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    सं. 3/4/आईडी/2020/एसडीआर/(परिषद-कर्नाटक) दिनांक 08 अक्तूबर, 2020 सेवा में मुख्य निर्वाचन अधिकारी, कर्नाटक, बंगलोर। विषय: 02 स्नातक तथा 02 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से कर्नाटक विधान परिषद के लिए द्विवार्षिक निर्वाचन, जिनके लिए 28 अक्तूबर, 2020 को मतदान निर्धारित किया गया है- निर्वाचकों की पहचान के संबंध में निर्वाचन आयोग का आदेश। महोदय, मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि निर्वाचन आयोग ने यह निदेश दिया है कि कर्नाटक राज्य में कर्नाटक दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र, कर्नाटक पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र, कर्नाटक पूर्वोत्तर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र और बंगलोर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जिन सभी निर्वाचकों को उनके संबंधित विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों से निर्वाचकों के रूप में एपिक जारी किया गया है, उन सभी को 01 अक्तूबर, 2020 (गुरुवार) को अधिसूचित कर्नाटक विधान परिषद के निर्वाचनों में मतदान हेतु मतदान केंद्र पर आने पर अपने मताधिकार का प्रयोग करने लिए ये कार्ड या संलग्न आदेश में यथोल्लिखित कोई अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। 2. इस आशय से दिनांक 08 अक्तूबर, 2020 को जारी आदेश की एक प्रति इसके साथ संलग्न है। निर्वाचन आयोग ने ऐसे निर्वाचक, जो एपिक प्रस्तुत नहीं करते हैं, के संदर्भ में पहचान हेतु 9 वैकल्पिक दस्तावेज अनुमोदित किए हैं। सभी पीठासीन अधिकारियों का ध्यान विशेष रूप से आदेश के पैराग्राफ 4 में दिए गए निर्देशों की ओर आकृष्ट किया जाए। 3. पीठासीन अधिकारियों को स्पष्ट अनुदेश दिए जाएंगे कि निर्वाचक फोटो पहचान पत्र में निर्वाचक के नाम, पिता/माता/पति के नाम, लिंग, आयु या पते में निर्वाचकों से संबंधित प्रविष्टियों में मामूली विसंगतियों को नजरअंदाज किया जाए और यदि उस कार्ड के माध्यम से निर्वाचक की पहचान स्थापित की जा सकती हो, तो निर्वाचकों को मतदान करने की अनुमति दी जाए। 4. आयोग के दिनांक 8 अक्तूबर, 2020 के आदेश को राज्य के राजपत्र में तत्काल प्रकाशित किया जाए। स्नातक तथा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से द्विवार्षिक निर्वाचन हेतु नियुक्त रिटर्निंग अधिकारी, पीठासीन अधिकारी तथा अन्य संबंधित सभी निर्वाचन प्राधिकारियों को निर्वाचन आयोग के निदेशों की तत्काल सूचना दी जाए। इस आदेश को आम जनता तथा निर्वाचकों की सूचनार्थ प्रिंट/इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से व्यापक रूप से प्रचारित किया जाए। यह स्पष्ट किया जाए कि जिन्हें एपिक जारी किया गया है, उनको मतदान केंद्र पर मतदान हेतु आने पर अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए एपिक प्रस्तुत करना होगा और जो एपिक प्रस्तुत करने में असमर्थ हैं उन्हें मतदान के समय निर्वाचन आयोग द्वारा विनिर्दिष्ट कोई वैकल्पिक दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा। आपके राज्य में द्विवार्षिक निर्वाचन में खड़े सभी अभ्यर्थियों को निर्वाचन आयोग के इस निदेश की लिखित सूचना भी दी जाए। 5. रिटर्निंग अधिकारियों को इस आदेश के निहितार्थों को नोट करने और विशेष ब्रीफिंग के माध्यम से सभी पीठासीन अधिकारियों को इसकी विषय वस्तु स्पष्ट करने का अनुदेश दिया जाएगा। वे यह भी सुनिश्चित करेंगे कि इस आदेश की एक प्रति निर्वाचन क्षेत्र के सभी मतदान केंद्रों/बूथों पर पीठासीन अधिकारियों के पास उपलब्ध होनी चाहिए। 6. कृपया इस पत्र की पावती दें तथा की गई कार्रवाई की पुष्टि करें। भवदीय, हस्ता./- (अभिषेक तिवारी) अवर सचिव **************** भारत निर्वाचन आयोग निर्वाचन सदन, अशोक रोड, नई दिल्ली-110 001 सं. 