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    सं. 437/दिल्ली-वि.स./2020-एनएस-II दिनांकः 25 जनवरी, 2020 आदेश यतः, आयोग ने दिनांक 6 जनवरी, 2020 को अपने प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे.नो./4/2020 के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली विधान सभा के साधारण निर्वाचन आयोजित करने के लिए अनुसूची की घोषणा कर दी थी और राजनीतिक दलों और अभ्यर्थियों के लिए आदर्श आचार संहिता के प्रावधान उक्त दिनांक से तत्काल प्रभाव से लागू हो गए; और 2. यतः, श्री कपिल मिश्रा, 18-मॉडल टॉउन विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से पूर्वोक्त साधारण निर्वाचन में एक अभ्यर्थी ने, दिनांक 22 एवं 23 जनवरी, 2020 को अपने ट्विटर हैंडल @kapil Mishra_IND पर निम्नलिखित ट्विट पोस्ट किए : “दिल्ली में छोटे-छोटे पाकिस्तान बने”, “शाहीन बाग में पाक की एंट्री”, “भारत बनाम पाकिस्तान 8 फरवरी दिल्ली-8 फरवरी को दिल्ली की सड़कों पर हिंदुस्तान और पाकिस्तान मुकाबला होगा”, “आप और कांग्रेस ने शाहीन बाग़ जैसे मिनी पाकिस्तान खड़े किये हैं जवाब में 8 फरवरी को हिंदुस्तान खड़ा होगा जब जब देशद्रोही भारत में पाकिस्तान खड़ा करेंगे तब तब देशभक्तों का हिंदुस्तान खड़ा होगा” 3. यतः, 18-मॉडल टाउन विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र के रिटर्निंग अधिकारी ने श्री कपिल मिश्रा को दिनांक 23 जनवरी, 2020 को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए यह स्पष्ट करने को कहा कि क्यों न उनपर कानून एवं आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाए; और 4. यतः, श्री कपिल मिश्रा ने दिनांक 24 जनवरी, 2020 को रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष कारण बताओ नोटिस का उत्तर प्रस्तुत किया; और 5. यतः, श्री कपिल मिश्रा द्वारा दिए गए उत्तर में प्रस्तुतियों पर विचार करने और उत्तर असंतोषजनक पाए जाने पर, रिटर्निंग अधिकारी ने दिनांक 24 जनवरी को पुलिस प्राधिकारियों के समक्ष एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें श्री कपिल मिश्रा के खिलाफ कानून एवं आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की माँग की गई; और 6. यतः, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, ने मामले को आगे के निदेशों के लिए निर्वाचन आयोग को भेज दिया; और 7. यतः, आयोग ने ध्यानपूर्वक सभी दस्तावेजों और मामले के सभी प्रासंगिक तथ्यों पर विचार किया है; और 8. यतः, आयोग का विचार है कि सवालों में ट्विट आदर्श आचार संहिता के भाग-I के निम्नलिखित प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं : (1) किसी दल या अभ्यर्थी को ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए, जो विभिन्न जातियों और धार्मिक या भाषायी समुदायों के बीच विद्यमान मतभेदों को बढ़ाये या घृणा की भावना उत्पन्न करे या तनाव पैदा करे। (2) मत प्राप्त करने के लिए जातीय या साम्प्रदायिक भावनाओं की कोई अपील नहीं की जानी चाहिए। (3) सभी दलों और अभ्यर्थियों को ऐसे सभी कार्यों से ईमानदारीपूर्वक बचना चाहिए, जो निर्वाचन विधि के अधीन “भ्रष्ट आचरण” और अपराध हैं। 