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    मार्च, 2019 दस्तावेज़ 21 - संस्करण 1 (For the guidance of political parties and candidates) & other related guidelines This Manual attempts to inform and educate about Model code of conduct and enabling statutory provisions, instructions, precedents and selected court cases, relating thereto. The Manual contains all existing instructions issued by the election Commission on Model code of Conduct, arranged under broad topics in each chapter. Important portions of the instructions in the chapters have been highlighted in colour/listed in the marginal boxes for convenience of readers. Annexures containing extracts of some important instructions and a list of FAQs along with their answers have also been added at the end of the Manual.
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    ­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­सं. 437/6/1/ईसीआई/अनु/प्रकार्या./एमसीसी/2020 दिनांक : 6 जनवरी, 2020 सेवा में, 1. मंत्रिमंडल सचिव, भारत सरकार, राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली। 2. मुख्‍य सचिव राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली सरकार, दिल्ली, और 3. मुख्य निर्वाचन अधिकारी, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली। विषय : दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की विधान सभा के साधारण निर्वाचन, 2020 की घोषणा के पश्चात आदर्श आचार संहिता लागू करने के लिए की जाने वाली तत्काल कार्रवाई-तत्संबंधी। महोदय, मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि आयोग ने विधान सभा के साधारण निर्वाचन आयोजित कराने के लिए अनुसूची की घोषणा की है, अतः आयोग द्वारा निर्वाचनों की घोषणा के साथ ही ‘आदर्श आचार संहिता’ तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की विधान सभा के साधारण निर्वाचन को ध्यान में रखते हुए, आयोग ने आदर्श आचार संहिता के उपबंधों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए निम्नलिखित निदेश दिए हैं:- 1. सम्पत्ति का विरूपण- पत्र सं. 437/6/अनुदेश/2015-सीसीएस, दिनांक 29 दिसम्बर, 2015; सं. 437/6/अनुदेश/2012-सीसीएण्डबीई दिनांक 18 जनवरी, 2012 तथा सं. 3/7/2008/जेएस-II दिनांक 7 अक्तूबर, 2008 में निहित ईसीआई अनुदेशों में सम्पत्ति के विरूपण के रोकथाम का प्रावधान है। आयोग ने अपने अनुदेशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने तथा समयबद्ध रूप से कार्रवाई करने के लिए निम्नलिखित यथानिर्धारित निदेश दिए हैं- (क) सरकारी सम्पत्ति का विरूपण- इस प्रयोजन के लिए सरकारी परिसर में ऐसा कोई भी सरकारी कार्यालय तथा कैम्पस शामिल होगा, जिसमें कार्यालय भवन स्थित है। सरकारी सम्पत्ति पर मौजूद सभी प्रकार के भित्ति लेखन (वॉल राइटिंग), पोस्टर्स/पेपर्स या किसी अन्य रूप में विरूपण, कटआउट/होर्डिंग, बैनर, फ्लैग आदि निर्वाचनों की घोषणा से 24 घंटे के भीतर हटा दिए जाएंगे। (ख) सार्वजनिक सम्पत्ति का विरूपण तथा सार्वजनिक स्थान का दुरूपयोग- सार्वजनिक सम्पत्ति में तथा सार्वजनिक स्थान जैसे रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, हवाई अड्डों, रेलवे पुलों, रोडवेजों, सरकारी बसों, बिजली/टेलीफोन खंभों, नगर निगम/ नगर पालिका/स्थानीय निकाय के भवनों आदि में भित्ति लेखन/पोस्टरों/ किसी अन्य रूप में विरूपण के पर्चे के रूप में सभी अप्राधिकृत राजनीतिक विज्ञापन या, कट आउट/ होर्डिंग, बैनर, फ्लैग इत्यादि को आयोग द्वारा निर्वाचनों की घोषणा से 48 घंटों के भीतर हटा दिया जाएगा। (ग) सम्पत्ति का विरूपण- निजी सम्पत्ति पर प्रदर्शित तथा स्थानीय विधि एवं न्यायालय के निदेशों, यदि कोई हो, के अध्यधीन सभी अप्राधिकृत राजनीतिक विज्ञापनों को आयोग द्वारा निर्वाचनों की घोषणा से 72 घंटो के भीतर हटा दिया जाएगा। 2. सरकारी वाहनों का दुरूपयोग- आयोग के दिनांक 10 अप्रैल, 2014 के पत्र सं. 464/अनुदेश/2014/ईपीएस में निहित समेकित अनुदेशों में अन्य बातों के साथ-साथ यह उपबंधित है कि किसी राजनीतिक दल, अभ्यर्थी या निर्वाचन से जुड़े किसी अन्य व्यक्ति द्वारा (निर्वाचन से संबंधित किसी सरकारी ड्यूटी का निष्‍पादन करने वाले पदाधिकारियों को छोड़कर) निर्वाचन के दौरान प्रचार करने, निर्वाचन प्रचार संबंधी कार्य या निर्वाचन से संबंधित यात्रा करने के लिए सरकारी वाहन के प्रयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध होगा (उसमें उल्लिखित कुछ अपवादों के अध्‍यधीन)। पद, ‘सरकारी वाहन’ का अर्थ ऐसे वाहनों से है और इसमें ऐसे वाहन शामिल होंगे जो परिवहन के प्रयोजनार्थ प्रयुक्त हों या प्रयुक्त किए जाने योग्य हों, चाहे वे यांत्रिक शक्ति या अन्यथा द्वारा चालित हों, और इनमें केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन, केन्द्र/राज्य सरकार के सार्वजनिक उपक्रम, केन्द्र/राज्य सरकार के संयुक्त क्षेत्र के उपक्रम, स्थानीय निकाय, नगर निगम, विपणन बोर्ड, सहकारी समितिय या ऐसे कोई अन्य निकाय शामिल होंगे जिसमें सार्वजनिक निधियां निवेशित की गई हों, भले ही कुल निधियों में से एक छोटा सा हिस्सा ही हों, । मुख्य निर्वाचन अधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी ईसीआई के अनुदेशों के अनुपालन के लिए निर्वाचनों की घोषणा के 24 घंटे के भीतर आवश्यक कार्रवाई करेंगे। 3. सार्वजनिक-राजकोष की लागत पर विज्ञापन- दिनांक 5 मार्च, 2014 के पत्र सं. 437/6/1/2014-सीसी एंड बीई में ईसीआई अनुदेशों में यह प्रावधान है कि निर्वाचन अवधि के दौरान सत्तारूढ़ दल की संभावनाओं को बढ़ाने के उद्देश्य से उपलब्धियों के बारे में सार्वजनिक राजकोष की लागत पर समाचार पत्रों एवं अन्य संचार माध्यमों में विज्ञापन दिए जाने और राजनीतिक समाचार एवं प्रचार-प्रसार के पक्षपातपूर्ण कवरेज के लिए आधिकारिक जनसंचार के दुरूपयोग से निरपवाद रूप से बचा जाना चाहिए। सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डालने के लिए सार्वजनिक राजकोष की लागत पर इलेक्ट्रॉनिक तथा प्रिन्ट मीडिया में कोई भी विज्ञापन जारी नहीं किया जाएगा। यदि किसी विज्ञापन को दूरदर्शन प्रसारण या प्रिन्ट मीडिया में प्रकाशन के लिए पहले ही जारी किया जा चुका है, तो यह अवश्य सुनिश्चित किया जाए कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर ऐसे विज्ञापनों का दूरदर्शन प्रसारण/प्रकाशन तत्काल रोक दिया जाए तथा घोषणा की तारीख से किन्हीं भी समाचार पत्रों, पत्रिकाओं आदि अर्थात् प्रिन्ट मीडिया में ऐसा कोई भी विज्ञापन प्रकाशित न हो, तथा इसे तत्काल वापिस ले लिया जाना चाहिए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी निर्वाचनों की घोषणा के तुरन्त पश्चात् सरकार की उपलब्धियों को दर्शाते हुए प्रिन्ट/इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में किसी भी विज्ञापन को हटाने/रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई करेंगे। 4. आधिकारिक वेबसाइट पर राजनीतिक पदाधिकारी का फोटो- दिनांक 20 मार्च, 2014 के पत्र सं. 437/6/अनुदेश/2014- सीसी एंड बीई में निहित ईसीआई अनुदेश में यह प्रावधान है कि केन्द्र/राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध मंत्रियों, राजनीतिज्ञों या राजनीतिक दलों के सभी संदर्भों को हटा दिया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी राज्यीय विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से किसी भी राजनीतिक पदाधिकारी के फोटो को हटाने/छिपाने के लिए तत्काल कार्रवाई करेंगे। 5. विकास/निर्माण संबंधी कार्यकलाप-मुख्य निर्वाचन अधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी निर्वाचनों की घोषणा के 72 घंटे के भीतर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन पर किसी शिकायत को विधिमान्य बनाने की स्थिति में संदर्भ हेतु कार्य की निम्नलिखित सूची प्राप्त करेंगेः i. कार्य की सूची जिसे स्थल पर पहले ही आरंभ किया जा चुका है। ii. नए कार्य की सूची जिसे स्थल पर आरंभ नहीं किया गया है। 6. व्यय अनुवीक्षण तथा आदर्श आचार संहिता के प्रवर्तन के लिए कार्यकलाप-घोषणा के बाद उड़न दस्ता, एफ एस टी, वीडियो टीम, शराब/नकदी/विनिषिद्ध औषधियों के लिए गहन जांच,ड्रग/स्वापक के अवैध व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए आबकारी विभाग के उड़न दस्तों को तत्काल सक्रिय किया जाना चाहिए। 7. शिकायत निगरानी प्रणाली- निर्वाचन कराए जाने वाले राज्य में वेबसाइट तथा कॉल सेन्टर पर आधारित एक शिकायत निवारण प्रणाली होगी। कॉल सेन्टर का टोल फ्री नंबर 1950 है। टोल फ्री कॉल सेन्टर नंबर पर कॉल करके या वेबसाइट पर शिकायतें दर्ज करके की जा सकती है। शिकायतकर्ताओं को एसएमएस द्वारा या कॉल सेन्टर द्वारा भी की गई कार्रवाई की सूचना दी जाएगी। शिकायतकर्ता अपनी शिकायतों पर की गई कार्रवाई के विवरण भी देख सकते हैं। यह प्रणाली घोषणा के 24 घंटे के भीतर क्रियाशील होनी चाहिए। सभी शिकायतों को यथासमय एवं उचित रूप से निपटाया जाना चाहिए। जिला स्तर पर 24x7 नियंत्रण कक्ष को अवश्य सक्रिय किया जाए तथा विशेष रूप से पर्याप्त कार्मिक शक्ति तैनात की जाए एवं अन्य लाजिस्टिक्स सुनिश्चित किया जाए, नियंत्रण कक्ष में चौबीस घंटे लोगों की तैनाती की जाए तथा किसी टाल-मटोल या शंका से बचने के लिए उनका ड्यूटी रोस्टर अवश्य बनाया जाए। 8. आईटी एप्लीकेशन आधिकारिक वेबसाइट तथा सोशल मीडिया सहित सभी आई टी एप्लीकेशन -घोषणा किए जाने के साथ ही चालू हो जाएंगी। 9. मतदाताओं तथा राजनीतिक दलों की जागरूकता के लिए सूचना का प्रचार-प्रसार करना- निर्वाचन संबंधी प्रमुख गतिविधि का प्रचार मुख्य निर्वाचन अधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी/रिटर्निंग अधिकारी के माध्यम से किया जाएगा। इस उद्देश्य के लिए, सभी आवश्यक सूचना का प्रचार-प्रसार रेडियो, टेलीविजन, सिनेमा के माध्यम से किया जाएगा। सरकारी चैनल में मतदाता शिक्षा सामग्री प्रदर्शित की जाएगी। 