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भारत निर्वाचन आयोग ने साधारण निर्वाचन 2019 पर एटलस का विमोचन किया


इस फाइल के बारे में

सं. ईसीआई/प्रे. नो./70/2021 
दिनांकः 18 जून, 2021

 प्रेस नोट

भारत निर्वाचन आयोग ने साधारण निर्वाचन 2019 पर एटलस का विमोचन किया 

मुख्य निर्वाचन आयुक्त, श्री सुशील चंद्रा ने निर्वाचन आयुक्त श्री राजीव कुमार और निर्वाचन आयुक्त श्री अनूप चंद्र पाण्डेय के साथ 15 जून, 2021 को 'साधारण निर्वाचन 2019-एक एटलस' का विमोचन किया। श्री चंद्रा ने इस अभिनव दस्तावेज को संकलित करने के लिए आयोग के अधिकारियों की सराहना की और आशा व्यक्त की कि यह शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं को भारतीय निर्वाचनों के विशाल परिदृश्य का आगे और अन्वेषण करने के लिए प्रेरित करेगा।

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इस एटलस में इस वृहत कार्य के सभी डाटा और सांख्यिकीय आंकड़े शामिल हैं। इसमें 42 थीमैटिक मैप और 90 सारणी हैं, जो निर्वाचन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते हैं। यह एटलस भारतीय निर्वाचनों से संबंधित रोचक तथ्य, उपाख्यान और कानूनी प्रावधान भी साझा करती है। 

वर्ष 1951-52 में पहले साधारण निर्वाचनों के बाद से, आयोग नैरेटिव और सांख्यिकीय पुस्तकों के रूप में निर्वाचकीय आंकड़ों के संकलन का प्रकाशन करता रहा है। वर्ष 2019 में आयोजित 17वें साधारण निर्वाचन, मानव इतिहास में सबसे बड़ी लोकतांत्रिक कवायद थी, जिसमें भारत के 32 लाख वर्ग किलोमीटर भू-भाग में फैले 10.378 लाख मतदान केंद्रों पर 61.468 करोड़ मतदाताओं की भागीदारी देखी गई। 

भारतीय निर्वाचनों में निर्वाचकीय डाटा, मुख्य रूप से निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों द्वारा निर्वाचक नामावली तैयार करने और रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा निर्वाचनों के संचालन की प्रक्रिया के दौरान एकत्र किया जाता है। तत्पश्चात यह डाटा इन सांविधिक प्राधिकरणों द्वारा समानुक्रमित किया जाता है। तत्पश्चात, निर्वाचकीय प्रक्रिया के समापन के बाद, भारत निर्वाचन आयोग इस निर्वाचकीय डाटा को एकत्र करता है और संकलन, रिकॉर्ड और प्रसार प्रयोजनार्थ विभिन्न रिपोर्टें तैयार करता है। 

अक्तूबर 2019 में, आयोग ने 543 संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराए गए निर्वाचकीय आंकड़ों के आधार पर सांख्यिकीय रिपोर्ट जारी की। इस एटलस में वर्णित नक्शे और सारणी उस जानकारी को दर्शाते हैं और देश की निर्वाचकीय विविधता की बेहतर समझ और जानकारी प्रदान करते हैं। डाटा को प्रासंगिक बनाने के अलावा, ये विस्तृत नक्शे विभिन्न स्तरों पर निर्वाचकीय पैटर्न को व्यक्त करते हैं और साथ ही इसके स्थानिक और कालसूचक विन्यास को दर्शाते हैं। निर्वाचकीय डाटा की बेहतर संकल्पना और निरूपण करने के उद्देश्य से, यह एटलस एक ऐसे सूचनात्मक और विस्तृत दस्तावेज के रूप में कार्य करती है जो भारतीय निर्वाचन प्रक्रिया की बारीकियों को प्रकाश में लाता है और पाठकों को रुझानों और परिवर्तनों का विश्लेषण करने के योग्य बनाता है। 

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 इस एटलस में मुख्य विशेषताओं को प्रकाशित किया गया है, जैसे ऐसे उन 23 राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों का डाटा, जहां महिला मतदान प्रतिशत पुरुष मतदान प्रतिशत से अधिक था; निर्वाचकों, अभ्यर्थियों के संदर्भ में सबसे बड़े और सबसे छोटे संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के बारे में जानकारी और अन्य मापदंडों के साथ-साथ राजनैतिक दलों का प्रदर्शन। 

यह एटलस विभिन्न श्रेणियों में और विभिन्न आयु वर्गों में निर्वाचक और निर्वाचक लिंग अनुपात जैसे विभिन्न तुलनात्मक चार्टों के माध्यम से निर्वाचक डाटा को दर्शाती है। 2019 के साधारण निर्वाचनों में भारतीय निर्वाचनों के इतिहास में सबसे कम लैंगिक अंतर देखा गया। निर्वाचक लिंग अनुपात, जिसने 1971 से सकारात्मक रुझान दिखाया है, 2019 के साधारण निर्वाचनों में 926 था। 

एटलस में वर्ष 2014 और 2019 के साधारण निर्वाचनों के दौरान विभिन्न राज्यों में प्रति मतदान केंद्र निर्वाचकों की औसत संख्या की तुलना भी की गई है। भारत निर्वाचन आयोग ने साधारण निर्वाचन, 2019 में अरुणाचल प्रदेश में प्रति मतदान केंद्र सबसे कम मतदाताओं (365) के साथ 10 लाख से अधिक मतदान केंद्र स्थापित किए। 

विभिन्न अन्य श्रेणियों में इस एटलस में वर्ष 1951 से साधारण निर्वाचनों में लड़ने वाले अभ्यर्थियों की संख्या की तुलना भी की गई है। 2019 के साधारण निर्वाचनों में, देश भर में दाखिल किए गए कुल 11692 नामांकनों में से नामांकन अस्वीकृत किए जाने और नाम वापस लेने के बाद 8054 योग्य अभ्यर्थी थे। 

विवरण देखने के लिए, ई-एटलस https://eci.gov.in/ebooks/eci-atlas/index.html पर उपलब्ध है। यदि सुझाव कोई हो, तो आयोग के ईडीएमडी प्रभाग के साथ साझा किए जा सकते हैं।

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eci-logo.pngभारत निर्वाचन आयोग एक स्‍वायत्‍त संवैधानिक प्राधिकरण है जो भारत में निर्वाचन प्रक्रियाओं के संचालन के लिए उत्‍तरदायी है। यह निकाय भारत में लोक सभा, राज्‍य सभा, राज्‍य विधान सभाओं और देश में राष्‍ट्रपति एवं उप-राष्‍ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों का संचालन करता है। निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्‍छेद 324 और बाद में अधिनियमित लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम के प्राधिकार के तहत कार्य करता है। 

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