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  1. आदर्श आचार संहिता लागू होना-दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचन 2020- तत्संबंधी।

    सं.437/6/1/ईसीआई/अनुदेश/प्रकार्या./एमसीसी/2020                       दिनांक: 6 जनवरी, 2020
     
    सेवा में
    1.   मंत्रिमंडल सचिव,
          भारत सरकार, राष्ट्रपति भवन,
           नई दिल्ली।
     2.    मुख्य सचिव, 
            राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली सरकार,
             दिल्ली।
     3.   मुख्य निर्वाचन अधिकारीः-
            दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र
            दिल्ली।
     विषय : आदर्श आचार संहिता लागू होना-दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचन 2020- तत्संबंधी।
    महोदय,
    मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि निर्वाचन आयोग ने दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचन आयोजित करने के लिए अनुसूची की उद्घोषणा की है। (प्रेस नोट सं.ईसीआई/प्रे.नो./04/2020, दिनांक 6 जनवरी, 2020 जो आयोग की वेबसाइटwww.eci.gov.in पर उपलब्ध है)।
    2.     इस उद्घोषणा के साथ ही राजनैतिक दलों और अभ्‍यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के उपबंध तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं और तब तक लागू रहेंगे जब तक दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की विधान सभा में साधारण निर्वाचन सम्पन्न  न हो जाएं। इसे केन्द्र/राज्य सरकार, सभी मंत्रालयों/विभागों और केन्‍द्र सरकार / राज्‍य सरकार के सभी कार्यालयों के ध्‍यान में लाया जाए। आपके द्वारा जारी किए गए अनुदेशों की एक प्रति सूचना एवं रिकार्ड हेतु भारत निर्वाचन आयोग को भेजी जाए।
    3.     आपका ध्‍यान ‘सत्‍तासीन दल’ से संबंधित आदर्श आचार संहिता के उपबंधों की ओर आकृष्‍ट किया जाता है जिसमें अन्‍य बातों के साथ-साथ यह कहा गया है कि सत्तासीन दल, चाहे केन्‍द्र में या  संबंधित राज्‍य में यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी ऐसी शिकायत के लिए कोई कारण न दिया जाए कि उसने अपने निर्वाचन अभियान के प्रयोजनों के लिए शासकीय हैसियत का प्रयोग किया है और विशेष रूप से :-
     (i)    (क) मंत्री अपने शासकीय दौरे को निर्वाचन प्रचार अभियान संबंधी कार्य से नहीं मिलाएंगे और निर्वाचन प्रचार अभियान संबंधी कार्य के दौरान शासकीय क्षेत्र या कार्मिकों का उपयोग भी नहीं करेंगे;
           (ख) सरकारी हवाई-जहाज, वाहनों सहित सरकारी परिवहन, तंत्र एवं कार्मिकों का उपयोग सत्तासीन दल के हित को प्रोत्‍साहित करने के लिए नहीं किया जाएगा;
    (ii)    निर्वाचन सभाओं को आयोजित करने के लिए सार्वजनिक स्‍थानों जैसे मैदानों आदि का उपयोग और निर्वाचनों के संबंध में एयरक्राफ्ट के लिए हैलीपैड का प्रयोग अपने द्वारा एकाधिकार रूप से नहीं किया जाएगा। अन्‍य दलों और अभ्‍यर्थियों को उन्‍हीं शर्तों एवं निबंधनों के आधार पर ऐसे स्‍थानों एवं सुविधाओं का उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी जिन बातों एवं निबंधनों पर सत्तासीन दल द्वारा उनका उपयोग किया जाता है;
    (iii)    जहां के लिए निर्वाचनों की घोषणा हुई है या जहां निर्वाचन हो रहे हैं, वहां के विश्राम गृह, डाक बंगला या अन्‍य सरकारी आवास को उपयोग करने के लिए किसी राज्य द्वारा जैड स्केल सुरक्षा प्रदान किए गए राजनीतिक पदाधिकारियों को या जिन्हें विभिन्न राज्यों में या केन्द्र सरकार में इससे ऊपर या इसके समकक्ष स्तर की सुरक्षा प्रदान की गई है, को एक समान आधार पर उपयोग करने के लिए प्रदान किए जाएंगे।यह इस शर्त के अध्यधीन होगा कि ऐसा आवास पहले से ही निर्वाचन सम्बन्धी अधिकारियों या प्रेक्षकों को आबंटित न हो या उनके द्वारा धारित न हो। सरकारी आवास गृह/आराम गृह या अन्य सरकारी आवास इत्यादि में ठहरने के समय ऐसे राजनीतिक पदाधिकारी कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं करेंगे।
    यर्थ
    (iv)    समाचार पत्रों और अन्‍य मीडिया में सरकारी खजाने की लागत से विज्ञापन जारी करने और राजनैतिक समाचारों के दलगत कवरेज के लिए निर्वाचन अवधि के दौरान शासकीय मास मीडिया के दुरुपयोग तथा सत्तासीन दल की प्रत्‍याशाओं को आगे बढ़ाने की दृष्टि से उपलब्धियों के बारे में प्रचार से निष्‍ठापूर्वक बचा जाना चाहिए;
    (v)    मंत्री और अन्य प्राधिकारी, आयोग द्वारा निर्वाचनों की उद्घोषणा किए जाने के समय से विवेकाधीन निधियों में से अनुदानों/भुगतानों को स्‍वीकृति प्रदान नहीं करेंगे; और
    (vi)    आयोग द्वारा निर्वाचनों की उद्घोषणा के समय से, मंत्री और अन्‍य प्राधिकारी –
    (क) किसी रूप में कोई वित्तीय अनुदानों की उद्घोषणा नहीं करेंगे या उनके लिए वचन नहीं देंगे; या
    (ख) किसी प्रकार की परियोजनाओं या योजनाओं की आधारशीला नहीं रखेंगे (लोक सेवकों के सिवाय); या
    (ग) सड़कों के निर्माण, पेयजल सुविधाओं की व्‍यवस्‍था आदि के बारे में कोई वचन नहीं देंगे; या
    (घ) सरकार सार्वजनिक उपक्रमों आदि में ऐसी कोई तदर्थ नियुक्तियां नहीं करेगी जिनमें सत्तासीन दल के पक्ष में मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रभाव हो।
    4.     जैसा कि उपर्युक्‍त पैरा 3 {खंड IV} से ज्ञातव्य है, सरकारी खजाने की लागत से सरकार की उपलब्धियों को उजागर करते हुए इलेक्‍ट्रानिक एवं प्रिंट मीडिया में कोई विज्ञापन जारी नहीं किया जाएगा। यदि कोई विज्ञापन, प्रसारण या प्रिंट मीडिया में प्रकाशन के लिए पहले ही जारी हो चुका है, तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इलेक्‍ट्रानिक मीडिया में ऐसे विज्ञापनों के प्रसारण को तत्‍क्षण रोक दिया जाए और यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आज से ही ऐसा कोई विज्ञापन किन्‍हीं भी समाचारपत्रों, पत्रिकाओं आदि अर्थात् प्रिंट मीडिया में प्रकाशित न किया जाए और इसे शीघ्र वापस ले लिया जाए।
    5.     इस संबंध में आयोग के दिनांक 5 मार्च, 2009 के पत्र सं. 437/6/2009-सीसीबीई के तहत जारी अनुदेश, आयोग की वेबसाइट “http://eci.nic.in/” पर उपलब्‍ध है जो आपकी सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु ‘महत्वपूर्ण अनुदेश’ नामक शीर्षक के अन्तर्गत है।आपके मार्गदर्शन के लिए इस लिंक पर आयोग के अन्‍य सभी अनुदेश भी उपलब्‍ध हैं।
    6.     आयोग इसके अतिरिक्‍त निदेश देता है कि निर्वाचन के संचालन से संबंधित सभी अधिकारियों/कर्मचारियों के स्‍थानान्‍तरण पर पूरी रोक होगी। इनमें निम्‍नलिखित सम्मिलित होंगे किंतु वहीं तक सीमित नहीं होंगे:-
    (i)        मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी और अपर/संयुक्‍त/उप मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी;
    (ii)       मंडल आयुक्‍त;
    (iii)      जिला निर्वाचन अधिकारी, रिटर्निंग आफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर एवं निर्वाचनों के संचालन से संबंधित राजस्‍व अधिकारी;
    (iv)      निर्वाचनों के प्रबंधन से जुड़े पुलिस विभाग के अधिकारी यथा, रेंज महानिरीक्षक एवं उप महानिरीक्षक, वरिष्‍ठ पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक, सब डिवीजनल पुलिस अधिकारी यथा, पुलिस उपाधीक्षक एवं अन्‍य पुलिस अधिकारी, जो लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम, 1951 की धारा 28क के अधीन आयोग में प्रतिनियुक्‍त हैं;
    (v)       निर्वाचन की उद्घोषणा की तारीख से पूर्व उपर्युक्‍त श्रेणियों के अधिकारियों की बाबत जारी किंतु आज की तारीख तक कार्यान्वित नहीं किए गए स्‍थानान्‍तरण आदेशों को इस संबंध में आयोग से विशिष्‍ट अनुमति लिए बिना लागू नहीं किया जाना चाहिए;
    (vi)      यह रोक निर्वाचन के पूरा होने तक प्रभावी रहेगी। आयोग आगे यह और निदेश देता है कि राज्‍य सरकार को राज्‍य में निर्वाचन के प्रबंधन में भूमिका वाले वरिष्‍ठ अधिकारियों का स्‍थानान्‍तरण करने से बचना चाहिए।
    (vii)     ऐसे मामलों में, जहां प्रशासनिक अत्‍यावश्‍यकताओं के कारण किसी अधिकारी का स्‍थानान्‍तरण आवश्‍यक है, वहां संबंध राज्‍य सरकार को पूर्व स्‍वीकृति के लिए पूर्ण औचित्‍य के साथ आयोग से संपर्क करना चाहिए।
    7.     कृपया इस पत्र की पावती भेजी जाए।  

