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    ईसीआई/प्रे नो/118/2019 दिनांकः 19 दिसम्बर, 2019 प्रेस नोट नामांकन से लेकर निर्वाचनों तक (ई2ई) की पूरी प्रक्रिया को दिव्यांगजनों के लिए अधिकाधिक मैत्रीपूर्ण बनाने की आवश्यकता है : मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री सुनील अरोड़ा आयोग ने सुगम निर्वाचनों पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया भारत निर्वाचन आयोग ने आज सुगम निर्वाचनों पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। आयोग द्वारा दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए निर्वाचनों को मैत्रीपूर्ण बनाने के लिए अब तक उठाए गए कदमों और प्रक्रिया को अधिकाधिक समावेशी और अभिगम्य बनाने के लिए अभी भी अपेक्षित कदमों पर विचार-विमर्श करने हेतु कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री सुनील अरोड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि “हालांकि दिव्यांगता ऐसी समस्या है जिस पर लोगों और परिवार द्वारा ध्यान दिए जाने की आवश्यकता होती है, तथापि सुगम्यता ऐसी समस्या है जिसके लिए अधिकाधिक संस्थागत उपायों की जरूरत होती है। श्री अरोड़ा ने कहा कि, “यह हमारा उद्देश्य है कि जमीनी स्तर पर हम जागरूकता और कार्यकलापों का इष्टतम स्तर प्राप्त करें। बूथ लेवल अधिकारियों से लेकर आयोग तक, प्रत्येक व्यक्ति को मिलकर काम करना चाहिए। जनवरी, 2018 में, “सुगम्य निर्वाचनों” को साधारण निर्वाचन, 2019 के लिए मार्गदर्शक थीम के रूप में अपनाने का निर्णय लिया गया था।“ यह आवश्यक है कि हम प्रयासों और कार्यकलापों को इस तरीके से बढ़ाएं कि सुगम्यता के मुद्दे पूरी तरह से खत्म हो जाएं तथा हमारे निर्वाचन सही अर्थों में समावेशी हो जाएं।“ उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि 90% से अधिक दिव्यांगजनों ने हाल ही में झारखंड में संपन्न हुए मतदान में अपना मत दिया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि, “निर्वाचन प्रक्रिया की पूरी श्रृंखला ई2ई, अर्थात नामांकन से लेकर निर्वाचनों तक, को दिव्यांगजनों के लिए मैत्रीपूर्ण और सुगम्य होने की आवश्यकता है तथा इन मुद्दों के समाधान के लिए बीएलओ से लेकर आयोग मुख्यालय तक की पूरी प्रणाली को काम करने की आवश्यकता है।“ आयोग की प्रतिबद्धता को पुष्ट करते हुए, निर्वाचन आयुक्त श्री अशोक लवासा ने कहा कि हालांकि मुख्य निर्वाचन अधिकारियों और डीईओ द्वारा किए गए प्रयासों की वजह से आयोग ने लंबा सफर तय किया है तथापि अभी और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि, “हमें देश-दुनिया से सीखने की जरूरत है, हमें पता करना चाहिए कि आगे क्या है, और ऐसे ठोस कदमों को पहचानना चाहिए जो हमें आवश्यक बदलाव लाने के लिए सशक्त बनाए।“ एक त्रिआयामी कार्यनीति पर सुझाव देते हुए श्री लवासा जी ने कहा कि डाटा की बेंचमार्किंग करने, सुगम्यता इंडेक्स के पैमानों के समक्ष इसका निर्धारण करने, आयोग और सीईओ की वेबसाइट को विहित दिशा-निर्देशों के अनुरूप बनाने और निरंतर मूल्यांकन से हमें भावी क्षमता को पहचानने में मदद मिलेगी। निर्वाचन आयुक्त श्री सुशील चंद्रा ने सिविल सोसाइटी संगठनों और निर्वाचन अधिकारियों द्वारा फील्ड में किए जाने वाले प्रयासों की सराहना की। श्री चंद्रा ने दिव्यांगजनों के निर्वाचन अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता के महत्व पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि, “दिव्यांग