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    सं. ईसीआई/प्रेसनोट/58/2020 दिनांकः 11 सितंबर, 2020 प्रेस विज्ञप्ति निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों और ऐसे अभ्यर्थियों को नामित करने वाले राजनीतिक दलों द्वारा आपराधिक पृष्ठभूमि का प्रचार करने के मामले में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा दिनांक 10.10.2018 और 06.03.2020 को जारी विस्तृत अनुदेशों के क्रम में आज आयोग की बैठक में इस पर विस्तार से चर्चा की गई। आयोग ने निर्णय लिया कि संबंधित अभ्यर्थियों द्वारा और निर्वाचनों के लिए उन्हें नामित करने वाले राजनैतिक दलों द्वारा आपराधिक पृष्ठभूमि के प्रचार संबंधी अनुदेशों को ओर कारगर बनाया जाए। आयोग ने निर्वाचकीय लोकतंत्र की संपूर्ण बेहतरी के लिए सदैव इन नैतिक मानदंडों पर जोर दिया है। 2. संशोधित अनुदेशों की मुख्य विशेषताएं निम्नानुसार हैः- क. प्रचार हेतु संशोधित समयसीमा संशोधित दिशा-निदेशों के अनुसार, निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थी और राजनैतिक दल उनके द्वारा नामित किए जाने वाले अभ्यर्थियों की आपराधिक पृष्ठभूमि, यदि कोई है, का ब्यौरा निम्नलिखित तरीके से समाचार-पत्रों और टेलीविज़न में प्रकाशित/प्रसारित करेंगे। (i) प्रथम प्रचार : नाम निर्देशन वापिस लेने की अंतिम तिथि के पहले 4 दिनों के भीतर (ii) द्वितीय प्रचार : नाम निर्देशन वापिस लेने की अंतिम तिथि के 5वें दिन से 8वें दिन के भीतर (iii) तृतीय प्रचार : प्रचार के अंतिम दिन से 9वें दिन तक अर्थात मतदान की तिथि से दो दिन पहले यह समयसीमा मतदाताओं को अपनी पसंद के अभ्यर्थी को अधिक जागरूक ढंग से चुनने में सहायक होगी। खः निर्विरोध विजयी अभ्यर्थियों के साथ-साथ उन्हें नामित करने वाले राजनैतिक दलों के संबंध में यह स्पष्ट किया जाता है कि निर्विरोध निर्वाचित अभ्यर्थी और उन्हें नामित करने वाले राजनैतिक दल भी आपराधिक पृष्ठभूमि, यदि कोई हो, का वैसा ही प्रचार करेंगे जैसा कि अन्य निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों और राजनैतिक दलों के लिए निर्धारित है। 3. आयोग के निर्णय़ के अनुसार, इस मामले में अब तक जारी सभी अनुदेशों और फार्मेटों के सार-संग्रह को सभी स्टेकहोल्टरों के लाभ हेतु प्रकाशित किया जा रहा है। इससे मतदाताओं और अन्य स्टेकहोल्डरों को अधिकाधिक जागरूक बनाने में सहायता मिलेगी। 4. इस संबंध में जारी सभी अनुदेशों का आपराधिक पृष्ठभूमि वाले निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों और उन्हें नामित करने वाले राजनैतिक दलों द्वारा अनिवार्य रूप से अनुपालन किया जाना चाहिए। 5. ये संशोधित अनुदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।
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    सं. ईसीआई/प्रेनो/45/2020 दिनांकः 30 जुलाई, 2020 प्रेस नोट विषयः उत्तर प्रदेश और केरल से राज्य सभा के लिए उप निर्वाचन-तत्संबंधी। राज्य सभा में निम्नलिखित विवरणों के अनुसार एक उत्तर प्रदेश से और एक केरल से, दो आकस्मिक रिक्तियां हैं:- राज्य सदस्यों का नाम रिक्ति का कारण रिक्ति की तारीख पदावधि उत्तर प्रदेश बेनी प्रसाद वर्मा देहांत 27.03.2020 04.07.2022 केरल एम.पी. वीरेंद्र कुमार देहांत 28.05.2020 02.04.2022 2. आयोग ने निम्‍नलिखित कार्यक्रम के अनुसार उपरोक्‍त रिक्तियों को भरने के लिए उत्तर प्रदेश और केरल से राज्‍य सभा के लिए उप-निर्वाचन आयोजित करने का निर्णय लिया है:- क्रम सं. कार्यक्रम तारीख 1. अधिसूचना जारी करना 06 अगस्त, 2020 (गुरुवार) 2. नाम-निर्देशन करने की अंतिम तारीख 13 अगस्त, 2020 (गुरुवार) 3. नाम-निर्देशनों की संवीक्षा 14 अगस्त, 2020 (शुक्रवार) 4. अभ्‍यर्थिताएं वापस लेने की अंतिम तारीख 17 अगस्त, 2020 (सोमवार) 5. मतदान की तारीख 24 अगस्त, 2020 (सोमवार) 6. मतदान का समय पूर्वाह्न 9.00 बजे से अपराह्न 4.00 बजे तक 7. मतगणना 24 अगस्त, 2020 (सोमवार) को अपराह्न 5.00 बजे 8. वह तारीख जिससे पहले निर्वाचन सम्‍पन्‍न हो जाएगा 26 अगस्त, 2020 (बुधवार) 3. आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को एक वरिष्ठ अधिकारी की प्रतिनियुक्ति करने का निदेश भी दिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि निर्वाचन कराने के लिए व्यवस्था करते समय कोविड-19 रोकथाम उपायों से संबंधित मौजूदा अनुदेशों का अनुपालन किया जाए।
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    सं.ईसीआई/प्रे.नो./44/2020 दिनांकः 23 जुलाई, 2020 प्रेस नोट उप-निर्वाचनों के संबंध में स्पष्टीकरण यह आयोग में श्री सुमित मुखर्जी, वरिष्ठ प्रधान सचिव द्वारा दिनांक 22.7.2020 को जारी पत्र संख्या-99/उप-निर्वाचन/2020/ईपीएस के संदर्भ में है। इससे मीडिया के कुछ वर्गों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। एतद्द्वारा स्पष्ट किया जाता है कि उपर्युक्त संप्रेषण केवल आठ निर्वाचन क्षेत्रों के संबंध में है, जिसके बारे में विधि और न्याय मंत्रालय को इन निर्वाचन क्षेत्रों की कुछ असाधारण परिस्थितियों के कारण दिनांक 03.7.2020 को पत्र संख्या 99/उप-निर्वाचन/2020/ईपीएस के तहत संदर्भ दिया गया था। तथापि, एक संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के अलावा, कुल 56 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के उप-निर्वाचन (पूर्व में संदर्भित आठ शामिल) होने हैं। इन कुल 57 उप-निर्वाचनों में से, एतद्द्वारा यह स्पष्ट किया जाता है कि आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 151क के प्रावधानों के अनुसार सभी उप-निर्वाचन आयोजित कराने का निर्णय पहले ही ले लिया है। किसी भी मामले में, उपरोक्त आठों उप-निर्वाचनों को स्थगित करने का निर्णय केवल 7 सितंबर, 2020 तक है। उप-निर्वाचनों के समय आदि का यह मामला निर्वाचन आयोग की अर्थात दिनांक 24.7.2020 को होने वाली बैठक में चर्चा के लिए भी रखा गया है।
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    सं. ईसीआई/प्रेनो/46/2020 दिनांकः 30जुलाई,2020 प्रेस नोट विषयः विधान सभा सदस्यों द्वारा आंध्र प्रदेश विधान परिषद के लिए उप निर्वाचन-तत्संबंधी। आंध्र प्रदेश विधान परिषद में एक आकस्मिक रिक्ति है जिसे विधान सभा सदस्यों द्वारा भरा जाना है।रिक्ति का विवरण नीचे दिया गया है:- सदस्य का नाम निर्वाचन की प्रकृति रिक्ति का कारण पदावधि श्री मोपीदेवी वेंकट रमन राव एमएलए द्वारा 01.07.2020 को त्यागपत्र दिया 29.03.2023 2. आयोग ने निम्‍नलिखित कार्यक्रम के अनुसार उपरोक्‍त रिक्ति को भरने हेतु विधान सभा सदस्यों द्वारा आंध्र प्रदेश विधान परिषद के लिए उप-निर्वाचन आयोजित करने का निर्णय लिया है:- क्रम सं. कार्यक्रम तारीख 1. अधिसूचना जारी करना 06 अगस्त, 2020 (गुरुवार) 2. नाम-निर्देशन करने की अंतिम तारीख 13 अगस्त, 2020 (गुरुवार) 3. नाम-निर्देशनों की संवीक्षा 14अगस्त, 2020 (शुक्रवार) 4. अभ्‍यर्थिताएं वापस लेने की अंतिम तारीख 17अगस्त, 2020 (सोमवार) 5. मतदान की तारीख 24अगस्त, 2020 (सोमवार) 6. मतदान का समय पूर्वाह्न 9.00 बजे से अपराह्न 4.00 बजे तक 7. मतगणना 24 अगस्त, 2020 (सोमवार) को अपराह्न 5.00 बजे 8. वह तारीख जिससे पहले निर्वाचन सम्‍पन्‍न हो जाएगा 26 अगस्त, 2020 (बुधवार) 3. आयोग ने राज्य केमुख्य सचिवको एक वरिष्ठ अधिकारी की प्रतिनियुक्ति करने का निदेश भी दिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके किनिर्वाचन कराने के लिए व्यवस्था करते समय कोविड-19 रोकथाम उपायों से संबंधित मौजूदा अनुदेशों का अनुपालन किया जाए।
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    सं. ईसीआई/पीएन/29/2020 दिनांकः 4 मार्च, 2020 प्रेस नोट विषयः धुले एवं नंदुरबार स्थानीय प्राधिकरण के निर्वाचन क्षेत्र से महाराष्ट्र विधान परिषद के लिए द्विवार्षिक निर्वाचन। धुले एवं नंदुरबार स्थानीय प्राधिकरण के निर्वाचन क्षेत्र से महाराष्ट्र विधान परिषद में एक आकस्मिक रिक्ति है। रिक्ति का विवरण निम्नानुसार हैः- सदस्य का नाम रिक्ति का कारण रिक्ति की तिथि सेवानिवृत्ति की तिथि अमरीशभाई रसिकलाल पटेल त्यागपत्र 01.10.2019 (अपराह्न) 01.01.2022 2. आयोग ने निम्नलिखित कार्यक्रम के अनुसार इस प्रकार रिक्त हुई उपर्युक्त रिक्ति को भरने के लिए महाराष्ट्र विधान परिषद हेतु द्विवार्षिक निर्वाचन आयोजित करने का निर्णय लिया हैः- क्र.सं. कार्यक्रम तारीख एवं दिन 1. अधिसूचना जारी करना 5 मार्च, 2020 (गुरूवार) 2. नामांकन भरने की अंतिम तारीख 12 मार्च, 2020 (गुरूवार) 3. नामांकनों की संवीक्षा 13 मार्च, 2020 (शुक्रवार) 4. अभ्यर्थिताएं वापिस लेने की अंतिम तारीख 16 मार्च, 2020 (सोमवार) 5. मतदान की तारीख 30 मार्च, 2020 (सोमवार) 6. मतदान का समय पूर्वा. 8:00 बजे से अप. 4:00 बजे तक 7. मतों की गणना 31 मार्च, 2020 (मंगलवार) 8. वह तारीख जिससे पहले निर्वाचन सम्पन्न हो जाएगा 01 अप्रैल, 2020 (बुधवार) 3. संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में उक्त निर्वाचन से संबंधित आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू होगी। इस संबंध में कृपया आयोग की वेबसाइट पर निम्नलिखित लिंक देखें https://eci.gov.in/files/file/4070-biennial-bye-elections-to-the-legislative-councils-from-council-constituencies-by-graduates’-and-teachers’-and-local-authorities’-constituencies-–-mcc-instructions-–-regarding/