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  2. लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम, 1951 की धारा 126क में संदर्भित अवधि के दौरान मीडिया कवरेज-उल्‍लंघन-तत्‍संबंधी।

    लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम, 1951 की धारा 126क में संदर्भित अवधि के दौरान मीडिया कवरेज-उल्‍लंघन-तत्‍संबंधी। 

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  3. झारखंड विधान सभा का साधारण निर्वाचन 2019-सेवा मतदाताओं के लिए डाक मतपत्रों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से पारेषित करने के संबंध में आयोग का निदेश- तत्संबंधी।

    झारखंड विधान सभा का साधारण निर्वाचन 2019-सेवा मतदाताओं के लिए डाक मतपत्रों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से पारेषित करने के संबंध में आयोग का निदेश- तत्संबंधी।

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  4. झारखण्‍ड की राज्‍य विधान सभा के साधारण निर्वाचन, 2019-निर्वाचकों की पहचान के संबंध में आयोग का आदेश-तत्‍संबंधी।

    सं.3/4/आई.डी./2019/एसडीआर/खण्ड-I
    दिनांक:15 नवंबर, 2019
    सेवा में
          मुख्य निर्वाचन अधिकारी
          झारखण्‍ड, रांची।
     
    विषय: झारखण्‍ड की राज्‍य विधान सभा के साधारण निर्वाचन, 2019-निर्वाचकों की पहचान के संबंध में आयोग का आदेश-तत्‍संबंधी।
     महोदय,
          मुझे झारखण्‍ड की राज्‍य विधान सभा के साधारण निर्वाचन में निर्वाचकों की पहचान के संबंध में आयोग के दिनांक 15 नवंबर, 2019 का आदेश इसके साथ संलग्न करने का निदेश हुआ है।
      2.    आयोग ने यह निदेश दिया है कि सभी निर्वाचन क्षेत्रों में सभी निर्वाचकों, जिन्‍हें निर्वाचक फोटो पहचान पत्र (एपिक) जारी किए गए हैं, उन्हें अपने मत देने से पहले मतदान केन्‍द्र में अपनी पहचान के लिए निर्वाचक फोटो पहचान पत्र  (एपिक) प्रस्‍तुत करना है। जो निर्वाचक एपिक प्रस्‍तुत करने में सक्षम नही होंगे उन्‍हें अपनी पहचान स्‍थापित करने के लिए आदेश के पैरा 7 में उल्लिखित वैकल्पिक फोटो पहचान दस्‍तावेजों में से कोई एक दस्‍तावेज प्रस्‍तुत करना होगा। स्पष्टीकरण के दस्तावेजों की सूची नीचे पुन: प्रस्तुत है-
    (i)  पासपोर्ट,
    (ii)  ड्राइविंग लाइसेंस,
    (iii)   केंद्र/राज्‍य सरकार/लोक उपक्रम/पब्लिक लिमिटेड कम्पनियों द्वारा अपने कर्मचारियों को जारी किए  गए  फोटोयुक्त सेवा पहचान-पत्र,
    (iv)   बैंक/डाकघरों द्वारा जारी की गई फोटोयुक्त पासबुक,
    (v)    पैन कार्ड,
    (vi)    एनपीआर के अंतर्गत आरजीआई द्वारा जारी किए गए स्मार्ट कार्ड,
    (vii)    मनेरगा जॉब कार्ड,
    (viii)   श्रम मंत्रालय की योजना के अन्तर्गत जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड,
    (ix)       फोटोयुक्‍त पेंशन दस्‍तावेज,
    (x)         सांसदों/विधायकों/विधान परिषद सदस्यों को जारी किए गए सरकारी पहचान पत्र
    (xi)       आधार कार्ड
     3.     एपिक के मामले में, उसमें प्रविष्टियों की मामूली विसंगतियां नजरअंदाज कर दी जानी चाहिएं बशर्ते एपिक द्वारा निर्वाचक की पहचान स्थापित की जा सके। अगर निर्वाचक कोई ऐसा निर्वाचक फोटो पहचान कार्ड प्रस्तुत करते हैं जो दूसरे विधान सभा निर्वाचन-क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा जारी किया गया हो तो ऐसे कार्ड भी पहचान के लिए स्वीकृत किए जाएंगे बशर्ते उस निर्वाचक का नाम उस मतदान केन्द्र से संबंधित निर्वाचक नामावली में मौजूद हो जहां निर्वाचक मतदान करने उपस्थित हुए हैं। अगर फोटोग्राफ, आदि के बेमेल होने की वजह से निर्वाचक की पहचान स्थापित करना संभव नहीं हो तो निर्वाचक को आदेश के पैरा 7 में उल्लिखित वैकल्पिक फोटो दस्तावेजों में से कोई एक पेश करना होगा।
    4.    पूर्व के अवसरों पर, आयोग ने फोटो मतदाता पर्ची को पहचान के लिए एक दस्तावेज के रूप में अनुमति दी थी। हालांकि, इसके दुरुपयोग के आधार पर स्टैंड-अलोन पहचान दस्तावेज के रूप में इसके उपयोग के विरूद्ध अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं क्योंकि ये नामावली को अंतिम रूप देने के पश्चात मुद्रित होती हैं और बूथ स्तरीय अधिकारियों के माध्यम से मतदान के नजदीक वितरित की जाती हैं। फोटो मतदाता पर्ची के डिज़ाइन में किसी भी प्रकार का सुरक्षा लक्षण शामिल नहीं है। वास्तव में, फोटो मतदाता पर्ची को एक वैकल्पिक दस्तावेज के रूप में शुरू किया गया था क्योंकि निर्वाचक फोटो पहचान पत्र का कवरेज पूरा नहीं हुआ था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्तमान में 99 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के पास निर्वाचक फोटो पहचान पत्र हैं और 99 प्रतिशत से अधिक वयस्कों को आधार कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, आयोग ने अब यह निर्णय लिया है कि इसके पश्चात से मतदान के लिए फोटो मतदाता पर्ची को स्टैंड-अलोन पहचान दस्तावेज के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। हालांकि, फोटो मतदाता पर्ची को तैयार करना जारी रखा जाएगा और जागरूकता बढ़ाने के प्रयास के एक हिस्से के रूप में मतदाताओं को जारी किया जाएगा। निर्वाचकों को यह स्पष्ट करने के लिए कि मतदान के लिए फोटो मतदाता पर्ची को एक स्टैंड-अलोन पहचान दस्तावेज के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा ये शब्द “इस पर्ची को मतदान केंद्र में पहचान के उद्देश्य के लिए स्वीकार नहीं किया जाएगा। आपसे अपेक्षित है कि आप मतदान के लिए निर्वाचक फोटो पहचान पत्र या आयोग द्वारा निर्दिष्ट 11 वैकल्पिक दस्तावेजों में से एक अपने साथ अवश्य लाएं” बड़े अक्षरों में फोटो मतदाता पर्ची पर मुद्रित किया जाएगा। फोटो मतदाता पर्ची का मुद्रण जारी रहेगा।
    5.    प्रवासी निर्वाचकों को पहचान के लिए केवल अपना मूल पासपोर्ट प्रस्तुत करना होगा।
    6.    यह आदेश, रिटर्निंग अधिकारियों और सभी पीठासीन अधिकारियों के ध्यान में लाया जाए। इस आदेश की प्रादेशिक भाषा में अनूदित एक प्रति हर एक पीठासीन अधिकारी को उपलब्ध कराई जानी चाहिए। आदेश राज्य के राजपत्र में तत्काल प्रकाशित करवाया जाएगा। इस आदेश का सामान्य जनता एवं निर्वाचकों की जानकारी के लिए प्रिंट/इलेक्ट्रानिक मीडिया के माध्यम से तत्काल एवं मतदान का तारीख तक नियमित रूप से बहुत कम अन्तराल पर  व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा। इसमें, समाचार-पत्रों में पेड विज्ञापन शामिल होने चाहिए। आपके राज्‍य/संघ शासित क्षेत्र में सभी राजनीतिक दलों और निर्वाचन लड़ने वाले अभ्‍यर्थियों को इन दिशा-निर्देशों के संबंध में लिखित में भी सूचित किया जाए।
    7.         रिटर्निंग अधिकारियों को अनुदेश दिए जाएंगे कि वे इस आदेश की विवक्षाएं नोट करें और विशेष ब्रीफिंग के माध्यम से सभी पीठासीन अधिकारियों को उसकी विषय-वस्तु से अवगत कराएं। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि इस पत्र की एक प्रति निर्वाचन-क्षेत्र के सभी मतदान केन्द्रों/बूथों में उपलब्ध हो।
    8.         कृपया पावती दें और की गई कार्रवाई की पुष्टि करें।
     
