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    सं. भा.नि.आ/प्रेस नोट/12/2020 दिनांकः 24 जनवरी, 2020 प्रेस नोट मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री सुनील अरोड़ा ने दक्षिण एशियाई निर्वाचन प्रबंधन निकाय फोरम (फेम्बोसा) की वर्ष 2020 के लिए अध्यक्षता ग्रहण की। ‘सांस्थानिक क्षमता के सशक्तिकरण’ पर फेम्बोसा की 10वीं वार्षिक बैठक और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का नई दिल्ली में समापन। फेम्बोसा के सदस्यों द्वारा नई दिल्ली संकल्प एकमत से अंगीकृत किया गया। भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त, श्री सुनील अरोड़ा ने आज दक्षिण एशियाई निर्वाचन प्रबंधन निकाय फोरम (फेम्बोसा) की वर्ष 2020 के लिए अध्यक्षता ग्रहण की। फेम्बोसा के निवर्तमान अध्यक्ष, श्री के.के. नुरूल हुदा, मुख्य निर्वाचन आयुक्त, बांग्लादेश ने आज नई दिल्ली में आयोजित फेम्बोसा की 10वीं वार्षिक बैठक में नए अध्यक्ष श्री अरोड़ा को फेम्बोसा का प्रतीक (लोगो) प्रदान किया। अपने संबोधन में श्री नुरूल हुदा ने कहा कि फोरम के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए सदस्य अपने अनुभव और कौशल साझा करते रहे हैं तथा अन्य निर्वाचन प्रबंधन निकायों के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए भी कदम उठाते रहे हैं। निर्वाचन प्रबंधन निकाय बांग्लादेश द्वारा फेम्बोसा के सदस्यों के पिछले वर्ष के कार्यकलापों की प्रबंधन रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। फोरम के अध्यक्ष पद का दायित्व स्वीकार करते हुए श्री अरोड़ा ने प्रतिनिधियों द्वारा भारत निर्वाचन आयोग में अपना विश्वास और भरोसा जताने के लिए उनका धन्यवाद किया। श्री अरोड़ा ने कहा “लोकतांत्रिक मंच और इसकी अधिरचना लोगो की इच्छा विधिमान्य राजनैतिक शक्ति के सिद्धांत पर निर्मित और मजबूत की जा सकती है। लोकतंत्र में, सत्ता को केवल सार्वभौमिक, समानता, प्रत्यक्ष और स्वतंत्र मताधिकार पर आधारित नियमित निर्वाचनों के आयोजन से जीता और विधिमान्य बनाया जा सकता है।” उन्होंने आगे कहा कि मजबूत सहभागिता और समावेशी लोकतंत्र सभी नागरिकों के लिए सुशासन और सशक्तिकरण बेहतर ढंग से सुनिश्चित कर पाते हैं। श्री अरोड़ा ने यह भी कहा कि क्षमता निर्माण के लिए, भारत निर्वाचन आयोग ने जून, 2011 में भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन संस्थान (आईआईआईडीईएम) की स्थापना की है। फेम्बोसा की स्थापना मई, 2012 में नई दिल्ली में आयोजित सार्क देशों के निर्वाचन प्रबंधन निकायों के प्रमुखों के तीसरे सम्मेलन में की गई थी। अपने आठ सदस्यों के साथ, फेम्बोसा लोकतांत्रिक विश्व के बहुत बड़े भाग का प्रतिनिधित्व करता है और निर्वाचन प्रबंधन निकायों का सक्रिय क्षेत्रीय संघ है। फेम्बोसा की वार्षिक बैठक सदस्यों के क्रमावर्तन (रोटेशन) आधार पर आयोजित की जाती है। फेम्बोसा की अंतिम (नौंवी) वार्षिक बैठक ढाका में सितम्बर, 2018 में आयोजित की गई थी। नई दिल्ली संकल्प आज फेम्बोसा की दसवीं वार्षिक बैठक के आयोजन में बैठक में उपस्थित सात फेम्बोसा के सदस्यों द्वारा एकमत से अंगीकृत किया गया। सदस्यों ने संकल्प लिया किः फेम्बोसा की दसवीं बैठक में निर्वाचन प्रबंधन निकायों के सदस्यों द्वारा अनुमोदित वर्ष के रूप में 2020 के लिए कार्य योजना को कार्यान्वित करना; सदस्य देशों की क्षमता निर्माण में सहयोग करना; संबंधित देशों में यथा व्यावहारिक निर्वाचन आगंतुक कार्यक्रमों की मेज़बानी करना; सदस्यों को यथा अनुरोधित और यथा व्यावहारिक तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना; निर्वाचन प्रबंधन निकायों के सदस्यों द्वारा प्रयोग किए जा रहे आईसीटी टूल्ज़ और माडयूल्स की उत्तम पद्धतियों और जानकारी को साझा करना और निर्वाचनों में आईसीटी के सतत प्रयोग के लिए मानक विकसित करना; धन बल और बाहुबल प्रयोग पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाना; निर्वाचन प्रक्रिया में दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों