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निर्वाचकीय प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं के कार्य समूह की मुख्य सिफारिशों पर जनमानस से टिप्पणियां/सुझाव आमंत्रित करना-तत्संबंधी


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संख्या 590/ईसीआई/आईआईआईडीईएम/सीईओ सम्मेलन/एलएस-19/सीएनटी/2019

 

प्राक्कथन

 

विषय:  निर्वाचकीय प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं के कार्य समूह की मुख्य सिफारिशों पर जनमानस से टिप्पणियां/सुझाव आमंत्रित करना-तत्संबंधी

 

       साधारण निर्वाचन, 2019 अनेक नवोन्मेषी उपायों का साक्षी रहा जिसमें प्रत्येक मतदान केंद्र पर सुगमता पर समर्पित तरीके से ध्यान केंद्रित करने, दिव्यांग निर्वाचकों को समर्पित परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाने, मतदाताओं की जागरूकता और नैतिक भागीदारी के लिए लक्षित स्वीप सामग्री डिजाइन करने, निर्वाचनों के दौरान किसी कदाचार के विरुद्ध रिपोर्टिंग करने के लिए नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए सी-विजिल एप लांच करने, प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए विभिन्न आईसीटी एप्लीकेशन का उपयोग करने, निर्वाचनों के दौरान सोशल मीडिया का उपयोग करने के लिए विशिष्ट स्वैच्छिक आचार संहिता तैयार करने और निर्वाचनों को 'देश का महात्योहार' बनाने जैसे कार्यकलाप शामिल थे, जिससे भारतीय निर्वाचन इतिहास में अधिकतम 67.4% की मतदाता भागीदारी हासिल करने में सहायता मिली। महिला मतदाताओं की भागीदारी भी 67.18% के रिकार्ड ऊंचाई तक पहुंची। पहली बार, ईटीपीबीएस देशभर में सेवा मतदाताओं के लिए प्रयुक्त हुआ और सेवा मतदाताओं की संख्या बढ़कर 18 लाख हो गई।

      

इस अभूतपूर्व निर्वाचकीय भागीदारी के बाद निर्वाचन आयोग ने निर्वाचकीय प्रबंधन में और सुधार करने के लिए सभी कदमों और उपायों को समेकित करने और सभी सीखों को समाविष्ट करने पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है। तदनुसार जून 2019 में निर्वाचन आयोग ने इन उद्देश्यों के लिए निर्वाचकीय प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर एक कार्यसमूह का गठन किया। प्रत्येक कार्यसमूह की अध्यक्षता/इसका समन्वय आयोग के महासचिव/वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त/उप निर्वाचन आयुक्त/महानिदेशक द्वारा किया जाता है और इसमें विभिन्न राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी शामिल होते हैं। कार्यसमूह ने फील्ड से इनपुट एकत्र किया, इन इनपुट का मौजूदा विधिक और संस्थागत संरचना के संदर्भ में विश्लेषण किया तथा देश में निर्वाचन प्रक्रिया को सारवान बनाने के लिए भविष्य के लिए मार्गों का सुझाव दिया। कार्यसमूह ने विश्व के अन्य निर्वाचन प्रबंध निकायों से संबंधित प्रावधानों का अध्ययन किया और सभी इनपुट को ध्यान में रखकर आयोग को अपनी सिफारिशें पेश की।  

      

इन सिफारिशों के आधार पर आयोग ने नागरिकों और स्टेकधारकों से इन सिफारिशों पर टिप्पणियां/सुझाव आमंत्रित करने के लिए कार्यसमूह की मुख्य सिफारिशों को पब्लिक डोमेन में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है।

      

इन 25 सिफारिशों पर टिप्पणियां/सुझाव 31 मार्च, 2020 तक ई-मेल coordination[@]eci[.]gov[.]in के माध्यम से भेजे जा सकते हैं।

 

(ए. मोना श्रीनिवास)

निदेशक

 

मुख्य सिफारिशें

 

क्र. सं.

