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भारत निर्वाचन आयोग द्वारा असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधान सभा निर्वाचनों के लिए सामान्य, पुलिस और व्यय प्रेक्षकों की ब्रीफिंग बैठक का आयोजन


इस फाइल के बारे में

सं. ईसीआई/प्रेस नोट/21/2021
दिनांकः 3 मार्च, 2021

 

प्रेस नोट 

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधान सभा निर्वाचनों के लिए सामान्य, पुलिस और व्यय प्रेक्षकों की ब्रीफिंग बैठक का आयोजन

भारत निर्वाचन आयोग ने आज असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधान सभाओं के लिए आगामी साधारण निर्वाचनों के लिए तैनात किए जाने वाले प्रेक्षकों हेतु एक ब्रीफिंग बैठक आयोजित की, जिसके लिए कार्यक्रम की घोषणा 26 फरवरी, 2021 को की गई थी। 120 से अधिक दूरस्थ स्थानों से 1650 से अधिक प्रेक्षकों ने आज प्रत्यक्ष और वर्चुअल रूप से इस ब्रीफिंग बैठक में भाग लिया। आईएएस, आईपीएस, आईआरएस और अन्य केंद्रीय सेवाओं के अधिकारियों को सामान्य, पुलिस और व्यय प्रेक्षकों के रूप में तैनात किए जाने हेतु शामिल किया गया है। 

प्रेक्षकों को संबोधित करते हुए, मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री अरोड़ा ने कहा कि प्रेक्षक भारतीय लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण पथप्रदर्शकों में से एक हैं। श्री सुनील अरोड़ा ने कहा कि सितंबर, 2017 से भारत निर्वाचन आयोग में अपने कार्यकाल के दौरान, वे 14 राज्यों की विधान सभाओं के निर्वाचनों और 2019 के लोक सभा के साधारण निर्वाचनों से जुड़े रहे हैं, जिनमें प्रेक्षकों ने निर्वाचनों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कोविड की व्यापक चिंताओं के बावजूद, बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा पूरे किए गए अनुकरणीय कार्यों का संज्ञान लेते हुए श्री अरोड़ा ने कहा कि बिहार विधान सभा निर्वाचन वस्तुतः भारतीय निर्वाचनों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बन गए हैं। यहां तक कि बिहार में विधान सभा और संसद के पूर्ववर्ती निर्वाचनों की तुलना में मतदाताओं की भागीदारी बेहतर थी। श्री अरोड़ा ने कहा कि निर्वाचनों का सफल आयोजन हमेशा फील्ड अधिकारियों और भारत निर्वाचन आयोग का संयुक्त प्रयास होता है जिसमें प्रेक्षक और विशेष प्रेक्षक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि इन निर्वाचनों के दौरान, बलों के रेंडमाईजेशन और इनकी तैनाती में विशेष प्रेक्षकों की अतिरिक्त भूमिका होगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र का लचीलापन इस तथ्य में निहित है कि तथाकथित "आम आदमी" (कॉमन मैन) सरकार के गठन में निर्णायक भूमिका निभाता है। भारत निर्वाचन आयोग का उद्देश्य सशक्त, सतर्क, जागरूक और सुरक्षित मतदाता सुनिश्चित करना है। उन्होंने प्रेक्षकों को याद दिलाया कि वे नागरिकों को दृष्टिगोचर और सुलभ होने चाहिए और उन्हें निडर होकर मतदान करने में सक्षम बनाना चाहिए। उन्होंने प्रेक्षकों को चेताया कि यदि कोई भी अपने कर्तव्यों के निर्वहन में ढिलाई बरतते हुए पाया गया तो भारत निर्वाचन आयोग तत्काल और कड़ी कार्रवाई करेगा। उन्होंने पुनः दोहराया कि भारत निर्वाचन आयोग जानबूझकर की गई गलती को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। श्री अरोड़ा ने प्रेक्षकों से कहा कि वे वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और महिला मतदाताओं के लिए यथोचित सुविधाओं की जाँच करने के लिए मतदान केंद्र का दौरा करें ताकि समावेशी निर्वाचनों के सिद्धांत के प्रति आयोग की प्रतिबद्धता सुनिश्चित की जा सके। 

निर्वाचन आयुक्त श्री सुशील चंद्रा ने कहा कि आगामी निर्वाचनों में, 18 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। सामाजिक दूरी के मानदंडों का पालन करने के लिए 80,000 से अधिक मतदान केंद्रों को जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि प्रेक्षकों को फील्ड स्तर के अधिकारियों को उचित निदेश सुनिश्चित करने की आवश्यकता है ताकि भारत निर्वाचन आयोग का संवैधानिक अधिदेश निष्ठापूर्वक साकार हो सके। उन्होंने प्रेक्षकों से उनके सक्रिय कार्यकलापों और उपस्थिति का आह्वान किया, जिससे विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में मतदाताओं के बीच भरोसा कायम हो और सभी प्रवर्तन एजेंसियों की पूर्ण भागीदारी के साथ धनशक्ति अथवा मुफ्त में मदिरा या अन्य सामान बांटने जैसी बुराइयों पर अंकुश लगाने के लिए भरसक प्रयास किए जाएं। श्री चंद्रा ने जोर देते हुए कहा कि प्रेक्षकों को इन निर्वाचनों को पूरी तरह से प्रलोभन मुक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। 