की सहभागिता को बढ़ाना और इसे सुगम बनाना; www.fembosa.org वेब पोर्टल के माध्यम से निर्वाचन प्रबंधन निकायों के मध्य सूचनाएं साझा करने के लिए स्थायी अंश (कंटेंट) प्रबंधन आधारित फेम्बोसा वेब पोर्टल का अनुरक्षण; क्षेत्रीय अनुसंधान परियोजनाएं परिकल्पित करना और इन्हें कार्यान्वित करना। “निर्वाचनों में प्रौद्योगिकी के प्रयोग” संबंधी वर्ष 2020 की कार्ययोजना में यह अपेक्षा है कि निर्वाचनों में प्रौद्योगिकी के विभिन्न पहलुओं संबंधी परियोजनाएं और पहल आरंभ करें तथा इस बारे में अपने अनुभवों और सामने आई चुनौतियों की रिपोर्ट फेम्बोसा की आगामी बैठक में प्रस्तुत करें। सम्मेलन के अतिरिक्त, भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अफगानिस्तान के स्वतंत्र निर्वाचन आयोग के साथ निर्वाचन प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग करने के लिए समझौता करार का नवीकरण किया गया। समझौता करार पर महामहिम श्रीमती हावा आलम नूरिस्तानी, चेयर वुमेन, अफगानिस्तान स्वतंत्र निर्वाचन आयोग और भारत निर्वाचन आयोग की ओर से श्री सुनील अरोड़ा, मुख्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा हस्ताक्षर किए गए। निर्वाचन प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग हेतु टयूनिशिया के निर्वाचन संबंधी स्वतंत्र उच्च प्राधिकरण के साथ भी समझौता करार पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौता करार पर महामहिम श्री नाबिल बफाउन, अध्यक्ष, निर्वाचन स्वतंत्र उच्च प्राधिकरण, टयूनिशिया और श्री अरोड़ा द्वारा हस्ताक्षर किए गए। आज “सांस्थानिक क्षमता के सशक्तिकरण” थीम पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 30 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। पूरे दिन चलने वाले अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रतिभागी फेम्बोसा सदस्यों के प्रतिनिधि और कजाखिस्तान, केन्या, किर्गिस्तान, मारीशस, टयुनिशिया के निर्वाचन प्रबंधन निकायों तथा तीन अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं अर्थात् ए-वेब, निर्वाचकीय पद्धतियों का अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठान (इंटरनेशनल फाउंडेशन ऑफ इलेक्टोरल सिस्टमस) और अंतर्राष्ट्रीय आईडीईए के प्रतिभागी शामिल थे। अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, किर्गिज रिपब्लिक, मालदीव, मारीशस, नेपाल, श्रीलंका, टयुनिशिया, आईएफईएस और अंतर्राष्ट्रीय आईडीईए के प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुतिकरण दिया गया। प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव, उत्तम पद्धतियां और पहल साझा की। निर्वाचन प्रबंधन निकायों की सांस्थानिक क्षमता के सशक्तिकरण हेतु प्रतिनिधियों ने बाधाओं, नीतिगत कार्यकलापों, कार्यनीतियों, कार्यक्रमों, उत्तम परिपाटियों और प्रौद्योगिकी संबंधी नवोन्वेषों का विश्लेषण किया। इस अवसर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त, श्री सुनील अरोड़ा ने भारत के दो निर्वाचन आयुक्तों श्री अशोक लवासा और श्री सुशील चंद्रा तथा महासचिव, श्री उमेश सिन्हा, भा नि आ के साथ भारत निर्वाचन आयोग की पत्रिका – ‘वॉयस इंटरनेशनल’ के दसवें अंक का भी विमोचन किया, जिसमें ‘मतदाता पंजीकरण की नवोन्मेषी पद्धतियां’ के थीम पर लेख शामिल हैं। इस अवसर पर “महत्वपूर्ण है मत मेरा” पत्रिका का चौथा अंक भी जारी किया गया था। विश्व निर्वाचन निकाय संघ (ए-वेब) का एक वेब पोर्टल भी शुरू किया गया। आईआईआईडीईएम, ए-वेब सदस्यों के कार्मिकों की उत्तम पद्धतियों और क्षमता निर्माण को साझा करने के लिए प्रलेखन, अनुसंधान और प्रशिक्षण हेतु ए-वेब सेंटर की मेजबानी करेगा। आयोग ने “आईसीटी 2020; निर्वाचन हेतु 20 एप्स का सार-संग्रह” भी जारी किया है। भारत निर्वाचन आयोग ने विश्व में सबसे बड़े लोकतंत्र में सहभागितापूर्ण तरीके से स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय निर्वाचनों के संचालन में एक अग्रणी