सिफारिशें

1

मतदाताओं के लिए सभी सेवाओं अर्थात रजिस्ट्रेशन, पते में परिवर्तन, नाम हटाने आदि के लिए एकल सरलीकृत प्ररूप

 

वर्तमान समय में नागरिक और निर्वाचक विशेष निर्वाचकीय सेवाओं के लिए विभिन्न प्ररूपों का उपयोग करते हैं। इसी प्रकार, पहली बार मतदाता रजिस्ट्रेशन या निर्वाचन क्षेत्र के परिवर्तन के मामले में प्ररूप 6, नाम के विलोपन या आपत्तियां दर्ज करने के लिए प्ररूप 7, निर्वाचन क्षेत्र के भीतर आवास में परिवर्तन के लिए प्ररूप 8, मौजूदा निर्वाचक नामावली में प्रविष्टियों में सुधार के लिए प्ररूप 8 (क)। विदेशी मतदाता के रूप में रजिस्ट्रेशन के लिए प्ररूप 6 (क) और एपिक के प्रतिस्थापन के लिए प्ररूप 1। अनेक प्रकार के प्ररूप संदेह उत्पन्न करते हैं और प्रक्रिया की दक्षता को प्रभावित करते हैं। यह प्रस्ताव है कि मतदाताओं को सभी सेवाओं के लिए एकीकृत और सरलीकृत प्ररूप होना चाहिए।

2

नागरिकों को सहज निर्वाचन सेवाएं प्रदान करने के लिए नेटवर्क और निर्वाचक सेवा केंद्रों (ईएससी)/मतदाता सुविधा केंद्रों का विस्तार करना।

 

जहां तक संभव हो निकटतम स्थान पर सेवा प्रदायगी की जाए और इसके लिए निर्वाचक सेवाएं प्रदान करने हेतु स्थानों का विकेंद्रीकरण महत्वपूर्ण है। नेटवर्क और निर्वाचक सेवा केंद्रों/मतदाता सुविधा केंद्रों का विस्तार करने से नागरिकों को सहजता से निर्वाचन सेवाएं प्रदान करने में सहायता मिलेगी। 

3

दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों (80+आयु वाले) के लिए घर पर निर्वाचक सेवाएं

 

आयोग अपने सूत्रवाक्य कोई भी मतदाता न छूटेके प्रति प्रतिबद्ध है और तदनुसार दिव्यांगजनों और 80 वर्ष से अधिक की आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर पर निर्वाचक सेवाएं प्रदान करने की संभावना तलाश की जानी चाहिए।  

4

17 वर्ष की आयु प्राप्त करने वाले भावी मतदाताओं का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन-स्कूल और कॉलेजों में रजिस्ट्रेशन सुविधाए प्रदान की जाएं।

 

लोकतंत्र में अपेक्षा की जाती है कि जब युवा नागरिक पात्र निर्वाचक बने तो उनका निर्वाचक नामावली में सरलता से नामांकन हो। ऐसे अंतरण को सुविधाजनक बनाने के लिए एक ढांचा बनाए जाने की आवश्यकता है। तदनुसार, 17 वर्ष की आयु प्राप्त करने वाले सभी भावी मतदाताओं के लिए स्कूल/ कालेज स्तर पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध करवाई जानी चाहिए।  

5

ईआरओ नेट के ऑनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए निर्वाचक नामावली तैयार करना।

 

वर्तमान समय में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए निर्वाचक नामावली आफलाइन मोड में तैयार की जाती है। चूंकि निर्वाचनों के लिए निर्वाचक नामावली को ऑनलाइन प्लेटफार्म पर तैयार किया जाता है इसलिए भावी मतदाताओं की सहायता के लिए स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए भी समान प्लेटफार्म तैयार किए जाने की आवश्यकता है।  

6

बूथ लेवल आफिसर सिस्टम में सुधार करना और दस्ती (हैंडहेल्ड) डिजिटल उपकरणों के माध्यम से सेवाओं की प्रदायगी के लिए चरणबद्ध रूप में तकनीकी रूप से सक्षम पूर्णकालिक बीएलओ की नियुक्ति करना

 