10. शैक्षणिक संस्थान तथा सिविल सोसाइटी से सक्रिय सहयोग- आम जनता तथा अन्य हितधारकों में निर्वाचन संबंधी सूचना का व्यापक प्रचार करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों तथा सिविल सोसाइटी से सहयोग लिया जा सकता है। 11. मीडिया सेन्टर- मीडिया के माध्यम से ईवीएम/वीवीपीएटी के प्रयोग सहित निर्वाचन प्रणाली के बारे में मतदाताओं, राजनीतिक दलों तथा अन्य स्टेकहोल्डरों के मध्य जागरूकता फैलाने के लिए प्रयास किया जाना चाहिए। 12. एमसीएमसी/डीईएमसी- दिनांक 24 मार्च, 2014 के पत्र सं. 491/एमसीएमसी/2014/संचार में निहित ईसीआई अनुदेश में यह प्रावधान है कि सभी पंजीकृत राजनीतिक दल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर जारी किए जाने वाले उनके प्रस्तावित राजनीतिक विज्ञापनों के पूर्व प्रमाणन के लिए जिला तथा राज्य स्तर, जैसी भी स्थिति हो, पर मीडिया प्रमाणन एवं अनुवीक्षण समिति (एमसीएमसी) से सम्पर्क करेंगे। आयोग ने उपर्युक्त पत्र में निहित अपने अनुदेशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निदेश दिए हैं। 13. नियंत्रण कक्ष- जिला स्तर पर 24x7 नियंत्रण कक्ष तत्काल अवश्य चालू किया जाए तथा जिला निर्वाचन अधिकारी/मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा पर्याप्त कार्मिक शक्ति की तैनाती तथा अन्य लाजिस्टिक्स सुनिश्चित किया जाए। सम्पूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान ईसीआई सचिवालय में शिकायत निवारण केन्द्र सहित एक नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया जाएगा।
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    सं.437/6/1/ईसीआई/अनुदेश/प्रकार्या./एमसीसी/2020 दिनांक: 6 जनवरी, 2020 सेवा में 1. मंत्रिमंडल सचिव, भारत सरकार, राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली। 2. मुख्य सचिव, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली सरकार, दिल्ली। 3. मुख्य निर्वाचन अधिकारीः- दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली। विषय : आदर्श आचार संहिता लागू होना-दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचन 2020- तत्संबंधी। महोदय, मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि निर्वाचन आयोग ने दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचन आयोजित करने के लिए अनुसूची की उद्घोषणा की है। (प्रेस नोट सं.ईसीआई/प्रे.नो./04/2020, दिनांक 6 जनवरी, 2020 जो आयोग की वेबसाइटwww.eci.gov.in पर उपलब्ध है)। 2. इस उद्घोषणा के साथ ही राजनैतिक दलों और अभ्‍यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के उपबंध तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं और तब तक लागू रहेंगे जब तक दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की विधान सभा में साधारण निर्वाचन सम्पन्न न हो जाएं। इसे केन्द्र/राज्य सरकार, सभी मंत्रालयों/विभागों और केन्‍द्र सरकार / राज्‍य सरकार के सभी कार्यालयों के ध्‍यान में लाया जाए। आपके द्वारा जारी किए गए अनुदेशों की एक प्रति सूचना एवं रिकार्ड हेतु भारत निर्वाचन आयोग को भेजी जाए। 3. आपका ध्‍यान ‘सत्‍तासीन दल’ से संबंधित आदर्श आचार संहिता के उपबंधों की ओर आकृष्‍ट किया जाता है जिसमें अन्‍य बातों के साथ-साथ यह कहा गया है कि सत्तासीन दल, चाहे केन्‍द्र में या संबंधित राज्‍य में यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी ऐसी शिकायत के लिए कोई कारण न दिया जाए कि उसने अपने निर्वाचन अभियान के प्रयोजनों के लिए शासकीय हैसियत का प्रयोग किया है और विशेष रूप से :- (i) (क) मंत्री अपने शासकीय दौरे को निर्वाचन प्रचार अभियान संबंधी कार्य से नहीं मिलाएंगे और निर्वाचन प्रचार अभियान संबंधी कार्य के दौरान शासकीय क्षेत्र या कार्मिकों का उपयोग भी नहीं करेंगे; (ख) सरकारी हवाई-जहाज, वाहनों सहित सरकारी परिवहन, तंत्र एवं कार्मिकों का उपयोग सत्तासीन दल के हित को प्रोत्‍साहित करने के लिए नहीं किया जाएगा; (ii) निर्वाचन सभाओं को आयोजित करने के लिए सार्वजनिक स्‍थानों जैसे मैदानों आदि का उपयोग और निर्वाचनों के संबंध में एयरक्राफ्ट के लिए हैलीपैड का प्रयोग अपने द्वारा एकाधिकार रूप से नहीं किया जाएगा। अन्‍य दलों और अभ्‍यर्थियों को उन्‍हीं शर्तों एवं निबंधनों के आधार पर ऐसे स्‍थानों एवं सुविधाओं का उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी जिन बातों एवं निबंधनों पर सत्तासीन दल द्वारा उनका उपयोग किया जाता है; (iii) जहां के लिए निर्वाचनों की घोषणा हुई है या जहां निर्वाचन हो रहे हैं, वहां के विश्राम गृह, डाक बंगला या अन्‍य सरकारी आवास को उपयोग करने के लिए किसी राज्य द्वारा जैड स्केल सुरक्षा प्रदान किए गए राजनीतिक पदाधिकारियों को या जिन्हें विभिन्न राज्यों में या केन्द्र सरकार में इससे ऊपर या इसके समकक्ष स्तर की सुरक्षा प्रदान की गई है, को एक समान आधार पर उपयोग करने के लिए प्रदान किए जाएंगे।यह इस शर्त के अध्यधीन होगा कि ऐसा आवास पहले से ही निर्वाचन सम्बन्धी अधिकारियों या प्रेक्षकों को आबंटित न हो या उनके द्वारा धारित न हो। सरकारी आवास गृह/आराम गृह या अन्य सरकारी आवास इत्यादि में ठहरने के समय ऐसे राजनीतिक पदाधिकारी कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं करेंगे। यर्थ (iv) समाचार पत्रों और अन्‍य मीडिया में सरकारी खजाने की लागत से विज्ञापन जारी करने और राजनैतिक समाचारों के दलगत कवरेज के लिए निर्वाचन अवधि के दौरान शासकीय मास मीडिया के दुरुपयोग तथा सत्तासीन दल की प्रत्‍याशाओं को आगे बढ़ाने की दृष्टि से उपलब्धियों के बारे में प्रचार से निष्‍ठापूर्वक बचा जाना चाहिए; (v) मंत्री और अन्य प्राधिकारी, आयोग द्वारा निर्वाचनों की उद्घोषणा किए जाने के समय से विवेकाधीन निधियों में से अनुदानों/भुगतानों को स्‍वीकृति प्रदान नहीं करेंगे; और (vi) आयोग द्वारा निर्वाचनों की उद्घोषणा के समय से, मंत्री और अन्‍य प्राधिकारी – (क) किसी रूप में कोई वित्तीय अनुदानों की उद्घोषणा नहीं करेंगे या उनके लिए वचन नहीं देंगे; या (ख) किसी प्रकार की परियोजनाओं या योजनाओं की आधारशीला नहीं रखेंगे (लोक सेवकों के सिवाय); या (ग) सड़कों के निर्माण, पेयजल सुविधाओं की व्‍यवस्‍था आदि के बारे में कोई वचन नहीं देंगे; या (घ) सरकार सार्वजनिक उपक्रमों आदि में ऐसी कोई तदर्थ नियुक्तियां नहीं करेगी जिनमें सत्तासीन दल के पक्ष में मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रभाव हो। 4. जैसा कि उपर्युक्‍त पैरा 3 {खंड IV} से ज्ञातव्य है, सरकारी खजाने की लागत से सरकार की उपलब्धियों को उजागर करते हुए इलेक्‍ट्रानिक एवं प्रिंट मीडिया में कोई विज्ञापन जारी नहीं किया जाएगा। यदि कोई विज्ञापन, प्रसारण या प्रिंट मीडिया में प्रकाशन के लिए पहले ही जारी हो चुका है, तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इलेक्‍ट्रानिक मीडिया में ऐसे विज्ञापनों के प्रसारण को तत्‍क्षण रोक दिया जाए और यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आज से ही ऐसा कोई विज्ञापन किन्‍हीं भी समाचारपत्रों, पत्रिकाओं आदि अर्थात् प्रिंट मीडिया में प्रकाशित न किया जाए और इसे शीघ्र वापस ले लिया जाए। 5. इस संबंध में आयोग के दिनांक 5 मार्च, 2009 के पत्र सं. 437/6/2009-सीसीबीई के तहत जारी अनुदेश, आयोग की वेबसाइट “http://eci.nic.in/” पर उपलब्‍ध है जो आपकी सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु ‘महत्वपूर्ण अनुदेश’ नामक शीर्षक के अन्तर्गत है।आपके मार्गदर्शन के लिए इस लिंक पर आयोग के अन्‍य सभी अनुदेश भी उपलब्‍ध हैं। 6. आयोग इसके अतिरिक्‍त निदेश देता है कि निर्वाचन के संचालन से संबंधित सभी अधिकारियों/कर्मचारियों के स्‍थानान्‍तरण पर पूरी रोक होगी। इनमें निम्‍नलिखित सम्मिलित होंगे किंतु वहीं तक सीमित नहीं होंगे:- (i) मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी और अपर/संयुक्‍त/उप मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी; (ii) मंडल आयुक्‍त; (iii) जिला निर्वाचन अधिकारी, रिटर्निंग आफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर एवं निर्वाचनों के संचालन से संबंधित राजस्‍व अधिकारी; (iv) निर्वाचनों के प्रबंधन से जुड़े पुलिस विभाग के अधिकारी यथा, रेंज महानिरीक्षक एवं उप महानिरीक्षक, वरिष्‍ठ पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक, सब डिवीजनल पुलिस अधिकारी यथा, पुलिस उपाधीक्षक एवं अन्‍य पुलिस अधिकारी, जो लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम, 1951 की धारा 28क के अधीन आयोग में प्रतिनियुक्‍त हैं; (v) निर्वाचन की उद्घोषणा की तारीख से पूर्व उपर्युक्‍त श्रेणियों के अधिकारियों की बाबत जारी किंतु आज की तारीख तक कार्यान्वित नहीं किए गए स्‍थानान्‍तरण आदेशों को इस संबंध में आयोग से विशिष्‍ट अनुमति लिए बिना लागू नहीं किया जाना चाहिए; (vi) यह रोक निर्वाचन के पूरा होने तक प्रभावी रहेगी। आयोग आगे यह और निदेश देता है कि राज्‍य सरकार को राज्‍य में निर्वाचन के प्रबंधन में भूमिका वाले वरिष्‍ठ अधिकारियों का स्‍थानान्‍तरण करने से बचना चाहिए। (vii) ऐसे मामलों में, जहां प्रशासनिक अत्‍यावश्‍यकताओं के कारण किसी अधिकारी का स्‍थानान्‍तरण आवश्‍यक है, वहां संबंध राज्‍य सरकार को पूर्व स्‍वीकृति के लिए पूर्ण औचित्‍य के साथ आयोग से संपर्क करना चाहिए। 7. कृपया इस पत्र की पावती भेजी जाए।
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    आदर्श आचार संहिता पर अनुदेशों का संग्रह, 2018 This compendium is an updated version of the Compendium of instructions on Model Code of Conduct 2015, containing various instructions on model code issued by the Commission till December 2017 including a new Part “L. LETTERS TO CABINET SECRETARY”.