मतदाताओं को लोकतंत्र का अभिन्न अंग बनाने के लिए, हमें सभी सिविल सोसाइटी संगठनों और संबंधित एनजीओ के सहयोग की जरूरत है। इस अवसर पर बोलते हुए, महासचिव श्री उमेश सिन्हा ने गंभीर अंतरालों पर ध्यान देने के लिए वांछित ढांचागत बदलावों की आवश्यकता पर बल दिया और ज़मीनी स्तर पर निर्वाचन मशीनरी, सिविल सोसाइटी संगठनों और अन्य स्टेकहोल्डरों के प्रयासों को सराहा। श्री सिन्हा ने हाल ही में हुए झारखंड निर्वाचनों में अस्सी साल से नवासी साल के वृद्धों और दिव्यांगजनों के लिए प्रायोगिक तौर पर शुरू की गई, घर से डाक मतपत्र के विकल्प की अतिरिक्त सुविधा पर प्रकाश डाला। उप निर्वाचन आयुक्त श्री चंद्र भूषण कुमार ने देश भर में स्टेकहोल्डरों से प्राप्त सिफारिशों के महत्व को दोहराया, क्योंकि ये भावी निर्वाचनों को और अधिक समावेशी बनाने का मार्ग प्रशस्त करेंगे। उन्होंने उन संगठनों को धन्यवाद दिया जिन्होंने आज की कार्यशाला में भाग लिया, खासतौर पर आयोग की सुगम्यता परामर्शदाता स्मिता सदासिवन को, जिन्होंने विचार-विमर्श को इतना उपयोगी बनाया। दिव्यांग मतदाताओं का संपूर्ण मानचित्रण, परिवहन की सुविधा प्रदान करना, विशेष स्वयंसेवकों, सुनिश्चित न्यूनतम सुविधाएं, जैसे रैम्प, व्हीलचेयर, संकेत भाषा, मतदान केंद्र पर ब्रेल युक्त ईवीएम और हाल ही में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा दिव्यांग मतदाताओं के लिए डाक मतपत्रों का प्रावधान कुछ ऐसी पहल हैं जो सुगमता और ‘कोई मतदाता न छूटे’ के सिद्धांत को सुनिश्चित करती हैं। विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों और जिला निर्वाचन अधिकारियों के अलावा, कार्यशाला में सिविल सोसाइटी संगठनों, सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों और विभिन्न दिव्यांगता सेक्टरों का प्रतिनिधित्व करने वाले एनजीओ, जिसमें एएडीआई, सार्थक एजुकेशनल ट्रस्ट, राष्ट्रीय बधिर संघ, एनसीपीईडीपी, राष्ट्रीय दिव्यांगता नेटवर्क, सक्षम, इकोतत्व, एनआईईपीवीडी, पीडीयूएनआईपीपीडी, बीपीए अहमदाबाद और आईएसएलआरटीसी शामिल हैं, ने भाग लिया। पूरे भारत से उपस्थित स्टेकहोल्डरों के साथ, तकनीकी सत्रों में समूह कार्य और चार समुनदेशित विषयों जैसे कि निर्वाचक पंजीकरण और निर्वाचक नामावली में मानचित्रण; विशेष तौर पर दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए मतदान केंद्र पर सुविधाएं : सुगम मतदाता शिक्षा और संप्रेषण कार्य नीतियां और सुगम निर्वाचनों में प्रौद्योगिकी के उपयोग पर विचार-विमर्श शामिल था। आयोग के लिए बनाए गए विषयगत प्रस्तुतीकरण के अंग के रूप में, प्रतिभागियों ने वर्तमान चुनौतियों के मूल्यांकन, विद्यमान पहल और समाधान ढूंढने पर काम किया। आयोग ने एक पुस्तिका भी जारी की, ‘बाधाओं को पार करते हुए- मैंने भी मत डाला’, जो उन अनुभवप्राप्त मतदाताओं के बारे में थी जिन्होंने लोकतंत्र के सबसे बड़े त्यौहार में भाग लेने के लिए सभी बाधाओं को पार किया। अब तक किए गए कार्यों पर प्रकाश डालने, वर्तमान पहल और सभी राज्यों/केंद्र शासित राज्यों और विभिन्न स्टेकहोल्डरों से प्राप्त सिफारिश युक्त “सुगम्यता रिपोर्ट 2019” नामक एक व्यापक दस्तावेज को कार्यशाला के प्रतिभागियों के लिए उपलब्ध कराया गया था, जिसमें सुगम निर्वाचनों में नीतियों और मार्गदर्शी सिद्धांतों पर प्रकाश डाला गया था। आज कार्यशाला में संकेत भाषा इंटरप्रेटर, स्क्रीन रीडर एक्सेस दिन की कार्यवाही की महत्वपूर्ण विशेषताएं थीं।
