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नामांकन से लेकर निर्वाचनों तक (ई2ई) की पूरी प्रक्रिया को दिव्यांगजनों के लिए अधिकाधिक मैत्रीपूर्ण बनाने की आवश्यकता है : मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री सुनील अरोड़ा 

  

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ईसीआई/प्रे नो/118/2019
 दिनांकः 19 दिसम्बर, 2019

 

प्रेस नोट

 

नामांकन से लेकर निर्वाचनों तक (ई2ई) की पूरी प्रक्रिया को दिव्यांगजनों के लिए अधिकाधिक मैत्रीपूर्ण बनाने की आवश्यकता है : मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री सुनील अरोड़ा 

आयोग ने सुगम निर्वाचनों पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया

 भारत निर्वाचन आयोग ने आज सुगम निर्वाचनों पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। आयोग द्वारा दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए निर्वाचनों को मैत्रीपूर्ण बनाने के लिए अब तक उठाए गए कदमों और प्रक्रिया को अधिकाधिक समावेशी और अभिगम्य बनाने के लिए अभी भी अपेक्षित कदमों पर विचार-विमर्श करने हेतु कार्यशाला का आयोजन किया गया।

 मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री सुनील अरोड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि हालांकि दिव्यांगता ऐसी समस्या है जिस पर लोगों और परिवार द्वारा ध्यान दिए जाने की आवश्यकता होती है, तथापि सुगम्यता ऐसी समस्या है जिसके लिए अधिकाधिक संस्थागत उपायों की जरूरत होती है। श्री अरोड़ा ने कहा कि, यह हमारा उद्देश्य है कि जमीनी स्तर पर हम जागरूकता और कार्यकलापों का इष्टतम स्तर प्राप्त करें। बूथ लेवल अधिकारियों से लेकर आयोग तक, प्रत्येक व्यक्ति को मिलकर काम करना चाहिए। जनवरी, 2018 में, सुगम्य निर्वाचनों को साधारण निर्वाचन, 2019 के लिए मार्गदर्शक थीम के रूप में अपनाने का निर्णय लिया गया था। यह आवश्यक है कि हम प्रयासों और कार्यकलापों को इस तरीके से बढ़ाएं कि सुगम्यता के मुद्दे पूरी तरह से खत्म हो जाएं तथा हमारे निर्वाचन सही अर्थों में समावेशी हो जाएं। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि 90% से अधिक दिव्यांगजनों ने हाल ही में झारखंड में संपन्न हुए मतदान में अपना मत दिया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि, निर्वाचन प्रक्रिया की पूरी श्रृंखला ई2ई, अर्थात नामांकन से लेकर निर्वाचनों तक, को दिव्यांगजनों के लिए मैत्रीपूर्ण और सुगम्य होने की आवश्यकता है तथा इन मुद्दों के समाधान के लिए बीएलओ से लेकर आयोग मुख्यालय तक की पूरी प्रणाली को काम करने की आवश्यकता है।

 आयोग की प्रतिबद्धता को पुष्ट करते हुए, निर्वाचन आयुक्त श्री अशोक लवासा ने कहा कि हालांकि मुख्य निर्वाचन अधिकारियों और डीईओ द्वारा किए गए प्रयासों की वजह से आयोग ने लंबा सफर तय किया है तथापि अभी और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि, हमें देश-दुनिया से सीखने की जरूरत है, हमें पता करना चाहिए कि आगे क्या है, और ऐसे ठोस कदमों को पहचानना चाहिए जो हमें आवश्यक बदलाव लाने के लिए सशक्त बनाए। एक त्रिआयामी कार्यनीति पर सुझाव देते हुए श्री लवासा जी ने कहा कि डाटा की बेंचमार्किंग करने, सुगम्यता इंडेक्स के पैमानों के समक्ष इसका निर्धारण करने, आयोग और सीईओ की वेबसाइट को विहित दिशा-निर्देशों के अनुरूप बनाने और निरंतर मूल्यांकन से हमें भावी क्षमता को पहचानने में मदद मिलेगी।

निर्वाचन आयुक्त श्री सुशील चंद्रा ने सिविल सोसाइटी संगठनों और निर्वाचन अधिकारियों द्वारा फील्ड में किए जाने वाले प्रयासों की सराहना की। श्री चंद्रा ने दिव्यांगजनों के निर्वाचन अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता के महत्व पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि, दिव्यांग मतदाताओं को लोकतंत्र का अभिन्न अंग बनाने के लिए, हमें सभी सिविल सोसाइटी संगठनों और संबंधित एनजीओ के सहयोग की जरूरत है।