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    सं.: 437/6/1/ईसीआई/अनुदेश/प्रकार्या/एमसीसी/2019 दिनांक: 25 अक्तूबर, 2019 सेवा में मत्रिमंडल सचिव, भारत सरकार, राष्‍ट्रपति भवन, नई दिल्‍ली। मुख्‍य सचिव :- (क) उत्तराखंड सरकार, देहरादून, (ख) पश्चिम बंगाल सरकार, कोलकाता मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी:- (क) उत्तराखंड, देहरादून, (ख) पश्चिम बंगाल, कोलकाता विषय: उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की राज्‍य विधान सभाओं में आकस्मिक रिक्तियों को भरने के लिए उप-निर्वाचन - आदर्श आचार संहिता लागू किए जाने के संबंध में अनुदेश-तत्‍संबंधी। महोदय, मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि आयोग ने दिनांक 25 अक्तूबर, 2019 के प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रेनो/100/2019 के तहत उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल राज्‍य में निम्‍नलिखित विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों की आकस्मिक रिक्तियों को भरने के लिए उप-निर्वाचन की अनुसूची की घोषणा की है:- राज्य का नाम निर्वाचन क्षेत्र का नाम एवं संख्या उत्तराखंड 44- पिथौरागढ़ विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र पश्चिम बंगाल 34- कालियागंज विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र (अ.जा) 77- करीमपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र 224- खड़गपुर सदर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र 2. आदर्श आचार संहिता के प्रावधान आयोग द्वारा दिनांक 29 जून, 2017 के इसके पत्र संख्‍या 437/6/अनुदेश/2016-सीसीएस, दिनांक 18 जनवरी, 2018 के पत्र संख्‍या 437/6/विविध/ईसीआई/पत्र/प्रकार्या/एमसीसी/2017 और दिनांक 14 अक्तूबर, 2019 के पत्र सं. 437/6/विविध/ईसीआई/पत्र/प्रकार्या/एमसीसी/2019 (प्रति संलग्‍न) के तहत यथा जारी आंशिक संशोधनों के अध्‍यधीन उस (उन) जिले (जिलों) में तत्‍काल प्रभाव से लागू हो गए हैं जिनमें उप-निर्वाचन होने वाले संसदीय / विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र का सम्‍पूर्ण या कोई भाग अवस्थित है। 3. इसे सभी संबंधितों के ध्‍यान में लाया जाए।
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    ­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­सं. 437/6/1/ईसीआई/अनु/प्रकार्या./एमसीसी/2019 दिनांक : 1 नवम्बर, 2019 सेवा में, मंत्रिमंडल सचिव, भारत सरकार, राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली। मुख्‍य सचिव झारखण्ड सरकार, रांची, और मुख्य निर्वाचन अधिकारी, झारखण्ड, रांची। विषय : झारखण्ड विधान सभा के साधारण निर्वाचन, 2019 की घोषणा के पश्चात आदर्श आचार संहिता लागू करने के लिए की जाने वाली तत्काल कार्रवाई-तत्संबंधी। महोदय, मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि आयोग ने झारखण्ड विधान सभा के साधारण निर्वाचन आयोजित कराने के लिए अनुसूची की घोषणा की है, अतः आयोग द्वारा निर्वाचनों की घोषणा के साथ ही ‘आदर्श आचार संहिता’ तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। झारखण्ड विधान सभा के साधारण निर्वाचन को ध्यान में रखते हुए, आयोग ने आदर्श आचार संहिता के उपबंधों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए निम्नलिखित निदेश दिए हैं:- 1. सम्पत्ति का विरूपण- पत्र सं. 437/6/अनुदेश/2015-सीसीएस, दिनांक 29 दिसम्बर, 2015; सं. 437/6/अनुदेश/2012-सीसीएण्डबीई दिनांक 18 जनवरी, 2012 तथा सं. 3/7/2008/जेएस-II दिनांक 7 अक्तूबर, 2008 में निहित ईसीआई अनुदेशों में सम्पत्ति के विरूपण के रोकथाम का प्रावधान है। आयोग ने अपने अनुदेशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने तथा समयबद्ध रूप से कार्रवाई करने के लिए निम्नलिखित यथानिर्धारित निदेश दिए हैं- (क) सरकारी सम्पत्ति का विरूपण- इस प्रयोजन के लिए सरकारी परिसर में ऐसा कोई भी सरकारी कार्यालय तथा कैम्पस शामिल होगा, जिसमें कार्यालय भवन स्थित है। सरकारी सम्पत्ति पर मौजूद सभी प्रकार के भित्ति लेखन (वॉल राइटिंग), पोस्टर्स/पेपर्स या किसी अन्य रूप में विरूपण, कटआउट/होर्डिंग, बैनर, फ्लैग आदि निर्वाचनों की घोषणा से 24 घंटे के भीतर हटा दिए जाएंगे। (ख) सार्वजनिक सम्पत्ति का विरूपण तथा सार्वजनिक स्थान का दुरूपयोग- सार्वजनिक सम्पत्ति में तथा सार्वजनिक स्थान जैसे रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, हवाई अड्डों, रेलवे पुलों, रोडवेजों, सरकारी बसों, बिजली/टेलीफोन खंभों, नगर निगम/ नगर पालिका/स्थानीय निकाय के भवनों आदि में भित्ति लेखन/पोस्टरों/ किसी अन्य रूप में विरूपण के पर्चे के रूप में सभी अप्राधिकृत राजनीतिक विज्ञापन या, कट आउट/ होर्डिंग, बैनर, फ्लैग इत्यादि को आयोग द्वारा निर्वाचनों की घोषणा से 48 घंटों के भीतर हटा दिया जाएगा। (ग) सम्पत्ति का विरूपण- निजी सम्पत्ति पर प्रदर्शित तथा स्थानीय विधि एवं न्यायालय के निदेशों, यदि कोई हो, के अध्यधीन सभी अप्राधिकृत राजनीतिक विज्ञापनों को आयोग द्वारा निर्वाचनों की घोषणा से 72 घंटो के भीतर हटा दिया जाएगा। 2. सरकारी वाहनों का दुरूपयोग- आयोग के दिनांक 10 अप्रैल, 2014 के पत्र सं. 464/अनुदेश/2014/ईपीएस में निहित समेकित अनुदेशों में अन्य बातों के साथ-साथ यह उपबंधित है कि किसी राजनीतिक दल, अभ्यर्थी या निर्वाचन से जुड़े किसी अन्य व्यक्ति द्वारा (निर्वाचन से संबंधित किसी सरकारी ड्यूटी का निष्‍पादन करने वाले पदाधिकारियों को छोड़कर) निर्वाचन के दौरान प्रचार करने, निर्वाचन प्रचार संबंधी कार्य या निर्वाचन से संबंधित यात्रा करने के लिए सरकारी वाहन के प्रयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध होगा (उसमें उल्लिखित कुछ अपवादों के अध्‍यधीन)। पद, ‘सरकारी वाहन’ का अर्थ ऐसे वाहनों से है और इसमें ऐसे वाहन शामिल होंगे जो परिवहन के प्रयोजनार्थ प्रयुक्त हों या प्रयुक्त किए जाने योग्य हों, चाहे वे यांत्रिक शक्ति या अन्यथा द्वारा चालित हों, और इनमें केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन, केन्द्र/राज्य सरकार के सार्वजनिक उपक्रम, केन्द्र/राज्य सरकार के संयुक्त क्षेत्र के उपक्रम, स्थानीय निकाय, नगर निगम, विपणन बोर्ड, सहकारी समितिय या ऐसे कोई अन्य निकाय शामिल होंगे जिसमें सार्वजनिक निधियां निवेशित की गई हों, भले ही कुल निधियों में से एक छोटा सा हिस्सा ही हों, । मुख्य निर्वाचन अधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी ईसीआई के अनुदेशों के अनुपालन के लिए निर्वाचनों की घोषणा के 24 घंटे के भीतर आवश्यक कार्रवाई करेंगे। 3. सार्वजनिक-राजकोष की लागत पर विज्ञापन- दिनांक 5 मार्च, 2014 के पत्र सं. 437/6/1/2014-सीसी एंड बीई में ईसीआई अनुदेशों में यह प्रावधान है कि निर्वाचन अवधि के दौरान सत्तारूढ़ दल की संभावनाओं को बढ़ाने के उद्देश्य से उपलब्धियों के बारे में सार्वजनिक राजकोष की लागत पर समाचार पत्रों एवं अन्य संचार माध्यमों में विज्ञापन दिए जाने और राजनीतिक समाचार एवं प्रचार-प्रसार के पक्षपातपूर्ण कवरेज के लिए आधिकारिक जनसंचार के दुरूपयोग से निरपवाद रूप से बचा जाना चाहिए। सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डालने के लिए सार्वजनिक राजकोष की लागत पर इलेक्ट्रॉनिक तथा प्रिन्ट मीडिया में कोई भी विज्ञापन जारी नहीं किया जाएगा। यदि किसी विज्ञापन को दूरदर्शन प्रसारण या प्रिन्ट मीडिया में प्रकाशन के लिए पहले ही जारी किया जा चुका है, तो यह अवश्य सुनिश्चित किया जाए कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर ऐसे विज्ञापनों का दूरदर्शन प्रसारण/प्रकाशन तत्काल रोक दिया जाए तथा घोषणा की तारीख से किन्हीं भी समाचार पत्रों, पत्रिकाओं आदि अर्थात् प्रिन्ट मीडिया में ऐसा कोई भी विज्ञापन प्रकाशित न हो, तथा इसे तत्काल वापिस ले लिया जाना चाहिए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी निर्वाचनों की घोषणा के तुरन्त पश्चात् सरकार की उपलब्धियों को दर्शाते हुए प्रिन्ट/इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में किसी भी विज्ञापन को हटाने/रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई करेंगे। 4. आधिकारिक वेबसाइट पर राजनीतिक पदाधिकारी का फोटो- दिनांक 20 मार्च, 2014 के पत्र सं. 437/6/अनुदेश/2014- सीसी एंड बीई में निहित ईसीआई अनुदेश में यह प्रावधान है कि केन्द्र/राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध मंत्रियों, राजनीतिज्ञों या राजनीतिक दलों के सभी संदर्भों को हटा दिया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी राज्यीय विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से किसी भी राजनीतिक पदाधिकारी के फोटो को हटाने/छिपाने के लिए तत्काल कार्रवाई करेंगे। 5. विकास/निर्माण संबंधी कार्यकलाप-मुख्य निर्वाचन अधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी निर्वाचनों की घोषणा के 72 घंटे के भीतर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन पर किसी शिकायत को विधिमान्य बनाने की स्थिति में संदर्भ हेतु कार्य की निम्नलिखित सूची प्राप्त करेंगेः i. कार्य की सूची जिसे स्थल पर पहले ही आरंभ किया जा चुका है। ii. नए कार्य की सूची जिसे स्थल पर आरंभ नहीं किया गया है। 6. व्यय अनुवीक्षण तथा आदर्श आचार संहिता के प्रवर्तन के लिए क्रियाकलाप-घोषणा के बाद उड़न दस्ता, एफ एस टी, वीडियो टीम, शराब/नकदी/विनिषिद्ध औषधियों के लिए गहन जांच,ड्रग/स्वापक के अवैध व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए आबकारी विभाग के उड़न दस्तों को तत्काल सक्रिय किया जाना चाहिए। 