भूमिका निभाने का प्रयास किया है। यह अपने मजबूत अंतर्राष्ट्रीय सहयोग कार्यक्रम के माध्यम से अन्य निर्वाचन प्रबंधन निकायों को जानकारी देने तथा कौशल एवं उत्तम परिपाटियों को साझा करने के कारण अपनी स्वच्छ छवि बनाए हुए है। सितम्बर, 2019 में, भारत निर्वाचन आयोग द्वारा विश्व निर्वाचन निकायों के 115 सदस्य संघों के वर्ष 2019-21 के कार्यकाल हेतु अध्यक्षता का पद्भार ग्रहण किया गया था। आज ही कुछ समय पहले, भारत निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2020 के लिए फेम्बोसा के अध्यक्ष का पद ग्रहण किया है। भारत निर्वाचन आयोग इन संघों के आदर्शों और उद्देश्यों के प्रति कटिबद्ध है और विश्व में लोकतंत्र की मशाल जलाने के लिए अपने साथी ईएमबी के साथ सहयोग बढ़ाने और पारस्परिक वार्तालाप को और मजबूत बनाने हेतु आशान्वित है।
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    ईसीआई/प्रे नो/118/2019 दिनांकः 19 दिसम्बर, 2019 प्रेस नोट नामांकन से लेकर निर्वाचनों तक (ई2ई) की पूरी प्रक्रिया को दिव्यांगजनों के लिए अधिकाधिक मैत्रीपूर्ण बनाने की आवश्यकता है : मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री सुनील अरोड़ा आयोग ने सुगम निर्वाचनों पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया भारत निर्वाचन आयोग ने आज सुगम निर्वाचनों पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। आयोग द्वारा दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए निर्वाचनों को मैत्रीपूर्ण बनाने के लिए अब तक उठाए गए कदमों और प्रक्रिया को अधिकाधिक समावेशी और अभिगम्य बनाने के लिए अभी भी अपेक्षित कदमों पर विचार-विमर्श करने हेतु कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री सुनील अरोड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि “हालांकि दिव्यांगता ऐसी समस्या है जिस पर लोगों और परिवार द्वारा ध्यान दिए जाने की आवश्यकता होती है, तथापि सुगम्यता ऐसी समस्या है जिसके लिए अधिकाधिक संस्थागत उपायों की जरूरत होती है। श्री अरोड़ा ने कहा कि, “यह हमारा उद्देश्य है कि जमीनी स्तर पर हम जागरूकता और कार्यकलापों का इष्टतम स्तर प्राप्त करें। बूथ लेवल अधिकारियों से लेकर आयोग तक, प्रत्येक व्यक्ति को मिलकर काम करना चाहिए। जनवरी, 2018 में, “सुगम्य निर्वाचनों” को साधारण निर्वाचन, 2019 के लिए मार्गदर्शक थीम के रूप में अपनाने का निर्णय लिया गया था।“ यह आवश्यक है कि हम प्रयासों और कार्यकलापों को इस तरीके से बढ़ाएं कि सुगम्यता के मुद्दे पूरी तरह से खत्म हो जाएं तथा हमारे निर्वाचन सही अर्थों में समावेशी हो जाएं।“ उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि 90% से अधिक दिव्यांगजनों ने हाल ही में झारखंड में संपन्न हुए मतदान में अपना मत दिया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि, “निर्वाचन प्रक्रिया की पूरी श्रृंखला ई2ई, अर्थात नामांकन से लेकर निर्वाचनों तक, को दिव्यांगजनों के लिए मैत्रीपूर्ण और सुगम्य होने की आवश्यकता है तथा इन मुद्दों के समाधान के लिए बीएलओ से लेकर आयोग मुख्यालय तक की पूरी प्रणाली को काम करने की आवश्यकता है।“ आयोग की प्रतिबद्धता को पुष्ट करते हुए, निर्वाचन आयुक्त श्री अशोक लवासा ने कहा कि हालांकि मुख्य निर्वाचन अधिकारियों और डीईओ द्वारा किए गए प्रयासों की वजह से आयोग ने लंबा सफर तय किया है तथापि अभी और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि, “हमें देश-दुनिया से सीखने की जरूरत है, हमें पता करना चाहिए कि आगे क्या है, और ऐसे ठोस कदमों को पहचानना चाहिए जो हमें आवश्यक बदलाव लाने के लिए सशक्त बनाए।