इस अवसर पर बोलते हुए, महासचिव श्री उमेश सिन्हा ने गंभीर अंतरालों पर ध्यान देने के लिए वांछित ढांचागत बदलावों की आवश्यकता पर बल दिया और ज़मीनी स्तर पर निर्वाचन मशीनरी, सिविल सोसाइटी संगठनों और अन्य स्टेकहोल्डरों के प्रयासों को सराहा। श्री सिन्हा ने हाल ही में हुए झारखंड निर्वाचनों में अस्सी साल से नवासी साल के वृद्धों और दिव्यांगजनों के लिए प्रायोगिक तौर पर शुरू की गई, घर से डाक मतपत्र के विकल्प की अतिरिक्त सुविधा पर प्रकाश डाला। उप निर्वाचन आयुक्त श्री चंद्र भूषण कुमार ने देश भर में स्टेकहोल्डरों से प्राप्त सिफारिशों के महत्व को दोहराया, क्योंकि ये भावी निर्वाचनों को और अधिक समावेशी बनाने का मार्ग प्रशस्त करेंगे। उन्होंने उन संगठनों को धन्यवाद दिया जिन्होंने आज की कार्यशाला में भाग लिया, खासतौर पर आयोग की सुगम्यता परामर्शदाता स्मिता सदासिवन को, जिन्होंने विचार-विमर्श को इतना उपयोगी बनाया।

दिव्यांग मतदाताओं का संपूर्ण मानचित्रण, परिवहन की सुविधा प्रदान करना, विशेष स्वयंसेवकों, सुनिश्चित न्यूनतम सुविधाएं, जैसे रैम्प, व्हीलचेयर, संकेत भाषा, मतदान केंद्र पर ब्रेल युक्त ईवीएम और हाल ही में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा दिव्यांग मतदाताओं के लिए डाक मतपत्रों का प्रावधान कुछ ऐसी पहल हैं जो सुगमता और कोई मतदाता न छूटे के सिद्धांत को सुनिश्चित करती हैं।

 विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों और जिला निर्वाचन अधिकारियों के अलावा, कार्यशाला में सिविल सोसाइटी संगठनों, सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों और विभिन्न दिव्यांगता सेक्टरों का प्रतिनिधित्व करने वाले एनजीओ, जिसमें एएडीआई, सार्थक एजुकेशनल ट्रस्ट, राष्ट्रीय बधिर संघ, एनसीपीईडीपी, राष्ट्रीय दिव्यांगता नेटवर्क, सक्षम, इकोतत्व, एनआईईपीवीडी, पीडीयूएनआईपीपीडी, बीपीए अहमदाबाद और आईएसएलआरटीसी शामिल हैं, ने भाग लिया।

पूरे भारत से उपस्थित स्टेकहोल्डरों के साथ, तकनीकी सत्रों में समूह कार्य और चार समुनदेशित विषयों जैसे कि निर्वाचक पंजीकरण और निर्वाचक नामावली में मानचित्रण; विशेष तौर पर दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए मतदान केंद्र पर सुविधाएं : सुगम मतदाता शिक्षा और संप्रेषण कार्य नीतियां और सुगम निर्वाचनों में प्रौद्योगिकी के उपयोग पर विचार-विमर्श शामिल था। आयोग के लिए बनाए गए विषयगत प्रस्तुतीकरण के अंग के रूप में, प्रतिभागियों ने वर्तमान चुनौतियों के मूल्यांकन, विद्यमान पहल और समाधान ढूंढने पर काम किया।

 आयोग ने एक पुस्तिका भी जारी की, बाधाओं को पार करते हुए- मैंने भी मत डाला’, जो उन अनुभवप्राप्त मतदाताओं के बारे में थी जिन्होंने लोकतंत्र के सबसे बड़े त्यौहार में भाग लेने के लिए सभी बाधाओं को पार किया। अब तक किए गए कार्यों पर प्रकाश डालने, वर्तमान पहल और सभी राज्यों/केंद्र शासित राज्यों और विभिन्न स्टेकहोल्डरों से प्राप्त सिफारिश युक्त सुगम्यता रिपोर्ट 2019 नामक एक व्यापक दस्तावेज को कार्यशाला के प्रतिभागियों के लिए उपलब्ध कराया गया था, जिसमें सुगम निर्वाचनों में नीतियों और मार्गदर्शी सिद्धांतों पर प्रकाश डाला गया था। आज कार्यशाला में संकेत भाषा इंटरप्रेटर, स्क्रीन रीडर एक्सेस दिन की कार्यवाही की महत्वपूर्ण विशेषताएं थीं।




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eci-logo.pngभारत निर्वाचन आयोग एक स्‍वायत्‍त संवैधानिक प्राधिकरण है जो भारत में निर्वाचन प्रक्रियाओं के संचालन के लिए उत्‍तरदायी है। यह निकाय भारत में लोक सभा, राज्‍य सभा, राज्‍य विधान सभाओं और देश में राष्‍ट्रपति एवं उप-राष्‍ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों का संचालन करता है। निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्‍छेद 324 और बाद में अधिनियमित लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम के प्राधिकार के तहत कार्य करता है। 

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