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    श्री अशोक लवासा


    ECI

    निर्वाचन आयुक्त

    श्री अशोक लवासा ने दिनांक 23 जनवरी, 2018 को भारत के निर्वाचन आयुक्‍त के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के हरियाणा कैडर (1980 बैच) के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। भारत के निर्वाचन आयुक्‍त के रूप में अपनी नियुक्ति से पहले श्री लवासा 31 अक्‍तूबर, 2017 को केन्‍द्रीय वित्त सचिव के रूप में अधिवर्षिता की आयु प्राप्‍त करने पर सेवानिवृत्त हुए थे।

    केन्‍द्रीय सरकार और हरियाणा राज्‍य सरकार में विभिन्‍न महत्‍वपूर्ण पदों को धारित करते हुए, श्री लवासा के पास 37 वर्षों से अधिक की सक्रिय सेवा के नेतृत्‍व का प्रचुर अनुभव है और उन्‍हें सुशासन तथा नीति सुधार पहल के लिए भी जाना जाता है जो उनके भारत सरकार तथा राज्‍यीय स्‍तरों पर सक्रिय सेवा अवधि के दौरान की गईं। भारतीय प्रशासनिक सेवा का सदस्‍य होने के कारण, वे न केवल अपने कार्य से संबंधित नियमित प्रशासन देखते रहे हैं अपितु उन्‍होंने उन क्षेत्रों में भी कार्य किया है जहां अंतर्राष्‍ट्रीय अनुभवों के साथ-साथ आनुभवजन्‍य प्रमाणों के शोध और विश्‍लेषण की आवश्‍यकता होती है।

    21 अक्‍तूबर, 1957 को जन्‍मे, श्री लवासा ने अपनी स्‍नातक उपाधि (अंग्रेजी ऑनर्स) और एमए (अंग्रेजी) दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय से की थी। उनके पास सदर्न क्रॉस यूनिवर्सिटी, न्‍यू साउथ वेल्‍स से एम बी ए और एम फिल (रक्षा और सामरिक अध्‍ययन) की डिग्री भी है।

    भारत निर्वाचन आयुक्‍त के रूप में अपनी नियुक्ति से पहले, श्री लवासा ने कई महत्‍वपूर्ण पदों पर कार्य किया यथा केन्‍द्रीय वित्त सचिव; केन्‍द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन सचिव; केन्‍द्रीय नागर विमानन सचिव, विद्युत मंत्रालय में अपर सचिव; गृह मंत्रालय; अर्थिक कार्य विभाग (वित्त मंत्रालय) में संयुक्‍त सचिव; प्रधान सचिव और वित्तीय आयुक्‍त (नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत, विद्युत); मुख्‍य समन्‍वयक (उद्योग); हरियाणा के रेज़ीडेन्‍ट कमीश्‍नर; हरियाणा राज्‍य फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर मिल्‍स लि. के प्रबंध निदेशक; एच एस आई आई डी सी; पर्यटन निगम; के प्रबंध निदेशक, निदेशक, उद्योग; निदेशक, जन संपर्क; निदेशक, हरियाणा राज्‍य औद्योगिक विकास निगम तथा अन्‍य कई महत्‍वपूर्ण पद।

    श्री लवासा ने 30 अप्रैल, 2016 से 31 अक्‍तूबर, 2017 तक केन्‍द्रीय वित्त सचिव के रूप में कार्य किया। उनके मार्गदर्शन और परामर्श के अधीन रेलवे बजट का 92 वर्षों बाद सामान्‍य बजट में विलय किया गया, योजना और गैर-योजना के मध्‍य का विभेद मिटा दिया गया, परिणामी बजट प्रस्‍तुत किया गया और बजट प्रस्‍तुतीकरण की तारीख को पहले कर दिया गया ताकि अनुमोदन प्रक्रिया 31 मार्च तक पूर्ण हो जाए और इसे लैंडमार्क 2017-18 बजट का नाम दिया गया। उन्‍होंने सामान्‍य वित्तीय नियमों के संशोधन को भी अंतिम रूप दिया जो कि वर्ष 1947 के बाद से केवल तीसरी बार ही किए गए थे।