    भवदीय,
    ह./-
    (बिनोद कुमार)
    अवर सचिव

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  5. झारखंड विधान सभा का साधारण निर्वाचन 2019-इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और वीवीपीएटी का इस्तेमाल।

    झारखंड विधान सभा का साधारण निर्वाचन 2019-इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और वीवीपीएटी का इस्तेमाल।

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  6. कर्नाटक राज्य की विधान सभा के लिए उप-निर्वाचन 2019- एग्जिट पोल तत्संबंधी

    सेवा में,
          मुख्य निर्वाचन अधिकारी
          कर्नाटक,
         बंगलौर।
     
    विषयः कर्नाटक राज्य विधानसभा के उप निर्वाचन-2019-एक्ज़िट पोल-तत्संबंधी।
    महोदय,
     मुझे इसके साथ आयोग की दिनाँक 26 नवम्बर, 2019 की अधिसूचना संख्या 576/एक्ज़िट/2019/एसडीआर-खंड I को इस अनुरोध के साथ अग्रेषित करने का निदेश हुआ है कि इसे शासकीय राजपत्र के असाधारण अंक में प्रकाशित किया जाए और इसकी एक प्रति रिकॉर्ड के लिए आयोग को भेजी जाए। 
    इसे न्यूज़ ब्यूरो, मीडिया हाउसिस, रेडियो और टेलीविजन चैनलों इत्यादि सहित सभी संबंधितों के नोटिस में लाया जाए।
     
     
    भवदीय,
    (बिनोद कुमार)
    अवर सचिव
     
    -------------------------------- 
     
    कर्नाटक के शासकीय राजपत्र में
    तत्काल प्रकाशनार्थ 
    भारत निर्वाचन आयोग
    निर्वाचन सदन, अशोक रोड, नई दिल्ली-110001
    सं.: 576/एक्ज़िट/2019/एसडीआर/खंड I                            दिनांकः 26 नवम्बर, 2019
    अधिसूचना
         यतः, आयोग द्वारा दिनाँक 21 सितम्बर, 2019 और 27 सितम्बर, 2019 की अधिसूचना संख्या 100/कर्नाटक-वि.स/2019 के तहत कर्नाटक राज्य में विधान सभा के उप-निर्वाचनों की अनुसूची अधिसूचित कर दी गई है।
    2.  और यतः, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126क के प्रावधानों के अनुसार निर्वाचन आयोग द्वारा इस संबंध में यथाअधिसूचित अवधि के दौरान किसी भी एग्ज़िट पोल आयोजित करने और उसके परिणाम प्रकाशित करने एवं उनको प्रचार-प्रसार करने पर प्रतिबंध होगा।
    3.  अब, इसलिए, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126क की उपधारा (1) के अधीन शक्तियों का प्रयोग करते हुए, भारत निर्वाचन आयोग उक्त धारा की उप-धारा (2) (ख) के उपबंधों के दृष्टिगत दिनॉक 05.12.2019 (गुरूवार) को पूर्वाह्न 07:00 बजे से अपराह्न 06:30 बजे तक के बीच की अवधि को ऐसी अवधि के रूप में अधिसूचित करता है जिसके दौरान आयोग द्वारा कर्नाटक राज्य में 03-अथानी, 04-कागवाड, 09-गोकाक, 81-येल्लापुर, 86-हीरकेरूर, 87-रानीबेन्नुर, 90-विजयनगर, 141-चिक्काबल्लापुर, 151-के.आर.पुरा, 153-यशवंतपुरा, 156-महालक्ष्मी लेआउट, 162-शिवाजी नगर, 178-होसाकोटे, 192-कृष्णराजपेट और 212-हुनसुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों में दिनाँक 05.12.2019 को अधिसूचित मतदान हेतु किसी भी प्रकार के एग्ज़िट पोल का आयोजन करने तथा प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा इसके परिणाम के प्रकाशन या प्रचार अथवा किसी भी अन्य तरीके से उसका प्रचार-प्रसार करने पर प्रतिबंध होगा।
    4.  इसके अतिरिक्त यह भी स्पष्ट किया जाता है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126(1) (ख) के अधीन उपर्युक्त उप-निर्वाचनों के संबंध में मतदान की समाप्ति के लिए नियत समय पर समाप्त होने वाले 48 घंटों के दौरान किसी भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में किसी भी ओपीनियन पोल या अन्य किसी मतदान सर्वेक्षण के परिणामों सहित किसी भी प्रकार के निर्वाचन संबंधी मामले के प्रदर्शन पर प्रतिबन्ध होगा।
     
    आदेश से
    (एन.टी. भूटिया)
    सचिव
     

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  7. कर्नाटक राज्य की विधान सभा के लिए उप-निर्वाचन 2019। सेवा मतदाताओं के लिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से डाक मतपत्रों का पारेषण करने के संबंध में आयोग का निदेश।

    सं.52/2019/एसडीआर/खण्‍ड-I   दिनांक: 19 नवंबर, 2019
    सेवा में,
           मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी
          कर्नाटक
           बैंगलूरू
     
    विषय:  कर्नाटक राज्य की विधान सभा, 2019 के उप निर्वाचन - सेवा मतदाताओं के लिए डाक मतपत्रों के इलेक्‍ट्रॉनिक रूप से प्रेषण के संबंध में आयोग के निदेश।
     महोदय
           मुझे, निर्वाचन संचालन नियम, 1961 के नियम 23 के उप नियम (1) के दूसरे परन्‍तुक के अनुसरण में आयोग द्वारा जारी निदेशों की एक प्रति इसके साथ अग्रेषित करने का निदेश हुआ है जिसमें कर्नाटक राज्य में 03-अथानी, 04-कागवाड, 09-गोकाक, 81-येल्लापुर, 86-हीरेकेरूर, 87-रानीबेन्नूर, 90-विजयनगर, 141-चिक्काबल्लापुर, 151-के.आर.पुरा, 153-यशवंतपुरा, 156-महालक्ष्मी लेआउट, 162-शिवाजी नगर, 178-होसाकोटे, 192-कृष्णराजपेट और 212-हुनसुर  विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों के वर्तमान उप-निर्वाचनों में सेवा मतदाताओं के लिए डाक मतपत्रों को इलेक्‍ट्रॉनिक रूप से प्रेषित करने की विधि निर्धारित की गई है। आपसे अनुरोध है कि सेवा मतदाताओं को डाक मतपत्र इलेक्‍ट्रॉनिक रूप से प्रेषित करने के लिए निदेश की एक प्रति रिटर्निंग अधिकारियों को अग्रेषित करें। इसे जिला निर्वाचन अधिकारियों तथा अन्‍य निर्वाचन प्राधिकारियों को भी संसूचित किया जाए। निर्वाचन लड़ने वाले अभ्‍यर्थियों को भी इस सम्‍बन्‍ध में रिटर्निंग अधिकारियों/जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा बीफ्र किया जाना चाहिए।
    कृपया इसकी पावती दें।
     