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    सं. ईसीआई/पीएन/30/2020 दिनांकः 5 मार्च, 2020 प्रेस नोट विषयः निज़ामाबाद स्थानीय प्राधिकरण के निर्वाचन क्षेत्र से तेलंगाना विधान परिषद के लिए द्विवार्षिक निर्वाचन। निज़ामाबाद स्थानीय प्राधिकरण के निर्वाचन क्षेत्र से तेलंगाना विधान परिषद में एक आकस्मिक रिक्ति है। रिक्ति का विवरण निम्नानुसार हैः- सदस्य का नाम रिक्ति का कारण रिक्ति की तिथि सेवानिवृत्ति की तिथि आर.भूपति रेड़डी 16.01.219 को अयोग्यता 16.01.2019 04.01.2022 2. आयोग ने निम्नलिखित कार्यक्रम के अनुसार उपर्युक्त रिक्ति को भरने के लिए तेलंगाना विधान परिषद हेतु द्विवार्षिक निर्वाचन आयोजित करने का निर्णय लिया हैः- क्र.सं. कार्यक्रम तारीख एवं दिन 1. अधिसूचना जारी करना 12 मार्च, 2020 (गुरूवार) 2. नामांकन भरने की अंतिम तारीख 19 मार्च, 2020 (गुरूवार) 3. नामांकनों की संवीक्षा 20 मार्च, 2020 (शुक्रवार) 4. अभ्यर्थिताएं वापिस लेने की अंतिम तारीख 23 मार्च, 2020 (सोमवार) 5. मतदान की तारीख 7 अप्रैल, 2020 (मंगलवार) 6. मतदान का समय पूर्वा. 8:00 बजे से अप. 4:00 बजे तक 7. मतों की गणना 09 अप्रैल, 2020 (गुरूवार) 8. वह तारीख जिससे पहले निर्वाचन सम्पन्न हो जाएगा 13 अप्रैल, 2020 (सोमवार) 3. संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में उक्त निर्वाचन से संबंधित आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू होगी। इस संबंध में कृपया आयोग की वेबसाइट पर निम्नलिखित लिंक देखें https://eci.gov.in/files/file/4070-biennial-bye-elections-to-the-legislative-councils-from-council-constituencies-by-graduates’-and-teachers’-and-local-authorities’-constituencies-–-mcc-instructions-–-regarding/
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    सं. ईसीआई/पीएन/34/2020 दिनांक 13 अप्रैल, 2020 प्रेस नोट मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्त द्वारा कोविड निधि में योगदान देने हेतु भारत निर्वाचन आयोग से प्राप्त अपने मूल वेतन के तीस प्रतिशत की एक वर्ष के लिए स्वैच्छिक कटौती वर्तमान समय में देश के साथ-साथ पूरा विश्व कोविड-19 वैश्विक महामारी से जूझ रहा है। यह देखा जा सकता है कि सरकार के साथ-साथ अन्य एजेंसियां इस वैश्विक महामारी के प्रसार को रोकने और जन स्वास्थ्य और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव को प्रबंधित करने और इसे कम करने के दुष्कर कार्य में लगी हुई हैं। सरकार और सिविल सोसाइटी संगठनों द्वारा उठाए जा रहे विभिन्न कदमों के लिए विस्तृत संसाधनों की आवश्यकता है जिसके लिए राजकोष पर वेतन से पड़ने वाले बोझ को कम करने सहित सभी स्रोतों से अंशदान से मदद मिलेगी। उपर्युक्त के परिप्रेक्ष्य में आयोग ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री सुनील अरोड़ा, निर्वाचन आयुक्त श्री अशोक लवासा और श्री सुशील चंद्रा ने भारत निर्वाचन आयोग द्वारा भुगतान किए जा रहे मूल वेतन में से तीस प्रतिशत को 1 अप्रैल, 2020 से एक वर्ष के लिए स्वैच्छिक कटौती के रूप में योगदान देने का निर्णय लिया है।
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    सं. ईसीआई/पीएन/36/2020 दिनांक 12 मई, 2020 प्रेस नोट ढोलका विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के संबंध में गुजरात हाईकोर्ट के निर्णय से संबंधित विवरण की जांच करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा समिति का गठन किया जाना तत्कालीन रिटर्निंग अधिकारी के विरूद्ध अनुशासनिक कार्यवाही करने के लिए राज्य सरकार को पहले ही निदेश जारी किए जा चुके थे। आज गुजरात में ढोलका विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र के संबंध में निर्वाचन याचिका में माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय के परिणामस्वरूप, मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री सुनील अरोड़ा ने टेलीफोन पर भारत निर्वाचन आयोग के महासचिव से चर्चा करने के उपरांत निदेश दिया कि एक तीन सदस्यीय समिति निर्णय के विवरणों की जांच करेगी और इसे यथाशीघ्र आयोग के समक्ष प्रस्तुत करेगी। समिति की अध्यक्षता भारत निर्वाचन आयोग के महासचिव श्री उमेश सिन्हा करेंगे, जिसमें सदस्य के रूप में दो अधिकारी श्री चद्रभूषण कुमार, उप निर्वाचन आयुक्त और श्री विजय पाण्डेय, निदेशक, विधि शामिल होंगें। इस मामले में, आयोग की ओर से गुजरात राज्य सरकार को एक निदेश पहले ही जारी किया जा चुका था कि तत्कालीन रिटर्निंग अधिकारी श्री धवल जानी, उपायुक्त के विरूद्ध अनुशासनिक कार्यवाही शुरू की जाए। कार्यवाही चल रही है। इस मामले में माननीय उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के परिप्रेक्ष्य में लोक सभा निर्वाचनों के दौरान श्री जैन को निर्वाचन कार्यों से भी हटा दिया गया था।
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    सं. ईसीआई/पीएन/35/2020 दिनांक 1 मई, 2020 प्रेस नोट महाराष्ट्र के विधान सभा सदस्यों (विधायकों) द्वारा महाराष्ट्र विधान परिषद का द्विवार्षिक निर्वाचन 1. निर्वाचन आयोग ने आज महाराष्ट्र राज्य में विधान सभा सदस्यों द्वारा विधान परिषद की 9 रिक्त सीटों के लिए द्विवार्षिक निर्वाचन करवाने की व्यवहार्यता से संबंधित मुद्दे की समीक्षा की। मुख्य निर्वाचन आयुक्त, श्री सुनील अरोड़ा ने निर्वाचन आयुक्त श्री अशोक लवासा और श्री सुशील चंद्रा के साथ बैठक में वीडियो कॉल के माध्यम से भाग लिया (यूएसए से)। 2. महाराष्ट्र में विधान सभा सदस्यों द्वारा निर्वाचित पार्षदों की 9 सीटें 24 अप्रैल 2020 से रिक्त हो गई थीं (अनुबंध क)। भारत निर्वाचन आयोग ने 03 अप्रैल 2020 को कोविड-19 की परिस्थितियों के मद्देनजर अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचनों को अगले आदेश तक स्थगित करने का आदेश जारी किया था। 3. निर्वाचन आयोग को दिनांक 30 अप्रैल 2020 को महाराष्ट्र के मुख्य सचिव का एक पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें मुख्य सचिव ने महामारी को नियंत्रित करने के विभिन्न उपायों का उल्लेख किया है और यह भी उल्लेख किया है कि राज्य सरकार के आकलन के अनुसार विधान सभा सदस्यों द्वारा विधान परिषद सदस्यों की 9 सीटों का निर्वाचन सुरक्षित वातावरण में संचालित किया जा सकता है। राज्य सरकार ने निर्वाचन आयोग को आश्वासन दिया है कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए पूर्ण रूपेण प्रतिबद्ध है कि उक्त निर्वाचन पूरी तरह से स्वच्छ वातावरण में संचालित हों और सक्षम प्राधिकरणों द्वारा अधिरोपित सामाजिक दूरी संबंधी उपायों और अन्य शर्तों का पालन हो। लॉकडाउन के आदेशों के कारण फंस गए प्रवासी कामगारों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, विद्यार्थियों और अन्य लोगों को आवाजाही की अनुमति देने से संबंधित गृह मंत्रालय के दिनांक 29 अप्रैल, 2020 के आदेश का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने दोहराया है कि वह इस मामले में सभी निदेशों का अनुपालन करते हुए निर्वाचनों के संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित करेगी। 4. आयोग को मुख्य निर्वाचन आयुक्त को संबोधित महाराष्ट्र के महामहिम राज्यपाल का दिनांक 30 अप्रैल, 2020 का अ.शा. पत्र भी प्राप्त हुआ है जिसमें राज्य में निर्वाचन संचालन की व्यवहार्यता का उल्लेख किया गया है। इस संबंध में महाराष्ट्र के महामहिम राज्यपाल ने भी उल्लेख किया है कि श्री उद्धव बालासाहेब ठाकरे ने 28 नवंबर, 2019 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और उल्लेख किया कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार उन्हें 6 महीने की अवधि के भीतर अर्थात 27 मई, 2020 को या उससे पहले महाराष्ट्र विधान सभा या विधान परिषद का सदस्य बनना आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया है कि जमीनी हालात नियंत्रित हैं और मौजूदा समय में सरकार द्वारा दी जा रही विभिन्न रियायतों के साथ इसमें सुधार हो रहा है। इसलिए समग्र स्थिति के मद्देनजर निर्वाचन आयोग से निर्वाचनों के आयोजन की कार्य-विधियों पर विचार करने के लिए अनुरोध किया गया है। 5. आयोग ने विभिन्न राजनैतिक दलों यथा महाराष्ट्र विधानमंडल कांग्रेस पक्ष, शिवसेना विधिमंडल पक्ष और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से प्राप्त अभ्यावेदनों का भी संज्ञान लिया जिसमें उक्त निर्वाचन, जिसकी अनुसूची अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण स्थगित करनी पड़ी थी, को आयोजित करने का अनुरोध किया गया था। 6. उपर्युक्त सभी बातों के मद्देनजर आयोग ने ऐसी अप्रत्याशित परिस्थितियों में विगत के अनुभवों की समीक्षा की। वर्ष 1991 में पूर्व प्रधान मंत्री श्री पी.वी. नरसिम्हाराव और 1996 में श्री एच.डी् देवेगौड़ा और राज्यों के अनेक मुख्यमंत्रियों (जैसे कि 1991 में राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत; 1997 में बिहार की मुख्यमंत्री श्रीमती राबड़ी देवी; 1993 में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विजय भास्कर रेड्डी; 2017 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और 4 मंत्री और 2017 में नागालैंड के मुख्यमंत्री) के मामलों में आयोग ने इसी प्रकार की संवैधानिक अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए उप-निर्वाचनों का आयोजन किया था। आयोग ने नोट किया कि विगत में यह सतत व्यवस्था रही है। 