“ एक त्रिआयामी कार्यनीति पर सुझाव देते हुए श्री लवासा जी ने कहा कि डाटा की बेंचमार्किंग करने, सुगम्यता इंडेक्स के पैमानों के समक्ष इसका निर्धारण करने, आयोग और सीईओ की वेबसाइट को विहित दिशा-निर्देशों के अनुरूप बनाने और निरंतर मूल्यांकन से हमें भावी क्षमता को पहचानने में मदद मिलेगी। निर्वाचन आयुक्त श्री सुशील चंद्रा ने सिविल सोसाइटी संगठनों और निर्वाचन अधिकारियों द्वारा फील्ड में किए जाने वाले प्रयासों की सराहना की। श्री चंद्रा ने दिव्यांगजनों के निर्वाचन अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता के महत्व पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि, “दिव्यांग मतदाताओं को लोकतंत्र का अभिन्न अंग बनाने के लिए, हमें सभी सिविल सोसाइटी संगठनों और संबंधित एनजीओ के सहयोग की जरूरत है। इस अवसर पर बोलते हुए, महासचिव श्री उमेश सिन्हा ने गंभीर अंतरालों पर ध्यान देने के लिए वांछित ढांचागत बदलावों की आवश्यकता पर बल दिया और ज़मीनी स्तर पर निर्वाचन मशीनरी, सिविल सोसाइटी संगठनों और अन्य स्टेकहोल्डरों के प्रयासों को सराहा। श्री सिन्हा ने हाल ही में हुए झारखंड निर्वाचनों में अस्सी साल से नवासी साल के वृद्धों और दिव्यांगजनों के लिए प्रायोगिक तौर पर शुरू की गई, घर से डाक मतपत्र के विकल्प की अतिरिक्त सुविधा पर प्रकाश डाला। उप निर्वाचन आयुक्त श्री चंद्र भूषण कुमार ने देश भर में स्टेकहोल्डरों से प्राप्त सिफारिशों के महत्व को दोहराया, क्योंकि ये भावी निर्वाचनों को और अधिक समावेशी बनाने का मार्ग प्रशस्त करेंगे। उन्होंने उन संगठनों को धन्यवाद दिया जिन्होंने आज की कार्यशाला में भाग लिया, खासतौर पर आयोग की सुगम्यता परामर्शदाता स्मिता सदासिवन को, जिन्होंने विचार-विमर्श को इतना उपयोगी बनाया। दिव्यांग मतदाताओं का संपूर्ण मानचित्रण, परिवहन की सुविधा प्रदान करना, विशेष स्वयंसेवकों, सुनिश्चित न्यूनतम सुविधाएं, जैसे रैम्प, व्हीलचेयर, संकेत भाषा, मतदान केंद्र पर ब्रेल युक्त ईवीएम और हाल ही में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा दिव्यांग मतदाताओं के लिए डाक मतपत्रों का प्रावधान कुछ ऐसी पहल हैं जो सुगमता और ‘कोई मतदाता न छूटे’ के सिद्धांत को सुनिश्चित करती हैं। विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों और जिला निर्वाचन अधिकारियों के अलावा, कार्यशाला में सिविल सोसाइटी संगठनों, सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों और विभिन्न दिव्यांगता सेक्टरों का प्रतिनिधित्व करने वाले एनजीओ, जिसमें एएडीआई, सार्थक एजुकेशनल ट्रस्ट, राष्ट्रीय बधिर संघ, एनसीपीईडीपी, राष्ट्रीय दिव्यांगता नेटवर्क, सक्षम, इकोतत्व, एनआईईपीवीडी, पीडीयूएनआईपीपीडी, बीपीए अहमदाबाद और आईएसएलआरटीसी शामिल हैं, ने भाग लिया। पूरे भारत से उपस्थित स्टेकहोल्डरों के साथ, तकनीकी सत्रों में समूह कार्य और चार समुनदेशित विषयों जैसे कि निर्वाचक पंजीकरण और निर्वाचक नामावली में मानचित्रण; विशेष तौर पर दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए मतदान केंद्र पर सुविधाएं : सुगम मतदाता शिक्षा और संप्रेषण कार्य नीतियां और सुगम निर्वाचनों में प्रौद्योगिकी के उपयोग पर विचार-विमर्श शामिल था। आयोग के लिए बनाए गए विषयगत प्रस्तुतीकरण के अंग के रूप में, प्रतिभागियों ने वर्तमान चुनौतियों के मूल्यांकन, विद्यमान पहल और समाधान ढूंढने पर काम किया। आयोग ने एक पुस्तिका भी जारी की, ‘बाधाओं को पार करते हुए- मैंने भी मत डाला’, जो उन अनुभवप्राप्त मतदाताओं के बारे में थी जिन्होंने लोकतंत्र के सबसे बड़े त्यौहार में भाग लेने के लिए सभी बाधाओं को पार किया। अब तक किए गए कार्यों पर प्रकाश डालने, वर्तमान पहल और सभी राज्यों/केंद्र शासित राज्यों और विभिन्न स्टेकहोल्डरों से प्राप्त सिफारिश युक्त “सुगम्यता रिपोर्ट 2019” नामक एक व्यापक दस्तावेज को कार्यशाला के प्रतिभागियों के लिए उपलब्ध कराया गया था, जिसमें सुगम निर्वाचनों में नीतियों और मार्गदर्शी सिद्धांतों पर प्रकाश डाला गया था। आज कार्यशाला में संकेत भाषा इंटरप्रेटर, स्क्रीन रीडर एक्सेस दिन की कार्यवाही की महत्वपूर्ण विशेषताएं थीं।
  3. From the album: Chief Election Commissioner, Shri Sunil Arora along with Election Commissioners Shri Ashok Lavasa and Shri Sushil Chandra, called on the Hon’ble President of India