    भवदीय,
     
     (बिनोद कुमार)
    अवर सचिव

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  8. कर्नाटक विधान सभा में पंद्रह (15) आकस्मिक रिक्तियों को भरने के लिए उप निर्वाचन- सवेतन अवकाश दिए जाने के अनुदान और शराब की बिक्री पर प्रतिबंध पर अनुदेश।

    कर्नाटक विधान सभा में पंद्रह (15) आकस्मिक रिक्तियों को भरने के लिए उप निर्वाचन- सवेतन अवकाश दिए जाने के अनुदान और शराब की बिक्री पर प्रतिबंध पर अनुदेश।

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  9. कर्नाटक की विधान सभा के उप-निर्वाचन, 2019 - इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों एवं वीवीपीएटी का प्रयोग-तत्संबंधी।

    सं.576/3/ईवीएम/2019/एसडीआर-खंड-I                              दिनांक: 18 नवंबर, 2019
    सेवा में
    मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी
    कर्नाटक
    बेंगलूरू
     
    विषय: कर्नाटक की विधान सभा के उप-निर्वाचन, 2019 - इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों एवं वीवीपीएटी का प्रयोग-तत्संबंधी।
     
    महोदय,
                  मुझे, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 61क के अनुसरण में जारी किए गए आयोग के दिनांक 18 नवंबर, 2019 के निदेश सं.576/3/ईवीएम/2019/एसडीआर-खण्‍ड-। को इसके साथ अग्रेषित करने का निदेश हुआ है जिसमें कर्नाटक राज्य में 03-अथानी, 04-कागवाड, 09-गोकाक, 81-येल्लापुर, 86-हीरेकेरूर, 87-रानीबेन्नूर, 90-विजयनगर, 141-चिक्काबल्लापुर, 151-के.आर.पुरा, 153-यशवंतपुरा, 156-महालक्ष्मी लेआउट, 162-शिवाजीनगर, 178-होसाकोटे, 192-कृष्णराजपेट और 212-हुनसुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों को ऐसे निर्वाचन-क्षेत्रों के रूप में विनिर्दिष्ट किया गया है जिनमें दिनांक 27.09.2019 को अधिसूचित उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल राज्य की विधान सभाओं के हाल ही में हुए उप-निर्वाचनों की भांति मतों का डालना एवं रिकार्ड करना इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के माध्यम से किया जाएगा। आयोग ने यह भी निर्दिष्‍ट किया है कि मतों के पेपर ट्रेल के मुद्रण के लिए उपर्युक्‍त निर्वाचन क्षेत्रों में प्रयोग की जा रही सभी मतदान मशीनों के साथ ड्रॉप बॉक्‍स युक्‍त प्रिंटर लगाया जाएगा। यह निदेश राज्यों के सरकारी राजपत्र में तत्काल प्रकाशित किया जाए और इस राजपत्र की दो प्रतियां आयोग को सूचना एवं रिकार्ड हेतु अग्रेषित की जाएं।
    2.     इसके अतिरिक्त, मुझे मतदान मशीनों के डिजाइन, बैलेटिंग यूनिट पर मतपत्र के रूप एवं भाषा (ओं), निविदत्त मतपत्र के डिजाइन एवं भाषा और मतदान के पश्चात वोटिंग मशीनों को सीलबंद करने के संबंध में निर्वाचनों का संचालन नियम, 1961 के नियम 49क, 49ख, 49त और 49न(2) की ओर आपका ध्यान आकर्षित करने का निदेश हुआ है। इस संबंध में, रिटर्निंग अधिकारियों की पुस्तिका, संस्करण 2019 के अध्याय-11, ‘डाक मतपत्र और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के लिए मतपत्र’, में निहित संगत अनुदेशों का कृपया अनुसरण किया जाए। वीवीपीएटी प्रणाली का प्रयोग करने और मतगणना पूरी होने के उपरांत कागज की पर्चियों को सीलबंद करने से संबंधित अनुदेशों की ओर भी ध्यान आकृष्ट किया जाता है।
    3.     ऊपर उल्लिखित अनुदेश सूचना एवं अनुपालन के लिए संबंधित निर्वाचन-क्षेत्रों के रिटर्निंग अधिकारियों के ध्यान में लाए जाएं।
    4.     आयोग के उपर्युक्‍त निर्णय का व्‍यापक प्रचार भी किया जाए।
    5.     जहां तक मतों की गणना का संबंध है, निर्वाचनों का संचालन नियम, 1961 के नियम 50 से 54क, 60 से 66क और 55ग से 57ग के प्रावधानों और मतों की गणना से संबंधित आयोग के विस्तृत निदेशों और अनुदेशों, जैसा कि ‘रिटर्निंग अधिकारियों की पु‍स्‍तिका-2019’, (जहां ईवीएम का प्रयोग होता है) के अध्‍याय XV में निहित है, तथा इस विषय पर समय-समय पर जारी अन्य अनुपूरक अनुदेशों की ओर भी आपका ध्‍यान आकृष्ट किया जाता है। रिटर्निंग अधिकारियों को अनुदेश दिए जाने चाहिएं कि वे उक्‍त अनुदेशों और निदेशों का निष्‍ठापूर्वक पालन करें।
    6.     कृपया पावती दें।
     
    भवदीय,
     
    ह./-
     (बिनोद कुमार)
    अवर सचिव
     

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  10. Bye Elections to the State Legislative Assembly of Karnataka, 2019- Commission's order regarding identification of electors

    Bye Elections to the State Legislative Assembly of Karnataka, 2019- Commission's order regarding identification of electors

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  11. General Elections to the Legislative Assemblies of Jharkhand 2019 - EXIT POLL -regarding

    General Elections to the Legislative Assemblies of Jharkhand 2019 - EXIT POLL -regarding

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  12. अर्हक तिथि के रूप में दिनांक 01.01.2020 के संदर्भ में फोटो निर्वाचक नामावलियों के विशेष सार पुनरीक्षण और निर्वाचक सत्यापन कार्यक्रम (ईवीपी) हेतु संशोधित अनुसूची – तत्संबंधी।

    सं. 23/2019-ईआरएस (खण्ड-III)         दिनांक: 11 नवंबर, 2019
     
     सेवा में,
            सभी राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी       
    (हरियाणा, झारखण्ड, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली को छोड़कर)
     