9. अब, इसलिए आयोग ने श्री कपिल मिश्रा द्वारा दिनांक 22 और 23 जनवरी, 2020 को पूर्वोक्त ट्विटों के माध्यम से दिए गए बयानों की निंदा की। आयोग ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत और इस ओर सभी शक्तियों द्वारा सक्षम होने पर श्री कपिल मिश्रा को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली विधान सभी के चल रहे साधारण निर्वाचन, 2020 के संबंध में दिनांक 25 जनवरी, 2020 (शनिवार) को शाम 5:00 बजे से शुरू हो रहे 48 घंटों की समयावधि के लिए किसी भी प्रकार की सार्वजनिक सभाओं, सार्वजनिक जुलूसों, सार्वजनिक रैलियों, रोड शोज़ और साक्षात्कारों, मीडिया (इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट, सोशल मीडिया) में सार्वजनिक भाषणों के आयोजन पर रोक लगा दी है। आदेश से, ह/- (अजय कुमार) सचिव श्री कपिल मिश्रा, 18-मॉडल टाउन विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र, बी3/61, बी3-ब्लॉक, यमुना विहार, दिल्ली से निर्वाचनरत अभ्यर्थी (सीईओ, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के कार्यालय द्वारा भेजा जाए)
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    सं.437/डीएल-एलए/2020/-एनएस-II दिनांकः 5 फरवरी, 2020 आदेश यतः, आयोग ने श्री प्रवेश साहिब सिंह, सांसद और भारतीय जनता पार्टी के नेता को सीएनएन टीवी 18 चैनल पर निम्नलिखित बयान देने के लिए 30 जनवरी, 2020 को कारण बताओ नोटिस जारी किया थाः "मैंने उनको आतंकी नहीं कहा मैंने उनको नक्सलवादी कहा जो वह दिल्ली की जनता को गुमराह कर रहे हैं शाहीन बाग में लोग बैठे हुए हैं उनको भी गुमराह कर रहे हैं उनको सपोर्ट कर रहे हैं और बोल रहे हैं मैं उनके साथ खड़ा हूँ वह जैसे कोई नक्सलवादी काम करता है ऐसे ही दिल्ली के मुख्य मंत्री काम करता है देखिए आतंकवाद काम करता है वह भी लोगों को गुमराह करते हैं और वो भी लोगों को गुमराह करते हैं लोगो को भड़काते है दिल्ली में जो आग लगा रहे हैं आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता वो सारे बसों में आग लगा रहे हैं सारे वीडियो देखे जा सकते हैं तो सारे वही लोग हैं अगर कोई दिल्ली में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचायेगा तो आतंकी घटना से कम नहीं हैं।"; और 2. यतः, श्री प्रवेश साहिब सिंह ने 31-01-2020 को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए उत्तर प्रस्तुत किया और कहा कि उन्होंने कभी भी मुख्यमंत्री, दिल्ली के खिलाफ कटु आक्षेप नहीं लगाए और वीडियो में सही पिक्चर नहीं दिखाई गई थी; और 3. यतः, उक्त वीडियो को आयोग में पुनः देखा गया और उसकी संवीक्षा की गई; और 4. यतः, आयोग का सुविचारित अभिमत है कि श्री प्रवेश साहिब सिंह ने श्री अरविंद केजरीवाल, दिल्ली के मुख्यमंत्री के खिलाफ कटु आक्षेप लगाए जो आदर्श आचार संहिता के भाग-1 के खंड (2) के प्रावधानों का उल्लंघन है जिसमें, अन्‍य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान है कि: ‘‘ …………………… असत्‍यापित आरोपों अथवा तोड़-मरोड़ कर कही गई बातों के आधार पर अन्‍य दलों और उनके कार्यकर्ताओं की आलोचना से बचना चाहिए।’’; और 5. यतः, आयोग ने पहले भी श्री प्रवेश साहिब सिंह को सार्वजनिक सभाओं के आयोजन, मीडिया आदि में सार्वजनिक बयानबाजी करने पर 30 जनवरी, 2020 को अप. 5 बजे से शुरू होने वाली 96 घंटों की समयावधि तक रोक लगाई थी; और 6. यतः, श्री प्रवेश साहिब सिंह द्वारा वर्तमान अपराध, आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की पुनरावृत्ति है; 7. अतएव, आयोग श्री प्रवेश साहिब सिंह द्वारा दिए गए बयानों की कड़ी निंदा करता है। आयोग भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 और इस निमित्त सभी अन्य समर्थकारी शक्तियों के अंतर्गत श्री प्रवेश साहिब सिंह को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली विधान सभा, 2020 के वर्तमान साधारण निर्वाचन के संबंध में 5 फरवरी, 2020 (बुद्धवार) को सायं 6.00 बजे से शुरू होने वाली 24 घंटों की समयावधि के लिए किसी भी प्रकार की जनसभा, सार्वजनिक जुलूस, जन रैली, रोड शो का आयोजन करने और मीडिया (इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट, सोशल मीडिया) में साक्षात्कार, सार्वजनिक बयान देने पर रोक लगाता है। आदेश से, ह/- (अजय कुमार) सचिव सेवा में श्री प्रवेश साहिब सिंह, भारतीय जनता पार्टी, 20, विंड्सर प्लेस, बीएसएनएल हाउस के पास, जनपथ रोड, नई दिल्ली-110001