7. शिकायत निगरानी प्रणाली- निर्वाचन कराए जाने वाले राज्य के पास वेबसाइट तथा कॉल सेन्टर पर आधारित एक शिकायत निवारण प्रणाली होगी। कॉल सेन्टर का टोल फ्री नंबर 1950 है। टोल फ्री कॉल सेन्टर नंबर पर कॉल करके या वेबसाइट पर शिकायतें दर्ज करके की जा सकती है। शिकायतकर्ताओं को एसएमएस द्वारा या कॉल सेन्टर द्वारा भी की गई कार्रवाई की सूचना दी जाएगी। शिकायतकर्ता अपनी शिकायतों पर की गई कार्रवाई के विवरण भी देख सकते हैं। यह प्रणाली घोषणा के 24 घंटे के भीतर क्रियाशील होनी चाहिए। सभी शिकायतों को यथासमय एवं उचित रूप से निपटाया जाना चाहिए। जिला स्तर पर 24x7 नियंत्रण कक्ष को अवश्य सक्रिय किया जाए तथा विशेष रूप से पर्याप्त कार्मिक शक्ति तैनात की जाए एवं अन्य लाजिस्टिक्स सुनिश्चित किया जाए, नियंत्रण कक्ष में चौबीस घंटे लोगों की तैनाती की जाए तथा किसी टाल-मटोल या शंका से बचने के लिए उनका ड्यूटी रोस्टर अवश्य बनाया जाए। 8. आईटी एप्लीकेशन-घोषणा किए जाने के साथ ही आधिकारिक वेबसाइट तथा सोशल मीडिया सहित सभी आई टी एप्लीकेशन चालू हो जाएंगी। 9. मतदाताओं तथा राजनीतिक दलों की जागरूकता के लिए सूचना का प्रचार-प्रसार करना- निर्वाचन संबंधी प्रमुख गतिविधि का प्रचार मुख्य निर्वाचन अधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी/रिटर्निंग अधिकारी के माध्यम से किया जाएगा। इस उद्देश्य के लिए, सभी आवश्यक सूचना का प्रचार-प्रसार रेडियो, टेलीविजन, सिनेमा के माध्यम से किया जाएगा। सरकारी चैनल में मतदाता शिक्षा सामग्री प्रदर्शित की जाएगी। 10. शैक्षणिक संस्थान तथा सिविल सोसाइटी से सक्रिय सहयोग- आम जनता तथा अन्य हितधारकों में निर्वाचन संबंधी सूचना का व्यापक प्रचार करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों तथा सिविल सोसाइटी से सहयोग लिया जा सकता है। 11. मीडिया सेन्टर- मीडिया के माध्यम से ईवीएम/वीवीपीएटी के प्रयोग सहित निर्वाचन प्रणाली के बारे में मतदाताओं, राजनीतिक दलों तथा अन्य पणधारियों के मध्य जागरूकता फैलाने के लिए प्रयास किया जाना चाहिए। 12. एमसीएमसी/डीईएमसी- दिनांक 24 मार्च, 2014 के पत्र सं. 491/एमसीएमसी/2014/संचार में निहित ईसीआई अनुदेश में यह प्रावधान है कि सभी पंजीकृत राजनीतिक दल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर जारी किए जाने वाले उनके प्रस्तावित राजनीतिक विज्ञापनों के पूर्व प्रमाणन के लिए जिला तथा राज्य स्तर पर, जैसी भी स्थिति हो, मीडिया प्रमाणन एवं अनुवीक्षण समिति (एमसीएमसी) से सम्पर्क करेंगे। आयोग ने उपर्युक्त पत्र में निहित अपने अनुदेशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निदेश दिए हैं। 13. नियंत्रण कक्ष- जिला स्तर पर 24x7 नियंत्रण कक्ष तत्काल अवश्य चालू किया जाए तथा जिला निर्वाचन अधिकारी/मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा पर्याप्त कार्मिक शक्ति की तैनाती तथा अन्य लाजिस्टिक्स सुनिश्चित किया जाए। सम्पूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान ईसीआई सचिवालय में शिकायत निवारण केन्द्र सहित एक नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया जाएगा।
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    Application of Model Code of Conduct - General Election to the Legislative Assembly of Jharkhand, 2019
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    Commission’s order to Sh. Gopal Bhargav of Bhartiya Janata Party and Leader of Opposition in the Legislative Assembly of Madhya Pradesh
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    Bye-election to fill casual vacancies in the state Legislative Assembly of Gujarat - instructions on enforcement of Model code of conduct- regarding.
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    Application of Model Code of Conduct - General Elections to Legislative Assemblies of Haryana and Maharashtra - regarding
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    सं. 437/उ.प्र.-हि.प्र./2019 30 अप्रैल, 2019 आदेश यत:, आयोग ने श्री आज़म खान, समाजवादी पार्टी के नेता, जो 07-रामपुर संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र, उत्‍तर प्रदेश से एक अभ्‍यर्थी भी है, को (i) 05 अप्रैल, 2019 को 34-स्‍वार विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र में सार्वजनिक भाषण, (ii) 07 अप्रैल, 2019 और 08 अप्रैल, 2019 को 38-मिलक विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र में सार्वजनिक भाषणों और (iii) 09 अप्रैल, 2019 और 12 अप्रैल, 2019 को 36-बिलासपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में सार्वजनिक भाषणों के दौरान कतिपय आपत्तिजनक वक्‍तव्‍य देकर आदर्श आचार संहिता के कतिपय उपबंधों और लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम, 1951 की संबद्ध धाराओं का उल्‍लंघन करने के लिए दिनांक 16 अप्रैल, 2019 को कारण बताओ नोटिस सं. 437/उ.प्र.-हि.प्र./2019, जारी किया था; और यत:, आयोग को श्री आज़म खान से उपर्युक्‍त नोटिस का उत्‍तर 17 अप्रैल, 2019 को मिला है; और यत:, श्री आज़म खान ने अपने उपर्युक्‍त उत्‍तर में, अन्‍य बातों के साथ-साथ, निम्‍नलिखित निवेदन किया है:- '' यदि इस प्रगतिरत साधारण निर्वाचन, 2019 में मेरे राजनीतिक कृत्‍यों और निर्वाचन अभियान के दौरान मैंने निर्वाचकीय महत्‍ता की किसी विधि का जानबूझकर अथवा अन्‍जाने में उल्‍लंघन किया हो तो सर्वप्रथम और अपना उत्‍तर/स्‍पष्‍टीकरण देने से पहले, मैं बिना शर्त क्षमा याचना करता हूं, बिना शर्त यह क्षमा याचना, इस देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति मेरे अत्‍यधिक स्‍नेह एवं आदर के कारण की जा रही है, कहने की आवश्‍यकता नहीं है कि निर्वाचकीय मत द्वारा स्‍थापित लोकतंत्र में मेरा पूर्ण विश्‍वास है और भारत निर्वाचन आयोग, एक निकाय जिस पर हमारे प्रिय देश के लोकतंत्र के संरक्षण का दायित्‍व है, के प्रति भी मेरा अत्‍यधिक आदर है। मैं एक बार फिर बिना शर्त क्षमा याचना करता हूँ और यह श्री निवेदन करता हूँ कि भविष्‍य में निर्वाचकीय अभियान के दौरान मैं ऐसे बयान नहीं दूंगा जो किसी भी प्रकार से आपत्तिजनक हों। मैं एतद्द्वारा यह भी निवेदन करता हूँ कि मेरे द्वारा दिए गए भाषणों, जो आपत्तिजनक पाए गए हैं, में से कोई भी इस मंशा से नहीं दिया गया था जिससे आदर्श आचार संहिता अथवा लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम के उपबंध अथवा देश की किसी अन्‍य विधि का उल्‍लंघन हो। भविष्‍य में मेरे द्वारा निर्वाचन अभियान के दौरान ऐसे बयान अथवा इसी तरह के बयान देने से बचने के लिए विशेष सावधानी बरती जाएगी''; और यत:, आयोग ने श्री आज़म खान द्वारा प्रस्‍तुत स्‍पष्‍टीकरण और प्रमाणों की जांच की है तथा उनके विवादास्‍पद भाषणों की वीडियो रिकार्डिंग भी दोबारा देखी है; और यत:, आयोग का मानना है कि श्री आज़म खान ने अपनी सार्वजनिक अभिव्‍यक्तियों में जिला निर्वाचन तंत्र के प्रति और धार्मिक विषयों पर अत्‍यधिक उत्‍तेजक भाषण दिए हैं, जो निर्वाचनों के ध्रुवीकरण की प्रवृति के हैं तथा जो केवल उस निर्वाचन क्षेत्र तक ही सीमित नहीं थे जहां पर भाषण दिया जाता है, बल्कि वे अन्‍य भागों में प्रसारित भी हुए क्‍योंकि इस डिजिटल युग में सूचना का प्रसार तेजी से होता है; और यत:, वास्‍तविक तथ्‍यों और साक्ष्‍यों की जांच करने के पश्‍चात, आयोग, आश्‍वस्‍त है कि श्री आज़म खान ने अपने विवादास्‍पद भाषणों में धर्म के आधार पर वोट लेने के लिए ऐसी अपील की है जो ''राजनीतिक दलों और अभ्‍यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता'' के 'सामान्‍य आचरण' के भाग-। के पैरा 3 और पैरा 4 के उपबंधों का उल्‍लंघन करने के समान है, जिनमें विनिर्दिष्‍ट किया गया है कि:- (3) ........... मत लेने के लिए जाति अथवा सांप्रदायिक भावनाओं संबंधी कोई अपील नहीं की जाएगी। (4) ..... सभी राजनीतिक दल और अभ्‍यर्थी ऐसे सभी कृत्‍यों से बचेंगे जो विधि के अंतर्गत 'भ्रष्‍ट आचरण' और अपराध है जैसे मतदाताओं को रिश्‍वत देना, मतदाताओं को डराना-धमकाना .... और उन्‍होंने 1995 की सिविल अपील सं.8339 सहित 1992 की सिविल अपील सं. 37 (अभिराम सिंह बनाम सी.डी. कोम्‍मचेन एवं अन्‍य) में दिए गए उच्‍चतम न्‍यायालय के निर्णय की अवज्ञा की है; और यत:, श्री आज़म खान पर लोकसभा के साधारण निर्वाचन, 2014 के दौरान भी उनके कदाचार और उत्‍तेजक भाषणों के लिए उत्‍तर प्रदेश राज्‍य में सार्वजनिक सभाएं, सार्वजनिक जुलूस, सार्वजनिक रैलियां, रोड शोज इत्‍यादि निकालने पर 11 अप्रैल, 2014 से आगे की अवधि के लिए रोक लगाई गई थी तथा आयोग के दिनांक 16 अप्रैल, 2014 के आदेश के तहत उनकी भर्त्‍सना भी की गई थी; और यत:, आयोग ने, एक अन्‍य मामले में, अपने दिनांक 15 अप्रैल, 2019 के आदेश सं. 437/उ.प्र.-हि.प्र./2019 के तहत 7-रामपुर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचन लड़ने वाले अभ्‍यर्थियों में से एक अभ्‍यर्थी के विरूद्ध अपमानजनक वक्‍तव्‍य देने पर श्री आज़म खान की भर्त्‍सना की है और प्रगतिरत निर्वाचनों में उन पर 16 अप्रैल, 2019 को प्रात: 10.00 बजे से 72 घंटे के लिए कोई भी सार्वजनिक सभा, सार्वजनिक जुलूस, सार्वजनिक रैली, रोड शो करने और साक्षात्‍कार देने, मीडिया (इलेक्‍ट्रॉनिक, प्रिंट, सोशल मीडिया) पर सार्वजनिक वक्‍तव्‍य देने पर रोक लगाई थी: और यत:, श्री आज़म खान के विरूद्ध कथित उल्‍लंघनों के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 153-क, 153-ख, 171-छ, 505(1), 505(2) और लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम, 1951 की धारा 125 के अंतर्गत प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराई गई है, जिन पर कानून अपनी कार्रवाई करेगा:- अत: अब, आयोग आदर्श आचार संहिता से संबंधित मामले में उन्‍हें जारी अथवा जारी किए जाने वाले किसी आदेश/नोटिस के संबंध में बिना किसी पूर्वाग्रह के रामपुर में संचालित निर्वाचन अभियान के दौरान उनके द्वारा दिए गए विवादास्‍पद वक्‍तव्‍य की, एतद्द्वारा कड़ी भर्त्‍सना करता है और श्री आज़मखान को भविष्‍य में ऐसा कदाचार न करने की चेतावनी देता है। इसके अतिरिक्‍त, आयोग भारत के संविधान के अनुच्‍छेद 324 के अंतर्गत और इस संबंध में दी गई अन्‍य सभी समर्थकारी शक्तियों के अंतर्गत इन प्रगतिरत निर्वाचनों के संबंध में 1 मई, 2019 (बुधवार) प्रात: 06.00 बजे से 48 घंटे के लिए कोई भी सार्वजनिक सभा, सार्वजनिक जुलूस, सार्वजनिक रैली, रोड शो करने और साक्षात्‍कार देने, मीडिया (इलेक्‍ट्रॉनिक, प्रिन्‍ट, सोशल मीडिया) में सार्वजनिक वक्‍तव्‍य देने के लिए उन पर रोक लगाता है। आदेश से, हस्‍त./- (अनुज जयपुरियार) प्रधान सचिव श्री आज़म खान, समाजवादी पार्टी के नेता, रामपुर, उत्‍तर प्रदेश
