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    सं. 437/प. बं.-वि.स./2021 दिनांकः 16 अप्रैल, 2021 नोटिस यतः, आयोग द्वारा दिनांक 26 फरवरी, 2021 के प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे.नो./16/2021 के अधीन पश्चिम बंगाल विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचनों की घोषणा की गई है और आदर्श आचार संहिता के उपबंध निर्वाचनों की घोषणा के साथ ही तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं; और 2. यतः, राजनैतिक दलों एवं अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के 'सामान्य आचरण', भाग I के खंड (1) में, अन्य बातों के साथ-साथ, यह प्रावधान है कि (1) "कोई दल या अभ्यर्थी ऐसी किसी गतिविधि में शामिल नहीं होगा जिससे भिन्न जातियों और धार्मिक या भाषायी समुदायों के बीच विद्यमान मतभेद अधिक गंभीर हो सकते हैं या परस्पर घृणा पैदा हो सकती है या तनाव पैदा हो सकता है।" और 3. यतः, भारतीय दण्ड संहिता, 1860 के खण्ड 153 (क) (1) (क) में, अन्य बातों के साथ-साथ, यह प्रावधान है कि 153 क. धर्म, मूलवंश, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना, और सौहार्द बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कार्य करना।-------- (1) कोई भी हो--------(क) बोले गए या लिखे गए शब्दों द्वारा, या संकेतों द्वारा या दृश्य अभ्यावेदन या अन्यथा धर्म, जाति, जन्मस्थान, निवास, भाषा, जाति या समुदाय या किसी अन्य आधार के आधारों पर प्रचार करने का प्रयास, जो भी हो, असहमति या विभिन्न धार्मिक, नस्लीय, भाषा या क्षेत्रीय समूहों या जातियों या समुदायों के बीच दुश्मनी, घृणा या शत्रुता की भावनाएं; और 4. यतः, इसके अतिरिक्त भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 505 (2) में यह उपबंधित है : 505(2).विभिन्न वर्गों में शत्रुता, घॄणा या वैमनस्य पैदा या सम्प्रवर्तित करने वाले कथन - जो भी कोई जनश्रुति या संत्रासकारी समाचार अन्तर्विष्ट करने वाले किसी कथन या सूचना, इस आशय से कि, या जिससे यह संभाव्य हो कि, विभिन्न धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूहों या जातियों या समुदायों के बीच शत्रुता, घॄणा या वैमनस्य की भावनाएं, धर्म, मूलवंश, जन्म-स्थान, निवास-स्थान, भाषा, जाति या समुदाय के आधारों पर या अन्य किसी भी आधार पर पैदा या संप्रवर्तित हो, को रचेगा, प्रकाशित करेगा या परिचालित करेगा, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास, जिसे तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या आर्थिक दण्ड, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा; और 5. यतः, आयोग को श्री मुख्तार अब्बास नकवी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधिमंडल से शिकायत मिली है जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि सुश्री सुजाता मंडल खान, जो ऑल इंडिया तृणमूल काँग्रेस की नेता है, ने न्यूज 18 बांग्लादेश न्यूज चैनल को साक्षात्कार देते हुए जो मीडिया में व्यापक रूप से रिपोर्ट किया गया है, अनुसूचित जाति समुदाय के विरूद्ध अपमानजनक टिप्पणी की; और 6. यतः, जिला निर्वाचन अधिकारी, हुगली से कथित भाषण का प्रमाणित ट्रांसक्रिप्ट भी प्राप्त हुआ है। इस भाषण का प्रासंगिक भाग निम्नानुसार हैः "----------जैसा कि अनुसूचित जाति के परिवारों में संसाधनों की कमी है।कितनी भी, ममता बंद्योपाध्याय ने उनकी मदद की हो, फिर भी यह कमी नहीं जाएगी।जैसेकि एक कहावत है, कुछ वास्तव में भिखारी होते हैं और अन्य स्वभाव से भिखारी होते हैं।अनुसूचित जातियां यहां स्वभाव से भिखारी हैं, और इसके बावजूद ममता बंद्योपाध्याय ने उनकी इतनी मदद की, फिर भी वे क्षुद्र राशि पर बीजेपी के हाथों बिक गए हैं और अब हमें प्रताड़ित कर रहे हैं।आज मेरे वाहन का शीशा क्षतिग्रस्त हो गया है और वे मुझे मारने के लिए लाठियों, बंदूकों और बमों के साथ थे और मैं स्पष्ट रूप से यह बता सकती हूं कि वे बीजेपी के समर्थक हैं।उन्हें बीजेपी द्वारा समर्थन और संरक्षण दिया गया है।मैं निश्चित रूप से भारत निर्वाचन आयोग को सूचित करूंगी, और अगर आज भारत निर्वाचन आयोग का कोई नाम है, तो वह तटस्थ होगा, तब मुझे लगेगा कि किसी भी अभ्यर्थी या उसके वाहन पर इस प्रकार का अत्याचार/उत्पीड़न संभव नहीं होगा--------"; और 7. यतः, सुश्री सुजाता मंडल खान द्वारा दिए गए उपर्युक्त कथन (वक्तव्य), की आयोग में जांच की गई है और यह भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 153क(1) (क) और धारा 505(2) तथा राजनीतिक दलों एवं अभ्यर्थियों के लिए दिशा-निर्देश के लिए आदर्श आचार संहिता के सामान्य आचरण के भाग I के खण्ड (1) का उल्लंघन करते हुए पाया गया है। 8. अब, इसलिए, आयोग आपको एक अवसर देता है कि इस नोटिस की प्राप्ति के 24 घंटों के भीतर कुछ दिनों के लिए स्टार प्रचारक के रूप में अपने स्टेटस को निलंबित करने के लिए नहीं बल्कि उपर्युक्त कथित बयान देते समय अपनी स्थिति स्पष्ट करें, ऐसा न करने पर आयोग आगे आपको संदर्भ दिए बिना निर्णय लेगा। आदेश से, संलग्नकः उपरोक्त। (मधुसूदन गुप्ता) सचिव सेवा में, सुश्री सुजाता मंडल खान, ऑल इंडिया तृणमूल काँग्रेस की नेता, पश्‍चिम बंगाल।
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    सं. 437/प.बं.-वि.स./2021 दिनांकः 13 अप्रैल, 2021 नोटिस यतः, आयोग द्वारा दिनांक 26 फरवरी, 2021 को प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे.नो./16/2021 के द्वारा पश्चिम बंगाल की विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचनों की घोषणा कर दी गई है और आदर्श आचार संहिता के उपबंध निर्वाचनों की घोषणा के साथ ही तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं; और 2. यतः, राजनैतिक दलों एवं अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के 'सामान्य आचरण', भाग I के खंड (1) और (4) में, अन्य बातों के साथ-साथ, ये प्रावधान हैं कि (1) "कोई भी दल या अभ्यर्थी ऐसी किसी गतिविधि में शामिल नहीं होगा जिससे भिन्न जातियों और धार्मिक या भाषायी समुदायों के बीच विद्यमान मतभेद अधिक गंभीर हो सकते हैं या परस्पर घृणा पैदा हो सकती है या तनाव पैदा हो सकता है।" "(4) सभी दल और अभ्यर्थी ऐसी सभी गतिविधियों से ईमानदारी से परहेज करेंगे जो निर्वाचन विधि के अधीन "भ्रष्ट आचरण" एवं अपराध हैं जैसे कि मतदाताओं को घूस देना, मतदाताओं को डराना-धमकाना, मतदाताओं का प्रतिरूपण, मतदान केंद्रों से 100 मीटर दूरी के भीतर प्रचार करना, मतदान समाप्त होने के लिए निर्धारित समय के समाप्त होने से 48 घंटों की अवधि के दौरान सार्वजनिक सभाएं आयोजित करना और मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक ले जाने और वापस लाने के लिए परिवहन और वाहन उपलब्ध करना।"; और 3. यतः, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 (3क) में, अन्य बातों के साथ-साथ, उपबंधित है किः- "(3क) किसी अभ्यर्थी या उसके अभिकर्ता या अभ्यर्थी या उसके निर्वाचन अभिकर्ता की सम्मति से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उस अभ्यर्थी के निर्वाचन की सम्भाव्यताओं को अग्रसर करने के लिए या किसी अभ्यर्थी के निर्वाचन पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के लिए भारत के नागरिकों के विभिन्न वर्गों के बीच, धर्म, मूलवंश, जाति, समुदाय या भाषा के आधार पर शत्रुता या घृणा की भावनाओं का संप्रवर्तन करना, अथवा संप्रवर्तन का प्रयत्न करना।"