3/4/आईडी/2020/एसडीआर (काउंसिल) दिनांक: 9 अक्तूबर, 2020 आदेश यतः, भारत निर्वाचन आयोग वर्ष 2000 से लोक सभा तथा विधान सभाओं के निर्वाचनों में निर्दिष्ट पहचान दस्तावेजों के माध्यम से निर्वाचकों की अनिवार्य पहचान की नीति का अनुसरण कर रहा है ताकि निर्वाचकों के प्रतिरूपण को रोका जा सके जिससे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 62 के अंतर्गत असली निर्वाचक के मत देने के अधिकार को अधिक प्रभावी बनाया जा सके; और 2. यतः, निर्वाचनों का संचालन नियम, 1961 के नियम 35(3) और 37(2) (ख) के उपबंधों के दृष्टिगत आयोग यह निर्देश जारी करता रहा है कि लोक सभा और विधान सभाओं के निर्वाचनों में निर्वाचक मतदान केंद्र पर अपना निर्वाचन फोटो पहचान पत्र या अन्य निर्दिष्ट दस्तावेज प्रस्तुत करेंगे और उनकी ओर से उक्त निर्वाचन फोटो पहचान पत्र या दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहने पर या इंकार करने पर उनको बैलेट पेपर प्रदान करने या मत देने से मना किया जा सकता है; और 3. यतः, निर्वाचकों की पहचान और प्रतिरूपण के प्रति सुरक्षोपाय से संबंधित उक्त प्रावधान, 'स्नातक' और 'शिक्षक' निर्वाचन क्षेत्रों के निर्वाचनों में भी समान रूप से लागू होते हैं और चूंकि इन निर्वाचन क्षेत्रों के निर्वाचक, विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों में भी निर्वाचक होतें हैं, इसलिए उन्हें उनके संबंधित विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र में निर्वाचक के रूप में निर्वाचक फोटो पहचान पत्र प्रदान किए गए होंगे; 4. अतः, अब, सभी संबद्ध कारकों तथा विधिक एवं तथ्यात्मक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए, निर्वाचन आयोग, एतद्द्वारा, यह निदेश देता है कि कर्नाटक राज्य में कर्नाटक दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र, कर्नाटक पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र, कर्नाटक पूर्वोत्तर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र और बंगलोर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से कर्नाटक विधान परिषद के मौजूदा द्विवार्षिक निर्वाचन में सभी निर्वाचकों, जिन्हें एपिक जारी किया गया है, को 01 अक्तूबर, 2020 (गुरूवार) को अधिसूचित उक्त निर्वाचन क्षेत्रों से बिहार विधान परिषद के मौजूदा द्विवार्षिक निर्वाचन में मतदान के लिए मतदान केंद्र आने पर अपने मताधिकार का प्रयोग करने लिए इन कार्डों को प्रस्तुत करना होगा। तथापि, ऐसे निर्वाचक जो अपना निर्वाचक फोटो पहचान पत्र प्रस्तुत नहीं कर पाते हैं, उन्हें अपनी पहचान स्थापित करने के लिए निम्नलिखित वैकल्पिक फोटो पहचान दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज प्रस्तुत करना होगाः- (i) आधार कार्ड; (ii) ड्राइविंग लाइसेन्स, (iii) पैन कार्ड, (iv) भारतीय पासपोर्ट, (v) राज्य/केन्द्र सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, स्थानीय निकाय या अन्य निजी औद्योगिक घरानों द्वारा अपने कर्मचारियों को जारी किए गए सेवा पहचान-पत्र, (vi) सांसदों/विधायकों/पार्षदों को जारी किए गए सरकारी पहचान पत्र, (vii) शैक्षिक संस्थाओं, जिसमें संबंधित शिक्षक/स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का निर्वाचक नियोजित हो, द्वारा जारी सेवा पहचान पत्र, (viii) विश्वविद्यालय द्वारा जारी डिग्री/डिप्लोमा का मूल प्रमाण-पत्र, (ix) सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता संबंधी मूल प्रमाण-पत्र। भवदीय, हस्ता./- (एन.टी. भूटिया) सचिव