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    संख्या 437/दिल्ली-वि.स./1/2020/एनएस-।। दिनांक: 05 फरवरी, 2020 आदेश यतः, आयोग द्वारा दिनांक 6 जनवरी, 2020 के अपने प्रेस नोट सं. ईसीआई/पीएन/4/2020 के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली विधान सभा के साधारण निर्वाचन आयोजित करने के लिए अनुसूची की घोषणा की गई है और राजनीतिक दलों और अभ्यर्थियों के लिए उक्त दिनांक से आदर्श आचार संहिता के प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं; और 2. यत:, आयोग को श्री नीरज, भारतीय जनता पार्टी, दिल्ली प्रदेश से दिनांक 14 जनवरी, 2020 की सीईओ/शिकायत/007 संख्यांक वाली एक शिकायत प्राप्त हुई है (प्रति संलग्न) जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ आरोप लगाया गया है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के मुख्यमंत्री की हैसियत से श्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली बार एसोसिएशन द्वारा तीस हजारी कोर्ट में दिनांक 13 जनवरी, 2020 को आयोजित मकर संक्रान्ति और लोहड़ी के उत्सव में वकीलों की सभा के समक्ष एक घोषणा की है कि "यदि परिसर (न्यायालय परिसर में) में जमीन उपलब्ध करवाई जाए, तो मोहल्ला क्लिनिक स्थापित किए जाएंगे"; और 3. यत:, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली से इस संबंध में प्राप्त रिपोर्ट से भी इस बात की पुष्टि होती है कि आपने दिनांक 13 जनवरी, 2020 को उक्त स्थान पर सभा को संबोधित करते हुए निम्नलिखित भाषण देते हुए एक वायदा किया है ".............................. जहां तक मोहल्ला क्लिनिक की बात है हम सभी कोर्ट के अंदर सभी बार के अंदर मोहल्ला क्लिनिक बनाने के लिए तैयार हैं अगर आप स्पेस हमें प्रोवाइड कर दें हर जगह हर कोर्ट के अंदर अगर हमें स्पेस दे दी जाए 2 या 3 कमरे की जरूरत पड़ती है तो हम मोहल्ला क्लिनिक बनवा देंगे जिम की बात की गयी जिम भी बनवा देंगे और जैसा मैंने कहा कि मुझे पूरी उम्मीद है इस बार आप लोगो का जो सपोर्ट है वो सपोर्ट हमें पॉजिटिव मिलेगा नेगेटिव सपोर्ट की बजाए इस बार तो आज आप लोगों ने मुझे अपने बीच में मुझे बुलाया इतना प्यार दिया इतना सम्मान दिया उसके लिए बहुत बहुत शुक्रिया...................."; और 4. यत:, राजनीतिक दलों और अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के भाग VII में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान है कि केंद्र या राज्य या संबंधित राज्यों का सत्ताधारी दल यह सुनिश्चित करेगा कि इस वजह से कोई भी शिकायत करने का अवसर न दिया जाए कि उन्‍होंने अपने निर्वाचन अभियान के प्रयोजनार्थ अपने आधिकारिक पद का उपयोग किया है और उसके खंड (vi) के उप-खंड (ग) में यह प्रावधान है कि आयोग द्वारा निर्वाचनों की घोषणा के समय से मंत्री और अन्य प्राधिकारी सड़कों के निर्माण, पेयजल सुविधाओं आदि के प्रावधान आदि का कोई वायदा नहीं करेंगे; और 5. यत:, आयोग का मत था कि उक्त वायदा करके श्री अरविंद केजरीवाल ने आदर्श आचार संहिता के उक्त प्रावधानों का उल्लंघन किया है; और 6. यत:, आयोग ने आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन करने के लिए श्री अरविंद केजरीवाल को दिनांक 30 जनवरी, 2020 को कारण बताओ नोटिस संख्या 437/दिल्ली-वि.