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    No. 52/2019/SDR/ETPBS-VOL.II Dated: 8th January, 2020 To, The Chief Electoral Officer NCT of Delhi Delhi. Subject: Commission’s Notification under Section 60(c) of the RP Act, 1951- issue of postal ballot electors above the age of 80 years and electors with Physical disability -regarding. Sir, I am directed to forward herewith the Commission’s Notification No. 52/2020/SDR dated 8th January, 2020 on the subject cited. This may be published in the State Gazette immediately and a copy of the same may also be forwarded to the Commission. A copy of the procedure to be adopted for voting through postal ballot by Absentee voters in the category of senior citizens (AVSC) and PwDs (AVPD) is also enclosed herewith. Kindly acknowledge. Yours faithfully, (N.T.Bhutia) Secretary
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    सं.:ईसीआई/प्रे.नो./101/2019 दिनांक: 28 अक्‍टूबर, 2019 प्रेस नोट विषय: अनिवार्य सेवाओं के अनुपस्थित मतदाताओं, 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्‍ठ नागरिकों और चिह्नित दिव्‍यांग निर्वाचकों के लिए डाक मतपत्र सुविधाएं। भारत निर्वाचन आयोग यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष बल देता रहा है कि दिव्‍यांगजन और वरिष्‍ठ नागरिकों जैसे निर्वाचकों को निर्वाचन प्रक्रिया में उनकी व्‍यापक सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए हर तरह से सुविधा दी जाए। निर्वाचन प्रक्रिया के लिए आयोग द्वारा विभिन्‍न राज्‍यों और संघ राज्‍य क्षेत्रों की तैयारी की समीक्षा हेतु कार्यसूची में एक प्रमुख मद इसी प्रकार की अन्‍य श्रेणियों के अलावा इन श्रेणियों को सुविधाएं देना है। इस विषय के दो पहलू हैं, नामत:, अपेक्षित अवसरंचना का सृजन करना और इस प्रक्रिया को सुकर बनाने के लिए उपयुक्‍त विधिक ढांचा तैयार करना। अपनी दिव्‍यांगता के दरजे के कारण मतदान केंद्रों तक आने में अक्षम नागरिकों तथा अनिवार्य सेवाओं अर्थात रेलवे, राज्‍य परिवहन तथा उड्डयन आदि की प्रदानगी में विभिन्‍न पदों पर अपने कर्तव्‍य निर्वह्न के कारण छूट जाने वाले नागरिकों की आवश्‍यकताओं का अध्‍ययन करने के बाद आयोग ने विधिक पहलू की दृष्टि से दिनांक 02 सितम्‍बर, 2019 और 22 अक्‍टूबर, 2019 को संघ सरकार (विधि और न्‍याय मंत्रालय) के समक्ष सिफारिश की, तद्नुसार, केंद्रीय सरकार ने नियमों में संशोधन किया। इन संशोधनों की मुख्‍य विशेषताएं निम्‍नानुसार है:- (1) ‘अनुपस्थित मतदाता’ की अवधारणा की शुरूआत की गई है और इसे निर्वाचनों के लिए परिभाषित किया गया है; (2) ‘अनुपस्थि‍त मतदाता’ का अर्थ ऐसे व्‍यक्ति से है जो अधिनियम की धारा 60 के खंड (ग) के अधीन यथा-अधिसूचित व्‍यक्तियों की श्रेणी से संबंध रखता हो और जो उक्‍त अधिसूचना में यथा उल्लिखित अनिवार्य सेवाओं में तैनात हो और इसमें वरिष्‍ठ नागरिक या दिव्‍यांगजनों की श्रेणी से संबंध रखने वाले निर्वाचक भी शामिल हैं[नियम 27 अ(कक)]; (3) ‘दिव्‍यांगजन’ का अर्थ ऐसे व्‍यक्ति से है जो निर्वाचक नामावली हेतु डाटाबेस में दिव्‍यांगजन के रूप में चिह्नित हो; (4) इस भाग के प्रयोजनार्थ ‘वरिष्‍ठ नागरिक’ का अर्थ ऐसे व्‍यक्ति से है जो 80 वर्ष से अधिक आयु का हो और अनुपस्थित मतदाता की श्रेणी से संबंध रखता हो; (5) अनुपस्थित