बूथ लेवल सुविधाएं देश में निर्वाचन प्रणाली में पैदल सैनिक हैं। वर्तमान समय में ये अधिकारी ज्यादातर गांव/वार्ड स्तर पर आंगनबाडी, आशा वर्कर, अन्य उपलब्ध सरकारी पदाधिकारियों में से आहरित किए जाते हैं जो अपने कार्यालय समय के बाद निर्वाचन सेवा का कार्य संभालते हैं। एक समर्पित बूथ लेवल सिस्टम की आवश्यकता है जो निर्वाचक नामावली के प्रयोजनार्थ आयोग के आईटी आधारित एप्लीकेशंस को प्रचालित करने के लिए डिजिटल उपकरणों को संचालित कर सकें। 

7

मतदाताओं के लिए ई-एपिक का प्रावधान

 

आयोग प्रत्येक मतदाता को एपिक (वोटर आई कार्ड) प्रदान करता है। इस डिजिटल परिवेश में यह सिफारिश की जाती है कि बेहतर गति के लिए मतदाताओं के लिए इस एपिक का ई-संस्करण प्रदान किया जाए।

8

1 जनवरी की एक वार्षिक अर्हक तिथि के स्थान पर मतदाता के रजिस्ट्रेशन के लिए तिमाही/छमाही अर्हता तिथि

 

विधि के अनुसार, 1 जनवरी निर्वाचकों की पात्रता आयु की गणना करने के लिए अर्हक तिथि है। यह व्यवस्था उन सभी नागरिकों को वंचित करती है जो उस विशेष वर्ष में 1 जनवरी के बाद 18 वर्ष की आयु प्राप्त करते हैं किंतु उस वर्ष किसी निर्वाचन के लिए अपात्र रह जाते हैं। आयोग ने 4 अर्हता तिथि-1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई, और 1 अक्तूबर का प्रस्ताव किया है। विधि मंत्रालय ने इस प्रयोजनार्थ दो अर्हता तिथियों यथा 1 जनवरी और 1 जुलाई का सुझाव दिया है।

9

ईसीआई, राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों या जिला स्तर के लिए आधुनिक ऑनलाइन योजना पोर्टल

 

निर्वाचन के लिए अग्रिम रूप से बहुत सारी योजनाएं तैयार करनी होती हैं। आयोग ने प्रत्येक निर्वाचन के लिए विहित समय सीमा के दौरान विभिन्न कार्यकलापों के लिए इसकी जमीनी मशीनरी को निदेशित करने के लिए निर्वाचन प्लानर की डिजाइन पहले से तैयार कर रखी है। अब यह उपुयक्त होगा कि निर्वाचन योजना से संबंधित रियल टाइम डाटा की हैंडलिंग के लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म मौजूद हो।

10

दिव्यांगजनों या वरिष्ठ नागरिकों को त्वरित सेवाएं प्रदान करने के लिए सुगमता पोर्टल

 

आयोग ने निर्वाचक सेवाओं के लिए पीडब्ल्यूडी पोर्टल तैयार किया है तथापि, दिव्यांगजनों और /या वरिष्ठ नागरिकों को त्वरित सेवाएं प्रदान करने के लिए सुगमता हेतु एक समर्पित पोर्टल से उनको और सहायता मिलेगी।

11

जनता की सूचना के लिए संसदीय निर्वाचन क्षेत्र, विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र या मतदान केंद्र की मैपिंग के लिए जीआईएस आधारित निर्वाचन एटलस

 

संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों, विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों और मतदान केंद्रों की क्षेत्रीय सीमाओं के बारे में सूचना का प्रसार करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग जनता के लिए उपयोगी होगा।

12

जनता की सूचनार्थ और निर्वाचनों की अनुसूची के लिए डिजिटल निर्वाचन कैलेंडर

 

निर्वाचन कैलेंडर और निर्वाचनों की अनुसूची के लिए डिजिटल प्लेटफार्म बनाने से जनता में और जागरूकता उत्पन्न होगी।

 

