
    सेवा में
     
           सभी राज्‍यों और संघ राज्‍य क्षेत्रों के मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी
    (बिहार, हरियाणा, महाराष्‍ट्र और जम्मू व कश्मीर, लद्दाख केन्द्र शासित प्रदेशों को छोड़कर)    
     
    विषय:  अर्हक तारीख के रूप में 01.01.2021 के संदर्भ में फोटो निर्वाचक नामावलियों का विशेष सार पुनरीक्षण-कार्यक्रम-तत्‍संबंधी।
     
    महोदय/महोदया
    मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि मौजूदा नीति के अनुसार, अर्हक तारीख के रूप में आगामी वर्ष की 1 जनवरी के संदर्भ में निर्वाचन नामावलियों का पुनरीक्षण सभी राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों में प्रत्येक वर्ष की उत्‍तरवर्ती अवधि (सामान्‍य रूप से वर्ष की अंतिम तिमाही में) में किया जाता है ताकि निर्वाचक नामावलियों का अंतिम प्रकाशन अनुवर्ती वर्ष के जनवरी माह के प्रथम सप्ताह में किया जा सके। पुनरीक्षण कार्यक्रम इस ढंग से तैयार किया जाता है कि निर्वाचक नामावलियां राष्ट्रीय मतदाता दिवस (प्रतिवर्ष की 25 जनवरी) से काफी पहले अंतिम रूप से प्रकाशित कर दी जाएं ताकि नव निर्वाचकों, विशेषतौर पर युवा मतदाताओं (18-19 वर्ष) के लिए तैयार किए गए एपिक राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर उन्हें औपचारिक ढंग से वितरित किए जा सकें। आयोग ने सभी पक्षों पर विचार करते हुए सभी राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों (बिहार, हरियाणा, महाराष्ट्र और जम्मू व कश्मीर, लद्दाख केन्द्र शासित प्रदेशों को छोड़कर) में अर्हक तारीख के रूप में दिनांक 01-01-2021 से निम्नलिखित तालिका के अनुसार फोटो निर्वाचक नामावलियों का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण आरंभ करने का निदेश दिया है:-
    क्र. सं.
    कार्यकलाप
    अवधि
    पूर्व पुनरीक्षण कार्यकलाप:
    1.
    (क)   मतदान केंद्रों का युक्तिकरण/पुनर्व्यवस्था करना।
    (ख)   डीएसई और एपिक, की त्रुटियों का निराकरण (भाग के अंदर डीएसई को 31.08.2020 तक हटाना है)।
    (ग)    अनुभाग/भागों का पुनर्विकास और मतदान केंद्रों के अनुभाग/भाग की सीमाओं के प्रस्तावित पुनर्गठन को अंतिम रूप देना और मतदान केन्द्रों की सूची का अनुमोदन प्राप्त करना।
    10.08.2020 (सोमवार) से 31.10.2020 (शनिवार) तक
    2.
    (क)   प्रारूप 1 से 8 तक तैयार करना
    (ख)  पूरक और समेकित प्रारूप नामावली की तैयारी
    01.11.2020 (रविवार) से 15.11.2020 (रविवार) तक
    पुनरीक्षण कार्यकलाप
     
    3.
    समेकित प्रारूप निर्वाचक नामावली का प्रकाशन
    16.11.2020 (सोमवार)
    4.
    दावों और आपत्तियों को दायर करने की अवधि
    16.11.2020 (सेमवार) से 15.12.2020 (मंगलवार) तक
    5.
    विशेष अभियान की तारीखें
    सीईओ द्वारा निर्धारित किए जाने वाले दावों और आपत्तियों की अवधि के भीतर दो शनिवार और रविवार
    6.
    दावों एवं आपत्तियों का निपटान
    05.01.2021 (मंगलवार) तक
    7.
    (क) दुरूस्‍तता संबंधी मानदंडों की जांच करना और अंतिम प्रकाशन के लिए आयोग की अनुमति लेना
    (ख) डाटाबेस का अद्यतनीकरण और अनुपूरकों का मुद्रण
    14.01.2021 (गुरुवार) तक
    8.
    निर्वाचक नामावली का अंतिम प्रकाशन
    15.01.2021 (शुक्रवार)
     