; और 4. यतः, भारतीय दंड संहिता की धारा 153क (1) (क) में, अन्य बातों के साथ-साथ, यह प्रावधान है किः- "153क. धर्म, मूलवंश, जन्मस्थान, निवास स्थान, भाषा इत्यादि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता का संप्रवर्तन और सौहार्द बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कार्य करना। -(1) जो कोई - (क) बोले गए या लिखे गए शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृश्यरूपणों द्वारा या अन्यथा विभिन्न धार्मिक, मूलवंशीय या भाषाई या प्रादेशिक समूहों, जातियों या समुदायों के बीच असौहार्द अथवा शत्रुता, घृणा या वैमनस्य की भावनाओं को धर्म, मूलवंश, जन्मस्थान, निवास स्थान, भाषा, जाति या समुदाय के आधारों पर या अन्य किसी भी आधार पर संप्रवर्तित करेगा या संप्रवर्तित करने का प्रयत्न करेगा"; और 5. यतः, आयोग को श्री डेरेक 'ओ' ब्राइन, एआईटीसी से एक शिकायत प्राप्त हुई है जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि श्री दिलीप घोष, भारतीय जनता पार्टी के राज्य अध्यक्ष ने बारांगर, उत्तर 24 परगना में एक सार्वजनिक रैली को संबोधित करते हुए एक भड़काऊ भाषण दिया जो बंगाल और इसके लोगों को खुली धमकी है, मीडिया में भी इसकी विस्तृत रिपोर्ट प्रसारित की गई है; और 6. यतः, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, पश्चिम बंगाल से भी कथित भाषण की प्रमाणीकृत ट्रांसक्रिप्ट प्राप्त हुई है। उनके भाषण का प्रासंगिक भाग निम्नानुसार हैः " ………… इतने सारे शैतान लड़के कहां से आए थे?उन शैतान लड़कों को कल शीतलकुची में गोली मार दी गई। ऐसे शैतान लड़के बंगाल में नजर नहीं आएंगे।यह तो केवल शुरूआत है। जो यह सोचते थे कि केंद्रीय बलों की राइफलें केवल दिखाने के लिए हैं, अब गोलियों की ताकत अच्छी तरह से जान चुके हैं। और ऐसा ही पूरे बंगाल में किया जाएगा। जो भी कानून अपने हाथ में लेगा उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। मैं उम्मीद करता हूँ कि आप सभी 17 अप्रैल की सुबह अपना वोट डालने के लिए कतार में खड़े होंगे। बूथों पर केंद्रीय बल तैनात रहेंगे। कोई भी आपको आंख नहीं दिखा सकता। क्योंकि हम यहां पर हैं। और यदि कोई अपनी सीमा लांघता है तो आप देख चुके हैं कि शीतलकुची में क्या हुआ था। ऐसे स्थानों पर शीतलाकुची जैसा हाल किया जाएगा। इसलिए सावधान रहें………”; और 7. यतः, आयोग ने इस मामले पर सावधानीपूर्वक विचार किया है और इसका यह सुविचारित मत है कि श्री दिलीप घोष, जो बीजेपी के राज्य अध्यक्ष भी हैं, ने 'राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों के मार्ग दर्शन की आदर्श आचार संहिता के सामान्य आचरण' के भाग I के खंड (1) और (4) तथा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 की उप-धारा (3क) में विनिर्दिष्ट उपबंधों और भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 153(क) की उप धारा (1) (क) के उल्लंघन में ऐसे कथन किए हैं जो उकसाने वाले हैं और जो गंभीर रूप से भावनाएं भड़का सकते हैं और कानून-व्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे निर्वाचन प्रक्रिया बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है। 8. अतः, अब आयोग द्वारा आपको कल सुबह 10.00 बजे तक उपर्युक्त भाषण दिए जाने पर अपना स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया जाता है जिसके विफल रहने पर आपको बिना कोई सूचना दिए आयोग निर्णय करेगा। आदेश से, हस्‍ता/- (राकेश कुमार) सचिव सेवा में, श्री दिलीप घोष, भारतीय जनता पार्टी के राज्य अध्यक्ष, पश्चिम बंगाल 11.04.2021 को अपराह्न 2:01:24 बजे से अपराह्न 2:02:04 बजे तक एबीपी न्यूज चैनल पर प्रसारित बारांगर में दिलीप घोष द्वारा दिए गए भाषण की ट्रांसक्रिप्ट इतने सारे शैतान लड़के कहां से आए थे? उन शैतान लड़कों को कल शीतलकुची में गोली मार दी गई। ऐसे शैतान लड़के बंगाल में नजर नहीं आएंगे। यह तो केवल शुरूआत भर है। जो यह सोचते थे कि केंद्रीय बलों की राइफलें केवल दिखाने के लिए हैं, अब गोलियों की ताकत अच्छी तरह से जान चुके हैं। और ऐसा ही पूरे बंगाल में किया जाएगा। जो भी कानून अपने हाथ में लेगा उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। मैं उम्मीद करता हूँ कि आप सभी 17 अप्रैल की सुबह अपना वोट डालने के लिए कतार में खड़े होंगे। बूथों पर केंद्रीय बल तैनात रहेंगे। कोई भी आपको आंख नहीं दिखा सकता। क्योंकि हम यहां पर हैं। और यदि कोई अपनी सीमा लांघता है तो आप देख चुके हैं कि शीतलकुची में क्या हुआ था। ऐसे स्थानों पर शीतलाकुची जैसा हाल किया जाएगा। इसलिए सावधान रहें। द्वारा अनुवादित हस्‍ता/- पदमिनी चक्रवर्ती अनुवादक
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    सं. 437/पश्चिम बंगाल-वि. स./2021 दिनांकः 8 अप्रैल, 2021 सूचना यतः, आयोग द्वारा दिनांक 26 फरवरी, 2021 को प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे. नो./16/2021 के तहत पश्चिम बंगाल विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचनों की घोषणा की गई है और आदर्श आचार संहिता के उपबंध निर्वाचनों की घोषणा के साथ ही तत्‍काल प्रभाव से लागू हो गए हैं; और 2. यत:, राजनैतिक दलों एवं अभ्‍यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के 'सामान्य आचरण', भाग-। के खंड (2) और (3) में अन्‍य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान है कि "(2) अन्य दलों की आलोचना करते समय यह आलोचना उनकी नीतियों और कार्यक्रम, पिछले रिकार्ड और कार्य तक ही सीमित होनी चाहिए। दलों और अभ्यर्थियों को अन्य दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के निजी जीवन के बारे में ऐसे किसी भी पहलू की आलोचना नहीं करनी चाहिए जिनका उनके सार्वजनिक कार्यकलापों से सरोकार न हो। असत्‍यापित आरोपों अथवा तोड़-मरोड़ कर कही गई बातों के आधार पर अन्‍य दलों और उनके कार्यकर्ताओं की आलोचना से बचना चाहिए;" "(3) मत हासिल करने के लिए जाति अथवा सांप्रदायिक भावनाओं के आधार पर कोई अपील नहीं की जाएगी। मस्जिदों, चर्चों, मंदिरों या अन्य किसी भी पूजा स्थल को निर्वाचन संबंधी प्रचार के लिए मंच के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा;" और 3. यतः, आयोग को सुश्री कविता कृष्णन, सीपीआईएमएल केंद्रीय समिति से एक शिकायत मिली है, जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि दिनांक 29 मार्च, 2021 को भारतीय जनता पार्टी के 210-नन्दीग्राम विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थी श्री सुवेंदु अधिकारी ने नन्दीग्राम में एक जन सभा को संबोधित करते हुए द्वेषपूर्ण भाषण दिया, जिसे व्यापक रूप से मीडिया में रिपोर्ट किया गया है; और 4. यतः, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, पश्चिम बंगाल से कथित भाषण का प्रमाणित ट्रांसक्रिप्ट (टेप) भी प्राप्त हुआ है। इस भाषण का प्रासंगिक भाग निम्नानुसार हैः "....मुझे गाना गाने और कीर्तन सुनने का शौक है। खैर, मेरे पास आपको बताने के लिए कुछ भी नया नहीं है। एक तरफ बेगम हमारे खिलाफ लड़ रहीं हैं। दूसरी तरफ, यहां आपके परिवार का बेटा है, आपका छोटा भाई, आपका दोस्त, अपने कनिष्ठों के लिए बड़ा भाई है। आप किसे स्वीकार करना चाहेंगे, मुझे बताइए? निर्वाचन दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। आप बेगम को मत नहीं देंगे। यदि आप बेगम को मत देंगे तो छोटा पाकिस्तान बन जाएगा। (मुश्किल से सुनाई दे रहा है)... आपके इलाके में दाउद इब्राहिम आ गया है...हम सबकुछ नोट करेंगे। सरकार क्या कर रही है? इसका क्या फायदा है? अगला त्यौहार कौन सा आ रहा है? रामनबमी। रामचंद्र किस पुष्प से मां दुर्गा की पूजा करते थे? इसलिए, आप सभी को कमल के लिए वोट करना चाहिए। आपको 1 नंबर के सामने वाला बटन दबाना चाहिए। निर्वाचन के पहले चरण में तुष्टिकरण की राजनीति के खिलाफ मत पड़े हैं। क्या आप सभी तुष्टिकरण का मतलब समझते हैं? चूंकि निर्वाचन चल रहे हैं, अतः हमें अपनी भाषा के प्रति सतर्क रहना होगा। क्या आप समझते हैं कि तुष्टिकरण का क्या मतलब होता है? क्या आप तुष्टिकरण का अर्थ समझते हैं? हां, आप समझते हैं। क्या उन्होंने लोक सभा के मत के बाद यह नहीं कहा था कि वे उन लोगों से भी चोट खाने के लिए तैयार हैं जो उनके लिए फायदेमंद थे? इसे तुष्टिकरण कहते हैं। पहले चरण में तुष्टिकरण के खिलाफ मत पड़े थे। इस बार भी तुष्टिकरण के खिलाफ मत पड़ेंगे। अम्फान राहत घोटाले में शामिल टीएमसी की पंचायतें आस-पास भटक रहीं हैं......."; और 5. यतः, 29 मार्च, 2021 को श्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा दिए गए उपर्युक्त वक्तव्य की आयोग में जांच की गई है और इसे 'राजनैतिक दलों तथा अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के सामान्य आचरण' के भाग I के खंड (2) और (3) का