स./2020/एनएस-।। जारी किया था; और 7. यत:, आयोग के उपर्युक्त नोटिस के प्रत्युत्तर में श्री अरविंद केजरीवाल की ओर से वकील श्री मोहम्मद इरशाद से दिनांक 31 जनवरी, 2020 को उत्तर प्राप्त हुआ है; और 8. यत:, उत्तर में यह बताया गया है कि तीस हजारी कोर्ट परिसर में दिनांक 13 जनवरी 2020 को दिल्ली बार एसोशिएसन द्वारा आयोजित समारोह में वकीलों की सभा पूर्णत: एक निजी समारोह था जिसमें उनके द्वारा आधिकारिक हैसियत से भाग नहीं लिया गया था बल्कि यह एक निजी कार्य था जिसमें निजी वाहन का उपयोग किया गया था और उक्त बार एसोशिएसन द्वारा आमंत्रण पर भाग लिया गया था तथा इसके अलावा नोटिस में तथा कथित वायदा चुनावी वायदा नहीं था अपितु सरकार के पुराने निर्णय को पुन: दोहराया गया था और इसका ताल्लुक किसी भी तरह से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली के मौजूदा निर्वाचनों से नहीं था तथा प्रश्नगत बयान सरकार की नीति के कार्यान्वयन के तरीके को स्पष्ट करने के लिए दिया गया था; और 9. यत:, आयोग ने इस मामले पर सावधानीपूर्वक विचार किया है और इसका सुविचारित मत है कि श्री अरविंद केजरीवाल ने उपर्युक्त सभा के सामने दिनांक 13 जनवरी, 2020 को उक्त बयान दिया है और भले ही यह निजी कार्य हो, जैसा कि दावा किया गया है, लेकिन यह आधिकारिक हैसियत से दिया गया बयान था और इस प्रकार आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन था तथा समान अवसर की प्रक्रिया बाधित हुई थी; 10. अत:, अब आयोग उत्तर को स्वीकार्य न पाते हुए, एतद्द्वारा श्री अरविंद केजरीवाल द्वारा दिए गए विवादित बयान की निंदा करता है और उनको चेतावनी देता है कि वे भविष्य में सार्वजनिक बयान देते समय अधिक सावधान रहें तथा सतर्कता बरतें, क्योंकि आदर्श आचार संहिता की भावना में अपेक्षित है कि मंत्री सहित लोक सेवक निर्वाचन प्रक्रिया की शुचिता सुनिश्चित करें, न तो ऐेसा बयान दें या बयान देते हुए प्रतीत हों जो निर्वाचनों के संचालन के लिए समान अवसर को बाधित करे या बाधित करता हुआ प्रतीत हो या जिससे निर्वाचकों के मन में निर्वाचन प्रकिया की सत्यनिष्ठा के बारे में संदेह उत्पन्न हो। आदेश से (अजय कुमार) सचिव सेवा में श्री अरविंद केजरीवाल राष्ट्रीय संयोजक, आम आदमी पार्टी
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    सं.437/दिल्ली-वि.स./2020/-एनएस-II दिनांकः 30 जनवरी, 2020 सूचना यतः, भारत निर्वाचन आयोग ने, दिनांक 6 जनवरी, 2020 के अपने प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे.नो./4/2020 के तहत राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचन की घोषणा की है और राजनीतिक दलों एवं अभ्‍यर्थियों के लिए आदर्श आचार संहिता के उपबंध उक्‍त तारीख से तत्‍काल प्रभाव से लागू हो गए; और 2. यत:, राजनीतिक दलों एवं अभ्‍यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के भाग-। के निम्नलिखित खंडों में अन्‍य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान है कि: (1) कोई भी दल अथवा अभ्यर्थी ऐसा कोई कार्यकलाप करने का प्रयास नहीं करे जिससे विभिन्न जातियों और समुदायों, धार्मिक और भाषायी समूहों के बीच विद्यमान मतभेद और बढ़े या जिससे परस्पर घृणा या तनाव का महौल पैदा हो। (2) अन्य दलों की आलोचना करते समय यह आलोचना उनकी नीतियों और कार्यक्रम, पिछले रिकार्ड और कार्य तक ही सीमित होनी चाहिए। दलों और अभ्यर्थियों को अन्य दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के निजी जीवन के बारे में ऐसे किसी भी पहलू की आलोचना नहीं करनी चाहिए जिनका उनके सार्वजनिक कार्यकलापों से सरोकार न हो। असत्‍यापित आरोपों अथवा तोड़-मरोड़ कर कही गई बातों के आधार पर अन्‍य दलों और उनके कार्यकर्ताओं की आलोचना से बचना चाहिए। (3) मत हासिल करने के लिए जाति अथवा सांप्रदायिक भावना के आधार पर कोई अपील नहीं की जाएगी। (4) सभी दलों और अभ्यर्थियों