7. इन सभी बातों पर विचार करने के उपरांत आयोग ने महाराष्ट्र राज्य में उक्त द्विवार्षिक निर्वाचन करवाने का निर्णय लिया है। निर्वाचनों की अनुसूची का विवरण अनुबंध ख में संलग्न है। 8. आयोग ने यह भी निर्णय लिया कि केंद्रीय गृह सचिव, जो आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत राष्ट्रीय कार्यकारी समिति में पदेन अध्यक्ष हैं, को यह सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त वरिष्ठता के किसी अधिकारी को तैनात करना चाहिए कि उक्त निर्वाचन के लिए निर्वाचन प्रक्रिया के सुचारू संचालन के लिए उक्त अधिनियम के प्रावधानों के अनुसरण में निवारक उपाय किए जाएं। 9. आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को भी निदेश दिया है कि वे निर्वाचनों के संचालन हेतु व्यवस्था करते समय कोविड-19 के विद्यमान प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए राज्य के किसी अधिकारी को तैनात करें। 10. इसके अलावा, आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी, महाराष्ट्र को इस निर्वाचन के प्रेक्षक के रूप में नियुक्त किया है। 11. आयोग ने अन्य स्थगित निर्वाचनों की समीक्षा अगले सप्ताह में करने का भी निर्णय लिया है।
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    भारत निर्वाचन आयोग निर्वाचन सदन, अशोक रोड, नई दिल्‍ली-110001 सं. ईसीआई/प्रेनो/28/2020 दिनांक: 3 मार्च, 2020 प्रेस नोट विषय: हरियाणा से राज्‍य सभा के लिए उप निर्वाचन- तत्संबंधी। हरियाणा से राज्य सभा में एक आकस्मिक रिक्ति है जिसका विवरण नीचे दिया गया है: सदस्य का नाम रिक्ति का कारण रिक्ति की तारीख पदावधि श्री बीरेंद्र सिंह त्यागपत्र 20.01.2020 01.08.2022 आयोग ने निम्‍नलिखित कार्यक्रम के अनुसार उपरोक्‍त रिक्ति को भरने हेतु हरियाणा से राज्‍य सभा के लिए उप-निर्वाचन आयोजित करने का निर्णय लिया है:- क्रम सं. कार्यक्रम तारीख 1. अधिसूचना जारी करना 06 मार्च, 2020 (शुक्रवार) 2. नाम-निर्देशन करने की अंतिम तारीख 13 मार्च, 2020 (शुक्रवार) 3. नाम-निर्देशनों की संवीक्षा 16 मार्च, 2020 (सोमवार) 4. अभ्‍यर्थिताएं वापस लेने की अंतिम तारीख 18 मार्च, 2020 (बुधवार) 5. मतदान की तारीख 26 मार्च, 2020 (गुरुवार) 6. मतदान का समय पूर्वाह्न 9.00 बजे से अपराहन 4.00 बजे तक 7. मतगणना 26 मार्च, 2020 (गुरुवार) को अपराह्न 5.00 बजे 8. वह तारीख, जिससे पहले निर्वाचन सम्‍पन्‍न हो जाएगा 30 मार्च, 2020 (सोमवार) (पवन दीवान)
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    संख्या 590/ईसीआई/आईआईआईडीईएम/सीईओ सम्मेलन/एलएस-19/सीएनटी/2019 प्राक्कथन विषय: निर्वाचकीय प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं के कार्य समूह की मुख्य सिफारिशों पर जनमानस से टिप्पणियां/सुझाव आमंत्रित करना-तत्संबंधी साधारण निर्वाचन, 2019 अनेक नवोन्मेषी उपायों का साक्षी रहा जिसमें प्रत्येक मतदान केंद्र पर सुगमता पर समर्पित तरीके से ध्यान केंद्रित करने, दिव्यांग निर्वाचकों को समर्पित परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाने, मतदाताओं की जागरूकता और नैतिक भागीदारी के लिए लक्षित स्वीप सामग्री डिजाइन करने, निर्वाचनों के दौरान किसी कदाचार के विरुद्ध रिपोर्टिंग करने के लिए नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए सी-विजिल एप लांच करने, प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए विभिन्न आईसीटी एप्लीकेशन का उपयोग करने, निर्वाचनों के दौरान सोशल मीडिया का उपयोग करने के लिए विशिष्ट स्वैच्छिक आचार संहिता तैयार करने और निर्वाचनों को 'देश का महात्योहार' बनाने जैसे कार्यकलाप शामिल थे, जिससे भारतीय निर्वाचन इतिहास में अधिकतम 67.4% की मतदाता भागीदारी हासिल करने में सहायता मिली। महिला मतदाताओं की भागीदारी भी 67.18% के रिकार्ड ऊंचाई तक पहुंची। पहली बार, ईटीपीबीएस देशभर में सेवा मतदाताओं के लिए प्रयुक्त हुआ और सेवा मतदाताओं की संख्या बढ़कर 18 लाख हो गई। इस अभूतपूर्व निर्वाचकीय भागीदारी के बाद निर्वाचन आयोग ने निर्वाचकीय प्रबंधन में और सुधार करने के लिए सभी कदमों और उपायों को समेकित करने और सभी सीखों को समाविष्ट करने पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है। तदनुसार जून 2019 में निर्वाचन आयोग ने इन उद्देश्यों के लिए निर्वाचकीय प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर एक कार्यसमूह का गठन किया। प्रत्येक कार्यसमूह की अध्यक्षता/इसका समन्वय आयोग के महासचिव/वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त/उप निर्वाचन आयुक्त/महानिदेशक द्वारा किया जाता है और इसमें विभिन्न राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी शामिल होते हैं। कार्यसमूह ने फील्ड से इनपुट एकत्र किया, इन इनपुट का मौजूदा विधिक और संस्थागत संरचना के संदर्भ में विश्लेषण किया तथा देश में निर्वाचन प्रक्रिया को सारवान बनाने के लिए भविष्य के लिए मार्गों का सुझाव दिया। कार्यसमूह ने विश्व के अन्य निर्वाचन प्रबंध निकायों से संबंधित प्रावधानों का अध्ययन किया और सभी इनपुट को ध्यान में रखकर आयोग को अपनी सिफारिशें पेश की। इन सिफारिशों के आधार पर आयोग ने नागरिकों और स्टेकधारकों से इन सिफारिशों पर टिप्पणियां/सुझाव आमंत्रित करने के लिए कार्यसमूह की मुख्य सिफारिशों को पब्लिक डोमेन में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है। इन 25 सिफारिशों पर टिप्पणियां/सुझाव 31 मार्च, 2020 तक ई-मेल coordination[@]eci[.]gov[.]in के माध्यम से भेजे जा सकते हैं। (ए. मोना श्रीनिवास) निदेशक मुख्य सिफारिशें क्र. सं. सिफारिशें 1 मतदाताओं के लिए सभी सेवाओं अर्थात रजिस्ट्रेशन, पते में परिवर्तन, नाम हटाने आदि के लिए एकल सरलीकृत प्ररूप वर्तमान समय में नागरिक और निर्वाचक विशेष निर्वाचकीय सेवाओं के लिए विभिन्न प्ररूपों का उपयोग करते हैं। इसी प्रकार, पहली बार मतदाता रजिस्ट्रेशन या निर्वाचन क्षेत्र के परिवर्तन के मामले में प्ररूप 6, नाम के विलोपन या आपत्तियां दर्ज करने के लिए प्ररूप 7, निर्वाचन क्षेत्र के भीतर आवास में परिवर्तन के लिए प्ररूप 8, मौजूदा निर्वाचक नामावली में प्रविष्टियों में सुधार के लिए प्ररूप 8 (क)। विदेशी मतदाता के रूप में रजिस्ट्रेशन के लिए प्ररूप 6 (क) और एपिक के प्रतिस्थापन के लिए प्ररूप 1। अनेक प्रकार के प्ररूप संदेह उत्पन्न करते हैं और प्रक्रिया की दक्षता को प्रभावित करते हैं। यह प्रस्ताव है कि मतदाताओं को सभी सेवाओं के लिए एकीकृत और सरलीकृत प्ररूप होना चाहिए। 2 नागरिकों को सहज निर्वाचन सेवाएं प्रदान करने के लिए नेटवर्क और निर्वाचक सेवा केंद्रों (ईएससी)/मतदाता सुविधा केंद्रों का विस्तार करना। जहां तक संभव हो निकटतम स्थान पर सेवा प्रदायगी की जाए और इसके लिए निर्वाचक सेवाएं प्रदान करने हेतु स्थानों का विकेंद्रीकरण महत्वपूर्ण है। नेटवर्क और निर्वाचक सेवा केंद्रों/मतदाता सुविधा केंद्रों का विस्तार करने से नागरिकों को सहजता से निर्वाचन सेवाएं प्रदान करने में सहायता मिलेगी। 3 दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों (80+आयु वाले) के लिए घर पर निर्वाचक सेवाएं आयोग अपने सूत्रवाक्य ‘कोई भी मतदाता न छूटे’ के प्रति प्रतिबद्ध है और तदनुसार दिव्यांगजनों और 80 वर्ष से अधिक की आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर पर निर्वाचक सेवाएं प्रदान करने की संभावना तलाश की जानी चाहिए। 4 17 वर्ष की आयु प्राप्त करने वाले भावी मतदाताओं का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन-स्कूल और कॉलेजों में रजिस्ट्रेशन सुविधाए प्रदान की जाएं। लोकतंत्र में अपेक्षा की जाती है कि जब युवा नागरिक पात्र निर्वाचक बने तो उनका निर्वाचक नामावली में सरलता से नामांकन हो। ऐसे अंतरण को सुविधाजनक बनाने के लिए एक ढांचा बनाए जाने की आवश्यकता है। तदनुसार, 17 वर्ष की आयु प्राप्त करने वाले सभी भावी मतदाताओं के लिए स्कूल/ कालेज स्तर पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। 5 ईआरओ नेट के ऑनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए निर्वाचक नामावली तैयार करना। वर्तमान समय में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए निर्वाचक नामावली आफलाइन मोड में तैयार की जाती है। चूंकि निर्वाचनों के लिए निर्वाचक नामावली को ऑनलाइन प्लेटफार्म पर तैयार किया जाता है इसलिए भावी मतदाताओं की सहायता के लिए स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए भी समान प्लेटफार्म तैयार किए जाने की आवश्यकता है। 6 बूथ लेवल आफिसर सिस्टम में सुधार करना और दस्ती (हैंडहेल्ड) डिजिटल उपकरणों के माध्यम से सेवाओं की प्रदायगी के लिए चरणबद्ध रूप में तकनीकी रूप से सक्षम पूर्णकालिक बीएलओ की नियुक्ति करना बूथ लेवल सुविधाएं देश में निर्वाचन प्रणाली में पैदल सैनिक हैं। वर्तमान समय में ये अधिकारी ज्यादातर गांव/वार्ड स्तर पर आंगनबाडी, आशा वर्कर, अन्य उपलब्ध सरकारी पदाधिकारियों में से आहरित किए जाते हैं जो अपने कार्यालय समय के बाद निर्वाचन सेवा का कार्य संभालते हैं। एक समर्पित बूथ लेवल सिस्टम की आवश्यकता है जो निर्वाचक नामावली के प्रयोजनार्थ आयोग के आईटी आधारित एप्लीकेशंस को प्रचालित करने के लिए डिजिटल उपकरणों को संचालित कर सकें। 