उल्लंघन करते हुए पाया गया है, 6. अब, इसलिए, आयोग आपको एक अवसर देता है कि इस नोटिस की प्राप्ति के 24 घंटों के भीतर अपने उपर्युक्त बयान के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करें, ऐसा न करने पर आयोग आगे संदर्भ दिए बिना निर्णय लेगा। संलग्नकः यथोपरि। आदेश से ह./- (राकेश कुमार) सचिव सेवा में, श्री सुवेंदु अधिकारी, 210-नन्दीग्राम विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी के अभ्यर्थी, पश्चिम बंगाल। *********************************** 29.03.21 को पूर्वाह्न 11.25-11.29 तक सीएन समाचार चैनल पर प्रसारित सुवेंदु अधिकारी द्वारा दिया गया भाषण [सुवेंदु अधिकारी भगवान कृष्ण और भगवान राम का भजन गाते और नाम लेते हैं।] मैं यहां राधामाधव मंदिर में जाने के बाद आया हूँ। मैंने तुलसी (हिंदुओं के लिए एक पवित्र पौधा) पर हार चढ़ाया है। [वे तुलसी की महिमा का वर्णन करते हुए कीर्तन गाते हैं]। मैं इस्कॉन के मंदिर में गाए जाने वाले कीर्तन में भाग लेने जाता हूं। मुझे गाना गाने और कीर्तन सुनने का शौक है। खैर, मेरे पास आपको बताने के लिए कुछ भी नया नहीं है। एक तरफ बेगम हमारे खिलाफ लड़ रहीं हैं। दूसरी तरफ, यहां आपके परिवार का बेटा है, आपका छोटा भाई, आपका दोस्त, अपने कनिष्ठों के लिए बड़ा भाई है। आप किसे स्वीकार करना चाहेंगे, मुझे बताइए। निर्वाचन दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। आप बेगम को मत नहीं देंगे। यदि आप बेगम को मत देंगे तो छोटा पाकिस्तान बन जाएगा। (मुश्किल से सुनाई दे रहा है)... आपके इलाके में दाउद इब्राहिम आ गया है...हम सबकुछ नोट करेंगे। सरकार क्या कर रही है? जैसे योगी आदित्यनाथ ने उनको सबक सिखाया है, हम भी वैसा ही करेंगे। यदि उत्तर प्रदेश कर सकता है तो पश्चिम बंगाल भी कर सकता है। वोटिंग मशीन में मेरा नाम किस क्रम संख्या में है? मेरा प्रतीक चिह्न क्या है? इसका क्या फायदा है? अगला त्यौहार कौन सा आ रहा है? रामनबमी। रामचंद्र किस पुष्प से मां दुर्गा की पूजा करते थे? इसलिए, आप सभी को कमल के लिए वोट करना चाहिए। आपको 1 नंबर के सामने वाला बटन दबाना चाहिए। और हम मोदीजी के नेतृत्व में और उनकी प्रेरणा से "सोनार बांग्ला" का निर्माण करेंगे। शक्तिकेंद्र के जनक, तपस भाई, मंडल अध्यक्ष, कौशिक और कई अन्य नेता यहां पर उपस्थित हैं। मैं अलग-अलग सभी का नाम नहीं ले रहा हूँ। मैं जानता हूँ कि यहां पर मुझे लोगों का समर्थन मिलेगा। निर्वाचन के पहले चरण में तुष्टिकरण की राजनीति के खिलाफ मत पड़े हैं। क्या आप सभी तुष्टिकरण का मतलब समझते हैं? चूंकि निर्वाचन चल रहे हैं, अतः हमें अपनी भाषा के प्रति सतर्क रहना होगा। क्या आप समझते हैं कि तुष्टिकरण का क्य मतलब होता है? क्या आप तुष्टिकरण का अर्थ समझते हैं? हां, आप समझते हैं। क्या उन्होंने लोक सभा के मत के बाद यह नहीं कहा था कि वे उन लोगों से भी चोट खाने के लिए तैयार हैं जो उनके लिए फायदेमंद थे? इसे तुष्टिकरण कहते हैं। पहले चरण में तुष्टिकरण के खिलाफ मत पड़े थे। इस बार भी तुष्टिकरण के खिलाफ मत पड़ेंगे। अम्फान राहत घोटाले में शामिल टीएमसी पंचायतें आस-पास भटक रहीं हैं।
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    सं. 437/पश्चिम बंगाल-वि. स./2021 दिनांकः 8 अप्रैल, 2021 सूचना यतः, आयोग द्वारा दिनांक 26 फरवरी, 2021 को प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे. नो./16/2021 के तहत पश्चिम बंगाल विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचनों की घोषणा की गई है और आदर्श आचार संहिता के उपबंध निर्वाचनों की घोषणा के साथ ही तत्‍काल प्रभाव से लागू हो गए हैं; यतः, निर्वाचन आयोग ने 21 फरवरी, 2021 को पश्चिम बंगाल की यात्रा की थी और परम्परानुसार राजनैतिक दलों से फीडबैक प्राप्त कर अपना कार्य आरम्भ कर दिया था। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के समक्ष अन्य साधारण मुद्दों को उठाने के अतिरिक्त अन्य बातों के साथ-साथ यह भी आरोप लगाया कि उस वक्त के आगामी विधान सभा निर्वाचनों के संदर्भ में बीएसएफ कर्मी किसी विशेष राजनैतिक दल के पक्ष में मत डालने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों के गांव में रहने वालों लोगों को डरा-धमका रहे हैं। एआईटीसी के प्रतिनिधिमंडल से अनुरोध किया गया था कि वे उपाख्यानात्मक आरोप लगाने के बजाय, अनुभवजन्य साक्ष्य, यदि कोई हों, प्रस्तुत करें। हालांकि, उन्होंने आयोग के द्वारा उठाए गए इस प्रश्न का कोई उत्तर नहीं दिया था। दो दिवसीय यात्रा के समापन पर, आयोग ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया, जो किसी भी राज्य में निर्वाचकीय तैयारियों की औपचारिक समीक्षा करने के बाद एक लंबे समय से परम्परा भी रही है। यहां फिर से कुछ पत्रकारों ने एआईटीसी द्वारा बीएसएफ के बारे में लगाए गए आरोपों का जिक्र किया। इस चरण में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निम्नानुसार कहाः "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक दल ने बीएसएफ के बारे में आरोप लगाए हैं। मैंने ठोस दृष्टांत बताने के लिए कहा है। वे (बीएसएफ) देश के सबसे बेहतरीन बलों में से एक हैं। किसी भी दल की किसी भी बिंदु पर आलोचना करने का कोई मतलब नहीं है।" यतः, सीईओ, पश्चिम बंगाल से एक रिपोर्ट प्राप्त हुई है, जिसके साथ सीएनएन समाचार चैनल पर प्रसारण के रूप में 28.03.2021 को सुश्री ममता बनर्जी, माननीय मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए वक्तव्य की एक प्राधिकृत ट्रांसक्रिप्ट संलग्न है, जिसमें उन्होंने कहाः "ममता बनर्जी बाहरी नहीं है। बाहरी कौन हैं? बंदूकों के साथ गुंडे, जिन्हें आप कहीं और से लाएं हैं। क्या उन्होंने कोंटाइ में नहीं किया था? पिता, पुत्र और अंकलों में निष्पक्ष तरीके से निर्वाचन लड़ने की क्षमता नहीं है, इसलिए उन्होंने कोंटाई में परसों रात हंगामा किया।" "उन्हें किसने इतनी हिम्मत दी कि केंद्रीय पुलिस महिलाओं को धमका रही है और उन्हें मत नहीं डालने दे रही है? मैंने यही 2019 में देखा था। मैंने 2016 में भी यही देखा थाः "मैं जानती हूं कि किसके अनुदेश पर वे मारते हैं और किस तरह मारते हैं। यह आपका कर्तव्य है कि आप लोगों के परिवार की रक्षा करें। यदि हमारी माताओं और बहनों को डंडे से जरा भी चोट आती है तो उन पर करछुल, खुरपे और चाकू से हमला करें। मैं बता रहीं हूं। यह महिलाओं का हक है। और यदि हमारी किसी भी माता तथा बहनों को मतदान कक्ष में प्रवेश करने नहीं दिया जाए तो आप सभी बाहर आएं और आंदोलन करें।" यतः, सीईओ, पश्चिम बंगाल से एक अन्य रिपोर्ट प्राप्त हुई है, जिसके साथ 7.04.2021 को कूच बिहार में सुश्री ममता बनर्जी द्वारा दिए गए भाषण की एक प्राधिकृत ट्रांसक्रिप्ट संलग्न है, जहां उन्होंने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बलों पर निम्नलिखित अत्यंत आपत्तिजनक टिप्पणी कीः "वे असम से आतंक फैलाने के लिए गंडे लाएंगे। मैं प्रशासन से नाका जांच मजबूत करने और असम की सीमा को सील करने की मांग करूंगी। मैं निर्वाचन आयोग से असम सीमा को सील करने के लिए कहूंगी। भूटान शांतिपूर्ण देश है और हमारा अच्छा पड़ोसी है। फिर भी सीमा को सील किया जाना चाहिए। याद रखें कि कूच बिहार के आस-पास ऐसे कई अन्य क्षेत्र हैं, जो बांग्लादेश के हैं। उन सीमाओं को भी सील किया जाना चाहिए, ताकि कोई बाहरी यहां हंगामा न खड़ा कर सके। और यदि सीएपीएफ बाधाएं उत्पन्न करता है तो, मैं आप औरतों को बता रहीं हूं, आपका एक समूह जाए और उनका घेराव करे जबकि दूसरा समूह अपना मत डालने जाएगा। अपना मत बेकार न जाने दें। यदि आप सभी उनका घेराव करने में ही लग जाएंगे तो वे खुश होंगे की आप अपना मत डालने नहीं गए। यह उनकी योजना है। यह बीजेपी की योजना है। और आपकी योजना यह होगी कि यदि वे एक तरफ आपके गांव आकर आपको धमकाने की कोशिश करते हैं तो आप डरेंगे नहीं, बल्कि आप उनसे बात करेंगे। उनसे बात करने का मतलब उन पर लगाम कसना होगा। आपको उनका सच में घेराव नहीं करना पड़ेगा।" यतः, प्रथम दृष्टया, सुश्री ममता बनर्जी, एआईटीसी की अध्यक्षा, जो पश्चिम बंगाल की माननीय मुख्यमंत्री भी हैं, के द्वारा