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निर्वाचन लड़ने वाले आपराधिक पूर्ववृत्त वाले व्यक्तियों के संबंध में विवरण प्रकाशित करने की अपेक्षा से संबंधित याचिका पर उच्चतम न्यायालय का निर्णय


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संख्या 3/4/2019/एसडीआर/खंड IV
दिनांक: 16 सितंबर, 2019

 

सेवा में,

सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों

के मुख्य निर्वाचन अधिकारी  

विषय:  निर्वाचन लड़ने वाले आपराधिक पूर्ववृत्त वाले व्यक्तियों के संबंध में विवरण प्रकाशित करने की अपेक्षा से संबंधित याचिका पर उच्चतम न्यायालय का निर्णय;

      

महोदय/महोदया

       मुझे आपका ध्यान आयोग की पत्र संख्या 3/4/2017/एसडीआर/खंड।।, दिनांक 10.10.2018 तथा दिनांक 19.03.2019 के पत्र की ओर आकृष्ट कराने का निदेश हुआ है जिसे माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा 2015 की रिट याचिका संख्या 784 (लोक प्रहरी बनाम भारत संघ और अन्य) और 2011 की रिट याचिका (सिविल) संख्या 536 (पब्लिक इंट्रेस्ट फाउंडेशन और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य) में निर्णय के अनुसरण में आयोग द्वारा जारी किया गया था। उक्त पत्र में आयोग ने निदेश दिया था कि अभ्यर्थी जिनके विरूद्ध आपराधिक मामले, चाहे ऐसे मामले लंबित हो या विगत में दोषसिद्धि के मामले हों, और राजनीतिक दल जिन्होनें ऐसे अभ्यर्थियों को खड़ा किया है, उपर्युक्त पत्र में विहित तरीके से समाचार पत्र और टीवी चैनलों पर एक घोषणा प्रस्तुत करेगा।  

2.     तत्पश्चात, वर्ष 2011 की रिट याचिका (सी) सं. 536 में वर्ष 2018 की अवमानना याचिका (सी) सं. 2192 में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिनांक 13.02.2020 को पारित अपने आदेश में दिए गए निर्देशों के अनुसरण में और आयोग के उपर्युक्त दो पत्रों में दिए गए निर्देशों के अलावा, आयोग ने 6 मार्च, 2020 को अपने पत्र सं. 3/4/2020/एसडीआर/खंड ।।। के जरिए भी यह निदेश दिया है कि सभी राजनैतिक दल जो आपराधिक पूर्ववृत्त वाले अभ्यर्थी को खड़ा करते हैं, चाहे उस पर मामले लंबित हों या विगत में वह दोषसिद्ध हुआ हो, वे लोक सभा और राज्य मंडलों के सभी भावी निर्वाचनों में उपर्युक्त सभी निर्देशों का निरपवाद रूप से पालन करेंगे। राजनैतिक दल द्वारा अभ्यर्थी के रूप में चुने गए आपराधिक मामलों वाले व्यक्ति से संबंधित सूचना के साथ-साथ ऐसे चयन के कारण सहित बिना आपराधिक पूर्ववृत्त वाले अन्य व्यक्तियों को अभ्यर्थी के रूप में क्यों नहीं चुना गया, इससे संबंधित विवरण अभ्यर्थी का चयन किए जाने के 48 घंटों के भीतर या नामनिर्देशन दायर करने की पहली तिथि से पहले कम से कम दो सप्ताह पहले, जो भी पहले हो, समाचार पत्र, सोशल मीडिया प्लेटफार्म और दल की वेबसाइट पर प्रकाशित किए जाएंगे। 

3.     आयोग ने निर्वाचन न लड़े निर्वाचित अभ्यर्थियों द्वारा प्रचार से संबंधित मुद्दों पर भी विचार किया है और निदेश दिया है कि माननीय उच्चतम न्यायालय के उपर्युक्त दिशानिर्देशों के आलोक में ऐसे अभ्यर्थियों को अन्य निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों के लिए भी यथा विहित रीति से अपने आपराधिक पृर्ववृत्त का प्रचार करना आवश्यक होगा। 