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    सं.437/6/1/ईसीआई/अनुदेश/प्रकार्या./एमसीसी/2019 दिनांक: 25 अगस्त, 2019 सेवा में 1. मत्रिमंडल सचिव, भारत सरकार, राष्‍ट्रपति भवन, नई दिल्‍ली। 2. मुख्‍य सचिव, क) छत्तीसगढ़, रायपुर; ख) केरल, तिरूवन्नतपुरम; ग) त्रिपुरा, अगरतला; घ) उत्तर प्रदेश, लखनऊ; 3. मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी, क) छत्तीसगढ़, रायपुर; ख) केरल, तिरूवन्नतपुरम; ग) त्रिपुरा, अगरतला; घ) उत्तर प्रदेश, लखनऊ; विषय: छत्तीसगढ़, केरल, त्रिपुरा एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधान सभाओं में आकस्मिक रिक्तियों को भरने के लिए उप निर्वाचन–आदर्श आचार संहिता के प्रवर्तन पर अनुदेश–तत्‍संबंधी। महोदय, मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि दिनांक 25 अगस्त, 2019 के प्रेस नोट संख्‍या ईसीआई/प्रेनो/77/2019 के द्वारा आयोग ने छत्तीसगढ़, केरल, त्रिपुरा एवं उत्तर प्रदेश राज्‍य में निम्नलिखित विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों से आकस्मिक रिक्तियों को भरने के लिए उप निर्वाचन की अनुसूची की घोषणा की है- राज्य का नाम निर्वाचन क्षेत्र का नाम एवं संख्या छत्तीसगढ़ 88-दन्तेवाड़ा (अ.ज.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र केरल 93-पाला विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र त्रिपुरा 14-बधारघाट (अ.जा.) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र उत्तर प्रदेश 228-हमीरपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र 2. जिस संसदीय/विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र में उप निर्वाचन आयोजित होना है और वह निर्वाचन क्षेत्र जिस जिले (लों) में अवस्थित है, आदर्श आचार संहिता के प्रावधान आयोग के दिनांक 29 जून, 2017 के पत्र सं. 437/6/अनुदेश/2016-सीसीएस तथा 18 जनवरी, 2018 के पत्र सं. 437/6/विविध/ईसीआई/पत्र/प्रकार्या./एमसीसी/2017 (प्रतिलिपियां संलग्‍न) के आंशिक संशोधन की शर्तों के अध्‍यधीन उन क्षेत्रों में तत्‍काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। 3. इसे सभी संबंधितों के ध्‍यान में लाया जाए।
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    सं.437/6/1/ईसीआई/अनुदेश/प्रकार्या./एमसीसी/2019 दिनांक: 25 अगस्‍त, 2019 सेवा में, 1. मत्रिमंडल सचिव, भारत सरकार, राष्‍ट्रपति भवन, नई दिल्‍ली। 2. सचिव, भारत सरकार, कार्यक्रम कार्यान्‍वयन विभाग, सरदार पटेल भवन, नई दिल्‍ली। 3. निम्‍नलिखित सरकारों के मुख्‍य सचिव:- क) छत्‍तीसगढ़, रायपुर ख) केरल, तिरूवनंतपुरम ग) त्रिपुरा, अगरतला घ) उत्‍तर प्रदेश, लखनऊ 4. मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी:- क) छत्‍तीसगढ़, रायपुर ख) केरल, तिरूवनंतपुरम ग) त्रिपुरा, अगरतला घ) उत्‍तर प्रदेश, लखनऊ विषय: उप निर्वाचन – सांसदों/विधायकों के स्‍थानीय क्षेत्र विकास योजना के अधीन निधियाँ जारी करना। महोदय, मुझे, आयोग के दिनांक 25 अगस्‍त, 2019 के प्रेस नोट (आयोग की वेबसाइट http://eci.gov.in पर उपलब्‍ध) जिसमें छत्‍तीसगढ़, केरल, त्रिपुरा, और उत्‍तर प्रदेश की राज्‍य विधान सभाओं में आकस्मिक रिक्तियों को भरने हेतु उप निर्वाचनों हेतु अनुसूची की घोषणा की गई है, को संदर्भित करने और यह कहने का निदेश हुआ है कि उप निर्वाचनों की इस घोषणा के साथ ही राजनैतिक दलों और अभ्‍यर्थियों के मार्ग-निर्देशन हेतु आर्दश आचार संहिता के प्रावधान तत्‍काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। 2. सांसद स्‍थानीय क्षेत्र विकास योजना के अधीन निधियों को जारी करने संबंधी मामलों पर कार्रवाई आयोग के दिनांक 29 जून, 2017 के पत्र संख्‍या 437/6/अनुदेश/2016-सीसीएस के अनुसरण में की जाएगी जो कि उप-निर्वाचन के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू करने के संबंध में है और अन्‍य बातों के साथ-साथ यह उपबंधित करता है कि:- (क) संसद सदस्‍य (राज्‍य सभा सदस्‍यों सहित) स्‍थानीय क्षेत्र विकास योजना निधि के अधीन जिले (जिलों) के किसी भी भाग में जहां पर वह विधान सभा/संसदीय निर्वाचन क्षेत्र स्थित है, जहाँ निर्वाचन चल रहे हैं, में निर्वाचन प्रक्रिया के समाप्‍त होने तक कोई भी नई निधि जारी नहीं की जाएगी। यदि संबंधित निर्वाचन क्षेत्र राज्‍य की राजधानी/महानगरों/नगर निगमों के अधीन आता है तो उपरोक्‍त अनुदेश केवल संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में ही लागू होंगे। इसी प्रकार से, विधान सभा सदस्‍य/विधान परिषद सदस्‍य स्‍थानीय क्षेत्र विकास योजना निधि के अंतर्गत, यदि कोई ऐसी योजना प्रचालन में है तो निर्वाचन प्रक्रिया के समाप्‍त होने तक कोई भी नई निधि जारी नहीं की जाएंगी। (ख) इस पत्र के जारी होने से पूर्व, जिन कार्यों के संबंध में कार्य आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं परंतु वास्‍तव में उन पर कार्य शुरू नहीं किया गया है, ऐसा कोई कार्य शुरू नहीं किया जाएगा। ये कार्य केवल निर्वाचन प्रक्रिया की समाप्ति पर ही शुरू किए जा सकते हैं। हालांकि, यदि कोई कार्य वास्‍तव में शुरू कर दिया गया है तो उसे जारी रखा जा सकता है। (ग) संबंधित अधिकारियों की पूर्ण संतुष्टि के अध्‍यधीन पूरे किए गए कार्य(र्यों) के लिए भुगतान करने पर कोई प्रतिबन्‍ध नहीं होगा। (घ) जहां योजनाओं को स्‍वीकृति दी जा चुकी है एवं निधियाँ उपलब्‍ध करवा दी गई हों या जारी कर दी गई हों और जहां सामग्री प्राप्‍त कर ली गई हो और उसे कार्यस्‍थल पर पहुंचा दिया गया हो तो ऐसी योजनाओं को कार्यक्रम के अनुसार निष्‍पादित किया जा सकता है।
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    श्री गोविंद सिंह राजपूत, परिवहन और राजस्‍व मंत्री, मध्‍य प्रदेश राज्‍य सरकार को आयोग का नोटिस
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    सं. 437/6/1/भा.नि.आ./अनु./प्रकार्या/एमसीसी/2019 दिनांक : 04 जुलाई, 2019 सेवा में, 1. कैबिनेट सचिव, भारत सरकार, राष्‍ट्रपति भवन नई दिल्‍ली 2. क) ओडिशा, भुवेनश्‍वर; और ख) तमिलनाडु, चैन्‍नई सरकार के मुख्‍य सचिव 3. क) ओडिशा, भुवेनश्‍वर; और ख) तमिलनाडु, चैन्‍नई के मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी विषय: आदर्श आचार संहिता की प्रयोज्‍यता –– ओडिशा की राज्‍य विधान सभा के 96-पटकुरा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र और तमिलनाडु के 8-वेल्‍लोर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से साधारण निर्वाचन – तत्‍संबंधी। महोदय, मुझे दिनांक 10 मार्च, 2019 के प्रेस नोट सं.भा.नि.आ./प्रे.नो./23/2019 का संदर्भ देने का निदेश हुआ है, जिसमें आयोग ने लोक सभा और आंध्र प्रदेश, अरूणाचल प्रदेश, ओडिशा एवं सिक्किम की राज्‍य विधान सभाओं के साधारण निर्वाचन तथा कतिपय उप-निर्वाचन आयोजित करने के लिए अनुसूची की घोषणा की थी। 2. ओडिशा के 96-पटकुरा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र के रिटर्निंग अधिकारी ने लोक प्रतिनिधित्‍व अधि‍नियम, 1951 की धारा 52 की उपधारा(1)(ग) के उपबंधों के अंतर्गत निर्वाचन लड़ रहे एक अभ्‍यर्थी, श्री बेद प्रकाश अग्रवाल की मृत्‍यु के कारण मतदान स्‍थगित कर दिया था। 3. दिनांक 19.03.2019 की अधिसूचना सं.464/ईपीएस/2019(2) के तहत तमिलनाडु के 8-वेल्‍लोर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के साधारण निर्वाचन संबंधी अधिसूचना को राष्‍ट्रपति द्वारा आयोग की दिनांक 14-4-2019 की कार्यवाही सं. 464/भा.नि.आ./पत्र/प्रादे./त.ना./एसएस-I/2019 के अनुसरण में निरस्‍त कर दिया गया था। आयोग ने इस संबंध में दिनांक 16 अप्रैल, 2019 को प्रेस नोट सं./ईसीआई/प्रे.नो./49/2019 जारी किया। 4. अब, आयोग ने दिनांक 4 जुलाई, 2019 के अपने प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे.नो./69/2019 और सं. ईसीआई/प्रे.नो./70/2019 के तहत ओडिशा राज्‍य विधान सभा के 96-पटकुरा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र और तमिलनाडु के 8-वेल्‍लोर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से साधारण निर्वाचन आयोजित करने के लिए अनुसूची की घोषणा की है। 5. आदर्श आचार संहिता के उपबंध उस जिले(लों) में तत्‍काल प्रभाव से लागू हो गए हैं, जिनमें निर्वाचन होने वाले विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र या संसदीय निर्वाचन क्षेत्र का पूरा या कोई भाग शामिल है। 6. कृपया इसे सभी संबंधितों की जानकारी में लाएं।