पूरी तरह से गलत, भड़काऊ और तीखे वक्तव्य, निर्वाचकीय प्रक्रिया के दौरान केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को अपमानित और तिरस्कृत करने का प्रयास है, जिससे इन बलों के सभी रैंक पदाघिकारी बहुत ज्यादा हतोत्साहित हो रहे हैं, जो 80 के दशक के अंत से निर्वाचनों के बाद निर्वाचनों में स्वेच्छा भाव से सेवा प्रदान करते आ रहे हैं और जिन्होंने विशेष रूप से क्षेत्राधिकार सुनिश्चित करने और अपनी वास्तविक उपस्थिति से असामाजिक गुंडों के लिए अवरोध उत्पन्न करने में एक सराहनीय योगदान दिया है, जिससे वह स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और सुगम निर्वाचनों का संचालन करवाने के लिए ईसीआई की सहायता करने में एक प्रमुख भूमिका निभाता रहा है; यतः, 28.03.2021 और 7.04.2021 के वक्तव्यों और पैरा 2 तथा 3 में वर्णित और इंगित गए अनुवर्ती वक्तव्य की ऐतिहासिकता को देखते हुए, यह और अधिक स्पष्ट है कि सुश्री ममता बनर्जी, एआईटीसी की अध्यक्षा, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को नीचा दिखाने और हतोत्साहित करने में लगीं हुईं हैं, जो अक्सर कानून और व्यवस्था को बहाल करने और/या राज्य सरकारों के दिन-प्रतिदिन के कामकाज में राज्य सरकारों द्वारा कभी भी मंगवाए जाने पर, संबंधित राज्य सरकार और संघ राज्य क्षेत्रों की सरकारों की सहायता करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे भी अधिक हतोत्साहित करने वाला तथ्य यह है कि सुश्री बनर्जी महिला मतदाताओं को सीपीएफ के कर्मियों पर हमला करने के लिए उकसाने के लिए एक भावनात्मक पिच बनाने की कोशिश कर रही हैं। पैरा 1 और 2 पर दी गई ऐतिहासिकता का जानबूझकर एआईटीसी द्वारा सामान्य रूप से बिलकुल जानबूझकर अपनाए गए पैटर्न को समर्थन करने और सुश्री बनर्जी द्वारा विशेष रूप से सीपीएफ को अपमानित करने के लिए पैटर्न शुरू करने का उल्लेख किया गया है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजनैतिक लड़ाई अभियानों आदि में लड़ने के बजाय इस तरीके से लड़ी जा रहीं हैं। केंद्रीय बलों ने अपनी जान की बाजी लगा कर भी देश के सभी क्षेत्रों में उन्हें सौंपे गए कार्यों को बखूबी निभाया है, जिसमें हाल ही में बीजापुर, छत्तीसगढ़ का प्रकरण सबसे दुखद है। यह भी रिकॉर्ड में रखा जाए कि वे और संघ सरकार के अन्य कई मंत्रालय एवं विभाग तथा राज्य सरकार के विभाग, भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की निर्वाचनों के संचालन में सहायता करते हैं। परंतु, स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और सुगम निर्वाचन सुनिश्चित करने में केंद्रीय बलों की सराहनीय भूमिका अत्यंत उल्लेखनीय है। सुश्री बनर्जी शायद यह महसूस नहीं कर रही है कि इस तरह के बयान से पश्चिम बंगाल की राज्य पुलिस में अविश्वास की भावना पैदा हो सकती है, जो एक-दूसरे के पूरक होने के बजाय केंद्रीय बलों के साथ भी अपना कार्य कर रहे हैं। वास्तव में, सुश्री बनर्जी यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहीं हैं कि उनके बीच एक गहरी दरार और खाईं पैदा हो, जिसके निर्वाचन की प्रक्रिया के समाप्त होने के बाद भी गंभीर परिणाम देखने को मिलेंगे। यतः, निर्वाचन आयोग का प्रथम दृष्टया समाधान हो गया है कि आपके बयान आदर्श आचार संहिता के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 186, 189 और 505 का उल्लंघन करते हैं। अब, इसलिए, आयोग दिनांक 10.04.2021 को पूर्वाह्न 11.00 बजे तक आपको उपर्युक्त बयान के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करने का एक अवसर देता है, ऐसा न करने पर आयोग आपको आगे संदर्भ दिए बिना निर्णय लेगा। आदेश से, ह./- (राकेश कुमार) सचिव सुश्री ममता बनर्जी, अध्यक्ष, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस, कोलकाता ************************************************ सीएन समाचार चैनल पर दिनांक 28.3.21 को यथा प्रसारित सीएम का भाषण ममता बनर्जी बाहरी नहीं है। कौन बाहरी हैं? बंदूकधारी गुंडे, जिन्हें आप कहीं और से लाएं हैं। क्या उन्होंने यह कॉन्टाई में नहीं किया था? पिता, पुत्र और चाचाओं में निष्पक्ष तरीके से निर्वाचन जीतने की क्षमता नहीं है, इसलिए उन्होंने कॉन्टाई में कल से एक दिन पहले रात में हंगामा किया। आप बंदूकें लेकर आएं हैं। आपने बूथों पर कब्जा किया। भागबानपुर में महिलाएं को रोते हुए लौटा दिया गया। यह माताओं की बददुआएं हैं। याद रखना कि आपने दृष्टिहीन मतदाताओं को उनका मत नहीं डालने दिया। आपने अनेकों माताओं और बहनों को उनका मत नहीं डालने दिया। आपने महिलाओं को निशाना बनाया। बूथ में जाते हुए कृपया करके फेस मास्क पहनें। यह केंद्रीय पुलिस का मामला नहीं है। फिर भी उन्होंने मतदाताओं को प्रवेश नहीं करने दिया और उनके मत दिए बिना उन्हें वापस भेज दिया क्योंकि उन्होंने मास्क नहीं पहने थे। आप में से कोई भी वापस नहीं जाएगा। पुलिस से डरने का कोई कारण नहीं है। आशा है कि मैं जो कह रही हूं वह आप सभी सुन रहे होंगे। किसने उन्हें इतनी हिम्मत दी कि केंद्रीय पुलिस महिलाओं को उनका मत डालने की अनुमति दिए बिना उन्हें धमका रही है? मैंने 2019 में भी यही देखा था। मैंने 2016 में भी यही देखा था। मेरे इलाके में क्लबों को बंद कर दिया गया था। इतना दुस्साहस! आप जब काम करने के लिए बंगाल आएंगे तो हम आपके रहने और खाने का भुगतान करेंगे और आप डंडों से मारेंगे! उनकी हिम्मत कैसे हुई मारने की? किसके इशारे पर उन्होंने मारा था? मैं जानती हूं कि उन्होंने किसके कहने पर मारा और कैसे मारा। यह आपका कर्तव्य है कि आप लोगों के परिवारजनों को बचाएं। अगर हमारी माताओं और बहनों में से कोई भी छड़ी से घायल होती हैं, तो उन पर करछुल, खुरपे और चाकू से हमला करें। मैं बता रही हूं। यह महिलाओं का अधिकार है। और यदि हमारी माताओं और बहनों में से किसी को भी मतदान कक्ष में प्रवेश करने से मना किया जाता है तो आप सभी बाहर आएं और आंदोलन करें। माताओं और बहनों तुम मरी नहीं हो.....(मुश्किल से सुनाई दे रहा है)। तुम चुड़ियां पहनती हो और उसी दौरान स्टड से खाना बनाती हो। और एजेंटों, यदि मैंने देखा कि तुम डर की वजह से अपनी पीठ दिखा रहे हो....इन गुंडों के डर से, तो मैं तुमको माफ नहीं करूंगी। जमीन पर मेरे लोग हैं। मैं जानती हूं कि कान्थी और भागबनपुर में ऐसा किसने किया। मैं सब कुछ जानती हूं कि किसकी सांठ-गांठ किसके साथ है। याद रखें कि जो हमारे लिए काम कर रहे हैं वो आपके बीच हैं, जो उन एजेंटों के बारे में सब कुछ जानते हैं जो पैसे ले रहे हैं और बांट रहे हैं। अंकल का बेटा परसों पैसा बांट रहा था और रंगे-हाथों पकड़ा गया। ************************************************ दिनांक 7.4.21 को कूच बिहार (उत्तर) में ममता बंदोपाध्याय द्वारा दिए गए भाषण की ट्रांसक्रिप्ट शिकायत पत्र में यथा उल्लिखित 32 मिन. 20 सेकं. से लेकर 33 मिन. 23 सेकं. तक यह (https:/www.facebook.com/AITCofficial/videos/) लिंक पर पाया गया था वे दहशत पैदा करने के लिए असम से गुंडे लाएंगे। मैं प्रशासन से नाका चेकिंग को मजबूत करने और असम की सीमाओं को सील करने के लिए कहूंगी। मैं निर्वाचन आयोग से असम सीमा को सील करने के लिए कहूंगी। भूटान एक शांतिपूर्ण देश और हमारा मित्र पड़ोसी है। फिर भी सीमा को सील किया जाना चाहिए। याद रखें कि कूच बिहार के आसपास कई अन्य क्षेत्र हैं जो बांग्लादेश से संबंधित हैं। उन सीमाओं को भी सील किया जाना चाहिए, ताकि कोई बाहरी व्यक्ति यहां हंगामा न कर सके। और अगर सीआरपीएफ गड़बड़ी पैदा करती है, तो मैं आपको महिलाओं को बताती हूं, आप का एक समूह जाए और उन्हें रोके (घेराव करे) है, जबकि एक अन्य समूह अपना वोट डालने जाएगा। अपना वोट बर्बाद मत करो। यदि आप सभी उन्हें रोकने में ही लग जाएंगे, तो उन्हें खुशी होगी कि आपने अपना वोट नहीं डाला। यह उनकी योजना है। यह भाजपा की योजना है। और आपकी योजना यह होगी कि आप डरेंगे नहीं यदि वे एक तरफ आपके गाँव में आने के लिए आपको डराने-धमकाने की कोशिश करते हैं, तो दूसरी तरफ आप उनसे बात करें। उनसे बात करना उन पर लगाम कसने जैसा होगा। आपको उनका सचमुच में घेराव करने की जरूरत नहीं है......