को ऐसे सभी कार्यकलापों से ईमानदारीपूर्वक बचना चाहिए, जो निर्वाचन विधि,­­­-------- के अधीन "भ्रष्ट आचरण" और अपराध हैं; और 3. यतः, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 (3क) में निम्नलिखित प्रावधान हैः "किसी अभ्यर्थी, या उसके एजेंट अथवा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा अभ्यर्थी और उसके निर्वाचन एजेंट की सहमति से उस अभ्यर्थी के निर्वाचन की संभावनाओं को बढ़ाने अथवा अन्य अभ्यर्थी के निर्वाचन को हानिकारक रूप से प्रभावित करने के लिए धर्म, वर्ग, जाति, समुदाय, या भाषा के आधार पर भारतीय नागरिकों के विभिन्न वर्गों के बीच शत्रुता या घृणा की भावना को बढ़ाना या बढ़ाने का प्रयास करना "; और 4. यतः, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125 में यह प्रावधान है कि निर्वाचन से संबंधित कोई भी व्यक्ति धर्म, वर्ग, जाति, समुदाय, या भाषा के आधार पर भारतीय नागरिकों के विभिन्न वर्गों के बीच शत्रुता या घृणा की भावना को बढ़ाता है या बढ़ाने का प्रयास करता है, तो उसे तीन साल तक कारावास या जुर्माने या दोनों का दंड दिया जाएगा; और 5. यतः, आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली से 28 जनवरी, 2020 के एक पत्र के तहत रिपोर्ट प्राप्त की जिसमें, श्री अनुराग ठाकुर, भारतीय जनता पार्टी के एक नेता ने 27 जनवरी, 2020 को दिल्ली के 06-रिठाला विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत पड़ने वाले मदर डेयरी, श्मशान घाट रोड, बुद्ध विहार, दिल्ली में जनसभा को संबोधित करने के दौरान कतिपय आपत्तिजनक बयान दिए और नारे लगाए; और 6. यतः, आयोग का प्रथम दृष्टया यह मत था कि श्री अनुराग ठाकुर द्वारा लगाए गए नारों और दिए गए बयानों की वजह से आदर्श आचार संहिता के उपर्युक्त प्रावधानों और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 का उल्लंघन हुआ है; और 7. यतः, आयोग ने श्री अनुराग ठाकुर को 28 जनवरी, 2020 को एक कारण बताओ नोटिस सं.437/डीएल वि.स./2020/-एनएस-II जारी किया, जिसमें उनसे आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 का उल्लंघन करने के लिए 30 जनवरी, 2020 को दोपहर 12 बजे तक जवाब देने के लिए कहा गया है; और 8. यतः, आयोग के उपर्युक्त नोटिस के जवाब में श्री अनुराग ठाकुर से 30 जनवरी, 2020 को एक उत्तर प्राप्त हुआ है; और 9. यतः, आयोग ने श्री अनुराग ठाकुर के 30 जनवरी, 2020 के उपर्युक्त उत्तर में विषय-वस्तु और प्रमाणों की ध्यानपूर्वक जाँच की है। श्री अनुराग ठाकुर ने बताया है कि उन्होंने केवल "देश के गद्दारों को" ही बोला जिसका वास्तविक अर्थ देश के गद्दार होता है और वह भीड़ थी जिसने उन नारों का जवाब दिया था; और 10. यतः, उन्होंने यह भी कहा है कि उनके बयानों का उद्देश्य न तो विभिन्न धर्मों, वर्गों, जातियों और समुदायों के बीच वैमनस्य को बढ़ाना या पैदा करना था और न ही उन्होंने इसे बढ़ाने के लिए ऐसा कोई गोपनीय/निवारक कृत्य किया, अतः यह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं है; और 11. यतः, हालांकि श्री अनुराग ठाकुर ने यह अनुरोध किया है कि उनको व्यक्तिगत रूप से अपना पक्ष रखने के लिए एक मौका दिया जाए, परंतु आयोग इस मामले में किसी भी प्रकार की सुनवाई को जरूरी नहीं मानता है; और 12. यतः, आयोग ने इस मामले पर ध्यानपूर्वक विचार किया है और उसका यह सुविचारित अभिमत है कि श्री अनुराग ठाकुर ने अवांछनीय और आपत्तिजनक बयान दिए हैं, जिसमें उनका लहजा और भाषा ऐसी थी जिससे विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच विद्यमान मतभेद बढ़े और परस्पर घृणा पैदा हो, अतः उन्होंने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन किया है; 