अधिकारियों को संबोधित करते हुए, निर्वाचन आयुक्त श्री राजीव कुमार ने प्रेक्षकों को याद दिलाया कि उनका स्वयं का आचरण लोगों, मीडिया और राजनीतिक संस्थाओं की संवीक्षा के अधीन होगा। प्रेक्षकों को असाधारण आचरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता है ताकि किसी भी कीमत पर निर्वाचन की वैधता और शुचिता बरकरार रहे। उन्होंने कहा कि विश्वसनीयता स्थापित करने के लिए प्रेक्षकों की पहुंच और दृष्टिगोचरता, गुणवत्ता और समयबद्ध प्रतिक्रिया सुनिश्चित करनी होती है। श्री कुमार ने कहा कि प्रेक्षकों की रिपोर्टों के प्रामाणिक साक्ष्य कई बार भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्णय लेने का आधार बनाने हेतु उनके लिए महत्वपूर्ण कारक बन जाते हैं। श्री कुमार ने दोहराया कि प्रेक्षकों को वास्तव में प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सभी कानूनी प्रावधानों, भारत निर्वाचन आयोग के अनुदेशों और नवीनतम परिपत्रों की जानकारी होना आवश्यक है। 

आज आयोजित आधे दिन के ब्रीफिंग सत्रों में भारत निर्वाचन आयोग के महासचिव श्री उमेश सिन्हा द्वारा निर्वाचन योजना, सुरक्षा प्रबंधन और स्वीप के पहलुओं के संबंध में व्यापक ब्रीफिंग की गई। श्री सिन्हा, जो भारत निर्वाचन आयोग की ओर से तमिलनाडु राज्य और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में निर्वाचनों के प्रभारी भी हैं, ने अधिकारियों को तमिलनाडु राज्य और पुडुचेरी केंद्रशासित प्रदेश से संबंधित विशिष्ट मुद्दों की जानकारी दी। वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त श्री धर्मेंद्र शर्मा द्वारा कार्मिकों के प्रशिक्षण और असम राज्य संबंधी इनपुट्स, भारत निर्वाचन आयोग में असम निर्वाचनों के राज्य प्रभारी होने के कारण, श्री सुदीप जैन, उप निर्वाचन आयुक्त द्वारा निर्वाचक नामावली संबंधी मुद्दों और सूचना प्रौद्योगिकी एप्लिकेशन्स तथा ईवीएम-वीवीपैट प्रबंधन प्रणाली पर संक्षिप्त सत्र भी आयोजित किए गए। श्री जैन ने केरल और पश्चिम बंगाल निर्वाचनों के विशिष्ट मुद्दों पर भी प्रकाश डाला। उप निर्वाचन आयुक्त, श्री चंद्र भूषण कुमार और निदेशक व्यय, श्री पंकज श्रीवास्तव ने कानूनी मुद्दों, आदर्श आचार संहिता और व्यय अनुवीक्षण का संक्षिप्त विवरण दिया। श्रीमती शेफाली शरण, प्रवक्ता भारत निर्वाचन आयोग ने मीडिया प्रमाणन और अनुवीक्षण समितियों, पेड न्यूज और सोशल मीडिया के पहलुओं के संबंध में अधिकारियों को संक्षिप्त जानकारी दी। 

इन आगामी निर्वाचनों के लिए, भारत निर्वाचन आयोग ने उन निर्वाचकों को डाक मतपत्र की सुविधा का विकल्प दिया है, जिन्हें दिव्यांगजनों के रूप में चिह्नित किया गया है, जो निर्वाचक 80 वर्ष से अधिक आयु के हैं, जो निर्वाचक अधिसूचित अनिवार्य सेवाओं में नियुक्त हैं और जो निर्वाचक सक्षम प्राधिकारी द्वारा यथाप्रमाणित कोविड-19 पॉजिटिव/संदिग्ध हैं और संगरोध (घर/संस्थागत) हैं। कोविड से सुरक्षित निर्वाचन के लिए सभी व्यक्तियों के लिए पूरी निर्वाचन प्रक्रियाओं के दौरान अनुकरणीय आयोग के व्यापक दिशानिर्देशों में सहायक मतदान केंद्रों की संख्या में वृद्धि, सभी व्यक्तियों की थर्मल स्कैनिंग, सैनिटाइजर और मास्क का उपयोग; मतगणना मेजों के लिए पर्याप्त स्थान वाले बड़े हॉल; मतदान कर्मियों को लाने-ले-जाने के लिए वाहनों की पर्याप्त संख्या, कोविड-19 दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षाकर्मी और निर्वाचन प्रक्रिया में शामिल सभी कर्मियों के लिए टीकाकरण भी शामिल है।

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eci-logo.pngभारत निर्वाचन आयोग एक स्‍वायत्‍त संवैधानिक प्राधिकरण है जो भारत में निर्वाचन प्रक्रियाओं के संचालन के लिए उत्‍तरदायी है। यह निकाय भारत में लोक सभा, राज्‍य सभा, राज्‍य विधान सभाओं और देश में राष्‍ट्रपति एवं उप-राष्‍ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों का संचालन करता है। निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्‍छेद 324 और बाद में अधिनियमित लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम के प्राधिकार के तहत कार्य करता है। 

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