लोकतंत्र में निर्वाचक शिक्षा और जागरूकता एक सतत कार्यकलाप है। इसमें निर्वाचक शिक्षा के महत्व को सूचित करने और देश में निर्वाचन प्रक्रिया में नीतिगत भागीदारी करने के लिए विभिन्न संस्थाओं के जुड़ाव अपेक्षित है। यह भी देखा गया है कि पर्याप्त प्रयासों के परिणामस्वरूप 2019 के लोकसभा निर्वाचन में अब तक का सर्वोच्च मतदान प्रतिशत (67.4) रहा है। इसमें अभूतपूर्व मतदाता भागीदारी, लोगों के लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रदर्शन और जागरूकता देखने को मिली। तथापि, आउटरीच की प्रक्रिया और सूचना के प्रसार को अधिकाधिक सुदृढ़ और कार्यनीतिगत बनाए जाने की आवश्यकता है।

 

तदनुसार यह सिफारिश की जाती है:

 

क. संस्थागत सुदृढ़ीकरण

13

    i.     निर्वाचक शिक्षा और जागरूकता के लिए सरकारी संगठनों, पीएसयू और निजी व्यापार/औद्योगिक संगठनों के साथ भागीदारी

14

   ii.      सभी स्कूलों और कॉलेजों में निर्वाचक साक्षरता क्लब स्थापित करना।

15

   iii.      सभी सरकारी और निजी संगठनों में मतदाता जागरूकता मंच का गठन करना।

16

   iv.      मतदाता जागरूकता के लिए सभी मतदान केंद्रों में चुनाव पाठशाला का गठन करना।

17

   v.      स्कूल के पाठ्यक्रम में मतदाता शिक्षा को शामिल करना।

18

   vi.      मतदाता शिक्षा और जागरूकता के लिए क्षेत्रीय सिक्स हब का गठन करना।

19

ख. नया आउटरीच मीडिया

i.  नई मीडिया प्रौद्योगिकी का सक्रिय उपयोग

ii. मतदाताओं और अन्य स्टेकहोल्डर के लिए वेब टीवी और वेब रेडियो की स्थापना करना

iii. मतदाताओं के लिए दूरदर्शन या रेडियो पर एक साप्ताहिक कार्यक्रम शुरू करना

iv. मतदाता शिक्षा के लिए कम्यूनिटी रेडियो स्टेशन स्थापित करना

v. आवधिक स्वीप टॉक कार्यक्रम

20

मीडिया कार्मिकों, राजनैतिक दलों, सिविल सोसाइटी संगठनों (सीएसओ) के लिए अभिविन्यास कार्यक्रम

 

भारत विश्व के सबसे बड़े निर्वाचन का आयोजन करता है। निर्वाचन प्रक्रिया में मीडिया कार्मिकों, राजनैतिक दलों और सिविल सोसाइटी संगठनों सहित विभिन्न स्टेकहोल्डरों की सक्रिय भागीदारी रही है। तथापि, मौजूदा परिस्थिति में चुनौतियों से निपटने के लिए आयोग अपने दस्तावेजों और प्रक्रियाओं को अपडेट करता रहा है। ऐसे स्टेकहोल्डरों के लिए अभिविन्यास कार्यक्रम तैयार करने की आवश्यकता है ताकि वे निर्वाचन प्रक्रिया में सतत गति बनाए रखने के लिए आयोग द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में जागरूक रहें।   

21

नई मतदान पद्धतियां

 

निर्वाचक भागीदारी में वृद्धि करने के लिए विभिन्न सुरक्षित मतदान पद्धतियों की संभावना और व्यवहार्यता तलाशना।

 

आयोग ने सेवा मतदाताओं के लिए वन वे ऑनलाइन पोस्टल बैलेट अंतरण का पहले ही कार्यान्वयन किया है और 2019 में पूरे देश में इसका कार्यान्वयन किया है। यह देखा गया है कि लगभग 30 प्रतिशत निर्वाचक विभिन्न कारणों से निर्वाचनों में भागीदारी करने में सक्षम नहीं होते हैं, इनमें से कुछ प्रवासी श्रेणी में मतदान करते हैं जो अपने पूर्व स्थान पर मतदाता बने रहते हैं, जैसा कि घरेलू प्रवासी सुविधा पर रिपोर्ट में आकलन किया गया है। आयोग विभिन्न मतदान पद्धतियों की संभावना और व्यवहार्यता की तलाश कर रहा है जो निर्वाचन भागीदारी को आसान बनाने और इसमें सुधार करने के लिए सुरक्षित बनी रहे।  