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    सं. 437/गुजरात-लोक सभा/2019 दिनांक : 30 अप्रैल, 2019 आदेश यत:, आयोग ने सूरत (गुजरात) के अमरोली में दिनांक 7 अप्रैल, 2019 को पार्टी कार्यकर्ताओं के समूह और मतदाताओं को सम्‍बोधित करते हुए निम्‍नलिखित कथन ‘’ एक घटना हो चुकी है, यदि एक और घटना होगी तो, हमें उन्‍हें सूरत से बाहर निकालने में देर नहीं लगेगी.............. मैं यहां से राज्‍य के लोगों को आगाह करना चाहता हूं कि लोग यहां के इन लोगों को अच्‍छी तरह से जान लें कि ये लोग हरामजादे हैं।‘’ कहते हुए आदर्श आचार संहिता के पैरा (1) के उप-पैरा (1) और (3) का उल्‍लघंन करने के लिए आपको दिनांक 18.04.2019 का नोटिस सं. 437/गुजरात-लोक-सभा/2019 जारी किया था: और यत:, आयोग को आपके दिनांक 20.04.2019 का उत्‍तर प्राप्‍त हुआ है, जिसमें आपने कहा है कि आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों का आपके द्वारा कोई प्रथम दृष्‍टया या सारवान उल्‍लंघन या विरोध नहीं किया गया है और इसलिए आदर्श आचार संहिता के साधारण संचालन के पैरा(1) के उप-पैरा (1) एवं (3) के प्रावधानों का कोई उल्‍लंघन नहीं हुआ है; और यत:, आयोग ने आपके जवाब पर विचार किया है। शिकायत में संदर्भित भाषण के भाग पर विचार करने पर, आयोग इस बात से संतुष्‍ट है कि इसमें दिए गए कथन में आदर्श आचार संहिता के पैरा (1) के उप-पैरा (1) एवं (3) के प्रावधानों का उल्‍लंघन किया गया है। शिकायत और आपके जवाब पर सम्‍यक विचार करने पर, आयोग ने आपके जवाब को संतोषजनक नहीं पाया है; अत: अब निर्वाचन आयोग आदर्श आचार संहिता के पैरा (1) के उप-पैरा (1) एवं (3) के प्रावधानों का उल्‍लंघन करने और शालीनता की सीमा को लांघते हुए असंयमी और अनुचित भाषा का उपयोग करने के लिए आपकी भर्त्‍सना करता है और यह आशा करता है कि एक जिम्‍मेदार राजनीतिक नेता होने के नाते आप निर्वाचन के दौरान ऐसी अभद्र भाषा का प्रयोग दुबारा नहीं करेंगें । आयोग, भारत के संविधान के अनुच्‍छेद 324 और इस निमित्‍त प्रदत्‍त अन्‍य सभी समर्थकारी शक्तियों के अधीन, श्री जीतूभाई वघानी, राज्‍य अध्‍यक्ष, भारतीय जनता पार्टी, गुजरात पर 02 मई 2019 (बृहस्‍पतिवार) से 05 मई, 2019 (रविवार) 4 बजे अपराह्न तक वर्तमान निर्वाचनों के संबंध में देश के किसी भी भाग में किसी भी सार्वजनिक बैठक, सार्वजनिक जुलूस, जन रैली, रोड शो और साक्षात्‍कारों, मीडिया(इलेक्‍ट्रॉनिक, प्रिन्‍ट, सोशल मीडिया इत्‍यादि) में सार्वजनिक बयान देने के लिए भी रोक लगाता है। आदेश से, (वरिन्‍दर कुमार) प्रधान सचिव सेवा में, श्री जीतूभाई वघानी, गुजरात राज्‍य अध्‍यक्ष, भारतीय जनता पार्टी, गुजरात (मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी, गुजरात के द्वारा)
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    सं.437/मध्यप्रदेश-लो.स./2019(शिकायत) दिनांक: 10 मई, 2019 नोटिस यत:, आयोग ने दिनांक 10-3-2019 के प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रेस नोट/2019 के त‍हत लोकसभा हेतु साधारण निर्वाचन, 2019 आयोजित करने के लिए कार्यक्रम की घोषणा की है और उक्‍त तारीख से राजनैतिक दलों एवं अभ्‍यर्थियों के लिए आदर्श आचार संहिता के उपबंध लागू हो गए हैं; और 2. यत:, आयोग में श्री नीरज, सदस्‍य, निर्वाचन आयोग समिति, भारतीय जनता पार्टी से दिनांक 30-4-2019 को एक शिकायत प्राप्‍त की गई है जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि श्री नवजोत सिंह सिद्धू, इंडियन नेशनल काँग्रेस के स्‍टार प्रचारक ने दिनांक 29.04.2019 को भोपाल, मध्य प्रदेश में जन सभाओं को संबांधित करते हुए प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ निम्‍नलिखित आपत्तिजनक कथन कहे हैं: "….हिन्दुस्तान के सब सरकारी बैंकों के पैसे चुरा कर मोदी साहब गरीबों को बोलते हैं, अमीरों को बोलते हैं, भागते रहो, भागते रहो....." "….तुमने जम कर खाया और तुमने अंबानी को ठोक के खिलाया, खिलाया की नहीं खिलाया, ये तुमने रू. 30,000/- करोड़ रूपये की घूस ली की नहीं राफेल में, और उड़ना था राफेल और उड़ा दी फाइल......." "….आए थे तुम 2014 में गंगा के लाल बन के जब जाओगे तुम 2019 में राफेल के दलाल बन के......." "….क्या बात करते हो नरेन्द्र मोदी तुम। तुमसे बड़ा राष्ट्र द्रोही कोई देखा नहीं......." "…. जवानों की लाशों पर राजनीति होती है। देश को बांटने का राजनीति होती है......."; और 3. यत:, शिकायत को आयोग के दिनांक 02.05.2019 के पत्र के तहत मुख्य निर्वाचन अधिकरी, मध्य प्रदेश को उनकी रिपोर्ट के लिए भेजा गया था; और 4. यत:, मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश ने दिनांक 02-05-2019 एवं दिनांक 09-05-2019 के अपने पत्र के तहत श्री नवजोत सिंह सिद्धू, द्वारा दिनांक 29-05-2019 को भोपाल में आयोजित जनसभाओं में दिए गए उनके भाषण की ट्रांस्क्रिप्‍ट सहित अपनी टिप्पणी भेजी है; और 5. यत:, राजनैतिक दलों एवं अभ्‍यर्थियों के मार्ग-दर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के 'साधारण आचरण' के भाग 1 का पैरा (2), में अन्‍य बातों के साथ-साथ निम्‍नानुसार उपबंध है:- "अन्‍य राजनैतिक दलों की जब आलोचना की जाए तो इसे उनकी नीतियों एवं कार्यक्रम, विगत रिकार्ड एवं कार्य तक ही सीमित रखा जाना चाहिए। दल एवं अभ्‍यर्थी, अन्‍य दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक कार्यकलापों से संबंध नहीं रखने वाले निजी जीवन के सभी पहलुओं की आलोचना से परहेज करेगें। असत्‍यापित आरोपों या मिथ्‍या आरोपों के आधार पर अन्‍य दलों या उनके कार्यकर्ताओं की आलोचना नहीं की जाएगी।" 6. यत:, आयोग का दृष्टिकोण है कि श्री नवजोत सिंह सिद्धू ने ऊपर यथा उल्लिखित आदर्श आचार के सामान्‍य आचरण के भाग (।) के भाग (2) के उपर्युक्त उपबंधों का प्रथम दष्‍टया उल्‍लंघन किया है; और 7. अब, इसीलिए, आयोग ने उपलब्‍ध सामग्री और आदर्श आचार संहिता के मौजूदा उपबंधों एवं इस मामले से संबंधित अनुदेशों पर विचार करने के पश्‍चात श्री नवजोत सिंह सिद्धू, स्‍टार प्रचारक, इंडियन नेशनल काँग्रेस को यह नोटिस मिलने के बाद 48 घण्टे के अन्दर इस बारे में अपना स्‍पष्‍टीकरण, यदि कोई हो, उपलब्‍ध कराने के लिए एक अवसर देने का निर्णय लिया है जिसमें विफल रहने पर आयोग उन्‍हें आगे का संदर्भ दिए बिना निर्णय लेगा। आदेश से, (मलय मलिक) सचिव सेवा में, श्रीनवजोत सिंह सिद्धू, स्टार प्रचारक, इंडियन नेशनल काँग्रेस (मुख्य निर्वाचन अधिकारी, पंजाब के माध्यम से) 1. कोठी सं. 42, सैक्टर-02, चण्डीगढ़। 2. इंडियन नेशनल काँग्रेस 24–अकबर रोड नई दिल्‍ली-110001
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    सं.437/ईएस-1/बिहार-लो.स./2019 दिनांक 12 मई, 2019 आदेश यत:, आयोग ने दिनांक 10/03/2019 के प्रेस नोट संख्‍या ईसीआई/प्रेनो/2019 के तहत लोक सभा के साधारण निर्वाचन, 2019 आयोजित करवाने के लिए अनुसूची की घोषणा की है और उसी तारीख से ही राजनैतिक दलों और अभ्‍यर्थियों के लिए आदर्श आचार संहिता के उपबंध लागू हो गए हैं; और यत:, मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी, बिहार ने दिनांक 25 अप्रैल, 2019 के अपने पत्र के तहत बिहार में जी0 डी0कालेज, बेगुसराय में, दिनांक 24 अप्रैल, 2019 को श्री गिरिराज सिंह द्वारा दिए गए भाषण की एक वीडियो क्लिप की प्रति अग्रेषित की, जिसमें उन्‍होंने निम्‍नलिखित वक्‍तव्‍य दिया था:- ‘’…………….. जो वन्‍दे मातरम् न‍हीं कह सकता, जो भारत की मातृभूमि को नमन न‍हीं कर सकता, अरे गिरिराज के तो बाबा –दादा सिमरिया घाट में गंगा के किनारे मरे उसी भूमि पर कब्र भी नहीं बनाया, तुम्‍हें तो तीन हाथ की जगह भी चाहिए अगर तुम नहीं कर पाओगे तो देश कभी माफ न‍हीं करेगी...........’’ ; और यत:, य‍ह भी सूचित किया गया है कि लोक प्रति‍निधित्‍व अधिनियम, 1951 की धारा 125, 123 (3क) और भारतीय दंड संहिता अधिनियम की धारा 153क, 153 ख, 295 क, 171 ग, 188, 298 और 505 (ii) के अधीन इन वक्‍तव्‍यों के लिए बेगुसराय नगर थाना में एफ आई आर दर्ज करवाई गई है; और यत:, आयोग ने उपर्युक्‍त उद्धत वक्‍तव्‍य देने के लिए आदर्श आचार संहिता और लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के उल्‍लंघन हेतु 24-बेगुसराय संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से श्री गिरिराज सिंह, भारतीय जनता पार्टी के नेता और निर्वाचन लड़ने वाले अभ्‍यर्थ‍ी को दि‍नांक 29 अप्रैल, 2019 को कारण बताओ नोटिस सं.437/ईएस-1/बिहार-लो.