    विषय:- अर्हक तिथि के रूप में दिनांक 01.01.2020 के संदर्भ में फोटो निर्वाचक नामावलियों के विशेष सार पुनरीक्षण और निर्वाचक सत्यापन कार्यक्रम (ईवीपी) हेतु संशोधित अनुसूची – तत्संबंधी।
    संदर्भ:-
    1. पत्र सं. 23/पत्र/ईसीआई/प्रकार्या/ईआरडी-ईआर/2019, दिनांक 25.07.2019
    2. पत्र सं. 23/2019-ईआरएस (खण्ड.III), दिनांक 31.07.2019
    3. पत्र सं. 23/पत्र/ईसीआई/प्रकार्या/ईआरडी-ईआर/2019, दिनांक 02.08.2019
    4. पत्र सं. 23/2019-ईआरएस (खण्ड-III), दिनांक 09.08.2019
    5. पत्र सं. 23/2019-ईआरएस (खण्ड-III), दिनांक 30.08.2019
    6. पत्र सं. 23/2019-ईआरएस (खण्ड-III), दिनांक 28.09.2019 एवं
    7. पत्र सं. 23/2019-ईआरएस (खण्ड-III), दिनांक 12.10.2019
    महोदय/महोदया,
    मुझे उद्धृत  विषय के संबंध में  आयोग के उपर्युक्त पत्रों का संदर्भ देने का निदेश हुआ हैं, जिनके द्वारा आवश्यक अनुदेशों/दिशा निर्देशों सहित निर्वाचक सत्यापन कार्यक्रम (ईवीपी) और दिनांक 01.01.2020 के संदर्भ में फोटो निर्वाचक नामावलियों के विशेष सार पुनरीक्षण हेतु अनुसूची संप्रेषित की गई थी। आयोग ने ईवीपी की प्रगति की समीक्षा की है और यह पाया है कि बड़ी संख्या में  समावेशन/विलोपन/सुधार हेतु प्राप्त प्ररूपों का निपटान अभी मसौदा प्रकाशन से पूर्व किया जाना है। आयोग को कुछ मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से अनुरोध प्राप्त हुए हैं जिसमें उन्होंने बचे हुए कार्य को पूरा करने के लिए और समय मांगा है।
    2. उपर्युक्त उल्लिखित स्थिति को ध्यान में रखते हुए, आयोग ने ईवीपी को पूरा करने की समय अवधि बढ़ाने और तद्नुसार नीचे दी गई सारणी के अनुसार विशेष सार पुनरीक्षण, 2020 की अनुसूची में बदलाव करने का निर्णय लिया है।  
    क्रम सं.
    गतिविधि
    अवधि
    1.
     निर्वाचक सत्यापन कार्यक्रम (ईवीपी) तथा मतदान केन्द्रों के यौक्तिकीकरण सहित अन्य पूर्व-संशोधित गतिविधियां
    30.11.2019 तक (शनिवार)
    2.
    एकीकृत मसौदा निर्वाचक नामावली का प्रकाशन
    16.12.2019 को (सोमवार)
    3.
    दावे एवं आपत्तियाँ प्रस्तुत करने हेतु अवधि
    16.12.2019  (सोमवार) से 15.01.2020 (बुधवार) तक
    4.
    दावों एवं आपत्तियों का निपटान
    27.01.2020 (सोमवार) तक
    5.
    अनुपूरकों की तैयारी
    04.02.2020 (मंगलवार) तक
    6.
    निर्वाचन नामावली का अंतिम प्रकाशन
    07.02.2020 (शुक्रवार) को
    3. सभी संबंधित पदाधिकारियों/अधिकारियों को आयोग के उक्त दिशा-निर्देशों के अनुपालन हेतु सूचित किया जाएगा।
    4. सभी उपलब्ध मीडिया के माध्यम से एसएसआर, 2020 की संशोधित अनुसूची का व्यापक प्रचार किया जाएगा। राजनीतिक दलों को संशोधित अनुसूची की सूचना लिखित में दी जाएगी।

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  13. Special Summary Revision of Photo Electoral Rolls w.r.t. 01.01.2020 as the qualifying date and Elector’s Verification Programme in Haryana and Maharashtra - regarding.

    By E-Mail/Speed Post
     
    ELECTION COMMISSION OF INDIA
    NIRVACHAN SADAN, ASHOKA ROAD, NEW DELHI -110001
    No.23/2019-ERS (Vol.-IV)
      Dated: 9th November, 2019
    To,
             The Chief Electoral Officers of
    1.      Haryana, Chandigarh, and
    2.      Maharashtra, Mumbai.
     
    Subject: -        Special Summary Revision of Photo Electoral Rolls w.r.t. 01.01.2020 as the qualifying date and Elector’s Verification Programme - regarding.
     
    Reference:-
        1.  Letter No.23/LET/ECI/FUNC/ERD-ER/2019, dated 25.07.2019
        2.  Letter No.23/2019-ERS (Vol.-III), dated 31.07.2019
        3.  Letter No.23/LET/ECI/FUNC/ERD-ER/2019, dated 02.08.2019
        4.  Letter No.23/2019-ERS (Vol.-III), dated 30.08.2019
        5.  Letter No.23/2019-ERS (Vol.-III), dated 28.09.2019
        6.  Letter No.23/2019-ERS (Vol.-III), dated 12.10.2019
    Sir,
    I am directed to state that as per existing policy, revision of electoral rolls with reference to 1st January of the coming year as the qualifying date is done in later part of each year in all States/UTs (normally in the last quarter of a year). Since general election to Legislative Assemblies of Haryana and Maharashtrahave recently been concluded, the commission has decided that a Special Summary Revision be undertaken in the States of Haryana and Maharashtra to give opportunity to the left out electors and new electors who are going to be eligible for enrollment with reference to 01.01.2020as the qualifying date. The Commission, taking all aspects into consideration, has directed to undertake Special Summary Revision of Photo Electoral Rolls of intensive nature w.r.t. 01.01.2020 as qualifying date in the States of Haryanaand Maharashtra as per the schedule below:-
     
    S.No.
    Activity
    Period
    Pre- Revision activities:-
      1.
    Elector’s Verification Programme (EVP) in a campaign mode with the help of SVEEP and other pre-revision activities including rationalization of polling stations.
     From 11.11.2019 (Monday) to 20.12.2019 (Friday)
    Revision Activities:-
    2.
    Publication of Integrated draft electoral roll
    On 30.12.2019 (Monday)
    3.
    Period for filing claims & objections
    30.12.2019 (Monday) to
    30.01.2020  (Thursday)
    4.
     
     
    Special campaign dates
     
     
    04.01.2020 (Saturday) &
    05.01.2020 (Sunday)
    11.01.2020 (Saturday) &
    12.01.2020 (Sunday)
    5.
    Disposal of claims and objections
    By 10.02.2020 (Monday)
    6.
    Checking of health parameters and obtaining Commission’s permission for final publication
    By 20.02.2020 (Thursday)
    7.
    Updating database and printing of supplements
    By 26.02.2020 (Wednesday)
    8.
    Final publication of electoral roll
    On 02.03.2020 (Monday)
             2.         The Commission has decided that the revision shall be a Special Summary Revision with reference to 01.01.2020 as the qualifying dateand shall be undertaken as per the above schedule, in accordance with provisions contained inManual on Electoral Roll, 2016 along with subsequent relevant instructions.
    3.         The CEO shall go through the schedule and if any minor change in the above schedule is required, a request should be made with full justification to the Secretary/Pr.Secretary in charge of the concerned territorial division in the Commission,for the Commission’s approval within seven days from the date of issue of this letter. No change in the schedule approved by the Commission will be permitted, thereafter.

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  14. डाक मतपत्र के माध्‍यम से मत देने के इच्‍छुक वरिष्‍ठ नागरिकों और दिव्‍यांगजनों हेतु डाक मतपत्र मतदान सुविधा-आयोग की अधिसूचना-तत्‍संबंधी।

    सं.52/2019/एसडीआर/खंड-II                                                              
    दिनांक: 11 नवंबर, 2019
     सेवा में,
          मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी,
         झारखंड, 
         रांची।
    विषय: डाक मतपत्र के माध्‍यम से मत देने के इच्‍छुक वरिष्‍ठ नागरिकों और दिव्‍यांगजनों हेतु डाक मतपत्र मतदान सुविधा-आयोग की अधिसूचना-तत्‍संबंधी।
     
    महोदय,     
          मुझे उपर्युक्‍त विषय पर आपके दिनांक 07.11.2019 के पत्र संख्‍या 6653 और आयोग के दिनांक 02.11.2019 के समसंख्‍यक पत्र के संदर्भ में यह कहने का निदेश हुआ है कि आयोग ने उसमें आपके द्वारा दिए गए प्रस्‍ताव को स्‍वीकार कर लिया है। तद्नुसार, आयोग की दिनांक 02.11.2019 की समसंख्‍यक अधिसूचना को दिनांक 11 नवंबर, 2019 की अधिसूचना के तहत आंशिक रूप से संशोधित किया गया है। उसकी एक प्रति संलग्‍न है।

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  15. झारखण्‍ड विधान सभा निर्वाचनों में वरिष्‍ठ नागरिकों और दिव्‍यांग निर्वाचकों हेतु प्रायोगिक आधार पर डाक मतपत्र सुविधा।

    सं.52/2019/एसडीआर     दिनांक: 11 नवंबर, 2019
    अधिसूचना
     लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम, 1951 की धारा-60 के खंड (ग) के उपबंधों के अधीन दिनांक 02 नवंबर, 2019 की समसंख्‍यक अधिसूचना में आंशिक संशोधन करते हुए आयोग ने निदेश दिया है कि डाक मतपत्र के माध्‍यम से मतदान के प्रयोजनार्थ अधिसूचित 80 वर्ष से अधिक आयु के निर्वाचकों तथा दिव्‍यांग निर्वाचकों की श्रेणी झारखंड राज्‍य में विधान सभा के वर्तमान साधारण निर्वाचन में 01-राजमहल, 05-पाकुड़, 09-जामताड़ा, 15-देवघर, 17-गोड्डा, 36-बो‍कारो और 40-धनबाद विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों में इस श्रेणी में निर्वाचकों तक सीमित होगी।
     

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  16. वर्ष 2017 का संदर्भ मामला संख्‍या 3(पी) [राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्‍ली सरकार अधिनियम, 1991 की धारा 15(4) के अधीन भारत के राष्‍ट्रपति से संदर्भ]...

