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  • श्री राजीव कुमार


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    निर्वाचन आयुक्त

    श्री राजीव कुमार ने 1 सितंबर, 2020 को भारत निर्वाचन आयोग में निर्वाचन आयुक्त के रूप में अपना कार्यभार संभाला। निर्वाचन आयोग में कार्यभार संभालने से पहले, श्री राजीव कुमार लोक उद्यम चयन बोर्ड (पीईएसबी) के अध्यक्ष थे। इन्होनें अप्रैल 2020 में पीईएसबी के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था। श्री राजीव कुमार बिहार/झारखंड कैडर के 1984 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं और फरवरी 2020 में भारतीय प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त हुए।  

    19 फरवरी, 1960 को जन्मे और बीएससी, एलएलबी, पीजीडीएम और लोक नीति में स्नातकोत्तर की शैक्षणिक उपाधियां प्राप्त करने वाले, श्री राजीव कुमार के पास भारत सरकार की सेवा में 38 वर्ष से अधिक समय तक कार्य करने का व्यापक अनुभव है, जिसके दौरान इन्होंने केंद्र और राज्य कैडर में विभिन्न मंत्रालयों में सोशल सेक्टर, पर्यावरण और वन, मानव संसाधन, वित्त और बैंकिंग आदि क्षेत्रों में कार्य किया।  

    वित्त सचिव-सह-सचिव, वित्तीय सेवाएं विभाग, भारत सरकार, (सितम्बर 2017 - फरवरी 2020) के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान इन्हें बैंकिंग, बीमा और पेंशन सुधार की देखरेख का दायित्व सौंपा गया। श्री कुमार ने वित्तीय सेवा क्षेत्र का पर्यवेक्षण किया और इन्‍होंने अन्य बातों के साथ-साथ, बड़ी-बड़ी पहल/सुधार करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया। एन.पी.ऐ की पारदर्शी पहचान, उनकी वसूली बैंकों का पुनः पूँजीकरण और व्यापक सुधार की रणनीति पर कार्य किया। अनेक स्‍तरों पर काले धन की आवाजाही पर अंकुश लगाने की शुरुआत करते हुए, श्री कुमार ने ऐसी ~3.38 लाख शेल कंपनियों के बैंक खाते फ्रीज कर दिए जिनका इस्‍तेमाल जाली इक्विटी बनाने के लिए किया जा रहा था। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) को पर्याप्त मात्रा में पूंजी की उपलब्‍धता सुनिश्चित करने और डिफॉल्ट को रोकने के लिए 2.11 लाख करोड़ रु. की धनराशि से पीएसबी के लिए अप्रत्‍याशित पुनर्पूंजीकरण कार्यक्रम की योजना को कार्यान्वित किया। उन्हें बैंकिंग क्षेत्र की कायापलट करने और थोड़े समय में ही इस आशय की नींव रखने का श्रेय दिया जाता है कि ऋणदाताओं और ऋणकर्ताओं, दोनों को ऋण संबंधी मानकों का कड़ाई से पालन करना है। 

    श्री राजीव कुमार, भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई), भारतीय स्टेट बैंक, नाबार्ड के निदेशक; सदस्य, आर्थिक आसूचना परिषद (ईआईसी); सदस्य, वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (एफएसडीसी); सदस्य, बैंक बोर्ड ब्यूरो (बीबीबी); सदस्य, वित्तीय क्षेत्र नियामक नियुक्ति खोज समिति (एफएसआरएएससी), तथा कई ऐसे अन्य बोर्डों और समितियों के साथ-साथ सिविल सेवा बोर्ड के भी सदस्य रहे हैं। 

    श्री कुमार ने वित्तीय क्षेत्र में बैंकों के मेगा मर्जर एवं अधिग्रहण की संकल्पना बनाने और उसे मूर्त रूप देने में अभूतपूर्व योगदान दिया। उन्होंने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) को भी सुव्यवस्थित किया जिससे केंद्र सरकार के लगभग 18 लाख कर्मचारियों को लाभ मिला। इसमें केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनिवार्य योगदान में वृद्धि करना, केंद्र सरकार के कर्मचारियों को पेंशन निधियों और निवेश के पैटर्न का विकल्प चुनने की स्वतंत्रता प्रदान करना शामिल था। इसके अतिरिक्त, उन्होंने कर संबंधी अन्य राहतें भी सुनिश्चित कीं। 

