इस फाइल के बारे में
सं. 437/ईसीआई/यूकेडी/एलए/एनएस-II/2022
दिनांकः 5 फरवरी, 2022
नोटिस
यतः, आयोग ने दिनांक 08 जनवरी, 2022 के प्रेस नोट सं. ईसीआई/पीएन/3/2022 के तहत उत्तराखंड विधान सभा के साधारण निर्वाचन, 2022 आयोजित करने के लिए अनुसूची की घोषणा की है और निर्वाचनों की घोषणा के साथ ही राज्य में आदर्श आचार संहिता के उपबंध लागू हो गए हैं; और
2. यतः, राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के भाग "सामान्य आचरण" के खंड (1) और (2) में अन्य बातों के साथ-साथ उपबंध हैं, कि-
(1) "कोई दल या अभ्यर्थी ऐसी किसी गतिविधि में शामिल नहीं होगा जिससे भिन्न जातियों और धार्मिक या भाषायी समुदायों के बीच विद्यमान मतभेद अधिक गंभीर हो सकते हैं या परस्पर नफरत हो सकती है या तनाव पैदा हो सकता है।"
(2) "यदि राजनीतिक दलों की आलोचना की जाए, तो यह उनकी नीतियों और कार्यक्रमों, गत रिकॉर्ड और कार्य तक ही सीमित रखी जाएगी। दलों और अभ्यर्थियों को अन्य दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं की सार्वजनिक गतिविधियों से असंबद्ध निजी जीवन के सभी पहलुओं की आलोचना करने से बचना होगा। असत्यापित आरोपों या मिथ्या कथन के आधार पर अन्य दलों या उनके कार्यकर्ताओं की आलोचना करने से बचना होगा।"
3. यतः, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 (3क) अन्य बातों के साथ-साथ उपबंध करती है, कि-
"किसी अभ्यर्थी या उसके अभिकर्ता या अभ्यर्थी या उसके निर्वाचन अभिकर्ता की सहमति से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उस अभ्यर्थी के निर्वाचन की सम्भाव्यताओं को अग्रसर करने के लिए या किसी अभ्यर्थी के निर्वाचन पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के लिए शत्रुता या घृणा की भावनाएं भारत के नागरिकों के विभिन्न वर्गों के बीच धर्म, मूलवंश, जाति, समुदाय या भाषा के आधार पर संप्रवर्तन या संप्रवर्तन का प्रयत्न करना।"; और
4. यतः, भारतीय दण्ड संहिता की धारा 153 (ए) (1) (क) अन्य बातों के साथ-साथ उपबंध करती है, कि-
"153क. धर्म, मूलवंश, जन्म-स्थान, निवास-स्थान, भाषा इत्यादि के आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता का संप्रवर्तन और सौहार्द बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कार्य करना- (1) जो कोई – (क) बोले गए या लिखे गए शब्दों या संकेतों द्वारा या दृश्यरूपणों द्वारा या अन्यथा विभिन्न धार्मिक, मूलवंशीय या भाषायी या प्रादेशिक समूहों, जातियों या समुदायों के बीच असौहार्द अथवा शत्रुता, घृणा या वैमनस्य की भावनाएं, धर्म, मूलवंश, जन्म-स्थान, निवास-स्थान, भाषा, जाति या समुदाय के आधारों पर या अन्य किसी भी आधार पर संप्रवर्तित करेगा या संप्रवर्तित करने का प्रयत्न करेगा।"; और
5. यतः, आयोग को दिनांक 04.02.2022 को ऑल इंडिया काँग्रेस कमेटी (एआईसीसी) से एक शिकायत मिली है, जिसमें कहा गया है कि भारतीय जनता पार्टी, उत्तराखंड (@BJP4UK) ने दिनांक 03.02.2022 को रात 9:34 बजे, अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल के माध्यम से, उत्तराखंड प्रदेश कॉग्रेस अभियान समिति के अध्यक्ष और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, श्री हरीश रावत की एक विकृत छवि प्रस्तुत की है, जिसमें उन्हें एक विशेष समुदाय से संबंधित होने के रूप में गलत तरीके से चित्रित किया गया है (प्रतिलिपि संलग्न) और निम्नानुसार ट्वीट किया गया है-
हार दा, लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने के लिए पुलिस का सहारा, किस बात का डर है आपको, ऐसे क्यों बौखला गए हैं आप? लेकिन आप जितनी मर्जी FIR करवा लीजिए भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता नहीं झुकेगा और देवभूमि की संस्कृति को बचाने की लड़ाई लड़ता रहेगा।
6. यतः, आयोग ने इस मामले पर सावधानीपूर्वक विचार किया है और उसकी सुविचारित राय है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) उत्तराखंड ने राजनीतिक दलों और अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के भाग "सामान्य आचरण" में निर्धारित खंड (1) और (2) तथा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा-123 की उप-धारा (3क) एवं भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 153(क) की उप-धारा 1(क) में निहित प्रावधानों का उल्लंघन करके ऐसे बयान दिए गए हैं जो उत्तेजक है और भावनाओं को गंभीर रूप से भड़का सकते हैं तथा कानून एवं व्यवस्था की स्थिति को बिगाड़ सकते हैं जिससे निर्वाचन प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
7. अब, जैसा कि एआईसीसी द्वारा आरोप लगाया गया है, इसलिए, आयोग भारतीय जनता पार्टी, उत्तराखंड को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर श्री हरीश रावत की विकृत छवि डालने पर अपना रुख स्पष्ट करने का अवसर देता है। इस नोटिस की प्राप्ति के 24 घण्टे के भीतर स्पष्टीकरण आयोग के पास पहुंच जाना चाहिए, ऐसा नहीं करने पर आयोग इस मामले में भाजपा उत्तराखंड को आगे संदर्भ दिए बिना उचित निर्णय लेगा।
आदेश से,
(राहुल शर्मा)
प्रधान सचिव
सेवा में,
राज्य अध्यक्ष,
भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड
29, बलबीर रोड, डालनवाला
देहरादून, उत्तराखंड-248001