मतदाता के मामले में आवेदन फॉर्म-12 डी में दिया जाएगा और उसमें यथा विनिर्दिष्‍ट ब्‍योरे होंगे और वरिष्‍ठ नागरिक या दिव्‍यांगजन के अलावा अनुपस्थित मतदाता हेतु नोडल अधिकारी द्वारा विधिवत रूप से सत्‍यापित किया जाएगा, जो निर्वाचन की अधिसूचना की तारीख के उपरांत पांच दिनों के अंदर रिटर्निंग अधिकारी के पास पहुंच जाएगा। (6) अनुपस्थित मतदाता के मामले में,निर्वाचन आयोग द्वारा इस दिशा में यथानिर्गत किसी भी दिशानिदेश के अध्‍यधीन नियम 27 एफ के उप-नियम (3) के अंतर्गत मतों को रिकॉर्ड करने हेतु मुहैय्या कराए गए डाक मतपत्र केंद्र को वापस लौटा दिए जाएंगे। मतदाताओं की इन दो श्रेणियों – 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्‍ठ नागरिक और निर्वाचक नामावली में चिह्नित दिव्‍यांग निर्वाचकों - के पास अब यह विकल्‍प होगा कि वे मतदान वाले दिन अनुपस्थित मतदाता अथवा नियमित मतदाता के रूप में मतदान कर सकते हैं। यदि इन श्रेणियों से संबंध रखने वाला कोई निर्वाचक पहले मतदान करना चाहता है तो निर्वाचनों का संचालन नियम, 1961 के संशोधित नियम 27ग के अनुसार वह नए फॉर्म-डी में आवेदन देगा, जो रिटर्निंग अधिकारी के पास निर्वाचन की अधिसूचना की तारीख के उपरांत पांच दिनों के अंदर पहुंच जाएगा। ऐसे आवेदन की प्राप्ति के बाद निर्वाचक को एक डाक मतपत्र जारी किया जाएगा, जिसे मत रिकॉर्ड करने के पश्‍चात विनिर्दिष्‍ट केंद्र में जमा किया जाएगा। निर्वाचन आयोग ने अधिसूचना की प्राप्ति के पश्‍चात विस्‍तृत दिशा-निर्देशों और एसओपी पर काम करना शुरू कर दिया है ताकि मतदाताओं की इन चिह्नित श्रेणियों हेतु डाक मतपत्र की प्रक्रिया को तत्‍काल सुकर बनाया जा सके। इन दिशा-निर्देशों में ऐसे मतदाताओं की पहचान करना, जनसंपर्क का तरीका, और प्रत्‍येक निर्वाचन क्षेत्र में विनिर्दिष्‍ट केंद्रों में मतदान और संग्रहण के तरीके शामिल होंगे। आयोग अपनी स्‍वीप पहल के अंतर्गत निजी संपर्क सहित अनेक कदम उठा रहा है ताकि निर्वाचक इस नयी सुविधा से अवगत हो सकें और ऐसे निर्वाचक अपनी मंशानुसार अपने मत देने के अधिकार का प्रयोग कर सकें। निर्वाचन आयोग इस बात के लिए कटिबद्ध है, कि निर्वाचकों की ऐसी सभी श्रेणियों के लिए मतदान को आसान बनाना सुनिश्चित किया जा सके। आयोग को पूरा विश्‍वास है कि इस नयी पहल के साथ 80 वर्ष से अधिक की आयु के वरिष्‍ठ नागरिकों और दिव्‍यांग निर्वाचकों के पास अपने घर से अपने मताधिकार का प्रयोग करने का विकल्‍प होगा। तथापि, ऐसे मतदाताओं के पास विश्‍व के सबसे बड़े लोकतंत्र में अपने निर्वाचकीय अधिकार का प्रयोग करने हेतु विधिवत प्रक्रिया का अनुसरण करके डाक मतपत्र द्वारा मतदान करने या मतदान वाले दिन मतदान केंद्र जाकर मतदान करने, दोनों के विकल्‍प हैं।
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    सं.52/2019/एसडीआर दिनांक: 11 नवंबर, 2019 अधिसूचना लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम, 1951 की धारा-60 के खंड (ग) के उपबंधों के अधीन दिनांक 02 नवंबर, 2019 की समसंख्‍यक अधिसूचना में आंशिक संशोधन करते हुए आयोग ने निदेश दिया है कि डाक मतपत्र के माध्‍यम से मतदान के प्रयोजनार्थ अधिसूचित 80 वर्ष से अधिक आयु के निर्वाचकों तथा दिव्‍यांग निर्वाचकों की श्रेणी झारखंड राज्‍य में विधान सभा के वर्तमान साधारण निर्वाचन में 01-राजमहल, 05-पाकुड़, 09-जामताड़ा, 15-देवघर, 17-गोड्डा, 36-बो‍कारो और 40-धनबाद विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों में इस श्रेणी में निर्वाचकों तक सीमित होगी।