    श्री कुमार कानून अथवा मौजूदा पॉलिसी के क्षेत्र में यथाअपेक्षित टेक्नोलॉजी का प्रयोग करके तथा/या आवश्यक संशोधन करके पारदर्शिता लाने, सूचना आरबीट्रेज को खत्म करने और समाज के संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा के लिए अत्यधिक प्रतिबद्ध रहे हैं। इस दिशा में उनके द्वारा की गई कुछ नई पहल इस प्रकार है- गरीब जमाकर्ताओं को अत्यधिक सुरक्षा प्रदान करने तथा अवैध जमा ग्रहण स्कीमों (पोंजी) की चुनौती से निपटने के लिए अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 को पारित करवाना; पीएमसी जैसे बैंकों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए बहुराज्यीय सहकारी बैंकों के ऊपर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की विनियामक शक्तियों को सुदृढ़ बनाने के लिए बैंककारी विनियमन अधिनियम में संशोधन करना।  

    श्री कुमार 2015 से 2017 तक कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग में स्थापना अधिकारी भी रहे हैं और उससे पहले इन्होंने व्यय विभाग में संयुक्त सचिव के रूप में भी कार्य किया है। इसके अतिरिक्त, इन्होंने जनजातीय कार्य मंत्रालय, पर्यावरण और वन मंत्रालय और राज्य कैडर में शिक्षा विभाग का दायित्व भी संभाला है।  

    इन्होंने भारत सरकार के कार्मिक प्रबंधन में ईमानदारी और सत्यनिष्ठा को प्रोत्साहित करने और पारदर्शी बनाने में अग्रिम भूमिका निभाई। ये नीति आयोग के पुनर्गठन के लिए सृजित टॉस्क फोर्स के सदस्य भी थे और उसकी रिपोर्ट के आधार पर नीति आयोग की वर्तमान संरचना को मंजूरी दी गई थी। 

    वर्ष 2001 से 2007 के दौरान, जनजातीय कार्य मंत्रालय में निदेशक और संयुक्त सचिव के रूप में, श्री कुमार ने अनुसूचित जनजाति (वन अधिकारों का पुनर्गठन) विधेयक, 2005 का मसौदा तैयार किया था और ये अनुसूचित और टीएसपी क्षेत्रों के विकास के लिए संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत राज्यों के लिए विशेष केंद्रीय सहायता और अनुदानों के लिए उत्तरदायी थे। 

    फील्ड में इन्होंने निदेशक, प्राथमिक शिक्षा, बिहार; निदेशक उद्योग, बिहार; उपायुक्त, जिला विकास आयुक्त, एडीएम (कानून एवं व्यवस्था) और एसडीएम के रूप में कार्य किया है। 

    श्री कुमार अपने परिवार के साथ समय व्यतीत करना पसंद करते हैं। उनकी दो पुत्रियां हैं जिन पर उन्हें गर्व है तथा वे उनके अच्छे दोस्त भी हैं। ये एक उत्साही ट्रैकर हैं और हिमालय के लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम आदि, पश्चिमी घाट, पालघाट, आदि में अनेक दर्रों को ट्रेक कर पार कर चुके हैं। श्री कुमार की भारतीय शास्त्रीय (वोकल), भक्ति संगीत तथा मैडिटेशन में रूचि है।

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eci-logo.pngभारत निर्वाचन आयोग एक स्‍वायत्‍त संवैधानिक प्राधिकरण है जो भारत में निर्वाचन प्रक्रियाओं के संचालन के लिए उत्‍तरदायी है। यह निकाय भारत में लोक सभा, राज्‍य सभा, राज्‍य विधान सभाओं और देश में राष्‍ट्रपति एवं उप-राष्‍ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों का संचालन करता है। निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्‍छेद 324 और बाद में अधिनियमित लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम के प्राधिकार के तहत कार्य करता है। 

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