7 मतदाताओं के लिए ई-एपिक का प्रावधान आयोग प्रत्येक मतदाता को एपिक (वोटर आई कार्ड) प्रदान करता है। इस डिजिटल परिवेश में यह सिफारिश की जाती है कि बेहतर गति के लिए मतदाताओं के लिए इस एपिक का ई-संस्करण प्रदान किया जाए। 8 1 जनवरी की एक वार्षिक अर्हक तिथि के स्थान पर मतदाता के रजिस्ट्रेशन के लिए तिमाही/छमाही अर्हता तिथि विधि के अनुसार, 1 जनवरी निर्वाचकों की पात्रता आयु की गणना करने के लिए अर्हक तिथि है। यह व्यवस्था उन सभी नागरिकों को वंचित करती है जो उस विशेष वर्ष में 1 जनवरी के बाद 18 वर्ष की आयु प्राप्त करते हैं किंतु उस वर्ष किसी निर्वाचन के लिए अपात्र रह जाते हैं। आयोग ने 4 अर्हता तिथि-1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई, और 1 अक्तूबर का प्रस्ताव किया है। विधि मंत्रालय ने इस प्रयोजनार्थ दो अर्हता तिथियों यथा 1 जनवरी और 1 जुलाई का सुझाव दिया है। 9 ईसीआई, राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों या जिला स्तर के लिए आधुनिक ऑनलाइन योजना पोर्टल निर्वाचन के लिए अग्रिम रूप से बहुत सारी योजनाएं तैयार करनी होती हैं। आयोग ने प्रत्येक निर्वाचन के लिए विहित समय सीमा के दौरान विभिन्न कार्यकलापों के लिए इसकी जमीनी मशीनरी को निदेशित करने के लिए निर्वाचन प्लानर की डिजाइन पहले से तैयार कर रखी है। अब यह उपुयक्त होगा कि निर्वाचन योजना से संबंधित रियल टाइम डाटा की हैंडलिंग के लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म मौजूद हो। 10 दिव्यांगजनों या वरिष्ठ नागरिकों को त्वरित सेवाएं प्रदान करने के लिए सुगमता पोर्टल आयोग ने निर्वाचक सेवाओं के लिए पीडब्ल्यूडी पोर्टल तैयार किया है तथापि, दिव्यांगजनों और /या वरिष्ठ नागरिकों को त्वरित सेवाएं प्रदान करने के लिए सुगमता हेतु एक समर्पित पोर्टल से उनको और सहायता मिलेगी। 11 जनता की सूचना के लिए संसदीय निर्वाचन क्षेत्र, विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र या मतदान केंद्र की मैपिंग के लिए जीआईएस आधारित निर्वाचन एटलस संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों, विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों और मतदान केंद्रों की क्षेत्रीय सीमाओं के बारे में सूचना का प्रसार करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग जनता के लिए उपयोगी होगा। 12 जनता की सूचनार्थ और निर्वाचनों की अनुसूची के लिए डिजिटल निर्वाचन कैलेंडर निर्वाचन कैलेंडर और निर्वाचनों की अनुसूची के लिए डिजिटल प्लेटफार्म बनाने से जनता में और जागरूकता उत्पन्न होगी। लोकतंत्र में निर्वाचक शिक्षा और जागरूकता एक सतत कार्यकलाप है। इसमें निर्वाचक शिक्षा के महत्व को सूचित करने और देश में निर्वाचन प्रक्रिया में नीतिगत भागीदारी करने के लिए विभिन्न संस्थाओं के जुड़ाव अपेक्षित है। यह भी देखा गया है कि पर्याप्त प्रयासों के परिणामस्वरूप 2019 के लोकसभा निर्वाचन में अब तक का सर्वोच्च मतदान प्रतिशत (67.4) रहा है। इसमें अभूतपूर्व मतदाता भागीदारी, लोगों के लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रदर्शन और जागरूकता देखने को मिली। तथापि, आउटरीच की प्रक्रिया और सूचना के प्रसार को अधिकाधिक सुदृढ़ और कार्यनीतिगत बनाए जाने की आवश्यकता है। तदनुसार यह सिफारिश की जाती है: क. संस्थागत सुदृढ़ीकरण 13 i. निर्वाचक शिक्षा और जागरूकता के लिए सरकारी संगठनों, पीएसयू और निजी व्यापार/औद्योगिक संगठनों के साथ भागीदारी 14 ii. सभी स्कूलों और कॉलेजों में निर्वाचक साक्षरता क्लब स्थापित करना। 15 iii. सभी सरकारी और निजी संगठनों में मतदाता जागरूकता मंच का गठन करना। 16 iv. मतदाता जागरूकता के लिए सभी मतदान केंद्रों में चुनाव पाठशाला का गठन करना। 17 v. स्कूल के पाठ्यक्रम में मतदाता शिक्षा को शामिल करना। 18 vi. मतदाता शिक्षा और जागरूकता के लिए क्षेत्रीय सिक्स हब का गठन करना। 19 ख. नया आउटरीच मीडिया i. नई मीडिया प्रौद्योगिकी का सक्रिय उपयोग ii. मतदाताओं और अन्य स्टेकहोल्डर के लिए वेब टीवी और वेब रेडियो की स्थापना करना iii. मतदाताओं के लिए दूरदर्शन या रेडियो पर एक साप्ताहिक कार्यक्रम शुरू करना iv. मतदाता शिक्षा के लिए कम्यूनिटी रेडियो स्टेशन स्थापित करना v. आवधिक स्वीप टॉक कार्यक्रम 20 मीडिया कार्मिकों, राजनैतिक दलों, सिविल सोसाइटी संगठनों (सीएसओ) के लिए अभिविन्यास कार्यक्रम भारत विश्व के सबसे बड़े निर्वाचन का आयोजन करता है। निर्वाचन प्रक्रिया में मीडिया कार्मिकों, राजनैतिक दलों और सिविल सोसाइटी संगठनों सहित विभिन्न स्टेकहोल्डरों की सक्रिय भागीदारी रही है। तथापि, मौजूदा परिस्थिति में चुनौतियों से निपटने के लिए आयोग अपने दस्तावेजों और प्रक्रियाओं को अपडेट करता रहा है। ऐसे स्टेकहोल्डरों के लिए अभिविन्यास कार्यक्रम तैयार करने की आवश्यकता है ताकि वे निर्वाचन प्रक्रिया में सतत गति बनाए रखने के लिए आयोग द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में जागरूक रहें। 21 नई मतदान पद्धतियां निर्वाचक भागीदारी में वृद्धि करने के लिए विभिन्न सुरक्षित मतदान पद्धतियों की संभावना और व्यवहार्यता तलाशना। आयोग ने सेवा मतदाताओं के लिए वन वे ऑनलाइन पोस्टल बैलेट अंतरण का पहले ही कार्यान्वयन किया है और 2019 में पूरे देश में इसका कार्यान्वयन किया है। यह देखा गया है कि लगभग 30 प्रतिशत निर्वाचक विभिन्न कारणों से निर्वाचनों में भागीदारी करने में सक्षम नहीं होते हैं, इनमें से कुछ प्रवासी श्रेणी में मतदान करते हैं जो अपने पूर्व स्थान पर मतदाता बने रहते हैं, जैसा कि घरेलू प्रवासी सुविधा पर रिपोर्ट में आकलन किया गया है। आयोग विभिन्न मतदान पद्धतियों की संभावना और व्यवहार्यता की तलाश कर रहा है जो निर्वाचन भागीदारी को आसान बनाने और इसमें सुधार करने के लिए सुरक्षित बनी रहे। 22 प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया विनियम: लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126 के अंतर्गत प्रचार मुक्त (साइलेंस) अवधि के दौरान इलेक्ट्रानिक मीडिया की तर्ज पर प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया को भी प्रतिबंधित किया जाए। मतदान समाप्ति से 48 घंटे पहले तक की प्रचार मुक्त अवधि एक विधिक शुचिता है और यह किए गए वायदों पर मतदाताओं द्वारा प्रतिक्रिया करने और उनके द्वारा अपनी पसंद चुनने की अनुमति देता है। यद्यपि इलेक्ट्रानिक मीडिया को किसी भी निर्वाचन मामले को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करने से प्रतिबंधित किया गया है। तथापि, वर्तमान समय में यह प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफार्म को कवर नहीं करता है। अत: विशेष रूप से एकसमान अवसर प्रदान करने और सीज अवधि के दौरान मतदाताओं को पूर्ण अधिकार देने के लिए यह सिफारिश की जाती है कि प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 की परिधि में लाया जाए। 23 ऑनलाइन नामनिर्देशन अभ्यर्थियों के लिए नामनिर्देशन फाइल करने के लिए आनलाइन सुविधा प्रदान करने का प्रस्ताव है। अभ्यर्थी संबंधित रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष स्वयं उपस्थित होकर नामनिर्देशन दायर करते हैं। नामनिर्देशन प्रक्रिया के दौरान परिहार्य गलतियां और रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष लंबी कतारें रहती हैं। ऑनलाइन नामनिर्देशन दायर करने की ऑनलाइन सुविधा तैयार करने से गलतियों से बचने और नामनिर्देशन दायर करने की प्रक्रिया आसान बनाने में सहायता मिलेगी। 24 राजनैतिक दल व्यय वर्तमान समय में राजनैतिक दल द्वारा निर्वाचन के लिए किए जाने वाले व्यय पर कोई सीमा नहीं है। एकसमान अवसर प्रदान करने के लिए इस प्रकार की सीमा होने की आवश्यकता महसूस की जाती है। इसके परिप्रेक्ष्य में वर्ष 2015 में भारत निर्वाचन आयोग ने विधि मंत्रालय को राजनैतिक दलों के व्यय की अधिकतम सीमा को चुनाव लड़ रहे अभ्यर्थियों की संख्या के साथ अलग-अलग अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित अधिकतम सीमा के आधे से गुणा करने के बाद प्राप्त धनराशि तक सीमित करने सिफारिश की थी। 25 नागरिकोन्मुखी सेवाओं का एकीकरण डिजि-लाकर और उमंग जैसे नागरिकोन्मुखी सेवाओं के साथ मतदाता रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का एकीकरण करना । नागरिक डिजी लॉकर/उमंग में अपने दस्तावेज रखें। रजिस्ट्रेशन के प्रयोजनार्थ आवश्यक दस्तावेजों को शीघ्र अपलोड करने/कनेक्ट करने में यह लिंकेज सहायता प्रदान करेगा। 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    No. ECI/PN/43/2020 Date: 16th July, 2020 PRESS NOTE Subject: Commission decides not to extend the facility of postal ballot to electors above 65 years of age in General Assembly Elections in Bihar and by elections due in near future in view of constraints of logistics, manpower and safety protocols of Covid-19 In view of COVID-19 pandemic, lockdown guidelines have been issued in the country from time to time by National Disaster Management Authority, under the Disaster Management Act, 2005. In the guideline dated 17.05.2020, issued by Union Home Secretary and Chairperson National Executive Committee, constituted under the Disaster Management Act, 2005, it has been specified vide para 7 that, “Protection of vulnerable persons: Persons above 65 years of age, persons with co-morbidities, pregnant women, and children below the age of 10 years, shall stay at home, except for essential and health purposes.” Simultaneously, Ministry of Health & Family Welfare prescribed detailed procedure of quarantine (Home/Institutional) for COVID-19 positive/suspect persons vide its instructions dated 05.04.2020 and 18.05.2020. 