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    सं. 3/4/आईडी/2020/एसडीआर/(परिषद-बिहार) दिनांक 07 अक्तूबर, 2020 सेवा में मुख्य निर्वाचन अधिकारी, बिहार, पटना। विषय: 04 स्नातक तथा 04 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से बिहार विधान परिषद के लिए द्विवार्षिक निर्वाचन, जिनके लिए 22 अक्तूबर, 2020 को मतदान निर्धारित किया गया है- निर्वाचकों की पहचान के संबंध में निर्वाचन आयोग का आदेश। महोदय, मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि निर्वाचन आयोग ने यह निदेश दिया है कि बिहार राज्य में पटना स्नातक, दरभंगा स्नातक, तिरहट स्नातक, कोसी स्नातक, पटना शिक्षक, दरभंगा शिक्षक, तिरहट शिक्षक और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से जिन सभी निर्वाचकों को उनके संबंधित विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों में निर्वाचकों के रूप में एपिक जारी किया गया है, उन सभी को 28 सितंबर, 2020 (सोमवार) को अधिसूचित बिहार विधान परिषद के निर्वाचनों में मतदान हेतु मतदान केंद्र पर आने पर अपने मताधिकार का प्रयोग करने लिए ये कार्ड या संलग्न आदेश में यथोल्लिखित कोई अन्य वैकल्पिक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। 2. इस आशय से दिनांक 07 अक्तूबर, 2020 को जारी आदेश की एक प्रति इसके साथ संलग्न है। निर्वाचन आयोग ने ऐसे निर्वाचकों, जो एपिक प्रस्तुत नहीं करते हैं, के संदर्भ में पहचान हेतु 9 वैकल्पिक दस्तावेज अनुमोदित किए हैं। सभी पीठासीन अधिकारियों का ध्यान विशेष रूप से आदेश के पैराग्राफ 4 में दिए गए निर्देशों की ओर आकृष्ट किया जाए। 3. पीठासीन अधिकारियों को स्पष्ट अनुदेश दिए जाएंगे कि निर्वाचक फोटो पहचान पत्र में निर्वाचक के नाम, पिता/माता/पति के नाम, लिंग, आयु या पते में निर्वाचकों से संबंधित प्रविष्टियों में मामूली विसंगतियों को नजरअंदाज किया जाए और, यदि उस कार्ड के माध्यम से निर्वाचक की पहचान स्थापित की जा सकती हो, तो निर्वाचकों को मतदान करने की अनुमति दी जाए। 4. आयोग के दिनांक 7 अक्तूबर, 2020 के आदेश को राज्य के राजपत्र में तत्काल प्रकाशित किया जाए। स्नातक तथा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से द्विवार्षिक निर्वाचन हेतु नियुक्त रिटर्निंग अधिकारी, पीठासीन अधिकारी तथा अन्य संबंधित सभी निर्वाचन प्राधिकारियों को निर्वाचन आयोग के निदेशों की तत्काल सूचना दी जाए। इस आदेश को आम जनता तथा निर्वाचकों की सूचनार्थ प्रिंट/इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से व्यापक रूप से प्रचारित किया जाए। यह स्पष्ट किया जाए कि जिन्हें एपिक जारी किया गया है, उनको मतदान केंद्र पर मतदान हेतु आने पर अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए एपिक प्रस्तुत करना होगा और जो एपिक प्रस्तुत करने में असमर्थ हैं उन्हें मतदान के समय निर्वाचन आयोग द्वारा विनिर्दिष्ट कोई वैकल्पिक दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा। आपके राज्य में द्विवार्षिक निर्वाचन में खड़े सभी अभ्यर्थियों को निर्वाचन आयोग के इस निदेश की लिखित सूचना भी दी जाए। 5. रिटर्निंग अधिकारियों को इस आदेश के निहितार्थों को नोट करने और विशेष ब्रीफिंग के माध्यम से सभी पीठासीन अधिकारियों को इसकी विषय वस्तु स्पष्ट करने का अनुदेश दिया जाएगा। वे यह भी सुनिश्चित करेंगे कि इस आदेश की एक प्रति निर्वाचन क्षेत्र के सभी मतदान केंद्रों/बूथों पर पीठासीन अधिकारियों के पास उपलब्ध होनी चाहिए। 6. कृपया इस पत्र की पावती दें तथा की गई कार्रवाई की पुष्टि करें। भवदीय, हस्ता./- (अभिषेक तिवारी) अवर सचिव **************** भारत निर्वाचन आयोग निर्वाचन सदन, अशोक रोड, नई दिल्ली-110 001 सं. 