    File No. 113/3(P)/NCT Delhi/2017/Registry
    COMMISSION’S OPINION DATED 26.08.2019 and Hon’ble President’s Order dated 28th October, 2019. - REFERENCE FROM HON’BLE PRESIDENT OF INDIA - DISQUALIFICATION OF SHRI SANJEEV JHA AND 10 OTHERS, MLA.
    Allegation of disqualification- for- holding office of profit- Co-Chairperson in District Disaster Management Authorities in 11 districts in Delhi.
    Constitution of India- disqualification under Section 15(1)(a)- Held- not disqualified- no remuneration by way of salary, allowances, sitting fee etc. nor any other facility like staff car, office space, supporting staff, telephone, residence provided – Exemption under Item 14 of Schedule to Delhi Members of Legislative Assembly (Removal of Disqualification Act, 1997.
    The Election Commission held that Item 14 of the Schedule to Delhi Members of Legislative Assembly (Removal of Disqualification Act), 1997 provides for exemption for the office of Chairman, Director or Member of a statutory or non-statutory body or committee etc. constituted by Government of NCT, provided that the said Chairman, Director or Member are not entitled to any remuneration.

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  17. Postal ballot facility for the categories of Senior Citizen and Persons with Disabilities-Direction and guidelines-reg

    Postal ballot facility for the categories of Senior Citizen and Persons with Disabilities-Direction and guidelines-reg

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  18. झारखण्ड विधान सभा के साधारण निर्वाचन, 2019 की घोषणा के पश्चात आदर्श आचार संहिता लागू करने के लिए की जाने वाली तत्काल कार्रवाई-तत्संबंधी।

    ­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­सं. 437/6/1/ईसीआई/अनु/प्रकार्या./एमसीसी/2019                          दिनांक : 1 नवम्बर, 2019
     