    वित्त मंत्रालय में अपनी कार्यावधि से पहले उन्‍होंने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में भारत सरकार के सचिव के रूप में लगभग दो वर्ष तक का कार्यकाल पूरा किया था। पर्यावरण सचिव के रूप में उन्‍होंने सी ओ पी 21 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्‍व किया और पेरिस समझौता पर सफलतापूर्वक सन्धि-वार्ता की। इसके अतिरिक्‍त भी उन्‍होंने मांट्रियल प्रोटोकॉल और इंटरनेशनल कनवेंशन ऑन डेज़र्टीफिकेशन' पर समझौता करने हेतु भारतीय दल की अगुवाई की। उन्‍होंने वर्ष 2015 में यूएनएफसीसीसी को प्रस्‍तुत करने के लिए भारत के राष्‍ट्रीय स्‍तर पर निर्धारित योगदान को अंतिम रूप दिया। उपर्युक्‍त के अतिरिक्‍त पर्यावरण और वन मंजूरी की ऑनलाइन प्रणाली का कार्यान्‍वयन, पर्यावरण प्रभाव आकलन कार्यान्वित करने हेतु विचारार्थ विषयों का मानकीकरण करना, वैज्ञानिक रूप से रेत खनन हेतु नीति बनाना, भवनों हेतु पर्यावरण मंजूरी प्रक्रिया को नया रूप देना और प्रदूषणकारी उद्योगों का पुन: वर्गीकरण करना जैसी कुछ ऐसी उपलब्धियां हैं जिन्‍हें पर्यावरण मंत्रालय में उनके कार्यकाल के दौरान पूरा किया गया।

    श्री लवासा ने आठ माह की अवधि के लिए नागर विमानन मंत्रालय में भी भारत सरकार के सचिव के रूप में कार्य किया है। उन्‍होंने एयरलाइंसों के लिए क्षेत्रीय संपर्क नीति का प्रारूपण, 'नो फ्रिल एयरपोर्ट' की अवधारणा और हवाई क्षेत्र का फ्लेक्‍सी उपयोग सहित विभिन्‍न पहल कीं। विद्युत मंत्रालय के अपर सचिव के रूप में उन्‍होंने वर्ष 2012 में विद्युत वितरण कंपनियों हेतु वित्तीय पुनर्गठन योजनाएं तैयार की और बिजली की प्रतिस्‍पर्धात्‍मक खरीद हेतु मानक बोली दस्‍तावेजों की समीक्षा की। आर्थिक कार्य विभाग के संयुक्‍त सचिव (एशिया विकास बैंक और अवसंरचना प्रभाग) के रूप में वह भारतीय रेल की पुनर्गठन विशेषज्ञ समिति के सदस्‍य थे जिसकी अगुवाई श्री राकेश मोहन द्वारा की गई थी और इस समिति ने लगभग दो वर्षों तक कार्य किया और रेलवे क्षेत्र में सुधारों की रूपरेखा तैयार की।

    श्री लवासा फोटोग्राफी के शौकीन हैं और साहसिक गतिविधियों और खेलों में उनकी अत्‍यन्‍त रूचि है। उन्‍होंने वर्ष 2006 में रूपा द्वारा प्रकाशित 'एन अनसिविल सर्वेंट' नामक एक पुस्‍तक भी लिखी है। अपने करियर की शुरूआत में उन्‍होंने अगस्‍त 1978 से दिसम्‍बर 1979 तक दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय में लेक्‍चरार के रूप में कार्य किया और दिसम्‍बर 1979 से जुलाई 1980 तक भारतीय स्‍टेट बैंक में प्रोबेशनरी अधिकारी के रूप में कार्य किया।

    Edited by ECI

      



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