13. अब, इसलिए आयोग श्री अनुराग ठाकुर द्वारा दिए गए विवादित बयानों की एतद्द्वारा कड़ी निंदा करता है। आयोग भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 और इस निमित्त सभी अन्य समर्थकारी शक्तियों के अंतर्गत श्री अनुराग ठाकुर को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली विधान सभा, 2020 के मौजूदा साधारण निर्वाचन के संबंध में 30 जनवरी, 2020 (गुरुवार) के अप. 5.00 बजे से शुरू होने वाली 72 घंटों की समयावधि के लिए किसी भी प्रकार की जनसभा, सार्वजनिक जुलूस, जन रैली, रोड शो का आयोजन करने और मीडिया (इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट, सोशल मीडिया) में साक्षात्कार, सार्वजनिक बयान देने पर रोक लगाता है। 14. यह भी स्पष्ट किया जाता है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली विधान सभा के वर्तमान साधारण निर्वाचन के लिए स्टार प्रचारकों की सूची से श्री अनुराग ठाकुर को हटाने के लिए दिनांक 29 जनवरी, 2020 को पारित आदेश लागू रहेगा। आदेश से, ह/- (अजय कुमार) सचिव सेवा में श्री अनुराग ठाकुर, भारतीय जनता पार्टी, 14, जनपथ, नई दिल्ली-110001
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    सं.437/दिल्ली-वि.स./2020/-एनएस-II दिनांकः 30 जनवरी, 2020 नोटिस यतः, भारत निर्वाचन आयोग ने, अपने दिनांक 6 जनवरी, 2020 के प्रेस नोट सं. ईसीआई/प्रे.नो./4/2020 के तहत राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली विधान सभा के लिए साधारण निर्वाचन की घोषणा की है और राजनीतिक दलों एवं अभ्‍यर्थियों के लिए आदर्श आचार संहिता के उपबंध उक्‍त तारीख से तत्‍काल प्रभाव से लागू हो गए; और 2. यत:, राजनीतिक दलों एवं अभ्‍यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता के भाग-। के खंड (2) में अन्‍य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान है कि: ‘‘ …………………… असत्‍यापित आरोपों अथवा तोड़-मरोड़ कर कही गई बातों के आधार पर अन्‍य दलों और उनके कार्यकर्ताओं की आलोचना से बचना चाहिए।’’; और 3. यतः, आयोग ने 29 जनवरी, 2020 को मुख्य निर्वाचन अधिकारी, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के जरिए, आम आदमी पार्टी से एक शिकायत प्राप्त की है, जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि आपने दिल्ली के मुख्यमंत्री को आतंकवादी कहकर उन पर कटु आक्षेप किए हैं; और 4. यतः, यह प्रतीत होता है कि आपने आम आदमी पार्टी के नेता के संदर्भ में बयान उपरोक्त सीएनएन टीवी 18 पर दिया है ( वीडियो की सीडी और आपके प्रश्नगत बयानों की स्क्रिप्ट संलग्न है); और 5. यतः, आयोग प्रथम दृष्‍टया यह मानता है कि उपरोक्त तोड़-मरोड़ कर दिए बयान के जरिए, आपने आदर्श आचार संहिता के उक्‍त प्रावधान का उल्‍लंघन किया है; 6. अतः अब, आयोग आपको अवसर देता है कि आप 31 जनवरी, 2020 (शुक्रवार) को अपराह्न 05.00 बजे तक अथवा उससे पहले, इस संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करें, ऐसा न करने पर आयोग आपको कोई संदर्भ दिए बिना निर्णय देगा। आदेश से ह-/- (अजय कुमार) सचिव (अनुलग्नकःयथोपरि) सेवा में, श्री परवेश साहिब सिंह भारतीय जनता पार्टी 20, विंडसर प्लेस, बीएसएनएल हाउस के पास जनपथ रोड, नई दिल्ली-110001
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    No. ECI/PN/16/2020 Dated: 29th January, 2020 PRESS NOTE Election Commission has ordered the removal of Sh. Anurag Thakur and Sh. Parvesh Sahib Singh from the list of star campaigners of Bhartiya Janta Party for the general elections to the Legislative Assembly of the NCT of Delhi with immediate effect and until further orders.