22

प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया विनियम:

 

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126 के अंतर्गत प्रचार मुक्त (साइलेंस) अवधि के दौरान इलेक्ट्रानिक मीडिया की तर्ज पर प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया को भी प्रतिबंधित किया जाए।

 

मतदान समाप्ति से 48 घंटे पहले तक की प्रचार मुक्त अवधि एक विधिक शुचिता है और यह किए गए वायदों पर मतदाताओं द्वारा प्रतिक्रिया करने और उनके द्वारा अपनी पसंद चुनने की अनुमति देता है। यद्यपि इलेक्ट्रानिक मीडिया को किसी भी निर्वाचन मामले को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करने से प्रतिबंधित किया गया है। तथापि, वर्तमान समय में यह प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफार्म को कवर नहीं करता है। अत: विशेष रूप से एकसमान अवसर प्रदान करने और सीज अवधि के दौरान मतदाताओं को पूर्ण अधिकार देने के लिए यह सिफारिश की जाती है कि प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 की परिधि में लाया जाए।

 

 

23

ऑनलाइन नामनिर्देशन

 

अभ्यर्थियों के लिए नामनिर्देशन फाइल करने के लिए आनलाइन सुविधा प्रदान करने का प्रस्ताव है।

अभ्यर्थी संबंधित रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष स्वयं उपस्थित होकर नामनिर्देशन दायर करते हैं। नामनिर्देशन प्रक्रिया के दौरान परिहार्य गलतियां और रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष लंबी कतारें रहती हैं। ऑनलाइन नामनिर्देशन दायर करने की ऑनलाइन सुविधा तैयार करने से गलतियों से बचने और नामनिर्देशन दायर करने की प्रक्रिया आसान बनाने में सहायता मिलेगी।

24

राजनैतिक दल व्यय

 

वर्तमान समय में राजनैतिक दल द्वारा निर्वाचन के लिए किए जाने वाले व्यय पर कोई सीमा नहीं है। एकसमान अवसर प्रदान करने के लिए इस प्रकार की सीमा होने की आवश्यकता महसूस की जाती है। इसके परिप्रेक्ष्य में वर्ष 2015 में भारत निर्वाचन आयोग ने विधि मंत्रालय को राजनैतिक दलों के व्यय की अधिकतम सीमा को चुनाव लड़ रहे अभ्यर्थियों की संख्या के साथ अलग-अलग अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित अधिकतम सीमा के आधे से गुणा करने के बाद प्राप्त धनराशि तक सीमित करने सिफारिश की थी।

25

नागरिकोन्मुखी सेवाओं का एकीकरण

 

डिजि-लाकर और उमंग जैसे नागरिकोन्मुखी सेवाओं के साथ मतदाता रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का एकीकरण करना । नागरिक डिजी लॉकर/उमंग में अपने दस्तावेज रखें। रजिस्ट्रेशन के प्रयोजनार्थ आवश्यक दस्तावेजों को शीघ्र अपलोड करने/कनेक्ट करने में यह लिंकेज सहायता प्रदान करेगा।  

 

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eci-logo.pngभारत निर्वाचन आयोग एक स्‍वायत्‍त संवैधानिक प्राधिकरण है जो भारत में निर्वाचन प्रक्रियाओं के संचालन के लिए उत्‍तरदायी है। यह निकाय भारत में लोक सभा, राज्‍य सभा, राज्‍य विधान सभाओं और देश में राष्‍ट्रपति एवं उप-राष्‍ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों का संचालन करता है। निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्‍छेद 324 और बाद में अधिनियमित लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम के प्राधिकार के तहत कार्य करता है। 

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