4.     आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार ऐसे विवरण प्रकाशित करने के प्रयोजन से प्रचार अभियान के दौरान आपराधिक मामलों के संबंध में विवरण तीन अवसरों पर प्रकाशित किया जाना है। अब आयोग ने मामले पर विचार किया है और निदेश दिया है कि निर्दिष्ट अवधि को निम्नलिखित तरीके से तीन खंडों में रखा जाएगा ताकि निर्वाचकों को अभ्यर्थियों के बारे में जानने का पर्याप्त समय मिले:  

क.     प्रथम प्रचार:     अभ्यर्थिता वापसी के प्रथम चार दिनों के भीतर

ख.     दूसरा प्रचार:     अगले 5 से 8 दिनों के बीच

ग.     तीसरा प्रचार:    9वें दिन से प्रचार अभियान के अंतिम दिन तक (मतदान के दिन से पहले दो दिन तक)  

(व्याख्या: यदि अभ्यर्थिता वापस लेने की अंतिम तिथि महीने का 10वां दिन है और मतदान महीने के 24वें दिन है तो घोषणा प्रकाशन के लिए पहला खंड महीने के 11वें से 14वें दिन के बीच किया जाएगा, दूसरा और तीसरा क्रमश: महीने के 15वें और 18वें दिन के बीच और 19वें और 22वें दिन के बीच किया जाएगा।)  

5.     आयोग के पत्र में उल्लिखित पैरा 1 और 2 में यथा प्रदत्त अन्य दिशानिर्देशो का अनुपालन किया जाना जारी रहेगा।  

6.     निर्वाचन व्यय का लेखा दायर करते समय आपराधिक पूर्ववृत्त, यदि कोई हो, संबंधी अनुदेशों का प्रचार करने से संबंधित विवरण विहित प्रारूप (सी-4) में प्रदान किया जाएगा। राज्य सभा या राज्य विधान परिषद के निर्वाचन के मामले में निर्वाचन के लिए आरओ को ये विवरण प्रस्तुत किए जाएंगे।  

7.     यहां यह उल्लेखनीय है कि जहां तक राजनैतिक दलों का संबंध है, दिनांक 6 मार्च, 2020 के आयोग के पत्र संख्या 3/4/2020/एसडीआर/खंड ।।। के तहत प्रेषित माननीय उच्चतम न्यायालय के दिनांक 13.02.2020 के आदेश के संदर्भ में उनके द्वारा चयनित अभ्यर्थी के संबंध में विवरणों का प्रकटन किया जाना बाध्यकारी होगा, भले ही संवीक्षा के दौरान और/या उसके अभ्यर्थन वापस लेने के कारण उसका अभ्यर्थन अस्वीकृत हो जाता है, का भी अनुपालन इस संबंध में किया जाए।  

8.     यह पुन: दोहराया जा सकता है कि उक्त आपराधिक पूर्ववृत्त के प्रकाशन से संबद्ध अभ्यर्थी या राजनैतिक दल द्वारा व्यय किए गए सभी खर्चे निर्वाचन के लिए किए गए व्यय माने जाएंगे। इस संबंध में आयोग के 19 मार्च, 2019 के पत्र सं. 3/4/3029/एसडीआर/खंड-। का अवलोकन किया जा सकता है। 

9.     आयोग द्वारा यथा विहित विद्यमान प्रारूपों को सुसंगत बनाने के लिए और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में प्रारूप सी1, सी2, और सी3 को उपयुक्त दिशानिर्देशों को जोड़कर संशोधित किया गया है (प्रति संलग्न)।  

10.    इस पत्र को सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के जिला निर्वाचन अधिकारियों/रिटर्निंग अधिकारियों को उनकी ओर से की जाने वाली कार्रवाई के लिए परिचालित किया जा सकता है। इसे राज्य अर्थात रजिस्टर्ड दल की राज्य ईकाई तथा अन्य राज्यों के रजिस्टर्ड राज्यीय दलों तथा आपके राज्य /संघ राज्य क्षेत्र में स्थित मुख्यालय वाले सभी रजिस्टर्ड गैर-मान्यताप्राप्त राजनैतिक दलों को भी इस अनुदेश के साथ परिचालित किया जाएगा कि सभी भावी निर्वाचनों में दलों और उनके अभ्यर्थियों दोनों द्वारा उक्त निदेशों का सख्ती से अनुपालन किया जाए।  

11.    कृपया इसकी पावती दें और की गई कार्रवाई की पुष्टि करें।  


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