2. Considering this extraordinary situation, Commission had recommended extension of optional postal ballot facilities to voters above 65 years in order to minimize their vulnerability and exposure at the Polling stations and to Covid positive voters and voters under quarantine so that they are not deprived of their voting rights. On the recommendation of the Commission, Ministry of Law & Justice notified the amended rules accordingly on 19.06.2020. However, before implementing this enabling provision, due notification is issued by the Commission, under section 60(c) of the Representation of the People Act, 1951 at the time of election. Before implementing these enabling provisions, Commission continually assesses the field situation and logistics of operationalization. 3. Commission has been constantly monitoring the electoral preparedness for the coming by-elections and General elections of Assembly in Bihar, in view of this unprecedented environment. Commission has already limited the number of electors to one thousand for each polling station for ease of voting, especially for elderly and vulnerable sections of electors, in COVID-19 situations. In view of this, the State is creating additional 34,000 (approximately) polling stations (45% more), which will increase the total number of polling stations to around 1,06,000. This would entail formidable logistical challenges of mobilizing 1.8 lakh more polling personnel and other additional resources including requirement of much larger number of vehicles in the State of Bihar. Similar challenges would be there for the coming by-elections also. 4. Considering all these issues, challenges and constraints and in view of the decision to limit the number of electors at each polling station to 1000, Commission has decided not to issue the notification to extend the facility of postal ballot to the electors above 65 years of age in the coming General Elections in Bihar and by- elections due in the near future. However, facility of optional postal ballot to electors who are above 80 years of age, PwD Voters, the electors engaged in essential services and voters who are COVID-19 positive/suspect in quarantine (home/institutional) will be extended in these elections.
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    No. ECI/PN/42/2020 Dated: 16th June, 2020 PRESS NOTE A meeting of full Election Commission comprising Chief Election Commissioner Shri Sunil Arora and two Election Commissioners Shri Ashok Lavasa and Shri Sushil Chandra, assisted by senior officers of the Commission, was held today. Amongst other issues, the Commission discussed the matter of taking cognizance of complaints of false affidavits filed by some candidates along with their nominations, which adversely affects the rights of voters as well as impinges on the purity of electoral process. The exercise of informed franchise is a foundational requirement for free and fair elections. In People’s Union for Civil Liberties v. Union of India (2003) 4 SCC 399 (PUCL case), Hon’ble Supreme Court observed: “..the foundation of a healthy democracy is to have well-informed citizens-voters.” In this case, the Apex Court further observed: “A little man – a citizen – a voter is the master of his vote. He must have necessary information so that he can intelligently decide in favour of a candidate who satisfies his criterion of being elected as an MP or MLA.” The voter has a fundamental right under Article 19(1)(a) of the Constitution to know about the candidates at an election. The genesis of the disclosure requirements, now incorporated in Form 26, appended to the Conduct of Election Rules, 1961 was the case of Union of India v. Association of Democratic Reforms (2002) 5 SCC 294. In his/her affidavit, a candidate discloses (i) criminal antecedents; (ii) assets and liabilities; and (iii) educational qualifications. Subsequently, Commission in 2013, decided that the assets and liabilities of the candidates, as filed in their affidavits, would be verified by Central Board of Direct Taxes(CBDT). Filing of false affidavits by candidates during the nomination process, in terms of false or incomplete information, is a key challenge as it undermines the rights of voters to be fully informed about their political representatives. Supreme Court in catena of judgments (Resurgent India v. Election Commission of India, 2014 14 SCC 189; Rambabu Singh Thakur v. Sunil Arora 2020 SCC online SC178) has held the truthful disclosure of all relevant information by a candidate as integral to the electoral process and any denial or false disclosure would tantamount to vitiating the integrity of elections. Commission views the erosion of this fundamental right as an affront to the democratic ideals which underpin the system of government. Furnishing false information in election affidavits is a devious design to defeat the right of the voter to be informed and transparency in elections. The Commission has today decided to robustly address this challenge to further ensure free, fair and ethical elections in the country. Commission has been receiving complaints regarding furnishing of false information in the affidavits of some candidates. As per the extant provision, individuals are filing such complaints in the competent court under section 125A of the Representation of People Act, 1951. Now, Commission has reviewed this position and decided that, in pursuit of a level-playing field, it will take cognisance of complaints, which indicate serious omission on the part of the candidate, and refer such matters to the relevant investigating authorities on a case-to-case basis.
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    No. ECI/PN/41/2020 Dated: 15thJune, 2020 PRESS NOTE Bye Election to the Andhra Pradesh Legislative Council by the members ofLegislative Assembly (MLAs) – reg. There is one casual vacancy in the Andhra Pradesh Legislative Council by the members of Legislative Assembly. The details of the vacancy are as follow: Name of Member Nature of election Cause of vacancy Term up to Sri DokkaManikyaVara Prasad By MLAs Resignation on 09.03.2020 29.03.2023 2. The Commission, after receiving inputs from CEO, Andhra Pradesh, has decided to hold a bye-election to the Andhra Pradesh Legislative Council by the members of the Legislative Assembly to fill the above mentioned vacancyas per the following schedule: - S.No. Events Dates 1. Issue of Notifications 18th June, 2020 (Thursday) 2. Last Date of making nominations 25th June, 2020 (Thursday) 3. Scrutiny of nominations 26th June, 2020 (Friday) 4. Last date for withdrawal of candidatures 29th June, 2020 (Monday) 5. Date of Poll 06th July, 2020 (Monday) 6. Hours of Poll 09:00 am-04:00 pm 7. Counting of Votes 06th July, 2020 (Monday) at 05:00 pm 8. Date before which election shall be completed 08th July, 2020 (Wednesday) 3. Adequate measures for close monitoring of the election process by appointing observers shall be taken to ensure free and fair election. 4. Commission has also directed the Chief Secretary of the State to depute a senior officer from the State to ensure that the extant instructions regarding COVID-19 containment measures are complied with while making arrangements for conducting the elections.