स./2019 जारी कि‍या है; यत:, आयोग के ऊपर उल्‍ल‍िखित नोटिस के जवाब में श्री गिरि‍राज सिंह से दिनांक 30.04.2019 को एक उत्‍तर प्राप्‍त हुआ है; और यत:, आयोग ने श्री गिरिराज सिंह के दिनांक 30.04.2019 के पूर्वोक्‍त उत्‍तर में दी गई विषय-वस्‍तु और प्रकथनों को ध्‍यानपूर्वक पढ़ा, जिसमें उन्‍होंने अन्‍य बातों के साथ-साथ विवादास्‍पद कथन देना स्‍वीकार किया है; और यत:, दिनांक 30.04.2019 के उपर्युक्‍त उल्‍ल‍िखित उत्‍तर में यह बताया गया है कि, ‘’याचिकाकर्ता गिरिराज सिंह ने लोक प्रतिनिधि‍त्‍व अधिनियम के किसी भी प्रावधान का उल्‍लंघन नहीं किया है और न ही उन्‍होंने किसी भी जाति या धर्म के खिलाफ ऐसा किसी भी प्रकार का कथन कहा है’’ ; और यत:, इसके अतिरिक्‍त उन्‍होंने यह भी कहा है कि ‘’ पूरे कथन को पढ़ने के पश्‍चात ऐसा कुछ नहीं लगता है कि याचिकाकर्ता का इरादा किसी धर्म या जाति के प्रति द्वेष करने का है या था ’’, और यत: आयोग ने उसके विवादास्‍पद भाषण की वीडियो रिकॉर्डिंग को एक बार फिर देखा है और यह आश्‍वस्‍त है कि उन्‍होंने एक आपत्‍त‍िजनक भाषण दिया है जिसकी भाषा एवंम भाव ऐसा है जिससे वर्तमान मतभेद बढ़ेंगें या विभि‍न्‍न धार्मिक समुदायों के बीच द्वेष पैदा होगा और इस प्रकार से यह आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों का उल्‍लंघन है; और यत: आयोग ने यह पाया है कि, श्री गिरिराज सिंह को निर्वाचनों का ध्रुवीकरण करने की संभावना एवं प्रकृति वाले बयान देने से स्‍वयं को रोकना चाहिए था, जो केवल उसी निर्वाचन क्षेत्र तक सीमित नहीं होता है जहाँ बयान दिया गया है, अपितु इस डि‍जिटल युग में सूचना का तेजी से प्रसार होने की वजह से यह अन्‍य क्षेत्रों तक भी पहुंच जाता है; और यत:, आयोग ने, इस मामले पर विचार-विमर्श करते हुए, ऐसी सार्वजनिक बयानबाजी पर अपनी चिंता व्‍यक्‍त की है, जो निर्वाचन प्रक्रिया को दूषि‍त करती है; और यत:, आयोग का यह भी विचार है कि श्री गिरिराज सिंह ने अपने विवादास्‍पद भाषण में धार्मिक आधार पर बयानबाजी की है जो ‘’ राजनैतिक दलों और अभ्‍यर्थ‍ियों के मार्ग‍दर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता ’’ के ‘साधारण संचालन’ के भाग I के पैरा 3 और पैरा 4 के प्रावधानों के उल्‍लंघन के समान है जिसमें यह विनिर्द‍िष्‍ट है कि:- (3) मतों को हासिल करने के लिए जाति‍ या सांप्रदायि‍क भावनाओं की कोई अपील नहीं की जाएगी........................ (4) सभी दल और अभ्‍यर्थी ईमानदारी से ऐसे सभी कार्यकलापों से बचेंगे जो निर्वाचन विधि के अधीन “भ्रष्‍ट आचरण” और अपराध होते हैं जैसे कि मतदाताओं को रिश्‍वत देना………………, मतदाताओं को डराना-धमकाना और यह की उन्‍होंने वर्ष 1995 की सिविल अपील सं.8339 के साथ-साथ वर्ष 1992 की सिविल अपील सं.37 (अभिराम सिंह बनाम सी.डी.कोम्‍माचेन एवं अन्‍य) में माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा दिए गए निर्णय की अवमानना की है। अत: अब, आयोग उन्‍हें एमसीसी के उल्‍लंघनों से संबंधित मामले में जारी किए गए या जारी किए जाने वाले कि‍सी भी आदेश/नोटिस के प्रति पूर्वाग्रह के बिना, बेगुसराय में निर्वाचन प्रचार के दौरान उनके द्वारा दिए गए विवादास्‍पद बयानों की निंदा करता है और ऊपर उल्‍ल‍िखित कदाचार के लिए 24-बेगुसराय संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से श्री गिरिराज सिंह, नेता, भारतीय जनता पार्टी और निर्वाचन लड़ने वाले अभ्‍यर्थी की भर्त्‍सना करता है। आयोग आदर्श आचार संहिता की वैध-अवधि‍ के दौरान श्री गिरि‍राज सिंह को अपने सार्वजनिक बयानों में सावधान रहने के लिए भी सख्‍त चेतावनी देता है।
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    नोटिस सं.437/मध्‍य प्रदेश-लोकसभा/2019(शिकायतें) दिनांक : 18 मई, 2019 यत:, आयोग ने दिनांक 10.03.2019 के प्रेस नोट सं. ईसीआई/पीएन/2019 के तहत लोकसभा के साधारण निर्वाचन आयोजित करने के लिए कार्यक्रम की घोषणा कर दी है और राजनैतिक दलों तथा अभ्‍यर्थियों के लिए आदर्श आचार संहिता के प्रावधान उसी तारीख से प्रवृत्‍त हो गए हैं; तथा 2. यत:, श्री नीरज, सदस्‍य, निर्वाचन आयोग समिति, भारतीय जनता पार्टी से आयोग को दिनांक 03.05.2019 की एक शिकायत प्राप्‍त हुई थी जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि इंडियन नेशनल काँग्रेस मध्‍य प्रदेश नामत: खंडवा, बुरहानपुर तथा खारगौन जिलों में ‘’न्‍याय’’ योजना संबंधी नामाकंन पैम्फलैट/प्ररूप के वितरण में अवैध रूप से संलिप्‍त थी। (पैम्‍फलेट प्रति संलग्‍न हैं); तथा 3. यत:, मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी, मध्‍य प्रदेश से दिनांक 07.05.2019 के पत्र के तहत एक रिपोर्ट मंगाई गई थी और मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी ने दिनांक 07.05.2019 के पत्र के तहत रिपोर्ट प्रस्‍तुत कर दी; तथा 4. यत:, जांच में यह पाया गया है कि उक्‍त पैम्‍फलेट/प्ररूपों, जिन पर ‘हाथ’ के प्रतीक के साथ श्री राहुल गांधी और अरूण सुभाष चन्‍द्र यादव की फोटो हैं, को खंडवा जिले में किसी श्री सुधान सिंह ठाकुर द्वारा भरा और वितरित किया जा रहा था और श्री सुधान सिंह ठाकुर के विरूद्ध दिनांक 05.05.2019 को प्रथम सूचना रिपोर्ट पहले ही दर्ज की जा चुकी थी जिसमें यह उल्‍लेख किया गया था कि यह कृत्‍य दिनांक 02.05.2019 को किया गया था; तथा 5. यत:, राजनीतिक दलों और अभ्‍यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के ‘’सामान्‍य आचरण’’ के भाग I के पैरा (4) में अन्‍य बातों के साथ-साथ निम्‍नलिखित प्रावधान हैं:- ‘’सभी दल और अभ्‍यर्थी ऐसी सभी गतिविधियों से निष्‍ठापूर्वक परहेज करेंगे जो निर्वाचन विधि के अधीन भ्रष्‍ट आचरण और अपराध होते हैं जैसे कि मतदाताओं को रिश्‍वत देना, मतदाताओं को डराना-धमकाना..............’’; और 6. यत:, प्रथम दृष्‍टया, इसमें प्रदर्शित होता है कि उपर्युक्‍त कृत्‍य 28-खंडवा संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचन लड रहे इंडियन नेशनल कांग्रेस के, अभ्‍यर्थी श्री अरूण सुभाष चन्‍द्र यादव द्वारा अथवा उनकी ओर से और उनकी जानकारी में किया गया है; तथा 7. यत:, निर्वाचन लड़ने वाले अभ्‍यर्थी श्री अरूण सुभाष चन्‍द्र यादव, द्वारा अथवा उनकी ओर से तथा उनकी जानकारी में किया गया उपर्युक्‍त कृत्‍य आदर्श आचार संहिता के समान आचरण के भाग (1) के पैरा(4) के उपबंधों का उल्‍लंघन है, जैसा कि ऊपर उद्धृत है। 8. अत:, अब आयोग ने इस मामले में उपलब्‍ध सामग्री और आदर्श आचार संहिता के मौजूदा प्रावधानों तथा इस विषय से संबधित अनुदेशों पर विचार करने के बाद खंडवा संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से इंडियन नेशनल कांग्रेस की ओर से निर्वाचन लड़ रहे अभ्‍यर्थी श्री अरूण सुभाष चन्‍द्र यादव को इस नोटिस की प्राप्ति के 24 घंटे के भीतर इस मामले में अपना स्‍पष्‍टीकरण, यदि कोई हो, प्रस्‍तुत करने का मौका देने का निर्णय लिया है, स्‍पष्‍टीकरण प्रस्‍तुत न करने पर आयोग उन्‍हें और संदर्भ दिए बगैर निर्णय लेगा। आदेश से, (एस.बी.जोशी) सचिव प्रति:- श्री अरूण सुभाष चन्‍द्र यादव, खंडवा संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से इंडियन नेशनल कांग्रेस के निर्वाचन लड़ने वाले अभ्‍यर्थी (मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी, मध्‍य प्रदेश के माध्‍यम से)
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    फा.सं. 576/विविध/2019/एसडीआर 15 मई, 2019 आदेश यतः, आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल राज्य में लोक सभा के साधारण निर्वाचनों के सातवें चरण के लिए 22 अप्रैल, 2019 को अधिसूचना (सं.464/ईपीएस/2019(7)) जारी की गई और इस चरण के सभी नौ संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों (पीसी) अर्थात, पीसी-16 दमदम, पीसी-17 बारासात, पीसी-18 बसीरहात, पीसी-19 जयनगर (अ.जा.), पीसी-20 मथुरापुर (अ.जा.), पीसी-21 डायमण्ड हारबर, पीसी-22 जादवपुर, पीसी-23 कोलकाता दक्षिण, और पीसी-24 कोलकाता उत्तर में निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों की सूचियों को 02 मई, 2019 को पहले ही अंतिम रूप दिया जा चुका है और इन निर्वाचन क्षेत्रों में निर्वाचन 19 मई, 2019 (रविवार) को आयोजित किया जाना है; और यतः, आयोग की जानकारी में यह लाया गया है कि लोक सभा के चल रहे साधारण निर्वाचनों के दौरान पश्चिम बंगाल राज्य में राजनीतिक अभियानों/जुलूसों के दौरान निरन्तर गड़बड़ी और हिंसा की घटनाएं हो रही हैं; और यतः, पश्चिम बंगाल के प्रभारी उप निर्वाचन आयुक्त ने 13 मई, 2019 को पश्चिम बंगाल राज्य का दौरा किया और सभी नौ संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में लोक सभा के निर्वाचनों की तैयारी का जायजा लिया जिनमें 19 मई, 2019 (रविवार) को मतदान होना है और आयोग को यह रिपोर्ट प्रस्तुत की कि: "प्रक्षेकों के साथ स्थिति की समीक्षा करते समय स्पष्ट रूप से यह सामने आया कि मतदान अधिकारियों के प्रशिक्षण सहित सेवा एवं साज-समान की व्यवस्था इत्यादि भारत निर्वाचन आयोग की अपेक्षाओं के अनुरूप है, किन्तु, जहां तक अभियान के लिए सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर उपलब्ध कराने एवं मतदाताओं को बिना किसी डर और भय के मतदान का वातावरण उपलब्ध कराने का संबंध है जिला प्रशासन और जिला पुलिस इसमें सहयोग नहीं करता है और इसका विरोध करता है। प्रेक्षकों ने यह उल्लेख किया कि देखने में तो पूरी व्यवस्था सही लगती है लेकिन लोगों के साथ मिलकर बात करने पर वे बताते हैं कि चारों ओर भय का वातावरण है। उन्होंने बताया कि एआईटीसी के वरिष्ठ नेता धमकी भरे स्वर में ये कहते हैं कि "केन्द्रीय बल तो निर्वाचन के बाद चले जाएंगे लेकिन हम तो यहीं रहेंगे" जिससे अधिकारी और मतदाता भी बहुत डरे हुए हैं।" यतः, आयोग ने पश्चिम बंगाल में निर्वाचनों की देखरेख, निदेशन और नियंत्रण में आयोग को सहायता करने के लिए विशेष प्रेक्षकों अर्थात श्री अजय नायक (भा.प्र.से. सेवानिवृत्त) और विशेष पुलिस प्रेक्षक श्री विवेक दुबे (भा.पु.