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    Postal ballot facility for the categories of Senior Citizen and Persons with Disabilities-Direction and guidelines-reg
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    नि:शक्त व्यंक्तियों को प्रदान की जाने वाली सुविधाएं – तत्संबंधी।
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    भा.नि.आ./प्रे.नो./16/2019 दिनांक 08.02.2019 प्रेस नोट विषय : भारत निर्वाचन आयोग द्वारा आगामी साधारण निर्वाचन 2019 के लिए मतदाता सत्‍यापन सूचना कार्यक्रम (वीवीआईपी) का शुभारंभ भारत निर्वाचन आयोग ने आगामी साधारण निर्वाचन 2019 के लिए नागरिकों हेतु उनके नामों, नए रजिस्ट्रीकरणों, मतदाता विवरणों में परिवर्तनों और मतदाता पहचान पत्रों में शुद्धि के लिए मतदाता सत्‍यापन एवं सूचना कार्यक्रम (वीवीआईपी) का शुभारंभ किया है। भारत निर्वाचन आयोग ने इस वीवीआईपी कार्यक्रम के लिए अनेक चैनलों से मदद ली है। भारत निर्वाचन आयोग ने समस्त भारत में सभी जिलों में सम्पर्क केन्द्र भी स्थापित किए हैं। वोटर हेल्पलाइन नम्बर 1950 है। कॉल करने वालों की सहायता करने के लिए सम्पर्क केन्द्रों में नवीनतम सूचना एवं टेलीकॉम अवसंरचना उपलब्ध करवाई गई है । साधारण निर्वाचन 2019 के संचालन के लिए वीवीआईपी कार्यक्रम का शुभारंभ सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के प्रयोग से संबंधित 2 दिवसीय गहन प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला के दौरान किया गया था । प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला में सभी राज्यों एवं संघ शासित क्षेत्रों के मुख्य अपर निर्वाचन अधिकारियों, आईटी प्रभारियों, नोडल अधिकारियों, राज्य स्तरीय मास्टर प्रशिक्षकों एवं तकनीकी रिसोर्स व्यक्तियों ने भाग लिया । इस अवसर पर बोलते हुए, निर्वाचन आयुक्‍त, श्री अशोक लवासा ने कहा कि प्रौद्योगिकी की ताकत यह है कि इसे सभी लोगों के इस्‍तेमाल करने के लिए आसान बनाया जा सकता है। उन्होंने कार्यशाला में भाग ले रहे व्‍यक्तियों को इन विषयों को आत्मसात करने और आगे इन्‍हें सभी को व्यापक रूप से समझाने के लिए प्रोत्साहित किया । श्री लवासा ने प्रतिभागियों को स्मरण दिलाया कि भारत निर्वाचन आयोग के प्रयासों का केन्द्रीय थीम निर्वाचनों को अधिकाधिक समावेशी बनाना है। इन एप्‍लीकेशनों के प्रयोग से, उचित प्रतिक्रियाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए क्योंकि नागरिक अच्छी गुणवत्ता वाली सेवाओं की मांग करते हैं । मुख्य निर्वाचन आयुक्त, श्री सुनील अरोड़ा ने कहा कि प्रौद्योगिकी वास्तव में एक प्रमुख स्थिति परिवर्तक है । प्रशिक्षण कार्यशालाओं में मुख्य उद्देश्य सुनना, सीखना, आत्मसात करना और उसका उपयोग करना होना चाहिए । उन्होंने संकेत दिया कि अब निर्वाचनों में कुछ ही समय बचा है और जो कुछ भी सीखा हुआ है उसे पूरी तरह समेकित करके मतदाता को सुविधाएं प्रदान करने में उसका उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए । सभी राज्यों एवं संघ शासित क्षेत्रों को जिन एप्लीकेशन के लिए प्रशिक्षण दिया गया था उनमें से एक महत्वपूर्ण एप्लीकेशन सी विजिल था । सी विजिल एप आदर्श आचार संहिता / व्यय उल्लंघन का समय अंकित करते हुए, साक्ष्य आधारित सबूत उपलब्ध करवाता है जिसमें अपने आप अवस्थिति सम्‍बन्‍धी आंकड़ों के साथ-साथ सजीव फोटो / वीडियो