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    Commission’s order to Sh. Gopal Bhargav of Bhartiya Janata Party and Leader of Opposition in the Legislative Assembly of Madhya Pradesh
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    सं.437/ईएस-1/बिहार-लो.स./2019 दिनांक 12 मई, 2019 आदेश यत:, आयोग ने दिनांक 10/03/2019 के प्रेस नोट संख्‍या ईसीआई/प्रेनो/2019 के तहत लोक सभा के साधारण निर्वाचन, 2019 आयोजित करवाने के लिए अनुसूची की घोषणा की है और उसी तारीख से ही राजनैतिक दलों और अभ्‍यर्थियों के लिए आदर्श आचार संहिता के उपबंध लागू हो गए हैं; और यत:, मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी, बिहार ने दिनांक 25 अप्रैल, 2019 के अपने पत्र के तहत बिहार में जी0 डी0कालेज, बेगुसराय में, दिनांक 24 अप्रैल, 2019 को श्री गिरिराज सिंह द्वारा दिए गए भाषण की एक वीडियो क्लिप की प्रति अग्रेषित की, जिसमें उन्‍होंने निम्‍नलिखित वक्‍तव्‍य दिया था:- ‘’…………….. जो वन्‍दे मातरम् न‍हीं कह सकता, जो भारत की मातृभूमि को नमन न‍हीं कर सकता, अरे गिरिराज के तो बाबा –दादा सिमरिया घाट में गंगा के किनारे मरे उसी भूमि पर कब्र भी नहीं बनाया, तुम्‍हें तो तीन हाथ की जगह भी चाहिए अगर तुम नहीं कर पाओगे तो देश कभी माफ न‍हीं करेगी...........’’ ; और यत:, य‍ह भी सूचित किया गया है कि लोक प्रति‍निधित्‍व अधिनियम, 1951 की धारा 125, 123 (3क) और भारतीय दंड संहिता अधिनियम की धारा 153क, 153 ख, 295 क, 171 ग, 188, 298 और 505 (ii) के अधीन इन वक्‍तव्‍यों के लिए बेगुसराय नगर थाना में एफ आई आर दर्ज करवाई गई है; और यत:, आयोग ने उपर्युक्‍त उद्धत वक्‍तव्‍य देने के लिए आदर्श आचार संहिता और लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के उल्‍लंघन हेतु 24-बेगुसराय संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से श्री गिरिराज सिंह, भारतीय जनता पार्टी के नेता और निर्वाचन लड़ने वाले अभ्‍यर्थ‍ी को दि‍नांक 29 अप्रैल, 2019 को कारण बताओ नोटिस सं.437/ईएस-1/बिहार-लो.स./2019 जारी कि‍या है; यत:, आयोग के ऊपर उल्‍ल‍िखित नोटिस के जवाब में श्री गिरि‍राज सिंह से दिनांक 30.04.2019 को एक उत्‍तर प्राप्‍त हुआ है; और यत:, आयोग ने श्री गिरिराज सिंह के दिनांक 30.04.2019 के पूर्वोक्‍त उत्‍तर में दी गई विषय-वस्‍तु और प्रकथनों को ध्‍यानपूर्वक पढ़ा, जिसमें उन्‍होंने अन्‍य बातों के साथ-साथ विवादास्‍पद कथन देना स्‍वीकार किया है; और यत:, दिनांक 30.04.2019 के उपर्युक्‍त उल्‍ल‍िखित उत्‍तर में यह बताया गया है कि, ‘’याचिकाकर्ता गिरिराज सिंह ने लोक प्रतिनिधि‍त्‍व अधिनियम के किसी भी प्रावधान का उल्‍लंघन नहीं किया है और न ही उन्‍होंने किसी भी जाति या धर्म के खिलाफ ऐसा किसी भी प्रकार का कथन कहा है’’ ; और यत:, इसके अतिरिक्‍त उन्‍होंने यह भी कहा है कि ‘’ पूरे कथन को पढ़ने के पश्‍चात ऐसा कुछ नहीं लगता है कि याचिकाकर्ता का इरादा किसी धर्म या जाति के प्रति द्वेष करने का है या था ’’, और यत: आयोग ने उसके विवादास्‍पद भाषण की वीडियो रिकॉर्डिंग को एक बार फिर देखा है और यह आश्‍वस्‍त है कि उन्‍होंने एक आपत्‍त‍िजनक भाषण दिया है जिसकी भाषा एवंम भाव ऐसा है जिससे वर्तमान मतभेद बढ़ेंगें या विभि‍न्‍न धार्मिक समुदायों के बीच द्वेष पैदा होगा और इस प्रकार से यह आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों का उल्‍लंघन है; और यत: आयोग ने यह पाया है कि, श्री गिरिराज सिंह को निर्वाचनों का ध्रुवीकरण करने की संभावना एवं प्रकृति वाले बयान देने से स्‍वयं को रोकना चाहिए था, जो केवल उसी निर्वाचन क्षेत्र तक सीमित नहीं होता है जहाँ बयान दिया गया है, अपितु इस डि‍जिटल युग में सूचना का तेजी से प्रसार होने की वजह से यह अन्‍य