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    सं. 437/पश्चिम बंगाल-वि. स./2021 दिनांकः 7 अप्रैल, 2021 सूचना यतः, आयोग द्वारा दिनांक 26 फरवरी, 2021 को प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे. नो./16/2021 के तहत पश्चिम बंगाल विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचनों की घोषणा की गई है और आदर्श आचार संहिता के उपबंध निर्वाचनों की घोषणा के साथ ही तत्‍काल प्रभाव से लागू हो गए हैं; और 2. यत:, राजनैतिक दलों एवं अभ्‍यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के 'सामान्य आचरण', भाग-। के खंड (2), (3) और (4) में अन्‍य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान है कि "(2) अन्य दलों की आलोचना करते समय यह आलोचना उनकी नीतियों और कार्यक्रम, पिछले रिकार्ड और कार्य तक ही सीमित होनी चाहिए। दलों और अभ्यर्थियों को अन्य दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के निजी जीवन के बारे में ऐसे किसी भी पहलू की आलोचना नहीं करनी चाहिए जिनका उनके सार्वजनिक कार्यकलापों से सरोकार न हो। असत्‍यापित आरोपों अथवा तोड़-मरोड़ कर कही गई बातों के आधार पर अन्‍य दलों और उनके कार्यकर्ताओं की आलोचना से बचना चाहिए;" "(3) मत हासिल करने के लिए जाति अथवा सांप्रदायिक भावनाओं के आधार पर कोई अपील नहीं की जाएगी। मस्जिदों, चर्चों, मंदिरों या अन्य किसी भी पूजा स्थल को निर्वाचन संबंधी प्रचार के लिए मंच के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा;" और "(4) सभी दलों और अभ्यर्थियों को ऐसे सभी कार्यकलापों से ईमानदारीपूर्वक बचना चाहिए, जो निर्वाचन विधि के अधीन "भ्रष्ट आचरण" और अपराध हैं, जैसे कि मतदाताओं को रिश्वत देना, मतदाताओं को धमकाना, किसी अन्य मतदाता का मत डालना, मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में प्रचार करना, मतदान समाप्ति के लिए निर्धारित घंटे के 48 घंटे की अवधि समाप्त होने पर जनसभाएं करना और मतदाताओं को मतदान केंद्र ले जाना और लाना"; और 3. यतः, आयोग को श्री मुख्तार अब्बास नकवी के नेतृत्व में बीजेपी प्रतिनिधिमंडल से एक शिकायत मिली है, जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि दिनांक 3 अप्रैल, 2021 को ऑल इंडिया तृणमूल कॉन्ग्रेस की 210-नन्दीग्राम विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचन लड़ने वाली अभ्यर्थी सुश्री ममता बनर्जी ने एबीपी आनंदा टीवी चैनल पर प्रसारित हुगली में तारकेश्वर पर निर्वाचन अभियान के दौरान एक बैठक में जनता को भाषण देते हुए मुस्लिम मतदाताओं से विभिन्न राजनैतिक दलों के बीच अपना मत नहीं बँटने देने की अपील की और पश्चिम बंगाल के मौजूदा विधान सभा निर्वाचनों में तृणमूल कांग्रेस के लिए सांप्रदायिक आधार पर खुलेआम मतदान करने के लिए कहा; और 4. यतः, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, पश्चिम बंगाल से कथित भाषण का प्रमाणित ट्रांसक्रिप्ट (टेप) भी प्राप्त हुआ है। इस भाषण का प्रासंगिक भाग निम्नानुसार हैः "....कन्याश्री, कन्याश्री, विश्वविद्यालय तक छात्रवृत्ति है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के लिए शिक्षाश्री है। सामान्य वर्ग के लिए स्वामी विवेकानंद छात्रवृत्ति है। अल्पसंख्यक समुदाय के मेरे भाइयों और बहनों के लिए ओईक्याश्री है और मैंने इसे 2 करोड़ 35 लाख लाभार्थियों को दिया है। मैं अपने अल्पसंख्यक भाइयों और बहनों से हाथ जोड़कर निवेदन करती हूं कि शैतान व्यक्ति, जिसने बीजेपी से पैसे लिए थे, की बात सुनने के बाद अल्पसंख्यक मतों को विभाजित न होने दें। वह कई सांप्रदायिक वक्तव्य देता है और हिंदू तथा मुस्लिमों के बीच झगड़े शूरू करवाता है। वह बीजेपी के प्रचारकों में से एक है, कामरेड है। अल्पसंख्यक मतों को विभाजित करने के लिए सीपीएम और बीजेपी के कामरेड बीजेपी द्वारा दिए गए पैसों के साथ आस-पास घूम रहे हैं। कृपया उन्हें ऐसा न करने दें। इस बात को मन में रखें कि यदि बीजेपी सरकार में आ जाती है तो आप गंभीर खतरे में होंगे। मैं हिंदू भाइयों और बहनों से भी कहूंगी कि बीजेपी को सुनने के बाद हिंदू और मुस्लिम के रूप में अपने बीच में बंटवारा न होने दें। देखो। मैंने अल्पसंख्यक समुदाय के अपने भाइयों और बहनों से कहा है कि उनके बीच एक या दो बदमाश, मीर जाफर हैं, जो हमारे बीच भी हैं। क्या हमारे बीच कई सारे मीर जाफर नहीं हैं? क्या हमारे बीच कई सारे गद्दार नहीं हैं? बीजेपी में अब वहां कौन हैं?......."; और 5. यतः, 3 अप्रैल, 2021 को सुश्री ममता बनर्जी द्वारा दिए गए उपर्युक्त वक्तव्य की आयोग में जांच की गई है और इसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 (3), 3 (क) में निहित प्रावधानों और 'राजनैतिक दलों तथा अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के सामान्य आचरण' के भाग I के खंड (2), (3) और (4) का उल्लंघन करते हुए पाया गया है, और 6. अब, इसलिए, आयोग आपको एक अवसर देता है कि इस नोटिस की प्राप्ति के 48 घंटों के भीतर अपने उपर्युक्त बयान के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करें, ऐसा न करने पर आयोग आगे संदर्भ दिए बिना निर्णय लेगा। संलग्नकः यथोपरि आदेश से ह./- (राकेश कुमार) सचिव सेवा में, सुश्री ममता बनर्जी, 210-नन्दीग्राम विधान सभी निर्वाचन क्षेत्र से एआईटीसी की अभ्यर्थी, पश्चिम बंगाल। टीवी चैनल एबीपी आनंदा पर 3 अप्रैल, 2021 को प्रसारित हुगली के तारकेश्वर में एक बैठक में निर्वाचन प्रचार के दौरान जनता को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी के भाषण की ट्रांसक्रिप्ट "....कन्याश्री 2, कन्याश्री 3, विश्वविद्यालय तक छात्रवृत्ति है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के लिए शिक्षाश्री है। सामान्य वर्ग के लिए स्वामी विवेकानंद छात्रवृत्ति है। अल्पसंख्यक समुदाय के मेरे भाइयों और बहनों के लिए ओईक्याश्री है और मैंने इसे 2 करोड़ 35 लाख लाभार्थियों को दिया है। मैं अपने अल्पसंख्यक भाइयों और बहनों से हाथ जोड़कर निवेदन करती हूं कि शैतान व्यक्ति, जिसने बीजेपी से पैसे लिए थे, की बात सुनने के बाद अल्पसंख्यक मतों को विभाजित न होने दें। वह कई सांप्रदायिक वक्तव्य देता है और हिंदू तथा मुस्लिमों के बीच झगड़े शूरू करवाता है। वह बीजेपी के प्रचारकों में से एक है, कामरेड है। अल्पसंख्यक मतों को विभाजित करने के लिए सीपीएम और बीजेपी के कामरेड बीजेपी द्वारा दिए गए पैसों के साथ आस-पास घूम रहे हैं। कृपया उन्हें ऐसा न करने दें। इस बात को मन में रखें कि यदि बीजेपी सरकार में आ जाती है तो आप गंभीर खतरे में होंगे। मैं हिंदू भाइयों और बहनों से भी कहूंगी कि बीजेपी को सुनने के बाद हिंदू और मुस्लिम के रूप में अपने बीच में बंटवारा न होने दें। देखो। मैंने अल्पसंख्यक समुदाय के अपने भाइयों और बहनों से कहा है कि उनके बीच एक या दो बदमाश, मीर जाफर हैं, जो हमारे बीच भी हैं। क्या हमारे बीच कई सारे मीर जाफर नहीं हैं? क्या हमारे बीच कई सारे गद्दार नहीं हैं? बीजेपी में अब वहां कौन हैं?.......";
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    सं. 100/मध्य प्रदेश–वि.स./2020-(उप) दिनांकः 30 अक्तूबर, 2020 नोटिस यतः, आयोग द्वारा दिनांक 29 सितम्बर, 2020 को प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे.नो./67/2020 के तहत मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए उप-निर्वाचनों की घोषणा की गई थी और उक्त प्रेस नोट के पैरा 4 के अनुसार आदर्श आचार संहिता के उपबंध उक्त तारीख से लागू हो गए हैं; और 2. यतः, आदर्श आचार संहिता के भाग I के उप पैरा (1) में यह प्रावधान है कि ‘किसी भी दल अथवा अभ्यर्थी को ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होना चाहिए जो विभिन्न जातियों एवं समुदायों, विभिन्न धर्मों या अन्य भाषा भाषियों के बीच मौजूदा मतभेदों को बढ़ाए या परस्पर घृणा उत्पन्न करे या तनाव पैदा करे’; और 3. यतः, मध्य प्रदेश, मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा श्री गिर्राज दण्डोतिया, 07-दिमनी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी अभ्यर्थी द्वारा दिनांक 22/10/2020 को स्वराज एक्सप्रेस को दिए गए साक्षात्कार पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है तथा उक्त को वीडियो क्लिप और अधिकृत प्रतिलेख अनुलग्नक-I के साथ निम्नानुसार प्राप्त किया गया है: "जब आयटम कहोगे किसी की पत्नी को, यहाँ आयटम कह दिया जाएगा, यहाँ मान्समर जाएगो, यहाँ गोलियाँ चल जाएंगी। किसी की बहन को आयटम कह देखोगे, यहाँ खून की नदियाँ बह जाएंगी। कमलनाथ जिंदा निकल गये, अपने आपको बहुत समझे, अगर जेबात यहाँ पर कह देते तो मैं कहता हूँ कि जिंदा नहीं जा पाते, कमलनाथ यहाँ से, चम्बल से।" 4. यतः, श्री गिर्राज दण्डोतिया द्वारा दिए गए भाषण के प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) की आयोग में जांच की गई है और उनके बयान को राजनैतिक दलों एवं अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन हेतु आदर्श आचार संहिता के ‘साधारण संचालन’ के भाग I के उप पैरा (1) में निहित प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए पाया गया है; और 5. अब, इसलिए, आयोग श्री गिर्राज दण्डोतिया को एक अवसर देता है कि वह इस नोटिस की प्राप्ति के 48 घंटों के भीतर दिए गए उपर्युक्त बयान के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करें, ऐसा न करने पर भारत निर्वाचन आयोग इनका आगे संदर्भ दिए बिना निर्णय लेगा।
