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    Publication of criminal antecedents by contesting candidates and political parties in pursuance of the Hon'ble Supreme Court decision in WP (C) No. 784 of2015 (Lok Prahari Vs. Union of India and Others and in WP (C) No. 536 of 2011 (Public Interest Foundation & Ors. Vs. Union of India & Anr.) and in contempt petition (c) no. 2192 of 2018 in WP (C) no. 536 of 2011 – regarding
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    सं. 3/4/2021/एसडीआर/खंड.III दिनांकः 26 अगस्त, 2021 सेवा में, मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय/राज्य राजनैतिक दलों के अध्यक्ष/महासचिव (सूची के अनुसार) विषयः निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों और राजनैतिक दलों द्वारा आपराधिक पूर्ववृत्त का प्रकाशन- ब्रजेश सिंह बनाम सुनील अरोड़ा और अन्य शीर्षक वाली, वर्ष 2020 की अवमानना याचिका (सि) सं. 656 में माननीय उच्चतम न्यायालय का आदेश, दिनांक 10.08.2021 – तत्संबंधी। महोदय, मुझे उद्धृत विषय का संदर्भ लेने और यह कहने का निर्देश हुआ है कि माननीय उच्चतम न्यायलय ने अपने दिनांक 10.08.2021 के निर्णय के तहत ब्रजेश सिंह बनाम सुनील अरोड़ा और अन्य शीर्षक वाली वर्ष 2020 की अवमानना याचिका (सि) सं. 656 में निम्नलिखित निर्देश दिए हैं: "73. जनहित फाउंडेशन (ऊपर) में संविधान न्यायपीठ द्वारा जारी निदेशों और हमारे दिनांक 13.02.2020 के आदेश को आगे बढ़ाते हुए, किसी मतदाता के सूचना के अधिकार को अधिक प्रभावी तथा सार्थक बनाने के लिए, हम निम्नलिखित अतिरिक्त निदेश जारी करना आवश्यक समझते हैं: (i) राजनैतिक दलों को अपनी वेबसाइटों के होमपेज पर अभ्यर्थियों के आपराधिक पूर्ववृत्त के बारे में सूचना प्रकाशित करनी होती है, जिससे मतदाता के लिए वह जानकारी प्राप्त करना सरल हो जाता है जिसकी आपूर्ति की जानी है। अब होमपेज पर एक कैप्शन होना भी जरूरी हो जाएगा, जिसमें "आपराधिक पृष्ठभूमि वाले अभ्यर्थी" लिखा हो। (ii) भारत निर्वाचन आयोग को एक समर्पित मोबाइल अप्लीक्शन बनाने का निदेश दिया जाता है, जिसमें अभ्यर्थियों द्वारा उनके आपराधिक पूर्ववृत्त के बारे में प्रकाशित जानकारी शामिल हो, ताकि एक ही बार में प्रत्येक मतदाता को उसके मोबाइल फोन पर ऐसी सूचना प्राप्त हो सके; (iii) भारत निर्वाचन आयोग को प्रत्येक मतदाता को उसके अधिकार के बारे में जानकार बनाने और सभी अभ्यर्थियों के आपराधिक पूर्ववृत्त के संबंध में जानकारी की उपलब्धता के बारे में जागरूक करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया जाता है। इसे विभिन्न मंचों के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें सोशल मीडिया, वेबसाइटें, टीवी विज्ञापन, प्राइम टाइम वाद-विवाद, पैम्फलेट, आदि शामिल होंगे। इस उद्देश्य के लिए 4 सप्ताह की अवधि के भीतर एक निधि का सृजन किया जाना चाहिए, जिसमें न्यायालय की अवमानना करने के लिए जुर्माना