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    No. ECI/PN/40/2020 Dated: 15thJune, 2020 PRESS NOTE Biennial Election to the Bihar Legislative Council by the members of Legislative Assembly (MLAs) – reg. The term of 09 members of the Bihar Legislative Council elected by the members of the Legislative Assembly (MLAs) has expired on 06.05.2020. Details are given as under: S.No. Name of the Member Date of Retirement 1. Ashok Choudhary 06.05.2020 2. Krishan Kumar Singh 3. Prashant Kumar Shahi 4. Sanjay Prakash 5. Satish Kumar 6. Radha Mohan Sharma 7. Sonelal Mehta 8. Md. Haroon Rashid 9. Hira Prasad Vind 2. Considering the prevailing unforeseen situation of public health emergency due to COVID-19 and the guidelines & orders passed under the Disaster Management Act, 2005 by the competent authority, the Election Commission, on 03.04.2020 passed an Order under Article 324 of Constitution of India read with section 16 of the Representation of the People Act, 1951,and directed that the process of election to the abovementioned seats shall be initiated at a later date after reviewing the prevailing situation. 3. The Commission, after receiving inputs from CEO, Bihar,has now decided that above mentioned biennial election to the Bihar Legislative Council by members of Legislative Assembly be held in accordance with the following programme: S. No. Events Dates 1. Issue of Notification 18th June, 2020 (Thursday) 2. Last Date of making nominations 25th June, 2020 (Thursday) 3. Scrutiny of nominations 26th June, 2020 (Friday) 4. Last date for withdrawal of candidatures 29th June, 2020 (Monday) 5. Date of Poll 06th July, 2020 (Monday) 6. Hours of Poll 09:00 am to 04:00 pm 7. Counting of Votes 06th July, 2020 (Monday)at 05:00 pm 8. Date before which election shall be completed 08th July, 2020 (Wednesday) 4. Adequate measures for close monitoring of the election process by appointing observers shall be taken to ensure free and fair election. 5. Commission has also directed the Chief Secretary of the State to depute a senior officer from the State to ensure that the extant instructions regarding COVID-19 containment measures are complied with while making arrangements for conducting the elections.
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    No. ECI/PN/39/2020 Dated: 9thJune, 2020 PRESS NOTE Biennial Election to the Karnataka Legislative Council by the members of Legislative Assembly (MLAs) – reg. The term of 07 members of Karnataka Legislative Council elected by the members of respective Legislative Assembly (MLAs) is expiring on 30.06.2020. Details are given as under: - S.No. Name of the Member Date of Retirement 1. Naseer Ahmed 30.06.2020 2. Jayamma 3. M.C. Venugopal 4. N.S. Bose Raju 5. H.M. Revanna 6. T.A. Sharavana 7. D.U. Mallikarjuna 2. The Commission, after receiving inputs from CEO, Karnataka has decided that above mentioned biennial elections to the Karnataka Legislative Council by members of Legislative Assembly be held in accordance with the following programme: S. No. Events Dates 1. Issue of Notification 11th June, 2020 (Thursday) 2. Last Date of making nominations 18th June, 2020 (Thursday) 3. Scrutiny of nominations 19th June, 2020 (Friday) 4. Last date for withdrawal of candidatures 22nd June, 2020 (Monday) 5. Date of Poll 29th June, 2020 (Monday) 6. Hours of Poll 09:00 am to 04:00 pm 7. Counting of Votes 29th June, 2020 (Monday) at 05:00 pm 8. Date before which election shall be completed 30th June, 2020 (Tuesday) 3. Adequate measures for close monitoring of the election process by appointing observers shall be taken to ensure free and fair election. 4. Commission has also directed the Chief Secretary of the State to depute a senior officer from the State to ensure that the extant instructions regarding COVID-19 containment measures are complied with while making arrangements for conducting the elections.
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    No. ECI/PN/37/2020 Dated: 1st June, 2020 PRESS NOTE ANNOUNCEMENT OF DATE OF POLL AND COUNTING OF VOTES FOR DEFERRED RAJYA SABHA POLL On 25.02.2020, Election Commission of India announced elections to the Council of States to fill 55 seats of Members from 17 States, retiring in the month of April,2020, which were notified vide Notification No. 318/CS-Multi/2020(1) dated 06.03.2020. After the last date of withdrawal on 18.03.2020, respective Returning Officers declared 37 seats from 10 States filled in uncontested. Further, as per the reports received from the concerned Returning Officers, the biennial elections for 18 seats from the States of Andhra Pradesh, Gujarat, Jharkhand, Madhya Pradesh, Manipur, Meghalaya and Rajasthan were to be conducted on 26.03.2020 (Thursday) and the date before which election was to be completed as earlier announced by the Commission was 30.03.2020 (Monday) as per the notification dated 06.03.2020. 2. Section 153 of the Representation of the People Act, 1951 specifies that the Election Commission for reasons which it considers sufficient, may extend the time for the completion of any election by making necessary amendments in the notification issued by it under section 30 or sub-section (1) of section 39 of the said Act. Accordingly, considering the prevailing unforeseen situation of public health emergency due to COVID-19 and related advisories in the country, the Election Commission, vide its press note, dated 24.03.2020, deferred the poll and extended the period of said election under the provisions of section 153 of the said Act and decided that the announcement of fresh date of poll and counting for the said biennial elections will be made by the ECI after reviewing the prevailing situation. The Press Note also specified that the list of contesting candidates already published for the said election by the respective Returning Officers, is to remain valid for the purpose of remaining activities as was prescribed under the said notification (dated 06.03.2020). 3. Now, Commission has reviewed the matter in detail. Considering all factors, including the guidelines dated 30.05.2020 issued by Union Home Secretary and Chairman, national Executive Committee (NEC) under the National Disaster Management Act, 2005, and taking into account the inputs obtained from the Chief Electoral Officers concerned, the Commission has decided that the date of poll and counting of votes in respect of the biennial elections for 18 seats from the States of Andhra Pradesh (4 seats), Gujarat (4 seats), Jharkhand (2 seats), Madhya Pradesh (3 seats), Manipur (1 seat), Meghalaya (1 seat) and Rajasthan (3 seats) shall be as per the following schedule: Events Date Date of Poll 19th June, 2020 (Friday) Hours of Poll 09:00 am to 04:00 pm Counting of Votes 19th June, 2020 (Friday) at 05:00 pm Date before which election shall be completed. 22th June, 2020 (Monday) 4. Commission has also decided that the Chief Secretaries shall depute a senior officer from the State to ensure that the extant instructions regarding COVID-19 containment measures are complied with while making arrangements for conducting the elections. 5. Further Commission has appointed Chief Electoral Officer concerned as Observer for the election in the respective State.
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    No. ECI/PN/33/2020 Dated: 3rd April, 2020 PRESS NOTE ECI DEFERS RAJYA SABHA POLL FURTHER IN VIEW OF COVID-19; FRESH DATE TO BE ANNOUNCED LATER On 25.02.2020, Election Commission of India announced elections to the Council of States to fill 55 seats of Members from 17 States, retiring in the month of April, which were notified vide No. 318/CS-Multi/2020(1) dated 06.03.2020. After the last date of withdrawal on 18.03.2020, respective Returning Officers declared 37 seats from 10 States filled in uncontested. Now, as per the reports received from the concerned Returning Officers, the biennial elections for 18 seats from the States of Andhra Pradesh, Gujarat, Jharkhand, Madhya Pradesh, Manipur, Meghalaya and Rajasthan were to be conducted on 26.03.2020 (Thursday) and the date before which election was to be completed as earlier announced by the Commission was 30.03.2020 (Monday). The term of the seats, which are to be filled in pursuance to the above said notification dated 06.03.2020, is completing as per following details: 09.04.2020 Andhra Pradesh – 04 Jharkhand – 02 Madhya Pradesh – 03 Manipur – 01 Rajasthan – 03 Gujarat – 04 12.04.2020 Meghalaya - 01 Total - 18; Election Commission of India vide notification dated 24.03.2020, in view of unforeseen public health emergency emerging from COVID-19, invoking section 153 of the Representation of the People Act, 1951 extended the period of completion of election including postponing the date of poll and counting concerning elections to the Council of States to fill the seats of Members retiring in the month of April, which were notified vide No. 318/CS-Multi/2020(1) dated 06.03.2020; On 24.03.2020, the National Disaster Management Authority issued order to take measures for ensuring social distancing so as to prevent the spread of COVID-19 in the country. Subsequent to this, Ministry of Home Affairs, Government of India vide its Order dated 24.03.2020 under section 10(2)(1) of the Disaster Management Act, 2005 has issued detailed guidelines including restrictions on movement and gathering for the maintenance of public safety and avoiding health hazard to take effective measures so as to prevent the spread of COVID-19 in the country. The Ministry has further issued orders dated 25.03.2020, 27.03.2020 and 29.03.2020 for continuing with these measures. The Ministry has also written to all the Chief Secretaries in the country for strict compliance of all the lockdown measures to contain the spread of COVID-19 in the country. These measures are enforced throughout the country for a period of three weeks from 25.03.2020. The electoral process necessarily involves movement and gathering of polling officials, agents of political parties, support officials and members of respective Legislative Assemblies on the poll day, which may put public safety at risk and create public health hazard; Commission has reviewed the current unforeseen situation of public health emergency and the feasibility of completing the poll process for the aforesaid election. Commission, after taking all facts and circumstances in view, is of considered view that continuing electoral process in the current environment may not be feasible in view of the restrictions for the maintenance of public safety and avoiding health hazard, and therefore, aforesaid election can not be completed within its scheduled term, as mentioned in para 2 above. In view of the above, Commission invoking its powers under Article 324 of the Constitution of India read with section 153 of the Representation of the People Act, 1951 has further extended the period of election beyond the prescribed term(s) of above mentioned seats. The list of contesting candidates, already published for the said elections by the respective Returning Officers shall remain valid for the purposes of remaining activities, as prescribed under the said notifications. Fresh date of poll and counting for the said biennial elections shall be intimated in due course after reviewing the prevailing situation.