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    सं. 100/एमपी-एलए/2020-(बाय.) दिनांक: 31 अक्तूबर, 2020 नोटिस यत:, आयोग द्वारा, मध्यप्रदेश की विधान सभा के लिए उप-निर्वाचनों की घोषणा दिनांक 29 सितंबर, 2020 के प्रेस नोट सं. ईसीआई/पीएन/67/2020 के माध्यम से कर दी गई है और उक्त प्रेस नोट के पैरा 4 के अनुसार, आदर्श आचार संहिता के उपबंध उस तारीख से लागू कर दिए गए हैं; और 2. यत:, आदर्श आचार संहिता के भाग 1 के पैरा (2) में उल्लेख है कि, अन्य बातों के साथ-साथ, ‘सभी दल और सभी अभ्यर्थी दलों के नेताओं अथवा कार्यकर्ताओं की निजी जिंदगी के सभी पहलुओं की आलोचना करने से बचेंगे’ यदि वे सार्वजनिक गतिविधियों से सम्बद्ध न हों,; और 3. यत:, आयोग को मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश से एक रिपोर्ट प्राप्त हुई है, जिसमें यह कहा गया है कि 27 अक्तूबर, 2020 को जौरा, मुरैना में एक रैली को संबोधित करने के दौरान, कांग्रेस नेता श्री आचार्य प्रमोद कृष्णन ने श्री शिवराज सिंह चौहान के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया है; और 4. यत:, आयोग को कथित संबोधन की प्राधिकृत प्रतिलिपि (अनुबंध-I) प्राप्त हुई, जो निम्नानुसार है: " द्वापर में मारीच मामा, द्वापर के अंत में कंस जिसने अपनी बहन के सभी बच्चों को कुर्सी सलामत रखने के लिए मर दिया, तीसरा सकुनि मामा, जिसने छल कपट कर कौरवों का नाश कराया, तीनों प्रपंची मामाओं को मिला दिया जाये तो एक मामा बनता है शिवराज, इन तीनों का घोटाला, इन तीनों के कमीनापन एक जगह निचोड़ दिया जाये तो यह आदमी बनता है" और 5. यत:, श्री आचार्य प्रमोद कृष्णन द्वारा 27 अक्तूबर, 2020 को रैली को संबोधित करते हुए दिए गए भाषण की प्रतिलिपि की जांच आयोग में की गई है और उक्त वक्तव्य को राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के ‘सामान्य आचरण’ के भाग I के पैरा (2) में उल्लिखित उपबंधों का उल्लंघन पाया गया है। 6. अत:, अब आयोग श्री आचार्य प्रमोद कृष्णन को उक्त वक्तव्य देने के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए इस नोटिस की प्राप्ति के 48 घंटों के अन्दर उत्तर देने का एक अवसर देता है और ऐसा न करने पर भारत निर्वाचन आयोग उन्हें कोई और सूचना दिए बिना निर्णय लेगा। संलग्नक: यथोक्त। अनुबंध-1 दिनांक 27.10.2020 को विधान सभा क्षेत्र 04 जौरा में सचिन पायलट की आमसभा में श्री प्रमोद कृष्णन द्वारा दिए गए वक्तव्य की स्क्रिप्ट “मारीच, द्वापर के प्रारम्भ में हुआ कंस मामा, जिसने अपनी सगी बहन देवकी के तमाम बच्चों का वध इसलिए किया कि उसकी कुर्सी सलामत रहे। तीसरा मामा हुआ महाभारत के दौर में शकुनि, जिसने छल और प्रपंच से पांडवों को बर्बाद करने का षड़यंत्र रचा था। लेकिन आज जौरा की पवित्र भूमि को नमन करते हुए, पवित्र मंच को प्रणाम करते हुए, चम्बल की माटी को माथे पर लगाते हुए मैं ऐलान के साथ कहना चाहता हूँ अगर इन तीनों प्रपंची मामाओं को मिला दिया जाये तो एक मामा बनता है शिवराज मामा। इन तीनों का घोटाला, इन तीनों का कमीनापन अगर एक जगह निचोड़ दिया जाये तो ये आदमी बनता है”
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    सं. 100/मध्य प्रदेश-वि. स./2020 (उप)/ दिनांक:-24 अक्तूबर, 2020 सेवा में मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश, भोपाल। विषय:- मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए उप-निर्वाचन, 2020- श्री विसाहुलाल सिंह, मध्य प्रदेश में बीजेपी के अभ्यर्थी को नोटिस-तत्संबंधी। महोदय, मुझे श्री विसाहुलाल सिंह, 87- अनूपपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र, मध्य प्रदेश से बीजेपी के अभ्यर्थी को संबोधित नोटिस सं. 100/मध्य प्रदेश-वि. स./2020(उप), दिनांक 24.10.2020 की एक प्रति इसके साथ अग्रेषित करने का निदेश हुआ है। उपर्युक्त नोटिस केवल एक विशेष दूत या प्रोसेसर के माध्यम से श्री विसाहुलाल सिंह को तत्काल दिया जाए। संबंधित व्यक्ति से नोटिस की प्राप्ति के टोकन के रूप में एक पावती प्राप्त करके आयोग को प्रस्तुत की जाए। भवदीय हस्ता/- (अमित कुमार) अवर सचिव ******************************************** भारत निर्वाचन आयोग निर्वाचन सदन, अशोक रोड, नई दिल्ली-110001 सं. 100/मध्य प्रदेश – वि.स./2020-(उप) दिनांकः 24 अक्तूबर, 2020 नोटिस यतः, आयोग द्वारा दिनांक 29 सितम्बर, 2020 को प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे.नो./67/2020 के तहत मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए उप-निर्वाचनों की घोषणा कर दी गई है और उक्त प्रेस नोट के पैरा 4 के अनुसार आदर्श आचार संहिता के प्रावधान उक्त तारीख से लागू हो गए हैं; और 2. यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप-पैरा (2) में अन्य बातों के साथ-साथ, यह प्रावधान है कि दलों और अभ्यर्थियों को निजी जीवन के ऐसे सभी पहलुओं की आलोचना से बचना चाहिए, जिनका दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक कार्यकलापों से सरोकार न हो; और 3. यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप पैरा (5) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान है कि ‘प्रत्येक व्यक्ति के शांतिपूर्ण और विघ्नरहित घरेलू जीवन के अधिकार का आदर करना चाहिए चाहे राजनैतिक दल एवं अभ्यर्थी उसके राजनैतिक विचारों या कार्यों के कितने ही विरूद्ध क्यों न हों,’ और 4. यतः, आयोग ने सभी मान्यताप्राप्त राजनैतिक दलों को अपने पत्र सं. 437/6/अनु./ईसीआई/प्रका./एमसीसी/2019, दिनांक 29 अप्रैल, 2019 को परामर्शिका जारी की है कि ‘राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों को ऐसे किसी भी कार्य/कार्रवाई/कथनों से बचना चाहिए जो महिलाओं के सम्मान और गरिमा के विरूद्ध माना जाता हो; और 5. यतः, आयोग ने अन्य बातों के साथ-साथ मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश से एक रिपोर्ट प्राप्त की है, जिसमें दिनांक 19 अक्तूबर, 2020 को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को संबोधित करते समय श्री विसाहुलाल सिंह 87-अनूपपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी के अभ्यर्थी ने श्री विश्वनाथ सिंह, कांग्रेस के अभ्यर्थी की पत्नी को ‘रखैल’ के रूप में संबोधित किया; और 6. यतः, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश से एक रिपोर्ट मांगी गई थी जो अब तथाकथित संबोधन (अनुलग्नक-1) के अधिकृत प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) के साथ निम्नानुसार प्राप्त हुई हैः "...विधानसभा के निर्वाचन का फॉर्म भरा जाता है तो पूरे सम्पति का ब्यौरा दिया जाता है, सबका ब्यौरा दिया जाता है। परन्तु विश्वनाथ सिंह (कांग्रेस प्रत्याशी) ने अपनी पहली औरत जो वर्तमान में उसका ब्यौरा नहीं दिया है कि मेरा एक ठे औरत और है जिससे शादीशुदा है, रखैल औरत का ब्यौरा दिया तो उससे पता लगाओ, तुम्हारा पुराण वाला औरत कहाँ ठे है, वोहू बताओ न मेरा दो ठो औरत है कह दे दो ठो औरत है..." "जय प्रकाश अग्रवाल मेरे चलते 13 साल तक अध्यक्ष बना और 3 तारीख के बाद जो दुर्दशा मैं जय प्रकाश का करूँगा, कोई नहीं करेगा, रास्ता में लाऊंगा उसको, ऑफिस में बोल दीजियेगा, रास्ता में लाऊंगा, अपना औकात उसको समझाऊंगा.." 7. यतः, श्री विसाहुलाल सिंह द्वारा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सामने दिनांक 19 अक्तूबर, 2020 को दिए गए भाषण की वीडियो क्लिप और प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) की आयोग में जांच की गई है और उनके बयान को ‘राजनैतिक दलों एवं अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन हेतु आदर्श आचार संहिता के साधारण संचालन’ के भाग I के पैरा (2) और पैरा (5) में निहित प्रावधानों का उल्लंघन करते और आयोग द्वारा अपने पत्र सं. 437/6/अनु./ईसीआई/प्रका./एमसीसी/2019, दिनांक 29 अप्रैल, 2019 के तहत जारी की गई परामर्शिका की अवहेलना करते हुए पाया गया है; और 8. अब, इसलिए, आयोग आपको अवसर देता है कि आप इस नोटिस की प्राप्ति के 48 घंटों के भीतर दिए गए उपर्युक्त बयान के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करें, ऐसा न करने पर भारत निर्वाचन आयोग आपको आगे संदर्भ दिए बिना निर्णय लेगा। आदेश से अनु.: उपर्युक्त अनुसार हस्ता/- (मधुसूदन गुप्ता) सचिव सेवा में श्री विसाहुलाल सिंह 87-अनूपपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी अभ्यर्थी, मध्य प्रदेश