देने का निर्देश दिया जाए; (iv) उपरोक्त उद्देश्यों के लिए, भारत निर्वाचन आयोग को एक अलग (प्रकोष्ठ) बनाने का भी निदेश दिया जाता है जो आवश्यक अनुपालनों की निगरानी भी करेगा ताकि इस न्यायालय को ईसीआई द्वारा इस संबंध में जारी अनुदेशों, पत्रों और परिपत्रों में इस अदालत के आदेशों में निहित निर्देशों के किसी भी राजनैतिक दल द्वारा गैर-अनुपालन के बारे में तुरंत अवगत कराया जा सके; (v) हम स्पष्ट करते हैं कि हमारे दिनांक 13.02.2020 के आदेश, के पैरा 4.4 में दिए गए निर्देश को संशोधित किया जाए और यह स्पष्ट किया जाता है कि जिन विवरणों को प्रकाशित करने की आवश्यकता है, उन्हें अभ्यर्थी के चयन के 48 घंटों के भीतर प्रकाशित किया जाएगा, न कि नाम-निर्देशन दाखिल करने की पहली तारीख से दो सप्ताह पहले; और (vi) हम दोहराते हैं कि यदि ऐसा कोई राजनैतिक दल भारत निर्वाचन आयोग के पास इस तरह की अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने में विफल रहता है, तो भारत निर्वाचन आयोग राजनैतिक दल द्वारा इस तरह के गैर-अनुपालन को इस अदालत के आदेशों/निर्देशों की अवमानना के रूप में इस अदालत के नोटिस में लाएगा, जिसे भविष्य में गंभीरतापूर्वक लिया जाएगा।" 2. माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में भारत निर्वाचन आयोग ने एक निधि का सृजन किया है, जिसमें न्यायालय की अवमानना के लिए जुर्माना जमा किया जा सकता है। जुर्माना पे एंड अकाउंट्स ऑफिसर के नाम में चेक के माध्यम से अथवा पंजाब नेशनल बैंक के रसीद खाता अर्थात खाता नं. 0153002100000180 (अकाउंट का नाम "कलेक्शन एकाउंट इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया") आईएफएससी कोड पीयूएनबी 0015300 में इलेक्ट्रॉनिक मोड के माध्यम से जमा किया जा सकता है। यदि भुगतान इलेक्ट्रॉनिक मोड के माध्यम से किया जाता है तो लेन-देन का विवरण नामतः यूटीआर नं., बैंक का नाम, लेन-देन की तारीख, आदि तुरंत आयोग को सूचित किया जाए। भविष्य में अनुपालन हेतु उपरोक्त को नोट किया जाए। भवदीय, हस्ता./- (अश्वनी कुमार मोहाल) सचिव
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    सं.भा.नि.आ./प्रेस नोट/22/2020 दिनांक : 14 फरवरी, 2020 प्रेस नोट आयोग द्वारा उपयुक्‍त संशोधनों के साथ विद्यमान अनुदेशों को दोहराते हुए अभ्‍यर्थियों के आपराधिक पूर्ववृत्‍त से संबंधित माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय के निदेशों को कार्यान्वित करना। निर्वाचन आयोग ने सार्व‍जनिक जीवन में दृढ़ और उच्‍च आदर्श मानकों का सदैव समर्थन किया है। माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय ने भारत के संविधान के अनुच्‍छेद 129 और अनुच्‍छेद 142 का अवलंब लेते हुए वर्ष 2011 की रिट याचिका (सिविल) सं. 