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  24. श्री सचिन सावंत को आयोग का जवाब

    सं. 39/एमटी/2020/प.अनु.-II                                   
    दिनांक: 07 अगस्त, 2020
     
    सेवा में
                श्री सचिन सावंत           
                महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस समिति
                तिलक भवन,
                काकासाहेब गाँधी मार्ग,
                दादर,
                मुम्बई-400025 
    विषय: महाराष्ट्र राज्य में जुलाई, 2019 में मुख्य निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति-तत्संबंधी।
    महोदय,
    मुझे उपर्युक्‍त विषय पर आपके दिनांक 31.07.2020 के पत्र का संदर्भ लेने और यह कहने का निदेश हुआ है कि आयोग में उपलब्ध सारवान् सूचना के अनुसार, निम्नलिखित तथ्य प्रासंगिक हैं:-
    (i)        मुख्य निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति संबंधित राज्य सरकार/संघ शासित प्रदेश से परामर्श करके की जाती है, जिसमें आयोग को अधिकारियों के एक पैनल के बारे में सूचना दी जाती है।
    (ii)       श्री बलदेव सिंह (आईएएस, एमएच:1989) को आयोग द्वारा नियत प्रक्रिया अपनाकर  नियुक्त किया गया था, जहां राज्य सरकार ने स्पष्ट किया था कि वह सतर्कता की दृष्टि से बेदाग हैं और रिकॉर्ड के अनुसार, मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी, महाराष्‍ट्र के रूप में उनकी नियुक्ति से पहले उनकी सेवा के पिछले पांच वर्षों के दौरान उनकी निष्‍पादन मूल्यांकन रिपोर्ट में उन्हें उत्कृष्ट दर्जा दिया गया था।  
    2.    उपरोक्त को देखते हुए, आयोग ने इस मामले पर विधिवत विचार किया, और उसे इस मामले में कोई भी कार्रवाई करने का कोई कारण नहीं मिला है।

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  25. कोविड-19 वैश्विक महामारी की स्थिति में निर्वाचन अभियान और जनसभाएं-विचार और सुझाव आमंत्रित करना।

    सं. 3/10/2020/एसडीआर 
    दिनांक: 04 अगस्त, 2020
     
    सेवा में
          मान्यताप्राप्त राष्ट्रीय/राज्यीय राजनीतिक दलों के अध्यक्ष/महासचिव
     
    विषय: कोविड-19 वैश्विक महामारी की स्थिति में निर्वाचन अभियान और जनसभाएं-विचार और सुझाव आमंत्रित करना।
    महोदया/महोदय
    मुझे उपर्युक्त विषय पर आयोग के दिनांक 17 जुलाई, 2020 के पत्र का संदर्भ लेने का निदेश हुआ है, जिसमें सभी राजनीतिक दलों से इस संबंध में 31 जुलाई, 2020 तक अपने सुझावों को प्रस्तुत करने का अनुरोध किया गया था। हालांकि कई दलों से अभी जवाब आने बाकी हैं। देश में कोविड-19 की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, आयोग ने निदेश दिया है कि आगामी उप-निर्वाचनों और बिहार विधान सभा के साधारण निर्वाचनों के संचालन के संबंध में जिन राजनीतिक दलों ने निर्वाचन अभियान और जन सभाओं पर अपने इनपुट/विचार/सुझाव नहीं भेजे हैं, उन्हें और समय दिया जाए।
    उपरोक्त को देखते हुए, आपसे अनुरोध है कि इनपुट/विचारों/सुझावों को 11 अगस्त, 2020 तक भेजें।
    विचारों/सुझावों को ntbhutia[@]eci[.]gov[.]in पर ईमेल के जरिए भेजा जा सकता है।

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eci-logo.pngभारत निर्वाचन आयोग एक स्‍वायत्‍त संवैधानिक प्राधिकरण है जो भारत में निर्वाचन प्रक्रियाओं के संचालन के लिए उत्‍तरदायी है। यह निकाय भारत में लोक सभा, राज्‍य सभा, राज्‍य विधान सभाओं और देश में राष्‍ट्रपति एवं उप-राष्‍ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों का संचालन करता है। निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्‍छेद 324 और बाद में अधिनियमित लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम के प्राधिकार के तहत कार्य करता है। 

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