    सेवा में,
     मंत्रिमंडल सचिव,  
    भारत सरकार, 
    राष्ट्रपति भवन,   
    नई दिल्ली। मुख्‍य सचिव
    झारखण्ड सरकार,
    रांची, और    मुख्य निर्वाचन अधिकारी,  
    झारखण्ड,  
    रांची।         
    विषय : झारखण्ड विधान सभा के साधारण निर्वाचन, 2019 की घोषणा के पश्चात आदर्श आचार संहिता लागू करने के लिए की जाने वाली तत्काल कार्रवाई-तत्संबंधी। 
    महोदय,
           मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि आयोग ने झारखण्ड विधान सभा के साधारण निर्वाचन आयोजित कराने के लिए अनुसूची की घोषणा की है, अतः आयोग द्वारा निर्वाचनों की घोषणा के साथ ही ‘आदर्श आचार संहिता’ तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। झारखण्ड विधान सभा के साधारण निर्वाचन को ध्यान में रखते हुए, आयोग ने आदर्श आचार संहिता के उपबंधों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए निम्नलिखित निदेश दिए हैं:-
    1.        सम्पत्ति का विरूपण- पत्र सं. 437/6/अनुदेश/2015-सीसीएस, दिनांक 29 दिसम्बर, 2015; सं. 437/6/अनुदेश/2012-सीसीएण्डबीई दिनांक 18 जनवरी, 2012 तथा सं. 3/7/2008/जेएस-II दिनांक 7 अक्तूबर, 2008 में निहित ईसीआई अनुदेशों में सम्पत्ति के विरूपण के रोकथाम का प्रावधान है। आयोग ने अपने अनुदेशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने तथा समयबद्ध रूप से कार्रवाई करने के लिए निम्नलिखित यथानिर्धारित निदेश दिए हैं-
    (क) सरकारी सम्पत्ति का विरूपण- इस प्रयोजन के लिए सरकारी परिसर में ऐसा कोई भी सरकारी कार्यालय तथा कैम्पस शामिल होगा, जिसमें कार्यालय भवन स्थित है। सरकारी सम्पत्ति पर मौजूद सभी प्रकार के भित्ति लेखन (वॉल राइटिंग), पोस्टर्स/पेपर्स या किसी अन्य रूप में विरूपण, कटआउट/होर्डिंग, बैनर, फ्लैग आदि निर्वाचनों की घोषणा से 24 घंटे के भीतर हटा दिए जाएंगे।
    (ख) सार्वजनिक सम्पत्ति का विरूपण तथा सार्वजनिक स्थान का दुरूपयोग- सार्वजनिक सम्पत्ति में तथा सार्वजनिक स्थान जैसे रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, हवाई अड्डों, रेलवे पुलों, रोडवेजों, सरकारी बसों, बिजली/टेलीफोन खंभों, नगर निगम/ नगर पालिका/स्थानीय निकाय के भवनों आदि में भित्ति लेखन/पोस्टरों/ किसी अन्य रूप में विरूपण के पर्चे के रूप में सभी अप्राधिकृत राजनीतिक विज्ञापन या, कट आउट/ होर्डिंग, बैनर, फ्लैग इत्यादि को आयोग द्वारा निर्वाचनों की घोषणा से 48 घंटों के भीतर हटा दिया जाएगा।
    (ग) सम्पत्ति का विरूपण- निजी सम्पत्ति पर प्रदर्शित तथा स्थानीय विधि एवं न्यायालय के निदेशों, यदि कोई हो, के अध्यधीन सभी अप्राधिकृत राजनीतिक विज्ञापनों को आयोग द्वारा निर्वाचनों की घोषणा से 72 घंटो के भीतर हटा दिया जाएगा।
    2.        सरकारी वाहनों का दुरूपयोग- आयोग के दिनांक 10 अप्रैल, 2014 के पत्र सं. 464/अनुदेश/2014/ईपीएस में निहित समेकित अनुदेशों में अन्य बातों के साथ-साथ यह उपबंधित है कि किसी राजनीतिक दल, अभ्यर्थी या निर्वाचन से जुड़े किसी अन्य व्यक्ति द्वारा (निर्वाचन से संबंधित किसी सरकारी ड्यूटी का निष्‍पादन करने वाले पदाधिकारियों को छोड़कर) निर्वाचन के दौरान प्रचार करने, निर्वाचन प्रचार संबंधी कार्य या निर्वाचन से संबंधित यात्रा करने के लिए सरकारी वाहन के प्रयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध होगा (उसमें उल्लिखित कुछ अपवादों के अध्‍यधीन)। पद, ‘सरकारी वाहन’ का अर्थ ऐसे वाहनों से है और इसमें ऐसे वाहन शामिल होंगे जो परिवहन के प्रयोजनार्थ प्रयुक्त हों या प्रयुक्त किए जाने योग्य हों, चाहे वे यांत्रिक शक्ति या अन्यथा द्वारा चालित हों, और इनमें केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन, केन्द्र/राज्य सरकार के सार्वजनिक उपक्रम, केन्द्र/राज्य सरकार के संयुक्त क्षेत्र के उपक्रम, स्थानीय निकाय, नगर निगम, विपणन बोर्ड, सहकारी समितिय या ऐसे कोई अन्य निकाय शामिल होंगे जिसमें सार्वजनिक निधियां निवेशित की गई हों, भले ही कुल निधियों में से एक छोटा सा हिस्सा ही हों, । मुख्य निर्वाचन अधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी ईसीआई के अनुदेशों के अनुपालन के लिए निर्वाचनों की घोषणा के 24 घंटे के भीतर आवश्यक कार्रवाई करेंगे।
    3.        सार्वजनिक-राजकोष की लागत पर विज्ञापन- दिनांक 5 मार्च, 2014 के पत्र सं. 437/6/1/2014-सीसी एंड बीई में ईसीआई अनुदेशों में यह प्रावधान है कि निर्वाचन अवधि के दौरान सत्तारूढ़ दल की संभावनाओं को बढ़ाने के उद्देश्य से उपलब्धियों के बारे में सार्वजनिक राजकोष की लागत पर समाचार पत्रों एवं अन्य संचार माध्यमों में विज्ञापन दिए जाने और राजनीतिक समाचार एवं प्रचार-प्रसार के पक्षपातपूर्ण कवरेज के लिए आधिकारिक जनसंचार के दुरूपयोग से निरपवाद रूप से बचा जाना चाहिए। सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डालने के लिए सार्वजनिक राजकोष की लागत पर इलेक्ट्रॉनिक तथा प्रिन्ट मीडिया में कोई भी विज्ञापन जारी नहीं किया जाएगा। यदि किसी विज्ञापन को दूरदर्शन प्रसारण या प्रिन्ट मीडिया में प्रकाशन के लिए पहले ही जारी किया जा चुका है, तो यह अवश्य सुनिश्चित किया जाए कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर ऐसे विज्ञापनों का दूरदर्शन प्रसारण/प्रकाशन तत्काल रोक दिया जाए तथा घोषणा की तारीख से किन्हीं भी समाचार पत्रों, पत्रिकाओं आदि अर्थात् प्रिन्ट मीडिया में ऐसा कोई भी विज्ञापन प्रकाशित न हो, तथा इसे तत्काल वापिस ले लिया जाना चाहिए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी निर्वाचनों की घोषणा के तुरन्त पश्चात् सरकार की उपलब्धियों को दर्शाते हुए प्रिन्ट/इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में किसी भी विज्ञापन को हटाने/रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई करेंगे।
     4.        आधिकारिक वेबसाइट पर राजनीतिक पदाधिकारी का फोटो- दिनांक 20 मार्च, 2014 के पत्र सं. 437/6/अनुदेश/2014- सीसी एंड बीई में निहित ईसीआई अनुदेश में यह प्रावधान है कि केन्द्र/राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध मंत्रियों, राजनीतिज्ञों या राजनीतिक दलों के सभी संदर्भों को हटा दिया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी राज्यीय विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से किसी भी राजनीतिक पदाधिकारी के फोटो को हटाने/छिपाने के लिए तत्काल कार्रवाई करेंगे।
      5.        विकास/निर्माण संबंधी कार्यकलाप-मुख्य निर्वाचन अधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी निर्वाचनों की घोषणा के 72 घंटे के भीतर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन पर किसी शिकायत को विधिमान्य बनाने की स्थिति में संदर्भ हेतु कार्य की निम्नलिखित सूची प्राप्त करेंगेः
                  i.     कार्य की सूची जिसे स्थल पर पहले ही आरंभ किया जा चुका है।
                 ii.      नए कार्य की सूची जिसे स्थल पर आरंभ नहीं किया गया है।
    6.        व्यय अनुवीक्षण तथा आदर्श आचार संहिता के प्रवर्तन के लिए क्रियाकलाप-घोषणा के बाद उड़न दस्ता, एफ एस टी, वीडियो टीम, शराब/नकदी/विनिषिद्ध औषधियों के लिए गहन जांच,ड्रग/स्वापक के अवैध व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए आबकारी विभाग के उड़न दस्तों को तत्काल सक्रिय किया जाना चाहिए।
    7.        शिकायत निगरानी प्रणाली- निर्वाचन कराए जाने वाले राज्य के पास वेबसाइट तथा कॉल सेन्टर पर आधारित एक शिकायत निवारण प्रणाली होगी। कॉल सेन्टर का टोल फ्री नंबर 1950 है। टोल फ्री कॉल सेन्टर नंबर पर कॉल करके या वेबसाइट पर शिकायतें दर्ज करके की जा सकती है। शिकायतकर्ताओं को एसएमएस द्वारा या कॉल सेन्टर द्वारा भी की गई कार्रवाई की सूचना दी जाएगी। शिकायतकर्ता अपनी शिकायतों पर की गई कार्रवाई के विवरण भी देख सकते हैं। यह प्रणाली घोषणा के 24 घंटे के भीतर क्रियाशील होनी चाहिए। सभी शिकायतों को यथासमय एवं उचित रूप से निपटाया जाना चाहिए। जिला स्तर पर 24x7 नियंत्रण कक्ष को अवश्य सक्रिय किया जाए तथा विशेष रूप से पर्याप्त कार्मिक शक्ति तैनात की जाए एवं अन्य लाजिस्टिक्स सुनिश्चित किया जाए, नियंत्रण कक्ष में चौबीस घंटे लोगों की तैनाती की जाए तथा किसी टाल-मटोल या शंका से बचने के लिए उनका ड्यूटी रोस्टर अवश्य बनाया जाए।
    8.        आईटी एप्लीकेशन-घोषणा किए जाने के साथ ही आधिकारिक  वेबसाइट तथा सोशल मीडिया सहित सभी आई टी एप्लीकेशन चालू हो जाएंगी।
    9.        मतदाताओं तथा राजनीतिक दलों की जागरूकता के लिए सूचना का प्रचार-प्रसार करना- निर्वाचन संबंधी प्रमुख गतिविधि का प्रचार मुख्य निर्वाचन अधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी/रिटर्निंग अधिकारी के माध्यम से किया जाएगा। इस उद्देश्य के लिए, सभी आवश्यक सूचना का प्रचार-प्रसार रेडियो, टेलीविजन, सिनेमा के माध्यम से किया जाएगा। सरकारी चैनल में मतदाता शिक्षा सामग्री प्रदर्शित की जाएगी।
    10.      शैक्षणिक संस्थान तथा सिविल सोसाइटी से सक्रिय सहयोग- आम जनता तथा अन्य हितधारकों में निर्वाचन संबंधी सूचना का व्यापक प्रचार करने के लिए शैक्षणिक  संस्थानों तथा सिविल सोसाइटी से सहयोग लिया जा सकता है।
    11.      मीडिया सेन्टर- मीडिया के माध्यम से ईवीएम/वीवीपीएटी के प्रयोग सहित निर्वाचन प्रणाली के बारे में मतदाताओं, राजनीतिक दलों तथा अन्य पणधारियों के मध्य जागरूकता फैलाने के लिए प्रयास किया जाना चाहिए।
    12.      एमसीएमसी/डीईएमसी- दिनांक 24 मार्च, 2014 के पत्र सं. 491/एमसीएमसी/2014/संचार में निहित ईसीआई अनुदेश में यह प्रावधान है कि सभी पंजीकृत राजनीतिक दल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर जारी किए जाने वाले उनके प्रस्तावित राजनीतिक विज्ञापनों के पूर्व प्रमाणन के लिए जिला तथा राज्य स्तर पर, जैसी भी स्थिति हो, मीडिया प्रमाणन एवं अनुवीक्षण समिति (एमसीएमसी) से सम्पर्क करेंगे। आयोग ने उपर्युक्त पत्र में निहित अपने अनुदेशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निदेश दिए हैं।
    13.      नियंत्रण कक्ष- जिला स्तर पर 24x7 नियंत्रण कक्ष तत्काल अवश्य चालू किया जाए तथा जिला निर्वाचन अधिकारी/मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा पर्याप्त कार्मिक शक्ति की तैनाती तथा अन्य लाजिस्टिक्स सुनिश्चित किया जाए। सम्पूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान ईसीआई सचिवालय में शिकायत निवारण केन्द्र सहित एक नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया जाएगा।

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  19. Release of funds under MPs'/MLAs' Local Area Development Scheme - General Election to the Legislative Assembly of Jharkhand, 2019

    Release of funds under MPs'/MLAs' Local Area Development Scheme - General Election to the Legislative Assembly of Jharkhand, 2019

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  20. Application of Model Code of Conduct - General Election to the Legislative Assembly of Jharkhand, 2019

    Application of Model Code of Conduct - General Election to the Legislative Assembly of Jharkhand, 2019