536 की वर्ष 2018 की अवमानना याचिका (सिविल) सं.2192 में 13 फरवरी, 2020 को निम्‍नलिखित निदेश दिए हैं:- ‘‘1) राजनैतिक दलों (केंद्रीय और राज्‍य निर्वाचन स्‍तर पर) के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे लंबित आपराधिक मामलों वाले ऐसे प्रत्‍येक अभ्‍यर्थी (अपराधों की प्रकृति सहित, और संबद्ध विवरण जैसे कि क्‍या आरोप लगाए गए हैं अथवा नहीं, संबंधित न्‍यायालय का नाम, मामले की संख्‍या इत्‍यादि) के संबंध में विस्‍तृत सूचना अपनी वेबसाइट पर अपलोड करेंगे जिन्‍हें अभ्‍यर्थी के रूप में चुना गया है, और ऐसे चयन तथा इस बात का कारण भी बताएंगें कि उन अन्‍य व्‍यक्तियों का चयन क्‍यों नहीं किया गया जिनका कोई आपराधिक पूर्ववृत्‍त नहीं था। 2) चयन से संबंधित कारण संबद्ध अभ्‍यर्थी की अर्हताओं, उपलब्धियों और योग्‍यताओं के संदर्भानुसार दिए जाएंगे, न कि मतदान ‘जीतने की क्षमता’ मात्र के अनुसार। 3) इस सूचना को (क) एक स्‍थानीय भाषा के समाचार-पत्र और राष्‍ट्रीय समाचार-पत्र में प्रकाशित किया जाएगा; (ख) फेसबुक और ट्विटर सहित राजनैतिक दल के आधिकारिक सोशल मीडिया प्‍लेटफार्मों पर भी प्रदर्शित किया जाएगा। 4) यह विवरण अभ्‍यर्थी के चयन होने के 48 घंटे के भीतर अथवा नाम-निर्देशन दायर करने की पहली तिथि से न्‍यूनतम दो सप्‍ताह पहले, जो भी पहले हो, प्रकाशित किया जाएगा। 5) इसके बाद संबंधित राजनैतिक दल उस अभ्‍यर्थी के चयन की 72 घंटे की अवधि के भीतर इन निदेशों के अनुपालन की रिपोर्ट निर्वाचन आयोग को प्रस्‍तुत करेगा। 6) यदि कोई राजनैतिक दल निर्वाचन आयोग को ऐसी अनुपालन रिपोर्ट प्रस्‍तुत करने में विफल रहता है तो निर्वाचन आयोग ‘‘संबंधित राजनैतिक दल द्वारा ऐसी अननुपालन की सूचना इस न्‍यायालय के आदेशों/निदेशों की अवमानना करने के रूप में उच्‍चतम न्‍यायालय को देगा ।‘’ निर्वाचन आयोग उच्‍चतम न्‍यायालय के इस ऐतिहासिक आदेश का तहेदिल से स्‍वागत करता है, जिसका निर्वाचकीय लोकतंत्र की व्‍यापक प्रगति के लिए नैतिक मानदंड स्‍थापित करने पर दूरगामी असर पडेगा। इससे पहले, आयोग ने मतदाताओं की जानकारी के लिए अभ्‍यर्थियों और संबंधित राजनैतिक दलों द्वारा आपराधिक पूर्ववृत्‍तों का प्रचार सुनिश्चित करने के लिए संशोधित घोषणा-पत्र सहित विस्‍तृत निदेश 10 अक्‍टूबर, 2018 को जारी किए थे। नवंबर, 2018 से इन्‍हें सभी निर्वाचनों में कार्यान्वित किया जा रहा है। अब, आयोग का प्रस्‍ताव है कि समुचित संशोधनों सहित इन अनुदेशों को पुन: जारी किया जाए ताकि माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय के निर्देशों का अक्षरश: कार्यान्‍वयन किया जा सके।

ईसीआई मुख्य वेबसाइट


eci-logo.pngभारत निर्वाचन आयोग एक स्‍वायत्‍त संवैधानिक प्राधिकरण है जो भारत में निर्वाचन प्रक्रियाओं के संचालन के लिए उत्‍तरदायी है। यह निकाय भारत में लोक सभा, राज्‍य सभा, राज्‍य विधान सभाओं और देश में राष्‍ट्रपति एवं उप-राष्‍ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों का संचालन करता है। निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्‍छेद 324 और बाद में अधिनियमित लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम के प्राधिकार के तहत कार्य करता है। 

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