से. सेवानिवृत्त) को प्रतिनियुक्त किया है और दोनों विशेष प्रेक्षकों ने अपनी दिनांक 15 मई, 2019 की रिपोर्ट में राजनीतिक अभियान के दौरान हिंसा की अन्य घटनाओं की सूचना दी, जिनमें 14 मई, 2019 को हुई हिंसक घटनाओं के आधार पर मामले दर्ज किए गए। इन मामलों की जांच के दौरान, लगभग सौ व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए गए इन व्यक्तियों में से 58 व्यक्तियों को दो मामलों में गिरफ्तार किया गया; और यतः, पिछले 24 घंटों में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि आयोग से मिले हैं और उन्होंने कानून एवं व्यवस्था के वर्तमान हालात पर अपनी चिन्ता प्रकट की; और यतः, अभियान से जुड़ी इन हिसंक घटनाओं से मतदान वाले क्षेत्रों में भय और घृणा का माहौल पैदा हो रहा है जिससे राज्य में समस्त निर्वाचन प्रक्रिया पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है; और यतः, इन नौ संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित सभी राजीनितक दल और अभ्यर्थी पहले से ही उन संबंधित मतदान क्षेत्रों में 02 मई, 2019 से प्रचार कर रहे हैं और यहां मतदान 19 मई, 2019 को होगा; और यतः, इन रिपोर्टों और जानकारियों को देखते हुए, आयोग आम निर्वाचकों की सुरक्षा के प्रति चिंतित है जिन्हें स्वतन्त्र, भयमुक्त और अनुकूल वातावरण में सभी राजनैतिक दलों के अभ्यर्थियों के निर्वाचन अभियान में उन्हें सुनने और जानने का अधिकार है; यतः, आयोग को सुरक्षित अभियान के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए पश्चिम बंगाल में केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती करके बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ा है; और यतः, आयोग ने भारत के संविधान और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के संगत उपबंधों को ध्यान में रखकर विशेष प्रेक्षकों और उप-निर्वाचन आयुक्तों की उपर्युक्त रिपोर्टों पर विचार किया है; और यतः, माननीय उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने केशवनाडा भारती के मामले में तथा ऐसे ही अनेक निर्णयों में यह कहा है कि लोकतंत्र भारत के सविधान का मूलभूत ढांचा है; और यतः, उच्चतम न्यायालय ने मोहिन्द्र सिंह गिल और अन्य बनाम मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य (1978 एआईआर 851) के प्रकरण में भी यह कहा है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वाचन, देश की सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं का मूल आधार है; और यतः, संविधान के अनुच्छेद 324 में संसद और राज्य विधान सभाओं तथा भारत के राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति के पदों के स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वाचन आयोजित करने की जिम्मेदारी भारत निर्वाचन आयोग में निहित है; और यतः, स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वाचनों के संचालन के लिए यह अनिवार्य है कि निर्वाचन अवधि के दौरान स्वतंत्र एवं शांतिपूर्ण निर्वाचनों के अनुकूल समुचित कानून एवं व्यवस्था बनी रहे; और यतः, माननीय उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने भारत निर्वाचन आयोग बनाम हरियाणा राज्य (एआईआर 1984 एससी 1406) के मामले में यह कहा है कि मतदान वाले क्षेत्रों में कानून एवं व्यवस्था के संबंध में राज्य सरकार के बजाय भारत निर्वाचन आयोग का निर्णय मान्य होना चाहिए और यहां तक कि उच्च न्यायालय को भी इस प्रकार के मामलों में अपना दृष्टिकोण और मत नहीं देना चाहिए; और यतः, माननीय उच्चतम न्यायालय की अन्य संविधान पीठ ने एम.एस. गिल बनाम मुख्य निर्वाचन आयुक्त के मामले में यह कहा है कि संविधान का अनुच्छेद 324 ऐसे अस्पष्ट क्षेत्रों में निर्वाचन आयोग के लिए शक्तियों का भण्डार है जहां निर्वाचनों के संचालन में निर्वाचन आयोग से टकराव करने वाली संस्था से निपटने के लिए बनाए गए कानून में कोई प्रावधान नहीं है या "अपर्याप्त प्रावधान हैं"; और यतः, आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के उपबंधों को नोट किया है, जिसके तहत अन्य बातों के साथ-साथ, मतदान क्षेत्रों में मतदान की समाप्ति के लिए नियत समय पर समाप्त होने वाले अड़तालीस घंटों की अवधि के दौरान निर्वाचन के सिलसिले में कोई भी जनसभा करने अथवा जुलूस निकालने, निर्वाचन प्रचार करने, उसमें भाग लेने अथवा उसमें भाषण देने पर रोक लगाई गई है; और यतः, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 30 (घ) में यह विनिर्दिष्ट है कि, "वह तारीख या वे तारीखें जिसको या जिनको, यदि आवश्यक हो तो, मतदान होगा और जो तारीख या जिन तारीखों में से पहली तारीख अभ्यर्थिताएं वापस लेने के लिए नियत अंतिम तारीख के पश्चात (चौदहवें दिन) से पूर्वतर न होने वाली तारीख होगी" और इन नौ संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अभ्यर्थिता वापस लेने की तारीख 02 मई, 2019 थी; और यतः, उपर्युक्त उपबंध पश्चिम बंगाल में इन नौ संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में इस समय व्याप्त परिस्थितियों, जैसा उपर्युक्त उल्लिखित विशेष प्रक्षेकों और उप निर्वाचन आयुक्त ने रिपोर्ट दी है और जिसका उन्होंने ऊपर उल्लेख किया है, से निपटने के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है; और यतः उपरोक्त एम.एस. गिल बनाम भारत निर्वाचन आयोग के मामले के पैरा 113 में माननीय उच्चतम न्यायालय ने यह कहा है कि: "जहां ये (विधियां) विद्यमान नहीं है, और लेकिन किसी स्थिति से निपटना है, तो मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हाथ जोड़कर ईश्वर से प्रार्थना नहीं करनी है कि ईश्वर उसे अपने कार्य और ड्यूटी का निर्वहन करने के लिए दैवीय शक्ति प्रदान करे अथवा उस स्थिति से निपटने की शक्तियां प्रदान करने के लिए किसी बाहरी प्राधिकारी की सहायता नहीं लेनी है।" यतः, आयोग का यह दृढ़ विचार है कि इन नौ संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में इस समय व्याप्त स्थिति को और खराब होने से रोकने और कानून एवं व्यवस्था की ऐसी स्थिति जो इन नौ संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण निर्वाचन करवाने में सहायक हो, तैयार करने के लिए कुछ विशेष उपाय करने की तत्काल आवश्यकता है; और अतः, अब भारत निर्वाचन आयोग, संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत प्रदत्त अपनी शक्तियों, और इस सबंध में प्रदत्त अन्य सभी सक्षमकारी शक्तियों का प्रयोग करते हुए और लोकतंत्र को सुदृढ़ करने के व्यापक हित में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण निर्वाचनों का संचालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एतद्द्वारा निदेश देता है कि कोई भी व्यक्ति इन नौ संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों, अर्थात्, पीसी-16 दमदम, पीसी-17 बारासात, पीसी-18 बसीरहात, पीसी-19 जयनगर (अ.जा.), पीसी-20 मथुरापुर (अ.जा.), पीसी-21 डायमण्ड हारबर, पीसी-22 जादवपुर, पीसी-23 कोलकाता दक्षिण, और पीसी-24 कोलकाता उत्तर के मतदान क्षेत्रों के भीतर 16 मई, 2019 को रात्रि 10.00 बजे से 19 मई, 2019 को निर्वाचनों के समापन होने तक (क) निर्वाचन के सिलसिले में कोई जनसभा नहीं करेगा अथवा जुलूस नहीं निकालेगा, उनमें भाग नहीं लेगा अथवा उसे संबोधित नहीं करेगा; अथवा (ख) सिनेमा, टेलीविजन अथवा इसी प्रकार के अन्य उपकरणों के माध्यम से लोगों को कोई भी निर्वाचन सामग्री प्रदर्शित नहीं करेगा; अथवा (ग) इन निर्वाचनों में लोगों को आकर्षित करने के लिए संगीत का कोई कार्यक्रम अथवा कोई नाटक मंचन, प्रदर्शन अथवा अन्य कोई मनोरंजन अथवा हास्यविनोद के कार्यक्रम का आयोजन करके अथवा इसकी व्यवस्था करके लोगों में किसी निर्वाचन सामग्री का प्रचार नहीं करेगा; और किसी होटल, भोजनालय, मधुशाला, दुकान अथवा किसी अन्य स्थान, चाहे वह सार्वजनिक हो अथवा निजी, में कोई स्प्रिटयुक्त, खमीर से बनी मदिरा अथवा मादक पदार्थ अथवा इसी प्रकार के किसी अन्य पदार्थ की बिक्री नहीं करेगा, उसे नहीं परोसेगा अथवा उसका वितरण नहीं करेगा। हस्ता./- (सुशील चन्द्रा) निर्वाचन आयुक्त हस्ता./- (सुनील अरोड़ा) मुख्य निर्वाचन आयुक्त हस्ता./- (अशोक लवासा) निर्वाचन आयुक्त
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    सं.437/6/अनुदेश/भा.नि.आ./प्रकार्या./आ आ सं./2019 दिनांक : 26 मई, 2019 मंत्रिमंडल सचिव, * भारत सरकार, राष्‍ट्रपति भवन, नई दिल्‍ली सभी राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों के मुख्‍य सचिव सभी राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों के मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी विषय: लोक सभा के साधारण निर्वाचन, 2019 और आन्‍ध्र प्रदेश, अरूणाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम राज्‍यों की विधान सभाओं के साधारण निर्वाचन तथा कतिपय उप-निर्वाचन – आदर्श आचार संहिता हटाने के संबंध में। महोदय/महोदया, मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि आदर्श आचार संहिता के उपबंध निर्वाचन आयोग द्वारा निर्वाचन अनुसूची की घोषणा की तारीख से लागू होते हैं और ये निर्वाचन प्रक्रिया संपूर्ण होने तक प्रचालन में रहते हैं। अब, लोकसभा 2019 के साधारण निर्वाचनों और आन्‍ध्र प्रदेश, अरूणाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम राज्‍यों की विधान सभाओं के साधारण निर्वाचनों तथा कतिपय उप-निर्वाचनों के परिणाम घोषित किए जा चुके हैं, इसलिए आदर्श आचार संहिता तत्‍काल प्रभाव से समाप्‍त की जाती है। कृपया इसे सभी संबंधितों की जानकारी में लाया जाए।

ईसीआई मुख्य वेबसाइट


eci-logo.pngभारत निर्वाचन आयोग एक स्‍वायत्‍त संवैधानिक प्राधिकरण है जो भारत में निर्वाचन प्रक्रियाओं के संचालन के लिए उत्‍तरदायी है। यह निकाय भारत में लोक सभा, राज्‍य सभा, राज्‍य विधान सभाओं और देश में राष्‍ट्रपति एवं उप-राष्‍ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों का संचालन करता है। निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्‍छेद 324 और बाद में अधिनियमित लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम के प्राधिकार के तहत कार्य करता है। 

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