क्षेत्रों तक भी पहुंच जाता है; और यत:, आयोग ने, इस मामले पर विचार-विमर्श करते हुए, ऐसी सार्वजनिक बयानबाजी पर अपनी चिंता व्‍यक्‍त की है, जो निर्वाचन प्रक्रिया को दूषि‍त करती है; और यत:, आयोग का यह भी विचार है कि श्री गिरिराज सिंह ने अपने विवादास्‍पद भाषण में धार्मिक आधार पर बयानबाजी की है जो ‘’ राजनैतिक दलों और अभ्‍यर्थ‍ियों के मार्ग‍दर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता ’’ के ‘साधारण संचालन’ के भाग I के पैरा 3 और पैरा 4 के प्रावधानों के उल्‍लंघन के समान है जिसमें यह विनिर्द‍िष्‍ट है कि:- (3) मतों को हासिल करने के लिए जाति‍ या सांप्रदायि‍क भावनाओं की कोई अपील नहीं की जाएगी........................ (4) सभी दल और अभ्‍यर्थी ईमानदारी से ऐसे सभी कार्यकलापों से बचेंगे जो निर्वाचन विधि के अधीन “भ्रष्‍ट आचरण” और अपराध होते हैं जैसे कि मतदाताओं को रिश्‍वत देना………………, मतदाताओं को डराना-धमकाना और यह की उन्‍होंने वर्ष 1995 की सिविल अपील सं.8339 के साथ-साथ वर्ष 1992 की सिविल अपील सं.37 (अभिराम सिंह बनाम सी.डी.कोम्‍माचेन एवं अन्‍य) में माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा दिए गए निर्णय की अवमानना की है। अत: अब, आयोग उन्‍हें एमसीसी के उल्‍लंघनों से संबंधित मामले में जारी किए गए या जारी किए जाने वाले कि‍सी भी आदेश/नोटिस के प्रति पूर्वाग्रह के बिना, बेगुसराय में निर्वाचन प्रचार के दौरान उनके द्वारा दिए गए विवादास्‍पद बयानों की निंदा करता है और ऊपर उल्‍ल‍िखित कदाचार के लिए 24-बेगुसराय संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से श्री गिरिराज सिंह, नेता, भारतीय जनता पार्टी और निर्वाचन लड़ने वाले अभ्‍यर्थी की भर्त्‍सना करता है। आयोग आदर्श आचार संहिता की वैध-अवधि‍ के दौरान श्री गिरि‍राज सिंह को अपने सार्वजनिक बयानों में सावधान रहने के लिए भी सख्‍त चेतावनी देता है।
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    Order dated 24.04.2019 of the Hon’ble High Court of Calcutta, Circuit Bench at Jalpaiguri- WP No. 5027 of 2019 in the matter of Gorkha Janmukti Morcha and anr Vs. the Election Commission of India & Ors.-reg
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    Commission’s order to The Producers ‘Udyama Simham’ (Through CEO Telangana)
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    Commission’s order to The Producers ‘Laxmi's NTR’ (Through CEO Andhra Pradesh)
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    Commission’s order to The Producers (S/Shri Anand K. Pandit, Suresh Oberoi, Acharya Manish and Sandeep Singh) ‘PM NARENDRA MODI’ (Through CEO Maharashtra) CEOs
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    संसदीय और विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन आदेश-2008
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    Commission's Order to Shri Yogi Adityanath dated 05.04.2019

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eci-logo.pngभारत निर्वाचन आयोग एक स्‍वायत्‍त संवैधानिक प्राधिकरण है जो भारत में निर्वाचन प्रक्रियाओं के संचालन के लिए उत्‍तरदायी है। यह निकाय भारत में लोक सभा, राज्‍य सभा, राज्‍य विधान सभाओं और देश में राष्‍ट्रपति एवं उप-राष्‍ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों का संचालन करता है। निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्‍छेद 324 और बाद में अधिनियमित लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम के प्राधिकार के तहत कार्य करता है। 

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