    A copy of the Notification issued by the Election Commission of India in terms of Section 73 of the Representation of People’s Act, 1951, containing the names of Members elected to the House of the People – following General Elections to the 17th Lok Sabha – was submitted by them to the Hon’ble President.
  4. From the album: ICT workshop for General Elections 2019

    Chief Election Commissioner of India, Sh. Sunil Arora at the ICT workshop for General Elections 2019 at Pravasi Bharatiya Kendra

    © ECI

  5. From the album: Chief Election Commissioner Sh. Sunil Arora

    भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री सुनील अरोड़ा ने 4 दिसंबर, 2018 को राष्ट्रपति भवन में भारत के माननीय राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद से मुलाकात की। Shri Sunil Arora, Chief Election Commissioner of India called on Shri Ram Nath Kovind, Hon'ble President of India at Rashtrapati Bhawan on 4 December, 2018.
  6. From the album: Chief Election Commissioner Sh. Sunil Arora

    Media address by Chief Election Commissioner of India on 2nd December 2018.

    © Election Commission of India

  7. From the album: Chief Election Commissioner Sh. Sunil Arora

    Election Commissioner Sh. Ashok Lavasa welcoming Sh. Sunil Arora Chief Election Commissioner of India

ईसीआई मुख्य वेबसाइट


eci-logo.pngभारत निर्वाचन आयोग एक स्‍वायत्‍त संवैधानिक प्राधिकरण है जो भारत में निर्वाचन प्रक्रियाओं के संचालन के लिए उत्‍तरदायी है। यह निकाय भारत में लोक सभा, राज्‍य सभा, राज्‍य विधान सभाओं और देश में राष्‍ट्रपति एवं उप-राष्‍ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों का संचालन करता है। निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्‍छेद 324 और बाद में अधिनियमित लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम के प्राधिकार के तहत कार्य करता है। 

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