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    No. ECI/PN/32/2020 2nd April, 2020 PRESS NOTE Subject: Extension of Date for submitting comments/suggestions on main recommendations of working groups on various aspects of electoral management-reg. Election Commission of India on March 7, 2020 (copy enclosed), had invited comments/suggestions from citizens and stakeholders on main recommendations of Working Groups on various aspects of electoral management until March 31, 2020. Some representations have been received to extend the deadline in view of the current situation of lockdown measures to contain Covid-19 in the country. The Commission has considered the same and extended the deadline of receiving comments to April 30, 2020.
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    No. ECI/PN/31/2020 Dated: 24th March, 2020 PRESS NOTE ECI DEFERS RAJYA SABHA POLL IN VIEW OF COVID-19; FRESH DATE TO BE ANNOUNCED LATER On 25.02.2020, Election Commission of India announced elections to the Council of States to fill 55 seats of Members from 17 States, retiring in the month of April,2020, which were notified vide Notification No. 318/CS-Multi/2020(1) dated 06.03.2020. After the last date of withdrawal on 18.03.2020, respective Returning Officers declared 37 seats from 10 States filled in uncontested. Now, as per the reports received from the concerned Returning Officers, the biennial elections for 18 seats from the States of Andhra Pradesh, Gujarat, Jharkhand, Madhya Pradesh, Manipur, Meghalaya and Rajasthan are to be conducted on 26.03.2020 (Thursday) and the date before which election was to be completed as earlier announced by the Commission was 30.03.2020 (Monday). On 11.03.2020, World Health Organization has declared Novel Coronavirus COVID-19 a global pandemic. Ministry of Health & Family Affairs and Department of Personnel & Training, Government of India have issued various guidelines and instructions to monitor and contain the transmission of COVID-19. Government of India, vide its press note dated 22.03.2020, has asked all the State Governments to take all measures to break the chain of transmission of COVID-19. This includes suspension of all train services till 31.03.2020 including sub urban rail services; closure of all activities except essential services such as hospitals, telecom, medicine shops, provision stores etc. Subsequently, on 23.03.2020 it has also been informed that the operations of domestic schedule commercial airlines shall cease operations with effective from the mid night 23.59 IST hours on 24.03.2020. State Governments have issued various orders including curb on local transportation accordingly for management and containment of COVID-19. The States of Andhra Pradesh, Gujarat, Jharkhand, Madhya Pradesh, Manipur, Meghalaya and Rajasthan have issued orders of lock down to contain the transmission of COVID-19. Commission has reviewed in detail the matter. The prevailing unforeseen situation of public health emergency indicates the need for avoidance of possibilities of gatherings of any nature, which expose all concerned to possible health hazard. The poll process in the above said elections would necessarily include the gathering of polling officials, agents of political parties, support officials and members of respective Legislative Assemblies on the poll day, which may not be suitable in view of the prevailing unforeseen situation and related advisories in the country. Section 153 of the Representation of the People Act, 1951 specifies that the Election Commission for reasons which it considers sufficient, may extend the time for the completion of any election by making necessary amendments in the notification issued by it under section 30 or sub-section (1) of section 39; and accordingly, the Election Commission has deferred the poll and extended the period of said election under the provisions of section 153 of the said Act. The list of contesting candidates, already published for the said elections by the respective Returning Officers shall remain valid for the purposes of remaining activities, as prescribed under the said notification. Fresh date of poll and counting for the said biennial elections shall be announced in due course after reviewing the prevailing situation.
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    संख्या. ईसीआई/पीएन/10/2020 दिनांकः 23 जनवरी 2020 प्रेस नोट भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना के 70वें वर्ष के अवसर पर भारत निर्वाचन आयोग की मेजबानी में आयोजित प्रथम सुकुमार सेन स्मृति व्याख्यान श्री प्रणब मुखर्जी द्वारा दिया जाना भारत के प्रथम निर्वाचन की रिपोर्ट की पुनर्मुद्रित प्रति का श्री प्रणब मुखर्जी द्वारा विमोचन किया गया; श्री सुकुमार सेन की स्मृति में डाक टिकट जारी किया गया भारत के प्रथम मुख्य निर्वाचन आयुक्त को श्रद्धांजलि देने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने आज प्रथम सुकुमार सेन स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया। श्री सेन ने 21 मार्च 1950 से 19 दिसम्बर 1958 तक प्रथम निर्वाचन आयुक्त के रूप में सेवा की थी। पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने भारत की निर्वाचन प्रक्रिया और हमारे निर्वाचन तंत्र के समक्ष चुनौतियों पर अपना उद्घाटन व्याख्यान दिया। श्री मुखर्जी के व्याख्यान में हमारे राष्ट्रीय विकास में संस्थानों की महत्ता पर प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर बोलते हुए, श्री मुखर्जी ने श्री सुकुमार सेन के बारे में उल्लेख करते हुए कहा कि “उन्होने प्रसूति विज्ञानी के रूप में काम करने और भारतीय लोकतंत्र को पहली खेप के रूप में लगभग 3000 निर्वाचित प्रतिनिधि प्रदान करने का कार्य चुना। आश्चर्य मिश्रित एहसास करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की प्रक्रिया में यथासम्भव, गैर आईसीएस वाली नम्रता हो, मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में उनका दलों के प्रति अप्रत्यक्ष, उदार, प्रभावी धैर्यपूर्वक और न्यायकारी व्यवहार रहा लेकिन दूसरी ओर अपनी जिम्मेदारी के प्रति पूर्ण सख्त रहे”। श्री मुखर्जी ने नोट किया कि स्वतंत्र, निष्पक्ष लोकप्रिय और विश्वसनीय निर्वाचन लोकतंत्र की एक आधारशिला है और सही अर्थ में जीवनदायी रक्त के समान हैं। सेन ने पहले दो साधारण निर्वाचन निर्बाध रूप में सम्पन्न करा कर भारत को सही अर्थों में ब्रिटिश उपनिवेश से एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक गणराज्य की ओर ले जाने का काम किया। श्री मुखर्जी ने स्मरण करवाया कि “संविधान बनाने वाली भारत की संविधान सभा ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के मसले पर गहन विचार-विमर्श किया था। इसने इसकी सभी कठिनाइयों को पूरी तरह समझते हुए भी बिना किसी हिचकिचाहट के वयस्क मताधिकार की व्यवस्था को स्वीकर किया”। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा “पहले साधारण निर्वाचन की सर्वप्रथम उपलब्धि इस तथ्य में है कि इससे भारत के एकीकरण को मजबूती मिली और कड़ी मेहनत से इसे हासिल किया गया”। उन्होने कहा, भारतीय लोकतंत्र और इसकी अंतर्निहित समत्व की शक्ति ने कुंठित विद्रोह और अलगाववादी आन्दोलनों को सफलतापूर्वक समाप्त किया है और निर्वाचनों द्वारा विभिन्न समूहों को निर्वाचन की मुख्य धारा में लाने में सफलता पाई है। उन्होंने जोर दे कर कहा, “भारतीय लोकतंत्र अनेकों बार चुनौतियों पर खरा उतरा है। सर्वसम्मति लोकतंत्र की रक्त रूपी जीवनदायिनी है। लोकतंत्र की सफलता श्रवण, चर्चा, विचार-विमर्श, तर्क और यहाँ तक कि विरोध में भी निहित है। निर्वाचन प्रक्रिया में जनता की उत्साहपूर्वक भागीदारी स्वस्थ लोकतंत्र की कुंजी है। निर्वाचन आयोग की भूमिका पर विचार व्यक्त करते हुए, श्री प्रणब मुखर्जी ने कहा,“ मेरी राय में भारत निर्वाचन आयोग का जनता द्वारा सम्मान किया जाता है और इसमें जनता की आस्था है एवं निर्वाचन के भागीदार इससे भयभीत रहते हैं, ज्यादातर परीक्षा की कसौटी में यह खरा उतरा है। भारत में सही अर्थ में लोकतंत्र को मजबूत करने में भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका एकदम उत्कृष्ट रही है। इसने अपने समक्ष आने वाली सभी चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया है। 2019 में विश्व के तीसरे, चौथे और पाँचवे सबसे बडे देशों की कुल जनसंख्या के लगभग बराबर वाले 900 मिलियन से अधिक के निर्वाचक वर्ग का प्रबन्धन करना और निष्पक्ष निर्वाचन सुनिश्चित करना कोई आसान कार्य नहीं है। मैं इस प्रशंसनीय उपलब्धि के लिए भारत निर्वाचन आयोग को बधाई देता हूँ”। जिन कुछ एक चुनौतियों का सामना हमारा निर्वाचक तंत्र करता है उनके सम्बन्ध में श्री मुखर्जी ने कहा कि परियोजनाओं की स्वीकृति और कार्यावयन में अवरोध आना, अनुपातहीन निर्वाचक मंडल के वृहत आकार की तुलना में जन प्रतिनिधियों की कम संख्या होना, साथ ही संसद और विधान सभाओं में महिलाओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व न होना, चिंता के एक बहुत बड़े क्षेत्र के रूप में उभर कर सामने आया है। संस्थाओं की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए, श्री मुखर्जी ने बधाई दी कि “यदि लोकतंत्र सफल हुआ है तो इसका ज्यादा श्रेय श्री सेन से प्रारम्भ कर वर्तमान तक के सभी चुनाव आयुक्तों द्वारा त्रुटिरहित निर्वाचन सम्पन्न कराने को जाता है”। उन्होने जोर दे कर कहा कि, ऐसा न मानने का कोई कारण हो ही नहीं सकता है कि चुनौतियाँ ही हमारे लोकतंत्र का आधार है। नि:सन्देह जनादेश पवित्र है और इसे निस्संदेह सर्वोच्च स्थान पर रखा ही जाना है। पूर्व में, मुख्य चुनाव आयुक्त श्री सुशील अरोड़ा ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि, “प्रथम सुकुमार सेन स्मृति व्याख्यान देने के लिए अपनी सहमति प्रदान करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग श्री प्रणब मुखर्जी का ऋणी है। आज की इस शाम के लिए विषय और वक्ता का इससे सुसंगत संयोग नहीं हो सकता है — एक विद्वान और राजर्षि”। श्री मुखर्जी राजनैतिक, संवैधानिक और ऐतिहासिक मामलों के जीवंत विश्वकोश माने जाते हैं। जनता की सेवा में महत्वपूर्ण योगदन के लिए वर्ष 2019 में उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान – “भारत रत्न” से सम्मानित किया गया था। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए श्री अरोड़ा ने कहा “भारत गणतंत्र के राष्ट्रपति के रूप में श्री मुखर्जी ने पूर्व में भी दो बार आयोग के राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर वर्ष 2016 और वर्ष 2017 में सम्बोधित किया था। हम सुकुमार सेन स्मृति उद्घाटन व्याख्यान देने के लिए उन्हें पुन: अपने मध्य पा कर आनन्दित हैं”। उन्होंने आगे कहा कि इस व्याख्यान का उद्देश्य भारत निर्वाचन आयोग को प्राप्त संवैधानिक अधिकार की परिधि में ही लोकतांत्रिक और निर्वाचन संवाद में सकारात्मक माहौल तैयार करना है। आयोग राजनीतिक दलों, विख्यात संविधानवेत्ताओं, कानूनविदों, शिक्षाविदों, सिविल सोसाइटियों के कार्यकर्ताओं सहित समाज के एक बहुत बड़े वर्ग को इसमें शामिल करना चाहता है। उन्होंने नेताजी सुभाषचन्द्र बोस को भी उनकी 123वीं जयंती पर याद किया। श्री अशोक लवासा, चुनाव आयुक्त ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया और श्री सुशील चन्द्रा, चुनाव आयुक्त ने इस यादगार अवसर पर सभी श्रोताओं का धन्यवाद किया। इस तथ्य को पुन: याद किया जाना जरूरी है कि श्री सुकुमार सेन ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में एवं पूर्व के थोड़े बहुत मार्गदर्शन से ही सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार पर आधारित विधान सभा निर्वाचनों के साथ साथ क्रमश: वर्ष 1952 एवं वर्ष 1957 में आयोजित भारत के पहले दो लोकसभा निर्वाचनों को बखूबी सम्पन्न कराया। इस अवसर पर भारत के प्रथम निर्वाचन की रिपोर्ट की पुनर्मुद्रित प्रति का श्री प्रणब मुखर्जी द्वारा विमोचन किया गया और श्री सुकुमार सेन की स्मृति में डाक टिकट भी जारी किया गया यह प्रस्तावित है कि प्रति वर्ष देश या विदेश के ऐसे महत्वपूर्ण व्यक्ति को व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया जाएगा, जिसने लोकतंत्र को सुदृढ़ करने में अपना उल्लेखनीय योगदान दिया हो। आज के व्याख्यान में श्री सेन के परिवार के सदस्य, पौत्र-पौत्री, डॉ. आशीष मुखर्जी, सुश्री श्यामली मुखर्जी, संजीव सेन, सोनाली सेन, देवदत्त सेन, सुजया सेन, एवं प्रपौत्र-प्रपौत्री आदित्य विक्रम सेन, अर्जुन वीर सेन और राष्ट्रीय राजनीतिक दलों, शिक्षाविदों, सिविल सोसाइटी संस्थाओं, वरिष्ठ सिविल सेवकों, मीडिया कर्मियों के आमंत्रितगण एवं 24 जनवरी, 2020 को आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली “दी फोरम ऑफ द इलेक्शन मेनेजमेंट बाडीज ऑफ साउथ एशिया” (एफईएमबीओएसए) की 10वीं वार्षिक बैठक में और “संस्थागत क्षमता का सुदृढ़ीकरण” विषय पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल होने के लिए दिल्ली में एकत्रित अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि भी बडी संख्या में इसमें उपस्थित रहे।
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    सं. ईसीआई/प्रे.नो./26/2020 दिनांक : 25 फरवरी, 2020 प्रेस नोट विषय: अप्रैल, 2020 में सेवानिवृत्‍त होने वाले सदस्‍यों की सीटें भरने हेतु राज्‍य सभा के द्विवार्षिक निर्वाचन-तत्संबंधी 17 राज्‍यों से निर्वाचित राज्‍य सभा के 55 सदस्‍यों की पदावधि, अप्रैल, 2020 में उनकी सेवानिवृत्ति होने पर समाप्‍त होने वाली है, जिसका विवरण नीचे दिया गया है: क्र.सं. राज्‍य सीटों की संख्‍या सेवानिवृत्ति की तारीख 1. महाराष्‍ट्र 7 02.04.2020 2. ओड़िशा 4 3. तमिलनाडु 6 4. पश्चिम बंगाल 5 5. आन्‍ध्र प्रदेश 4 09.04.2020 6. तेलंगाना 2 7. असम 3 8. बिहार 5 9. छत्‍तीसगढ़ 2 10. गुजरात 4 11. हरियाणा 2 12. हिमाचल प्रदेश 1 13. झारखण्‍ड 2 14. मध्‍य प्रदेश 3 15. मणिपुर 1 16. राजस्‍थान 3 17. मेघालय 1 12.04.2020 2. उपर्युक्त रिक्तियों के विवरण दर्शाने वाला एक विवरण 'अनुलग्नक-क' में दिया गया है। आयोग ने निम्‍नलिखित कार्यक्रम के अनुसार राज्‍य सभा के उपर्युक्त द्विवार्षिक निर्वाचन आयोजित करवाने का निर्णय लिया है:- क्र. सं. कार्यक्रम दिनांक 1. अधिसूचना जारी करना 06 मार्च, 2020 (शुक्रवार) 2. नाम निर्देशन करने की अंतिम तारीख 13 मार्च, 2020 (शुक्रवार) 3. नाम निर्देशनों की संवीक्षा 16 मार्च, 2020 (सोमवार) 4. अभ्‍यर्थिताएं वापिस लेने की अंतिम तारीख 18 मार्च, 2020 (बुधवार) 5. मतदान की तारीख 26 मार्च, 2020 (गुरुवार) 6. मतदान का समय पूर्वाह्न 9:00 बजे से अपराह्न 4:00 बजे तक 7. मतगणना 26 मार्च, 2020 (गुरुवार) अपराह्न 5.00 बजे 8. वह तारीख जिससे पूर्व निर्वाचन सम्‍पन्‍न हो जाएगा 30 मार्च, 2020 (सोमवार) 3. आयोग ने निदेश दिया है कि मतपत्र पर अधिमान(नों) को चिह्नित करने के प्रयोजनार्थ केवल रिटर्निंग आफिसर द्वारा उपलब्‍ध करवाए गए पूर्व-नियत विनिर्देशन वाले इंटीग्रेटेड बैंगनी रंग के स्‍केच पैन(नों) का उपयोग किया जाएगा। किसी भी परिस्थिति में उपर्युक्त निर्वाचनों में किसी भी अन्‍य पैन का उपयोग नहीं किया जाएगा। 4. स्‍वतंत्र एवं निष्‍पक्ष निर्वाचन सुनिश्‍चित करने के लिए प्रेक्षकों को नियुक्‍त करके निर्वाचन प्रक्रिया के गहन अनुवीक्षण के लिए पर्याप्‍त उपाय किए जाएंगे।
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    No. ECI/PN/27/2020 26th February 2020 PRESS NOTE PARLIAMENTARY DELEGATION FROM SWEDEN VISITS ELECTION COMMISSION OF INDIA A delegation of ten MPs, members of the Committee on the Constitution in Riksdag, the Parliament of Sweden, visited the Election Commission of India today. The delegation was led by Ms. Karin Enström, MP and Chair of the Committee on the Constitution in Riksdag, accompanied by two Parliamentary officials and two diplomats from the Embassy of Sweden in New Delhi. The delegation met the Chief Election Commissioner, Mr. Sunil Arora and the Election Commissioners, Mr. Ashok Lavasa and Mr. Sushil Chandra. Chief Election Commissioner of India, Mr. Sunil Arora, welcomed the Swedish delegation. In his address, he stated that the Commission is committed to hold free, fair, transparent, peaceful, inclusive, accessible, ethical and participative elections. He gave an overview of the last national elections held in India. He added that using modern tools of Information and Communication Technology, several innovative measures were taken up during the last Lok Sabha elections and recently held state elections to make electoral process hassle free and voter friendly. He said that special attention was paid to make elections accessible for Persons with disabilities and senior citizens. He also briefed the visiting parliamentarians and officials about the international cooperation programme of the ECI, including setting up of India A-WEB (Association of world Election Bodies) Centre in New Delhi for documentation, research and training with the objective of sharing the best practices and capacity building of the 115-member Association. He mentioned that ECI is looking forward to working with Swedish Election Authority in future. Mr. Ashok Lavasa, Election Commissioner mentioned that ECI has taken several steps to spread the progress of democracy. He said that the gender gap in the voting population, which was 16% in the past, had almost been eliminated in the GE 2019. Shri Sushil Chandra, Election Commissioner briefed the delegates about the steps taken by ECI to curb use of money power in elections. Ms. Karin Enström, MP and Chair of the Committee on the Constitution in Riksdag thanked the Commission for the warm welcome accorded to the Swedish delegation. She gave an overview of the Swedish electoral system wherein simultaneous elections are held for municipal, county and national elections for Riksdag. She stated that the delegation was impressed with the magnitude of Indian elections and the way this work is done by the ECI. Mr. Umesh Sinha, Secretary General, ECI made a presentation about the structure and functioning of the ECI in managing the largest election exercise in the world. A short film on Parliamentary Election-2019 was also screened for the Swedish delegation. This was followed by a Question and Answer session wherein queries from the delegates relating to secrecy of voting, voting by overseas electors, facilities for voting by differently-abled persons, inclusive electoral participation, curbing money power etc. were answered.

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eci-logo.pngभारत निर्वाचन आयोग एक स्‍वायत्‍त संवैधानिक प्राधिकरण है जो भारत में निर्वाचन प्रक्रियाओं के संचालन के लिए उत्‍तरदायी है। यह निकाय भारत में लोक सभा, राज्‍य सभा, राज्‍य विधान सभाओं और देश में राष्‍ट्रपति एवं उप-राष्‍ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों का संचालन करता है। निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्‍छेद 324 और बाद में अधिनियमित लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम के प्राधिकार के तहत कार्य करता है। 

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