3/4/आईडी/2020/एसडीआर (काउंसिल) दिनांक: 7 अक्तूबर, 2020 आदेश यतः, भारत निर्वाचन आयोग वर्ष 2000 से लोक सभा तथा विधान सभाओं के निर्वाचनों में निर्दिष्ट पहचान दस्तावेजों के माध्यम से निर्वाचकों की अनिवार्य पहचान की नीति का अनुसरण कर रहा है ताकि निर्वाचकों के प्रतिरूपण को रोका जा सके जिससे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 62 के अंतर्गत असली निर्वाचक के मत देने के अधिकार को अधिक प्रभावी बनाया जा सके; और 2. यतः, निर्वाचनों का संचालन नियम, 1961 के नियम 35(3) और 37(2) (ख) के उपबंधों के दृष्टिगत आयोग यह निर्देश जारी करता रहा है कि लोक सभा और विधान सभाओं के निर्वाचनों में निर्वाचक मतदान केंद्र पर अपना निर्वाचन फोटो पहचान पत्र या अन्य निर्दिष्ट दस्तावेज प्रस्तुत करेंगे और उनकी ओर से उक्त निर्वाचन फोटो पहचान पत्र या दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहने पर या इंकार करने पर उनको बैलेट पेपर की प्रदायगी करने या मत देने की अनुमति देने से मना किया जा सकता है; और 3. यतः, निर्वाचकों की पहचान और प्रतिरूपण के प्रति सुरक्षोपाय से संबंधित उक्त प्रावधान स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के निर्वाचनों में भी समान रूप से लागू होते हैं और क्योंकि इन निर्वाचन क्षेत्रों के निर्वाचक, विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों में भी निर्वाचक होते हैं, इसलिए उन्हें उनके संबंधित विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र में निर्वाचक के रूप में निर्वाचक फोटो पहचान पत्र की प्रदायगी की गई होगी; 4. अतः, अब, सभी संबद्ध कारकों तथा विधिक एवं तथ्यात्मक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए, निर्वाचन आयोग, एतद्द्वारा, यह निदेश देता है कि पटना स्नातक, दरभंगा स्नातक, तिरहट स्नातक, कोसी स्नातक, पटना शिक्षक, दरभंगा शिक्षक, तिरहट शिक्षक और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से बिहार विधान परिषद से मौजूदा द्विवार्षिक निर्वाचन में सभी निर्वाचक जिन्हें एपिक जारी किया गया है, उन सभी को 28 सितंबर, 2020 (सोमवार) को अधिसूचित उक्त निर्वाचन क्षेत्रों से बिहार विधान परिषद के मौजूदा द्विवार्षिक निर्वाचन में मतदान के लिए मतदान केंद्र पर अपने मताधिकार का प्रयोग करने लिए इन कार्डों को प्रस्तुत करना होगा। तथापि, ऐसे निर्वाचक जो अपना निर्वाचक फोटो पहचान पत्र प्रस्तुत नहीं कर पाते हैं, उन्हें अपनी पहचान स्थापित करने के लिए निम्नलिखित वैकल्पिक फोटो पहचान दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज प्रस्तुत करना होगाः- (i) आधार कार्ड; (ii) ड्राइविंग लाइसेन्स, (iii) पैन कार्ड, (iv) भारतीय पासपोर्ट, (v) राज्य/केन्द्र सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, स्थानीय निकाय या अन्य प्राइवेट औद्योगिक घरानों द्वारा अपने कर्मचारियों को जारी किए गए सेवा पहचान-पत्र, (vi) सांसदों, विधायकों/विधान परिषद् सदस्यों को जारी किए गए सरकारी पहचान पत्र, (vii) शैक्षिक संस्था जिसमें संबंधित शिक्षक/स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का निर्वाचक नियोजित हो, को जारी सेवा पहचान पत्र, (viii) विश्वविद्यालय डिग्री/डिप्लोमा का मूल प्रमाण-पत्र, (ix) सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता संबंधी मूल प्रमाण-पत्र। भवदीय, हस्ता./- (एन.टी. भूटिया) सचिव

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eci-logo.pngभारत निर्वाचन आयोग एक स्‍वायत्‍त संवैधानिक प्राधिकरण है जो भारत में निर्वाचन प्रक्रियाओं के संचालन के लिए उत्‍तरदायी है। यह निकाय भारत में लोक सभा, राज्‍य सभा, राज्‍य विधान सभाओं और देश में राष्‍ट्रपति एवं उप-राष्‍ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों का संचालन करता है। निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्‍छेद 324 और बाद में अधिनियमित लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम के प्राधिकार के तहत कार्य करता है। 

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