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  21. उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की राज्‍य विधान सभाओं में आकस्मिक रिक्तियों को भरने के लिए उप-निर्वाचन - आदर्श आचार संहिता लागू किए जाने के संबंध में अनुदेश-तत्‍संबंधी।

    सं.: 437/6/1/ईसीआई/अनुदेश/प्रकार्या/एमसीसी/2019                      दिनांक: 25 अक्तूबर, 2019
     
    सेवा में
    मत्रिमंडल सचिव,
    भारत सरकार,
    राष्‍ट्रपति भवन,
    नई दिल्‍ली। मुख्‍य सचिव :-
    (क) उत्तराखंड सरकार, देहरादून,
    (ख) पश्चिम बंगाल सरकार, कोलकाता मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी:-
    (क) उत्तराखंड, देहरादून,
    (ख) पश्चिम बंगाल, कोलकाता  
    विषय:       उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की राज्‍य विधान सभाओं में आकस्मिक रिक्तियों को भरने के लिए उप-निर्वाचन - आदर्श आचार संहिता लागू किए जाने के संबंध में अनुदेश-तत्‍संबंधी।
    महोदय,
    मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि आयोग ने दिनांक 25 अक्तूबर, 2019 के प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रेनो/100/2019 के तहत उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल राज्‍य में निम्‍नलिखित विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों की आकस्मिक रिक्तियों को भरने के लिए उप-निर्वाचन की अनुसूची की घोषणा की है:- 
    राज्य का नाम
         निर्वाचन क्षेत्र का नाम एवं संख्या
    उत्तराखंड
    44- पिथौरागढ़ विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    पश्चिम बंगाल
    34- कालियागंज विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र (अ.जा)
    77- करीमपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
    224- खड़गपुर सदर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
      
    2.  आदर्श आचार संहिता के प्रावधान आयोग द्वारा दिनांक 29 जून, 2017 के इसके पत्र संख्‍या  437/6/अनुदेश/2016-सीसीएस, दिनांक 18 जनवरी, 2018 के पत्र संख्‍या  437/6/विविध/ईसीआई/पत्र/प्रकार्या/एमसीसी/2017 और दिनांक 14 अक्तूबर, 2019 के पत्र सं. 437/6/विविध/ईसीआई/पत्र/प्रकार्या/एमसीसी/2019  (प्रति संलग्‍न) के तहत यथा जारी आंशिक संशोधनों के अध्‍यधीन उस (उन) जिले (जिलों) में तत्‍काल प्रभाव से लागू हो गए हैं जिनमें उप-निर्वाचन होने वाले संसदीय / विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र का सम्‍पूर्ण या कोई भाग अवस्थित है।
     3.   इसे सभी संबंधितों के ध्‍यान में लाया जाए।   

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  22. Bye Elections - Instructions regarding release of funds under MPs'/MLAs' Local Area Development Scheme.

    Bye-election to fill casual vacancies in State Legislative Assemblies of Uttarakhand and West Bengal - Instructions regarding release of funds under MPs'/MLAs' Local Area Development Scheme.

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  23. स्‍थानांतरण/तैनाती एडवाइजरी -राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली

    सं.437/6/1/अनुदेश/ईसीआई/प्रकार्या./एमसीसी/2019
    दिनांक: 17 अक्तूबर, 2019
    सेवा में,
    1.   मुख्‍य सचिव,
    राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली सरकार, नई दिल्ली।
       मुख्य निर्वाचन अधिकारी,
    राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली सरकार, नई दिल्ली।  विषय: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली की राज्‍य विधान सभा का साधारण निर्वाचन-निर्वाचनों के संचालन से संबंधित अधिकारियों का स्‍थानांतरण/तैनाती के लिए एडवाइजरी–तत्‍संबंधी।
    महोदय/महोदया,
    राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली की विद्यमान विधान सभा का कार्यकाल 22 फरवरी, 2020 तक है।
     2.     स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वाचन सुनिश्चित करने के लिए, आयोग इस आशय की एक सुसंगत नीति का अनुपालन करता रहा है कि निर्वाचनरत राज्य/केन्द्र शासित प्रदेशों के निर्वाचन से सीधे जुड़े अधिकारियों को उनके गृह जिलों या उन स्थानों पर तैनात नहीं किया जाता हो जहाँ उन्होंने लंबे समय तक सेवा की है। इसे ध्यान में रखते हुए, लोकसभा और आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम की राज्य विधान सभाओं के साधारण निर्वाचन, 2019 के संबंध में दिनांक 16 जनवरी, 2019 के सम संख्यक पत्र के तहत स्‍थानांतरण/तैनाती संबंधी विस्तृत निदेश जारी किए गए हैं (प्रतिलिपि संलग्न)।
    3.     तद्नुसार, यह सुझाव दिया जाता है कि निर्वाचन के संचालन से सीधे जुड़े सभी सरकारी अधिकारियों के संबंध में निम्नलिखित सुनिश्चित किया जाए-
    कि वह अपने गृह जिले में तैनात न हो कि पिछले चार (4) वर्षों के दौरान उस जिले में उसने 3 वर्ष पूरे नहीं किए हो या 31 जनवरी, 2020 को या उससे पहले तीन वर्ष पूरे कर लेगा/लेगी। कि किसी भी डीईओ/आरओ/एआरओ/पुलिस इंस्‍पेक्‍टर/सब-इंस्‍पेक्‍टर या उनसे उच्‍चतर अधिकारियों को ऐसे विधान सभा निर्वाचन-क्षेत्र/जिले में वापस तैनात न किया जाए या न बने रहने दिया जाए जहां वे 01 फरवरी, 2016 से 31 जनवरी, 2018 के बीच साधारण/विधान सभा में आयोजित उप-निर्वाचन के दौरान तैनात थे। तथापि, इस अवधि के दौरान आयोग की सिफारिश पर तैनात अधिकारियों को उपर्युक्त शर्त से छूट प्राप्त है। 4 वर्षों में से 3 वर्षों की अवधि की गणना करने के लिए, 01.02.2016 से आगे/पहले जाना अपेक्षित नहीं है।    कि ऐसे अधिकारियों/प्राधिकारियों, जिनके विरूद्ध आयोग ने विगत में अनुशासनात्‍मक कार्रवाई की सिफारिश की थी और जो लंबित है या जिसकी परिणति में दंड दिया गया है अथवा जिन्‍हें विगत में निर्वाचन या निर्वाचन संबंधी किसी कार्य में कोई चूक के लिए आरोपित किया गया है, को निर्वाचन संबंधी कोई भी ड्यूटी नहीं सौंपी जाएगी। इसके अतिरिक्‍त आगामी छह महीनों के भीतर सेवानिवृत होने वाले किसी भी अधिकारी को निर्वाचन संबंधी किसी भी कार्य में नहीं लगाया जाएगा।   कि लोक सभा निर्वाचन, 2019 के दौरान आयोग की सिफारिश पर तैनात अधिकारियों को उपर्युक्त स्थानांतरण नीति से छूट दी जा सकती है।  4.     आयोग की उपर्युक्त एडवाइजरी को सख्ती तथा समय पूर्वक अनुपालन के लिए सभी संबंधितों के ध्यान में लाया जाए।

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  24. Commission’s order to Sh. Gopal Bhargav of Bhartiya Janata Party

    Commission’s order to
    Sh. Gopal Bhargav of Bhartiya Janata Party
    and Leader of Opposition in the Legislative Assembly of Madhya Pradesh

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  25. Pre-certification of Political Advertisements in Print Media on the day of poll & one day prior to poll in Haryana & Maharashtra– regarding.

    Pre-certification of Political Advertisements in Print Media on the day of poll & one day prior to poll in Haryana & Maharashtra– regarding.

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ईसीआई मुख्य वेबसाइट


eci-logo.pngभारत निर्वाचन आयोग एक स्‍वायत्‍त संवैधानिक प्राधिकरण है जो भारत में निर्वाचन प्रक्रियाओं के संचालन के लिए उत्‍तरदायी है। यह निकाय भारत में लोक सभा, राज्‍य सभा, राज्‍य विधान सभाओं और देश में राष्‍ट्रपति एवं उप-राष्‍ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों का संचालन करता है। निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्‍छेद 324 और बाद में अधिनियमित लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम के प्राधिकार के तहत कार्य करता है। 

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