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    सं. 100/मध्य प्रदेश-वि. स./2020 (उप)/ दिनांक:-24 अक्तूबर, 2020 सेवा में मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश, भोपाल। विषय:- मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए उप-निर्वाचन, 2020- श्री मोहन यादव, मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस-तत्संबंधी। महोदय, मुझे श्री मोहन यादव, मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश सरकार को संबोधित नोटिस सं. 100/मध्य प्रदेश-वि. स./2020(उप), दिनांक 24.10.2020 की एक प्रति इसके साथ अग्रेषित करने का निदेश हुआ है। उपर्युक्त नोटिस केवल एक विशेष दूत या प्रोसेसर के माध्यम से श्री मोहन यादव को तत्काल दिया जाए। संबंधित व्यक्ति से नोटिस की प्राप्ति के टोकन के रूप में एक पावती प्राप्त करके आयोग को प्रस्तुत किया जाए। भवदीय हस्ता/- (अमित कुमार) अवर सचिव ********************************** भारत निर्वाचन आयोग निर्वाचन सदन, अशोक रोड, नई दिल्ली-110001 सं. 100/मध्य प्रदेश–वि.स./2020-(उप) दिनांकः 24 अक्तूबर, 2020 नोटिस यतः, आयोग द्वारा दिनांक 29 सितम्बर, 2020 को प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे.नो./67/2020 के तहत मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए उप-निर्वाचनों की घोषणा कर दी गई है और उक्त प्रेस नोट के पैरा 4 के अनुसार आदर्श आचार संहिता के प्रावधान उक्त तारीख से लागू हो गए हैं; और 2. यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप पैरा (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान है कि ‘किसी भी दल अथवा अभ्यर्थी को ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होना चाहिए जो विभिन्न जातियों एवं समुदायों-धार्मिक या भाषायी-के बीच मौजूदा मतभेदों को बढ़ाए या परस्पर घृणा उत्पन्न करे या तनाव पैदा करे,’ और 3. यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप-पैरा (2) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान है कि दलों और अभ्यर्थियों को निजी जीवन के ऐसे सभी पहलुओं की आलोचना से बचना चाहिए, जिनका दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक कार्यकलापों से सरोकार न हो; और 4. यतः, आयोग ने अन्य बातों के साथ-साथ मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश से तथाकथित संबोधन (अनुलग्नक-I) के अधिकृत प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) के साथ एक रिपोर्ट प्राप्त की है जिसमें श्री मोहन यादव, मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश सरकार ने दिनांक 11 अक्तूबर, 2020 को रैली को संबोधित करने के दौरान यह कहा कि: "भैया इस गांव के सरपंच को बचाओ, पूछा क्या हुआ, बोले कांग्रेस वाले निपटाने पर तूल रहे हैं। एक हों, दो हों, तीन हों, चार हों, अभी तक तो ये विधायक बने ही नहीं थे, विधायक अपने में से कई लोग बने, इसलिए होते हैं विधायक कि शिकार करें, सरपंचों का, अगर शिकार करने के लिए तुमको जरूरत हो आगर में हाट में जाओ, या जंगल में जाओ, जानवर मारो आप अपने मनुष्यों के बीच चुनावी जनप्रतिनिधियों को मारने का अगर पाप करते हो तो आपको जीने का अधिकार नहीं है ये आप रह कैसे रहे हो, हम सब प्रकार से निपटना जानते हैं, राजनीति करते हैं तो स्वाभिमान से करते हैं अच्छे के साथ अच्छा में कदम मिलाकर चलना जानते हैं। लेकिन कोई बुरा करने जायेगा तो घर से निकाल लायेंगे और जमीन में गाड़ने वाले लोग हैं" 5. यतः, आपके द्वारा रैली में दिनांक 11 अक्तूबर, 2020 को दिए गए भाषण की वीडियो क्लिप के प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) की आयोग में जांच की गई है और इस बयान को ‘राजनैतिक दलों एवं अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन हेतु आदर्श आचार संहिता के साधारण संचालन’ के पैरा (1) और भाग I के पैरा (2) में निहित प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए पाया गया है; और 6. अब, इसलिए, आयोग आपको अवसर देता है कि आप इस नोटिस की प्राप्ति के 48 घंटों के भीतर दिए गए उपर्युक्त बयान के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करें, ऐसा न करने पर भारत निर्वाचन आयोग आपको आगे संदर्भ दिए बिना निर्णय लेगा। आदेश से अनु.: उपर्युक्त अनुसार हस्ता/- (मधुसूदन गुप्ता) सचिव सेवा में श्री मोहन यादव, मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश सरकार मध्य प्रदेश
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    सं. 100/मध्य प्रदेश – वि.स./2020-(उप) दिनांकः 21 अक्तूबर, 2020 नोटिस यतः, आयोग द्वारा दिनांक 29 सितम्बर, 2020 को प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे.नो./67/2020 के तहत मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए उप-निर्वाचनों की घोषणा कर दी गई है और उक्त प्रेस नोट के पैरा 4 के अनुसार आदर्श आचार संहिता के उपबंध उक्त तारीख से लागू हो गए हैं; और 2. यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप पैरा (1) में यह प्रावधान है कि ‘किसी भी दल अथवा अभ्यर्थी को ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होना चाहिए जो विभिन्न जातियों एवं समुदायों-धार्मिक या भाषायी-के बीच मौजूदा मतभेदों को बढ़ाए या परस्पर घृणा उत्पन्न करे या तनाव पैदा करे,’ और 3. यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप-पैरा (2) में यह अन्य बातों के साथ-साथ, यह प्रावधान है कि दलों और अभ्यर्थियों को निजी जीवन के ऐसे सभी पहलुओं की आलोचना से बचना चाहिए, जिनका दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक कार्यकलापों से सरोकार न हो; और 4. यतः, आयोग ने सभी मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों को अपने पत्र सं. 437/6/अनु./ईसीआई/प्रका./एमसीसी/2019, दिनांक 29 अप्रैल, 2019 को परामर्शिका जारी की है कि ‘राजनीतिक दलों और अभ्यर्थियों को ऐसे किसी भी कार्य/कार्रवाई/कथनों से बचना चाहिए जो महिलाओं के सम्मान और गरिमा के विरूद्ध माना जाता हो; और 5. यतः, आयोग ने अन्य बातों के साथ-साथ, भारतीय जनता पार्टी (एम.पी.) से दिनांक 18.10.2020 की एक शिकायत की प्रति सहित एक रिपोर्ट प्राप्त की है, जिसमें दिनांक 18 अक्तूबर, 2020 को डबरा, ग्वालियर में जन सभा को संबोधित करते समय आपने श्रीमती ईमरती देवी, बीजेपी की अभ्यर्थी को ‘आइटम’ के रूप में संबोधित किया; और 6. यतः, आयोग ने अध्यक्ष, राष्ट्रीय महिला आयोग से भी शिकायत प्राप्त की है कि श्री कमल नाथ, मध्य प्रदेश विधान सभा में विपक्ष के नेता ने एक महिला मंत्री के खिलाफ “आइटम” शब्द का प्रयोग किया........ और जिम्मेदार पद पर बैठे एक व्यक्ति द्वारा ऐसे गैर-जिम्मेदाराना और अपमानजनक बयान की कड़ी निंदा की”; और 7. यतः, दिनांक 18 अक्तूबर, 2020 की भारतीय जनता पार्टी की शिकायत पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश से एक रिपोर्ट मांगी गई थी, तथा उक्त को अब तथाकथित संबोधन (अनुलग्नक-1) के अधिकृत प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) के साथ निम्नानुसार प्राप्त किया गया हैः “....ये उसके जैसे नहीं है। क्या है उसका नाम? मैं क्या उसका नाम लूं, आप तो उसे मुझसे ज्यादा जानते है। आपको तो मुझे पहले ही सावधान कर देना चाहिए था, यह क्या आइटम है? यह क्या आइटम है?....” 8. यतः, श्री कमल नाथ द्वारा डबरा, ग्वालियर में दिनांक 18 अक्तूबर, 2020 को दिए गए भाषण की वीडियो क्लिप और प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) की आयोग में जांच की गई है और उनके बयान को ‘राजनीतिक दलों एवं अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन हेतु आदर्श आचार संहिता के साधारण संचालन’ के पैरा (2) अथवा भाग (I) में निहित प्रावधानों का उल्लंघन करते और आयोग द्वारा अपने पत्र सं. 437/6/अनु./ईसीआई/प्रका./एमसीसी/2019, दिनांक 29 अप्रैल, 2019 के तहत जारी की गई परामर्शिका की अवहेलना करते हुए पाया गया है; और 9. अब, इसलिए, आयोग आपको अवसर देता है कि आप इस नोटिस की प्राप्ति के 48 घंटों के भीतर दिए गए उपर्युक्त बयान के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करें, ऐसा न करने पर भारत निर्वाचन आयोग आपको आगे संदर्भ दिए बिना निर्णय लेगा। आदेश अनु.: उपर्युक्त अनुसार (मधुसूदन गुप्ता) सचिव सेवा में श्री कमल नाथ पूर्व-मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश शिकारपुर, तहसील मोहखेड़, जिला-छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश
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    सं. 100/मध्य प्रदेश – वि.स./2020-(उप) दिनांकः 26 अक्तूबर, 2020 नोटिस यतः, आयोग द्वारा दिनांक 29 सितम्बर, 2020 को प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे.नो./67/2020 के तहत मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए उप-निर्वाचनों की घोषणा कर दी गई है और उक्त प्रेस नोट के पैरा 4 के अनुसार आदर्श आचार संहिता के उपबंध उक्त तारीख से लागू हो गए हैं; और 2. यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप पैरा (1) में यह प्रावधान है कि ‘किसी भी दल अथवा अभ्यर्थी को ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होना चाहिए जो विभिन्न जातियों एवं समुदायों-धार्मिक या भाषायी-के बीच मौजूदा मतभेदों को बढ़ाए या परस्पर घृणा उत्पन्न करे या तनाव पैदा करे’; और 3. यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप-पैरा (2) में, अन्य बातों के साथ-साथ, यह प्रावधान है कि दलों और अभ्यर्थियों को निजी जीवन के ऐसे सभी पहलुओं की आलोचना से बचना चाहिए, जिनका दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक कार्यकलापों से सरोकार न हो; और 4. यतः, आयोग ने अन्य बातों के साथ-साथ, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश से एक रिपोर्ट प्राप्त की है, जिसमें दिनांक 15 अक्तूबर, 2020 को सानवेर, इंदौर में रैली को संबोधित करते समय श्री सज्जन सिंह वर्मा, कांग्रेस के नेता ने बीजेपी के नेता कैलाश विजयवर्गीय सिंह को “रावण” के रूप में संबोधित किया; और 5. यतः, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश से एक रिपोर्ट मांगी गई थी, तथा उक्त को अब तथाकथित संबोधन (अनुलग्नक-1) के अधिकृत प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) के साथ निम्नानुसार प्राप्त किया गया हैः “....सुन रे भैया कैलाशिया की तेरी औकात कितनी है...... तू भूल गया वो दिन साड़ी पहनकर, बाल बड़े-बड़े करके नाक में नत्थी पहनकर पंडितजी हाथ चूड़ी पहनकर तंत्र-मंत्र करता था....... नाक पकोड़े जैसी हो गयी,..... दशहरा जैसे जैसे पास में आता है उसका चेहरा रावण जैसा हो जाता है....... मेरा कहना है कितनी बार जला चुके हैं, अब भारतीय जनता पार्टी अभी उनकी सरकार है वो ही इस रावण को जलायें....” 6. यतः, श्री सज्जन सिंह वर्मा द्वारा दिनांक 15 अक्तूबर, 2020 को रैली को संबोधित करने के भाषण के प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) की आयोग में जांच की गई है और उनके बयान को ‘राजनीतिक दलों एवं अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन हेतु आदर्श आचार संहिता के साधारण संचालन’ के भाग I के पैरा (1) और पैरा (2) में निहित प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए पाया गया है; और 7. अब, इसलिए, आयोग आपको अवसर देता है कि आप इस नोटिस की प्राप्ति के 48 घंटों के भीतर दिए गए उपर्युक्त बयान के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करें, ऐसा न करने पर भारत निर्वाचन आयोग आपको आगे संदर्भ दिए बिना निर्णय लेगा। अनुलग्नक: उपर्युक्त अनुसार आदेश से, (स्टैण्डहोप युहलुंग) वरिष्ठ प्रधान सचिव सेवा में श्री सज्जन सिंह वर्मा, कांग्रेस के नेता, मध्य प्रदेश
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    सं. 100/मध्य प्रदेश–वि.स./2020-(उप) दिनांकः 27 अक्तूबर, 2020 नोटिस यतः, आयोग द्वारा दिनांक 29 सितम्बर, 2020 को प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे.नो./67/2020 के तहत मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए उप-निर्वाचनों की घोषणा कर दी गई है और उक्त प्रेस नोट के पैरा 4 के अनुसार आदर्श आचार संहिता के उपबंध उक्त तारीख से लागू हो गए हैं; और 2. यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप पैरा (1) में यह प्रावधान है कि ‘किसी भी दल अथवा अभ्यर्थी को ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होना चाहिए जो विभिन्न जातियों एवं समुदायों-धार्मिक या भाषायी-के बीच मौजूदा मतभेदों को बढ़ाए या परस्पर घृणा उत्पन्न करे या तनाव पैदा करे,’ और 3. यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप-पैरा (2) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान है कि दलों और अभ्यर्थियों को निजी जीवन के ऐसे सभी पहलुओं की आलोचना से बचना चाहिए, जिनका दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक कार्यकलापों से सरोकार न हो; और 4. यतः, आदर्श आचार संहिता के पैरा 1 के उप पैरा (5) में यह प्रावधान है कि ‘प्रत्येक व्यक्ति के शांतिपूर्ण और विघ्नरहित घरेलू जीवन के अधिकार का आदर करना चाहिए चाहे राजनैतिक दल एवं अभ्यर्थी उसके राजनैतिक विचारों या कार्यों के कितने ही विरूद्ध क्यों न हों। व्यक्तियों के विचारों या कार्यों का विरोध करने के लिए उनके घरों के सामने प्रदर्शन करने या धरना देने के तरीकों का सहारा किसी भी परिस्थति में नहीं लेना चाहिए’; और 5. यतः, आयोग ने सभी मान्यताप्राप्त राजनैतिक दलों को अपने पत्र सं. 437/6/अनु./ईसीआई/प्रका./एमसीसी/2019, दिनांक 29 अप्रैल, 2019 को परामर्शिका जारी की है कि ‘राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों को ऐसे किसी भी कार्य/कार्रवाई/कथनों से बचना चाहिए जो महिलाओं के सम्मान और गरिमा के विरूद्ध माना जाता हो; और 6. यतः, सोशल मीडिया पर प्रसारित शिकायत के आधार पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश से एक रिपोर्ट मांगी गई थी तथा उक्त को अब तथाकथित संबोधन (अनुलग्नक-I) के अधिकृत प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) के साथ निम्नानुसार प्राप्त किया गया हैः “वह बंगाली आदमी है वह मध्य प्रदेश आया केवल मुख्यमंत्री के लिए। उसको बोलने की सभ्यता नहीं है। इसे क्या कहा जाए। वह मुख्यमंत्री के पद से हटा तो पागल हो गया है। पागल बनकर पूरे मध्य प्रदेश में घूम रहा है तो उसे क्या कह सकते है, उसकी माँ बहन आइटम होगी बंगाल की। हमें पता थोड़ी है।” 7. यतः, सुश्री इमरती देवी द्वारा दिए गए भाषण की वीडियो क्लिप और प्रतिलेख (ट्रांसक्रिप्ट) की आयोग में जांच की गई है और उनके बयान को ‘राजनैतिक दलों एवं अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन हेतु आदर्श आचार संहिता के साधारण संचालन’ के पैरा (1), (2) और भाग (I) के (5) में निहित प्रावधानों का उल्लंघन करते और आयोग द्वारा अपने पत्र सं. 437/6/अनु./ईसीआई/प्रका./एमसीसी/2019, दिनांक 29 अप्रैल, 2019 के तहत जारी की गई परामर्शिका की अवहेलना करते हुए पाया गया है; और 8. अब, इसलिए, आयोग आपको अवसर देता है कि आप इस नोटिस की प्राप्ति के 48 घंटों के भीतर दिए गए उपर्युक्त बयान के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करें, ऐसा न करने पर भारत निर्वाचन आयोग आपको आगे संदर्भ दिए बिना निर्णय लेगा। आदेश से अनु.: उपर्युक्त अनुसार (स्टेण्डहोप युहलूंग) वरिष्ठ प्रधान सचिव सेवा में सुश्री इमरती देवी, 19-डबरा (अ. जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से अभ्यर्थी, मध्य प्रदेश

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eci-logo.pngभारत निर्वाचन आयोग एक स्‍वायत्‍त संवैधानिक प्राधिकरण है जो भारत में निर्वाचन प्रक्रियाओं के संचालन के लिए उत्‍तरदायी है। यह निकाय भारत में लोक सभा, राज्‍य सभा, राज्‍य विधान सभाओं और देश में राष्‍ट्रपति एवं उप-राष्‍ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों का संचालन करता है। निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्‍छेद 324 और बाद में अधिनियमित लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम के प्राधिकार के तहत कार्य करता है। 

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