आ जाते हैं । कोई भी नागरिक मोबाइल एप के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकता है । उसके बाद उड़न दस्ते मामले की छानबीन करते हैं और रिटर्निंग अधिकारी निर्णय लेता है । निर्धारित समय सीमा के भीतर सी विजिल की वस्‍तुस्थिति को सी विजिल शिकायतकर्ता के साथ साझा किया जा सकता है । इस अवसर पर सी विजिल प्रयोक्ता मैनुअल एवं ईवीएम प्रबंधन प्रणाली प्रयोक्ता मैनुअल भी जारी किए गए । आज 'वोटर हेल्पलाइन' नामक एक नया एंड्राएड आधारित मोबाइल एप भी शुरू किया गया । यह एप सभी नागरिकों को निर्वाचक नामावली में अपने नामों को ढूंढने, ऑनलाइन फार्म भेजने, एप्लीकेशन की स्थिति की जांच करने, शिकायत दर्ज करने और अपने मोबाइल एप पर उत्तर प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करता है । इस मोबाइल एप के माध्यम से सभी फार्म, परिणाम, अभ्यर्थी शपथ पत्र, प्रेस नोट, मतदाता जागरूकता और महत्वपूर्ण अनुदेश उपलब्ध हैं । दिव्यांग व्यक्तियों को नए रजिस्ट्रीकरण, पते में परिवर्तन, विवरणों में परिवर्तन और मोबाइल एप्लीकेशन के प्रयोग से स्वयं को दिव्यांग व्यक्ति के रूप में चिन्हित करने के लिए आवेदन करने में सहायता करने हेतु एक 'दिव्यांग एप' भी शुरू किया गया था । दिव्यांग व्यक्तियों के केवल सम्पर्क विवरणों को प्रविष्ट करते ही, बूथ स्‍तरीय अधिकारी के पास उनकी दहलीज तक सुविधाएं पहुंचाने के लिए संदेश पहुंच जाता है। दिव्यांग व्यक्ति मतदान के दौरान व्हीलचेयर की भी मांग कर सकते हैं । भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नवीनतम प्रौद्योगिकी के प्रयोग से मौजूदा निर्वाचन प्रणाली का संवर्धन होने के अलावा नूतन निर्वाचन कार्यकलापों का भी प्रचार हुआ है । निर्वाचनों के प्रभावी संचालन के लिए, भारत निर्वाचन आयोग को निर्वाचनों की दिन-प्रतिदिन की प्रक्रियाओं में सुव्यवस्थित प्रौद्योगिकी के प्रयोग को समेकित करने का एक मार्ग प्राप्त हो गया है ।
  8. Download the PwD Mobile app from Android Play store. Specially meant for PwDs to request for voter facilitation.
  9. Use PwD app to request for registration and wheelchairs during polling
  10. 49 downloads

    Appointment of coordinators for inclusion of Persons with Disabilities (PwDs) in electoral process at State District and AC levels-Reg.
  11. 7 downloads

    Checking of baggage of President, BSP on 27.04.2013 at PWD Helipad, Gulbarga

ईसीआई मुख्य वेबसाइट


eci-logo.pngभारत निर्वाचन आयोग एक स्‍वायत्‍त संवैधानिक प्राधिकरण है जो भारत में निर्वाचन प्रक्रियाओं के संचालन के लिए उत्‍तरदायी है। यह निकाय भारत में लोक सभा, राज्‍य सभा, राज्‍य विधान सभाओं और देश में राष्‍ट्रपति एवं उप-राष्‍ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों का संचालन करता है। निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्‍छेद 324 और बाद में अधिनियमित लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम के प्राधिकार के तहत कार्य करता है। 

मतदाता हेल्पलाइन ऍप

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आप अपने आवेदन प्ररूप और अपनी शिकायत की वस्‍तु स्थिति के बारे में पता कर सकते हैं। डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें। आवेदन के अंदर दिए गए लिंक से अपना फीडबैक देना न भूलें। 

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